सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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sadguruji


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के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाब नबी आजाद ने राज्यसभा में नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी के फैसले की वजह से 40 लोग मारे गए हैं. सरकार की गलत नीति से जितने लोग मर गए हैं, उससे आधे तो पाकिस्तानी आतंकियों ने उरी हमले में नहीं मारे थे. गुलाब नबी आजाद जैसे पुराने कांग्रेसी नेता कितना विचित्र और बेतुका बयान देते हैं. उरी हमले से लाइन में खड़े लोंगो की तुलना करना शहीद सैनिकों का अपमान है. क्या लाइन में खड़े सभी लोंगों को दिक्कत हो रही है, नहीं, बल्कि लाइन में खड़े कुछ अति वृद्ध लोग जो शरीर छोड़े हैं, उसकी मूल वजह उनके विभिन्न तरह रोग थे. ये बात जरूर है कि उनके लिए रूपये देने की एक अलग से व्यवस्था करनी चाहिए थी.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट की सराहना के लिए धन्यवाद ! इसमें कोई संदेह नहीं कि बहुत से नेताओं के पास अथाह कालाधन कालाधन रहा होगा ! अचानक हुई नोटबंदी के कारण वो उसे खपा नहीं पाये, असली दुःख शायद उनका यही है ! इसी से आगबबूला हो वो इस समय जो दिशाहीन और विचित्र राजनीति कर रहे हैं ! सब विपक्षी नेता कह रहे हाइंज कि कालेधन का वो सपोर्ट नहीं करते हैं, लेकिन नोटबंदी का विरोध करते हैं ! वो मोदी सरकार पर दबाब बना कुछ दिनों तक पुराने नोट चलवाने की मोहलत चाह रहे हैं ! सरकार की को किसी भी हालत में नोटबंदी का फैसला वापस नहीं लेना चाहिए, नहीं तो आम जनता का विश्वास उसपर से उठ जाएगा ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय विष्ट जी ! सादर अभिनन्दन ! बधाई देने के लिए धन्यवाद ! बेटी की गुल्लक टूटते समय मैं परेशान था कि अब वो रोयेगी, लेकिन वो रोइ नहीं, बस नया गुल्लक ला के देने का आग्रह की ! उसकी यही बात दिल को छू गई और मुझे भावुक कर दी ! टीवी पर कार्टून चैनल सीएन देखना उसे बहुत पसंद है, किन्तु कुछ देर वो मेरे साथ बैठकर न्यूज भी देख सुन लेती है ! उसी का असर है कि नोटबन्दी से होने वाली दिक्कतों का एहसास उसे है ! बच्चे यदि समझ रहे है कि गुल्लक से बड़ा देश है तो बड़ों को भी देशहित में ये समझना चाहिए कि छुपाकर रखे गए कालेधन का मोह छोड़ें और नोटबंदी के कारण हो रही दिक्कतों का सामना देशप्रेम की भावना से करें ! प्रतिक्रिया और बधाई देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

पीएम मोदी के भाषण से बौखलाए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने उन पर पलटवार करते हुए प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर कहा, "प्रधानमंत्री जापान से आए और उन्‍होंने नोटबंदी के कारण लोगों को हो रही दिक्‍कत के मद्देनजर 50 दिन तक सहयोग करने की मांग की तो क्‍या आम आदमी अगले 50 दिनों तक और कष्‍ट उठाता रहेगा? क्‍या लोगों को अगले 50 और दिनों तक लाइन में खड़े होकर गुजारने होंगे? जनता 50 दिन तो क्‍या 50 घंटे तक इंतजार करने के मूड में नहीं है. पूरे देश में इमर्जेंसी जैसे हालात हैं. लोग भूखों मर रहे हैं." उन्‍होंने कहा, "मोदी जी अहंकार छोड़िए और नोटबंदी के फैसले को वापस ले लीजिये. नोटबंदी का फैसला वापस लेने के अलावा और कोई दूसरा उपाय नहीं है. सरकार चाहे तो इंतजाम पुख्ता कर इस नियम को फिर से लागू कर सकती है." आम जनता अभी भी प्रधानमन्त्री जी का साथ दे रही है, अत: केजरीवाल जी की बातें लोंगो को भड़काने के लिये ही कही जा रही हैं. विपक्षी नेता नोट बंदी के मुद्दे पर जनता को भड़कायेंगे, यह बात सरकार को पता होनी चाहिये थी, इसलिये देश मे नक़दी की कमी न हो, इसकी समुचित व्यवस्था करनी चाहिये थी. सरकार को बैंक और एटीम से रुपये बदलवाने, जमा करने और एटीम से नकद लेने की व्यवस्था तुरन्त सही करनी चाहिये और शादी-विवाह वाले मामलों मे कुछ छूट जरूर देनी चाहिये. देश की अधिकतर जनता प्रधानमन्त्री मोदी के साथ है. जनता केवल थोड़ी और राहत व छूट चाह रही है, जो उसे मिलना चाहिये.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

गोवा में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के शिलान्यास के बाद नोटबंदी के फैसले पर अपनी बात रखते हुए प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की आंखों से आंसू बहने लगे और उन्होंने जनता से भावुक अपील करते हुए कहा, "किसी को तकलीफें होती है तो मुझे भी होती है. मैंने बुराइयों को निकट से देखा है. देश के लिए मैंने अपना घर परिवार छोड़ा है, अपना सब कुछ देश के नाम कर दिया है. मैं जानता हूं मैंने कैसी कैसी ताकतों से लड़ाई मोल ले ली है. जानता हूं कैसे लोग मेरे खिलाफ हो जाएंगे. मुझे ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे, मुझे बर्बाद कर देंगे. लेकिन मैं हार नहीं मानूंगा. आप सिर्फ 50 दिन मेरी मदद करें. मेरा साथ दें. मैंने देश से सिर्फ पचास दिन मांगे है, 30 दिसंबर तक का वक्त दीजिए. उसके बाद अगर मेरी कोई गलती निकल जाए, गलत इरादे निकल जाए, कोई कमी रह जाए तो जिस चौराहे पर खड़ा करेंगे खड़ा होकर, देश जो सजा देगा उसे भुगतने के लिए तैयार हूं."

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सिंह साहब ! ब्लॉग पर आपका और आपके विचारों का स्वागत है ! मेरे विचार से नोट बंदी का निर्णय बिल्कुल सही और ऐतिहासिक है ! कालाधन यदि राजनीतिक दलों, धार्मिक स्थलों और बहुत से लोंगो के पास है तो उसे भजाने के लिए आखिर में वो बैंक ही तो जाएंगे ! कालाधन कहीं भी हो, उजागर तो होगा ही ! टैक्स के रूप में सरकार को भारी आय भी होगी ! सीमापार से आ रहे फर्जी नोट और आतंक में कमी आएगी ! देश की साख बढ़ेगी ! रही बात कफ़न और शादी की तो दोनों ही जारी है ! कहीं कुछ रुका नहीं है ! मेरे पास इस माह होने वाली शादियों के कई निमन्त्रण पत्र हैं ! मैंने उनसे पूछ कि नोटबंदी से शादी में दिक्कत हो रही होगी ? उन्होंने कहा थोड़ी दिक्कत तो है, पर चेक सब लोग ले रहे हैं ! शादी के वास्ते जो रूपये घर में रखे थे, वो अपने खाते में जमा कर दिए ! देश की जनता इन दिनों जो थोड़े से लेकर बहुत तक कष्ट झेलकर राष्ट्रहित में जो तपस्या कर रही है, वो अनुपम और अद्वितीय है ! उन्हें कोटि कोटि नमन ! केवल जिसकी सुरक्षा पर लाखों रूपये खर्च होते हों और जिसके दैनिक खर्च का कोई हिसाब न हो वो राहुल गांधी चार हजार रूपये के लिए लाइन में खड़े होकर सेल्फी देते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, मीडिया को एक ब्रैकिंग न्यूज देते हैं और ये सब ड्रामा कर अपमान महल में चले जाते हैं ! कभी किसी लाश पर राजनीति तो कभी सरकार की किसी अच्छी घोषणा पर भी राजनीति ! जनता उनकी इन सब हरकतों से ऊब चुकी है, इसलिए उनकी गतिविधियों को गंभीरता से नहीं लेती है ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! आपने पुनः मोदी जी को सर्वगुण संपन्न साबित कर दिया. भारत के इतिहास में या काम से काम ७० साल के इतिहास में कम से कम एक ब्यक्ति तो सबसे अलग है! भगवान राम, कृष्ण, बुद्ध आदि को भी सब लोग उनके समय में कहाँ पहचान पाए थे. मोदी जी को भी लोग बाद में अवश्य भगवान मान लेंगे. उनकी बुद्धिमत्ता और चमत्कारिक निर्णय लेने की क्षमता को बधाई है. हाँ कुछ लोग अवश्य बेवजह टी वी चिल्ला रहे हैं या कहें शोर मैच रहे हैं. बैकों या ATM के सामने लाइन में खड़े रहने वाले भी सभी सामान्य जान मोदी जी के इस कदम की भूरी भूरी प्रशंशा कर रहे हैं. अब वे लोग क्या करें जिनके भाग्य में कष्ट लिखा है. बड़ी मुश्किल से बेटी की शादी ठीक हुई. पैसे निकाल कर घर में रक्खे थे. उन्हें ये पता होना चाहिए था की कभी भी यह पैसा काला हो सकता है. मरनेवाले भी मोदी विरोधी ही होंगे जो इन्ही दिनों मर रहे हैं. अच्छा हो रहा है की उनके लिए कफ़न भी नशीब नहीं हो रहा. कोई तो मदद करता उन्हें... पर मानवता आज मर चुकी है. ... अलबत्ता राहुल गाँधी के अलावा किसी छुटभैये नेता को भी बैंकों की लाइन में नहीं देखा गया. कितने संपन्न हैं ये लोग ! भाजपा के किसी नेता के पास काला धन तो है ही नहीं... ये सभी चुनाव रैलियां सफ़ेद धन से ही करते होंगे. मोदी जी की सभाओं में भीड़ भी ऐसे ही चली आती है... आप समझ रहे होंगे मेरी बात! अब बहुत सारे मंदिरों मस्जिदों का क्या होगा? जो भी होगा छह ही होगा. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

मीडिया में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुरुवार को अपने चार हजार रुपए बदलने दिल्ली के संसद मार्ग स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच पहुंचे. वो आम लोंगों कि दिक्कत समझने गए थे, किन्तु हँसते मुस्कुराते हुए सेल्फी देते रहे और मीडिया में छाने के लिए गंभीर होने की एक्टिंग भी करते रहे. वो बैंक वालों पर आरोप लगाने लगे कि मुझे देख लोंगो को अंदर बुला लिया गया. राहुल गांधी के इस कार्यक्रम पर भाजपा के प्रवक्ता अनिल बलूनी ने कहा, ‘राहुल गांधी कालेधन से परेशान हैं. आज तक गांधी परिवार का कोई सदस्य बैंक नहीं गया है. ये रॉयल परिवार से ताल्लुक रखने वाले राहुल गांधी को बैंक पहुंचने की क्या जरूरत है?'

के द्वारा: sadguruji sadguruji

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी देश में क्या कारन है की सारे आरोप हिन्दू गुरु और संतो पर लगाये जाते मौलवियों.पादरिओ पर नहीं और मीडिया केवल हिन्दुओ पर आक्रामक रहता.इसाई मिशन के पास बहुत पैसा है वे भारत में धर्मान्तर और दुसरी अवैध गतिविधिया करवाते थे.हमारे धर्म गुरु खास कर बापू आसारामजी उनकी गत्विधियो को पत्रिका प्रवचनों द्वारा लोगो को बताते थे जिससे नाराज़ हो कर उन्होंने सोनिया गाँधी से कह कर बापूजी को झूटे केस में फस्वाया मीडिया तो चर्च के पैसे के दम पर उनका ट्रायल करता रहा और जब मीडिया में उचल जाये अदालते भी प्रभीवित होती हमारे धर्मगुरु देश विदेशो में अपने धर्म के लिए कितना अच्छा कार्य करके मानवता की सेवा में लगे है उसके लिए आदर और धन्यवाद् के पात्र है कुछ गलत माचालिया हो सकती लेकिन उसके लिए सबको गलत नहीं हाहा जा सकता लेकिन लालू,मुलायम,माया कांग्रेस ने देश को लूटा उनका क्या हुआ.जैसे आपको चिंता हम भी चितित है लेकिन हम उनके बारे में पढ़ते इसलिए कुछ मालुम है. आपके विचारो के लिए धन्यवाद्.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

J.L. SINGH (ईमेल पर प्राप्त एक प्रतिक्रिया) आज भारतवर्ष में ऊपर से लेकर नीचे तक सब झूठ, फरेब और भ्रस्टाचार के दल-दल में आकंठ डूबे हुए हैं, तभी तो देश की नैतिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से दिन-प्रतिदिन दुर्दशा बढ़ती ही जा रही है. देश तभी सुधरेगा, जब देश का हर व्यक्ति स्वयम को शिक्षा देकर अपने को सुधारेगा. आज जरुरत इस बात की है कि देश का हर व्यक्ति स्वयम का गुरु बने और स्वयम को ही सबसे पहले शिक्षित करे. शुबह शुबह आपका ज्ञान भरा आलेख पढ़ा तो मन तृप्त हो गया. आज ऐसे ही साक्षत स्वयम सिद्ध भगवन सूर्य का प्रथम अर्घ्य का दिन सूर्य षष्टी व्रत है. आज हम साक्षात् देव् शक्ति द्योतक सूर्य भगवन की आरधना करते हैं. उनके साथ, पृथ्वी, जल, आकाश और अग्नि और पवन की या कहें की प्रकृति की पूजा करते हैं. प्रकृति ही हमारी सृष्टी करती है, वही सब कुछ सिखाती है वही जीवन यापन का सारा सामान मुहैया कराती है. हम सब प्रकृति के उपासक बनें. आत्मज्ञान प्राप्त करें. और "परहित सरिस धर्म नहीं भाई" की अवधारणा में बिश्वास रक्खें यही सर्वोत्तम होगा. सभी जाने मने संत अंत में स्वार्थी ही सिद्ध होते हैं. अपवाद स्वरुप भी हैं. जिनकी अवश्य पूजा और सम्मान सर्वदा होता रहता है. सादर! पोस्ट पर फिर से प्रतिक्रिया नहीं जा रही इसलिए आपको मेल कर रहा हूँ.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

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जय श्री राम आदरणीय सद्गुरु जी जिस देश के नेता कुर्सी के लिए देश तक बेच दे उस देश में कोइ क्रांतिकारी कदम उठाना कितना खतरनाक है आप समझते है ! इस मुद्दे में भी सेक्युलर नेता इस प्रथा पर निर्णय लेने का अधिकार मुस्लिम सानुदाय पर छोड़ना चाहते और मोदीजी की आलोचना सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा देने के लिए कर रहे. मुस्लिम नेता मान मर्यादा छोड़ हिन्दुओ और धर्म को गली दे रही प्रधानमंत्री को भी नहीं छोड़ रहे. ये धर्म का नहीं खुद का बनाया है और अपनी अहमीयत के लिए सुधार नहीं चाहते.! चूंकि मामला अदालत में है उसी लो निर्णय दे. राज्य सभा में बहुमत नहीं इसलिए संविधान संसोधन नहीं हो सकता. सुन्दर विवेचना के लिए आभार और बधाई. !

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय सद्गुरु जी सादर अभिवादन Iआपकी सारी बातें सही हैं लेकिन सवाल है कि मनसे ने पाकिस्तानी कलाकारों वाली फिल्मों का विरोध करने से पहले सरकार को पाकिस्तानी कलाकारों व खिलाडियों को वीजा देने की पालिसी का विरोध क्यों नहीं किया Iक्या आपको करण जोहर आदि को राष्ट्रवाद के नाम पर ब्लैकमेल करने की गंध नहीं लगती I जो तोड़ फोड़ की धमकी देकर फिल्म रिलीज़ रोकने की बात करते हैं वह धन वसूली करने के बाद शांत हो सकते हैं I रही आर्मी  वेलफेयर में पांच करोड़ रुपये दिलाने की बात तो उसे प्रेम पूर्वक मोटीवेट करके लिया होता तो कितना सुन्दर होता I आपके विचारों से पूरी तौर से सहमत लेकिन केवल कहना चाहूँगा  कि देवेन्द्र फड़नवीस की मध्यस्थता में हुए समझौते से मनसे भले जीत का जश्न मना ले लेकिन फिल्म के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर केवल अपने ऊपर आई आपदा को टाल देने का ही संतोष कर रहे होंगे I क्योंकि उनको भविष्य में भी अपना व्यवसाय करना है I सादर अतुल

के द्वारा: atul61 atul61

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मैं लेख में वर्णित आपके विचारों से अधिकांशतः सहमत हूँ आदरणीय सद्गुरु जी । किसी भी फ़िल्म को देखने या न देखने का निर्णय जनता पर ही छोड़ना चाहिए । कुछ पाकिस्तानी कलाकारों के काम करने को आधार बनाकर भारतीय कार्मिकों एवं उद्यमियों के प्रयासों एवं निवेश को क्षति पहुँचाना अनुचित है । शिवसेना एवं मनसे दोनों ने सदा नकारात्मक गतिविधियों को ही प्रोत्साहित किया है, सकारात्मक गतिविधियों को नहीं । उनकी ऊर्जा सदा ध्वंस में ही लगी है, निर्माण में नहीं l हमें वास्तविक देशभक्ति की आवश्यकता है, छद्म देशभक्ति की नहीं । जहाँ तक पाकिस्तानी कलाकारों के भारत पर हुए आतंकी आक्रमणों की निंदा न करने का प्रश्न है, उनकी इस विवशता को समझा जाना चाहिए कि अंततः उन्हें पाकिस्तान ही वापस जाना है जहाँ भारत-विरोधियों का राज चलता है । ऐसे में यदि वे यहाँ हमारी पसंद का कोई संवेदनशील वक्तव्य दे देंगे तो अपने घर लौटने के उपरांत उनका पाकिस्तान में जीना कठिन हो जाएगा और तब उन्हें अपने लिए यह गीत गाना पड़ेगा : 'ऐ दिल, है मुश्किल जीना यहाँ . . .।'

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

प्रधानमन्त्री मोदी सारी दुनिया को शायद यह संदेश देना चाहते हैं कि अब भारत ने भी अपनी सुरक्षा हेतु इसराइल वाली आक्रामक नीतियाँ अपना ली हैं ! अब भारत पहले की तरह दब्बू और सहनशील देश नही है ! बीजेपी और आरएसएस दोनो ही बहुत पहले से ही इसराइल की न सिर्फ तारीफ करते रहे हैं, बल्कि इसराइल से अच्छे संबंध बनाने की वकालत भी करते रहे हैं ! पिछले दस-पंद्रह साल से इसराइल से जारी लुके-छिपे राजनीतिक सम्बन्धों को जगजाहिर करते हुए भारत अब खुलकर उसके साथ दोस्ती का हाथ बढाना चाहता है ! हमारी विदेश नीति में ये एक बहुत अच्छा और बहुत बड़ा बदलाव है, जिसके लिये मोदी सरकार की जितनी भी तारीफ की जाये, वो कम है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

पाक प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए पाकिस्तान पूरी तरह प्रतिबद्ध है ! भारत ब्रिक्स और बिम्सटेक के सदस्यों को गुमराह कर रहा है ! उन्होने कहा कि पाकिस्तान ब्रिक्स और बिम्सटेक सदस्यों के आतंकवाद को खत्म करने के आह्वान का समर्थन करता है ! उन्होने कहा कि कश्मीर में आजादी के लिए आंदोलन कर रहे लोगों को आतंकवादियों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता ! आतंकवाद को लेकर यही पाकिस्तान की दोमुँही और धोखा देने वाली नीति है ! वो अपने यहाँ डेरा जमाये लाखों आतंकियों को कश्मीर की आजादी के लडाके और हिन्दुस्तानी गोली खा के मरने वाले उन आतंकियों को शहीद कहता है ! हिन्दुस्तानी हुक्मरानों ने मानवता के नाते और इलाकाई शान्ति स्थापित करने के मकसद से जब भी पाकिस्तान से अच्छे सम्बन्ध बनाने की कोशिश की, उसने धोखा दिया ! अब ये तय हो चुका है कि पाकिस्तान बातों से कभी सुधरने वाला नही है ! उसे तो सर्जिकल स्ट्राइक और भारी तबाही वाले युद्ध की भाषा ही समझ मे आती है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, भूटान, श्रीलंका, नेपाल और भारत को मिला कर बने 'बिम्सटेक' संगठन की तरफ से जारी घोषणा पत्र में पाकिस्तान और उसके आतंक प्रेम पर करारा प्रहार करते हुए कहा गया है, 'इस पूरे क्षेत्र की शांति व स्थिरता को आतंकवाद की वजह से ही सबसे बड़ा खतरा पैदा हुआ है ! हम हाल के दिनों में इस क्षेत्र में हुई खौफनाक आतंकी घटनाओं की जोरदार शब्दों में निंदा करते हैं ! हम समझते हैं कि सिर्फ आतंकियों और उनके संगठनों के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं होनी चाहिए बल्कि इन्हें बढ़ावा देने वाले, पनाह देने वाले और इन्हें वित्तीय मदद देने वाले और इनकी गतिविधियों का गुणगान करने वाले देशों के खिलाफ भी कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिये !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! गहराई से लिखे गये अच्छे लेख के लिये सादर अभिनन्दन और हार्दिक बधाई ! चीन पाकिस्तान का साथ नही छोड़ेगा, क्योंकि उसे अपना हित साधना है ! गलत होने पर भी वो पाकिस्तान को सही ठहरा उसका पक्ष लेता रहेगा ! रूस भी पाकिस्तान को अपने हथियार बेचने के चक्कर मे है, इसलिये उससे दोस्ती की पींगे बढ़ा रहा है ! अमेरिका भारत को खुश करने के लिये पाकिस्तान को उपदेश भर देता रहेगा, लेकिन पाकिस्तान को कभी भी आतंकी देश घोषित नही करेगा ! सारी बातों का सार यही है कि भारत को आतंक के खिलाफ अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी ! पाकिस्तान को हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करो ! आतंकियों और उनके आकाओं पर करारा अटैक करो, बस यही भारत की आत्मरक्षा वाली अब एकमात्र सही कूटनीति होनी चाहिये ! जयहिंद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी आपका ब्रिक्स मेरा लेख लगभग पहले आपका फिर मेरा ब्लॉग में पब्लिश हुआ लेकिन कई नई बातें पढने को मिली आप बहुत मेहनत से लेख लिखते है 'पाकिस्तान के इन दिनों जो बद से बदतर हालात हैं, उसमें कॉरीडोर बनाने में चीन को आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर की मदद लेने की जरुरत पड़ सकती है. यही वजह है कि आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर यूएन में प्रतिबंध लगवाने की भारत की दुबारा की गई कोशिश का चीन ने अपनी वीटो पॉवर का दुरूपयोग करते हुए फिर से विरोध किया है' .चीन की राजनीति से हम अच्छी तरह परिचित हैं क्या चीनी वस्तुओं का बहिष्कार नहीं होना चाहिए उत्तम जानकारी पूर्ण लेख

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरु जी वैसे इन ओपीनियन पोलो ने बहुतो की नीद उदा दी मायावती ने कह दिया की इन पोलो पर ध्यान न दे ये बीजेपी ने भ्रम के लिए कराया यदि ऐसा है तो मायावती कैसे सबसे प्रथम मुख्यमंत्री मानी गयी व८इसे अभी बहुत जल्द है क्योंकि एक घटना सब कुछ बदल देती है वैसे जिस तरह से मुस्लिम दलितों के वोटो का ध्रुवीकरण हो रहा प्रदेश के लिए शुभ नहीं वैसे कांग्रेस सबसे ज्यादा दुखी होगी.इतने छोटी संख्या से नतीजा पर विश्वास करना गलत होगा केवल कुछ दिश जरूर देता की ऊँट किस दिशा में करबट बदलेगा.मायावती सबसे ख़राब मुख्यमंत्री होगी त्रिशुं सभा प्रदेश को पीछे ढकेल देगी .सुन्दर विश्लेषण के लिए धन्यवाद.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के 'खून की दलाली' वाले बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा, "सरहद पर हमारे जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर बड़ी मेहनत से सर्जिकल स्ट्राइक की है और आतंकी ठिकानों को नेस्तानबूत किया ! इसके लिए हम सेना को पहले भी बधाई दे चुके हैं और फिर से बधाई देते हैं ! राहुल गांधी जी ने जो शब्दों का इस्तेमाल किया है वो सही नहीं है ! सेना की शहादत को खून की दलाली कहा है वो गलत है ! ये समय ऐसा है जब सरहद पर तनाव है ! हम सब को अपने राजनैतिक मतभेद भुलाकर और पीएम सुरक्षा के लिए जो भी कदम उठा रहे हैं, उसके लिए सारी पार्टियों को उनका साथ देना चाहिये ! किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिये !" अरविन्द केजरीवाल एक चतुर राजनीतिज्ञ हैं ! वो जानते हैं की इस समय पूरा देश प्रधानमन्त्री मोदी के साथ ख्डा है, इसलिये कुछ गलत बोला तो बड़ी छिछालेदर होगी और जनता के बीच छवि भी खराब होगी ! राहुल गाँधी के पास ऐसी सोच और समझ का अभाव है ! यही उनकी असफलता का कारण भी है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी जिस तरह देश के कुछ नेता और फ़िल्मी कलाकार सेना के सर्जिकल स्ट्राइक के खिलाफ प्रतिक्रिया दे रहे वे निंदनीय के साथ राष्ट्र विरोधी और सेना के प्रति अविश्वास पैदा करने वाला विश्व के कई राष्ट्रों ने मोदीजी और सेना की कार्यवाही की तारीफ़ की ऐसे में कांग्रेस के संजय निरुपम और चिदंबरम और केजरीवाल के व्यान शर्मशार करने वाले है ये सन गोपनीय कार्य होते जिसके प्रूफ की जरूरत नहीं लेकिन शयद हमारे देश में देश से ज्यादा तुच्छ राजनीती करना एक चलन हो गया.कांग्रेस ने व्यान से किनारा किया लेकिन यदि कांग्रेस में नैतिकता है तो ऐसे लोगो को पार्टी से निकाले.सुन्दर लेख के लिए बधाई.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

श्री सद्गुरु जी आपके लेख की हैडिंग सटीक है मेरी थीसिस भारत पाक रिश्तों पर है मैं ईरान में उसको किताब में कन्वर्ट करने के लिए पढ़ रही थी मेरा लड़का केवल सात वर्ष का था लेकिन पाकिस्तान परिवार हमारे घर आते थे उसने मुझसे पूछा मॉम आप क्या पढ़ रही हो मानने उसे कहा अपनी थीसिस पढ़ रही हूँ पूछा क्या है मैं बच्चों को नॉलेज के मामले मैं जो पूछते थे हर प्रश्न का उत्तर देती थी उसने मेरी पूरी बात सुनने के बाद कहा आपने अपना समय खराब किया हिंदुस्तान पाकिस्तान के रिश्ते कभी नहीं सुधरेंगे | और गन्दे होंगे मैं बहुत हैरान हुई परन्तु समझ मैं आ गया उसे बच्चा समझ कर हमारे मेहमान आपस में जो बातें की जाती हैं यह समय से पहले बड़ा हो कर निष्कर्ष निकालने लगा है राजेन्द्र जी पाकिस्तानियों और बंग्लादेशियों को हमसे शिकायतें ही शिकायतें थी उनके अनुसार सात पाकिस्तान बनने चाहिए थे | भारत में मुस्लिम पर जुल्म होता है पुलिस भी आपकी सेना भी आपकी उन्हें कैसे समझाएं यह तो हमारे यहां वोट बैंक हैं |भारत की तरक्की रो-रो कर चलेगी जब तक पाकिस्तान के टुकड़े नहीं होती लेकिन बड़ी शक्तियां यह होने नहीं देंगी हाँ चीन की मंडी बनेगा

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम सद्गुरुजी बहुत अच्छा लेख कई दिनों से प्रतिक्रिया नहीं जा रही थी इसलिए टेस्ट करने के लिए पहली प्रतिक्रिया भेजी थी. विश्वकर्माजी ने भगवान् की द्वारकापुरी और सुदामानाग्री बनवाई थी.इस दिन प्रतिष्ठानों में लोग मशीनों और यंत्रो की पूजा करते और राष्ट्र को निर्माण करने में अग्रसर मोदीजी की भी जन्मतिथि है. उम्मीद है राष्ट्र का मार्गदर्शन करते मोदीजी राष्ट्र को विश्वगुरु बनवाने की तरफ ले जाने में सफल होंगे. विश्वकर्मा जी तो भगवान् के आदेश से भवनों का निर्माण करते थे जबकि मोदीजी जनता के लिए देश को सम्पन्नता प्रदान करने में योगदान देंगे. बहुत सुन्दर जानकारी के लिए धन्यवाद.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

मैं भी भुक्तभोगी हूँ आदरणीय सद्गुरु जी और इसीलिए मैं इस लेख में वर्णित तथ्यों एवं भावनाओं से पूर्णतः सहमत हूँ । आपके और मेरे जैसे करोड़ों भारतवासी प्रतिदिन इसी प्रकार ठगे जा रहे हैं । कॉल ड्रॉप द्वारा जो ठगी हो रही है, वह तो अलग ही है जिसमें बीएसएनएल भी सम्मिलित है । जब तक बीएसएनएल और एमटीएनएल अपनी सेवाएं नहीं सुधारते, निजी कंपनियों के पास तो जनता को लूटने का पूरा-पूरा अवसर रहेगा ही । सरकार भी इस ओर ध्यान नहीं दे रही । उपभोक्ता संरक्षक संस्थाएं इस संदर्भ में न जाने कैसी चुप्पी साधे बैठी हैं जबकि उपभोक्ताओं को खुलकर लूटा जा रहा है । आपने अनगिनत भारतीय मोबाइल फ़ोन उपभोक्ताओं के कष्ट को स्वर दिया है । आभार ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

श्री आदरणीय सद्गुरु जी दिल्ली में भी कई मिशनरियां अपने काम में लगी हैं विदेशी किसी भारतीय नागरिक के नाम पर सिलाई कढाई जैसे केंद्र खोलते हैं गरीब महिलाओं को काम दिया जाता है फिर उन्हें समझा कर धर्म परिवर्तन कराते हैं उनके चित्र खिंच कर विदेशों में दिखाते हैं उनके हाथ की बस्तुओं को दिखा कर बेचते हैं उनके नाम पर मोटे चन्दे वसूलते हैं |देश की गरीबी को बेचना अपना घर भरना | जिन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया कुछ समय बाद उन्हें काम से निकाल देते हैं फिर नंगी भर्ती होती है यही नहीं दिल्ली से कमा कर आदिवासी क्षेत्रों में भी संस्थाएं खोलते हैं वहां के लिए भी गरीबी के नाम पर दान लिया जाता है कई प्रश्न उठाता लेख

के द्वारा: Shobha Shobha

"संकट में है आज वो धरती जिसमें तूने जन्म लिया, पूरा करले आज बचन वो गीता में जो तूने दिया", बहुत खूब सतगुरु जी, आप का सानिध्य पाकर आदिगुरु शंकराचार्य जी और श्रीकृष्ण भगवान् से साक्षात्कार कर लेते हैं ! आपने सही कहा की श्रीकृष्ण तो साक्षात प्रब्रह्म परमेश्वर थे, और जब श्रीशंकराचार्य जी का जन्म हुआ था सारा भारत अँधेरे में भटक रहा था, कोई मार्ग दर्शक गुरु नहीं था ! इन्होंने अपने अल्पकाल में कन्या कुमारी से काश्मीर की घाटी तक और गुजरात से पूरब में अरुणाचल तक पैदल यात्रा करके सोये हुए इंसानों को जगाया, सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करके आधुनिक हिन्दू धर्म को प्रकाशित किया ! इनके मंदिर जहां जम्मू में है तो भारत के चारों दिशाओं में भी है ! जम्मू और रामेश्वर जाकर शंकराचार्य मंदिर में जाकर माथा टेकने का अवसर मिला था ! सुन्दर शिक्षाप्रद लेख के लिए चरण वन्दना स्वीकार करें ! हरेन्द्र

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: achyutamkeshvam achyutamkeshvam

के द्वारा: Shobha Shobha

ख़बरों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बलूचिस्तान की आजादी के पक्ष में आवाज बुलंद किए जाने पर उसका जोरदार समर्थन करने के लिए पाकिस्तान ने शीर्ष तीन बलूच राष्ट्रवादी नेताओं के खिलाफ राष्ट्रद्रोह सहित पांच मामले दर्ज किए हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बलूचिस्तान एवं पीओके के लोगों पर पाकिस्तान द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों का मामला उठाने के लिए जहाँ एक तरफ बलूचिस्तान के लोगों ने उनका धन्यवाद किया है। वहीँ दूसरी तरफ पाकिस्तान ने कहा है कि मोदी ने बलूचिस्तान के बारे में बात करके ‘लक्ष्मण रेखा’ लांघी है। यही नहीं, बल्कि उसने यह बन्दर घुड़की भी दी है कि वह अगले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में कश्मीर का मुद्दा उठाएगा।

के द्वारा: sadguruji sadguruji

जय श्री राम सद्गुरु जी १५ अगस्त के बारे में अच्छा लेख लिखा कश्मीर का परिणाम नेहरूजी के दें है पिछले ७० सालो से विभिन्न सरकारों ने देश लो समस्या में दाल दिया लेकिन सबके लिए मोदीजी को दोष देना गलत.कश्मीर के मामले में राजनाथ जी खुले शब्दों में नीति बता दी इस देश को बर्बाद करने में सेक्युलर ब्रिगेड और बुद्दिजीवियो का हाथ है जो या विदेशी शक्तिओ के हाथ खेल रहे या फिर कांग्रेस के हाथ.इस सरकार को अस्थिर करने के लिए चर्च सक्रिय है जो दलितों मुस्लिमो के नाम पर ओउरे देश में अलगाववाद पैदा कर रहा.ये साजिस उसी का नतीज है जिसमे सेक्युलर ब्रिगेड बुद्दिजीवी शामिल है दलितों के साथ ऐसी घटनाएं पुरे देश में हो रही परन्तु गुण की घटना को बड़ा चला कर दिखया गया बीजेपी को बदनाम करने के लिए मुसलमान दामादो की तरह रह रहे उनपर पता नहीं आपको कहा दिख गया जन कर्णाटक में प्रशांत पुजारी या दिल्ली में डॉ नारंग या केरल में हिन्दू मारे जाते सेक्युलर ब्रिगेड को साप सूंघ जाता आज एक फैशन बन गयी की प्रधान मंत्री देर से बोले जो प्रदेश का मामला उसपर भी क्यों बोले १० साल मनमोहन नहीं बोले कोइ नहीं बोला ये बीजेपी/मोदीजी का विरोध है और कोइ समस्या नहीं.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

हिन्दी साहित्य गगन के सूर्य प्रेमचंद जी की कालजयी रचना 'नमक का दारोगा' मैंने भी अपने विद्यार्थी-जीवन में पढ़ी थी । आपने न केवल उसकी स्मृति को मन में पुनर्जीवित कर दिया है आदरणीय सद्गुरु जी वरन विभिन्न पक्षों को स्पर्श करती हुई उसकी जो व्याख्या की है, वह नेत्र खोल देने वाली है एवं विचार के लिए कई नए आयाम प्रस्तुत करती है । मैं इस अमर रचना की समीक्षा एवं विश्लेषण रूपी आपके इस आलेख के एक-एक अक्षर से सहमत हूँ । आलेख के अंतिम परिच्छेद में आपने जो निर्वचन किया है, वह केवल सत्य है एवं सत्य के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं है । एक सत्यनिष्ठ भारतीय की यही विडम्बना है जो आज भी वैसी ही है जैसी एक शताब्दी पूर्व थी ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम सद्गुरुजी यदि दयानन्दजी गलत है तो मायावातो भी गलत है जो अपने नेताओ और कार्यकर्ताओं को उकसा कर जिस भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया उसकी निंदा होंनी चाइये.दयानंद जी पर पार्टी ने तुरत कार्यवाही की लेकिन BSP नेताओं पर क्या कोइ कार्यवाही होगी उम्मीद कम है,देश में आराजकता की राज्न्न्ती हो रही जिसमे मुस्लिम और दलित फायेदे में रहते कमलेश तेवारी जेल में आज़म खान का कुछ नहीं हुआ मुसलमानी ने बंगाल और बिहार में जिस हिंसा का प्रदर्शन किया और कोइ कार्यवाही नहीं दलितों की गलत व्यान समझा कर जिस तरह बिहार में लालू जीता मायावती का जीतना मुस्किल वैसे देश में जाती धर्म ही एक मुद्दा है.आप हिन्दू नेताओं के व्यान पर उंगली उठाते लेकिन दुसरे लोगो की अभद्र भाषा पर चुपसुन्दर लेख

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

महिलाओं के सम्मान को धर्म, जाति, वर्ग, प्रदेश और संस्कृति से ऊपर उठकर बिना किसी भेदभाव के संरक्षित किया जाना चाहिए । सभी महिलाएं सम्माननीय हैं चाहे वे किसी भी धर्म, जाति, वर्ग, प्रदेश और संस्कृति से संबंध रखती हों । केवल मायावती का सम्मान ही महत्वपूर्ण नहीं है, अन्य महिलाओं का सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है जिनमें दयाशंकर सिंह के परिवार की महिलाएं भी सम्मिलित हैं । मायावती को अपने और दलित महिलाओं के सम्मान की ही पड़ी है (वह भी केवल अपना वोट बैंक बचाए रखने के दृष्टिकोण से) जबकि वे एवं उनके दल के कार्यकर्ता अन्य किसी के सम्मान का कोई मूल्य नहीं समझते तथा समय-समय पर अमर्यादित एवं अशोभनीय वक्तव्य देते रहते हैं । मैं लेख में वर्णित आपके विचारों से सहमत हूँ आदरणीय सद्गुरु जी ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

वाह सद्गुरुजी, "कैसी खुशी लेके आया चाँद", और ईद के पर्व से जुडी यादें, विषय से दिल को अंदर तक झकझोर दिया ! किसी भी धर्म में किसी भी धर्म ग्रन्थ ने हैवानियत का पाठ नहीं सिखाया ! मैं स्वयं साइना में एक ऐसी बटालियन में १८ साल रहा जहां पूरी कंपनी ही मुस्लिम भाइयों की थी, मैंने उनके साथ ईद मनाई, स्वादिष्ट से स्वादिष्ट सवाई खाई, ईद पर उनकी दी हुई टोपी भी पहनी ! उन्होंने भी मेरे साथ होली दिवाली और दशहरे का त्यौहार मनाया ! कही बार तो हमें ये त्यौहार फील्ड एरिया में बिना शोर शराबे के मनाने पड़े ! हमारे पड़ोस में हमारा दुश्मन पाकिस्तान था ! बहुत मार्मिक प्रस्तुति के लिए साधुवाद ! हरेंद्र जागते रहो ,

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आदरणीय जितेन्द्र माथुर जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपने बहुत सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रया दी है ! आपकी बात से पुरमथ सहमत हूँ कि धार्मिक आधार पर की गई निर्दोष एवं असहाय प्राणियों की हत्या सबसे बड़ा अधर्म है ! ऐसी क्रूर परंपराओं का स्थान किसी भी धर्म में नहीं होना चाहिए ! आपकी यह बाट भी पूर्णतः सही है कि इस्लाम के चरमपंथी चाहे स्वयं शिक्षित हों, आधुनिकता से घृणा करते हैं तथा सम्पूर्ण विश्व को मध्ययुगीन इस्लामी साम्राज्य के रूप में परिवर्तित कर देने का लक्ष्य उनके मस्तिष्क में इस भांति स्थापित हो चुकी है कि वे उसके अतिरिक्त और कुछ देखना-सुनना-समझना चाहते ही नहीं ! वस्तुतः असली समस्या यही है ! ब्लॉग पर समय देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मैं इरफ़ान ख़ान के और आपके विचारों से भी पूर्णरूपेण सहमत हूँ आदरणीय सद्गुरु जी । मैंने स्वयं अपने शाकाहार संबन्धित लेख में इस विषय को उठाया है । निर्दोष प्राणियों की हत्या तो घोर पाप है, वह पुण्य कैसे हो सकता है ? जब हम किसी को जीवन दे नहीं सकते तो जीवन लेने वाले भी हम कौन होते हैं ? किसने यह अधिकार दिया है हमें ? अपने सभी मुस्लिम भाई-बहनों को ईद की शुभकामनाएं देते हुए मैं उनसे यही कहता हूँ कि केवल कठमुल्लों की प्रतिक्रिया के आधार पर इरफ़ान के विचारों को रद्द न करें वरन उन पर ध्यान दें और अपने हृदय में उस संवेदनशीलता को विकसित होने दें जो कि एक उत्तम मानव बनने की सर्वप्रथम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण आवश्यकता है । इसके अतिरिक्त मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि यह संदेश केवल इस्लाम ही नहीं सभी धर्मों के अनुयायियों के लिए है । धार्मिक आधार पर की गई निर्दोष एवं असहाय प्राणियों की हत्या सबसे बड़ा अधर्म है । ऐसी क्रूर परंपराओं का स्थान किसी भी धर्म में नहीं होना चाहिए । तसलीमा नसरीन ने सदैव ही इस्लाम के नाम पर आतंक फैलाने और अन्य धर्मावलम्बियों पर जघन्य अत्याचार करने वालों को अपनी लेखनी से नग्न किया है । इसीलिए वे अपने देश से निर्वासित हैं और भारत जैसे देश में भी उनके लिए स्थान नहीं है क्योंकि हमारा शासन-प्रशासन भी सदैव मानवता और तार्किकता दोनों को ही ताक पर रखकर धार्मिक अतिवादियों के समक्ष नतमस्तक होता रहा है । आज ही मैंने 'बीजू जनता दल' के एक सांसद के इसी संदर्भ में अत्यंत सुलझे हुए विचार 'द टाइम्स ऑव इंडिया' में पढ़े । मूल समस्या यह है कि इस्लाम के चरमपंथी चाहे स्वयं शिक्षित हों, आधुनिकता से घृणा करते हैं तथा सम्पूर्ण विश्व को मध्ययुगीन इस्लामी साम्राज्य के रूप में परिवर्तित कर देने का लक्ष्य उनके मस्तिष्क में इस भांति स्थापित हो चुकी है कि वे उसके अतिरिक्त और कुछ देखना-सुनना-समझना चाहते ही नहीं । इस समस्या का समाधान एक ही है कि इस्लाम में विवेकशील लोगों की संख्या बढ़े और वे निर्भय होकर अपने समाज को सही दिशा दें । अन्य धर्मावलंबियों का दायित्व है कि ऐसे लोगों को अपना सम्पूर्ण समर्थन दें ताकि इस्लामी चरमपंथी अपने ही समाज में अलग-थलग पड़ सकें ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur