सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

482 Posts

5237 comments

sadguruji


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

Page 1 of 2712345»1020...Last »

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर सबजार भट के मारे जाने के बाद अशांति और प्रदर्शनों के मद्देनज़र कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए रविवार को घाटी के कई हिस्सों में प्रशासन ने कर्फ्यू वाली पाबंदियां लगा दी थी ! कश्मीर में रविवार को अलगाववादियों ने बंद का आह्वान किया था ! कर्फ्यू और अशांति वाले इस माहौल के बीच सेना में जूनियर कमीशन अधिकारी और अन्य पदों पर चयन के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा आयोजित हुई ! यह बहुत हैरानी वाली और बहुत अच्छी बात है कि अपने उज्ज्वल भविष्य की खातिर सेना में जाने के लिए करीब 800 कश्मीरी युवक बंद की प्रतिगामी अपीलों को पूरी तरह से खारिज करते हुए संयुक्त प्रवेश परीक्षा में बैठे !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर नई दिल्ली वापस आने के बाद भी कश्मीर के अलगाववादी गठबंधन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गुणगान गा रहे हैं. उनका कहना है कि कश्मीर में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का प्रभाव बहुत अधिक है, इसलिए वहां पर शान्ति बहाली के लिए हमें उससे बात करनी चाहिए ! भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत के दायरे में रहकर बातचीत करने का सुझाव दिए थे ! मणिशंकर अय्यर हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गुणगान गाते समय यह भूल गए कि बातचीत शुरू करने की उसकी पहली शर्त आजादी है ! उसकी यह मांग कोई भी केंद्र सरकार स्वीकार नहीं करेगी ! मोदी सरकार तो ऐसा सुनने को भी तैयार नहीं होगी !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी आपके लेखो को पढ़ कर बहुत जानकारी मिल जाती है.तीन तलक के मामले में मुस्लिम बोर्ड घिर गया क्योंकि सिद्ध नहीं कर प् रहा की ये कुरान में लिखा है.ये धर्म का या मुस्लिमो का नहीं मामले लेकिन मुस्लिम समाज में औरतो के ऊपर ना इंसाफी का मामला है सरकार ने कह दिया की यदि सर्वोच्च्न्ययालय इसपर कोइ फैसला नहीं देता तब भी वे कानून बनायेगे.लगता है अबकी बार अदालत इसपर जरूर निर्णय लेकर इसे अवैध घोषित कर देगी और सरकार से कानून बनाने को कहेगी.कपिल सिबल कितना नीचे गिर सकता ये साबित हो गया.मुस्लिम बोर्ड कपिल की अयोध्या के मामले की बात नहीं मानेगा.असल में तुष्टीकरण की नीति के कारन मुसलमानों का दिमाग ख़राब हो गया और उन्हें देश के कानून पर विश्वास नहीं रहा.देखिये क्या फैसला आता है लेकिन अब मुस्लिम औरतो को न्याय मिलेगा ऐसी देशवाशियो को उम्मीद है.सुन्दर लेख के लिए बधाई.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! लेख का समर्थन करने के लिये बहुत बहुत अभिनन्दन और आभार ! ऐसे अपराधी मानसिक रोगी के साथ साथ भयंकर गुप्त रोगों के शिकार भी होते हैं ! मासूम बच्चियाँ इनके हमले से अक्सर असहनीय और अमानवीय पीड़ा झेलते हुए मर जा रही हैं या फिर उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जा रही है ! अब ऐसे अपराधियों को कानून यदि सख्त और शीघ्र सजा नही देगा तो पीड़ित पक्ष के लोग ऐसे अपराधियों को सबक सिखाने के लिये खुद ही कानून हाथ मे लेने लगेंगे, जो बहुत अराजक और चिंतनीय स्थिति होगी ! शीघ्र न्याय हो और फांसी यदि सार्वजनिक रूप से हो तो लोग कानून से खौफ खाएँगे और ऐसे अपराध भी कम होंगे ! ब्लॉग पर समय देने के लिये सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय पंकज सिंह जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपकी इस बात से सहमत हूँ कि समाज में दिनोदिन अश्लीलता बढ़ रही है और बच्चे, युवा व बूढ़े सबके जेहन को प्रदूषित कर रही है, लेकिन यहाँ पर एक बात ध्यान देने वाली है कि सभ्य समाज में पढ़ेलिखे लोग भले ही अश्लील फोटो और वीडियों देखते हों, किन्तु मासूम बच्चों संग क्रूर बलात्कार जैसा जघन्य अपराध नहीं करते हैं ! ब्लॉग में जितने भी केसों की चर्चा की गई है, उन सबमे आरोपी नशेड़ी और कम पढ़ेलिखे हैं ! हो सकता है कि वो गुप्त रोगों के भी शिकार हों, क्योंकि कई बार ऐसे अपराधी इस अन्धविश्वास के कारण मासूम बच्चों से दुराचार करते हैं कि उनका गुप्त रोग चला जाएगा. हालांकि यह पूर्णतः असत्य है और मासूम पीड़ित बच्चों में गुप्त रोग बांटने वाला घृणित कार्य है ! जहाँ तक बलात्कारी प्रवृति वाले लोगों के कानून से नहीं डरने की बात है तो वो सौ फीसदी सच है ! समाज में कानून का खौफ पैदा करने के लिए सार्वजनिक रूप से फांसी या गोली मारने की सजा जरूर होनी चाहिए ! प्रतिक्रिया देने के लिए सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सूर्यभान जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! मासूम बच्चों का यौन-शोषण बढ़ने के पीछे निश्चित रूप से बढ़ती हुई अश्लीलता भी जिम्मेदार है ! लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि बच्चों के संग क्रूरतम दुराचार की जिन घटनाओं का जिक्र ब्लॉग में हुआ है, उसमे सारे आरोपी एक तो नशेड़ी हैं, दूसरे मजदूरी करने वाले या फिर ड्राईवरी का कार्य करने वाले हैं ! इस तरह के लोग भी अश्लील गाने सुनते हैं और अश्लील वीडियों देखते हैं, लेकिन उनके बलात्कारी बनने का मूल कारण नशा और स्त्री जाति के प्रति घृणित सोच है ! मासूम बच्चे विरोध नहीं कर पाते हैं, उनमे प्रतिरोध करने की उतनी शक्ति होती ही नहीं है, इसलिए वो आसानी से बलात्कारियों की हवश का शिकार बन जाते हैं ! इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एक तो सार्वजनिक रूप से बलात्कारियों को निर्मम दंड देने की न्याय व्यवस्था होनी चाहिए और दूसरी बात ये कि समाज में सतत जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए, खासकर मासूम छोटे बच्चों को ये शिक्षा देनी चाहिए कि वो लालच में आकर किसी भी अजनबी व्यक्ति से कोई चीज न लें और दूसरे बुरी नियत से कोई भी रिश्तेदार, स्कूल टीचर, ट्यूशन मास्टर, नौकर, बस ड्राईवर या फिर कोई भी अन्य व्यक्ति छुए तो माता पिता को तुरंत इसके बारे में बताएं ! बच्चों का यौन शोषण करने वाले पहले बच्चे को कई रोज तक थोड़ा बहुत छेड़कर देखते हैं कि वो कितना विरोध कर रहा है, फिर सुनियोजित प्लान बनाकर एक दिन हमला कर देते हैं ! ब्लॉग पर समय देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

Surya Bhan Bhan मासूम बच्चियाँ का यौन शोषण एवं दिनों-दिन बढ़ती बलात्कार की घटनाएँ समाज में आ रहे मानवीय मूल्यों के अवमूल्यन का दुष्परिणाम हैं । इसमें कुछ अंस तक पश्चिमी अंधानुकरण एवं मीडिया द्वारा अपने लाभ के लिए निरंतर परोसी जा र ही नग्नता को भी जाता है , जो विशेष कर युवाओं का ब्रेनवास करके अश्लीलता भरती जा रही है । इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए सख्त एवं त्वरित न्याय जहां आपेक्षित है वहीं सामाजिक स्तर पर भी बलात्कार के विरुद्व चेतना जाग्रत करने एवं नैतिक मूल्योंं के पुनर्स्थापन के लिए भी सार्थक प्रयास किया जाना आवश्य्क है । समसामयिक विषय पर एक विचारणीय पोस्ट के लिए बधाई स्वीकार करें ।

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! हार्दिक अभिनन्दन और बधाई देने के लिये धन्यवाद ! इस पोस्ट को मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत करना चाहता था ! अधिक से अधिक पाठक पढ़ें, तभी लेखन को भी सार्थकता मिलती है ! आप सही कह रहे हैं कि ये लोग ईवीएम का विरोध कर रहे हैं या फिर अपना टाईमपास या कहिये मनोरंजन ? इनकी फालतू बातों मे जनता की भी कोई रुचि नही है ! दरअसल ईवीएम मे खराबी की बहानेबाजी सिर्फ कपिल मिश्रा के बेहद गंभीर आरोपों से बचने की एक घटिया चाल भर है ! चुनाव आयोग तो खुद ही न्यौता दे रहा है ! इनके इंजीनियर साहब जा के वहा पर ईवीएम मे गड़बड़ी साबित करें या फिर आम आदमी पार्टी और उसके समर्थक दल हत जोड़कर पूरे देश से माँफी मांगे ! सटीक और सार्थक प्रतिक्रिया देने के लिये तथा ब्लॉग पर आने के लिये हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया लीला तिवानी जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! ब्लॉग लेखन के शेत्र मे आप सबसे बहुत कुछ सीखने को मिला है ! अब कुछ न कुछ नये ढंग से ब्लॉग प्रस्तुत करना जरूरी भी है, क्योंकि बड़ी तादात मे पाठक सोशल मीडिया की तरफ भाग रहे हैं ! संक्षिप्त और रोचक ब्लॉग अब ज्यादा पढ़े जाते हैं ! पोस्ट की सराहना के लिये धन्यवाद ! आने वाले समय मे निश्चित रूप से मोदी विरोधी अधिकतर दल एकजुट होकर 'महागठबंधन' बनाएँगे, लेकिन मोदी को चुनौती देने मे वे सफल नही होंगे, क्योंकि देश की 80 फीसदी से भी ज्यादा जनता पीएम मोदी के साथ खड़ी है ! कविता सटीक और सार्थक आपको लगी तथा आपने कीमती समय ब्लॉग पर दिया, इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! बहुत पहले ये लोग अक्सर गाते थे, 'इंसान का इंसान से हो भाईचारा, यही पैगाम हमारा..!' कवि प्रदीप जी ने समाज को इस गीत के माध्यम से भाईचारा और समानता का बहुत सुन्दर संदेश दिया है ! आम आदमी पार्टी भी शुरु मे इसी महान संदेश का गुणगान गाती थी और इस पर चलने का संकल्प लेती थी, लेकिन सत्ता के मद ने उसे पथभ्रष्ट कर दिया ! इस पार्टी का आज जो कुछ भी पतन हम होते देख रहे हैं, उन्ही सब चीजों का वर्णन इस कविता मे 'ना काहू से दोस्ती और ना काहू से वैर' वाले तटस्थ भाव से है ! कविता को शानदार महसूस कर जो सम्मान और सार्थकता आप ने उसे प्रदान की है, उसके लिये हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय नन्द जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! लेख को फिर से आप ध्यान से पढिये ! इसमे कहीं नही लिखा है कि एफएमसीजी का कारोबार करने भारत की कम्पनियाँ 50,000 करोड़ का एक्सपोर्ट करती हैं ! उसमे लिखा है कि भारत मे एफएमसीजी यानि रोजमर्रा के उपभोग की वस्तुओं का कारोबार पचास लाख करोड़ रुपये वार्षिक का है ! रही बात दवाइयाँ बेचने की तो आप बेचिये, मना कौन कर रहा है, लेकिन ये भी मानिये कि आप व्यवसाय कर रहे हैं ! रही बात पतंजलि के उत्पादों मे शिकाय्त की तो आप नेट पर 2015-16 मे आई शिकायतें सर्च कर लीजिये ! ये बताने का उद्देश्य भी केवल इतना ही है कि अपनी क्वालिटी और बेहतर कीजिये ! आपने लिखा है कि मोदी रामदेव के मोहताज नही हैं, आपकी बात सही है, लेकिन यह भी उतना ही सही है कि भाजपा और बाबा रामदेव दोनो ही एक दूसरे का भरपूर फायदा उठा रहे हैं ! मैने भाजपा कहा है, मोदी नही ! ब्लॉग पर आकर प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

Nand Jee जनाब, आप यह कहा से डाटा उठा लाये है की एफ.एम. सी. जी. का एक्सपोर्ट 50000 करोड़ का है? इस ग्रूप की सबसे बड़ी कंपनी हिन्दुस्तान यूनीलेवेर है इसके बाद नेसले है. दोनो ही एम. एन. सी. है और दोनो कम्पनिया अपना 90 प्रतिशत माल भारत मे ही बेचती है. और जो यहा से मोटा मुनाफा कमाती है उसको अपने हेड ऑफीस जो यूरोप मे है वहा भेजती है. यदि बाबा राम देव इन्ही कॉमनियो से प्रतिस्पर्धा कर , इनको पछाड़ कर इनका मोटा मुनाफा मे कमी लाने की कोशिस कर रहे है तो क्या ए गुनाह हो गया है , क्योकि वो एक सन्यासी है. आज कल जितने भी स्थापित सन्यासी है चाहे वो श्री श्री हो यन अन्य क्या आउर्वैदिक दवाइया नही बेचते है? यदि राम देव कानून के दायरे मे रह कर एम. एन. सी. से प्रस्पर्धा कर मुनाफा बिदेशो मे भेजने की जगह अपने ट्रस्ट मे रख कर अस्पताल, गौशाला, आरुवैदिक रेसेर्च सेंटर इत्यादि मे खर्च करते है तो इससे आप लोगो को तकलीफ क्यो हो रही है. रही बात क्वालिटी की तो ब्लॉग लिखने से पहले क्वालिटी के लिये एफ. एस. एस. आई. की निमावली पढिये. क्वालिटी कंप्लेन मे माल की गुणवत्ता से लेकर लेबेल , उसपर लिखे गये इंड़्गररिएेंट, शब्दो का फऔंड, बजन इत्यादि तीस से ज्यादा मानक है यदि किसी भी एक मानक मे फेल हुये तो वो मामला कोर्ट मे जाता है. एम. एम सी. जी की भारत ही छोड़िये विश्व की कोई भी कंपनी नही है जिसका प्रॉडक्ट फेल नही हुआ है. लेकिन भारत मे जहा बात रामदेव की आती है तो सभी को क्वालिटी की चिंता होने लगती है. भारत के यदि सभी होटलो का क्वालिटी चेकिंग हो तो 95 प्रतिशत इसमे फेल हो जायेंगे. ढाबो की तो बात ही छोड़ दीजिये. रही बात मोदी और रामदेव की तो बाबा रामदेव को बेशक मोदी की जरूरत हो, लेकिन मोदी किसी रामदेव के मोहताज नही है. मोदी अपने कामो से जनता मे लोकप्रिय है न की रामदेव की दोस्ती से.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! जो बात आपने कही है कि बाबा रामदेव अब कारोबारी बाबा बन गये हैं, वही बात मैने भी कही है ! इस सच को स्वीकारने मे हर्ज ही क्या है ! साधु आत्मनिर्भर हो और अपनी कमाई से कुछ लोककल्याण करे, इसमे कोई हर्ज नही है ! पतंजलि के कुछ उत्पाद मेरे घर मे भी यूज होते हैं ! आयुर्वेद पर आप रिसर्च कीजिये, किसानों को फायदा पहुँचाइए, सब अच्छा है, लेकिन अपने सभी उत्पादों की क्वालिटी का भी ध्यान रखिये ! देशभक्ति के नाम पर आम जनता को कुछ भी मत परोसिये ! मिलेट्री की कैन्टीन मे अभी कुछ रोज पहले पतंजलि के आंवले के जूस पर रोक लगी है ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय अमित जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपके इस तर्क से सहमत हूँ कि बाबा रामदेव देशी गाय का शुद्ध घी बेचने की बात कहते हैं, लेकिन पूरे देशभर मे इसकी बहुत बड़ी मांग को देखते हुए यह सवाल उठता है कि भारतीय गायों का इतना देशी घी पतंजलि वालों को कहा से प्राप्त होता है ? आपने इसका जबाब भी दिया है, जिसकी जांच होनी चाहिये, लेकिन सवाल फिर ये उठता है कि उनकी राजनीतिक पहुंच इतनी उंची है कि जांच करेगा कौन ? दूसरे देशभक्ति और गौभक्ति के नाम पर उनका कारोबार जारी है ! जनता भी इसलिये चुप है ! एक परिचित सज्जन बता रहे थे कि प्रचार से प्रभावित हो वो एक बार पतंजलि का देशी घी लाये, लेकिन परिवार मे कोई नही खाया, उन्हे ही किसी तरह से खाकर खत्म करना पड़ा ! ब्लॉग पर आने के लिये और पोस्ट की सराहना करने के लिये हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

AMIT परम आदरणीय बाबा सदगुरु जी महाराज, सादर नमस्कार, एक सटीक, सच्चाई से भरे ओर सोये हुए लोगो को जागरूक करने वाले लेख पर साधुवाद.... लोगो को अंधभक्ति से बच्चाने के लिये ही मे ब्लॉग पर प्रयासरत हु वा गालिया खाता हु.... खेर जाने दीजिये... अब सवाल यह उठता है की पूरे हिन्दुस्तान को शुध भारतीय गाय का घी..! जी हा गाय ही लिख रहा हु वह भी भारतीय.. वह कांदिए बाबा को कहा से प्राप्त होता है...? जाहिर सी बात है की बाबा के आश्रम की गायो से तो इतनी मात्रा मे दुघ्ध प्राप्त होने से रहा...? जितनी कम मात्रा मे हमारे देश की शुध देसि भारतीय गायो से दुघ्ध की प्राप्ति होती है उससे भी सारी कम्पनिया मिल कर भी बाज़ार की डिमांड पूरी नही कर सकती है...! तब सवाल का जवाब मिलता है की पतंजलि द्वारा यह सब चाइना वा यूरोप से इम्पोर्ट किया जा रहा है... कांदिए बाबा ने देश का माहोल देख कर बड़ी चालाकी से योग वा देशभक्ति का बाज़ारी कर्ण कर के लोगो को ठगा है बस.... वेसे आये दिन बाबा के गुंडे भाई द्वारा हरिद्वार मे मारपीट किये जाने की खबरे छपती रहती है... !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! मीडिया मे यह मामला उछला, तब जाकर सरकार को शर्म आई ! यही तो दुखद है कि इस सरकार का भी कांग्रेसीकरण होना शुरु हो गया है ! कुमार विश्वास कहते हैं कि भाजपा का 80 प्रतिशत कांग्रेसीकरण हो चुका है और आम आदमी पार्टी का होना शुरू हो चुका है ! यदि वाकई मे ऐसा है तो कांग्रेस की तरह ही भाजपा भी पतन के मार्ग पर चल चुकी है ! यदि भाजपा वाले भी वही कार्य और बर्ताव करेंगे, जो कांग्रेस ने किया और पतन के गर्त मे चली गई, तो फिर भविष्य मे भाजपा की दुर्गति होनी भी तय है ! राष् ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों से जुड़े मुद्दे पर सरकार की संवेदनहीनता और इलाज के मामले मे एक अफसर और एक जवान के बीच भेदभाव बेहद निन्दनीय है ! पूरा प्रकरण निन्दनीय और दुखद तो बहुत है, लेकिन सही राह पर बीजेपी के नेता भले ही देर से आये, लेकिन दुरुस्त आये ! आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी, हम लोग और कुछ तो कर नही सकते, लेकिन ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे इस मंच पर उठाकार आम जनता को सोचने विचारने के लिये जागरूक जरूर कर सकते हैं ! हालांकि ब्लॉगिंग मंच भी पूरी तरह से निष्पक्ष, जागरूक और संवेदनशील नही हैं ! सबसे बड़ी समस्या समय पर ब्लॉग अपडेट नहीं होने की है ! तमाम ब्लॉगिंग मंचों की हालत आप देख ही रहे हैं ! याद करने के लिये हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! जय श्रीराम और सादर अभिनन्दन ! सबसे पहते तो आपके स्वास्थ्य को लेकर शुभकामनाएं ! आप शीघ्र से शीघ्र पूर्णतः स्वस्थ हों ! टीवी पर चेतन कुमार चीता और जिंतेंद्र कुमार की माता रूपा देवी दोनों का ही इंटरव्यू देखा, मन को बहुत ठेस लगी ! खासकर जितेंद्र कुमार के इलाज को लेकर उनकी माता जी का हाथ जोड़कर रोना और देश से निवेदन करना ! यदि वाकई ऐसा है, तब तो शर्म के मारे हमें चुल्लूभर पानी में डूब मरना चाहिए ! आपकी इस बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाना चाहिए कि वो बार-बार भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देना भूल जाए ! लेख पढ़ने और बधाई देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय अमित जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपकी प्रतिक्रिया से पूर्णत: सहमत हूँ ! विश्व की तीसरी बड़ी सेना, आधुनिक हथियारों से सुसज्जित और हर महीने मिसाइल परीक्षण, ये सब किस काम का, जब आप दुश्मन को समुचित ढंग से जबाब भी न दे सकें ? केवल मुँहजबानी पाकिस्तान को धमकाने से अब जनता उब चुकी है ! देश का विकास सरकार चाहे जितना भी कर ले, किन्तु पाकिस्तान को करारा जबाब देने और राष् ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर यह सरकार अब तक तो सफल नही हो पाई है ! जब पाकिस्तान भारत के 'सर्जिकल स्ट्राइक' का जबाब नही दे पाया तो भारत के हमले का क्या जबाब देगा ! सरकार बेवजह डर रही है ! ब्लॉग पर आकर सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिये सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय हरेंद्र रावत जी ! लेख पर आपकी विचारणीय प्रतिक्रिया मिली ! आपने मेरे मन की बात कह दी है कि 'देशप्रेम की भावनासे से ओतप्रोत होकर सैनिकों पर लिखा गया लेख उन नेता राजनेताओं और शासक प्रशासकों के लिए एक सन्देश है, जो अपने करोड़ों के सजेसजाए वातानुकूल कार्यालयों में बैठकर अपने और अपने परिवारवालों को सुरक्षित समझकर भ्रष्टाचार की राह पर चलते रहते हैं, वो भी सीमा पर लड़नेवाले सैनिकों की जानों पर कीमत पर !' उनके भेदभाव का रवैया, ढुलमुल नीति और जवानों के प्रति संवेदनहीनता निंदनीय है ! घायल जितेंद्र कुमार से मिलने कौन नेता गया? उसे एम्स में भर्ती क्यों नहीं किया गया? मोदी सरकार और उसके आला लीडरों को इस बात का जबाब देना चाहिए ! लेख को आपने आँख खोलने वाला (चक्षु ओपनर) महसूस किया, इससे लेख को सार्थकता मिली ! प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

कश्मीर के हालात कितने खराब चल रहे हैं, इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि वहां पर सुरक्षाबलों पर पथराव की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी होने के साथ ही लूटपाट और हिंसा की वारदातों में भी इजाफा हुआ है. आज कुलगाम में जम्मू-कश्मीर बैंक की कैश वैन पर आतंकियों ने हमला किया, जिसमे पांच पुलिसवाले और दो बैंककर्मी शहीद हो गए. इस हमले में घायल एक गार्ड बहुत गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है. मीडिया में प्रकाशित समाचार के अनुसार आतंकवादियों ने कैश वैन से 50 लाख रुपये लूटने के साथ ही पुलिसवालों के हथियार भी लूटकर अपने साथ ले गए. इस तरह की घटनाएं इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि कश्मीर में अब कड़ी कार्यवाही की जरुरत है और वो भी जल्द से जल्द.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

इससे पहले कल रविवार को श्रीनगर के खानयार पुलिस स्टेशन पर कुछ हमलावरों ने ग्रेनेड से हमला किया था. इस हमले में 4 पुलिसवाले जख्मी हो गए थे, जबकि एक नागरिक की मौत हो गई थी. आतंकवादी पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड फेंकने के बाद फरार हो गए थे. हालाँकि हर वारदात के बाद पुलिस और सुरक्षा बल एक साथ मिलकर हमलावरों को ढूंढने का अभियान चलाते हैं, लेकिन इसमें उन्हें स्थानीय लोगों का सहयोग नहीं मिलने के कारण बहुत दिक्कत हो रही है. यही नहीं, बल्कि कई बार तो हमलावरों को ढूंढ़ने के लिए सर्च ऑपरेशन चला रहे पुलिस व सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी भी शुरू हो जाती है. इस बात में कोई शक नहीं कि कश्मीर के हालात काबू से बाहर हो अब वहां पर राष्ट्रपति शासन की जरुरत बता रहे हैं.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपने सही कहा है कि इस सामयिक मुद्दे पर इस ब्लॉग को पेश कर मैने चर्चा को आगे बढाने की कोशिश की है ! मैने बीजेपी और आप दोनों ही पार्टियों का ही पक्ष रखा है ! तीनों एमसीडी मे भाजपा की विजय को यदि विधानसभा के लिहाज से आज चुनाव होने के एक अनुमानित संदर्भ मे देंखे तो देंखे तो आज की तारीख मे बीजेपी 57 विधानसभा सीटें जीत रही है ! बीजेपी को जनता तीसरी बार झाड़ू जरूर थमाई है, किन्तु इस बार उन्हे झाड़ू लगाना ही पड़ेगा और मोदी व अमित शाह जी को ये देखना भी पड़ेगा कि एमसीडी दिल्ली को सुन्दर और सॉफ सुथरा बना रही है कि नही ? 2019 मे वोटर इसी बात से प्रभावित होंगे ! हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

बचपन में मुझे याद है कि जब लगभग दस साल का था, तब अपने मामा जी के यहाँ रहता था ! मामी को पहला बच्चा हुआ ! वो कूड़े कचरे से भरे एक कमरे में रहती थीं, जिसमे सांप बिच्छू भी थे ! उनके पास जाने की सख्त मनाही थी ! सब कहते थे अभी छुतका यानी सूतक लगा है ! अभी पांच छह रोज इन्तजार करो ! जबतक जज्चा बच्चा नहा नहीं लेंगे, तबतक अंदर जाना मना है ! दूसरे दिन दोपहर के समय जब सभी लोग सो रहे थे, तब मैं धीरे से दरवाजा खोलकर अंदर चला गया ! कमरा उपले के धुंए से भरा था ! मामी आँखे बंद किये खांस रही थीं ! लालटेन की रौशनी तेजकर मैंने नन्हे मुन्हे नवजात शिशु को बड़ी अचरज से देखा, अवर्चनीय ख़ुशी के साथ उसे हाथों से छुआ और मामी को आवाज दिया ! वो आँखे खोलते ही मुझे सामने देख बहुत परेशान होते हुए बोलीं, 'बाबू.. तू हउअ.. जल्दी से भाग जा.. नाही त केहू इहाँ तोहके देख लेइ त मारे लागी..' मैं भागा नही, मामी जाने को कहती रहीं, पर मैं बिना किसी भय के बच्चे के साथ खेलता रहा ! घर के लोग जब कमरे में घुसे तो मुझे वहां देख भड़क उठे ! मुझे अपवित्र हो गया मानते हुए वो लोग जबरदस्ती पकड़कर नहलाने के लिए घर के बाहर स्थित कुँए पर ले गए ! लेकिन मैं वहाँ से भाग चला और नही नहाया ! मेरा मन ये मानने को तैयार नही था कि मैं अपवित्र हो गया हूँ ! मन में ईश्वर के भेजे उसके अंशपुत्र से मिलने की और उसके साथ खेलने की असीम ख़ुशी थी, जिसके आगे सारे सूतक बौने और बेमतलब के हो गए थे !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

यूपी में ‘रामराज्य’ लाने का अर्थ लड़कियों और महिलाओं से छेड़खानी करने वाले मनचलों के दुस्साहस और उनके अड्डों को खत्म करने के लिए सार्वजनिक जगहों व स्कूल कॉलेजों के बाहर एंटी रोमियो दल की तैनाती करना, पीएम मोदी की देखादेखी सफाई अभियान चलाना तथा अयोध्या में राम मन्दिर बनाने का प्रयास करना भर ही नहीं है, बल्कि ‘रामराज्य’ का वास्तविक अर्थ, धर्म-जाति का भेदभाव किये बिना उत्तर प्रदेश की गरीब जनता को जीवन की मूलभूत जरूरतें ‘रोटी, कपडा और मकान’ मुहैया कराना है. बेरोजगारों को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर प्रदान करना है. प्रदेश में कहीं भी दंगा-फसाद न हो, इसका विशेष ध्यान रखना है. प्रदेश की आम जनता को सुरक्षा, शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है और प्रदेश के अन्नदाता किसानों को सूखा, अकाल, भुखमरी, बिमारी और कर्जों से निजात दिलाना है. मूलतः ‘रामराज्य’ की अवधारणा का यही सब आधारबिंदु है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया प्रतिभा जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! शायद आपने लेख को ध्यान से नही पढ़ा है ! लेख मे कहा गया है कि जहां भी मुस्लिम आबादी 45 से 50 फीसदी के ऊपर है, वहां पर बीजेपी हारी है ! यूपी मे अभी फिलहाल ऐसी 30 सीटें हैं, लेकिन तीन चार दशक बाद ऐसी सीटों की संख्या 200 के पार जा सकती है ! इसलिये भविष्य की राजनीति को ध्यान मे रखते हुए भाजपा को अभी से ही उदारवादी मुस्लिमों को अपने साथ ले के चलना चाहिये ! यह राजनीतिक समझदारी है ! 2019 के लोकसभा चुनाव मे भाजपा को शायद महागठबंधन के रूप मे एकजुट विपक्ष का सामना करना पड़े, उससे निपटने के लिये भी उसे देशभर मे अपने वोटरों का विस्तार करना पड़ेगा ! आपकी राजनीतिक विषयों पर वैचारिक दृष्टि यथार्थवादी और दूरदर्शी नही है, इसलिये मुस्लिमों को भाजपा से जोड़ने की सलाह देने वालों को फ्रजी बुद्धिजीवी कह रही हैं ! इस देश को भविष्य मे आगे बहुत आगे ले जाने वाले न तो कट्टर हिन्दू होंगे और न ही कट्टर मुसलमान, बल्कि वो समावेशी प्रवृति वाले उदारवादी हिन्दू और हिन्दुओं के साथ घुलमिलकर रहने वाले उदारवादी मुसलमान होंगे ! पीएम मोदी इसलिये 125 करोड़ भारतीयों के विकास की उन्हे साथ ले के चलने की बात करते हैं ! ब्लॉग पर समय देने के लिये सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

Pratibha भाजपा हिन्दूवादी पार्टी अवश्य रही है किन्तु भाजपा का हिन्दूवाद वैसा नहीं है जैसा कि सेकुलरों का सेकुलरवाद है. भारतीय सेकुलरवाद सभी सम्प्रदायों को साथ लाने की बात नहीं करता अपितु हिन्दू विरोध और मुस्लिम प्रेम तक ही सीमित रहता है, यही कारण है कि 100 करोड़ हिन्दुओं को 15 मिनट में मारने की बात करने वाला ओवैसि तो सेक्युलर कहलाता है किन्तु सबका साथ सबका विकास की बात करने वाले मोदी को सम्प्रदायिक कहा जाता है. भाजपा को चाहिये कि फर्जी बुद्धिजीवियों के दवाव में आकर मुसलमानों को साधने का मूर्खतापूर्ण प्रयास करने की अपेक्षा समग्र हिन्दुत्व पर ध्यान दे क्यूंकि स्वभाविक रूप से हिन्दू सर्व धर्म समभाव में विश्वास करता है. जब हिन्दुत्व सशक्त होगा तो अन्य सम्प्रदायों को को भी अपने साथ सशक्त करेगा.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ नेता डॉ. रामविलास दास वेदांती कह रहे हैं कि बाबरी ढांचा मैंने तुड़वाया था ! मेरे ही कहने पर कारसेवकों ने बाबरी ढांचा गिराया था ! उन्होंने कहा कि आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी कारसेवकों को ढांच न तोड़ने के लिए समझा रहे थे, इसलिए वो लोग जरा भी दोषी नहीं हैं ! वो लोग बेकसूर हैं ! उन्होंने यहाँ तक कहा कि अगर कोर्ट फांसी की सजा मुझे दे तो भी मैं फांसी पर लटकने को तैयार हूं ! ढांचा तोड़ने के दोषियों में उन्होंने अपने अलावा महंत अवैद्यनाथ और अशोक सिंघल का नाम लिया ! भाजपा के पूर्व सांसद और रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. रामविलास वेदांती ने एक और चौंकाने वाला दावा किया कि विवादित ढांचा गिराने के मामले में उस समय के प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की भी सहमति थी ! इसका सीधा सा मतब तो यह है कि सबकी मिलीभगत से बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया ! सच क्या है, इसकी जांच होनी चाहिए !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी आपके लेख के पांच पैराग्राफ हैं यु कहिये पांच हेडिंग हर लाइन में आपके विचार भरे पड़े हैं परन्तु लेख बड़ा न हो जाए आपने छोटा करने की कोशिश की है मुझे मेरे गुरु बहुत बड़े लेखक थे उन्होंने समझाया था आज ही सब लिख दोगी आगे क्या लिखोगी वह कहते थे एक हेडिंग उठाओ उसका विस्तार करो जबकि में भी ऐसा नहीं कर पा रही हूँ आपका लेख मेने बोल – बोल कर पढ़ा में अच्छे लेख ऐसे ही पढ़ती हूँ मुझे अपने सर याद आ गये आप मेरी बात को अन्यथा नहीं लीजिएगा मेने जो सीखा है व्ही लिख रही हूँ अप ध्यान दें सम्पादकीय लेख में एक ही पॉइंट को घुमाते हैं आपका लेख अंग्रेजी की लाइन है नेल इन दा हेड यही नहीं सोच को दिशा देता है |

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! इस्लाम के आने से पहले स्त्रियां ज्यादा स्वतंत्र थीं ! इस्लाम के आने से तो उल्टे पर्दा प्रथा सहित अनेको तरह की तमाम पांबंदियाँ स्त्रियों पर लग गईं ! ये एक ऐतिहासिक सत्य है कि मुस्लिम आक्रमकारियों के भारत पर बार बार हुए अनगिनत हमलों के कारण सबसे ज्यादा नुक्सान स्त्रियों को ही हुआ ! वो स्त्रियों की स्वतंत्रता पर ग्रहण लगाने वाले सबसे बड़े आतंकी थे ! भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के विवाह स्वयम्बर और उनकी पत्नियों की स्वेच्छा से हुए ! यही ऐतिहासिक प्रमाण प्राचीन काल में काल में स्त्री-स्वंतंत्रता को दर्शाने के लिए काफी है ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय महेन्द्र जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! बहुत सटीक और जानकारी से भरी प्रतिक्रिया आपने दी है ! इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद ! सही बात है कि भूतपूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की गलत नीति के कारण ही आज कश्मीर समस्या नासूर बनकर देश का हर साल हजारो-हजारो करोड़ रुपये बर्बाद करवा रही है ! आपकी बात से सहमत हूँ कि जब तक किसी भी पार्टी को संसद मे तीन चोथाई बहुमत नही मिल जाता तबतक धारा 370 और अनुच्छेद 35ए खत्म नही हो सकता है. जब तक कश्मीर समंस्या स्थायी रूप से हल नहीं होती, तबतक हम रोज ही कश्मीर में ऐसे ही अपमानजनक प्रसंग और खून खराबे देखते रहेंगे ! ब्लॉग पर समय और प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय महेंद्र जी की जानकारी भरी पठनीय प्रतिक्रिया- धारा 370 से ज्यादा खतरनाक है अनुच्छेद 35ए है जिसे नेहरू ने अंसवेधानिक तरीके से धारा 370 का पार्ट बना दिया इसी अनुच्छेद के कारण जम्मू-कश्मीर विधानसभा को यह अधिकार मिल गया कि वह जिसे चाहे उसे नी जम्मू-कश्मीर का नागरिक मानेगी.....और जिसे ना चाहे उसे नही मानेगी .यह अन्नूच्छेद केवल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से धारा 370 मे जोड़ दिया गया जबकि ऐसा करने के लिये ससंद की मंजूरी की जरूरत थी इसलिये 1954 मे नेहरू ने बड़ी चालाकी से इसे जोड़ दिया और देश की जनता और तो और सासदो तक को पता नही चला......यही नेहरू की दोगली नीति आज नासूर बनकर देश का हजारो-हजारो करोड़ रुपये बर्बाद करवा रही है.....देश के जवान शहीद हो रहे है.........जब तक किसी भी पार्टी को संसद मे तीन चोथाई बहुमत नही मिल जाता तबतक धारा 370और अनुच्छेद 35ए खत्म नही हो सकता है......और हम रोज ऐसे ही देखते रहेंगे.......जय हिन्द...जय भारत

के द्वारा: sadguruji sadguruji

जम के दूत, बड़े मजबूत, जम से पडा झमेला उड़ जाएगा हंस अकेला, जग दर्शन का मेला … संसार में आवागमन यानि जीवन-मरण के कष्ट को ही संत यमदूत की यातना या उससे पड़ा झमेला मानते हैं. संत कबीर साहब ने इस भजन में समझाने की कोशिश की है कि संसार में बाहर की ओर भागकर आप आवागमन के कष्ट से छुटकारा नहीं पा सकते हैं. उसके लिए आपको प्रसन्नचित्त भाव से आंतरिक साधना करनी पड़ेगी. संसार से राग यानि लगाव बुरा है तो वैराग्य यानि घृणा भी उतनी ही बुरी है. ये दोनों ही सांसारिक बंधन के मूल कारण हैं, इसलिए इन दोनों ही तरह के रागों यानि राग-वैराग से परे बीतराग भाव में मनुष्य की सदैव स्थित रहना चाहिए, जो साधना की स्थितप्रज्ञ यानि आत्मा में रमे रहने की उच्च अवस्था में जीतेजी ही मोक्ष का अनुभव प्रदान कर देती हैं.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सिंह साहब ! सादर हरि स्मरण ! शिक्षा जगत में अभिभावकों से हो रही लूटपाट और छात्रों की होने वाली प्रताड़ना एक पुरानी ज्वलंत समस्या है ! इस समय केंद्र और कई राज्यों में भाजपा की सरकार है, इसलिए लोग शिक्षा मंदिरों में होने वाले शोषण के खिलाफ बोल पा रहे हैं और न्यूज चैनलों पर खुलकर चर्चा हो रही है ! दरअसल अधिकांशतः लोग यह मानते हैं कि भाजपा दूसरी भ्रष्ट पार्टियों से कुछ अलग हटकर है, इसलिए उनकी आवाज जरूर सुनी जायेगी ! मुझे भी लग रहा है कि अब इस मसले का कुछ स्थायी समाधान जरूर होगा ! स्कूलों में बच्चों को दी जाने वाली प्रताड़ना गैर-कानूनी होते हुए भी रोजमर्रा की घटित होने वाली एक आम बात है ! सरकार को इस तरफ भी ध्यान देते हुए बच्चों को मारने-पीटने पर पूर्णतः रोक लगा देनी चाहिए ! आपकी इस बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि बच्चों को प्यार से ही समझाया और सिखाया जाना चाहिए ! ब्लॉग पर आने तथा सार्थक व विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

'बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक' सम्मान से सम्मानित करने के लिए आदरणीय जागरण जंक्शन मंच को धन्यवाद. आपके सहयोग से और ब्लॉगर मित्रों व कृपालु पाठकों के समर्थन से इस सामयिक और बेहद महत्वपूर्ण विषय पर एक विस्तृत चर्चा करना चाहता था. साथ देने के लिए ब्लॉगर मित्रों व कृपालु पाठकों को धन्यवाद. निजी स्कूलों में होने वाली लूटपाट और प्रताड़ना से अभिभावक और छात्र दोनों ही परेशान हैं. केंद्र और राज्य सरकारों को इस समस्या का कोई स्थायी समाधान ढूंढना चाहिए. निजी स्कूलों में फीस सरकार द्वारा तय होनी चाहिए और बच्चों को प्रताड़ना से बचाने के लिए सरकारी और निजी स्कूलों के नोटिस बोर्ड पर धारा-82 के प्रावधान भी लिखे जाने चाहिए. बच्चों और उनके अभिभावकों को इन क़ानूनी अधिकारों का ज्ञान जरूर होना चाहिए. किशोर न्याय अधिनियम-2015 की धारा-82 के कानून को स्कूली पाठ्यक्रम में भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! सादर अभिनन्दन ! स्त्रियों की स्वतन्त्रता पर बहुत से लेख लिखे गये हैं, किन्तु उनकी भाषा थोड़ी क्लिष्ट और साहित्यिक है, इसलिये सामान्य हिन्दी जानने वाले पाठकों को पूरी बात समझने मे दिक्कत होती है ! इस पर सरल हिन्दी मे लिखने की आवश्यकता मुझे महसूस हुई ! हिन्दू शास्त्र यही कहते हैं कि नारी पहले अधिक स्वतन्त्र थी ! आपकी बात एकदम सही है कि विदेशी आक्रमणकारियों, खासकर मुस्लिम आक्रान्ताओ के हमारे देश मे आने के बाद स्त्रियों की आजादी न सिर्फ छीन गई, बल्कि इज्जत आबरू लुटने के डर से उन्हे पैदा होते ही मारा भी जाने लगा ! इतिहास से सबक सीखते हुए भविष्य मे हमे सदा सर्वदा इस बात से सावधान रहना होगसा और हर कीमत पर अपनी आजादी की रक्षा भी करनी होगी ! ब्लॉग पर समय देने के लिये सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! सर्वप्रथम आपको साप्ताहिक सम्मान की बधाई ! वैसे आजकल की ज्वलंत समस्या पर आपने व्यापक दृष्टिकोण से आपने कलम चलायी है. आजकल कई चैनलों पर भी चर्चा हो रही है. अभिभावक और छात्र परेशान हैं, और ये शिक्षा के मंदिर अपने भक्तों/ग्राहकों का भरपूर दोहन कर रहे हैं. उम्मीद है सरकार कुछ करेगी या अभिभावक आपस में मिलकर कोई हल ढूंढने का प्रयास करेंगे. मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं पर मैं भी बच्चों को प्रताड़ित करने के खिलाफ हूँ. मेरे बच्चे को भी जब पीटा गया था मैं भी प्रिंसिपल के पास पहुँच गया था. उन्होंने मुझे समझा बुझाकर शांत किया. मैंने भी उस शिक्षिका को माफ़ कर दिया. वैसे बच्चों को प्यार से ही समझाया सिखाया जाना चाहिए. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education या CBSE) भारत की स्कूली शिक्षा का एक प्रमुख बोर्ड है। भारत के अन्दर और बाहर के ज्यादातर निजी विद्यालय इससे सम्बद्ध हैं। पहली कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के लिये CBSE का तैयार किया हुआ पाठ्यक्रम ही इससे सम्बद्ध देशभर के सभी निजी स्कूल अपने यहाँ चलाते हैं, किन्तु भारत सरकार द्वारा स्थापित संस्थान राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद (National Council of Educational Research and Training या NCERT) जो सीबीएसई के पाठ्यक्रम के अनुसार बहुत कम मूल्य पर बहुत अच्छी पुस्तकें छापता है, उन पुस्तकों को निजी स्कूल अपने यहाँ नहीं चलाते हैं, क्योंकि उस पर कमीशन कम मिलता है।

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आप विभिन्न विषयों पर कक्षा 1 से 12 तक की “एन सी ई आर टी (NCERT)” की पुस्तकें मुफ्त में भी डाउनलोड कर सकते हैं। प्राइवेट पब्लिशरों की छापी हुई जो महंगी पुस्तकें निजी स्कूल वाले अपने यहाँ चलाते हैं, उसपर 40 प्रतिशत कमीशन खाते हैं। अगर आपने अपने बच्चे के लिए निजी स्कूल से या उसके बताये हुए दुकानदार से 2000 रूपये मूल्य की किताबें खरीदी हैं तो 800 रूपये स्कूल वाले का कमीशन हो गया। इसी तरह से जो कॉपी स्कूल वाले आपको 35 रूपये में आपको देते हैं वो मात्र 25 रूपये में आपको दूकान से मिल जायेगी। ड्रेस में भी निजी स्कूल वाले अभिभावकों को लूट रहे हैं। मजेदार बात देखिये कि केंद्र सरकार टीवी और रेडियो पर प्रचार करती है कि 'जागो उपभोक्ता जागो' और खुद निजी स्कूलों की इस लूटपाट के खिलाफ कोई कार्यवाही न कर एक तरह से सो ही रही है। अब उपभोक्ताओं को कहना चाहिए कि 'जागो सरकार जागो।'

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया सरिता सिन्हा जी ! सादर अभिनन्दन ! आपका इस ब्लॉग से संबंधित अच्छे सुझाव से युक्त एक अत्यंत विचारणीय कमेंट ईमेल पर मिला ! इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! वर्षों से एक साथ रहते हुए मैंने भी अपनी माताजी और श्रीमतीजी के स्वभाव पर काफी रिसर्च किया है ! पहली बात तो ये कि कानपुर से आगे, जहाँ मेरी ससुराल है, वहां कि बोली भाषा ही थोड़ी खर टाइप की या लट्ठमार कहिये, उस तरह की है ! दूसरी बात ये कि उनमे बहस अमूमन किसी त्यौहार, व्रत वाले दिन और नवरात्र में ज्यादा होती है ! कई बार मैं मजाक में कह भी देता हूँ कि जिसे भूख लगी वो खाना खा लें, पर एक दूसरे पर अपनी खीझ या गुस्सा न उतारें ! आदरणीया सरिता सिन्हा जी, हमारे घर में एक बात बहुत अच्छी बात है कि सब बहस मुंह से हो जाती है, दिल में ज्यादा देर तक कोई नहीं रखता है ! थोड़ी देर बाद एक दूसरे से बोलने भी लगेंगे ! माताजी हमारी बहुत धार्मिक और पुराने विचारों की हैं ! सोचती हैं कि हर बात उनसे पूछ के करो ! उन्हें खुश रखने के लिए मैं उनकी सलाह लें लेता हूँ ! किन्तु श्रीमतीजी इसकी जरुरत नहीं समझती हैं ! हाँ, मुझसे वो सलाह जरूर लेती हैं ! स्वभाव में उनके जिद और जरुरत से ज्यादा स्वाभिमान जन्मजात है ! मुझे उससे कोई दिक्कत भी नहीं है ! शादी हुए अठारह साल हो गए, अब इन सब चीजों की आदत पड़ चुकी है ! बिटिया अभी छठे साल में है, लेकिन बहुत तेजतर्रार और समझदार है, खासकर अपने अधिकारों के प्रति ! मैं उसे इसी बात के लिए सदैव प्रेरित भी करता हूँ, क्योंकि आज के युग में सुख-शान्ति से जीने के लिए इस तरह का विकास बहुत जरुरी है ! आपकी बात सही है कि घर में होने वाले झगड़ों का बच्चों पर खराब असर पड़ता है ! मैं घर में सबको यही बात अक्सर समझाता भी हूँ ! फिलहाल तो शान्ति है ! ईश्वर करें, यूँ ही बनी रहे ! अनुभव से परिपूर्ण एक बहुत अच्छी प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

ईमेल पर प्राप्त आदरणीया सरिता सिन्हा जी का कमेंट- आपकी पोस्ट पर कमेन्ट नहीं हो पा रहा है कृपया इसको मेरी तरफ से पोस्ट करने का कष्ट करें. धन्यवाद..... सद्गुरुजी प्रणाम, ये घर घर की कहानी है. लज्जाशील और संकोचशील बहुएं भी एक उम्र ससुराल में गुज़ार लेने के बाद अक्सर मुखर हो जाती हैं और सासें उनको इंसान नहीं बल्कि आदर्शवाद की एक रोबोटिक मशीन की तरह देखना चाहती हैं. जब सास ने बहू को बेटी तो बहुत दूर की बात है, कभी इंसान भी नहीं समझा, फिर वो कभी नहीं समझेगी, उनको समझाना बेकार है. साथ ही बहुत सी ऐसी बातें होती हैं जो अपने साथ होने पर ही समझ में आती हैं जैसे परिवार में सबसे सीनियर होने की मदांधता...हो सकता है हम भी जब सीनियर मोस्ट हो जाएँ तो सत्ता के नशे में अंधे हो जाएँ. क्यूंकि अभी हममें जो रीज़निंग है, कह नहीं सकते कि बुढ़ापे में बचे गी या अल्ज़ाइमर या डेमेंशिया या कमअक्ली (सठियाने ) की भेंट चढ़ जाएगी. ऐसे में जिसका मस्तिष्क अभी सही सलामत है उसे बहस करने के बजाय चुप हो जाना चाहिए. समझना चाहिए कि अगला एक मानसिक मरीज़ है और हमें उस की देख-भाल करने जैसा महान काम करना है...ये मेरा आज़माया हुआ नुस्खा है, आप भाभीजी को मेरा ये सन्देश पहुंचा दें. एक बार बहस के बजाय चुप हो कर देखें. असीम शांति मिलेगी, ये मेरा दावा है...समझदार बिटिया को मेरा स्नेह. हाँ, अगर ये बहसें ऐसे ही चलती रहीं तो बच्ची इनका असर अपने जीवन में ले लेगी, इसका भी तो ध्यान रखना है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरुजी, नमस्कार, सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर और नर्सें अक्सर संज्ञाशून्य भावशून्य होते हैं. मरीज़ उनके लिए सिर्फ एक सब्जेक्ट भर होता है. मैं ने मरीज़ों को चांटे लगाने वाली नर्सों को भी देखा है. वैसे लखनऊ के PGI में मैं अपने ससुरजी की बीमारी के दिनों में दो महीने रही थी. वहां मरीज़ों की भारी संख्या के चलते एंट्री मिलना मुश्किल है लेकिन डॉक्टर्स और नर्सेज मरीज़ और उसके तीमारदारों से बहुत अच्छा व्यवहार करते हैं. वहां रह कर अस्पताल के प्रति मेरी धारणा बिलकुल बदल गयी. लेकिन और कहीं ऐसा नहीं देखा. वैसे सभी स्वस्थ रहें किसी को अस्पताल का मुंह न देखना पड़े, यही प्रार्थना करती हूँ.

के द्वारा: sinsera sinsera

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! देश के अधिकतर सरकारी अस्पतालों में यही सब होता है, किन्तु सरकार इस तरफ कोई ध्यान नहीं देती है ! डॉक्टरों के अंदर सहानुभूति और संवेदनशीलता ही मर चुकी है ! सबकी रूचि बस पैसा कमाने में है, चाहे वो मरीज से मिले या या फिर दवा की कंपनियों से ! सरकारी अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर तो बस अपनी ओपचारिकता भर पूरी करते हैं ! इस मुद्दे पर आपके सहयोग और समर्थन के लिए आभारी हूँ ! जागरण मंच ने चूँकि भेदभाव के मुद्दे पर हम सबके अनुभव मांगे थे, इसलिए हमलोंगों ने लिख दिया ! व्यक्तिगत दुःख में रूचि लेकर पढ़ने वाले पाठकों की संख्या भी अब कम होती जा रही है, इसलिए बहुत कम लोग ही अपनी लेखनी में अपने दिल का दर्द उजागर करते हैं ! प्रतिक्रिया देने के लिए सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी अस्पताल का व्यवहार देख कर आश्चर्य हुआ यह जूनियर डाक्टर यहीं से सीखते हैं तब इनका यह हाल है दिल्ली में भी यही हाल है कुछ डाक्टर प्रैक्टिस करते हैं वह अस्पताल का इस्तेमाल अपने नर्सिंग होम की तरह करते है उनके मरीजों को सब सुविधाएं मिल जाती है और तुरंत आपरेशन जागरण के हम आभारी हैं हमें अपने भीतर क्या कष्ट लेकर जीते हैं कहने का अवसर मिला |मेरे तो ब्राह्मण होने पर प्रश्न उठाये जाते रहे हैंमुझे पूछते तुम कौन सी बामन हो मैं हंस कर कहती हूँ जी सफाई कर्मचारी बामन हैं लगती तो नहीं हो आपके घर में आ गयी हूँ सुथरी हो गयी हूँ नाक भों सिकोड़ते हैं फिर खुद ही कहेंगे न जी मजाक कर्वे को हमीं मिले

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने पोस्ट का समर्थन कर उसे जो सार्थकता प्रदान की है, उसके लिये हार्दिक आभार ! आपने बिल्कुल सही कहा है कि "कार्यकर्ताओं की वजह से ही नेता लोग सत्ता के शिखर तक पहुंचते हैं और वहां पहुंचने के बाद अगर वे खुद सत्ता के मद मे चूर होकर कार्यकर्ताओं को लताडना शुरु कर देंगे तो यह ना सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, पी एम मोदी की उस हिदायत का भी खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है जिसमे उन्होने जीतने पर भी विनम्रता का भाव बनाये रखने की अपील की है !" ऐसी घटनाएँ न सिर्फ निन्दनीय हैं, बल्कि बीजेपी के लिये चिंता का विषय भी होनी चाहिये ! कार्यकर्ता कोई उनके ग़ुलाम नही हैं ! यदि वो घर बैठ गये तो पार्टी चारो खाने चित्त हो जायेगी ! प्रधानमन्त्री मोदी को ऐसी घटनाओं की न सिर्फ जानकारी लेनी चाहिये बल्कि अपने नेताओं के बुरे व्यवहार पर लगाम भी कसनी चाहिये ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय राजीव गुप्ता जी का कमें- "आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, कार्यकर्ताओं की वजह से ही नेता लोग सत्ता के शिखर तक पहुंचते हैं और वहां पहुंचने के बाद अगर वे खुद सत्ता के मद मे चूर होकर कार्यकर्ताओं को लताडना शुरु कर देंगे तो यह ना सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, पी एम मोदी की उस हिदायत का भी खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है जिसमे उन्होने जीतने पर भी विनम्रता का भाव बनाये रखने की अपील की है-आपने समस्या की तरफ अपने इस शानदार लेख मे ध्यान आकर्षित किया है और आशा यही की जाती है कि इस तरफ जरूरी कार्यवाही करते हुये आगे से ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाई जायेगी. समसामयिक और पठनीय लेख की प्रस्तुति के लिये आपका हार्दिक आभार एवं अभिनन्दन."

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा:

इस चुनाव मे जातिवाद का मिथक भी टूटा है ! कल कुछ यादव जी लोंगों से भी मेरी बात हुई ! मैने उन्हे यह नही बताया कि मैने किसे वोट दिया था ! मैने उनसे सिर्फ इतना ही पूछा कि आपने किसे वोट दिया ! उन्होने कहा कि कमल के फूल के सिवा कुछ समझ मे नही आया ! मैने उनसे पूछा कि सपा को वोट क्यों नही दिये ? उनमे से एक जो बुजुर्ग थे वी बोले. 'उन हन के का वोट देबल जा.. पूरा कुनबा त कुर्सी की खातीन अपसे मे लडत बा.. बड छोट क कौनों लिहाज नईखे.. ! सबसे बढिया मोदी हाउअन.. जेकरी न कोई आगे.. न कोई पीछे.. ! जेकर सबकुछ जनता ही बा !' जनता चुनाव के समय उन नेताओं से बेहतर सोचती है जो जनता को सिर्फ जातिगत चश्मे से निहारते हैं और उसे मूर्ख बनाने के चक्कर मे लगे रहते हैं !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

एक न्यूज चैनल पर अभिनेत्री विद्या बालन ने कहा कि जो लोगों की आवाज दबाते हैं उन्हें थप्पड़ मारने का मन करता है ! उन्होंने कहा कि वो महसूस करती हैं कि लोगों को दूसरों की अभिव्यक्ति की आजादी का आदर करना चाहिए ! कोई उनसे पूछे कि कौन किसकी आवाज दबा रहा है ? इस देश में जिसके मन में जो आ रहा है, वो बोल रहा है और लिख रहा है ! रही बात थप्पड़ मारने की तो उन्हें मालूम होना चाहिए कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं कि आप कुछ भी बोलें ! घर में माता-पिता बच्चों को गलत बोलने पर रोकते-टोकते हैं ! स्कूल में टीचर बच्चों को बोलने नहीं देते हैं ! क्या आप उन्हें थप्पड़ मारेंगी ? इस देश का एक कानून है, जो गलत बोलने पर सजा देता है ! क्या आप कानून को थप्पड़ मारेंगी ? बोलने से पहले उन्हें सोचना चाहिए था कि अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ जो मन में आये वो बोलना नहीं है ! इस पर हर जगह पर कुछ न कुछ पाबंदिया लगी हुई हैं ! मुझे आश्चर्य होता है कि अपने बच्चों को कभी खुली छूट नहीं देने वाली नामी गिरामी हस्तियां अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर भाषण दे रही हैं ! पहले वो ये बताएं कि वो अपने बीबी-बच्चों को कितनी स्वतन्त्रता दिए हुए हैं? ये सब बड़े लोंगो का दोहरा व्यक्तित्व और दिखावटी पाखण्ड भर है ! सच ही कहा गया है कि हाथी के दांत खाने के और.. और दिखाने के और !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मुझे उन लोंगों की सोच और बुद्धि पर तरस आता है जो पूरे देशभर में चिल्ला रहे हैं कि गुरमेहर कौर को बोलने नहीं दिया जा रहा है ! अरे भाई किसने रोका है उन्हें ! जो कुछ भी उनको कहना था उन्होंने फ़ेसबुक पर कहा ! यहाँ तक कहा कि मैं भारतीय विद्यार्थी परिषद् से नहीं डरती ! कौन आपको कह रहा है कि आप AVBP से डरें? इस देश में बहुत से लोग रोज दावा करते हैं कि वो भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नहीं डरते और कुछ भी उन्हें उल्टा सीधा बोलते हैं ! पीएम मोदी जितने सहनशील तो ज्यादातर चुप रहने वाले भूतपूर्व पीएम मनमोहन सिंह भी नहीं थे ! बोलने की ऐसी आजादी तो कांग्रेज राज में भी कभी नहीं थी ! सोशल मीडिया पर जो भी मन में आया वो सबकुछ कहके गुरमेहर कौर ने ये साबित कर दिया है कि वो किसी से नहीं डरती है ! पूरा प्रकरण मशहूर होने के लिए की गई ड्रामेबाजी के सिवा और कुछ नहीं है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

नीतीश सरकार में शामिल मंत्री और कांग्रेस नेता अब्दुल जलील मस्तान को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने के लिए बिहार विधानसभा में बीजेपी विधायकों ने हंगामा किया और विधानसभा के बाहर बर्खास्त करने की मांग को लेकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया ! मस्तान ने नोटबंदी के विरोध में पीएम मोदी की तस्वीर पर समर्थकों से जूते मरवाया था ! मीडिया में छपी खबरों के अनुसार पीएम मोदी की तस्वीर पर जूता मारने की घटना 22 फरवरी की है, जब पूर्णिया में ये मंत्री नोटबंदी के विरोध में बुलाई गई सभा में पहुंचे थे ! अब्दुल जलील मस्तान ने कहा था, ‘’वो पीएम नहीं है, वो नक्सलाइट है, उग्रवाद है, डकैत है और लोगों को तरह-तरह से सताने वाला है.’’ हंगामा बढ़ता देख मंत्री ने माफी मांग ली है लेकिन बीजेपी विधायक उनके इस्तीफे पर अड़े हैं !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

पीएम मोदी ने लगभग एक हफ्ते पहले हरदोई में रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि यूपी ने मुझे गोद लिया है. यूपी मेरा माईबाप है. मैं माईबाप को नहीं छोड़ूगा. यूपी की चिंता है मुझे. यहां की स्थिति बदलना मेरा कर्तव्य है. जब मोदी ने खुद को यूपी का गोद लिया बेटा बताया तो हंगामा खड़ा हो गया था. एक तरफ जहाँ बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मोदी को नोटिस भेजा तो दूसरी तरफ अखिलेश, राहुल, प्रियंका गांधी और डिंपल यादव सबने मोदी को बाहरी कहकर घेर लिया. कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोदी पर हमला करते हुए कहा कि यूपी को किसी बाहरी को गोद लेने की जरूरत नहीं है. राहुल जी के दिल में, उनकी जान में उत्तर प्रदेश है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

रही बात पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सम्मान की तो मुझे लगता है कि मोदी सरकार ने उनका सम्मान करते हुए बहुत से मुसीबतों से उन्हें बचा रखा है, जैसा कि अक्सर बड़े नेता एकदूसरे के लिए करते हैं, भले ही सार्वजनिक रूप से जनता के सामने वो एकदूसरे को लाख भलाबुरा कहें. मनमोहन सिंह का अपमान सबसे ज्यादा तो खुद कांग्रेसी नेताओं ने ही किया है. देश की जनता को अच्छी तरह से याद है कि राहुल गांधी ने दागी नेताओं पर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए एक ऑर्डिनेंस की कॉपी को भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में फाड़कर अपना विरोध जताया था और उसे मानने से इंकार कर दिया था. कांग्रेस से कोई पूछे कि मनमोहन सिंह की अगुआई वाली भारत सरकार द्वारा जारी ऑर्डिनेंस को फाड़ने से क्या तत्कालीन पीएम मनमोहन की प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुंची थी?

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में संवैधानिक मर्यादा की तमाम सीमाओं को लांघते हुए नोटबंदी को संगठित लूट और कानूनी डाका कहा था. क्या यह पीएम मोदी, संविधान, सदन और बहुमत देने वाली जनता का अपमान नहीं है. देश को मंदी से बचाते हुए और तमाम जरुरी आर्थिक सुधार करते हुए जो मोदी भारत के संकटमोचक साबित हुए हैं, उन्ही के बारे में लोकसभा चुनाव से पहले मनमोहन सिंह ने कहा था कि मुझे ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना देश के लिए त्रासदी से कम नहीं होगा. मनमोहन सिंह उस समय भय और पूर्वाग्रह से ग्रस्त थे जो ऐसा बोल गए. ये बड़ी हास्यास्पद बात है कि मनमोहन सिंह खुद देश के लिए एक बड़ी त्रासदी साबित हुए और दूसरों के बारे में वो ऐसा सोचते और कहते हैं.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी आपने मीडिया में पत्रकारिता पर प्रकाश डालते हुए "पत्रकारिता का असली मकसद अपनी लेखनी से भ्रष्ट और गैरजिम्मेदार शासन की आलोचना करते हुए गरीब और आम आदमी के हक़ की लड़ाई लड़ना है तथा धार्मिक कट्टरपंथियो के विस्तार, हिंसक विचारों और उनके अंधविश्वासों के खिलाफ लड़ना है. पत्रकारिता की इन्ही कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए बांग्लादेश में कई ब्लॉगर शहीद हो चुके हैं और पाकिस्तान के सिंध व बलूचिस्तान प्रान्त में अपहरण के शिकार हो शासकों व सैनिकों के द्वारा दी जाने वाली मानसिक व शारीरिक यातना झेल रहे हैं" सुंदर टिप्पणी की है साथ ही हम जागरण वालों को जो कहना चाहते थे उस पर भी प्रकाश डाला है .

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय सिंह साहब ! सादर अभिनन्दन ! ब्लॉग पर आने और पोस्ट को सकारात्मक महसूस करने के लिए धन्यवाद ! व्यंग्यात्मक रूप से आपने प्रतिक्रया दी है ! आपने तालाब की बात की है तो पूरे देश का रिकार्ड तो मेरे पास नहीं है, किन्तु काशी में बड़े पैमाने पर अनगिनत तालाबों का कायाकल्प हुआ है ! एक ऐतिहासिक तालाब तो यहाँ से महज चाँद क़दमों की दूरी पर है, जिसका अच्छे ढंग से जीर्णोंद्धार हुआ है ! जनता भी इस काम में बहुत रूचि ले रही है ! डिजिटल इण्डिया की तरफ धीरे धीरे हम बढ़ रहे हैं ! कैशलेश इकोनॉमी होने में समय तो लगेगा ही ! बुलेट ट्रैन भी देर-सबेर चलेगी ही ! मनरेगा गरीब किसानों को तो रोजगार दे ही रही है ! रही बात सरकारी रोजगार तो उसकी स्थिति आप जानते ही हैं ! ऐसी स्थिति में स्किल डेवलपमेंट और स्वरोजगार का विशेष महत्व तो है ही ! स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत हेतु प्रयास जारी है और होना भी चाहिए, क्योंकि प्रयास न करने की अपेक्षा प्रयास करना ज्यादा अच्छी बात है ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय अच्युतमकेश्वम जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट की सराहना के लिए धन्यवाद ! निसंदेह बजट अच्छा है, किन्तु मध्यम वर्ग को आयकर मे थोड़ी और छूट देनी चाहिये थी ! किसानों के लिये कारगर विपणन की व्यबस्था अब बहुत जरूरी हो गई है ! बजट मे इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिये था ! अभीकुछ दिन पहले देश मे कुछ जगहों पर टमाटर लागत से भी कम एक रुपये किलो बिका है, जबकि उसी समय देश के अन्य हिस्सों मे टमाटर 10 रुपये से लेकर 80 रुपये किलो तक बिक रहा था ! यदि में एक अच्छी विपणन व्यवस्था होती तो किसानों को भारी क्षति नहीं उठानी पड़ती ! सरकारी खरीद एजेंसियाँ किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने मे फेल साबित हुई हैं ! किसानों की सबसे बड़ी समस्या यही है ! ब्लॉग पर समय देने के लिये सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

इस देश में टेक्स चोरी करने वाले लोग कितने चालाक हैं, इसकी एक बानगी देखिये ! एक बार में इनकम टेक्स के एक वकील साहब के यहाँ बैठा हुआ था ! वहाँ पर आने वाले लोग सबसे पहले वकील साहब से इनकम टेक्स में छूट की सीमा पूछते थे, उसके बाद कहते थे कि इतने का ही आईटीआर दाखिल कर दीजिये ! मैंने वकील साहब से पूछा कि इनकी असली इनकम क्या है ? वकील साहब हँसते हुए कहने लगे, 'यहाँ पर आने वाले टेक्स छूट के सिसाब से अपनी इनकम बताते हैं ! सरकार जिस साल इनकम टेक्स में छूट देती है, उस साल लोंगों की इनकम भी बढ़ जाती है !' उस दिन मुझे समझ में आया कि प्राइवेट क्षेत्र में स्वरोजगार और व्यवसायी वर्ग के अधिकतर आईटीआर महज ओपचारिकता निभाने और लोन लेने हेतु दाखिल होते हैं !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

प्रधानमंत्री मोदी को नोटबंदी का सुझाव देने का दावा करने वाली संस्था अर्थक्रांति आयकर खत्म करने की वकालत भी करती है ! अर्थक्रांति के प्रमुख अनिल बोकिल ने एक न्यूज चैनल के साथ खास बातचीत में कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को नोटबंदी का सुझाव दिए था ! अनिल बोकिल ने नोटबंदी का स्वागत करते हुए कहा कि नोटबंदी तो हो गई, लेकिन अभी आधा काम बचा है और वो है सारे टैक्स खत्म करके बीटीटी लागू करना ! अब वो बीटीटी लागू करने की सलाह दे रहे हैं. अनिल बोकिल बीटीटी को गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स यानी जीएसटी से भी बेहतर मानते हैं ! बीटीटी का मतलब है, बैंकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स अर्थात वो टैक्स जो बैंकिंग के जरिये होने वाले हर लेन-देन पर वसूला जाना चाहिये !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

अर्थक्रांति के प्रमुख अनिल बोकिल सुझाव देते हैं कि देश में वर्तमान समय में जारी डायरेक्ट टेक्स (इनकम टैक्स) सहित सभी तरह के इनडायरेक्ट टैक्स भी खत्म कर देना चाहिए और सिर्फ एक टेक्स बीटीटी लागू कर देना चाहिए. बीटीटी यानी बैंकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स की दर दो प्रतिशत रखने का वो सुझाव देते हैं ! अनिल बोकिल का सुझाव निश्चित रूप से बहुत अच्छा और क्रांतिकारी सुझाव है, किन्तु ये तभी देश में लागू हो सकता है, जब हमारे देश के सारी अर्थव्यवस्था नकदीरहित हो जाए ! फिलहाल तो उनके सुझाव पर अमल संभव नहीं है, क्योंकि देश में 90 प्रतिशत लेनदेन नकदी के रूप में हो रहा है और भारत की लगभग 73 फीसदी से भी अधिक आबादी इन्टरनेट व स्मार्टफोन आदि के प्रयोग से दूर है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

प्रधानमंत्री मोदी के नोटबंदी के ऐलान के बाद भारी तादाद में लोगों ने अपने-अपने खातों में पैसे जमा करवाए ! जिन लोंगों के पैसे अपनी कमाई के थे, उनके लिए चिंता की बात नहीं, किन्तु अब सरकार और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर उन खाते पर है जिसमें लोगों ने अवैध धन जमा करवाए हैं ! इस सिलसिले में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट बिग डेटा का इस्तेमाल करने जा रहा है ताकि नोटबंदी के चलते बैंकों में बड़े करेंसी नोट जमा कराने वाले ईमानदार करदाताओं में ब्लैक मनी छिपाने वालों को अलग-अलग छांटा जा सके ! मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ बिग डेटा ऐनालिटिक्स टूल के द्वारा टोटल इनकम टैक्स डेटा को चेक करके अनियमितता के बारे में पता लगाया जा रहा है ! इसके आधार पर टैक्स अधिकारी नोटिस भेज रहे हैं !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

दरअसल आयकर विभाग के रेडार पर वैसे लोग हैं जिनके खाते में नोटबंदी के बाद बहुत अधिक पैसे जमा हुए हैं और उनका लेनदेन संदिग्ध नजर आ रहा है ! आयकर विभाग ऐसे खातों में जमा पैसों के सोर्स की जानकारी जुटाकर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा ! अगर किसी टैक्सपेयर्स का जवाब सही नहीं पाया जाता है तो उन्हें जांच का सामना भी करना पड़ सकता है ! आयकर विभाग नोटबंदी के बाद बैंक खातों में जमा पैसे की जांच नोटबंदी के बाद से ही कर रहा है ! मीडिया में प्रकाशित ख़बरों के अनुसार आयकर विभाग ने ऐसे लोगों से ऑनलाइन इस जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कहा है ! जिनके जबाब संतोषजनक और उनके आयकर रिटर्न से मेल खाते हुए होंगे उनको परेशानी नहीं होगी !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: jlsingh jlsingh

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले 30 सालों से कांग्रेस से जुड़े रहे और राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले कांग्रेस के प्रभावशाली नेता ठाकुर धीरेंद्र सिंह बीजेपी में शामिल हो गए हैं. यूपी चुनाव के लिए तैयारी कर रही कांग्रेस के लिए यह बहुत बुरी खबर है. कहा जाता है कि धीरेंद्र सिंह ही वो नेता हैं, जिन्होंने भट्टा पारसौल गांवों में अधिग्रहण को लेकर हुए आन्दोलन के समय राहुल गांधी को बाइक पर बिठाकर मौके पर पहुंचाया था. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ठाकुर धीरेंद्र सिंह यूपी कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता भी थे. ऐसे जमीनी नेताओं का कांग्रेस से दूर भागना अपने आप में ही बहुत कुछ कह रहा है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

उन् ग्रामीण भाईओं की भूरी भूरी प्रंससा करनी चाहिए. वाकई यदि इन् ग्रामीणों की तरह सभी लोग किसी के भरोशे न रहकर खुद मेहनत करने की ठान लें तो हमारे देश की तस्वीर ही दूसरी होंगे. नेता तो वोट के लिए सिर्फ वादे पर वादे ही करते है, कास्ट के नाम पर वोट लूटते हैं पर जब काम की बरी आती है तो मुह फेर लेते हैं या पैसे या किसी प्रॉब्लम का रोना रोते हैं जबकि उन्हें पता होता है की यह काम या उनका वादा पूरा हो पायेगा या नहीं बल्कि सिर्फ जनता को लुभाने के लिए बातों के लच्छे बनाते हैं और अपना काम निकल जाने पर ठेंगा दिखा देते हैं. हमें सबसे पहले तो जाति, धर्म के नाम पर वोट न डालकर सिर्फ विकास के नाम पर ही वोट देना चाहिए और मुफ्त की सरकारी या किसी भी चीज पर देपेंद न हकर खुद की मेह्नत पर भरोषा करना चाहिए.

के द्वारा: Noopur Noopur

राहुल गांधी ने नोटबंदी के मामले को लेकर मोदी सरकार पर 11 सवाल दागे तो बीजेपी ने भी पलटवार किया और राहुल पर जवाबी हमला बोल दिया. उसपर भी गौर कीजिये. राहुल गांधी आरोपों में घिरे हुए हैं और उससे ध्यान हटाने के लिए बीजेपी पर आरोप लगा रहे हैं. राहुल गांधी को बताना चाहिए कि चॉपर स्कैम में मोटा माल किसने खाया. नोटबंदी से हुई मौतों पर दुख लेकिन कांग्रेस शासन में ढाई लाख से ज्यादा किसानों ने खुदकुशी की. 2012 में कांग्रेस ने काले धन पर एसआईटी क्यों नहीं बनाई? हमारी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया, किसानों को स्वाइल हेल्थ कार्ड दिए. बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मौतों पर राजनीति करती है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

कांग्रेस के स्थापना दिवस के मौके पर राहुल गांधी ने नोटबंदी के मामले को लेकर मोदी सरकार पर एक बार फिर अपने 11 सवाल दागे. जरा इन सवालों पर गौर कीजिये. बैंकों से पैसे निकालने की सीमा को खत्म किया जाना चाहिए. यह लोगों की वित्तीय आजादी छीन रही है. प्रधामंत्री ने लोगों को अपना पैसा बैंकों में जमा कराने पर मजबूर किया, अब बैंक से 24 हजार रुपये निकासी की सीमा हटाएं. किसानों का कर्ज माफ किया जाना चाहिए. किसानों को न्यूनतम समर्थन पर 20% बोनस दिया जाना चाहिए. मनरेगा के दिन और दिहाड़ी को दोगुना करें पीएम. बताइये, ये सवाल हैं या सुझाव? सुझाव भी ऐसे हैं जो यदि वो स्वयं सत्ता में रहते तो भी इन सुझावों को लागू नहीं कर पाते.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

यदि सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि राहुल गांधी को मोदी फोबिया हो गया है तो कोई गलत नहीं कह रहे हैं. ऐसा लगता है कि नोटबंदी के बाद राहुल गांधी को सोते-जागते, उठते-बैठते हर तरफ सिर्फ और सिर्फ मोदी ही दिखाई पड़ रहे हैं. लोग सोशल मीडिया के जरिए उनसे ये पूछ रहे रहे हैं कि देश में और भी समस्‍याएं हैं उन्‍हें क्यों नहीं वो उठा रहे हैं? उन्हें सिर्फ नोटबंदी ही पर ही इतनी तकलीफ क्‍यों हो रही है? पूरे देश की जनता चुपचाप अपने काम में लगी हुई है. कहीं पर भी ना कहीं कोई हंगामा हो रहा है और ना ही कहीं कोई जनआंदोलन, फिर भी राहुल गांधी, अरविन्द केजरीवाल और ममता बनर्जी जैसे नेता कुछ ज्यादा ही परेशान हैं. जनता को शक है कि उनकी दाल में जरूर कुछ काला है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार कहा हैं कि वो नोटबंदी को लेकर भ्रष्‍टाचार के खिलाफ एक वृहद् यज्ञ कर रहे हैं. राहुल गांधी का कहना है कि हर यज्ञ में किसी ना किसी की तो बलि चढ़ती ही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस यज्ञ में आम आदमी की बलि चढ़ रही है. उनके इस बयान के बाद अब सोशल मीडिया में उनकी जमकर खिंचाई शुरु हो गई है. राहुल गांधी इतने अल्पज्ञ हैं कि उन्हें यह भी नहीं मालूम कि यज्ञ में बलि नहीं, बल्कि हवन सामग्री की आहुति डाली जाती है. मोदी के नोटबंदी के यज्ञ में कालेधन की आहुति पड़ रही है. ये राहुल गांधी की मंदबुद्धि सोच का ही परिणाम है कि सोशल मीडिया पर लोग उनका मजाक उड़ाते हुए कह रहे हैं कि उन्‍हें मोदी फोबिया हो गया है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा, वो मोदी पर झूठे आरोप लगाने वालों को शर्मसार करने वाला है. मजेदार बात ये हैं कि नेताओं को बड़ी रकम देने वाली सहारा की तथाकथित लिस्ट में कांग्रेस के कई नेताओं के नाम भी हैं. उनमे से एक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की भावी मुख्यमंत्री उम्मीदवार श्रीमती शिला दीक्षित भी हैं. सहारा ने नेताओं को यदि वाकई करोड़ों रूपये दिए तो क्यों दिए? पब्लिक से पैसा लेकर सहारा ने कहाँ कहाँ खर्च किया और क्यों खर्च किया, यह तो सहारा से पूछा जाना चाहिए. सहारा यदि आज संकट में है और अनेकों समस्याओं से जूझ रही है तो इसके लिए कंपनी के जो सर्वेसर्वा हैं, सबसे ज्यादा वही जिम्मेदार हैं. यदि अपने वर्करों पर धन लुटाये होते तो कंपनी आज बहुत मजबूत होती.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sadguruji sadguruji

राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्‍यक्तिगत भ्रष्‍टाचार के वो आरोप लगा रहे हैं, जो न सिर्फ पुराने हो चुके हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट उसे खारिज भी कर चुकी है. कुछ रोज पहले उन्‍होंने भूकम्प लाने की चेतावनी देते हुए मोदी पर सहारा से चालीस करोड़ रुपए लेने के आरोप लगाए. इस पर वो लगातार हर जनसभा में बीजेपी और पीएम से जवाब मांग रहे हैं. जानेमाने वकील प्रशांत भूषण ने ये मामला एक जनहित याचिका के जरिये सुप्रीम कोर्ट में उठाया था. कोर्ट ने प्रशांत भूषण से कहा कि अगर वो इस मामले की जांच कराना चाहते हैं या इस मामले को लेकर वाकई गंभीर हैं तो कोई ठोस सुबूत इस अदालत मे अगली तारीख तक पेश करें. इस मामले में कोई भी ठोस सबूत नहीं है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मोदी के सत्ता संभालने से लेकर अबतक राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला कर रहे हैं. खासकर, जबसे मोदी ने नोटबंदी का फैसला लिया है. ये राजनीतिक रूप से अपरिपक्वता और मूर्खता ही कही जायेगी कि राहुल गांधी की कई रैलियों और कार्यक्रमों में लोग मोदी-मोदी के नारे लगाकर उनकी हूटिंग करके उन्‍हें करारा जवाब भी दे चुके हैं, लेकिन, फिर भी राहुल गांधी के उलटे सीधे अनाड़ियों वाले वार जारी हैं. नितीश जैसे जो राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं वो फिलहाल इस समय चुप हैं. कालाधन रखने और खपाने वाले जिन नेताओं को नोटबंदी से भारी नुकसान हुआ है, वही नेता आम जनता की परेशानी की आड़ लेकर ज्यादा चिल्ला रहे हैं.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal