सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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sadguruji


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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

रही बात पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सम्मान की तो मुझे लगता है कि मोदी सरकार ने उनका सम्मान करते हुए बहुत से मुसीबतों से उन्हें बचा रखा है, जैसा कि अक्सर बड़े नेता एकदूसरे के लिए करते हैं, भले ही सार्वजनिक रूप से जनता के सामने वो एकदूसरे को लाख भलाबुरा कहें. मनमोहन सिंह का अपमान सबसे ज्यादा तो खुद कांग्रेसी नेताओं ने ही किया है. देश की जनता को अच्छी तरह से याद है कि राहुल गांधी ने दागी नेताओं पर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए एक ऑर्डिनेंस की कॉपी को भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में फाड़कर अपना विरोध जताया था और उसे मानने से इंकार कर दिया था. कांग्रेस से कोई पूछे कि मनमोहन सिंह की अगुआई वाली भारत सरकार द्वारा जारी ऑर्डिनेंस को फाड़ने से क्या तत्कालीन पीएम मनमोहन की प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुंची थी?

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में संवैधानिक मर्यादा की तमाम सीमाओं को लांघते हुए नोटबंदी को संगठित लूट और कानूनी डाका कहा था. क्या यह पीएम मोदी, संविधान, सदन और बहुमत देने वाली जनता का अपमान नहीं है. देश को मंदी से बचाते हुए और तमाम जरुरी आर्थिक सुधार करते हुए जो मोदी भारत के संकटमोचक साबित हुए हैं, उन्ही के बारे में लोकसभा चुनाव से पहले मनमोहन सिंह ने कहा था कि मुझे ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना देश के लिए त्रासदी से कम नहीं होगा. मनमोहन सिंह उस समय भय और पूर्वाग्रह से ग्रस्त थे जो ऐसा बोल गए. ये बड़ी हास्यास्पद बात है कि मनमोहन सिंह खुद देश के लिए एक बड़ी त्रासदी साबित हुए और दूसरों के बारे में वो ऐसा सोचते और कहते हैं.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी आपने मीडिया में पत्रकारिता पर प्रकाश डालते हुए "पत्रकारिता का असली मकसद अपनी लेखनी से भ्रष्ट और गैरजिम्मेदार शासन की आलोचना करते हुए गरीब और आम आदमी के हक़ की लड़ाई लड़ना है तथा धार्मिक कट्टरपंथियो के विस्तार, हिंसक विचारों और उनके अंधविश्वासों के खिलाफ लड़ना है. पत्रकारिता की इन्ही कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए बांग्लादेश में कई ब्लॉगर शहीद हो चुके हैं और पाकिस्तान के सिंध व बलूचिस्तान प्रान्त में अपहरण के शिकार हो शासकों व सैनिकों के द्वारा दी जाने वाली मानसिक व शारीरिक यातना झेल रहे हैं" सुंदर टिप्पणी की है साथ ही हम जागरण वालों को जो कहना चाहते थे उस पर भी प्रकाश डाला है .

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय सिंह साहब ! सादर अभिनन्दन ! ब्लॉग पर आने और पोस्ट को सकारात्मक महसूस करने के लिए धन्यवाद ! व्यंग्यात्मक रूप से आपने प्रतिक्रया दी है ! आपने तालाब की बात की है तो पूरे देश का रिकार्ड तो मेरे पास नहीं है, किन्तु काशी में बड़े पैमाने पर अनगिनत तालाबों का कायाकल्प हुआ है ! एक ऐतिहासिक तालाब तो यहाँ से महज चाँद क़दमों की दूरी पर है, जिसका अच्छे ढंग से जीर्णोंद्धार हुआ है ! जनता भी इस काम में बहुत रूचि ले रही है ! डिजिटल इण्डिया की तरफ धीरे धीरे हम बढ़ रहे हैं ! कैशलेश इकोनॉमी होने में समय तो लगेगा ही ! बुलेट ट्रैन भी देर-सबेर चलेगी ही ! मनरेगा गरीब किसानों को तो रोजगार दे ही रही है ! रही बात सरकारी रोजगार तो उसकी स्थिति आप जानते ही हैं ! ऐसी स्थिति में स्किल डेवलपमेंट और स्वरोजगार का विशेष महत्व तो है ही ! स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत हेतु प्रयास जारी है और होना भी चाहिए, क्योंकि प्रयास न करने की अपेक्षा प्रयास करना ज्यादा अच्छी बात है ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय अच्युतमकेश्वम जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट की सराहना के लिए धन्यवाद ! निसंदेह बजट अच्छा है, किन्तु मध्यम वर्ग को आयकर मे थोड़ी और छूट देनी चाहिये थी ! किसानों के लिये कारगर विपणन की व्यबस्था अब बहुत जरूरी हो गई है ! बजट मे इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिये था ! अभीकुछ दिन पहले देश मे कुछ जगहों पर टमाटर लागत से भी कम एक रुपये किलो बिका है, जबकि उसी समय देश के अन्य हिस्सों मे टमाटर 10 रुपये से लेकर 80 रुपये किलो तक बिक रहा था ! यदि में एक अच्छी विपणन व्यवस्था होती तो किसानों को भारी क्षति नहीं उठानी पड़ती ! सरकारी खरीद एजेंसियाँ किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने मे फेल साबित हुई हैं ! किसानों की सबसे बड़ी समस्या यही है ! ब्लॉग पर समय देने के लिये सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

इस देश में टेक्स चोरी करने वाले लोग कितने चालाक हैं, इसकी एक बानगी देखिये ! एक बार में इनकम टेक्स के एक वकील साहब के यहाँ बैठा हुआ था ! वहाँ पर आने वाले लोग सबसे पहले वकील साहब से इनकम टेक्स में छूट की सीमा पूछते थे, उसके बाद कहते थे कि इतने का ही आईटीआर दाखिल कर दीजिये ! मैंने वकील साहब से पूछा कि इनकी असली इनकम क्या है ? वकील साहब हँसते हुए कहने लगे, 'यहाँ पर आने वाले टेक्स छूट के सिसाब से अपनी इनकम बताते हैं ! सरकार जिस साल इनकम टेक्स में छूट देती है, उस साल लोंगों की इनकम भी बढ़ जाती है !' उस दिन मुझे समझ में आया कि प्राइवेट क्षेत्र में स्वरोजगार और व्यवसायी वर्ग के अधिकतर आईटीआर महज ओपचारिकता निभाने और लोन लेने हेतु दाखिल होते हैं !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

प्रधानमंत्री मोदी को नोटबंदी का सुझाव देने का दावा करने वाली संस्था अर्थक्रांति आयकर खत्म करने की वकालत भी करती है ! अर्थक्रांति के प्रमुख अनिल बोकिल ने एक न्यूज चैनल के साथ खास बातचीत में कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को नोटबंदी का सुझाव दिए था ! अनिल बोकिल ने नोटबंदी का स्वागत करते हुए कहा कि नोटबंदी तो हो गई, लेकिन अभी आधा काम बचा है और वो है सारे टैक्स खत्म करके बीटीटी लागू करना ! अब वो बीटीटी लागू करने की सलाह दे रहे हैं. अनिल बोकिल बीटीटी को गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स यानी जीएसटी से भी बेहतर मानते हैं ! बीटीटी का मतलब है, बैंकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स अर्थात वो टैक्स जो बैंकिंग के जरिये होने वाले हर लेन-देन पर वसूला जाना चाहिये !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

अर्थक्रांति के प्रमुख अनिल बोकिल सुझाव देते हैं कि देश में वर्तमान समय में जारी डायरेक्ट टेक्स (इनकम टैक्स) सहित सभी तरह के इनडायरेक्ट टैक्स भी खत्म कर देना चाहिए और सिर्फ एक टेक्स बीटीटी लागू कर देना चाहिए. बीटीटी यानी बैंकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स की दर दो प्रतिशत रखने का वो सुझाव देते हैं ! अनिल बोकिल का सुझाव निश्चित रूप से बहुत अच्छा और क्रांतिकारी सुझाव है, किन्तु ये तभी देश में लागू हो सकता है, जब हमारे देश के सारी अर्थव्यवस्था नकदीरहित हो जाए ! फिलहाल तो उनके सुझाव पर अमल संभव नहीं है, क्योंकि देश में 90 प्रतिशत लेनदेन नकदी के रूप में हो रहा है और भारत की लगभग 73 फीसदी से भी अधिक आबादी इन्टरनेट व स्मार्टफोन आदि के प्रयोग से दूर है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

प्रधानमंत्री मोदी के नोटबंदी के ऐलान के बाद भारी तादाद में लोगों ने अपने-अपने खातों में पैसे जमा करवाए ! जिन लोंगों के पैसे अपनी कमाई के थे, उनके लिए चिंता की बात नहीं, किन्तु अब सरकार और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर उन खाते पर है जिसमें लोगों ने अवैध धन जमा करवाए हैं ! इस सिलसिले में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट बिग डेटा का इस्तेमाल करने जा रहा है ताकि नोटबंदी के चलते बैंकों में बड़े करेंसी नोट जमा कराने वाले ईमानदार करदाताओं में ब्लैक मनी छिपाने वालों को अलग-अलग छांटा जा सके ! मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ बिग डेटा ऐनालिटिक्स टूल के द्वारा टोटल इनकम टैक्स डेटा को चेक करके अनियमितता के बारे में पता लगाया जा रहा है ! इसके आधार पर टैक्स अधिकारी नोटिस भेज रहे हैं !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

दरअसल आयकर विभाग के रेडार पर वैसे लोग हैं जिनके खाते में नोटबंदी के बाद बहुत अधिक पैसे जमा हुए हैं और उनका लेनदेन संदिग्ध नजर आ रहा है ! आयकर विभाग ऐसे खातों में जमा पैसों के सोर्स की जानकारी जुटाकर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा ! अगर किसी टैक्सपेयर्स का जवाब सही नहीं पाया जाता है तो उन्हें जांच का सामना भी करना पड़ सकता है ! आयकर विभाग नोटबंदी के बाद बैंक खातों में जमा पैसे की जांच नोटबंदी के बाद से ही कर रहा है ! मीडिया में प्रकाशित ख़बरों के अनुसार आयकर विभाग ने ऐसे लोगों से ऑनलाइन इस जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कहा है ! जिनके जबाब संतोषजनक और उनके आयकर रिटर्न से मेल खाते हुए होंगे उनको परेशानी नहीं होगी !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: jlsingh jlsingh

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले 30 सालों से कांग्रेस से जुड़े रहे और राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले कांग्रेस के प्रभावशाली नेता ठाकुर धीरेंद्र सिंह बीजेपी में शामिल हो गए हैं. यूपी चुनाव के लिए तैयारी कर रही कांग्रेस के लिए यह बहुत बुरी खबर है. कहा जाता है कि धीरेंद्र सिंह ही वो नेता हैं, जिन्होंने भट्टा पारसौल गांवों में अधिग्रहण को लेकर हुए आन्दोलन के समय राहुल गांधी को बाइक पर बिठाकर मौके पर पहुंचाया था. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ठाकुर धीरेंद्र सिंह यूपी कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता भी थे. ऐसे जमीनी नेताओं का कांग्रेस से दूर भागना अपने आप में ही बहुत कुछ कह रहा है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

उन् ग्रामीण भाईओं की भूरी भूरी प्रंससा करनी चाहिए. वाकई यदि इन् ग्रामीणों की तरह सभी लोग किसी के भरोशे न रहकर खुद मेहनत करने की ठान लें तो हमारे देश की तस्वीर ही दूसरी होंगे. नेता तो वोट के लिए सिर्फ वादे पर वादे ही करते है, कास्ट के नाम पर वोट लूटते हैं पर जब काम की बरी आती है तो मुह फेर लेते हैं या पैसे या किसी प्रॉब्लम का रोना रोते हैं जबकि उन्हें पता होता है की यह काम या उनका वादा पूरा हो पायेगा या नहीं बल्कि सिर्फ जनता को लुभाने के लिए बातों के लच्छे बनाते हैं और अपना काम निकल जाने पर ठेंगा दिखा देते हैं. हमें सबसे पहले तो जाति, धर्म के नाम पर वोट न डालकर सिर्फ विकास के नाम पर ही वोट देना चाहिए और मुफ्त की सरकारी या किसी भी चीज पर देपेंद न हकर खुद की मेह्नत पर भरोषा करना चाहिए.

के द्वारा: Noopur Noopur

राहुल गांधी ने नोटबंदी के मामले को लेकर मोदी सरकार पर 11 सवाल दागे तो बीजेपी ने भी पलटवार किया और राहुल पर जवाबी हमला बोल दिया. उसपर भी गौर कीजिये. राहुल गांधी आरोपों में घिरे हुए हैं और उससे ध्यान हटाने के लिए बीजेपी पर आरोप लगा रहे हैं. राहुल गांधी को बताना चाहिए कि चॉपर स्कैम में मोटा माल किसने खाया. नोटबंदी से हुई मौतों पर दुख लेकिन कांग्रेस शासन में ढाई लाख से ज्यादा किसानों ने खुदकुशी की. 2012 में कांग्रेस ने काले धन पर एसआईटी क्यों नहीं बनाई? हमारी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया, किसानों को स्वाइल हेल्थ कार्ड दिए. बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मौतों पर राजनीति करती है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

कांग्रेस के स्थापना दिवस के मौके पर राहुल गांधी ने नोटबंदी के मामले को लेकर मोदी सरकार पर एक बार फिर अपने 11 सवाल दागे. जरा इन सवालों पर गौर कीजिये. बैंकों से पैसे निकालने की सीमा को खत्म किया जाना चाहिए. यह लोगों की वित्तीय आजादी छीन रही है. प्रधामंत्री ने लोगों को अपना पैसा बैंकों में जमा कराने पर मजबूर किया, अब बैंक से 24 हजार रुपये निकासी की सीमा हटाएं. किसानों का कर्ज माफ किया जाना चाहिए. किसानों को न्यूनतम समर्थन पर 20% बोनस दिया जाना चाहिए. मनरेगा के दिन और दिहाड़ी को दोगुना करें पीएम. बताइये, ये सवाल हैं या सुझाव? सुझाव भी ऐसे हैं जो यदि वो स्वयं सत्ता में रहते तो भी इन सुझावों को लागू नहीं कर पाते.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

यदि सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि राहुल गांधी को मोदी फोबिया हो गया है तो कोई गलत नहीं कह रहे हैं. ऐसा लगता है कि नोटबंदी के बाद राहुल गांधी को सोते-जागते, उठते-बैठते हर तरफ सिर्फ और सिर्फ मोदी ही दिखाई पड़ रहे हैं. लोग सोशल मीडिया के जरिए उनसे ये पूछ रहे रहे हैं कि देश में और भी समस्‍याएं हैं उन्‍हें क्यों नहीं वो उठा रहे हैं? उन्हें सिर्फ नोटबंदी ही पर ही इतनी तकलीफ क्‍यों हो रही है? पूरे देश की जनता चुपचाप अपने काम में लगी हुई है. कहीं पर भी ना कहीं कोई हंगामा हो रहा है और ना ही कहीं कोई जनआंदोलन, फिर भी राहुल गांधी, अरविन्द केजरीवाल और ममता बनर्जी जैसे नेता कुछ ज्यादा ही परेशान हैं. जनता को शक है कि उनकी दाल में जरूर कुछ काला है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार कहा हैं कि वो नोटबंदी को लेकर भ्रष्‍टाचार के खिलाफ एक वृहद् यज्ञ कर रहे हैं. राहुल गांधी का कहना है कि हर यज्ञ में किसी ना किसी की तो बलि चढ़ती ही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस यज्ञ में आम आदमी की बलि चढ़ रही है. उनके इस बयान के बाद अब सोशल मीडिया में उनकी जमकर खिंचाई शुरु हो गई है. राहुल गांधी इतने अल्पज्ञ हैं कि उन्हें यह भी नहीं मालूम कि यज्ञ में बलि नहीं, बल्कि हवन सामग्री की आहुति डाली जाती है. मोदी के नोटबंदी के यज्ञ में कालेधन की आहुति पड़ रही है. ये राहुल गांधी की मंदबुद्धि सोच का ही परिणाम है कि सोशल मीडिया पर लोग उनका मजाक उड़ाते हुए कह रहे हैं कि उन्‍हें मोदी फोबिया हो गया है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा, वो मोदी पर झूठे आरोप लगाने वालों को शर्मसार करने वाला है. मजेदार बात ये हैं कि नेताओं को बड़ी रकम देने वाली सहारा की तथाकथित लिस्ट में कांग्रेस के कई नेताओं के नाम भी हैं. उनमे से एक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की भावी मुख्यमंत्री उम्मीदवार श्रीमती शिला दीक्षित भी हैं. सहारा ने नेताओं को यदि वाकई करोड़ों रूपये दिए तो क्यों दिए? पब्लिक से पैसा लेकर सहारा ने कहाँ कहाँ खर्च किया और क्यों खर्च किया, यह तो सहारा से पूछा जाना चाहिए. सहारा यदि आज संकट में है और अनेकों समस्याओं से जूझ रही है तो इसके लिए कंपनी के जो सर्वेसर्वा हैं, सबसे ज्यादा वही जिम्मेदार हैं. यदि अपने वर्करों पर धन लुटाये होते तो कंपनी आज बहुत मजबूत होती.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sadguruji sadguruji

राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्‍यक्तिगत भ्रष्‍टाचार के वो आरोप लगा रहे हैं, जो न सिर्फ पुराने हो चुके हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट उसे खारिज भी कर चुकी है. कुछ रोज पहले उन्‍होंने भूकम्प लाने की चेतावनी देते हुए मोदी पर सहारा से चालीस करोड़ रुपए लेने के आरोप लगाए. इस पर वो लगातार हर जनसभा में बीजेपी और पीएम से जवाब मांग रहे हैं. जानेमाने वकील प्रशांत भूषण ने ये मामला एक जनहित याचिका के जरिये सुप्रीम कोर्ट में उठाया था. कोर्ट ने प्रशांत भूषण से कहा कि अगर वो इस मामले की जांच कराना चाहते हैं या इस मामले को लेकर वाकई गंभीर हैं तो कोई ठोस सुबूत इस अदालत मे अगली तारीख तक पेश करें. इस मामले में कोई भी ठोस सबूत नहीं है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मोदी के सत्ता संभालने से लेकर अबतक राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला कर रहे हैं. खासकर, जबसे मोदी ने नोटबंदी का फैसला लिया है. ये राजनीतिक रूप से अपरिपक्वता और मूर्खता ही कही जायेगी कि राहुल गांधी की कई रैलियों और कार्यक्रमों में लोग मोदी-मोदी के नारे लगाकर उनकी हूटिंग करके उन्‍हें करारा जवाब भी दे चुके हैं, लेकिन, फिर भी राहुल गांधी के उलटे सीधे अनाड़ियों वाले वार जारी हैं. नितीश जैसे जो राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं वो फिलहाल इस समय चुप हैं. कालाधन रखने और खपाने वाले जिन नेताओं को नोटबंदी से भारी नुकसान हुआ है, वही नेता आम जनता की परेशानी की आड़ लेकर ज्यादा चिल्ला रहे हैं.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाब नबी आजाद ने राज्यसभा में नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी के फैसले की वजह से 40 लोग मारे गए हैं. सरकार की गलत नीति से जितने लोग मर गए हैं, उससे आधे तो पाकिस्तानी आतंकियों ने उरी हमले में नहीं मारे थे. गुलाब नबी आजाद जैसे पुराने कांग्रेसी नेता कितना विचित्र और बेतुका बयान देते हैं. उरी हमले से लाइन में खड़े लोंगो की तुलना करना शहीद सैनिकों का अपमान है. क्या लाइन में खड़े सभी लोंगों को दिक्कत हो रही है, नहीं, बल्कि लाइन में खड़े कुछ अति वृद्ध लोग जो शरीर छोड़े हैं, उसकी मूल वजह उनके विभिन्न तरह रोग थे. ये बात जरूर है कि उनके लिए रूपये देने की एक अलग से व्यवस्था करनी चाहिए थी.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट की सराहना के लिए धन्यवाद ! इसमें कोई संदेह नहीं कि बहुत से नेताओं के पास अथाह कालाधन कालाधन रहा होगा ! अचानक हुई नोटबंदी के कारण वो उसे खपा नहीं पाये, असली दुःख शायद उनका यही है ! इसी से आगबबूला हो वो इस समय जो दिशाहीन और विचित्र राजनीति कर रहे हैं ! सब विपक्षी नेता कह रहे हाइंज कि कालेधन का वो सपोर्ट नहीं करते हैं, लेकिन नोटबंदी का विरोध करते हैं ! वो मोदी सरकार पर दबाब बना कुछ दिनों तक पुराने नोट चलवाने की मोहलत चाह रहे हैं ! सरकार की को किसी भी हालत में नोटबंदी का फैसला वापस नहीं लेना चाहिए, नहीं तो आम जनता का विश्वास उसपर से उठ जाएगा ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय विष्ट जी ! सादर अभिनन्दन ! बधाई देने के लिए धन्यवाद ! बेटी की गुल्लक टूटते समय मैं परेशान था कि अब वो रोयेगी, लेकिन वो रोइ नहीं, बस नया गुल्लक ला के देने का आग्रह की ! उसकी यही बात दिल को छू गई और मुझे भावुक कर दी ! टीवी पर कार्टून चैनल सीएन देखना उसे बहुत पसंद है, किन्तु कुछ देर वो मेरे साथ बैठकर न्यूज भी देख सुन लेती है ! उसी का असर है कि नोटबन्दी से होने वाली दिक्कतों का एहसास उसे है ! बच्चे यदि समझ रहे है कि गुल्लक से बड़ा देश है तो बड़ों को भी देशहित में ये समझना चाहिए कि छुपाकर रखे गए कालेधन का मोह छोड़ें और नोटबंदी के कारण हो रही दिक्कतों का सामना देशप्रेम की भावना से करें ! प्रतिक्रिया और बधाई देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

पीएम मोदी के भाषण से बौखलाए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने उन पर पलटवार करते हुए प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर कहा, "प्रधानमंत्री जापान से आए और उन्‍होंने नोटबंदी के कारण लोगों को हो रही दिक्‍कत के मद्देनजर 50 दिन तक सहयोग करने की मांग की तो क्‍या आम आदमी अगले 50 दिनों तक और कष्‍ट उठाता रहेगा? क्‍या लोगों को अगले 50 और दिनों तक लाइन में खड़े होकर गुजारने होंगे? जनता 50 दिन तो क्‍या 50 घंटे तक इंतजार करने के मूड में नहीं है. पूरे देश में इमर्जेंसी जैसे हालात हैं. लोग भूखों मर रहे हैं." उन्‍होंने कहा, "मोदी जी अहंकार छोड़िए और नोटबंदी के फैसले को वापस ले लीजिये. नोटबंदी का फैसला वापस लेने के अलावा और कोई दूसरा उपाय नहीं है. सरकार चाहे तो इंतजाम पुख्ता कर इस नियम को फिर से लागू कर सकती है." आम जनता अभी भी प्रधानमन्त्री जी का साथ दे रही है, अत: केजरीवाल जी की बातें लोंगो को भड़काने के लिये ही कही जा रही हैं. विपक्षी नेता नोट बंदी के मुद्दे पर जनता को भड़कायेंगे, यह बात सरकार को पता होनी चाहिये थी, इसलिये देश मे नक़दी की कमी न हो, इसकी समुचित व्यवस्था करनी चाहिये थी. सरकार को बैंक और एटीम से रुपये बदलवाने, जमा करने और एटीम से नकद लेने की व्यवस्था तुरन्त सही करनी चाहिये और शादी-विवाह वाले मामलों मे कुछ छूट जरूर देनी चाहिये. देश की अधिकतर जनता प्रधानमन्त्री मोदी के साथ है. जनता केवल थोड़ी और राहत व छूट चाह रही है, जो उसे मिलना चाहिये.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

गोवा में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के शिलान्यास के बाद नोटबंदी के फैसले पर अपनी बात रखते हुए प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की आंखों से आंसू बहने लगे और उन्होंने जनता से भावुक अपील करते हुए कहा, "किसी को तकलीफें होती है तो मुझे भी होती है. मैंने बुराइयों को निकट से देखा है. देश के लिए मैंने अपना घर परिवार छोड़ा है, अपना सब कुछ देश के नाम कर दिया है. मैं जानता हूं मैंने कैसी कैसी ताकतों से लड़ाई मोल ले ली है. जानता हूं कैसे लोग मेरे खिलाफ हो जाएंगे. मुझे ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे, मुझे बर्बाद कर देंगे. लेकिन मैं हार नहीं मानूंगा. आप सिर्फ 50 दिन मेरी मदद करें. मेरा साथ दें. मैंने देश से सिर्फ पचास दिन मांगे है, 30 दिसंबर तक का वक्त दीजिए. उसके बाद अगर मेरी कोई गलती निकल जाए, गलत इरादे निकल जाए, कोई कमी रह जाए तो जिस चौराहे पर खड़ा करेंगे खड़ा होकर, देश जो सजा देगा उसे भुगतने के लिए तैयार हूं."

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सिंह साहब ! ब्लॉग पर आपका और आपके विचारों का स्वागत है ! मेरे विचार से नोट बंदी का निर्णय बिल्कुल सही और ऐतिहासिक है ! कालाधन यदि राजनीतिक दलों, धार्मिक स्थलों और बहुत से लोंगो के पास है तो उसे भजाने के लिए आखिर में वो बैंक ही तो जाएंगे ! कालाधन कहीं भी हो, उजागर तो होगा ही ! टैक्स के रूप में सरकार को भारी आय भी होगी ! सीमापार से आ रहे फर्जी नोट और आतंक में कमी आएगी ! देश की साख बढ़ेगी ! रही बात कफ़न और शादी की तो दोनों ही जारी है ! कहीं कुछ रुका नहीं है ! मेरे पास इस माह होने वाली शादियों के कई निमन्त्रण पत्र हैं ! मैंने उनसे पूछ कि नोटबंदी से शादी में दिक्कत हो रही होगी ? उन्होंने कहा थोड़ी दिक्कत तो है, पर चेक सब लोग ले रहे हैं ! शादी के वास्ते जो रूपये घर में रखे थे, वो अपने खाते में जमा कर दिए ! देश की जनता इन दिनों जो थोड़े से लेकर बहुत तक कष्ट झेलकर राष्ट्रहित में जो तपस्या कर रही है, वो अनुपम और अद्वितीय है ! उन्हें कोटि कोटि नमन ! केवल जिसकी सुरक्षा पर लाखों रूपये खर्च होते हों और जिसके दैनिक खर्च का कोई हिसाब न हो वो राहुल गांधी चार हजार रूपये के लिए लाइन में खड़े होकर सेल्फी देते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, मीडिया को एक ब्रैकिंग न्यूज देते हैं और ये सब ड्रामा कर अपमान महल में चले जाते हैं ! कभी किसी लाश पर राजनीति तो कभी सरकार की किसी अच्छी घोषणा पर भी राजनीति ! जनता उनकी इन सब हरकतों से ऊब चुकी है, इसलिए उनकी गतिविधियों को गंभीरता से नहीं लेती है ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! आपने पुनः मोदी जी को सर्वगुण संपन्न साबित कर दिया. भारत के इतिहास में या काम से काम ७० साल के इतिहास में कम से कम एक ब्यक्ति तो सबसे अलग है! भगवान राम, कृष्ण, बुद्ध आदि को भी सब लोग उनके समय में कहाँ पहचान पाए थे. मोदी जी को भी लोग बाद में अवश्य भगवान मान लेंगे. उनकी बुद्धिमत्ता और चमत्कारिक निर्णय लेने की क्षमता को बधाई है. हाँ कुछ लोग अवश्य बेवजह टी वी चिल्ला रहे हैं या कहें शोर मैच रहे हैं. बैकों या ATM के सामने लाइन में खड़े रहने वाले भी सभी सामान्य जान मोदी जी के इस कदम की भूरी भूरी प्रशंशा कर रहे हैं. अब वे लोग क्या करें जिनके भाग्य में कष्ट लिखा है. बड़ी मुश्किल से बेटी की शादी ठीक हुई. पैसे निकाल कर घर में रक्खे थे. उन्हें ये पता होना चाहिए था की कभी भी यह पैसा काला हो सकता है. मरनेवाले भी मोदी विरोधी ही होंगे जो इन्ही दिनों मर रहे हैं. अच्छा हो रहा है की उनके लिए कफ़न भी नशीब नहीं हो रहा. कोई तो मदद करता उन्हें... पर मानवता आज मर चुकी है. ... अलबत्ता राहुल गाँधी के अलावा किसी छुटभैये नेता को भी बैंकों की लाइन में नहीं देखा गया. कितने संपन्न हैं ये लोग ! भाजपा के किसी नेता के पास काला धन तो है ही नहीं... ये सभी चुनाव रैलियां सफ़ेद धन से ही करते होंगे. मोदी जी की सभाओं में भीड़ भी ऐसे ही चली आती है... आप समझ रहे होंगे मेरी बात! अब बहुत सारे मंदिरों मस्जिदों का क्या होगा? जो भी होगा छह ही होगा. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

मीडिया में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुरुवार को अपने चार हजार रुपए बदलने दिल्ली के संसद मार्ग स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच पहुंचे. वो आम लोंगों कि दिक्कत समझने गए थे, किन्तु हँसते मुस्कुराते हुए सेल्फी देते रहे और मीडिया में छाने के लिए गंभीर होने की एक्टिंग भी करते रहे. वो बैंक वालों पर आरोप लगाने लगे कि मुझे देख लोंगो को अंदर बुला लिया गया. राहुल गांधी के इस कार्यक्रम पर भाजपा के प्रवक्ता अनिल बलूनी ने कहा, ‘राहुल गांधी कालेधन से परेशान हैं. आज तक गांधी परिवार का कोई सदस्य बैंक नहीं गया है. ये रॉयल परिवार से ताल्लुक रखने वाले राहुल गांधी को बैंक पहुंचने की क्या जरूरत है?'

के द्वारा: sadguruji sadguruji

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी देश में क्या कारन है की सारे आरोप हिन्दू गुरु और संतो पर लगाये जाते मौलवियों.पादरिओ पर नहीं और मीडिया केवल हिन्दुओ पर आक्रामक रहता.इसाई मिशन के पास बहुत पैसा है वे भारत में धर्मान्तर और दुसरी अवैध गतिविधिया करवाते थे.हमारे धर्म गुरु खास कर बापू आसारामजी उनकी गत्विधियो को पत्रिका प्रवचनों द्वारा लोगो को बताते थे जिससे नाराज़ हो कर उन्होंने सोनिया गाँधी से कह कर बापूजी को झूटे केस में फस्वाया मीडिया तो चर्च के पैसे के दम पर उनका ट्रायल करता रहा और जब मीडिया में उचल जाये अदालते भी प्रभीवित होती हमारे धर्मगुरु देश विदेशो में अपने धर्म के लिए कितना अच्छा कार्य करके मानवता की सेवा में लगे है उसके लिए आदर और धन्यवाद् के पात्र है कुछ गलत माचालिया हो सकती लेकिन उसके लिए सबको गलत नहीं हाहा जा सकता लेकिन लालू,मुलायम,माया कांग्रेस ने देश को लूटा उनका क्या हुआ.जैसे आपको चिंता हम भी चितित है लेकिन हम उनके बारे में पढ़ते इसलिए कुछ मालुम है. आपके विचारो के लिए धन्यवाद्.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

J.L. SINGH (ईमेल पर प्राप्त एक प्रतिक्रिया) आज भारतवर्ष में ऊपर से लेकर नीचे तक सब झूठ, फरेब और भ्रस्टाचार के दल-दल में आकंठ डूबे हुए हैं, तभी तो देश की नैतिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से दिन-प्रतिदिन दुर्दशा बढ़ती ही जा रही है. देश तभी सुधरेगा, जब देश का हर व्यक्ति स्वयम को शिक्षा देकर अपने को सुधारेगा. आज जरुरत इस बात की है कि देश का हर व्यक्ति स्वयम का गुरु बने और स्वयम को ही सबसे पहले शिक्षित करे. शुबह शुबह आपका ज्ञान भरा आलेख पढ़ा तो मन तृप्त हो गया. आज ऐसे ही साक्षत स्वयम सिद्ध भगवन सूर्य का प्रथम अर्घ्य का दिन सूर्य षष्टी व्रत है. आज हम साक्षात् देव् शक्ति द्योतक सूर्य भगवन की आरधना करते हैं. उनके साथ, पृथ्वी, जल, आकाश और अग्नि और पवन की या कहें की प्रकृति की पूजा करते हैं. प्रकृति ही हमारी सृष्टी करती है, वही सब कुछ सिखाती है वही जीवन यापन का सारा सामान मुहैया कराती है. हम सब प्रकृति के उपासक बनें. आत्मज्ञान प्राप्त करें. और "परहित सरिस धर्म नहीं भाई" की अवधारणा में बिश्वास रक्खें यही सर्वोत्तम होगा. सभी जाने मने संत अंत में स्वार्थी ही सिद्ध होते हैं. अपवाद स्वरुप भी हैं. जिनकी अवश्य पूजा और सम्मान सर्वदा होता रहता है. सादर! पोस्ट पर फिर से प्रतिक्रिया नहीं जा रही इसलिए आपको मेल कर रहा हूँ.

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जय श्री राम आदरणीय सद्गुरु जी जिस देश के नेता कुर्सी के लिए देश तक बेच दे उस देश में कोइ क्रांतिकारी कदम उठाना कितना खतरनाक है आप समझते है ! इस मुद्दे में भी सेक्युलर नेता इस प्रथा पर निर्णय लेने का अधिकार मुस्लिम सानुदाय पर छोड़ना चाहते और मोदीजी की आलोचना सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा देने के लिए कर रहे. मुस्लिम नेता मान मर्यादा छोड़ हिन्दुओ और धर्म को गली दे रही प्रधानमंत्री को भी नहीं छोड़ रहे. ये धर्म का नहीं खुद का बनाया है और अपनी अहमीयत के लिए सुधार नहीं चाहते.! चूंकि मामला अदालत में है उसी लो निर्णय दे. राज्य सभा में बहुमत नहीं इसलिए संविधान संसोधन नहीं हो सकता. सुन्दर विवेचना के लिए आभार और बधाई. !

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आदरणीय सद्गुरु जी सादर अभिवादन Iआपकी सारी बातें सही हैं लेकिन सवाल है कि मनसे ने पाकिस्तानी कलाकारों वाली फिल्मों का विरोध करने से पहले सरकार को पाकिस्तानी कलाकारों व खिलाडियों को वीजा देने की पालिसी का विरोध क्यों नहीं किया Iक्या आपको करण जोहर आदि को राष्ट्रवाद के नाम पर ब्लैकमेल करने की गंध नहीं लगती I जो तोड़ फोड़ की धमकी देकर फिल्म रिलीज़ रोकने की बात करते हैं वह धन वसूली करने के बाद शांत हो सकते हैं I रही आर्मी  वेलफेयर में पांच करोड़ रुपये दिलाने की बात तो उसे प्रेम पूर्वक मोटीवेट करके लिया होता तो कितना सुन्दर होता I आपके विचारों से पूरी तौर से सहमत लेकिन केवल कहना चाहूँगा  कि देवेन्द्र फड़नवीस की मध्यस्थता में हुए समझौते से मनसे भले जीत का जश्न मना ले लेकिन फिल्म के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर केवल अपने ऊपर आई आपदा को टाल देने का ही संतोष कर रहे होंगे I क्योंकि उनको भविष्य में भी अपना व्यवसाय करना है I सादर अतुल

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मैं लेख में वर्णित आपके विचारों से अधिकांशतः सहमत हूँ आदरणीय सद्गुरु जी । किसी भी फ़िल्म को देखने या न देखने का निर्णय जनता पर ही छोड़ना चाहिए । कुछ पाकिस्तानी कलाकारों के काम करने को आधार बनाकर भारतीय कार्मिकों एवं उद्यमियों के प्रयासों एवं निवेश को क्षति पहुँचाना अनुचित है । शिवसेना एवं मनसे दोनों ने सदा नकारात्मक गतिविधियों को ही प्रोत्साहित किया है, सकारात्मक गतिविधियों को नहीं । उनकी ऊर्जा सदा ध्वंस में ही लगी है, निर्माण में नहीं l हमें वास्तविक देशभक्ति की आवश्यकता है, छद्म देशभक्ति की नहीं । जहाँ तक पाकिस्तानी कलाकारों के भारत पर हुए आतंकी आक्रमणों की निंदा न करने का प्रश्न है, उनकी इस विवशता को समझा जाना चाहिए कि अंततः उन्हें पाकिस्तान ही वापस जाना है जहाँ भारत-विरोधियों का राज चलता है । ऐसे में यदि वे यहाँ हमारी पसंद का कोई संवेदनशील वक्तव्य दे देंगे तो अपने घर लौटने के उपरांत उनका पाकिस्तान में जीना कठिन हो जाएगा और तब उन्हें अपने लिए यह गीत गाना पड़ेगा : 'ऐ दिल, है मुश्किल जीना यहाँ . . .।'

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

प्रधानमन्त्री मोदी सारी दुनिया को शायद यह संदेश देना चाहते हैं कि अब भारत ने भी अपनी सुरक्षा हेतु इसराइल वाली आक्रामक नीतियाँ अपना ली हैं ! अब भारत पहले की तरह दब्बू और सहनशील देश नही है ! बीजेपी और आरएसएस दोनो ही बहुत पहले से ही इसराइल की न सिर्फ तारीफ करते रहे हैं, बल्कि इसराइल से अच्छे संबंध बनाने की वकालत भी करते रहे हैं ! पिछले दस-पंद्रह साल से इसराइल से जारी लुके-छिपे राजनीतिक सम्बन्धों को जगजाहिर करते हुए भारत अब खुलकर उसके साथ दोस्ती का हाथ बढाना चाहता है ! हमारी विदेश नीति में ये एक बहुत अच्छा और बहुत बड़ा बदलाव है, जिसके लिये मोदी सरकार की जितनी भी तारीफ की जाये, वो कम है !

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पाक प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए पाकिस्तान पूरी तरह प्रतिबद्ध है ! भारत ब्रिक्स और बिम्सटेक के सदस्यों को गुमराह कर रहा है ! उन्होने कहा कि पाकिस्तान ब्रिक्स और बिम्सटेक सदस्यों के आतंकवाद को खत्म करने के आह्वान का समर्थन करता है ! उन्होने कहा कि कश्मीर में आजादी के लिए आंदोलन कर रहे लोगों को आतंकवादियों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता ! आतंकवाद को लेकर यही पाकिस्तान की दोमुँही और धोखा देने वाली नीति है ! वो अपने यहाँ डेरा जमाये लाखों आतंकियों को कश्मीर की आजादी के लडाके और हिन्दुस्तानी गोली खा के मरने वाले उन आतंकियों को शहीद कहता है ! हिन्दुस्तानी हुक्मरानों ने मानवता के नाते और इलाकाई शान्ति स्थापित करने के मकसद से जब भी पाकिस्तान से अच्छे सम्बन्ध बनाने की कोशिश की, उसने धोखा दिया ! अब ये तय हो चुका है कि पाकिस्तान बातों से कभी सुधरने वाला नही है ! उसे तो सर्जिकल स्ट्राइक और भारी तबाही वाले युद्ध की भाषा ही समझ मे आती है !

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बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, भूटान, श्रीलंका, नेपाल और भारत को मिला कर बने 'बिम्सटेक' संगठन की तरफ से जारी घोषणा पत्र में पाकिस्तान और उसके आतंक प्रेम पर करारा प्रहार करते हुए कहा गया है, 'इस पूरे क्षेत्र की शांति व स्थिरता को आतंकवाद की वजह से ही सबसे बड़ा खतरा पैदा हुआ है ! हम हाल के दिनों में इस क्षेत्र में हुई खौफनाक आतंकी घटनाओं की जोरदार शब्दों में निंदा करते हैं ! हम समझते हैं कि सिर्फ आतंकियों और उनके संगठनों के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं होनी चाहिए बल्कि इन्हें बढ़ावा देने वाले, पनाह देने वाले और इन्हें वित्तीय मदद देने वाले और इनकी गतिविधियों का गुणगान करने वाले देशों के खिलाफ भी कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिये !

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आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! गहराई से लिखे गये अच्छे लेख के लिये सादर अभिनन्दन और हार्दिक बधाई ! चीन पाकिस्तान का साथ नही छोड़ेगा, क्योंकि उसे अपना हित साधना है ! गलत होने पर भी वो पाकिस्तान को सही ठहरा उसका पक्ष लेता रहेगा ! रूस भी पाकिस्तान को अपने हथियार बेचने के चक्कर मे है, इसलिये उससे दोस्ती की पींगे बढ़ा रहा है ! अमेरिका भारत को खुश करने के लिये पाकिस्तान को उपदेश भर देता रहेगा, लेकिन पाकिस्तान को कभी भी आतंकी देश घोषित नही करेगा ! सारी बातों का सार यही है कि भारत को आतंक के खिलाफ अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी ! पाकिस्तान को हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करो ! आतंकियों और उनके आकाओं पर करारा अटैक करो, बस यही भारत की आत्मरक्षा वाली अब एकमात्र सही कूटनीति होनी चाहिये ! जयहिंद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी आपका ब्रिक्स मेरा लेख लगभग पहले आपका फिर मेरा ब्लॉग में पब्लिश हुआ लेकिन कई नई बातें पढने को मिली आप बहुत मेहनत से लेख लिखते है 'पाकिस्तान के इन दिनों जो बद से बदतर हालात हैं, उसमें कॉरीडोर बनाने में चीन को आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर की मदद लेने की जरुरत पड़ सकती है. यही वजह है कि आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर यूएन में प्रतिबंध लगवाने की भारत की दुबारा की गई कोशिश का चीन ने अपनी वीटो पॉवर का दुरूपयोग करते हुए फिर से विरोध किया है' .चीन की राजनीति से हम अच्छी तरह परिचित हैं क्या चीनी वस्तुओं का बहिष्कार नहीं होना चाहिए उत्तम जानकारी पूर्ण लेख

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जय श्री राम आदरणीय सद्गुरु जी वैसे इन ओपीनियन पोलो ने बहुतो की नीद उदा दी मायावती ने कह दिया की इन पोलो पर ध्यान न दे ये बीजेपी ने भ्रम के लिए कराया यदि ऐसा है तो मायावती कैसे सबसे प्रथम मुख्यमंत्री मानी गयी व८इसे अभी बहुत जल्द है क्योंकि एक घटना सब कुछ बदल देती है वैसे जिस तरह से मुस्लिम दलितों के वोटो का ध्रुवीकरण हो रहा प्रदेश के लिए शुभ नहीं वैसे कांग्रेस सबसे ज्यादा दुखी होगी.इतने छोटी संख्या से नतीजा पर विश्वास करना गलत होगा केवल कुछ दिश जरूर देता की ऊँट किस दिशा में करबट बदलेगा.मायावती सबसे ख़राब मुख्यमंत्री होगी त्रिशुं सभा प्रदेश को पीछे ढकेल देगी .सुन्दर विश्लेषण के लिए धन्यवाद.

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के 'खून की दलाली' वाले बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा, "सरहद पर हमारे जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर बड़ी मेहनत से सर्जिकल स्ट्राइक की है और आतंकी ठिकानों को नेस्तानबूत किया ! इसके लिए हम सेना को पहले भी बधाई दे चुके हैं और फिर से बधाई देते हैं ! राहुल गांधी जी ने जो शब्दों का इस्तेमाल किया है वो सही नहीं है ! सेना की शहादत को खून की दलाली कहा है वो गलत है ! ये समय ऐसा है जब सरहद पर तनाव है ! हम सब को अपने राजनैतिक मतभेद भुलाकर और पीएम सुरक्षा के लिए जो भी कदम उठा रहे हैं, उसके लिए सारी पार्टियों को उनका साथ देना चाहिये ! किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिये !" अरविन्द केजरीवाल एक चतुर राजनीतिज्ञ हैं ! वो जानते हैं की इस समय पूरा देश प्रधानमन्त्री मोदी के साथ ख्डा है, इसलिये कुछ गलत बोला तो बड़ी छिछालेदर होगी और जनता के बीच छवि भी खराब होगी ! राहुल गाँधी के पास ऐसी सोच और समझ का अभाव है ! यही उनकी असफलता का कारण भी है !

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जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी जिस तरह देश के कुछ नेता और फ़िल्मी कलाकार सेना के सर्जिकल स्ट्राइक के खिलाफ प्रतिक्रिया दे रहे वे निंदनीय के साथ राष्ट्र विरोधी और सेना के प्रति अविश्वास पैदा करने वाला विश्व के कई राष्ट्रों ने मोदीजी और सेना की कार्यवाही की तारीफ़ की ऐसे में कांग्रेस के संजय निरुपम और चिदंबरम और केजरीवाल के व्यान शर्मशार करने वाले है ये सन गोपनीय कार्य होते जिसके प्रूफ की जरूरत नहीं लेकिन शयद हमारे देश में देश से ज्यादा तुच्छ राजनीती करना एक चलन हो गया.कांग्रेस ने व्यान से किनारा किया लेकिन यदि कांग्रेस में नैतिकता है तो ऐसे लोगो को पार्टी से निकाले.सुन्दर लेख के लिए बधाई.

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श्री सद्गुरु जी आपके लेख की हैडिंग सटीक है मेरी थीसिस भारत पाक रिश्तों पर है मैं ईरान में उसको किताब में कन्वर्ट करने के लिए पढ़ रही थी मेरा लड़का केवल सात वर्ष का था लेकिन पाकिस्तान परिवार हमारे घर आते थे उसने मुझसे पूछा मॉम आप क्या पढ़ रही हो मानने उसे कहा अपनी थीसिस पढ़ रही हूँ पूछा क्या है मैं बच्चों को नॉलेज के मामले मैं जो पूछते थे हर प्रश्न का उत्तर देती थी उसने मेरी पूरी बात सुनने के बाद कहा आपने अपना समय खराब किया हिंदुस्तान पाकिस्तान के रिश्ते कभी नहीं सुधरेंगे | और गन्दे होंगे मैं बहुत हैरान हुई परन्तु समझ मैं आ गया उसे बच्चा समझ कर हमारे मेहमान आपस में जो बातें की जाती हैं यह समय से पहले बड़ा हो कर निष्कर्ष निकालने लगा है राजेन्द्र जी पाकिस्तानियों और बंग्लादेशियों को हमसे शिकायतें ही शिकायतें थी उनके अनुसार सात पाकिस्तान बनने चाहिए थे | भारत में मुस्लिम पर जुल्म होता है पुलिस भी आपकी सेना भी आपकी उन्हें कैसे समझाएं यह तो हमारे यहां वोट बैंक हैं |भारत की तरक्की रो-रो कर चलेगी जब तक पाकिस्तान के टुकड़े नहीं होती लेकिन बड़ी शक्तियां यह होने नहीं देंगी हाँ चीन की मंडी बनेगा

के द्वारा: Shobha Shobha

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जय श्री राम सद्गुरुजी बहुत अच्छा लेख कई दिनों से प्रतिक्रिया नहीं जा रही थी इसलिए टेस्ट करने के लिए पहली प्रतिक्रिया भेजी थी. विश्वकर्माजी ने भगवान् की द्वारकापुरी और सुदामानाग्री बनवाई थी.इस दिन प्रतिष्ठानों में लोग मशीनों और यंत्रो की पूजा करते और राष्ट्र को निर्माण करने में अग्रसर मोदीजी की भी जन्मतिथि है. उम्मीद है राष्ट्र का मार्गदर्शन करते मोदीजी राष्ट्र को विश्वगुरु बनवाने की तरफ ले जाने में सफल होंगे. विश्वकर्मा जी तो भगवान् के आदेश से भवनों का निर्माण करते थे जबकि मोदीजी जनता के लिए देश को सम्पन्नता प्रदान करने में योगदान देंगे. बहुत सुन्दर जानकारी के लिए धन्यवाद.

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मैं भी भुक्तभोगी हूँ आदरणीय सद्गुरु जी और इसीलिए मैं इस लेख में वर्णित तथ्यों एवं भावनाओं से पूर्णतः सहमत हूँ । आपके और मेरे जैसे करोड़ों भारतवासी प्रतिदिन इसी प्रकार ठगे जा रहे हैं । कॉल ड्रॉप द्वारा जो ठगी हो रही है, वह तो अलग ही है जिसमें बीएसएनएल भी सम्मिलित है । जब तक बीएसएनएल और एमटीएनएल अपनी सेवाएं नहीं सुधारते, निजी कंपनियों के पास तो जनता को लूटने का पूरा-पूरा अवसर रहेगा ही । सरकार भी इस ओर ध्यान नहीं दे रही । उपभोक्ता संरक्षक संस्थाएं इस संदर्भ में न जाने कैसी चुप्पी साधे बैठी हैं जबकि उपभोक्ताओं को खुलकर लूटा जा रहा है । आपने अनगिनत भारतीय मोबाइल फ़ोन उपभोक्ताओं के कष्ट को स्वर दिया है । आभार ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

श्री आदरणीय सद्गुरु जी दिल्ली में भी कई मिशनरियां अपने काम में लगी हैं विदेशी किसी भारतीय नागरिक के नाम पर सिलाई कढाई जैसे केंद्र खोलते हैं गरीब महिलाओं को काम दिया जाता है फिर उन्हें समझा कर धर्म परिवर्तन कराते हैं उनके चित्र खिंच कर विदेशों में दिखाते हैं उनके हाथ की बस्तुओं को दिखा कर बेचते हैं उनके नाम पर मोटे चन्दे वसूलते हैं |देश की गरीबी को बेचना अपना घर भरना | जिन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया कुछ समय बाद उन्हें काम से निकाल देते हैं फिर नंगी भर्ती होती है यही नहीं दिल्ली से कमा कर आदिवासी क्षेत्रों में भी संस्थाएं खोलते हैं वहां के लिए भी गरीबी के नाम पर दान लिया जाता है कई प्रश्न उठाता लेख

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"संकट में है आज वो धरती जिसमें तूने जन्म लिया, पूरा करले आज बचन वो गीता में जो तूने दिया", बहुत खूब सतगुरु जी, आप का सानिध्य पाकर आदिगुरु शंकराचार्य जी और श्रीकृष्ण भगवान् से साक्षात्कार कर लेते हैं ! आपने सही कहा की श्रीकृष्ण तो साक्षात प्रब्रह्म परमेश्वर थे, और जब श्रीशंकराचार्य जी का जन्म हुआ था सारा भारत अँधेरे में भटक रहा था, कोई मार्ग दर्शक गुरु नहीं था ! इन्होंने अपने अल्पकाल में कन्या कुमारी से काश्मीर की घाटी तक और गुजरात से पूरब में अरुणाचल तक पैदल यात्रा करके सोये हुए इंसानों को जगाया, सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करके आधुनिक हिन्दू धर्म को प्रकाशित किया ! इनके मंदिर जहां जम्मू में है तो भारत के चारों दिशाओं में भी है ! जम्मू और रामेश्वर जाकर शंकराचार्य मंदिर में जाकर माथा टेकने का अवसर मिला था ! सुन्दर शिक्षाप्रद लेख के लिए चरण वन्दना स्वीकार करें ! हरेन्द्र

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ख़बरों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बलूचिस्तान की आजादी के पक्ष में आवाज बुलंद किए जाने पर उसका जोरदार समर्थन करने के लिए पाकिस्तान ने शीर्ष तीन बलूच राष्ट्रवादी नेताओं के खिलाफ राष्ट्रद्रोह सहित पांच मामले दर्ज किए हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बलूचिस्तान एवं पीओके के लोगों पर पाकिस्तान द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों का मामला उठाने के लिए जहाँ एक तरफ बलूचिस्तान के लोगों ने उनका धन्यवाद किया है। वहीँ दूसरी तरफ पाकिस्तान ने कहा है कि मोदी ने बलूचिस्तान के बारे में बात करके ‘लक्ष्मण रेखा’ लांघी है। यही नहीं, बल्कि उसने यह बन्दर घुड़की भी दी है कि वह अगले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में कश्मीर का मुद्दा उठाएगा।

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