सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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sadguruji


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श्री आदरणीय सद्गुरु जी दिल्ली में भी कई मिशनरियां अपने काम में लगी हैं विदेशी किसी भारतीय नागरिक के नाम पर सिलाई कढाई जैसे केंद्र खोलते हैं गरीब महिलाओं को काम दिया जाता है फिर उन्हें समझा कर धर्म परिवर्तन कराते हैं उनके चित्र खिंच कर विदेशों में दिखाते हैं उनके हाथ की बस्तुओं को दिखा कर बेचते हैं उनके नाम पर मोटे चन्दे वसूलते हैं |देश की गरीबी को बेचना अपना घर भरना | जिन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया कुछ समय बाद उन्हें काम से निकाल देते हैं फिर नंगी भर्ती होती है यही नहीं दिल्ली से कमा कर आदिवासी क्षेत्रों में भी संस्थाएं खोलते हैं वहां के लिए भी गरीबी के नाम पर दान लिया जाता है कई प्रश्न उठाता लेख

के द्वारा: Shobha Shobha

"संकट में है आज वो धरती जिसमें तूने जन्म लिया, पूरा करले आज बचन वो गीता में जो तूने दिया", बहुत खूब सतगुरु जी, आप का सानिध्य पाकर आदिगुरु शंकराचार्य जी और श्रीकृष्ण भगवान् से साक्षात्कार कर लेते हैं ! आपने सही कहा की श्रीकृष्ण तो साक्षात प्रब्रह्म परमेश्वर थे, और जब श्रीशंकराचार्य जी का जन्म हुआ था सारा भारत अँधेरे में भटक रहा था, कोई मार्ग दर्शक गुरु नहीं था ! इन्होंने अपने अल्पकाल में कन्या कुमारी से काश्मीर की घाटी तक और गुजरात से पूरब में अरुणाचल तक पैदल यात्रा करके सोये हुए इंसानों को जगाया, सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करके आधुनिक हिन्दू धर्म को प्रकाशित किया ! इनके मंदिर जहां जम्मू में है तो भारत के चारों दिशाओं में भी है ! जम्मू और रामेश्वर जाकर शंकराचार्य मंदिर में जाकर माथा टेकने का अवसर मिला था ! सुन्दर शिक्षाप्रद लेख के लिए चरण वन्दना स्वीकार करें ! हरेन्द्र

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: achyutamkeshvam achyutamkeshvam

के द्वारा: Shobha Shobha

ख़बरों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बलूचिस्तान की आजादी के पक्ष में आवाज बुलंद किए जाने पर उसका जोरदार समर्थन करने के लिए पाकिस्तान ने शीर्ष तीन बलूच राष्ट्रवादी नेताओं के खिलाफ राष्ट्रद्रोह सहित पांच मामले दर्ज किए हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बलूचिस्तान एवं पीओके के लोगों पर पाकिस्तान द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों का मामला उठाने के लिए जहाँ एक तरफ बलूचिस्तान के लोगों ने उनका धन्यवाद किया है। वहीँ दूसरी तरफ पाकिस्तान ने कहा है कि मोदी ने बलूचिस्तान के बारे में बात करके ‘लक्ष्मण रेखा’ लांघी है। यही नहीं, बल्कि उसने यह बन्दर घुड़की भी दी है कि वह अगले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में कश्मीर का मुद्दा उठाएगा।

के द्वारा: sadguruji sadguruji

जय श्री राम सद्गुरु जी १५ अगस्त के बारे में अच्छा लेख लिखा कश्मीर का परिणाम नेहरूजी के दें है पिछले ७० सालो से विभिन्न सरकारों ने देश लो समस्या में दाल दिया लेकिन सबके लिए मोदीजी को दोष देना गलत.कश्मीर के मामले में राजनाथ जी खुले शब्दों में नीति बता दी इस देश को बर्बाद करने में सेक्युलर ब्रिगेड और बुद्दिजीवियो का हाथ है जो या विदेशी शक्तिओ के हाथ खेल रहे या फिर कांग्रेस के हाथ.इस सरकार को अस्थिर करने के लिए चर्च सक्रिय है जो दलितों मुस्लिमो के नाम पर ओउरे देश में अलगाववाद पैदा कर रहा.ये साजिस उसी का नतीज है जिसमे सेक्युलर ब्रिगेड बुद्दिजीवी शामिल है दलितों के साथ ऐसी घटनाएं पुरे देश में हो रही परन्तु गुण की घटना को बड़ा चला कर दिखया गया बीजेपी को बदनाम करने के लिए मुसलमान दामादो की तरह रह रहे उनपर पता नहीं आपको कहा दिख गया जन कर्णाटक में प्रशांत पुजारी या दिल्ली में डॉ नारंग या केरल में हिन्दू मारे जाते सेक्युलर ब्रिगेड को साप सूंघ जाता आज एक फैशन बन गयी की प्रधान मंत्री देर से बोले जो प्रदेश का मामला उसपर भी क्यों बोले १० साल मनमोहन नहीं बोले कोइ नहीं बोला ये बीजेपी/मोदीजी का विरोध है और कोइ समस्या नहीं.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

हिन्दी साहित्य गगन के सूर्य प्रेमचंद जी की कालजयी रचना 'नमक का दारोगा' मैंने भी अपने विद्यार्थी-जीवन में पढ़ी थी । आपने न केवल उसकी स्मृति को मन में पुनर्जीवित कर दिया है आदरणीय सद्गुरु जी वरन विभिन्न पक्षों को स्पर्श करती हुई उसकी जो व्याख्या की है, वह नेत्र खोल देने वाली है एवं विचार के लिए कई नए आयाम प्रस्तुत करती है । मैं इस अमर रचना की समीक्षा एवं विश्लेषण रूपी आपके इस आलेख के एक-एक अक्षर से सहमत हूँ । आलेख के अंतिम परिच्छेद में आपने जो निर्वचन किया है, वह केवल सत्य है एवं सत्य के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं है । एक सत्यनिष्ठ भारतीय की यही विडम्बना है जो आज भी वैसी ही है जैसी एक शताब्दी पूर्व थी ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम सद्गुरुजी यदि दयानन्दजी गलत है तो मायावातो भी गलत है जो अपने नेताओ और कार्यकर्ताओं को उकसा कर जिस भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया उसकी निंदा होंनी चाइये.दयानंद जी पर पार्टी ने तुरत कार्यवाही की लेकिन BSP नेताओं पर क्या कोइ कार्यवाही होगी उम्मीद कम है,देश में आराजकता की राज्न्न्ती हो रही जिसमे मुस्लिम और दलित फायेदे में रहते कमलेश तेवारी जेल में आज़म खान का कुछ नहीं हुआ मुसलमानी ने बंगाल और बिहार में जिस हिंसा का प्रदर्शन किया और कोइ कार्यवाही नहीं दलितों की गलत व्यान समझा कर जिस तरह बिहार में लालू जीता मायावती का जीतना मुस्किल वैसे देश में जाती धर्म ही एक मुद्दा है.आप हिन्दू नेताओं के व्यान पर उंगली उठाते लेकिन दुसरे लोगो की अभद्र भाषा पर चुपसुन्दर लेख

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

महिलाओं के सम्मान को धर्म, जाति, वर्ग, प्रदेश और संस्कृति से ऊपर उठकर बिना किसी भेदभाव के संरक्षित किया जाना चाहिए । सभी महिलाएं सम्माननीय हैं चाहे वे किसी भी धर्म, जाति, वर्ग, प्रदेश और संस्कृति से संबंध रखती हों । केवल मायावती का सम्मान ही महत्वपूर्ण नहीं है, अन्य महिलाओं का सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है जिनमें दयाशंकर सिंह के परिवार की महिलाएं भी सम्मिलित हैं । मायावती को अपने और दलित महिलाओं के सम्मान की ही पड़ी है (वह भी केवल अपना वोट बैंक बचाए रखने के दृष्टिकोण से) जबकि वे एवं उनके दल के कार्यकर्ता अन्य किसी के सम्मान का कोई मूल्य नहीं समझते तथा समय-समय पर अमर्यादित एवं अशोभनीय वक्तव्य देते रहते हैं । मैं लेख में वर्णित आपके विचारों से सहमत हूँ आदरणीय सद्गुरु जी ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

वाह सद्गुरुजी, "कैसी खुशी लेके आया चाँद", और ईद के पर्व से जुडी यादें, विषय से दिल को अंदर तक झकझोर दिया ! किसी भी धर्म में किसी भी धर्म ग्रन्थ ने हैवानियत का पाठ नहीं सिखाया ! मैं स्वयं साइना में एक ऐसी बटालियन में १८ साल रहा जहां पूरी कंपनी ही मुस्लिम भाइयों की थी, मैंने उनके साथ ईद मनाई, स्वादिष्ट से स्वादिष्ट सवाई खाई, ईद पर उनकी दी हुई टोपी भी पहनी ! उन्होंने भी मेरे साथ होली दिवाली और दशहरे का त्यौहार मनाया ! कही बार तो हमें ये त्यौहार फील्ड एरिया में बिना शोर शराबे के मनाने पड़े ! हमारे पड़ोस में हमारा दुश्मन पाकिस्तान था ! बहुत मार्मिक प्रस्तुति के लिए साधुवाद ! हरेंद्र जागते रहो ,

के द्वारा:

आदरणीय जितेन्द्र माथुर जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपने बहुत सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रया दी है ! आपकी बात से पुरमथ सहमत हूँ कि धार्मिक आधार पर की गई निर्दोष एवं असहाय प्राणियों की हत्या सबसे बड़ा अधर्म है ! ऐसी क्रूर परंपराओं का स्थान किसी भी धर्म में नहीं होना चाहिए ! आपकी यह बाट भी पूर्णतः सही है कि इस्लाम के चरमपंथी चाहे स्वयं शिक्षित हों, आधुनिकता से घृणा करते हैं तथा सम्पूर्ण विश्व को मध्ययुगीन इस्लामी साम्राज्य के रूप में परिवर्तित कर देने का लक्ष्य उनके मस्तिष्क में इस भांति स्थापित हो चुकी है कि वे उसके अतिरिक्त और कुछ देखना-सुनना-समझना चाहते ही नहीं ! वस्तुतः असली समस्या यही है ! ब्लॉग पर समय देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मैं इरफ़ान ख़ान के और आपके विचारों से भी पूर्णरूपेण सहमत हूँ आदरणीय सद्गुरु जी । मैंने स्वयं अपने शाकाहार संबन्धित लेख में इस विषय को उठाया है । निर्दोष प्राणियों की हत्या तो घोर पाप है, वह पुण्य कैसे हो सकता है ? जब हम किसी को जीवन दे नहीं सकते तो जीवन लेने वाले भी हम कौन होते हैं ? किसने यह अधिकार दिया है हमें ? अपने सभी मुस्लिम भाई-बहनों को ईद की शुभकामनाएं देते हुए मैं उनसे यही कहता हूँ कि केवल कठमुल्लों की प्रतिक्रिया के आधार पर इरफ़ान के विचारों को रद्द न करें वरन उन पर ध्यान दें और अपने हृदय में उस संवेदनशीलता को विकसित होने दें जो कि एक उत्तम मानव बनने की सर्वप्रथम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण आवश्यकता है । इसके अतिरिक्त मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि यह संदेश केवल इस्लाम ही नहीं सभी धर्मों के अनुयायियों के लिए है । धार्मिक आधार पर की गई निर्दोष एवं असहाय प्राणियों की हत्या सबसे बड़ा अधर्म है । ऐसी क्रूर परंपराओं का स्थान किसी भी धर्म में नहीं होना चाहिए । तसलीमा नसरीन ने सदैव ही इस्लाम के नाम पर आतंक फैलाने और अन्य धर्मावलम्बियों पर जघन्य अत्याचार करने वालों को अपनी लेखनी से नग्न किया है । इसीलिए वे अपने देश से निर्वासित हैं और भारत जैसे देश में भी उनके लिए स्थान नहीं है क्योंकि हमारा शासन-प्रशासन भी सदैव मानवता और तार्किकता दोनों को ही ताक पर रखकर धार्मिक अतिवादियों के समक्ष नतमस्तक होता रहा है । आज ही मैंने 'बीजू जनता दल' के एक सांसद के इसी संदर्भ में अत्यंत सुलझे हुए विचार 'द टाइम्स ऑव इंडिया' में पढ़े । मूल समस्या यह है कि इस्लाम के चरमपंथी चाहे स्वयं शिक्षित हों, आधुनिकता से घृणा करते हैं तथा सम्पूर्ण विश्व को मध्ययुगीन इस्लामी साम्राज्य के रूप में परिवर्तित कर देने का लक्ष्य उनके मस्तिष्क में इस भांति स्थापित हो चुकी है कि वे उसके अतिरिक्त और कुछ देखना-सुनना-समझना चाहते ही नहीं । इस समस्या का समाधान एक ही है कि इस्लाम में विवेकशील लोगों की संख्या बढ़े और वे निर्भय होकर अपने समाज को सही दिशा दें । अन्य धर्मावलंबियों का दायित्व है कि ऐसे लोगों को अपना सम्पूर्ण समर्थन दें ताकि इस्लामी चरमपंथी अपने ही समाज में अलग-थलग पड़ सकें ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

सद्गुरुजी, नमस्कार, माफ़ करें पता नहीं इतना महत्वपूर्ण लेख कम ब्लॉग मेरी नज़रों से बच कैसे गया ! मैं आपके विचारों की कद्र करता हूँ ! भारतीय न्यायालयों में बलात्कार के लाखों केस पेंडिंग पड़े हैं, दूसरी ओर कुछ लोग डर के मारे, कुछ लोग समाज में इज्जत गिरने के डर से, कुछ पुलिस वालों की दादागिरी से पुलिस चौकियों में केस ही दर्ज नहीं कराते हैं ! आपका सुझाव बिलकुल सही है की इन बलात्कारी शैतानों को तुरंत फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए, लेकिन कमाल है कोर्ट इन जघन्य अफराधों को, जहां बड़ी संख्या में रेप के बाद ह्त्या भी कर दी जाती है, जघन्य से जघन्य अफराध ही नहीं मानती ! दूसरा तमाम बलात्कारियों को सबक सिखाने के लिए हर स्कूल कालेजों में सेल्फ डिफेन्स के तौर प्रत्येक लड़की को मार्शल आर्ट की भी शिक्षा दी जानी चाहिए ! अति उत्तम सामाजिक लेख के लिए धन्यवाद !

के द्वारा: harirawat harirawat

श्री आदरणीय सद्गुरु जी मुझे किस्सों में जबाब देने का शौक है मेरी माँ का आपरेशन होना था जिसकी सारी तैयारी मेडिकल कालेज में हो गई पिताजी सोर्स फुल थे मेरी अम्मा डर रहीं थी मैने उनसे कहाः अम्मा छोड़ों आपरेशन का चककर मैं चुपचाप मेडिकल कालेज से उठा लायी ऐसी डांट पड़ी क्या लिखूं मैं जिद कर दिल्ली में पढ़ती थी साथ ले आई एक वैद थे शायद त्रिगुणा उनके पास लायी यह वैद के बस की नहीं बात नहीं थी अम्मा सीरियस होती रही परन्तु डयूटी कौंशस थी कुछ दिनों में मेरी शादी हो गयी अम्मा बहुत सीरियस हो गयी मेरे पति को मेरे पुराने कारनामें का पता चला उन्होंने उन्हें बुलाया दिल्ली की इर्विन की मशहूर डाक्टर पड़वितरी ने अम्मा के आपरेशन द्वारा प्राण बचाए मेरे पति ने जल्दी से खून दिया तब जाकर मेरी मूर्खता सुधरी आज अम्मा पूरेरे घर की जरूरत हैं वः अपने समय से बहुत आगे चलती हैं बच्चों की जान हैं |मेरे बच्चे मुझे उपदेश देते हैं मम्मा अम्मा से कुछ सीखिए अपने आप को बदलो अम्मा कितनी मार्डन हैं आप स्टोन एज की

के द्वारा: Shobha Shobha

सदगुरु जी ,अजीब मन स्तिथी होती है मनुष्य की। हीरो हो विलेन हो ,शराबी हो या पागल हो लूला हो ,लंगडा हो ,हकला हो ,तुतला हो,बौना हो ,लम्बा हो ,मूर्ख हो सभी मनोरंजन के कारक बन जाते हैं । फिल्मों से तो केवल मनोरंजन ही होता है । कितना भी खतरनाक रोल वाला विलेन क्यों ना रहा हो ,सर्वोच्च पुरस्कार ही पाकर सम्मानित होता है । लडकियाॅ जिस भोले भाले रोमांटिक हीरो की फिल्मैं देखती उसे आसमान पर बैठाती हैं। वही उनमैं से ही रेप पर दिये बयान पर आसमान सिर पर उठाये हैं । क्यों नहीं सलमानखान की फिल्मो के बहिस्कार की घोषणा करती हैं । सलमान खान तो लडकियों के आसमान पर बैठाने की खान है । जिसका जो अनुभव होता है वही उपमायें उसके बोलचाल मैं निकलती हैं ।लोग सलमान खान की आलोचना करके और भी सर चडा रहे हैं । कैसे होगी ओम शांति शांति

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी हम चार बहने हैं हमारा शौक अजीब हैं एक बार रशियन कल्चर सेंटर से बुलावा आया एक कश्मीरी लडकी ने प्रोग्राम अरेंज किया है हम पहुंची बहन एक गुरुदेव शायद सरदार जी थे उन्होंने यहूदियों का चौंगा पहना हुआ था पूरेईसा बना हुआ साथ में रशियन चेली और देसी चेले उन्होंने कहा सब आँख बंद करो आपको भगवान के दर्शन होंगे आँखे बंद करने पर वः कोई हार्प जैसा बाजा बजा क्र गाने लगे ॐ शोनम - शोनम सारे हल्का सा अन्धेरा कर दिया जरा सा बलप जल रहा था काफी देर तक गाते रहे फिर पुचा आपको अपने अपने भगवान के देशं हुए हमने कहा हमें तो नहीं हुए उनको गुस्सा आ गया आपकी नहीं होंगे तुम सब दुनयावी हो बाकी सब को दर्शन हो रहे थे हम हंसते हुए घर आ गये | बस जो आप ने लिखा है वही है

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद ! लोकसभा चुनाव के समय पीएम मोदी ने कहा था कि काला धन वापस लायेंगे ! पीएम ने स्पष्ट रूप से कहा था कि देश के बाहर काला धन इतना है कि हर व्यक्ति के खाते में १५ से २० लाख रुपये दिये जा सकते हैं ! गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उस समय कहा था कि १०० दिन में काला धन वापस लायेंगे ! चुनाव जीतने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इसे चुनावी जुमला करार दिया ! सरकार को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, नहीं तो यही मुद्दा अगले चुनाव में उसके गले की फांस बन जाएगा ! आपकी बात से सहमत हूँ कि पश्चिम बंगाल में कुछ राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर बड़ी विकट स्थिति है, केंद्र को इस पर पूरी नजर रखनी होगी ! प्रतिक्रया देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

जय श्री राम सद्गुरुजी चुनावो की समीक्षा के लिए साधुवाद.मोदिकी ने कभी भी नहीं कहा की १५ लाख रु हर एक के खाते में आयेंगे लेकिन उन्होंने ये कहा था की इतना धन है की हर व्यक्ति के खाते में १५ लाख आये.विरोधियो ने इसे दुष्प्रचार बनाया.जो लोग आसाम में बीजेपी की निंदा करते वे लोग कांग्रेस के वाम डको और बिहार में लालू नितीश के गटबंधन पर चुप रहते लगता बीजेपी को कोसना एक फैशन बन गया ममता जीत गयी क्योंकि १२७ सीटो पर मुस्लिम निर्णायक थे अब ५ साल बम बनेगे अफीम की खीती होगी और अवैध रूप से घुसपैठ.भर्तियो को मुफ्त की संस्कृति  अप रही जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक.जिस तरह ममता ने चुनाव आयोग को धमकी दी और चुनाव बाद बीजेपी और विरोधियो को हमला किया किसी ने निंदा नहीं की आज बीजेपी विरोध के आगे किसी को बाकी गलतिय अपराध दिखाई नहीं देते.ऍआप तो अच्छे लिखने में माहिर लेकिन उम्मीद थी आप हिंसा की निंदा करेंगे.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

जय श्री राम सद्गुरुजी भगवानजी ने हम लोगो को इतना दिया ये हमारा कर्त्तव्य बनता की उनके प्रति कृतञता प्रगट करते उन्हें धन्यवाद दे.कमसे काम सोते वक़्त रात में और सुबह उठ कर उनके द्वारा दिए गए उपकारो के लिए धन्यवाद दे.लेकिन आज एक तरफ आध्यामिक कार्यक्रमों और मंदिरों में भीड़ लगी होती वही आधुनिकता में भगवान् जी के प्रति मानसिकता दुर्भाग्यपूर्ण है.वैसे भगवानजी की कृपा हर क्षण होती रहती लेकिन २ बार उनकी कृपा का आभास हुआ १९६५ में नाइजीरिया में एक साल पहुंचने के बाद हमारी कार एक गड्ढे में गिर गयी हमें ऐसा लगा जैसे किसी ने उठा लिया कार ख़राब हो गयी बगल में बैठे ड्राइवर को भी चोट आई.फॉर नवम्बर ९५ और जनवरी ९६ के बीच हमारे रिड की हड्डी के ३ ऑपरेशन हुए जिसमे २ कानपूर के प्रतिस्ठित डाक्टरों द्वारा बड़े अस्पतालों में गलत कर दिए गए १७ जन ९६ को दिल्ली में तीसरा ऑपरेशन सफल हुआ लेकिन पहले दोनों गलत होने की वजह से उठ नहीं सके और पिछले २० साल से बीएड में पड़े है ये हनुमानजी की कृपा की कष्ट सहन करने की शक्ति दे दी है नहीं तो २० साल प्रशांत पूर्वक समय कथन बहुत मुस्किल था.दिल्ली में ऑपरेशन के दिन रात को तोते के रूप में हनुमानजी के दर्शन हुए थे जिसे अपने पत्नी को भी बताया था.भगवान् के प्रति कृतज्ञता हमारा परम कर्त्तव्य और धर्म है इस सुन्दर लेख ले लिए आप बधाई स्वीकार करे.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

श्री सद्गुरु जी मेरे पति के अंडर में एक नर्स कम करती थी उनसे हमारे पारिवारिक सम्बन्ध थे उन्हें कैंसर हो गया परन्तु डायग्नोज देर से हुआ वह सिरियस थी उसके माता पिता ने अमृतसर हमें बुलाया मोहनी सीरियस है आपको याद क्र रही है हम गये उसने हमें देखा मैं रोने लगी मेरे पति ने उसके माथे पर हाथ रखा उसने कहा डाक्टर साहब बहुत दूर एक छोटे शहर में बाजे वाले बैठे हैं मेरे स्वागत की तैयारियां हो रहीं है में जा रही हूँ मैं डर गयी सच पूछा जाए एक देह छुटटी है दूसरे स्थान पर नई देह तैयार होती हैउसने सउदी अरब जा क्र काफी पैसा कमाया था मोह जा नहीं रहा था उसके भाई ने उसके हाथ में पांच सों का नोट रख कर कहा यह ले जा सकती है उसने ना में सर हिलाया उसी रात को वः विदा हो गयी

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री आदरणीय सद्गुरु जी जब जीवन हाथ से जाता महसूस होता है पता चलता है कितना अनमोल है बहुत ही सुंदर लेख बात काफी पुरानी है मेरी दादी अम्मा को जीवन से बहुत मोह था वह मरना नहीं चाहती थीं शरीर जबाब दे गया था परन्तु दिमाग वैसे का वैसा था हमें अपनी माँ से ज्यादा प्यारी थीं मेरठ में नया मेडिकल कालेज खुला था उनके हर कष्ट पर हम उन्हें वहाँ ले जाते एक दिन सीनियर डाक्टर कहने लगे इन्हें इतना कष्ट क्यों देते हो इनको शान्ति से जाने दो दादी के चेहरे पर ऐसा निराशा का भाव आया आज भी में उन आँखों को भूल नहीं सकी उन्होंने कहा डाक्टर साहब आगे कौन सा सुख है न जाने कौन सी योनी मिले अभी तो मनुष्य योनी है | लेख पढ़ क्र भूली बात याद आ गयी

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय संतोष कुमार जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! अपने को मूर्ख कहने या समझने वाले बुद्धिजीवी भी आत्ममुग्धता के शिकार होते हैं ! आपने चर्चा किया है कि किसी श्रेष्ठ का अपमान और दूसरों के विकार देखना आत्ममुग्धता है ! आप ब्लॉगर हैं, क्या आप किसी श्रेष्ठ के खिलाफ नहीं लिखते हैं ? आपके ब्लॉग मैंने पढ़े हैं, उसमे भी आलोचना समाहित होती है ! ब्लॉगर का कार्य सिर्फ दूसरों का गुणगान करना ही नहीं है, बल्कि जरुरत के अनुसार आलोचना करना भी है ! जो सर्वश्रेष्ठ है, उस ईश्वर की भी आलोचना होती है ! दूसरों का पता नहीं, किन्तु अपने भीतर ऐसा अहंकार और ईर्ष्या-द्वेष आदि नहीं रखता, जो किसी को क्षति पहुंचाएं ! आपसे सहमत हूँ कि किसी महान लक्ष्य के लिए नियमित संघर्ष साधना करना विशेष बात है, किन्तु मेरा महान लक्ष्य लोकसेवा और एकांत रूपी ईश्वरीय क्षणों का अधिकाधिक सेवन करना भर है ! आप बुद्धिजीवी हैं, आपकी बातों का कष्ट नहीं, क्योंकि अब इस तरह की बातों को सहन करने की आदत पड़ चुकी है, हाँ जबाब जरूर देता हूँ, ताकि किसी को ये न लगे कि उसके विचारों कि उपेक्षा कर रहा हूँ ! ब्लॉग पर समय देने के लिए धन्यवाद देते हुए अंत में बस यही कहूंगा कि मेरी बेलाग बातों से आपके मन को कोई ठेस पहुंची हो तो क्षमा कीजिएगा ! आपसे हुई अच्छी और विचारणीय चर्चा के लिए मेरा हार्दिक आभार स्वीकार कीजिएगा !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय मान्यवर ,.....सादर अभिवादन .... हम वास्तव में एक जैसे ही हैं ,.....वही अहंकार ,ईर्ष्या द्वेष आदि विकार कूट कूटकर भरे हैं ,.....हमारी बड़ी समस्या यही है कि दूसरों के विकार साफ़ देख सकते हैं ,..अपने देखने में पूर्णतः असफल हैं ,......वैसे मैं मूर्खत्वजीवी प्राणी हूँ ,...इसलिए गलती करना स्वभाव है ,..आपको कष्ट पहुंचा हो तो क्षमा चाहता हूँ ,..शायद साधुओं को किसी से कष्ट होता नहीं है ,..लेकिन आपको हुआ है तो ..ह्रदय से क्षमाप्रार्थी हूँ ,...मौज में मस्ती करना अच्छी बात है ,...लेकिन किसी महान लक्ष्य के लिए नियमित संघर्ष साधना करनी विशेषतम बात है ,...मात्र यही तर्क है जो आप जैसे विचारशील अध्येता बिना लिखे समझ सकते हैं !..और आत्ममुग्ध होना भी अच्छी बात हो सकती है ,.यदि उससे किसी श्रेष्ठ का अपमान न हो ,...हम दोनों ही गलत हो सकते हैं ,..इस पोस्ट और प्रतिक्रिया के सन्दर्भ में हम दोनों ही गलत हैं ....सादर आभार सहित पुनः अभिवादन

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

आदरणीय संतोष कुमार जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आप इस मंच के पुराने ब्लॉगर हैं और मैंने आपकी कई पोस्ट पढ़ी है ! आप एक बुद्धिजीवी हैं और अच्छा लिखते हैं ! किन्तु मुझे अफ़सोस है कि आप भी उन्ही बुद्धिजीवियों कि जमात में शामिल हैं, जो अपने को बहुत चतुर समझते हैं और कोई तर्क न सूझने पर ईर्ष्या-द्वेष भावना में बहकर व्यक्तिगत प्रहार करना शुरू कर देते हैं ! खैर, आपकी ग़लतफ़हमी दूर करने के लिए आपको बता दूँ कि ब्लॉग का नाम ‘सद्गुरुजी’ भगवान का एक नाम है ! मेरा नाम सभी जानते हैं ! आपने आत्ममुग्धता का शिकार होने की बात की है और साधना करने तथा सुबह तीन बजे से रात ग्यारह तक जागने का सुझाव दिया है ! महोदय क्या ये आपकी आत्ममुग्धता नहीं दर्शाती है ! साधू से ये नहीं पूछना चाहिए कि आप कितनी देर जागते हैं, बल्कि उनसे ये पूछना चाहिए कि आप सोते हैं या नहीं ? मौज में आने पर अक्सर मैं तो पूरे 24 घंटे जागता हूँ ! चुपचाप शांत चित्त से समय को अपने सामने गुजरते हुए देखता हूँ ! रही बात साधना की तो ये हर मनुष्य के लिए एक गोपनीय विषय है और उस पर कुछ कहने का अधिकार आपको नहीं है ! संक्षेप में उस विषय में बस यही कहूंगा कि दुनिया कि सभी साधनाओं से ऊपर भी कुछ है और वो है वेद का ह्रदय में प्रकट होना ! फिर न किसी धर्मग्रन्थ की जरुरत होगी और न ही कोई साधना करने की ! ब्लॉग पर आप आये और प्रतिक्रया दिए, इसके लिए हार्दिक आभार ! आदरणीय संतोष कुमार जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! ब्लॉगर किसी भी विषय पर लिख सकता है ! बाबा रामदेव जी कोई हिटलर नहीं, बल्कि हम और आप की तरह इंसान ही हैं ! उनपर भी लिखा जा सकता है ! यदि नियति को आप मानते है और ये भी मानते हैं कि नियति ने उनसे कुछ न कुछ सार्थक कार्य करवाया है ! फिर आपको ये भी मानना होगा कि नियति ने ये ब्लॉग लिखवाकर भी कुछ न कुछ सार्थक कार्य ही करवाया है ! उस दिन किसी और विषय पर लिखना चाह रहा था, किन्तु ये ब्लॉग लिखा गया ! व्यक्तिगत रूप से बाबा रामदेव का मैं विरोधी नहीं हूँ और न ही मैंने उनपर कोई व्यक्तिगत आरोप लगाए हैं ! जो देश के कई बुद्धिजीवी और अन्य लोग उनपर जो आरोप लगाते हैं, उसी की ही चर्चा लेख में की गई है ! बेशक समय ही उनके बारे में बहुत कुछ बताएगा, किन्तु चर्चा का अधिकार हमें भी है ! बाबा रामदेव के कई सामान अपने घर और आश्रम में हम प्रयोग करते हैं ! मेरा उनसे कोई लेना देना या बैर भाव नहीं है ! अपने समय की समाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक परिस्थितियों पर कबीर साहब से लेकर सभी संतों ने बहुत कुछ कहा है ! आज के साधू भी कह रहे हैं ! अंत में बस यही कहूंगा कि आपको कुछ बुरा लगे तो उसके लिए मुझे खेद है, किन्तु जबाब देना जरुरी था ! आपने दो बार वही प्रतिक्रिया दी है ! ब्लॉग पर इतना समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय संतोष कुमार जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! ब्लॉगर किसी भी विषय पर लिख सकता है ! बाबा रामदेव जी कोई हिटलर नहीं, बल्कि हम और आप की तरह इंसान ही हैं ! उनपर भी लिखा जा सकता है ! यदि नियति को आप मानते है और ये भी मानते हैं कि नियति ने उनसे कुछ न कुछ सार्थक कार्य करवाया है ! फिर आपको ये भी मानना होगा कि नियति ने ये ब्लॉग लिखवाकर भी कुछ न कुछ सार्थक कार्य ही करवाया है ! उस दिन किसी और विषय पर लिखना चाह रहा था, किन्तु ये ब्लॉग लिखा गया ! व्यक्तिगत रूप से बाबा रामदेव का मैं विरोधी नहीं हूँ और न ही मैंने उनपर कोई व्यक्तिगत आरोप लगाए हैं ! जो देश के कई बुद्धिजीवी और अन्य लोग उनपर जो आरोप लगाते हैं, उसी की ही चर्चा लेख में की गई है ! बेशक समय ही उनके बारे में बहुत कुछ बताएगा, किन्तु चर्चा का अधिकार हमें भी है ! बाबा रामदेव के कई सामान अपने घर और आश्रम में हम प्रयोग करते हैं ! मेरा उनसे कोई लेना देना या बैर भाव नहीं है ! अपने समय की समाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक परिस्थितियों पर कबीर साहब से लेकर सभी संतों ने बहुत कुछ कहा है ! आज के साधू भी कह रहे हैं ! अंत में बस यही कहूंगा कि आपको कुछ बुरा लगे तो उसके लिए मुझे खेद है, किन्तु जबाब देना जरुरी था ! आपने दो बार वही प्रतिक्रिया दी है ! ब्लॉग पर इतना समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !!

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय संतोष कुमार जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! ब्लॉगर किसी भी विषय पर लिख सकता है ! बाबा रामदेव जी कोई हिटलर नहीं, बल्कि हम और आप की तरह इंसान ही हैं ! उनपर भी लिखा जा सकता है ! यदि नियति को आप मानते है और ये भी मानते हैं कि नियति ने उनसे कुछ न कुछ सार्थक कार्य करवाया है ! फिर आपको ये भी मानना होगा कि नियति ने ये ब्लॉग लिखवाकर भी कुछ न कुछ सार्थक कार्य ही करवाया है ! उस दिन किसी और विषय पर लिखना चाह रहा था, किन्तु ये ब्लॉग लिखा गया ! व्यक्तिगत रूप से बाबा रामदेव का मैं विरोधी नहीं हूँ और न ही मैंने उनपर कोई व्यक्तिगत आरोप लगाए हैं ! जो देश के कई बुद्धिजीवी और अन्य लोग उनपर जो आरोप लगाते हैं, उसी की ही चर्चा लेख में की गई है ! बेशक समय ही उनके बारे में बहुत कुछ बताएगा, किन्तु चर्चा का अधिकार हमें भी है ! बाबा रामदेव के कई सामान अपने घर और आश्रम में हम प्रयोग करते हैं ! मेरा उनसे कोई लेना देना या बैर भाव नहीं है ! अपने समय की समाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक परिस्थितियों पर कबीर साहब से लेकर सभी संतों ने बहुत कुछ कहा है ! आज के साधू भी कह रहे हैं ! अंत में बस यही कहूंगा कि आपको कुछ बुरा लगे तो उसके लिए मुझे खेद है, किन्तु जबाब देना जरुरी था ! आपने दो बार वही प्रतिक्रिया दी है ! ब्लॉग पर इतना समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय संतोष कुमार जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आप इस मंच के पुराने ब्लॉगर हैं और मैंने आपकी कई पोस्ट पढ़ी है ! आप एक बुद्धिजीवी हैं और अच्छा लिखते हैं ! किन्तु मुझे अफ़सोस है कि आप भी उन्ही बुद्धिजीवियों कि जमात में शामिल हैं, जो अपने को बहुत चतुर समझते हैं और कोई तर्क न सूझने पर ईर्ष्या-द्वेष भावना में बहकर व्यक्तिगत प्रहार करना शुरू कर देते हैं ! खैर, आपकी ग़लतफ़हमी दूर करने के लिए आपको बता दूँ कि ब्लॉग का नाम 'सद्गुरुजी' भगवान का एक नाम है ! मेरा नाम सभी जानते हैं ! आपने आत्ममुग्धता का शिकार होने की बात की है और साधना करने तथा सुबह तीन बजे से रात ग्यारह तक जागने का सुझाव दिया है ! महोदय क्या ये आपकी आत्ममुग्धता नहीं दर्शाती है ! साधू से ये नहीं पूछना चाहिए कि आप कितनी देर जागते हैं, बल्कि उनसे ये पूछना चाहिए कि आप सोते हैं या नहीं ? मौज में आने पर अक्सर मैं तो पूरे 24 घंटे जागता हूँ ! चुपचाप शांत चित्त से समय को अपने सामने गुजरते हुए देखता हूँ ! रही बात साधना की तो ये हर मनुष्य के लिए एक गोपनीय विषय है और उस पर कुछ कहने का अधिकार आपको नहीं है ! संक्षेप में उस विषय में बस यही कहूंगा कि दुनिया कि सभी साधनाओं से ऊपर भी कुछ है और वो है वेद का ह्रदय में प्रकट होना ! फिर न किसी धर्मग्रन्थ की जरुरत होगी और न ही कोई साधना करने की ! ब्लॉग पर आप आये और प्रतिक्रया दिए, इसके लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मान्यवर ,..सादर अभिवादन...... आपका लेख पढ़कर लगता है कि आप भी अपने जैसे ही हैं !...नाम कुछ और होने से क्या फर्क पड़ता है ,.......हा हा हा हा ..........मानव मन में तमाम भ्रम उत्पन्न होना स्वाभाविक लगता है !.......कभी कभी हमें भ्रम को उत्पन्न भी करना पड़ता है ,.......आप काफी मात्रा में आत्ममुग्धता के शिकार लगते हैं !.......आपका तो नाम ही सद्गुरुजी है ,...कुछ साधना वाधना भी कर लिया करो जी !......कृपया सलाह को अन्यथा मत लीजियेगा !...इस देश के पतन के पीछे हमारे और आपके जैसे लोग ही हैं !.जिन्होंने लालू जैसों को पावर दी है ,....और नियति ने उनसे भी कुछ न कुछ सार्थक काम करवाया है ,... कर्म के लिए शक्ति आवश्यक है !......बाबा रामदेव क्या हैं !..इसका सर्वमान्य उत्तर सिर्फ और सिर्फ समय ही दे सकता है !...तब तक हमें प्रतीक्षा करनी ही चाहिए !...वैसे तो शंकाएं पतनकारक होती हैं ,..लेकिन कभी कभी ये भी उत्थान का कारण बनती हैं !.....आप एक दिन सुबह तीन बजे से रात ग्यारह तक जाग कर देखिएगा !.......संसार में आकर कुछ कर सकते हो तो करना ही चाहिए ,...लेकिन अनावश्यक अनर्गल प्रलाप गलत है !...आपको यह बात किसी मीडिया ,जनता ,बुद्धिजीवी की तरफ से नहीं कही जा रही है ,...हा हा हा हा ..पुनः सादर अभिवादन

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

मान्यवर ,..सादर अभिवादन आपका लेख पढ़कर लगता है कि आप भी अपने जैसे ही हैं !...नाम कुछ और होने से क्या फर्क पड़ता है ,.......हा हा हा हा ..........मानव मन में तमाम भ्रम उत्पन्न होना स्वाभाविक लगता है !.......कभी कभी हमें भ्रम को उत्पन्न भी करना पड़ता है ,.......आप काफी मात्रा में आत्ममुग्धता के शिकार लगते हैं !.......आपका तो नाम ही सद्गुरुजी है ,...कुछ साधना वाधना भी कर लिया करो जी !......कृपया सलाह को अन्यथा मत लीजियेगा !...इस देश के पतन के पीछे हमारे और आपके जैसे लोग ही हैं !.जिन्होंने लालू जैसों को पावर दी है ,....और नियति ने उनसे भी कुछ न कुछ सार्थक काम करवाया है ,... कर्म के लिए शक्ति आवश्यक है !......बाबा रामदेव क्या हैं !..इसका सर्वमान्य उत्तर सिर्फ और सिर्फ समय ही दे सकता है !...तब तक हमें प्रतीक्षा करनी ही चाहिए !...वैसे तो शंकाएं पतनकारक होती हैं ,..लेकिन कभी कभी ये भी उत्थान का कारण बनती हैं !.....आप एक दिन सुबह तीन बजे से रात ग्यारह तक जाग कर देखिएगा !.......संसार में आकर कुछ कर सकते हो तो करना ही चाहिए ,...लेकिन अनावश्यक अनर्गल प्रलाप गलत है !...आपको यह बात किसी मीडिया ,जनता ,बुद्धिजीवी की तरफ से नहीं कही जा रही है ,...हा हा हा हा ..पुनः सादर अभिवादन

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

आदरणीय सिंह साहब ! सुप्रभात ! मैं तो उस समय इस मंच से जुड़ा ही नहीं था ! किन्तु उस समय के एक से बढ़कर एक अनगिनत विद्वानों की ढेरों प्रतिक्रिया पढ़कर यही लगता है कि साहित्यिक दृष्टि से वो इस मंच का स्वर्णिम युग था ! क्रिया-प्रतिक्रिया से दूर हो अब तो अधिकतर लोग सिर्फ लिखे जा रहे हैं ! यही वजह है कि बहुत सी अच्छी रचनाएँ एक प्रतिक्रिया पाने तक को तरस जा रही है ! उस समय यानि 2011 -12 में मंच पर ऐसी प्रतिभाशाली और सक्रीय विद्वत मंडली थी जो सबकी कलम को अच्छा से अच्छा लिखने को प्रोत्साहित रहती थी ! तब मंच पर काफी कम्पटीशन भी था, लेकिन यही कम्पटीशन ब्लॉगर को अच्छा से अच्छा लिखने को मजबूर भी कर देता था ! पुराने ब्लॉगरों कि रचनाओं तक किसी प्रतिक्रिया के जरिये ही फ़िलहाल पहुंचा जा सकता है ! उस समय के अधिकतर साहित्यकार मंच से आज गायब हैं, किन्तु उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक धरोहर मंच पर अब भी मौजूद है, जिसे न सिर्फ सम्भालकर रखने की जरुरत है, बल्कि उनतक सहजता से आज के ब्लॉगर पहुँच सकें, इसकी भी व्यवस्था करने की जरुरत है ! कुछ दिन पहले जागरण मंच को मैंने सुझाव दिया था कि पुराने ब्लॉगरों की रचनाओं तक आसानी से पहुँचने के लिए मंच न सिर्फ उनकी एक लिस्ट मुख्य पेज पर प्रकाशित करे, बल्कि सर्च करने की सुविधा भी प्रदान करे ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

रामदेव की महत्वाकांक्षा तो भारत का प्रधानमंत्री बनने की थी और कुछ वर्षों पूर्व दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली सहित उनकी विभिन्न आंदोलनकारी गतिविधियां अपने लिए राजनीतिक भूमि तैयार करने के उद्देश्य से ही प्रेरित थीं । आदरणीय जितेन्द्र जी एक बार फिर आपका विचार मुझसे मिल गया मैंने एक सपना देखा था और उसके आधार पर ब्लॉग लिखा था २०१४ का भारत - उसकी कुछ पंक्तियां यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ- सपने में ही मुझे सन २०१४ का नजारा दिखने लगा. भारत स्वाभिमान पार्टी (बी एस पी) बहुत ही भारी बहुमत से जीती है. इन्हें दो तिहाई बहुमत मिल गया है. सभी राजनीतिक पार्टियों की जमानत जब्त हो गयी है. कुछ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कुछ पत्रकार और साहित्यकार भी चुनाव जीत गए हैं. बाबा रामदेव को सर्वसम्मत्ति से प्रधानमंत्री बना दिया गया है और अन्ना हजारे राष्ट्रपति पद की शोभा बढ़ा रहे हैं. अन्ना जी अभी प्रधान मंत्री और उनके सदस्यों को शपथ दिलवाने की तैयारी कर रहे थे तभी उनके कक्ष में अरविन्द केजरीवाल का आगमन होता है.- “अन्ना, प्लीज बाबा से बात करो न! मुझे उप प्रधान मंत्री बना दें, नहीं तो उनको अकेले पीएमओ परेशान कर देगा. मैं उनके साथ साए की तरह रहूँगा. तो उनको कोई परेशानी न होने दूंगा”. अन्ना ने मोबाइल पर बाबा रामदेव से बात की और थोड़ी न नुकुर के बाद वे मान गए! अब शपथ ग्रहण समारोह शुरू हुआ प्रधान मंत्री के साथ उनके २० सदस्यीय मंत्री परिषद् ने शपथ ली. ब्लॉग का लिंक यहाँ दे रहा हूँ http://jlsingh.jagranjunction.com/2012/04/21/%E0%A5%A8%E0%A5%A6%E0%A5%A7%E0%A5%AA-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4/

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय जितेन्द्र माथुर जी, एक बार फिर आपका विचार मुझसे मेल खाया ... मैंने एक सपना देखा था और उसी पर आधारित एक ब्लॉग लिखा था २०१४ का भारत - उसकी कुछ पंक्तियां यहाँ उद्धृत कर रहा हूँ - सपने में ही मुझे सन २०१४ का नजारा दिखने लगा. भारत स्वाभिमान पार्टी (बी एस पी) बहुत ही भारी बहुमत से जीती है. इन्हें दो तिहाई बहुमत मिल गया है. सभी राजनीतिक पार्टियों की जमानत जब्त हो गयी है. कुछ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कुछ पत्रकार और साहित्यकार भी चुनाव जीत गए हैं. बाबा रामदेव को सर्वसम्मत्ति से प्रधानमंत्री बना दिया गया है और अन्ना हजारे राष्ट्रपति पद की शोभा बढ़ा रहे हैं. अन्ना जी अभी प्रधान मंत्री और उनके सदस्यों को शपथ दिलवाने की तैयारी कर रहे थे तभी उनके कक्ष में अरविन्द केजरीवाल का आगमन होता है.- “अन्ना, प्लीज बाबा से बात करो न! मुझे उप प्रधान मंत्री बना दें, नहीं तो उनको अकेले पीएमओ परेशान कर देगा. मैं उनके साथ साए की तरह रहूँगा. तो उनको कोई परेशानी न होने दूंगा”. अन्ना ने मोबाइल पर बाबा रामदेव से बात की और थोड़ी न नुकुर के बाद वे मान गए! अब शपथ ग्रहण समारोह शुरू हुआ प्रधान मंत्री के साथ उनके २० सदस्यीय मंत्री परिषद् ने शपथ ली. पूरा ब्लॉग का लिंक भी दे रहा हूँ - http://jlsingh.jagranjunction.com/2012/04/21/%E0%A5%A8%E0%A5%A6%E0%A5%A7%E0%A5%AA-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4/

के द्वारा: jlsingh jlsingh

सटीक लेख है आपका आदरणीय सद्गुरु जी । व्यापार और राजनीति ही ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें कोई स्थायी शत्रु या मित्र नहीं होते तथा निजी हित को साधने के लिए अपनी सुविधानुसार सम्बन्धों को बनाया-बिगाड़ा जाता है । इस दृष्टि से योगगुरु रामदेव और लालू यादव दोनों एक ही श्रेणी में आते हैं । रामदेव की महत्वाकांक्षा तो भारत का प्रधानमंत्री बनने की थी और कुछ वर्षों पूर्व दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली सहित उनकी विभिन्न आंदोलनकारी गतिविधियां अपने लिए राजनीतिक भूमि तैयार करने के उद्देश्य से ही प्रेरित थीं । लेकिन शीघ्र ही वे इस सत्य को समझ गए कि प्रत्यक्ष रूप से राजनीति करना और भारतीय शासन व्यवस्था के शिखर पद तक पहुँच पाना उनके लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था । तब उन्होंने अपने व्यावसायिक हितों को साधने के लिए राजनीति में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाना आरंभ कर दिया । मैं इस तथ्य की ओर ध्यानाकर्षण करना चाहता हूँ कि उनका वास्तविक नाम राम किशन यादव है और उन्होंने अपने लिए बाबा रामदेव का लोकप्रिय नाम इसलिए अपनाया क्योंकि बाबा रामदेव राजस्थान के एक अत्यंत लोकप्रिय एवं श्रद्धेय लोक देवता हैं जिनके राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में अनेक मंदिर हैं तथा जिनके ऊपर अनेक लोकगीतों एवं भजनों की रचना की गई है । बाबा रामदेव का निर्वाण स्थल रामदेवरा राजस्थान के जैसलमेर जनपद में है जहाँ प्रतिवर्ष भाद्रपद मास में मेला आयोजित होता है जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं । इस लोकदेवता के जनमानस में स्थापित नाम को अपने हित में भुनाने के लिए योगगुरु बनने के उपरांत राम किशन यादव ने अपना नामकरण बाबा रामदेव कर लिया और आज हाल यह है कि गूगल में 'बाबा रामदेव' शब्द लिखकर सर्च करने पर सारी सामग्री योगगुरु से संबंधित ही आती है और लोग भी 'बाबा रामदेव' के नाम से राजनीति और व्यापार में आकंठ डूबे योगगुरु को ही जानते हैं । आपने राजेंद्र कृष्ण द्वारा रचित 'गोपी' फ़िल्म के गीत का जो संदर्भ दिया है, वह सर्वथा उपयुक्त है । अब तो इस गीत के बोल चहुंओर चरितार्थ होते दिखाई देते हैं । रामचन्द्र ने इस गीत में जो सिया से कहा है, वही तो हो रहा है; वैसा ही कलयुग तो अब चल रहा है जिसमें रहने पर हम विवश हैं ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

श्री सद्गुरु जी रामदेव केवल ब्लैक मेलिंग कर रहे हैं पहले उन्होंने अखिलेश यादव से कहा था मैं बुंदेल खण्ड में कारखाना लगाना चाहता हूँ अपने क्षेत्र के लोगों को रोजगार देना किसे बुरा लगता है अब लालू जी से प्रेम करने पहुंच गए आपको शायद याद हो मोदी जी के चुनाव के दिनों में भी यह नाराज हो गए थे अपने कुछ भाई जियों को टिकट दिलवाना चाहते थे उन दिनों न्यूज नेशन में इन्हें बुलाया गया था मैं भी थी मैने इनसे पूछा था आप तो सन्यासी हैं योगी है कबीर दास जी का दोहा हैं यह तो घर है प्रेम का | खाला का घर नहीं | शीश कटाये भुहिं धरे तव पैठे इही माहि | आपके भाजपा के प्रेम में नाराजगी कैसी और डिमांड कैसी यहां तो बिना शर्त के समर्पण होता है इन्हें उत्तर नहीं सुझा थाअभी राज्य सभा के सदस्य मनोनीत किये गए हैं आप समझ गए होंगें इन्होने योग के क्षेत्र मैं बहुत काम किया इसमें कोइ दो राय नहीं है एक महा गठबंधन की कोशिश हो रही है इन्हें अपना काम बढ़ाना है जमीन चाहिए सस्ती लेबर चाहिए

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम सद्गुरुजी आपके विचारो से हम बिलकुल सहमत नहीं हम भारतीयों में बीमारी है दुसरे की प्रसिष्ठा देख नहीं सकते विश्व भर में लाखो लोगो को योग और आयुर्वेद से फायेदा पहुँचाया पुरे विश्व में देश की प्रतिष्ट बढ़ाई बहुत तरह के सामन स्वदेश में तैयार करा कर विदेशी मुद्रा बची आपने शायद सुना नहीं उन्होंने आपतिकाल में अंग्रेज़ी दवा के लिए हमेश कहा यदि उनके योग से फायेदा नहीं होता तो इतने लोग उनके योग शिविरों और सुभाह टीवी में देख कर नहीं योग करते.बाबा पैसे देश के कार्यो में लगते कोइ दूसरा देश होता तो शायद उन्हें देश का सबसे ऊंचा सम्मान मिल जाता लेकिन भारत में काम कने वालो का विरोध होने लगता या आदि काल से आ रहा.राजीव दीक्षित की पुणे में संदिग्ध परिस्थित में मृत्यु हुई थी उसके लिए रामदेव जी को दोष नहीं दिया जाना चैये यहाँ तो लालू चारा घोटाले में फंसा अब नितीश कांग्रेस से मिल गया लोगो को जाति के नाम पर भड़का कर चुनाव जीता रामदेवजी योग दिवस के लिए गए कोइ निजी मामला नहीं रामदेव जी देश के महौरुष है और देशवाशियो को उनपर गर्व है.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर अभिवादन! आपने आरक्षण ब्यवस्था और गुजरात सरकार के वर्तमान नियम पर प्रकाश डाला है. मेरी जानकारी में बिहार में भी OBC में आर्थिक स्टार पर पिछड़े लोगों को आरक्षण का लाभ मिलता है जिनकी आमदनी ४ लाख सालाना है. इस हिसाब से ३३,३३३ रुपये मासिक आमदनी बैठती है. गुजरात सरकार का यह फैसला लोक लुभावन तो हो सकता है, सटीक नहीं. हाँ जिस घर में कोई नौकरी पेश नहीं है केवल कृषि आधारित आय है तो वह इसके परिधि में आ सकते हैं. आने दीजिये. सवर्ण बहुत दिनों से असंतुष्ट चल रहे हैं. उन्हें भी खुश हो लेने दीजिये. सरकार चलनी है या फिर से सत्ता में आनी है तो जाल तो फेंकने ही पड़ते हैं. हरियाण के जाट आंदोलन को हम सबने देखा है. कितना नुक्सान राष्ट्रीय संपत्ति का हुआ और महिलाओं के इज्जत को भी तार तार किया गया. हमारा समाज कहाँ जा रहा है. हम कभी देख भक्ति का राग अलापते हैं तो कभी धर्म और जातिके आडम्बर में फंस कर रह जाते हैं. होना तो यही चाहिए, 'सबका साथ सबका विकास' पर हो कहाँ रहा है?

के द्वारा: jlsingh jlsingh

उत्तराखण्ड मे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने हरीश रावत सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य में खनन और शराब में खुला भ्रष्ट्राचार किया गया है ! प्रदेश में खनन माफिया, शराब माफिया, भूमाफिया ने सरकार को जकडा हुआ था ! भय और भ्रष्ट्राचार का वातावरण पूरे प्रदेश में था ! 20-22 दिन के राष्ट्रपति शासन में एक सौ करोड़ से ज्यादा पेनाल्टी का पैसा हमारे प्रदेश के खजाने में आ गया है ! इस हिसाब से साढ़े चार साल में पांच हजार चार सौ करोड़ रुपए सरकार के लोगों के जेब में गया है, जबकि यह पैसा सरकार के खजाने में आना चाहिए था ! इसलिये कांग्रेस सरकार के उपर लगा भ्रष्ट्राचार का आरोप माफ नही हो सकता है. इसके खिलाफ भाजपा का संघर्ष जारी रहेगा ! भाजपा राज्य में सजग प्रहरी की तरह काम करेगी !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी उत्तम लेख आजकल इस कदर विज्ञापन द्वारा हर वस्तु बेचीं जाती है विज्ञापन को बूढ़े बच्चे हरेक के दिमाग में डाल देते हैं छोटे बच्चों को देखिये खाने में दाल सब्जी नहीं खाते कुरकुरे खाते हैं पानी की जगह पेप्सी या कोक पीते हैं गरीब भी यह सोच क्र बड़े लोगों के बच्चे जिन वस्तुओं का इस्तेमाल करते हैं व्ही अपने बच्चों को खिलाते पिलाते हैं एक बार एक काली लडकी मेरे पति के पास आई कहने लगी में गोरी होना चाहती हूँ फेयर एंड लवली खरीदना चाहती हूँ मेरी माँ नहीं मानती इन्होने जबाब दिया यदि फेयर एंड लवली से गोर होते तेरी आंटी सबसे पहले गोरी हो जाती | अच्छा स्वास्थ्य वर्धक भोजन न खाकर कृतिम प्रसाधनों के इस्लेमाल की रूचि बढ़ रही है सेलिब्रटी को देख कर उसी प्रोडक्ट का इस्तेमाल चाहते हैं ज्ञान कारी लेख

के द्वारा: Shobha Shobha