सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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विचारों को व्यक्त करने की स्वतंत्रता

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विचारों को व्यक्त करने की स्वतंत्रता.भारत में हर देशवासी को अपने विचार वयक्त करने की आजादी है.विचार व्यक्त करने का जो भी माध्यम लोग पातें हैं अपने विचार व्यक्त करतें है.ट्विटर फेसबुक सहित विभिन्न संचार माध्यमों पर कट्टर विचारों की भरमार है जो देश के सबसे बड़े समुदाय हिन्दू समुदाय को उतेजित करने के लिए है खासकर नौजवानों को.सारे विचारों का मकसद एक ही है की हिन्दू एकजुट हों २०१४ के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को वोट दें.परन्तु वास्तव में ऐसा होगा नहीं हाँ देश में दो समुदायों की बीच नफरत जरूर फैलेगी.ये देश आजादी के बाद से अब तक सिर्फ राजनीती के कारण विभिन्न समूहों, समुदायों और जातियों में बट चूका है.देश में सब पार्टियाँ एक दुसरे को कम्युनल कहतीं हैं परन्तु सचाई यह है की हर पार्टी किसी न किसी जाती या कम्युनल फोर्सेज से जुडी हुई है जो उसके कट्टर समर्थक हैं.ये देश स्वार्थसिद्धि वाली राजनीती के कारण इतने जाती सम्प्रदायों और समूहों में बट चूका है की किसी एक पार्टी को सब मिल के वोट दे ही नहीं सकते.इसीलिए कई पार्टियाँ मिलकर देश और कई प्रदेशों में सरकारें चला रहीं हैं.ये पीरियड अभी आगे भी चलेगा.बीजेपी के लिए देश की सत्ता पाने का रास्ता आज भी कठिन दिख रहा है.देश के सभी समुदायों और समूहों को अपना समर्थक बनाये बिना ये सन\म्भव नहीं है.मीडिया पर जो लोग कट्टर हिन्दू विचारधारा का प्रचार कर रहें हैं वे बीजेपी को लाभ कम नुकसान ज्यादा पहुंचा रहें हैं.२०१४ के चुनावी नतिजॆ इसकी पुष्टि करेंगें.मोदीजी के विकासवादी विचारधारा का मै भी समर्थक हूँ.बीजेपी को उनकी विकासवादी विचारधारा का प्रचार प्रसार करना चाहिए ताकि समाज के सभी वेर्गो में उसको लाइक किया जाये.बीजेपी को अपने नेताओं पर भी कंट्रोल करना चाहिए जो मोदीजी के खिलाफ प्रचार कर रहें हैं.बीजेपी का लोग प्रचार प्रसार करें परन्तु ये भी ध्यान रखें की देश में शांति बनी रहे और विभिन्न समुदायों के बीच नफरत न फैले. हमारे देश की माननीय सर्वोच्च अदालत ने कुछ समय पहले कहा था की देश में विचारों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूर है परन्तु विचारों को दण्डित भी किया जा सकता है यदि वो सही नहीं हैं, समाज के लिए अहितकर हैं या आपस में नफरत फ़ैलाने वाले हैं.अत: मेरा सभी से आग्रह है की सयंमित ढंग से अपने मन की बात कहें.ये चुनावी मौसम तो आता जाता रहेगा, सरकारे बनती बिगडती रहेंगी परन्तु हम सब ने रहना इसी देश में है.अब कोई कहाँ जायेगा?हिन्दू हो मुस्लिम सबने इसी देश में रहना है.अच्छा हो की आपस में मिल जुल कर रहें और आपस में मिलजुल कर कानून के जरिये अपने मसलों को हल करें.(सद्गुरु राजेंद्र ऋषिजी प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम ग्राम-घमहापुर पोस्ट-कन्द्वा जिला-वाराणसी पिन-२२११०६)



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