सद्गुरुजी

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जासूसी कांड की जाँच महिला की निजता का हनन

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जासूसी कांड की जाँच या महिला की निजता का हनन
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ताजा समाचारों के अनुसार कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार जाते जाते जल्द ही गुजरात के कथित महिला जासूसी कांड की जांच करवाने के लिए एक कमीशन का गठन कर सकती है जिसके अध्यक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज हो सकते हैं.दो मई को गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने संवादाताओं से कहा कि लोकसभा चुनावों के मतों की गिनती से पहले हम गुजरात में एक महिला की जासूसी कराने के आरोप की जांच के लिए न्यायाधीश की नियुक्ति करेंगे.माना जा रहा है कि कांग्रेस सरकार चुनावी मौसम में भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए ये अपना आखिरी कदम उठा रही है.इसके पीछे कांग्रेस की एक कुटिल चाल ये भी हो सकती है कि लोकसभा चुनाव के अंतिम दो चरण में इसका कुछ राजनितिक फायदा उठाया जाये और इस चुनाव में भाजपा को बहुमत न मिलने की दशा में मोदी को कोई नया राजनीतिक दल समर्थन न दे,इसके लिए एक मोदी विरोधी माहौल बनाया जाये.
इस मामले की जाँच पहले से ही गुजरात सरकार करा रही है,अत: केंद्रीय जाँच की कोई जरुरत ही नहीं थी.भजपा के नेता सही कह रहे हैं कि-”जहां तक कथित स्नूपगेट (जासूसी कांड) की संवैधानिक स्थिति का मामला है तो तथ्य यह है कि राज्य सरकार द्वारा इसकी जांच गठित हो चुकी है.चुनावों में यह सरकार बुरी तरह से हार कर सत्ता से बाहर हो रही है,इसीलिए हताशा के कारण इस तरह की घोषणाएं कर रही है.” इससे पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली ने दावा किया था कि कोई भी न्यायाधीश नरेन्द्र मोदी को निशाना बनाने के लिए राजनीतिक एवं दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई के लिए खुद को आगे नहीं करेगा.
पहली विचारणीय बात ये है कि इस मामले में शिकायतकर्ता न ही वो लड़की है,जिसकी जासूसी की गई और न ही उसके पिता या भाई.उसके परिवार के किसी भी सदस्य ने शिकायत नहीं की है.यह मामला तब उठा जब नवंबर, २०१३ में गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार के ख़िलाफ़ क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे निलंबित आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर महिला आर्किटेक्ट की जासूसी प्रकरण के मामले में सीबीआई जाँच की माँग की.समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में प्रदीप शर्मा ने कहा था- “याचिका के साथ संलग्न दस्तावेज़ों और ट्रांस्क्रिप्ट का संज्ञान लेकर सीबीआई को मामला दर्ज कर नरेंद्र मोदी सरकार, अमित शाह और अन्य लोगों द्वारा टेलीग्राफ़ एक्ट १८८५ और अन्य क़ानूनों के उल्लंघन की जाँच करने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए.”
दो न्यूज पोर्टल कोबरापोस्ट और गुलेलडॉटकॉम के स्टिंग ऑपरेशन से यह मामला सामने आया था कि किसी ‘साहेब’ के कहने पर एक लड़की की जासूसी कराई गई.इसके अलावा आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेकर सनसनी फैला दी थी.प्रदीप शर्मा का आरोप है कि जिस ‘साहेब’ के कहने पर महिला की जासूसी कराई गई, वह कोई और बल्कि खुद नरेंद्र मोदी हैं.
प्रदीप शर्मा ने दावा किया था कि उन्होंने ही बेंगलुरु रह रही भुज की एक आर्किटेक्ट लड़की की मुलाकात मोदी से कराई थी.यह मुलाकात साल २००४ में उस वक्त हुई थी, जब लड़की की उम्र 27 साल थी.”प्रदीप शर्मा की तरफ से ऐडवोकेट सुनील फर्नांडिस द्वारा फाइल ऐप्लिकेशन में कहा गया था कि ‘आवेदक शर्मा को लगता है कि मोदी और वह महिला कई सालों तक संपर्क में रहे.चर्चा थी कि इस महिला की कोई सीडी है, जिसमें वह किसी शख्स के साथ आपत्तिजनक अवस्था में है.’
दूसरी विचारणीय बात ये है कि गुजरात सरकार ने प्रदीप सशर्मा पर जो सनसनीखेज आरोप लगाये हैं,उसपर जरा गौर कीजिये.गुजरात सरकार ने आरोप लगाया है कि-”सन २००९ में प्रदीप शर्मा की मोबाइल फोन पर हुई बातचीत को इंटरसेप्ट किया गया था.इससे पता चला कि प्रदीप शर्मा ने अपनी पत्नी के नाम अमरीका में बड़ी मात्रा में हवाला ट्रांजेक्शन किया था.शर्मा ने कई बेनामी प्रोपर्टी भी खरीद रखी है.प्रदीप शर्मा के कई शादीशुदा महिलाओं से अवैध संबंध थे.”
गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया था कि-”न केवल महिला के पिता को बल्कि खुद महिला को पता था कि राज्य की एजेंसियां उसे ट्रैक कर रही है.राज्य की कार्रवाई के लिए महिला शुक्रगुजार थी.हलफनामे में कहा गया कि महिला को झूठे प्रचार से काफी दुख पहुंचा है.”
तीसरी सबसे विचारणीय बात ये है कि दैनिक भास्कर डॉट कॉम में १६ दिसम्बर २०१३ को प्रकाशित खबर के अनुसार-”गुजरात जासूसी मामले में अब एक टर्निग प्वाइंट आ गया है.बताया जा रहा है कि जासूसी की शिकार हुई आर्किटेक्ट महिला माधुरी (परिवर्तित नाम) अपने परिवार के साथ पेरिस चली गई है.मूल रूप से भुज की रहने वाली माधुरी की जासूसी की खबर सामने आने के बाद गुजरात सहित पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है.इसीलिए मीडियाकर्मी भी अब माधुरी के बारे में और बातें जानने के लिए उससे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं.बताया जा रहा है कि इसी के चलते माधुरी और उसके परिवार ने यह कदम उठाया है.सूत्रों के बताए अनुसार माधुरी चुपके से पति, पिता और दोनों भाइयों के साथ पेरिस पहुंच चुकी है.”
मित्रों ! ये ब्लॉग लिखते लिखते मेरी आँखों में आंसू आ गए.हमारा ये कैसा अजीब देश है.यहांपर हर चीज पर राजनीती होती है.माधुरी (काल्पनिक नाम) यदि शादी से पहले उसने किसी से दोस्ती की.भले ही वो मोदीजी ही क्यों न हों,तो उसे बेवजह क्यों तूल दिया जा रहा है ?फोन टेपिंग की शिकायत न उसने की न उसके पिता ने और न ही उसके परिवार के किसी सदस्य ने,फिर इतना हो हल्ला क्यों ?कम से कम हम ये तो सोचते कि अब वो शादीशुदा है,उसकी निजता का तो ख्याल करें.जासूसी कांड की जाँच के नाम पर उसे इतना बदनाम किया गया कि वो अपने दिल में दर्द और आँखों में आंसू लेकर भारत छोड़कर अपने परिवार सहित पेरिस चली गई.शर्म आनी चाहिए हमें कि हम लड़का व लड़की की दोस्ती की इज्जत करना नहीं जानते हैं.किसी की निजता का सम्मान करना नहीं जानते हैं.सबसे बड़ी बेशर्मी की बात ये है कि राजनीतिक फायदे के लिए इस मुद्दे को उछाला गया और माधुरी जैसी होनहार प्रतिभा को देश छोड़कर विदेश जाने पर मजबूर किया गया.क्या वो कभी हमें माफ़ कर सकेगी ?मुझे क्षमा करना माधुरी..मै भी इस देश का एक नागरिक हूँ..!! जयहिंद !!
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आलेख,संकलन और प्रस्तुति=सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी,प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम,ग्राम-घमहापुर,पोस्ट-कन्द्वा,जिला-वाराणसी.पिन-२२११०६.
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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ranjanagupta के द्वारा
May 3, 2014

बड़े ही अफ़सोस की बात है सद्गुरु जी ,बहुत ही घटिया कदम कांग्रेस ने उठाया है ,सब खुन्नस निकाल कर भी क्या कांग्रेस जीत पायेगी ?बहुत बहुत बधाई आपको , आजकल सरकार के पास सारे मुद्दे खत्म हो गये है !

sadguruji के द्वारा
May 4, 2014

आदरणीया डॉक्टर रंजनाजी ! हार्दिक अभिनन्दन ! पोस्ट की सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! मुझे सबसे ज्यादा दुःख इस बात है कि भारत की घटिया राजनीती से परेशान होकर उस लड़की को भारत छोड़ना पड़ा.दूसरों की दोस्ती कांग्रेसियों को बुरी लगता है,जबकि वही काम वो खुद भी करते हैं.वो बहुत घटिया पॉलिटिक्स करते हैं.

sadguruji के द्वारा
May 10, 2014

आदरणीय योगीजी,हार्दिक अभिनन्दन ! पोस्ट की सराहना के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद.आश्चर्य की बात है की महिलाओं के लिए ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर वो चुप क्यों हैं.उनकी कोई प्रतिक्रिया बहुत कम मिलती है.मेरा जो कर्तव्य था,वो मैंने किया.


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