सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

467 Posts

5103 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15204 postid : 1036965

विवाह पूर्व यौन संबंध बनाना चाहिए या नहीं? -एक चिंतन

  • SocialTwist Tell-a-Friend

propose-522fd7accc21f_exl
विवाह पूर्व यौन संबंध बनाना चाहिए या नहीं? -एक चिंतन

पिछले दस सालों में सेक्स को लेकर भारत में एक बहुत बड़ी सामाजिक क्रांति हुई है। चूँकि इस विषय पर खुलकर हमारे देश में चर्चा नहीं होती है, इसलिए बात घरों की चहारदीवारी और लोंगो के मन में ही ढकी-छिपी रह जाती है। २०१५ में हुए एक सेक्स सर्वे के अनुसार अब पहली बार सेक्स करने वालों की उम्र करीब १५ से १६ वर्ष है, जबकि कुछ साल पहले के सेक्स सर्वे में पहली बार सेक्स करने वालों की उम्र १८ से २६ वर्ष थी। इस सेक्स सर्वे के अनुसार १०वीं क्लास के हर १० में से तीन छात्र सेक्स कर चुके हैं। सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात ये है कि एबॉर्शन के वर्तमान आंकड़ों पर गौर करें तो २७ से ३० फीसदी एबॉर्शन किशोरी लड़कियों के हो रहे हैं। ये सेक्स सर्वे यह भी बताते हैं कि पूरे देशभर में समलैगिकता को चाहने वालों, विवाहपूर्व यौन सम्बन्ध बनाने वालों, विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध रखने वालों और बिना विवाह के साथ रहने वालों की संख्या दिनोदिन बहुत तेजी से बढ़ रही है। ये सभी मुद्दे और आंकड़े न सिर्फ चौकाने वाले हैं, बल्कि आने वाले समय में गंभीर समस्या भी बनने वाले हैं।
इसलिए इन विषयों पर आज के समय में खुलकर चर्चा होना जरुरी है, ताकि अधिकतर लोंगो को पसंद कोई सही और संतोषजनक समाधान निकल सके। ‘विवाह से पहले सेक्स करना चाहिए या नहीं?’ आजकल के नाबालिग किशोर हों, बालिग युवा पीढ़ी हो या फिर अकेलेपन का जीवन जीने वाली अनब्याही लडकियां हों, अक्सर इस तरह के सवाल उनके मन में उठते हैं और वो एक दूसरे से पूछते हैं, इस विषय पर आपस में चर्चा भी करते हैं। हालाँकि यह एक बहुत जटिल प्रश्न है और इसका सही उत्तर ढूंढ पाना मुश्किल है, क्योंकि संस्कार और आचार-विचार के इस प्रश्न के उत्तर भी भिन्न भिन्न प्राप्त होंगे। सामाजिक नैतिकता और धर्मग्रंथों की दृष्टि से देखें तो बिना विवाह के सेक्स करना पाप है। बहुत यथार्थपूर्ण और व्यावहारिक ढंग से हमारे परिवार वाले और सभी धर्मों के धर्मग्रन्थ हैं यहीं समझाते हैं कि विवाह पूर्व यौन संबंध नहीं बनाना चाहिए। बिना शादी के सेक्स करने से लड़की के गर्भवती होने, प्रेमी से शादी न होने पर जिन्दगी भर कुंठित रहने, प्रेमी द्वारा ‘ब्लैक-मेलिंग’ करने और सेक्स-संबंध बनाने की आदती हो जाने का खतरा है। लड़कों पर बलात्कार के आरोप लग सकते हैं और उन्हें थाना व कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। सजा होने पर उनका कैरियर ही नहीं बल्कि उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो सकती है।
महिलाओं की पूर्ण आजादी की पक्षधर आज के समय की बहुत सी युवतियों का विवाह जैसी प्राचीन और परम्परागत प्रथा पर विश्वास कम हो रहा है। इस तरह का विवाह बंधन उन्हें ये पुरुषों की गुलामी समझ में आती है। बहुत से युवतियों की शादी दहेज़ की समस्या के कारण नहीं हो पा रही है और बहुतों की कैरियर बनाने में ही काफी उम्र बीत जा रही है। इन्ही सब कारणों से देश की पढ़ीलिखि युवतियों में बिना विवाह किये अपनी पसंद के पुरुष के साथ रहने का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है। यदि प्राचीन समय के अनुसार विचार किया जाये तो यह एक तरह से ‘गांधर्व विवाह’ ही कहलायेगा, जिसमे युवक- युवती स्वेच्छा से प्रणयबंधन में बंध जाते थे। मेरे विचार से कानून को अपनी पसंद के पुरुष के साथ रहने को ‘गांधर्व विवाह’ की मान्यता दे देनी चाहिए, ताकि कोई भी युवती किसी युवक के साथ वर्षों रहने के बाद उसपर बलात्कार या यौन शोषण का झूठा आरोप न लगा सके। आज के युग के बहुत से बुद्धिजीवी और प्रगतिशील विचारों वाले लेखक इस बात के पक्षधर हैं कि अनब्याही लड़कियों को भी अपनी पसंद का युवक चुनने और उससे सेक्स संबंध स्थापित कर अपनी सेक्सुअल प्यास बुझा लेने का अधिकार होना चाहिए।
वो विवाह पूर्व यौन संबंध बनाने का पक्ष लेते हुए कुछ यक्ष प्रश्न समाज के सामने उठाते है जैसे- ‘अपनी स्वेच्छा से किसी से सेक्स-संबंध स्थापित करने वालीं और सेक्स का आनंद लेने वाली अनब्याही लडकियां समाज में आवारा, बदचलन और चरित्रहीन क्यों घोषित हो जाती हैं?’ ‘शादी के बाद जो काम सम्मानित हो जाता है, शादी से पहले वह काम घटिया कैसे हो सकता है?’ ‘बहुत सारी लड़कियां हैं जो शादी करना ही नहीं चाहतीं हैं, क्या ऐसी लड़कियां बिना सेक्सलाइफ जीए मर जाएं?’ इन सवालों को यक्ष प्रश्न मैंने इसलिए कहा है, क्योंकि इन सवालों का कोई सही जबाब समाज से अबतक नहीं मिला है। इस समस्या का अभी तक कोई समाधान नहीं निकल सका है, बल्कि यों कहें कि ये समस्या दिनोदिन बढ़तीं ही जा रही है। कोई भी लेख पढ़कर हमलोग अपने संस्कार और विवेक के अनुसार सकारात्मक या नकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं, परन्तु सत्य यही है किअपने व्यावहारिक जीवन में व्यक्ति जब किसी भी आवेश में आता है चाहे उसका कारण सेक्स हो या कुछ और तो किसी धर्मग्रन्थ, किसी के अच्छे सुझाव और नैतिकता की बजाय भावावेश में स्वयं त्वरित निर्णय लेता है, जो सही भी हो सकता है या फिर गलत भी।
देश में नित्य होने वाले घोटाले, भ्रष्टाचार, बलात्कार, चोरी, डकैती, ह्त्या और लूटपाट पर रोज कितने लेख लिखे जाते हैं, सभी धर्मग्रंथों में यह सब बुरे कृत्य करने की सख्त मनाही है, परन्तु फिर भी यह सब रोज हो रहा है, कहाँ रुक रहा है। कुछ विचार समय की बहती हुई धारा के साथ साथ चलते हैं और कुछ विचार मार्ग की बाधा समझ सतत गतिशील समय की धारा द्वारा एक तरफ कर दिए जाते हैं। समय को आगे बढ़ने के लिए ऐसा करना जरुरी हो जाता है। शादी से पहले सेक्स संबंध नहीं बनाना चाहिए, ये मेरा भी व्यक्तिगत विचार और सुझाव है, परन्तु समाज में आज इसके उलट हो रहा है। सेक्स के मामले में खुलेपन की बहुत तेज बयार बह रही है। हर महीने कई अभिभावक मुझसे सलाह लेने आते हैं कि उनके नाबालिग या बालिग बच्चे विवाह पूर्व यौन संबंध स्थपित कर लिए हैं, अब क्या करें? कई बालिग बच्चों को मैंने उसी लड़की से शादी कर लेने की सलाह दी, जिसके साथ उन्होंने सेक्स संबंध बनाया था। ऐसी कई शादियां हुई भीं और कुछ में आशीर्वाद देने मैं स्वयं गया भी था। मैं जानता हूँ कि ये शादी वाला उपाय सब बच्चों के लिए कारगर नहीं है। कई आधुनिक विचार की लड़कियों ने महिलाओं को मिल रही आजादी का उपयोग करते हुए सेक्स संबंध बनाये, परन्तु बाद में परेशानी सामने आने पर और प्रेमी द्वारा धोखा देने पर माता पिता की मर्जी से विवाह करने पर मजबूर हुईं। आज के समाज की इस कड़वी हकीकत को मैंने बहुत नजदीक से देखा है।
इस बात में कोई संदेह नहीं कि सेक्स में तन,मन और आत्मा तीनों को पूरी तरह से जागृत और बहुत गहराई तक झंकृत कर देने वाला आनंद है, जो मनुष्य ही नहीं बल्कि अन्य प्राणियों को भी अपनी तरफ प्राकृतिक रूप से बहुत तेजी से आकर्षिोत करता है। इसका मूल कारण यह है कि सेक्स के समय प्रकृति के पाँचों सूक्ष्म तत्व- शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध न सिर्फ पूरी तरह से जागृत हो जाते हैं, बल्कि अपने अपने क्षेत्र से संबंधित असीम आनंद भी प्रधान करते हैं। प्रकृति द्वारा प्रदत्त सेक्स रूपी आनंदमय और अनमोल उपहार आदिम युग से ही स्त्री-पुरुष को अपनी तरफ खींचता रहा है। बाइबिल के अनुसार तो हमारे पूर्वज आदम और हव्वा सेक्स के लिए स्वर्ग का सुख भी छोड़ने को तैयार हो गए। हम सभी लोग जानते हैं कि आदिम युग में स्त्री को बिना विवाह के और एक से अधिक पुरुषों से संबंध बनाने की पूर्ण आजादी थी। कबीलाई युग प्राम्भ होने पर मनुष्य जब प्राकृतिक आपदाओं और दुश्मनों से बचने के लिए समूहों में रहना आरंभ किया, तब उसने महिलाओं को अपने अधिकार में रखने के लिए विवाह जैसे कड़े नियम बनाये।
परन्तु वो अपने दुश्मन या दूसरे कबीले की स्त्रियों को लूटकर उनसे बिना शादी किये यौन-संबंध बनाते थे और उनसे मन भर जाने पर उन्हें किसी दूसरे के हाथ बेच देते थे। यही अमानवीय और बर्बर कृत्य आज के समय में आईएसआईएस के लोग भी कर रहे हैं। राजा-महाराजाओं के युग में स्त्री तमाम वैभव और ऐश्वर्य भोगने के बाद भी भोग की एक वस्तु भर बन के रह गई थी। इतिहास इस बात गवाह है कि राजा-महाराजाओं द्वारा युद्धों में जीतकर लाई गई स्त्रियों से मनमाने और अवैध ढंग से यौन-संबंध स्थापित किया जाता था। प्राचीन समय में राक्षसी और पैशाचिक विवाह भी होता था। राक्षसी विवाह के अनुसार कन्या के अभिभावकों की स्वीकृति न होने पर भी, उन लोगों के साथ मार- पीट करके रोती- बिलखती कन्या का बलपूर्वक हरण करके उसको अपनी पत्नी बनने के लिए विवश किया जाता था। पैशाचिक विवाह के अनुसार सोई हुई या अर्धचेतन अवस्था में पड़ी अविवाहित कन्या को एकांत में पाकर उसके साथ बलात्कार करके उसे अपनी पत्नी बनने के लिए विवश किया जाता था। कुछ हद तक हर युग में ऐसा होता चला आ रहा है और आज के युग में भी ऐसे कुछ मामले अक्सर उजागर होते रहते हैं।
जहाँ तक महिलाओं द्वारा अपनी पसंद के पुरुष से बिना विवाह किये यौन-संबंध संबंध की बात है तो चाहे सनातन काल हो या वैदिक काल, पौराणिक युग हो या द्वापर युग, सभी युगों में महिलाओं द्वारा अपनी पसंद के पुरुष से विवाह पूर्व यौन-संबंध स्थापित करने के ऐतिहासिक प्रमाण मिलते हैं। मेनका, शकुंतला, उर्वशी, चित्रलेखा, चित्रांगदा, कुंती, सुभद्रा, रुक्मणि आदि के विवाह पूर्व अपनी पसंद के पुरुष से संबंध बनाने की बात सामने आती है। “समरथ को नहीं दोष गुसाईं” वाली कहावत के अनुसार जो लोग तन, मन और धन से ऐसा करने में समर्थ हैं, वो आज के युग में भी अवसर, एकांत और अनुरागी पाते ही धर्मग्रन्थ और नैतिकता की परवाह किये बिना विवाह किये आपस में यौन-संबंध कायम कर रहे हैं। समाज इसे अनैतिक या और कुछ भी कहे, परन्तु कानून की दृष्टि में भी ये जुर्म नहीं है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि अगर कोई महिला और पुरुष बिना विवाह के बंधन में बंधे साथ रहते हैं तो यह कोई अपराध नहीं है। अगर कोई दो वयस्क साथ रहना चाहते हैं तो इसमें अपराध कहां हुआ। ये अपराध नहीं हो सकता। भारत में ऐसा कोई क़ानून नहीं है जो शादी से पहले यौन संबंधों की मनाही करता हो।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि समाज जिन गतिविधियों को अनैतिक मानता है वो ज़रूरी नहीं कि अपराध भी हों। सप्रीम कोर्ट ने यह टिपण्णी सन २०१० में दक्षिण भारत की जानी मानी अभिनेत्री ख़ुशबू की अपील पर की थी, जो उन्होने अपने विरुद्ध दायर २२ आपराधिक मामलों को ख़ारिज करने के लिए दायर की थी। ख़ुशबू ने शादी से पहले यौन संबंध रखने और बिना शादी के साथ साथ रहने की वकालत की थी। उन्होंने एक पत्रिका को दिए गए अपने एक साक्षात्कार में कहा था, “मेरी दृष्टि में विवाह पूर्व यौन संबंध बनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसके लिए सारी सावधानियाँ बरतनी चाहिए।” इसी साक्षात्कार में उन्होंने यह भी कहा था, “किसी भी पढ़े लिखे युवक के लिए यह उम्मीद करना ठीक नहीं है कि उसकी पत्नी की कौमार्यता सुरक्षित होगी।” परंपरागत और रुढ़िवादी विचारों वाले कुछ तमिल राष्ट्रवादी राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने उनके इस बयान के विरोध में कई मुक़दमे दायर कर दिए थे। समलैगिकता, विवाहपूर्व यौन सम्बन्ध, विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध और बिना विवाह किये यौन सम्बन्ध बना के साथ रहना, इन सब संबंधों को समाज की स्वीकार्यता और अस्वीकार्यता आदि ऐसे विषय हैं, जिनपर बहस या विवाद का कोई अंत नहीं है। कोई इसे ठीक तो कोई इसे गलत बताएगा। मेरे विचार से अन्तोगत्वा जीवन जीने वाले को ही फैसला लेना है कि वो कैसा जीवन जीना चाहता है। अनब्याही लड़कियां खुद ये फैसला करें कि वो कैसा जीवन जीना चाहती हैं।
यदि वो बिना विवाह किये अपनी पसंद के पुरुष के साथ अपनी मर्जी वाला जीवन बिताकर खुश हैं तो कोई क्या कर लेगा? कानून उन्हें इसकी इजाजत देता है। जहाँ तक विवाहेत्तर यानी विवाह के बाद यौन-सम्बन्ध बनाने की बात है तो यह नैतिकता और धर्मग्रंथों के आदर्शों की दुहाई देने वालों की पोल-पट्टी खोल के रख देता है। एक समाचार के अनुसार एक डेटिंग वेबसाईट पर लाखों भारतीय अपने जीवनसाथी को धोखा देते हुए अपना झूठा और फर्जी परिचय देकर विवाहेत्तर संबंध बनाने की कोशिश में लगे हुए थे। इस कार्य के लिए सोशल मीडिया का आज के समय में हो रहा दुरूपयोग जग जाहिर है। अंत में कुछ चर्चा समलैगिकता की। अप्राकृतिक होने के कारण व्यक्तिगत रूप से मैं इसका विरोधी हूँ। परन्तु जो लोग इसे पसंद करते हैं और समलैंगिक लगाव के आदि हो चुके हैं, उनके प्रति पूरी सहानुभूति है। उनसे बस यही कहूँगा कि इस अप्राकृतिक मार्ग को वो यदि छोड़कर सामान्य और प्राकृतिक जीवन जियें तो उनके लिए ज्यादा अच्छा है। मुझे ऐसा लगता है कि आने वाले समय में समलैगिकता देश की एक बड़ी समस्या जरूर बनेगी, जब लड़का अपनी पसंद के लड़के से शादी कर उसे घर लाएगा और लड़की अपनी मनपसंद लड़की से शादी कर उसे घर लाएगी। आने वाले समय में पति-पत्नी का ये नवीन रूप होगा। वो संतान कैसे पैदा करेंगे, ये तो उन्हें और विज्ञान को सोचना होगा।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
(आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी.पिन- २२११०६)
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (11 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

10 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
August 23, 2015

पिछले दस सालों में सेक्स को लेकर भारत में एक बहुत बड़ी सामाजिक क्रांति हुई है। चूँकि इस विषय पर खुलकर हमारे देश में चर्चा नहीं होती है, इसलिए बात घरों की चहारदीवारी और लोंगो के मन में ही ढकी-छिपी रह जाती है।

sadguruji के द्वारा
August 23, 2015

२०१५ में हुए एक सेक्स सर्वे के अनुसार अब पहली बार सेक्स करने वालों की उम्र करीब १५ से १६ वर्ष है, जबकि कुछ साल पहले के सेक्स सर्वे में पहली बार सेक्स करने वालों की उम्र १८ से २६ वर्ष थी। इस सेक्स सर्वे के अनुसार १०वीं क्लास के हर १० में से तीन छात्र सेक्स कर चुके हैं। सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात ये है कि एबॉर्शन के वर्तमान आंकड़ों पर गौर करें तो २७ से ३० फीसदी एबॉर्शन किशोरी लड़कियों के हो रहे हैं।

sadguruji के द्वारा
August 23, 2015

ये सेक्स सर्वे यह भी बताते हैं कि पूरे देशभर में समलैगिकता को चाहने वालों, विवाहपूर्व यौन सम्बन्ध बनाने वालों, विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध रखने वालों और बिना विवाह के साथ रहने वालों की संख्या दिनोदिन बहुत तेजी से बढ़ रही है। ये सभी मुद्दे और आंकड़े न सिर्फ चौकाने वाले हैं, बल्कि आने वाले समय में गंभीर समस्या भी बनने वाले हैं।

sadguruji के द्वारा
August 23, 2015

महिलाओं की पूर्ण आजादी की पक्षधर आज के समय की बहुत सी युवतियों का विवाह जैसी प्राचीन और परम्परागत प्रथा पर विश्वास कम हो रहा है। इस तरह का विवाह बंधन उन्हें ये पुरुषों की गुलामी समझ में आती है। बहुत से युवतियों की शादी दहेज़ की समस्या के कारण नहीं हो पा रही है और बहुतों की कैरियर बनाने में ही काफी उम्र बीत जा रही है।

sadguruji के द्वारा
August 23, 2015

महिलाओं की पूर्ण आजादी की पक्षधर आज के समय की बहुत सी युवतियों का विवाह जैसी प्राचीन और परम्परागत प्रथा पर विश्वास कम हो रहा है। इस तरह का विवाह बंधन उन्हें ये पुरुषों की गुलामी समझ में आती है। बहुत से युवतियों की शादी दहेज़ की समस्या के कारण नहीं हो पा रही है और बहुतों की कैरियर बनाने में ही काफी उम्र बीत जा रही है। इन्ही सब कारणों से देश की पढ़ीलिखि युवतियों में बिना विवाह किये अपनी पसंद के पुरुष के साथ रहने का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है।

sadguruji के द्वारा
August 23, 2015

यदि प्राचीन समय के अनुसार विचार किया जाये तो यह एक तरह से ‘गांधर्व विवाह’ ही कहलायेगा, जिसमे युवक- युवती स्वेच्छा से प्रणयबंधन में बंध जाते थे। मेरे विचार से कानून को अपनी पसंद के पुरुष के साथ रहने को ‘गांधर्व विवाह’ की मान्यता दे देनी चाहिए, ताकि कोई भी युवती किसी युवक के साथ वर्षों रहने के बाद उसपर बलात्कार या यौन शोषण का झूठा आरोप न लगा सके।

sadguruji के द्वारा
August 23, 2015

‘विवाह से पहले सेक्स करना चाहिए या नहीं?’ आजकल के नाबालिग किशोर हों, बालिग युवा पीढ़ी हो या फिर अकेलेपन का जीवन जीने वाली अनब्याही लडकियां हों, अक्सर इस तरह के सवाल उनके मन में उठते हैं और वो एक दूसरे से पूछते हैं, इस विषय पर आपस में चर्चा भी करते हैं। हालाँकि यह एक बहुत जटिल प्रश्न है और इसका सही उत्तर ढूंढ पाना मुश्किल है, क्योंकि संस्कार और आचार-विचार के इस प्रश्न के उत्तर भी भिन्न भिन्न प्राप्त होंगे।

sadguruji के द्वारा
August 23, 2015

समलैगिकता, विवाहपूर्व यौन सम्बन्ध, विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध और बिना विवाह किये यौन सम्बन्ध बना के साथ रहना, इन सब संबंधों को समाज की स्वीकार्यता और अस्वीकार्यता आदि ऐसे विषय हैं, जिनपर बहस या विवाद का कोई अंत नहीं है। कोई इसे ठीक तो कोई इसे गलत बताएगा। मेरे विचार से अन्तोगत्वा जीवन जीने वाले को ही फैसला लेना है कि वो कैसा जीवन जीना चाहता है। अनब्याही लड़कियां खुद ये फैसला करें कि वो कैसा जीवन जीना चाहती हैं।

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 27, 2015

सदगुरू जी, ज्वलंत समस्या पर अच्छा लेख है । यह भी सही है कि इस बयार को अब रोक पाना संभव नही है । समय के साथ साथ सेक्स मामलों मे खुलापन कुछ ज्यादा होगा । बस इतना ही कहा जा सकता है कि सेक्स के संबध मे नैतिक-अनैतिक एक व्यक्तिगत मामला ही रह जायेगा । जैसा जिसकी सोच होगी वह करेगा । खुले सेक्स के पक्षधर भी होंगे और विरोधी भी ।

sadguruji के द्वारा
August 27, 2015

आदरणीय एल.एस. बिष्ट् जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपकी बात से सहमत हूँ कि खुलेपन की बयार को अब रोक पाना मुश्किल है ! बढ़ती हुई भौतिकता और जीवन का भरपूर मजा लेने की सोच ने हमारे युवाओं को प्राचीन संस्कारों से भटका दिया है ! भगवान का भय और धर्मग्रंथों का अंकुश भी अब अधिकतर युवा वर्ग के दिलों से ख़त्म गया है ! भविष्य में शारीरिक संबंधों में खुलेपन के साथ ही गुप्त रोगों के बढ़ने की भी संभावना है ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिए सादर आभार !


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran