सद्गुरुजी

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खूनी और मस्से वाली वादी बवासीर (पाइल्स)- समस्या-निदान

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खूनी और मस्से वाली वादी बवासीर (पाइल्स)- समस्या- निदान

मेरा मुझमे कुछ नहीं,
जो कुछ है सो तेरा।
तेरा तुझको सौंपते,
क्या लागे है मेरा।।

साधू-संतों और सद्गुरुओं से प्राप्त ज्ञान उन्ही की सेवा में समर्पित है। दुखी मानवता की सेवा ही उनकी सच्ची सेवा है और उनके अमृत वचनों व् लोकहितकारी अनुभवों का प्रचार-प्रसार ही उनके प्रति ह्रदय से अभिव्यक्त भावपूर्ण श्रद्धांजली है। सन १९९५ की बात है, उस समय सर्दी का मौसम था। आश्रम में आये कुछ साधुओं के साथ बैठकर चाय पीने के साथ साथ आध्यात्मिक चर्चा भी चल रही थी। आश्रम के कुछ शिष्य भी भगवद चर्चा का आनंद उठा रहे थे।

कुछ कार्य से कमरे के बाहर आया तो मेरी निगाह बेंच पर बैठी आश्रम में अक्सर आने वाली एक युवती पर पड़ी, जो मुझसे मिलने की प्रतीक्षा कर रही थी। चेहरे से बहुत उदास और दुखी लग रही थी। मैंने हालचाल पूछा तो रोने लगी। कई बार रोने का कारण पूछने पर बहुत संकोच और शर्म के साथ मुझे बताई कि उसे खूनी बवासीर है और तीन दिन से रक्तस्राव हो रहा है।

मैंने उससे पूछा, ‘डॉक्टर को दिखाई की नही। कुछ दवा ली।’
उसने कहा, ‘होम्योपैथी और अंग्रेजी दोनों दवा ली हूँ, पर कोई फायदा नहीं।’

हमलोग बातचीत कर ही रहे थे कि एक साधू कमरे से बाहर निकले और हमारे करीब आ बोले, ‘बेटी घबरा मत। इस रोग की एक रामबाण दवा है। दवा यहांपर मौजूद भी है। तू जा एक पाँव दही ले के आ।’
युवती दही लेने जाने लगी तो मैंने उसे रोका, क्योंकि थोड़ा दूर जाना था। एक शिष्य को दही लाने के लिए भेज दिया। मुझे यह जानने की उत्सुकता थी कि आश्रम में खूनी बवासीर की रामबाण अौषधि है कहाँ?

दवा बताने वाले साधू उस बोरे की तरफ बढे, जिसमे आम की लकड़ी हवन के लिए रखी हुई थी। लकड़ी के ऊपर पानी वाले नारियल का खेझुरा यानि जटा रख हुआ था। अक्सर ही यज्ञ होते रहने के कारण नारियल की काफी जटा इकट्ठी हो गई थी, जो हवनकुंड में आम की लकड़ी को सुलगाने के काम आती थी। वो साधु कुछ सुखी जटा ले उसे उसे अच्छी तरह से जलाये, फिर उसे ठंडाकर खूब बारीक पिसे। एक मिटटी के पुरवा में एक पाँव दही आ गई। साधू महोदय एक चम्मच जटा की राख दही में अच्छी तरह से मिलाये और युवती को उसे खाने को कहे।

युवती ने उस दही को खा लिया। एक कागज में दो चम्मच जटा की राख बाँध साधू महाशय युवती को थमाते हुए बोले, ‘बेटी, इस दवा को आज रात तक इसी तरह से दही में मिलाकर दो बार और खा लेना। दवा बस आज ही तीन बार लेना, फिर मत लेना।’ दवा लेकर युवती चली गई और हमारी अधूरी आध्यात्मिक चर्चा फिर शुरु हो गई। अगले दिन वो युवती आश्रम में आई तो बेहद खुश थी। दवा काम कर गई थी।

बहुत से लोंगो को ये दवा मैंने बताई और उन्हें लाभ भी की। कुछ लोग जो बवासीर की बहुत गंभीर अवस्था में थे, उन्हें कम लाभ हुआ। मैंने उन्हें बिना देरी किये डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी। इस आयुर्वेदिक दवा के बारे में बाद में और भी बहुत से लोंगो के मुंह से सुना। कुछ लोगों ने बताया कि एक गिलास (गिलास शीशे का हो तो ज्यादा बेहतर होगा) छाछ में एक चम्मच नारियल की जली हुई जटा की खूब बारीक पिसी राख मिला सुबह खाली पेट लेने से नई या पुरानी खूनी बवासीर में बहुत जल्दी फायदा मिलता है।

दवा जल्दी और ज्यादा असर करे, इसके लिए ये जरुरी है कि दवा लेने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक कुछ नहीं खाया पीया जाये। बाकी समय आप खाए पियें, परन्तु ध्यान रखें कि ज्यादा घी तेल वाली तली भुनी हुई चीजें, बेसन, मैदा और बैंगन की सब्जी व उड़द की दाल आदि न खाएं। बवासीर में सूरन की सब्जी चोकर वाले आंटे की रोटी के साथ खाएं, बहुत लाभ मिलेगा। बवासीर का मूल कारण कब्ज है।

भारत जैसे देश में, जहाँपर सार्वजनिक जगहों पर या बहुत से गाँवों में अभी भी शौचालय की सुबिधा का अभाव है, वहांपर लोंगो खासकर महिलाओं द्वारा मलत्याग की इच्छा को मज़बूरी में दबाने के कारण भी बवासीर रोग हो जाता है। ये छूत का रोग भी है। ऐसे रोगियों के मल पर मलत्याग और उनके मूत्र पर मूत्रत्याग नहीं करना चाहिए। परिवार में किसी को बवासीर है और यदि शौचालय की अच्छी तरह से साफ़ सफाई नहीं रखी जाएगी तो परिवार के दूसरे लोंगो को भी ये रोग हो सकता है।

जिन्हे कब्ज रहती है, पेट साफ़ नहीं होता है, उन्हें मैथीदाना १०० ग्राम, अजवाइन ५० ग्राम और काली जीरी २५ ग्राम लेकर खूब बारीक चूर्ण बना उन्हें मिलाकर शीशी में रख लेना चाहिए और रात को सोते समय आधा चम्मच यानि तीन ग्राम चूर्ण गर्म पानी के साथ लेना चाहिए।
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अपने साधना काल के दौरान बारह वर्षों तक बहुत देर तक एक ही आसन में बैठने और खाने-पीने की अनियमित दिनचर्या के कारण सन २००३ में मुझे खुजली और मस्से वाले बवासीर हो गई थी। आश्रम में आने वाले कई डॉकटरों से सलाह लिया, अंग्रेजी और होम्योपैथी की बहुत सी दवाएं खाईं, पर कोई फायदा नहीं हुआ। अंत में मैंने अपने एक पूज्य गुरुदेव से इस बात की चर्चा की, उन्होंने रोज सुबह खाली पेट एलोविरा का जूस निकालकर पीने और उसका गुदा मस्से पर लगाने की सलाह दी। तीन-चार महीने के बाद मुझे उस खुजली और मस्से वाली बवासीर से छुटकारा मिल गया।

एक सज्जन फिशर यानि गुदामुख की त्वचा के फटने व घाव होने से पीड़ित थे। शौचालय में जाते तो दर्द के मारे बच्चों की तरह से जोर जोर से रोने लगते थे। मैंने उन्हें एलोविरा जूस पीने और एलोविरा जेल लगाने की सलाह दी। अब वो ठीक हैं और मुलाक़ात होने पर धन्यवाद देते नहीं थकते हैं। एलोविरा का आप गुदा निकाल लें या फिर बाबा रामदेव वाली दूकान से बिना केमिकल वाली शुद्ध एलोविरा जेल लें लें। मस्से पर एलोविरा जेल लगाने से पहले अपने नाख़ून जरूर काट लेना चाहिए।
रोग यदि न ठीक हो तो किसी अच्छे डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

आज भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की बहुत बड़ी आबादी बवासीर रोग से ग्रस्त है। लोगों को इस रोग से छुटकारा दिलाने के लिए एक सरकारी मुहीम चलनी चाहिए। सरकारी मुहीम तो जब चलेगी, तब चलेगी। फिलहाल आइये हम लोग ही मिल के बवासीर रोग भगाने की एक मुहीम चलायें। आप सभी कृपालु पाठकों की अनमोल प्रतिक्रिया और इस रोग को दूर भगाने वाले उपयोगी अनुभवों का स्वागत है।

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(आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- २२११०६)
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34 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।। —ऋग्वेद “सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।” “सभी सुखी हों, सभी निर्मल मानसवाले हों, सभी सबका मंगल देखें और दूसरों के दुःख में सहभागी हों, दुःख हर्ता हों।” “सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥ “May all be happy. May all remain free from disabilities. May all see auspicious things. May none suffer sorrows.” —ऋग्वेद (Rigved)

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

खुजली और मस्से वाली बादी बवासीर के रोग मे मेरे निजी अनुभव के अनुसार एलोवीरा का जूस पीने और एलोवीरा जेल लगाने से बेहतर कोई उपाय नही है ! मस्से पर एलोवीरा जेल लगाने से पहले नाखून यदि बढें हैं तो काट लीजिये नही गुदा के भीतर खरोच आ सकती है ! यदि मस्से गुदा के भीतर भी हैं तो जेल वहा भी लगना चाहिये ! जेल हमेशा पाखाना होने के बाद लगाना चाहिये ! खुजली ज्यादा हो तो सुबह-शाम दोनो समय जेल लगाएँ ! जेल लगाने के बाद हाथ को डिटॉल साबुन से दो तीन बार जरूर धो लें ! इस प्रयोग को आजमाने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से इस बारे मे आप सलाह भी ले लें तो बेहतर होगा !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

आयुर्वैदिक चिकित्सकों के अनुसार दो कागज़ी नींबू के रस को एक सौ ग्राम गर्म पानी में मिलाकर अनिमा लेने के साधन के द्वारा गुदा में लेकर गुदा का भीतर की और दस-पन्द्रह बार संकोचन करना चाहिए ! थोड़ी देर में ही शौच लगेगी और पेट साफ़ हो जाएगा ! यह प्रयोग चार पांच दिन में केवल एक बार ही करें ! तीन चार बार के प्रयोग से ही बवासीर रोग में लाभ मिल जाता है ! इस प्रयोग को करने से पहले किसी चिकित्सक की सलाह जरूर ले लें ! वाट, कफ ओर पित्‍त की असमानता के अनुसार हर मनुष्य के शरीर की प्रकृति भिन्न होती है !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

आयुर्वेद में बवासीर के मस्से हटाने के लिए एक सरल प्रयोग इस प्रकार से है ! करीब दो लीटर छाछ यानी मट्ठा लेकर उसमे ५० ग्राम पिसा हुआ जीरा और थोडा नमक मिलाकर रख लें ! जब भी प्यास लगे या खाना खाएं, तब पानी की जगह पर यही छाछ पियें ! चार दिन तक यह प्रयोग करें, मस्से ठीक हो जायेंगे ! किसी अच्छे वैद्य से आप इस प्रयोग के बारे में सलाह ले सकते हैं !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

यदि शौच कड़ी या अनियमित रूप से हो रही है तो इसबगोल की भूसी का प्रयोग करने से लाभ मिलता है ! छोटी हरड या बाल हरड का रोज सेवन करना चाहिए और बवासीर की सूजन या मस्सों पर पर अरंडी का तेल लगाना चाहिए ! नीम का तेल मस्सों पर लगाने और हल्के गर्म पानी में चार पांच बून्द मिलाकर रोज़ पीने से लाभ होता है !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

बवासीर रोग से बचने के लिए मलत्याग करते समय ज़ोर नहीं लगाना चाहिए, कब्ज़ तथा डायरिया बचना चाहिए ! हमें रेशेदार भोजन करना चाहिए तथा पर्याप्त मात्रा में पानी व् जूस आदि लेना चाहिए ! कम से कम आधा घंटा रोज व्यायाम कीजिये या पैदल चाहिए ! शौच में अधिक देर में मत बैठिये और यदि आपका वजन ज्यादा है तो उसे कम कीजिये ! ज्यादा भारी चीजों को अकेले ही उठाने से बचना चाहिए !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

बवासीर के रोगी को उपवास करना चाहिए और यदि उपवास ना कर सके तो फल या फलों का रास ले सकते हाँ ! बवासीर के रोग में आसन, प्राणायाम, कपाल भाँती आदि करने से बहुत लाभ मिलता है ! ये सब करके इस भयंकर रोग से छुटकारा पाया जा सकता है !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

बवासीर के रोगी को सबसे पहले बवासीर रोग के मुख्य कारण कब्ज को दूर करना चाहिए ! इसके लिए लोग ठण्डा कटि स्नान और एनिमा लेते हैं ! पेट पर ठण्डी मिट्टी की पट्टी भी रखते हैं ! यदि सूजन ज्यादा हो तो त्रिफला चूर्ण का सेवन कर सकते हैं और गुदा पर ठण्डी मिट्टी की पट्टी रख सकते हैं ! सूजन दूर होने पर ही एनिमा ले सकते है !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

बवासीर को शल्यक्रिया द्वारा निकालने की प्रक्रिया बहुत गंभीर मामलों और अंतिम विकल्प के रूप में में ही की जाती है ! इस प्रक्रिया में शल्यक्रिया के बाद काफी दर्द होता है और आम तौर पर इसमें सुधार होने में दो से चार सप्ताह लगते हैं ! शल्यक्रिया के बाद भी असंयमित आहार-विहार से पुनः बवासीर होने की संभावना रहती है, परन्तु यह रबर बैंड बंधन वाले इलाज से अधिक लाभकारी है !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

बवासीर के उपचार की एक अन्य विधि स्कलेरोथेरेपी में, अर्श में फीनॉल जैसे एक स्कलेरोसिंग एजेंट का इंजेक्शन लगाया जाता है ! इससे शिराओं की दीवार गिर जाती हैं और बवासीर सूख जाता है ! उपचार के चार वर्षों के बाद इसकी सफलता की दर लगभग ७०% है, जो कि रबर बैंड बंधन से बेहतर है !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

बवासीर के उपचार की बहुत सारी दहन विधियां भी हैं, लेकिन उनको तभी उपयोग किया जाता है जब अन्य विधियां विफल हो जाती हैं ! इस प्रक्रिया को विद्युत दहन, अवरक्त विकिरण, लेज़र शल्यक्रिया या क्रायोसर्जरी का उपयोग करके सम्पन्न किया जाता है ! अवरक्त विकिरण दहन का विकल्प प्रारम्भिक चरण के रोगियों के लिए रोग किया जा सकता है ! गंभीर रोगियों में यह ज्यादा सफल नहीं है, उनमें रोग के पुनः होने की संभावना बहुत अधिक होती है !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

बवासीर के उपचार हेतु रबर बैंड बंधन उनको अनुशंसित किया जाता है जिनको यह रोग प्रारम्भिक या मध्य अवस्था में होता है ! यह एक प्रक्रिया है जिसमें इलास्टिक बैंडों को भीतरी अर्श में, इसको जानेवाले रक्त प्रवाह को रोकने के लिए, दांतेदार पंक्ति के १ सेमी, लगाया जाता है ! पांच-सात दिनों के भीतर, सूख चुका बवासीर गिर जाता है ! यदि बैंड को दांतेदार पंक्ति के बहुत पास लगा दिया जाता है तो इसके तत्काल बाद गंभीर दर्द पैदा हो सकता है ! इससे ठीक होने की दर लगभग ८७% तक होती है तथा जटिलता की दर 3% तक होती है !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

गुदा तथा इसके आसपास के क्षेत्र को देख कर वाह्य या भ्रंश बवासीर का पता लगाया जा सकता है ! गुदा परीक्षण करके गुदीय ट्यूमर, पॉलिप, बढ़े हुए प्रोस्टेट या फोड़े की पहचान की जाती है ! दर्द के कारण, यह परीक्षण शांतिकर औषधि के बिना संभव नहीं है, इसलिए इस प्रकार की ओषधि मरीजों को दी जाती है ! अधिकांशतः रोगियों को आंतरिक बवासीर में दर्द नहीं होता है ! आंतरिक बवासीर की देख कर पुष्टि करने के लिए एनोस्कोपी की जरूरत पड़ती है जो कि एक खोखली ट्यूब वाली युक्ति होती है जिसके एक सिरे पर प्रकाश का स्रोत लगा होता है !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

बवासीर के दो प्रकार होते हैं: वाह्य तथा आंतरिक ! बढ़े हुए अर्श स्नायुजाल के कारण आंतरिक और घटे हुए अर्श स्नायुजाल के कारण बाहरी ! कुछ लोगों में एक साथ दोनो के लक्षण होते हैं ! यदि दर्द उपस्थित हो तो यह स्थिति एक गुदा फिशर या वाह्य बवासीर की हो सकती है न कि आंतरिक बवासीर की !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

बवासीर रोग के उतपन्न होने के बहुत से कारण हैं, जैसे- अनियमित मल त्याग की आदतें, कब्ज़ या डायरिया, व्यायाम की कमी, अधिक तेल घी का सेवन और कम-रेशे वाले आहार लेना, अंतर-उदरीय दाब या मांस में वृद्धि, लंबे समय तक तनाव, जलोदर, गर्भावस्था, आनुवांशिकी, अर्श शिराओं के भीतर वॉल्व की अनुपस्थिति, बढ़ती उम्र, मोटापा, देर तक बैठना, पुरानी खांसी और छूत के रूप में प्राप्त होना आदि शामिल हैं ! यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है, परन्तु ४५ से ६५ वर्ष की उम्र में ज्यादा होता है ! 7yp8

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

चिकित्सकों के अनुसार बवासीर दो प्रकार की होती है – खूनी बवासीर और बादी वाली बवासीर। खूनी बवासीर में मस्से खूनी सुर्ख होते है और उनसे खून गिरता है जबकि बादी वाली बवासीर में मस्से काले रंग के होते है और मस्सों में खाज पीडा और सूजन होती है। अतिसार, संग्रहणी और बवासीर यह एक दूसरे को पैदा करने वाले होते है।

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

कब्ज भी बवासीर को जन्म देती है, कब्ज की वजह से मल सूखा और कठोर हो जाता है जिसकी वजह से उसका निकास आसानी से नहीं हो पाता मलत्याग के वक्त रोगी को काफी वक्त तक पखाने में उकडू बैठे रहना पड़ता है, जिससे रक्त वाहनियों पर जोर पड़ता है और वह फूलकर लटक जाती हैं बवासीर गुदा के कैंसर की वजह से या मूत्र मार्ग में रूकावट की वजह से या गर्भावस्था में भी हो सकता है !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

कुछ व्यक्तियों में यह रोग पीढ़ी दर पीढ़ी पाया जाता है ! अतः अनुवांशिकता इस रोग का एक कारण हो सकता है ! जिन व्यक्तियों को अपने रोजगार की वजह से घंटों खड़े रहना पड़ता हो, जैसे बस कंडक्टर, ट्रॉफिक पुलिस, पोस्टमैन या जिन्हें भारी वजन उठाने पड़ते हों,- जैसे कुली, मजदूर, भारोत्तलक वगैरह, उनमें इस बीमारी से पीड़ित होने की संभावना अधिक होती है !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

बवासीर बहुत पुराना होने पर भगन्दर हो जाता है, जिसे अंग़जी में फिस्टुला कहते हें ! फिस्टुला कई प्रकार का होता है ! भगन्दर में पखाने के रास्ते के बगल से एक छेद हो जाता है जो पखाने की नली में चला जाता है और फोड़े की शक्ल में फटता, बहता और सूखता रहता है ! कुछ दिन बाद इसी रास्ते से पखाना भी आने लगता है ! भगन्दर की आखिरी स्टेज होने पर यह केंसर का रूप ले लेता है, जिसको रिक्टम केंसर कहते हें ! रिक्टम केंसर जानलेवा साबित होता है।

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

बादी बवासीर :- बादी बवासीर रहने पर पेट खराब रहता है ! कब्ज बना रहता है ! गैस बनती है ! इस तरह के रोग में बवासीर की वजह से पेट बराबर खराब रहता है, न कि पेट गड़बड़ की वजह से बवासीर होती है ! इसमें जलन, दर्द, खुजली, शरीर मै बेचैनी, काम में मन न लगना इत्यादि लक्षण होते हैं ! टट्टी कड़ी होने पर इसमें खून भी आ सकता है ! इसमें मस्सा अन्दर होता है ! मस्सा अन्दर होने की वजह से पखाने का रास्ता छोटा पड़ता है और चुनन फट जाती है और वहाँ घाव हो जाता है उसे डाक्टर अपनी जवान में फिशर भी कहते हें, जिससे असहाय जलन और पीडा होती है !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

खूनी बवासीर :- खूनी बवासीर में किसी प्रकार की तकलीफ नही होती है केवल खून आता है ! पहले पखाने में लगके, फिर टपक के, फिर पिचकारी की तरह से सिफॅ खून आने लगता है ! इसके अन्दर मस्सा होता है, जो कि अन्दर की तरफ होता है फिर बाद में बाहर आने लगता है ! टट्टी के बाद अपने से अन्दर चला जाता है ! पुराना होने पर बाहर आने पर हाथ से दबाने पर ही अन्दर जाता है ! आखिरी स्टेज में हाथ से दबाने पर भी अन्दर नही जाता है !

sadguruji के द्वारा
October 2, 2015

बवासीर या पाइल्स जल्दी पीछा नही छोड़ने वाली ओर एक ख़तरनाक बीमारी है ! बवासीर दो प्रकार की होती है। एक को ख़ूँनी और दूसरी को बादी बवासीर के नाम से जाना जाता है !

Shobha के द्वारा
October 3, 2015

श्री आदरणीय सद्गुरु जी आज के नवयुवकों और युवतियां कैरियर की दौड़ में इतनी पागल हैं उनके पास अपने लिए समय ही नहीं है फास्ट फ़ूड को किसी पेय पदार्थ के साथ निगल जाना सब्जी कम खाना आदि ने उनको बवासीर का रोगी बना दिया है आपका लेख कारण और निदान दोनों पर प्रकाश डालता हैं बहुत उपयोगी लेख पठनीय लेख

sadguruji के द्वारा
October 3, 2015

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने सही कहा है कि कैरियर बनाने की दौड़, फास्ट फ़ूड और शीतल पेय युवाओं को बवासीर का रोगी बना रहा है ! बहुत से युवक जो इस रोग के रोगी हैं, वो मुझसे उपाय पूछते हैं ! मुझे जो जानकारी और अपना व्यक्तिगत अनुभव था, वो इस पोस्ट में साहित्य कर दिया है ! किसी अच्छे वैद्य या डॉक्टर से सलाह लेने का सुझाव भी दिया है ! आपके सहयोग और समर्थन के लिए आभारी हूँ !

sadguruji के द्वारा
October 6, 2015

आदरणीया कविता जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! यह जानकार ख़ुशी हुई कि आप होम्योपैथिक दवा का सुझाव फेसबुक के माध्यम से देती हैं ! इस जनसेवा के लिए सादर आभार !

Santlal Karun के द्वारा
October 12, 2015

आदरणीय सद्गुरु जी, आप का उपयोगी लेख मैंने कई लोगों को मेल से भेज दिया है | इस अनुभव सिद्ध लेख के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

sadguruji के द्वारा
October 12, 2015

मेरे कुछ शिष्यों के अनुभवों के अनुसार बवासीर रोग के मस्से और घाव पर “हमदर्द” कम्पनी का मरहम “हमदोराइड” भी बहुत अच्छा काम करता है, इसे सुबह-शाम पाखाना होने के बाद मस्से वाली जगह की सफाई कर लगाना चाहिए ! मेरे अपने अनुभव से बवासीर रोग में मस्से और घाव पर लगाने के लिए सबसे बेहतर एलोविरा जेल है, इसका असर तुरंत होता है और ये रोग को स्थायी रूप से ख़त्म करेगा !

sadguruji के द्वारा
October 12, 2015

आदरणीय संतलाल करुण जी ! सादर अभिनन्दन ! लेख को पसंद करने और उसे मानवता की सेवा में उपयोगी समझने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! आपने बहुत से लोंगो को इस लेख के बारे में बताया, ये आपका परोपकारी और करुणामय संत स्वभाव है ! मेरे अपना निजी अनुभव है कि जिस व्यक्ति में करुणा और आनंद है, उसका जीवन जीवन दिव्य, सफल और धन्य है ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
October 12, 2015

आदरणीय संतलाल करुण जी ! सादर अभिनन्दन ! इस तरह के विषय पर कम चर्चा होती है ! इस रोग पीड़ित लोग भी किसी को बताने में बहुत झिझकते हैं ! इसलिए इसकी चर्चा करना आवश्यक समझा ! इस विषय पर सहयोग एवं समर्थन देने के लिए हार्दिक आभार !

Dr. Vikas Shinde के द्वारा
November 24, 2015
Dr. Vikas Shinde के द्वारा
November 24, 2015

डॉ. विकास शिंदे यानी विविध दुर्मिळ वनस्पती पासून हॅंडमेड टॅबलेट आणि मलम तयार केला असून सात दिवस वापरल्याने चमत्कारिक रित्या मुळव्याध (Piles / Mulvyadh / Bavasir) बरा होतो. मूळव्याध रामबाण औषध झाडपाला आयुर्वेदिक औषधापासून तयार केले जाते. मूळव्याधाचे प्रकार – गाठ असणे कोंब असणे चिरा पडणे अंग बाहेर येणे आग होणे रक्त पडणे. इत्यादी अशा सर्व प्रकारच्‍या मुळव्‍याध आजारांवर अथक परिश्रम करून. डॉ. विकास शिंदे यानी विविध दुर्मिळ वनस्पती पासून हॅंडमेड टॅबलेट आणि मलम तयार केला असून सात दिवस वापरल्याने आश्‍चर्यकारक रित्या मुलव्याध बरा होतो. हे औषध निसर्ग निर्मित असल्याने कुठलाही साइड इफेक्ट नाही. त्याची किमत देखील त्यांनी अत्यल्प ठेवली आहे. सात दिवसांचा कोर्स फक्त रुपये 700 /- मात्र. बाहेरगावीच्या पेशन्टसाठी औषध कुरियर ने पाठवले जाते. या अनमोल औषधसाठी डॉक्टर मंडळीनी देखील संपर्क करावा असे आवाहन करण्यात येत आहे. डॉ. विकास शिंदे (एन. डी.) Ahmednagar, Mob- 07385575363 / 9890989157 भारतभरातुन फोन येणार्‍या पेशंटची संख्या जास्त असल्याने फोन करणार्‍यानी आपले प्रश्न थोडक्यात विचारावेत व सहकार्य करावे. ही विनंती.- www.mulvyadh.in

sadguruji के द्वारा
November 27, 2015

आदरणीय डॉ. विकास शिंदे ! ब्लॉग पर स्वागत है ! ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
November 27, 2015

आदरणीय डॉ. विकास शिंदे ! सादर अभिनन्दन ! ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद !


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