सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

529 Posts

5725 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15204 postid : 1106873

बिहार के चुनाव में पर हावी है बदजुबानी और साम्प्रदायिकता

  • SocialTwist Tell-a-Friend

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

lalu_nitish_modi1

बिहार के चुनाव में पर हावी है जाति, बदजुबानी और साम्प्रदायिकता

प्राचीन काल में सत्ता प्राप्ति के कौरवों और पांडवों के बीच कुरुक्षेत्र के मैदान में महाभारत का भीषण युद्ध हुआ था, जिसमे सैनिकों और महरथयों के बीच एक से बढ़कर एक दिव्य अस्त्रों और शस्त्रों का प्रयोग हुआ था। अस्त्र वो हथियार होते थे, जिन्हे फेंककर लड़ा जाता था, जैसे-बाण और त्रिशूल। शस्त्र वो हथियार होते थे, जिन्हे हाथ में लेकर युद्ध लड़ा जाता था, जैसे तलवार और गदा। उस समय तो युद्ध प्रारम्भ होते ही जनता डर के मारे थर-थर कांपने लगी थी।

आम जनता को ये भय था कि दिव्य व् भयानक अस्त्रों और शस्त्रों के द्वारा लड़े जाने वाले इस युद्ध में वो मारे न जाएँ। उनका भय सही साबित हुआ। बड़े बड़े महारथियों के साथ साथ न जाने कितने सैनिक और निर्दोष लोग महाभारत के युद्ध में मारे गए थे। एक बहुत बड़े खूनी महायुद्ध के बाद अन्तोगत्वा पांडवों को विजय मिली और वो कौरवों से सत्ता छीनने में कामयाब हुए।

ये तो हुई प्राचीन समय की बात। आज के आधुनिक युग में भी सत्ता पाने के लिए महाभारत का महायुद्ध तो होता है, परन्तु कुछ भिन्न तरह से। आज के समय में सत्ता पाने के संघर्ष को महाभारत का युद्ध नहीं बल्कि चुनाव जैसा आधुनिक और बेहद सभ्य नाम प्रदान किया गया है। चुनावी महाभारत की घोषणा होने पर अब जनता भयभीत नहीं होती है, बल्कि खुश होती है, क्योंकि चुनाव के समय उसे बड़े बड़े महारथियों यानि नेताओं के बड़ी सहजता और सुगमता से दर्शन प्राप्त होते हैं, उनके मुख से निकलने वाले एक से बढ़कर एक दिव्य अस्त्रों को सुनकर उनका बहुत अच्छा मनोरंजन हो जाता है।

यही वजह है कि जनता बड़ी बड़ी रैलियों में जाने और नेताओं के दिव्य अस्त्रों यानी व्यंग्य बाणों को सुनकर आनंदित होने और पूरे जोर-शोर से ताली बजाने के लिए लालायित रहती है। सब देख सुनकर अंत में मतदान के जरिये जनता को ही ये फैसला भी करना है कि सत्ता किसे देनी है।

बिहार में इन दिनों चुनावी महाभारत जारी है। इस महाभारत में सभी दल अपने को पांडव और दूसरों को कौरव बताते हैं। पांडवों और कौरवों के कुछ नए नाम भी धरे गए हैं, जैसे- देवसेना और राक्षसी सेना। वैसे ये नाम भी बेमानी है, क्योंकि जो दल चुनाव जीतकर सत्ता प्राप्त कर लेगा, वही अपने को पांडव और देवसेना बताएगा। पुराने समय से ही लोग एक शास्त्रोक्त कहावत कहते चले आ रहे हैं कि ‘सत्यमेव जयते’ अर्थात सत्य कि हमेशा विजय होती है।

मेरी समझ से इसका अर्थ है- ‘जो जीत जाता है, उसे ही सत्य मान लिया जाता है।’ वो सच्चा था या नहीं, फिर ये सवाल ही खत्म कर दिया जाता है। आइये अब इस गंभीर और गूढ़ विचार को छोड़कर बिहार के चुनावी महाभारत में बड़े बड़े महारथियों द्वारा चुनाव आयोग की चेतावनी और राष्ट्रपति महोदय की अपील के वावजूद मुख रूपी धनुष से छोड़े गए व्यंग्य बाण रूपी प्राचीन नाम वाले आधुनिक अस्त्रों पर विचार करें।

प्राचीन काल में अस्त्र उसे कहते थे, जो मंत्रों के द्वारा बहुत दूर से फेंके जाते थे। वो अग्नि, गैस और विद्युत तथा यान्त्रिक उपायों से चलते थे और देवताओं द्वारा प्राप्त होते थे, इसलिए वो दैवी अस्त्र मन्त्रों के द्वारा चलाये जाते थे। यही वजह थी कि उन्हें मान्त्रिक-अस्त्र भी कहा जाता था।

आज के युग में मान्त्रिक-अस्त्र का अर्थ बदल गया है। अब ये देवी-देवताओं की जगह अपने और अपने सहयोगियों के मन से प्राप्त होते हैं।

आज के युग में किसके पास इतनी ऊँची चारित्रिक सामर्थ्य और तप करने की फुर्सत नहीं है कि देवी-देवताओं की तपस्या करके उनसे दिव्य अस्त्र प्राप्त कर सके। अब तो अस्त्र प्राप्ति का सरल उपाय ये है कि दूसरे नेताओं की कमियां ढूंढिए या फिर उनके बयान पढ़िए और फिर अपना बयान दीजिये। आधुनिक महारथियों यानि नेताओं के अपने स्वयं के मनन और अपने सहयोगियों के दिव्य चिंतन से प्राप्त आधुनिक मान्त्रिक-अस्त्रों के प्रयोग की कुछ बानगी देखिये-

आग्नेय: यह अग्नि बरसाने वाला विस्फोटक बाण है।
पीएम मोदी गुरुवार को बिहार की रैली में कहा, ‘मुझे हैरानी है कि शैतान को प्रवेश करने के लिए उनका (लालू) ही शरीर मिला। मैं जानना चाहता हूं कि शैतान को उनका (लालू का) पता कैसे मिला? शैतान को पूरे बिहार, भारत और पूरी दुनिया में उन्हें छोड़कर किसी और का शरीर नहीं मिला। और उन्होंने भी शैतान का ऐसे स्वागत किया जैसे कोई अपने रिश्तेदारों का करता है।’

पर्जन्य: यह जल बरसाने वाला आग्नेय का प्रतिकार बाण है।
लालू ने ट्वीट किया, मोदी को चैलेंज करता हूं कि वह मेरा शैतान वाला बयान दिखाएं वरना सार्वजनिक रूप पर सारे बिहारियों को शैतान कहने के तुरंत लिए माफी मांगे। लालू ने आगे कहा, मोदी ने मेरे बहाने तमाम दलित और पिछडों को शैतान कहा है।

वायव्य: इस बाण से भयंकर तूफान आता है।
जन अधिकार पार्टी के प्रमुख पप्पू यादव ने लालू के गोमांस पर दिए बयान के बाद छिड़े वाक्युद्ध पर सोमवार को सार्वजनिक रूप से कहा, “बिहार में जितने भी नेता लोग हैं, आदमी का खून पी-पीकर मोटा गए हैं। अब इन लोगों को जानवरों की चिंता होने लगी है। कोई विकास की बात नहीं कर रहा है।”

पन्नग: इससे शत्रुता रूपी सर्प पैदा होते हैं।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी बयानों की मर्यादा तोड़ते हुए राजद अध्यक्ष को एक जनसभा में ‘चाराचोर’ तक कह डाला। इसके जबाब में लालू ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को ‘नरभक्षी’ तक कह डाला।

गरुड़: इस बाण के चलते ही शत्रुता रूपी सर्प को खाने वाले गरुड़ उत्पन्न होते है।
लालू कह रहे हैं- ‘राजपूत भाइयों, भाजपा आप लोगों की दुश्मन है। इसके लिए गवाही की जरूरत नहीं है। उसने जसवंत सिंह के साथ जो किया सबके सामने है।’ इसके जबाब में अखिल भारतीय क्षत्रिय समाज महासभा ने भाजपा को वोट देने की अपील की है।

महाअस्त्र: इनमे तीन दिव्यास्त्र आते है-
१-ब्रह्मास्त्र:
प्राचीन काल के अस्त्रों में ये ब्रम्हा का अस्त्र सर्वाधिक प्रसिद्द अस्त्र है।
मुजफ्फरपुर की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालू प्रसाद यादव पर जमकर हमला बोला। मोदी ने कहा कि आरजेडी का मतलतब है- रोजाना जंगलराज का डर।

२-पाशुपत: शत्रुनाशक यह शिव अस्त्र पलटकर बाण चलाने वाले को भी समाप्त कर सकता है।
आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने दावा किया कि पहले तो ऋषि-मुनि भी बीफ खाते थे, फिर इस पर इतना हंगामा क्यों? उन्होंने कहा कि कहा कि वैदिक काल में भी लोग बीफ खाते थे और शास्त्रों में इसका प्रमाण भी है। बीफ खाना तब कम किया गया जब बौद्ध धर्म लोकप्रिय हुआ और इसके बाद ही गोहत्या पर लगाम लगी। इसके जबाब में वैष्णव अस्त्र चला।

२-वैष्णव: ये भगवान विष्णु का अस्त्र है और इस अस्त्र का कोई प्रतिकार ही नहीं है।
रघुवंश प्रसाद सिंह के बयान पर बीजेपी के नंदकिशोर यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘यह बेहद शर्मनाक है कि जो समाज गाय की पूजा करता है, उसके लिए इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं। इस तरह के बयानों की हर तरफ निंदा की जानी चाहिए।

(सभी जानते हैं कि बिहार विधानसभा के चुनाव में जाति, बदजुबानी और साम्प्रदायिकता सभी दलों पर किस कदर हावी है। इसी आधार पर वो एक दूसरे को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। किसे सत्ता सौपनी है, इसका अंतिम निर्णय अब मतदान के जरिये बिहार कि जनता को करना है। मेरी उनसे अपील है कि वो वोट डालने जरूर जाएँ। अंत में पाठकों से निवेदन है कि ये नेताओं के बयानों पर आधारित एक व्यंग्य रचना है और कृपया उसी भाव से इसे पढ़ें।)

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
(आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- २२११०६)
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~



Tags:       

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

8 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
October 11, 2015

मीडिया पर प्रसारित समाचारों के अनुसार बिहार में राजद नेता रघुवंश प्रसाद द्वारा बीफ को लेकर कही गई अमर्यादित बयानबाजी से नाराज विजय कुमार चौधरी ने सीजेएम कोर्ट में उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया है ! आदरणीय विजय कुमार चौधरी जी ने सही कदम उठाया है ! इस तरह की निंदनीय बयानबाजी पर रोक लगनी ही चाहिए !

sadguruji के द्वारा
October 11, 2015

राजद नेता रघुवंश प्रसाद ने बीफ को लेकर चल रहे विवाद के बीच कहा था कि ऋषि-मुनि भी बीफ खाते थे ! वेद-पुराणों में भी इस बात का जिक्र है ! उन्होंने कहा, जो बातें हमारे वेदों में लिखी गई है, उन्हे झुठलाकर इतना विवाद करना गलत है !

Shobha के द्वारा
October 11, 2015

श्री आदरणीय सद्गुरु जी आपने भी बिहार को समझने की कोशिश की है मेरी समझ में बिलकुल नहीं आता परन्तु आज कल बिहार के चुनाव का दिलचस्प वर्णन शाहिद नकवी जी ने किया हैं क्या – क्या नारे चल रहे हैं क्या एक दूसरे के विरुद्ध डायलोग पूरी फ़िल्मी स्क्रिप्ट है उनकी बिहार पर बहुत अच्छी पकड़ हैं और जाति वाद पूछिए मत इतनी जातियों के विभाजन मनु महाराज भी घवरा जायें आप उनका लेख जरुर पढ़ें मेरी तो बुद्धि चकरा जाती है पब्लिक एक नम्बर की राजनीति को जानने वाली लेकिन वोट जाति पर देती है | गरीबी से जकड़े लोग घर से बेघर परदेस में पड़े हैं परन्तु विकास का मुद्दा उन्हें आकर्षित नहीं करता |लालू जी के सपुत्र भी मैदान में हैं एक नवीं पास हैं जितने पर कौन सा मंत्रालय मांगेगा

sadguruji के द्वारा
October 11, 2015

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! ये सच है कि बिहार के हर चुनाव में जातीय समीकरण हावी रहता है ! आदरणीय शाहिद नकवी जी का लेख मई पढ़ा था, उन्होने अपने लेख में इसका बहुत तार्किक और सटीक वर्णन किया है ! बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नेताओं के द्वारा की जा रही बदजुबानी पर एक व्यंग्य लेख लिखना चाहता था, उसी के परिणामस्वरूप यह रचना प्रकाशित हुई ! व्यंग्य लेखन की आदत नहीं, बस लिख दिया है ! ब्लॉग पर आने के हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
October 11, 2015

आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह जी पाशुपत अस्त्र चलाकऱ अब उस अस्त्र की मार से स्वयं ही आह्त होने वाले हैं ! कानूनी कार्यवाही तो उनपर होगी ही, हिन्दू जनमानस की नाराजगी उनका राजनीतिक कैरियर भी तहस नहस कर सकती है ! हमारी सभ्यता और संस्कृति के खिलाफ बोलने वालों को यदि जनता चुनाव के समय सबक़ नही सिखाएगी तो आखिर कब सिखाएगी ?

sadguruji के द्वारा
October 11, 2015

बिहार में होने वाले हर चुनाव में जातिवाद हावी रहता है ! सभी दल चुनाव जितने के लिए जातीय समीकरण का सहारा लेते हैं ! जातीय उन्माद भड़काकर चुनाव जितना वहां एक साधारण बात है, किन्तु दशकों पुराने जातिवादी राजनीति के मिथक को पिछले लोकसभा चुनाव में जनता को विकास का स्वप्न दिखा नरेंद्र मोदी जी बहुत हद तक तोड़ने में कामयाब रहे ! अब देखना ये है कि बिहार विधानसभा के चुनाव में लालू और नीतिश जी के जातीय राजनीतिक समीकरण को धराशायी करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कितने कामयाब रहते हैं !

deepak pande के द्वारा
October 11, 2015

BIHAR ME AAJ BHEE RAJNETA USEE JATIGAT RAJNEETI PAR TIKE HAIN ABHEE BAHUT PARIVARTAN BAKI HAI BIHAR ME

sadguruji के द्वारा
October 11, 2015

आदरणीय दीपक पांडे जी ! बिहार में जातिगत आधार पर ही तो राजनीती कई दशकों से हो रही है ! इसमें बहुत जल्दी परिवर्तन की आशा भी नहीं है ! प्रतिक्रिया देने के लिए सादर आभार !


topic of the week



latest from jagran