सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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देश को कन्हैया की नहीं संत महापुरुष की जरुरत है-जागरण मंच

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गुरुदेव हमारे आओ जी
गुरुदेव हमारे आओ जी
गुरुदेव हमारे आओ जी

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यूट्यूब पर ये भजन सुना, बहुत अच्छा लगा. महापुरुषों और संतों के प्रति मन में ऐसा भक्तिभाव उत्पन्न की कि मन को बहुत शान्ति मिली. आज देश को कबीर साहब, गुरु नानक और संत रविदास जी जैसे महापुरुषों की जरुरत है, जो आम लोगों के उन कुसंस्कारों और कुरीतियों पर प्रहार कर सकें जो उनकी गरीबी और परेशानी का कारण बनी हुई हैं. गरीबों और दलितों का हमेशा भला सोचने और करने की अथक कोशिश करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बखूबी अपना कार्य कर रहे हैं, किन्तु शराब, जुआ और अन्य बहुत से कुसंस्कारों से ग्रस्त गरीब हिन्दुस्तानियों का पूर्णतः भला तभी हो सकता है, जब महापुरुषों और संतों की संगति से उनके कुसंस्कार और बुरी आदतें दूर हों. हमारे देश में गरीबी का एक बहुत बड़ा कारण है, गरीबों का नशे और जुए का शिकार होना. इससे उन्हें मुक्ति दिलाने वाले संतों और महापुरुषों की देश को आज भी उतनी ही जरुरत है, जितनी पहले थी.

बहुत दिनों से लखो ना हो
आनंद मंगल गाओ जी
गुरुदेव हमारे आओ जी

बहुत दिन बीत गए, धरती पर किसी ऐसे महापुरुष का अवतरण हुए जो हमारी आत्मा को आनंद देने वाला और हमारे समस्त कुसंस्कारों को दूर करने वाला गीत गा सके. टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर ‘हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की’ की एक हफ्ते से चल रही चर्चा देखि तो यूट्यूब पर तीन मार्च को जेएनयू में दिया गया कन्हैया का पूरा भाषण सुन ही लिया. पचास मिनट का अपने संगी-साथियों को भावुक करने वाला और भविष्य के लिए अपनी वामपंथी राजनीतिक जमीन तलाशने वाला एक सामान्य भाषण. भाषण से पहले और बाद में आजादी के हास्यास्पद नारे मानो देश को अंग्रेजों से आजाद कराने निकले हों. जिस रोहित वेमुला ने स्वेच्छा से आत्महत्या की थी, कन्हैया ने उसकी आत्मह्त्या को जबरदस्ती ह्त्या साबित करने की कोशिश की और रोहित वेमुला का सहारा लेकर दलितों को भड़काने वाला घटिया राजनीतिक भाषण दिया.

पलकन पंथ बुहारुँ तेरो
नैन पड़े पग धारो जी
गुरुदेव हमारे आओ जी

देश की जनता को इन्तजार है, लौकिक और अलौकिक आनंद प्रदान करने वाले किसी संत महापुरुष का, लच्छेदार भाषण देने वाले किसी नेता का नहीं, जो विधायक, सांसद या फिर मंत्री बनकर गरीबों, दलितों और आम मध्यमवर्गीय जनता से मुख मोड़ लेते हैं. भगवान कृष्ण का जन्म जेल में हुआ था और उनकी कर्मभूमि थी सम्पूर्ण भारत. छात्र नेता कन्हैया को पब्लिसिटी देशद्रोह के आरोप में जेल से जमानत पर छूटने के बाद मिली है और उनकी भाषण भूमि है जेएनयू. वो विलेन से हीरो बना है. धन्य हैं वो टीवी चैनल, जिन्होंने कन्हैया को कभी रातोरात देशद्रोही बना दिया था और जेल से छूटने के बाद उसका भाषण लाईव प्रसारित कर रातोरात कन्हैया को हीरो बनाते हुए भगवान कृष्ण से उसकी तुलना करने की भरसक कोशिश की है.

बाट तिहारी निसदिन देखूं
हमरी और निहारो जी
गुरुदेव हमारे आओ जी

करोड़ों हिन्दुओं की तरह मुझे भी इन्तजार है भगवान कृष्ण के धरा पर लौटने का. कृष्ण प्रेम में डूबे लाखों भक्तों की तरह मैं भी उनकी बाट जोह रहा हूँ. अब तो बस यही प्रार्थना है कि भगवान अपने भक्तों की ओर अपनी दिव्य दृष्टि डालें और शीघ्र से शीघ्र धरती पर अवतरित हो. केवल नाममात्र के उस कन्हैया की तरफ मैं क्या दृष्टि डालूं जो वामपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर नास्तिक और हिन्दू विरोधी हो गया है. जिसे ये भी पता नहीं की गुरु गोलवलकर जी मुसोलिनी से कभी नहीं मिले थे. कई कम्युनिस्ट शासित देशों में अनगिनत लोंगो का क़त्ल न्यायिक हिरासत में लेकर किया गया, इसकी भी उसे जानकारी नहीं है. पूरी दुनिया भर में लाल सलाम यानी वामपंथी विचारधारा ने गरीबों और दलितों का कोई भला किया है या नहीं किया है, ये विवाद का विषय है, किन्तु ये एक कड़वी सच्चाई है कि हिंसक साम्यवादी क्रांति के नाम पर कई देशों में कम्युनिस्टों ने खून की नदिया बहाईं हैं और आज भी बहा रहे हैं.

करू उछाह बहुत मन सेती
आँगन चौक पुराऊँ जी
गुरुदेव हमारे आओ जी

किसी पूर्ण संत से मिलन हेतु मन व्याकुल है और भक्त अपने मन रूपी चौक और आँगन को सजा-धजा रहे हैं. संतमत का ये अटूट विश्वास है कि संत महापुरुष केवल समदर्शी ही नहीं बल्कि समवर्ती भी होते हैं. उनका दर्शन और व्यवहार दोनों ही समानता से परिपूर्ण होता है. ऐसे ही किसी संत महापुरुष के अवतरण की इस देश की श्रद्धालु जनता को प्रतीक्षा है, जो शेर और बकरी यानि अमीर और गरीब को एक ही घाट पर निडर होकर और हंसकर पानी पीना सीखा सकें. अमीर और गरीब को आपस में लड़ाने वाले इंसान और इंसानियत दोनों के ही घोर शत्रु हैं. सब जानते हैं कि समानता और इंकलाब लाने के नाम पर वामपंथी भारत ही नहीं बल्कि, विश्वभर के कई देशों में मानवता विरोधी अपना पुराना खूनी खेल खेल रहे हैं, उसकी जितनी भी निंदा की जाए, वो कम है.

दाता करमा शीश निवाऊं
सुन सुन वचन अघाओ जी
गुरुदेव हमारे आओ जी

वचन वो सुनने को मिले, जिससे मन, बुद्धि और आत्मा को शान्ति मिले और वो तृप्त हो जाएँ. धर्मग्रन्थ के रूप में संकलित संत महापुरुषों के ऐसे अमृत वचनों को मेरा कोटि कोटि नमन. संचार और सोशल मीडिया लोंगो को आपस में आत्मिक रूप से जोड़ने वाली और भाईचारा व प्रेम फैलाने वाली संतों की अमर वाणियों का प्रचार-प्रसार करे, न कि किसी विलेन को हीरो बनाकर देश व जनता को तोड़नेवालों के उलजुलूल भाषणों का प्रचार-प्रसार करें, जिससे देश के लोंगो के दिलों का शांतिपूर्ण माहौल ख़राब हो. कहैया का भाषण ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसा था, जिसमे बदले की भावना और गुस्से से भरे मन की भड़ास निकालने के साथ ही मोदी सरकार, भाजपा व हिन्दू संगठनों के खिलाफ गरीबों और दलितों को भड़काने वाली छलपूर्ण प्रपंची वामपंथी राजनीति भी शामिल थी.

गुरु सुखदेव चरण हूँ दासा
दर्शन माहें समाओ जी
गुरुदेव हमारे आओ जी

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किसी से प्रभावित ही होना है तो उन संतों से क्यों न प्रभावित हुआ जाये जो हमारे जीवन को सही दिशा दे सकते हैं. संतों के चरणों का दास होना और उनका दर्शन करना ज्यादा हितकर है, बजाय बड़बोले नौसिखिये नेताओं का दर्शन करने और उनका देश और इंसान को बांटने वाले भाषण सुनकर भ्रमित होने से. हार्दिक पटेल और कन्हैया जैसे युवा नेता गली में छक्का लगाकर खुश होने वाले उन खिलाडियों जैसे हैं, जो राष्ट्रिय टीम में जानेसे पहले ही बाहर हो जाते हैं. अंत में एक बात की तारीफ़ करूंगा कि जेएनयू में छात्र नेता कन्हैया के कार्यक्रम में तिरंगा फहराया जाना सबको अच्छा लगा, जो अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश के खिलाफ बोलने पर कोर्ट द्वारा लगाईं गई कड़ी फटकार का ही परिणाम थी.

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(आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कंदवा, जिला- वाराणसी. पिन- २२११०६)
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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
March 12, 2016

श्री आदरणीय सद्गुरु जी अलग तरह का प्रयोग संतों की वाणी आज की भौतिक वादी जेनरेशन का बहुत अच्छा मिलान संत शान्ति की तरफ ले जाते हैं आज के महत्वकांक्षी साध्य पर जोर देते हैं साधन कुछ भी हो बहुत अच्छा लेख

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
March 12, 2016

आदरणीय सद्गुरु जी अभिनन्दन ,सद्गुरु की आकांक्षा भगवन अवश्य पूरी करें मेरी यही  कामना है | किन्तु यह भी सत्य है की कंस और रावण  के पूँजीवाद  का नाश करने के लिए ही भगवन अवतरित हुए थे | साधुओं को सांत्वना देना भगवन का स्वाभाव है | ओम शांति शांति 

drashok के द्वारा
March 13, 2016

श्री सद्गुरु जी अलग तरह का लेख दाता करमा शीश निवाऊं सुन सुन वचन अघाओ जी गुरुदेव हमारे आओ जी   न कि किसी विलेन को हीरो बनाकर देश व जनता को तोड़नेवालों के उलजुलूल भाषणों का प्रचार-प्रसार करें, जिससे देश के लोंगो के दिलों का शांतिपूर्ण माहौल ख़राब हो. कहैया का भाषण ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसा था, बहुत खुबसुरत

sadguruji के द्वारा
March 13, 2016

आदरणीय डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! लेख को ब्लॉग बुलेटिन में शामिल करने के लिए हार्दिक आभार ! ब्लॉग बुलेटिन की जितनी भी तारीफ़ की जाये वो कम है ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
March 13, 2016

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! राजनितिक और कूटनीतिक लेख लिखने के लिए आप लोग बहुत अनुभवी और सिद्धहस्त हैं ! मेरा लगाव आध्यात्म से ज्यादा है ! अतः किसी भी माध्यम से आध्यात्मिक संदेशों को जन जन तक पहुंचाना अच्छा लगता है और ऐसा करना मेरा कर्तव्य भी है ! मेरे उद्देश्य को भलीभांति समझने के लिए हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
March 13, 2016

आदरणीय हरिश्चंद्र शर्मा जी ! सादर हरि स्मरण ! बहुत दिनों के बाद मंच पर आपके वैचारिक दर्शन हुए ! मंच पर स्वागत है ! आपके व्यंग्य बाणों की कमी खेल रही थी ! पूंजीवाद का विरोध आज के युग में संभव नहीं है ! जो विरोध कर रहे हैं उन्हें भी पूंजी चाहिए ! अब तो वामपंथी बुद्धिजीवी लोग भी पूंजीपति हो गए हैं ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
March 13, 2016

आदरणीय डॉक्टर साहब ! सादर अभिनन्दन ! ब्लॉग को पसंद कर उसे सार्थकता प्रदान करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! कभी कभी नेताओं के उलजुलूल बयानों से बहुत खिन्नता सी हो जाती है, इसलिए राजनीतिक विषयों से कुछ अलग हटकर या फिर उसे आध्यात्मिक संदेशों के साथ प्रस्तुत कर देता हूँ ! मेरा प्रयास आपको अच्छा लगा, इसके लिए हार्दिक आभार !

yamunapathak के द्वारा
March 15, 2016

आदरणीय सद्गुरू जी संत या विवेकपूर्ण जिम्मेदार लोगों की सचमुच बहुत ज़रुरत है…समाज को जो सही दिशा में ले जाए वही संत है. बहुत सुन्दर ब्लॉग बीच बीच की काव्यात्मक पंक्तियाँ बहुत खूब हैं. साभार

sadguruji के द्वारा
March 15, 2016

आदरणीया यमुना पाठक जी ! सादर अभिनन्दन ! जी..आपने बिलकुल सही कहा है ! मेरे विचार से भी संत की सही परिभाषा यही है कि वो सब लोग संत हैं..महापुरुष हैं..जो परमात्मा को हर पल याद करते हुए और खुद को उसका सेवक मानते हुए किसी भी रूप में समाज का हित कर रहे हैं ! उन सभी को मेरा नमन और ये आलेख भी उन्हें समर्पित है ! जेएनयू में चल रही राजनितिक बयानबाजी से बहुत ऊब गया था, इसलिए यह भजन सुना और उसके सहारे अपने मन की बात कहने की कोशिश की ! इस प्रयोग को सराहने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !


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