सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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फतवे पर फतवा जारी, देश की चिंता नहीं- जागरण जंक्शन मंच

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फतवे पर फतवा जारी, देश की चिंता नहीं- जागरण जंक्शन मंच
‘भारत माता की जय’ बोलने को लेकर उठा विवाद ‘वंदे मातरम’ वाले विवाद की तरह ही थमने का नाम नहीं ले रहा है. मुस्लिम शिक्षण संस्थान इस विवाद पर फतवे पर फतवा जारी कर रहे हैं. हैदराबाद के बेहद प्रभावशाली इस्लामिक मदरसे जामिया निजामिया ने कुछ दिनों पहले फतवा जारी करते हुए कहा था कि भारत माता की जय कहना इस्‍लामिक मान्‍यताओं के अनुकूल नहीं है. इस्लाम से जुड़ी तालीम के एक और सबसे बड़े केंद्र दारुल उलूम देवबंद ने अभी हाल ही में इसी मुद्दे पर फतवा जारी करते हुए कहा कि कोई भी मुसलमान ‘भारत माता की जय’ न बोले. मुफ्ती-ए-कराम ने कहा कि हम मुल्क की पूजा नहीं कर सकते. हम सिर्फ खुदा की इबादत करेंगे. इस तरह के फतवा जारी करने वाले और भी कई छोटे बड़े मुल्ला मौलवी और मुस्लिम नेता हैं, जो स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि हम लोग जिस तरह वंदे मातरम नहीं बोल सकते उसी तरह से भारत माता की जय भी नहीं बोल सकते.
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हालाँकि ये एक पुराना मुद्दा है, लेकिन पिछले महीने यह विवाद फिर से तब उठ खड़ा हुआ जब राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश में ‘भारत माता की जय’ बोलना भी अब सिखाना पडेगा. ऐसा नहीं बोलने वालों की संख्या ज्यादा है और ये संख्या बढ़ती ही जा रही है. हालाँकि ये बात उन्होंने जेएनयू में बढ़ते देशद्रोही माहौल पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कही थी और बाद में स्पष्ट भी किया था कि हमें ‘भारत माता की जय’ बोलने वाले संस्कार, अपनी सनातन जीवन पद्धति और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ वाले शाश्वत व विश्व कल्याणकारी विचार किसी पर थोपने की जरूरत नहीं है. हमें अपने देशवासियों ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्र्व के प्रति ऐसी आत्मीयता और सेवा भाव लानी होगी कि लोग स्वयं ‘भारत माता की जय’ कह उठें.

आज दुनिया दुखी, भयभीत और अशांत है, ऐसे में भारतीय संस्कृति व दर्शन से ही विश्र्व को सुख-शान्ति का सही रास्ता मिलेगा. मोहन भागवत जी ने करोड़ों देशवासियों के दिल की बात कह दी, लेकिन इसे एक साम्प्रदायिक विवाद की शक्ल दे इस मामले को आगे बढ़ाने वाले मुस्लिम नेता व एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी थे, जिन्होंने अपने सियासी फायदे के लिए यह कहकर इस मुद्दे को गरमा दिया था कि चाहे मेरे गले पर चाकू रख दो, मैं ‘भारत माता की जय’ नहीं बोलूंगा. असदुद्दीन ओवैसी के बस आग में घी डालने भर की देर थी, ये मुद्दा ऐसा गरमाया कि मुल्ला मौलवी और मुस्लिम शिक्षण संस्थाओं द्वारा फतवे पर फतवे जारी होने शुरू हो गए. उन्होंने फतवा जारी करते हुए पूछा कि इंसान ही इंसान को जन्म दे सकता है तो फिर धरती मां कैसे हो सकती है? मुसलमान अल्लाह के अलावा किसी की पूजा नहीं कर सकता तो फिर भारत को देवी कैसे माने? ये सवाल बचकाने हैं, लेकिन इनके सही जबाब कुरान और बाइबल में हैं, उनके अनुसार तो धरती यानि मिट्टी से ही आदम को बनाया गया था.

इस दृष्टि से तो धरती हमारी माता ही नहीं, पिता भी है. यह बात भी विचार करने योग्य है कि नमाज अदा करते समय मुस्लिम भाई कई बार धरती पर अपना सिर झुकाते हैं. मेरे विचार से तो ऐसा करने से ईश्वर के साथ साथ धरती की भी वंदना हो जाती है. अपने मुल्क के धरती की जय बोलना धार्मिक दृष्टि से गलत नहीं है. पाकिस्तान जैसे मुस्लिम राष्ट्र में वहां के इस्लामी विद्वान ताहिर उल कादरी कहते हैं कि मादरे वतन की जय बोलना गैर इस्लामिक नहीं है. फतवा जारी करने वाले देश के प्रसिद्द गीतकार और लेखक जावेद अख्तर के ‘भारत माता की जय’ बोलते हुए सांसद में दिए गए भाषण को सुनें. उन्होने कितना सही तर्क दिया था कि संविधान में अगर भारत माता की जय बोलने की बात नहीं लिखी है तो टोपी और शेरवानी पहनने की बात भी नहीं लिखी है, वो क्यों पहनते हो? मुल्ला मौलवी से लेकर बड़े बड़े मुस्लिम नेता तक टीवी देखते ही नहीं हैं, बल्कि टीवी चैनलों पर आकर बहस में भाग भी लेते हैं, जो इस्लाम विरुद्ध है.

यदि धर्म को ही ब्रह्म वाक्य यानि सब कुछ मान के चलेंगे तब तो धरती पर सुख चैन से जीना ही हराम हो जायेगा. इस्लाम में तो संगीत सुनना और फिल्म देखना दोनों ही मना है. क्या देश के करोड़ों मुसलमान इसे छोड़ सकते हैं? कभी नहीं, चाहे कितने भी फतवे मुस्लिम समाज द्वारा क्यों न जारी हो जाएँ. इस्लाम में तो फोटो खिंचवाना भी मना है, लेकिन बिना फोटो खिचवाए तो आज के युग में काम ही नहीं चलेगा. देश में कोई भी सरकारी कार्य हो या राशन कार्ड, आधार या पासपोर्ट बनवाना हो या फिर हज करने जाना तो भी फोटो चाहिए. अधिकतर मुस्लिम भाई हर मामले में शरीयत की दुहाई देंगे, लेकिन कभी भूल से भी शरीयत में वर्णित सजाओं को मुस्लिम समाज पर लागू करने की बात नहीं करेंगे, क्योंकि तब उन्हें भारतीय संविधान ही ठीक और सुविधाजनक लगता है. भाई मेरे भारतीय संविधान को मानने के साथ साथ भारत को भी तो अपनी मातृभूमि मान सम्मान दो, उससे परहेज क्यों? परहेज तो देश विरोधी फतवों से करो. कानूनन भी इस पर जरूर रोक लगनी चाहिए.
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‘भारत माता’ शब्द डेढ़ सौ करोड़ भारतियों का प्रतीक है, ठीक वैसे ही जैसे ‘तिरंगा’ डेढ़ सौ करोड़ भारतियों का प्रतीक है. उसे सभी मानते हैं और सम्मान देते हैं, क्योंकि उसे संवैधानिक मान्यता प्राप्त है. आज जरुरत इस बात की है कि ‘भारत माता की जय’, ‘जय भारत’, ‘जयहिंद’, और ‘हिन्दुस्तान जिंदाबाद’ जैसे नारों को संसद द्वारा कानून बनाकर उसे संवैधानिक मान्यता प्रदान की जाये और सभी नागरिकों को इसे बोलना अनिवार्य किया जाये. विश्वभर में बढ़ते हुए आतंकवाद को देखते हुए उससे निपटने के लिए तथा भारत को एकजुट व अखण्ड बनाए रखने के लिए देशवासियों के मन में देशभक्ति की भावना बढ़ाना जरुरी है. देश धर्म से ऊपर है, यह सन्देश सबको दिया जाए. कुछ दिन पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता मनीष तिवारी ने ट्विटर के जरिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर तीखा हमला करते हुए बहुत सही सवाल किया था कि क्या मुस्लि‍म पर्सनल लॉ संविधान से भी ऊपर हैं? सही जबाब है- हरगिज नहीं. जो ये बात नहीं मानेंगे, उनकी देशभक्ति पर तो सवाल उठेंगे ही. ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ यानि जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर मानने वाली भारतीय संस्कृति को हम सबको ह्रदय से अपनाना और मानना चाहिए. जयहिंद!!

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ (आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कंदवा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106)
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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
April 3, 2016

श्री आदरणीय सद्गुरु जी “‘भारत माता की जय’ न बोले.” मुफ्ती-ए-कराम ने कहा कि ‘हम मुल्क की पूजा नहीं कर सकते. हम सिर्फ खुदा की इबादत करेंगे.’ यदि यही बात है तो जीवन बचाने के भय से मुस्लिम अपना देश छोड़ के योरोप के दरवाजे पर क्यों खड़े हैं? उन्हें तो ऊपर वाले के रहम पर अपने देश में ही रहना चाहिए | यह फतवे भी वोट बैंक की राजनीति वाले देशों में ही चलते हैं |

sadguruji के द्वारा
April 4, 2016

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपकी टिपण्णी अनुभव से परिपूर्ण होती है, इसलिए बहुत विचारणीय भी होती है ! आपने बिलकुल सही कहा है कि आतंकवाद से ग्रसित कई देशों में मुस्लिम अपना जीवन बचाने के लिए घरबार छोड़ के योरोप के सुरक्षित देशों की ओर भाग रहे हैं ! उन्हें ऊपर वाले पर इतना ही भरोसा है तो अपने ही देश में रहना चाहिए ! इससे ये साबित होता है कि अपने मुल्क को सबसे ऊपर रखना चाहिए, ऊपर वाले से भी ऊपर ! मुल्क सही सलामत है तभी हम सुख चैन से जीवन जीते हुए बिना किसी भय के ऊपर वाले की अच्छे ढंग से इबादत कर सकते हैं ! आपकी इस बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि फतवे राजनीति करने के मकसद से जारी होते हैं और ये वोट बैंक की राजनीति करने वाले देशों में ही चलते भी हैं, जैसे भारत ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
April 6, 2016

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ के तीसरे अध्याय में लिखा है कि वह गांव-गांव घूमते थे तो लोग उनका स्वागत ‘भारत माता की जय’ के नारे से करते थे. नेहरू ने लोगों से पूछा यह ‘भारत माता’ है क्या ? क्या यह पेड़ है, पहाड़ है या माटी है? कोई जबाब नहीं मिला तो उन्होंने लोगों को बताया कि ‘देश की जनता’ ही ‘भारत माता’ है और ‘भारत माता की जय’ अर्थात ‘जनता की जय’ है.’

sadguruji के द्वारा
April 6, 2016

पूर्व केन्द्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने एक प्रेस कांफ्रेस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि ‘भारत माता की जय’ बोलने का अर्थ ‘जनता की जय’ है, तो मैं भी इसे बोलने के लिए तैयार हूं. उन्होंने कहा कि हम तो बरसों से भारत माता की जय कहते आ रहे हैं, इसके साथ-साथ हम ‘जय हिन्द’ और ‘जय भारत’ भी कहते आए हैं.

sadguruji के द्वारा
April 6, 2016

केंद्रीय संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारत माता की जय कहना देश की परंपरा है, लेकिन यह दिल से निकलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि देश में वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे तो महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के समय भी लगते थे.

sadguruji के द्वारा
April 6, 2016

सुन्नी धर्म गुरु खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि इस मामले में बिना वजह बहस हो रही है. उनका कहना है कि इस मुल्क की आजादी में मुसलमानों ने भी कुर्बानियां दी हैं और जब मुस्लिमों ने ये कह दिया कि सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा तो अब इस पर कोई बहस नहीं होनी चाहिए.

sadguruji के द्वारा
April 6, 2016

महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़णवीस ने एक बयान में कहा है कि इस देश में रहने वाले किसी भी शख्स को भारत माता की जय बोलना ही पड़ेगा जो भारत माता की जय नहीं बोलेंगे उन्हें भारत में रहने का कोई हक नहीं है ! विपक्ष के नेताओं सहित कई समाजिक संगठनों ने उनके इस बयान पर एतराज जताया है ! उनका कहना है कि लोग भारत मां की जय बोल कर भी देशद्रोह करते हैं ! कोई ये तय नहीं कर सकता कि इस मुल्क में कौन रहेगा और कौन नहीं !

sadguruji के द्वारा
April 6, 2016

कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित का कहना है कि भारत माता के ऊपर जो विवाद हुआ है वो बेकार है ! खुद मोहन भगवत जिन्होंने ये विवाद खड़ा किया उन्होंने भी ये कहा है कि कोई ये नारा लगाए या न लगाए इस से कोई फर्क नहीं पड़ता ! बीजेपी अपने आप को कुछ ज्यादा राष्ट्रवादी बनाने की कोशिश कर रही है और खुद ही इस विवाद को भड़का रही है !

sadguruji के द्वारा
April 6, 2016

श‍िवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत माता के नारे पर फड़नवीस पके हुए केले की तरह नरम पड़ गए हैं ! शिवसेना के अनुसार ओवैसी पर देशद्रोह का मामला लगाकर जेल में बंद करना चाहिए था ! मंगलवार को उसके मुखपत्र सामना में लिखा गया, ‘अखंड भारत के लिए आंदोलन करने वाले श‍िवसैनिक को डकैती का आरोप लगाकर जेल भेज दिया जाता है और अपने ही महाराष्ट्र में हैदराबाद का ओवैसी आता है और गला काटा तो भी भारत माता की जय नहीं बोलूंगा ऐसा थूक कर चला जाता है. उस ओवैसी पर देशद्रोह का मामला लगाकर उसे घसीटकर लाते हुए कसाब की कोठरी में धकेलने की मुख्य्मंत्री ने हिम्मत क्यों नहीं दिखाई?’

sadguruji के द्वारा
April 7, 2016

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुखिया इंद्रेश कुमार ने भारत माता की जय ना बोलने वालों को पाकिस्तान जाने की नसीहत दी है तथा इसके साथ ही साथ ही आजादी और भारत के टुकड़े करने जैसे नारे लगाने वालों को मानवता और देश का दुश्मन कहा है ! मुस्लिम समाज के उत्थान के लिए आरएसएस ने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच नामक संगठन बनाया हुआ है !

sadguruji के द्वारा
April 7, 2016

आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर जी ने राष्ट्र विरोधी बयान देने वाले लोगों को आड़े हाथों लिया है। ऋषिकेश में शीशमझाड़ी स्थित अपने आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जिन्हें देश से प्रेम नहीं है, वे देश से बाहर चले जाएं। उन्होंने कहा कि देश के प्रति बुरी सोच रखने वालों की बुद्धि शुद्ध करने की जरूरत है, उन्होंने इसके लिए ऑर्ट ऑफ लिविंग अपनाने की भी सलाह दी।

sadguruji के द्वारा
April 7, 2016

अंत में इस सारी चर्चा का सार ये है कि हमारा देश हिन्दुस्तान हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई हम सभी का है और हम सभी को सुख चैन से यहाँ पर रहने का अधिकार है, किन्तु हम सबको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि देश सबसे ऊपर है, अपने धर्म से भी ऊपर ! हमारा देश सुरक्षित, सम्पन्न और शांतिपूर्ण है, तभी हम सबका जीवन भी सुरक्षित, सम्पन्न और शंतिपूर्ण होगा ! देशप्रेम हम जापानियों से सीखें, जो कहते हैं कि बुद्ध हमारे भगवान हैं, लेकिन यदि वो हमारे देश पर आक्रमण करते हैं तो वो हमारे सबसे बड़े दुश्मन हैं ! हम उनसे युद्ध कर उन्हें हरा देंगे ! देश सबसे ऊपर है ! जापानियों की दृष्टि में देश धर्म से भी ऊपर है ! यही राष्ट प्रेम हममे भी होना चाहिए ! जयहिंद !!


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