सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

493 Posts

5422 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15204 postid : 1231982

रक्षाबन्धन: महिलायें अपनी रक्षा करने के लिए स्वयम जागरूक हों

Posted On: 18 Aug, 2016 Junction Forum,Special Days,Social Issues में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

रक्षाबन्धन: महिलायें अपनी रक्षा करने के लिए स्वयं जागरूक हों
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।।
भावार्थ- जहां स्त्रीजाति का आदर-सम्मान होता है, उनकी सुरक्षा की जाती है और उनकी आवश्यकताओं-अपेक्षाओं की पूर्ति होती है, उस स्थान, समाज, तथा परिवार पर देवतागण प्रसन्न रहते हैं. जहां ऐसा नहीं होता और उनके प्रति तिरस्कारमय व्यवहार किया जाता है, वहां देवकृपा नहीं रहती है और वहां संपन्न किये गये कार्य सफल नहीं होते हैं.

हिन्दू धर्मग्रंथों में कहा गया है कि आकाश में देवताओं के विभिन्न लोक हैं, जहाँ वो बसतें हैं. अंतरिक्ष में देवता सदैव भ्रमण करते हैं और पृथ्वीलोक में तो मनुष्य के भीतर और बाहर दोनों जगह रमण करते हैं. देवताओं को सर्वव्यापी निराकार ब्रह्म का लौकिक यानि सगुण रूप माना जाता है. बृहदारण्य उपनिषद में कहा गया है कि देवी देवता व्यापक रूप में 33 करोड हैं. संक्षिप्त रूप में 33 प्रकार के हैं और अंत में केवल एक ब्रह्म है, जिसके ये सब विभिन्न लौकिक और कार्यकारी रूप हैं. परमात्मा ने यदि 33 करोड़ देवी-देवता इस संसार के हित के लिए नियुक्त कर रखें हैं तो वो सब कहाँ हैं? उनके पृथ्वी पर रमने से मनुष्य को क्या फायदा हो रहा है? इस समय धरती पर असुरों का साम्राज्य कायम होता जा रहा है.

मनुष्य दिन प्रतिदिन अपना देवत्व खोकर असुर होता जा रहा है. देवी-देवता क्या कर रहे हैं? क्या वो धरती पर जारी पाप का तमाशा भर देखने के लिए हैं? यदि हाँ तो ऐसे देवी-देवताओं को पूजने और याद करने की बजाय उन्हें भूल जाने में ही मनुष्य की भलाई है. धरती पर इस समय इंसान इतना खूंखार, वहशी और दरिंदा हो गया है कि नारी को पूजने की बात तो दूर रही, वो तो उसे भोग की वस्तु समझ कहीं से भी उठाकर न केवल भोग रहा है, बल्कि उसकी नृशंस हत्या भी कर दे रहा है. चाहे वो नौकरी के लिए जाती महिला हो, वाहन में सवार महिला हो, शौच के लिए जाती महिला हो या फिर पूर्णत:सुरक्षित समझे जाने वाले घरो में रहने वाली महिला ही क्यों न हो, आज वो कहीं भी सुरक्षित नहीं है.
imagesl;k;l;;;
कुछ समय पहले अख़बार में छपी एक खबर ने मेरे समूचे मानवीय बजूद को ही झकझोर कर रख दिया था. एक दरिंदा सगी बेटी के साथ सात साल से दुष्कर्म करता रहा. उसके इस कुकृत्य के कारण उसकी दो बीवियों ने आत्महत्या कर ली, तीसरी ने तलाक दे दिया और चौथी इस समय प्रसूता है मगर उस इंसान की हवस की भूख नहीं मिटी. उसने फिर से अपनी शादीशुदा बेटी की अस्मत लूटनी चाही लेकिन इस बार बेटी ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद से वो दुराचारी पिता जेल में है.

अब विचार इस बात पर करना है कि महिलाओं पर जो अत्याचार हो रहा है, उसका समाधान क्या है? महिलायें अपने को कमजोर समझकर संकट के समय देवी देवताओं को पुकारना छोड़ें. आज से पांच हजार वर्ष पूर्व बलात्कार का शिकार होती द्रौपदी ने उन सभी देवी-देवताओं को पुकारा था, जिनकी उसने सिद्धि की थी और जिनकी रोज पूजा करती थी, परन्तु कोई भी देवी देवता उसकी इज्जत बचाने नहीं आया. अंत में उसने भगवान श्री कृष्ण को याद किया, जिन्होंने उसकी लाज बचाई. परन्तु ये गुजरे हुए इतिहास की सदियों पुरानी बात है. किसी संकटग्रस्त महिला की मदद करने के लिए आज भगवान श्री कृष्ण शरीर रूप से हम सबके बीच नहीं हैं. आज का वो श्री कृष्ण रूप हमारी आदलते हैं, वो अपना न्याय रूपी सुदर्शन चक्र चलायें और बलात्कारी व हत्यारे असुरों को कठोरतम दंड दें.

ज्यादा अच्छा तो यही है कि ऐसे हैवानों को सार्वजनिक रूप से फांसी की सजा दी जाए, जिससे महिलाओं की आजादी के सबसे बड़े दुश्मन बलात्कारियों को समुचित सबक मिल सके और महिलाओं के प्रति बुरी नियत रखने वालों में कानून का ख़ौफ़ पैदा हो. आज के आपराधिक समय में महिलाऐं अपनी रक्षा करने के लिए स्वयं को जागरूक करें. संकट के समय अपनी रक्षा करने के लिए महिलाएं जुडो-कराटे और मार्शल आर्ट सींखें. वो भयभीत होकर देवी-देवताओं को पुकारने की बजाय अपने भीतर और बाहर व्याप्त परमात्मा को याद कर तुरंत शिव या दुर्गा का रौद्र रूप धारण कर लें और पूरी हिम्मत से अपराधियों का मुकाबला करें.

छोटे बच्चियों की रक्षा माता-पिता स्वयं करें, जो हैवानों से अपनी रक्षा करने में असमर्थ हैं. अपने पडोसी, ट्यूशन पढ़ाने वाले और अपने रिश्तेदारों पर कभी भी आँख मूंद के विश्वास न करें. सबसे बड़ी बात ये कि बच्चे यदि यौन-उत्पीडन की शिकायत माता-पिता से करें तो उसे उपेक्षित न कर बहुत गम्भीरता से लें. बच्चे की पूरी बात सुनें और सत्य की पड़ताल जरूर करें. अंत में रक्षाबन्धन की बधाई देते हुए यही कहूंगा कि भाई तो आजीवन अपना कर्तव्य निभाएगा ही, किन्तु महिलाऐं खुद भी साहसी बनें. अपनी रक्षा करने के लिए वो स्वयम जागरूक हों और जरुरत पड़ने पर पुलिस और कानून का सहारा भी जरूर लें. !! वन्देमातरम !!
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट-कंदवा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (12 votes, average: 4.92 out of 5)
Loading ... Loading ...

16 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

amitshashwat के द्वारा
August 20, 2016

माननीय  सद्गुरू जी, रक्षाबंधन के अवसर सामायिक लेखन में काफी परिपकवता से यर्थाथ को लिपिबदध किया जा सका है। साधुवाद।

sadguruji के द्वारा
August 20, 2016

आदरणीय अमित शाश्वत जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! पोस्ट की सराहना के लिए धन्यवाद ! देवी-देवताओं और धर्म के मामले में हमें अब व्यावहारिक होने की जरुरत हैं ! इसी में हमारा कल्याण भी है ! पोस्ट पर आने हेतु सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
August 20, 2016

भाई तो आजीवन अपना कर्तव्य निभाएगा ही, किन्तु महिलाऐं खुद भी साहसी बनें. अपनी रक्षा करने के लिए वो स्वयम जागरूक हों और जरुरत पड़ने पर पुलिस और कानून का सहारा भी जरूर लें.

sadguruji के द्वारा
August 20, 2016

महिलाएं भयभीत होकर देवी-देवताओं को पुकारने की बजाय अपने भीतर और बाहर व्याप्त परमात्मा को याद कर तुरंत शिव या दुर्गा का रौद्र रूप धारण कर लें और पूरी हिम्मत से अपराधियों का मुकाबला करें.

sadguruji के द्वारा
August 20, 2016

भगवान श्री कृष्ण ने द्रोपदी की लाज बचाई थी, परन्तु ये गुजरे हुए इतिहास की सदियों पुरानी बात है. किसी संकटग्रस्त महिला की मदद करने के लिए आज भगवान श्री कृष्ण शरीर रूप से हम सबके बीच नहीं हैं. आज का वो श्री कृष्ण रूप हमारी आदलते हैं, वो अपना न्याय रूपी सुदर्शन चक्र चलायें और बलात्कारी व हत्यारे असुरों को कठोरतम दंड दें.

sadguruji के द्वारा
August 20, 2016

ज्यादा अच्छा तो यही है कि ऐसे हैवानों को सार्वजनिक रूप से फांसी की सजा दी जाए, जिससे महिलाओं की आजादी के सबसे बड़े दुश्मन बलात्कारियों को समुचित सबक मिल सके और महिलाओं के प्रति बुरी नियत रखने वालों में कानून का ख़ौफ़ पैदा हो.

sadguruji के द्वारा
August 20, 2016

छोटे बच्चियों की रक्षा माता-पिता स्वयं करें, जो हैवानों से अपनी रक्षा करने में असमर्थ हैं. अपने पडोसी, ट्यूशन पढ़ाने वाले और अपने रिश्तेदारों पर कभी भी आँख मूंद के विश्वास न करें. उनपर कड़ी निगाह रखें.

sadguruji के द्वारा
August 20, 2016

सबसे बड़ी बात ये कि बच्चे यदि यौन-उत्पीडन की शिकायत माता-पिता से करें तो उसे अनसुना और उपेक्षित न कर बहुत गम्भीरता से लें. ऐसी बातों को हंसकर न टालें. बच्चे की पूरी बात सुनें और सत्य की पड़ताल जरूर करें.

harirawat के द्वारा
August 21, 2016

सद्गुरुजी नमस्कार, रक्षा बंधन पर आपका लेख पढ़ा, लेख काबिले तारीफ़ है ! मैं हमेशा से स्कूल कालेज वालों को एक सन्देश देता आ रहा हूँ की बेसिक शिक्षा के अलावा भी बच्चों को जुडो, कराटे, काला ब्यल्ट जैसे आत्म रक्षा की ट्रेनिंग भी दी जाय ! लेख के लिए साधुवाद ! कृपया मेरे ब्लॉग पर भी “जागते रहो” पर अपनी ठंडी दृष्टि जरूर डालें ! गीता का ज्ञान और प्राणायाम पर जो लेख लिखा है उस पर अपनी प्रतिक्रया जरूर दें ! धन्यवाद ! हरेन्द्र

sadguruji के द्वारा
August 21, 2016

आदरणीय हरेन्द्र रावत जी ! सादर अभिनन्दन ! ब्लॉग पर समय देकर अपनी अनमोल प्रतिक्रिया से पोस्ट को सार्थकता प्रदान करने के लिए हार्दिक आभार ! परम आदरणीय और मंच के वरिष्ठतम ब्लॉगर हरेन्द्र रावत जी, ‘ठंडी दृष्टि’ मेरी नहीं, बल्कि नेट की है जो ब्लॉगर साथियों के लेखों को पढ़ने और प्रतिक्रिया देने का सारा उत्साह ही ठंठा कर देती है ! याद करने के लिए सादर आभार !

Shobha के द्वारा
August 21, 2016

श्री सद्गुरु जी निशा जी ने लिखा है’ शुभकामनाओं के लिए कृतज्ञ हूँ.जागरण द्वारा डी गयी ये सूचना कहाँ और किस पेज पर है,कृपया लिंक देने की कृपा करें मुझको नही मिला कहीं भी पहले तो होम पेज पर रहता था ,अब होम पेज नही मिल रहा शायद मेरी ओर ही कुछ समस्या है आभार कृपया उस पेज का लिंक दे दीजिये’ मेरी समझ में नहीं आ रहा मुझे कम्प्यूटर की काम चलाऊ जानकारी है |

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 21, 2016

यह सच  है कि अब किसी पर विश्वास करने का धरम नहीं है , सार्थक और शिक्षा प्रद आलेख आदरणीय सद्गुरु जी .

sadguruji के द्वारा
August 21, 2016

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! आदरणीया निशामित्तल जी को सुझाव दे दिया हूँ कि आप अपने कंप्यूटर के ब्राउजर का हिस्ट्री आइकॉन क्लिककर रीसेंट हिस्ट्री को क्लियर कर दें ! मोजिला फ़ायरफ़ॉक्स ब्राउजर का प्रयोग करें, आपकी परेशानी निश्चित रूप से दूर हो जायेगी ! वैसे लिंक मैं दे रहा हूँ- http://www.jagranjunction.com/

sadguruji के द्वारा
August 21, 2016

आदरणीया निर्मला सिंह गौर जी ! सादर अभिनन्दन ! जी.. बिलकुल यही मैं भी कहना चाह रहा था कि आज के समय में किसी पर भी आँख मूंदकर विश्वास न करें ! पोस्ट के प्रति आपके सहयोग और समर्थन का आभारी हूँ !

rameshagarwal के द्वारा
August 23, 2016

जय श्री राम सद्गुरुजी सुन्दर लेख के लिए बधाई .इस वक़्त कलयुग चल रहा इसलिए अवगुणों की भरमार होगी लेकिन लडकियो और महिलाओं को भी थोड़ी सावधानी बरतनी जरूरी है स्वतंत्रता और स्वछंता में अंतर है कुछ लोग महिलाओं को भड़काने का कार्य कर रहे कालेजो में यदि प्रधान्चार्य कुछ ड्रेस प्रतिबंधित करती तो उसपर भी विरोध दिखता समाज किस दिशा में जा रहा है.महिलाओं को डरना और शर्मना नहीं चाइये लेकिन हिम्मत सीखनी चाइये.आगे भगवान् मालिक आज कल के भौतिक युग में रिश्ते बेईमानी हो गए.

sadguruji के द्वारा
August 23, 2016

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! जय श्री राम ! आपसे पूर्णतः सहमत हूँ कि लडकियो और महिलाओं को भी थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए ! स्वतंत्रता और स्वच्छन्दता में अंतर उन्हें समझना चाहिए ! आपने सही कहा कि यदि प्रधान्चार्य किसी कालेज में लड़कियों की भड़कीली ड्रेस प्रतिबंधित कर देते हैं तो बहुत से लोग महिलाओं की आज़ादी पर पाबन्दी लगाए जाने की बात कहकर महिलाओं को भड़काने का कार्य करने लगते हैं ! ब्लॉग पर समय देने के लिए धन्यवाद !


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran