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धर्म परिवर्तन रोकने के लिए हिंदुओं में जातिप्रथा ख़त्म होनी चाहिए

Posted On: 30 Aug, 2016 Junction Forum,Politics,Social Issues में

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धर्म परिवर्तन रोकने के लिए हिंदुओं में जातिप्रथा ख़त्म होनी चाहिए
कुछ दिनों पूर्व मीडिया में खबर प्रकाशित हुई थी कि बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव अनुमंडल के चौंगाई गांव में पिछले चार माह के भीतर पांच सौ दलित हिंदुओं ने धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपना लिया है. करीब सौ परिवार वाले चौंगाई गाँव की कुल आबादी एक हजार के करीब है. गाँव वालों का आरोप है कि इस गांव में शेष बचे दलित हिन्दुओं पर भी धर्म बदलने का दबाव डाला जा रहा है. वे ईसाई मिशनरियों पर यह भी आरोप लगा रहे हैं कि गाँव के गरीब और कम पढ़े-लिखे लोंगों को पैसे और बेहतर भविष्य का लालच देकर बहुत ही गुपचुप तरीके से धर्मांतरण करा रही हैं. धर्मांतरण के इस बहुत बड़े और बेहद गम्भीर मामले के उजागर होते ही पंचायत के प्रतिनिधियों व ग्रामीणों में हडकंप मच गया. मीडिया के जरिये इस खबर के फैलते ही पूरे देशभर में खलबली मच गई. देशभर के लोगों में, खासकर हिन्दू समाज और हिन्दू संगठनों मे इस मामले को लेकर ईसाई मिशनरियों के खिलाफ बहुत आक्रोश है. वो वर्षों से ईसाई मिशनरियों पर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगा रहे हैं.

बक्सर जिले के चौंगाई गाँव से आई धर्मांतरण की खबर से राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देशभर का सियासी पारा गरम होना ही था. लोजपा सुप्रीमो व केंद्रीय मंत्री ऱामविलास पासवान ने बक्सर की घटना पर राज्य सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि बिहार सरकार के पास ईसाई मिशनरियों के कुचक्र से निपटने का कोई तंत्र ही नहीं है. ईसाई मिशनरियां गाँव के भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसा रही हैं और विफल प्रशासन इन सब मामलों से बेखबर है. भाजपा सांसद गोपाल नारायण सिंह ने धर्मातंरण पर बयान देते हुए आरोप लगाया कि एक बड़ी साजिश के तहत ईसाई पूरे बिहार में सबसे ज्यादा सक्रिय हैं. हरेक प्रखंड में जमीन खरीद रहे हैं और गिरिजाघर बना रहे हैं. ईसाई समुदाय के लोग प्रलोभन देकर हिन्दूओं का घर्मांतरण करवा रहे हैं. गांव-गांव तक इनकी सक्रियता काफी बढ़ गयी है और राज्य सरकार वोट की राजनीति की खातिर इन सब बेहद गम्भीर पहलुओं पर मौन है.
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गोपाल नारायण सिंह ने राज्य सरकार पर फेल होने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में बहुसंख्यक समाज अब अपने को असुरक्षित महसूस कर रहा है. यदि राज्य सरकार बक्सर के चौगाई वाले मामले में कोई कार्रवाई नहीं करती है तो बड़ा आंदोलन होगा जिसके लिये राज्य सरकार ही जिम्मेदार होगी. हालाँकि प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है और कहा है कि जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. देश के अन्य कई हिस्सों में भी धर्म परिवर्तन के मामले पिछले कुछ दिनों में उजागर हुए हैं. पिछले कई दशकों से देश के विभिन्न इलाकों में शहर से अति सुदूर बसे अति पिछड़े ग्रामीण इलाकों और जंगलों में बसने वाले आदिम जनजातियों पर धर्म परिवर्तन करने के लिए ईसाई मिशनरियां दबाव बना रही हैं. वो पिछड़े और अशिक्षित लोंगों को अच्छे भविष्य व सुखी जीवन का स्वप्न दिखा और उन्हें उपहार और पैसे का लालच देकर धर्म परिवर्तन करा रही हैं.

दलित उत्थान की हमारे देश के नेता चाहे कितनी भी बड़ी बड़ी बातें करें किन्तु सच यही है कि देश के अधिकतर दलितों की स्थिति आज भी असहाय और दयनीय वाली ही है. ये एक कटु सत्य है कि अपनी गरीबी, भूखमरी और दयनीय स्थिति से परेशान होकर भी गरीब और दलित हिन्दू ईसाई धर्म अपना रहे हैं. सवर्ण ओर सम्पन्न हिन्दू, सत्ताधारी हिन्दू नेता अथवा हिन्दू संगठन इस ओर ध्यान देने का कष्ट ही नहीं करते हैं. मीडिया में छपी ख़बरों के अनुसार बक्सर जिले के चौंगाई गाँव में एक मन्दिर तक नहीं है. धर्म परिवर्तन रोकने के लिए गाँव वाले काली जी का एक मन्दिर बनवाने की मांग कर रहे हैं. मुझे लगता है कि उस क्षेत्र के लोंगो को हिन्दू धर्म की कोई जानकारी भी नहीं है. वहां पर भूत-प्रेत ओर जादू-टोना का अन्धविश्वास फैलाने वाले ओझा-सोखा दलित समाज पर हावी हैं. चौंगाई गाँव में धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनने वाले दलित नेता का कहना है कि उसका परिवार बीमारी को लेकर बहुत परेशान था. गाँव के ओझा-गुनी भूत-प्रेत का साया बता रहे थे. उनके मुताबिक़ ईसाई धर्म अपनाने पर हर तरह के अंधविश्वासों से छुटकारा मिला है ओर उसके परिवार में भी अब सबकुछ ठीक हो गया है.
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ये दलित नेता कई दलितों के धर्म परिवर्तन का जरिया बना. ये एक सच्चाई है कि देश के बहुत से अति पिछड़े ग्रामीण इलाकों और जंगलों में बसने वाले आदिम जनजाति वाले क्षेत्रों में ईसाई धर्म प्रचारक शुक्रवार, शनिवार और रविवार को आते हैं और प्रार्थना कराते हैं. इन्हीं प्रार्थना सभाओं में धर्म परिवर्तन करने का काम इतनी चालाकी और गोपनीय तरीके से किया जाता है कि प्रशासन, पुलिस और हिन्दू संगठनों को जल्दी इसकी भनक तक नहीं लग पाती है. हमारे देश में धर्म परिवर्तन संवैधानिक रूप से एक स्वेच्छिक विषय है, लेकिन देशभर में जबरन अथवा प्रलोभन देकर जिस चालाकी और शातिर तरीके से धर्म परिवर्तन हो रहा है, वो बहुत चिंताजनक है. इसका एक ही हल है कि या तो धर्म परिवर्तन पर पाबन्दी लगा दी जाए या फिर धर्म परिवर्तन पूरी सुनवाई के बाद केवल कोर्ट में हो. मेरे विचार से भगवदगीता और भगवान् कृष्ण हिन्दू धर्म के उद्धारकर्ता बन सकते हैं, बशर्ते उसका ठीक से प्रचार-प्रसार हो.

डॉक्टर भीमराव आंबेडकर को सामान्यतः हिन्दू धर्म का प्रबल विरोधी और कटु आलोचक माना जाता है, लेकिन बहुत कम लोंगों को यह मालुम होगा कि हिन्दू धर्म के उत्थान और एकजुटता के लिए जितना अथक और भागीरथ प्रयास उन्होंने किया, उतना शायद किसी ने नहीं किया. अंत में थकहारकर और हर तरफ से निराश होकर उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया. “जातिप्रथा और धर्म-परिवर्तन” नामक लेख में उन्होंने लिखा, “हिंदू जीवित रह सकते हैं, लेकिन प्रश्न यह है कि वो आजाद लोगों के रूप में जीवित रहेंगे या गुलामों के रूप में, लेकिन मामला इतना निराशाजनक लगता है कि मान भी लें कि वे जैसे-तैसे गुलामों के रूप में जीवित रह सकते हैं, फिर भी यह पूर्णतः निश्चित नहीं दिख पड़ता कि वे हिंदुओं के रूप में जीवित रह सकते हैं.” उन्होंने बड़ी संख्या में हिंदुओं के धर्म परिवर्तन कर लेने का मूल कारण जातिप्रथा बताते हुए कहा, “चूंकि हिंदू समाज जातियों का परिसंघ है और प्रत्येक जाति अपने-अपने अहाते में बंद है, अतः उसमें धर्म-परिवर्तन करने वाले के लिए कोई स्थान नहीं हैं.” ये एक कटु सत्य है. जातिप्रथा ख़त्म होनी चाहिए और स्वेच्छिक रूप से हिन्दू धर्म अपनाने वालों का जाति के खुले अहातों और खुले दिल से स्वागत होना चाहिए.

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आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106
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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
August 30, 2016

मैं आपके विचारों से पूरी तरह सहमत हूँ आदरणीय सद्गुरु जी ।

Shobha के द्वारा
August 30, 2016

श्री आदरणीय सद्गुरु जी दिल्ली में भी कई मिशनरियां अपने काम में लगी हैं विदेशी किसी भारतीय नागरिक के नाम पर सिलाई कढाई जैसे केंद्र खोलते हैं गरीब महिलाओं को काम दिया जाता है फिर उन्हें समझा कर धर्म परिवर्तन कराते हैं उनके चित्र खिंच कर विदेशों में दिखाते हैं उनके हाथ की बस्तुओं को दिखा कर बेचते हैं उनके नाम पर मोटे चन्दे वसूलते हैं |देश की गरीबी को बेचना अपना घर भरना | जिन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया कुछ समय बाद उन्हें काम से निकाल देते हैं फिर नंगी भर्ती होती है यही नहीं दिल्ली से कमा कर आदिवासी क्षेत्रों में भी संस्थाएं खोलते हैं वहां के लिए भी गरीबी के नाम पर दान लिया जाता है कई प्रश्न उठाता लेख

jlsingh के द्वारा
August 31, 2016

इशाई मिशनरियां गरीबों, दलितों को प[रालोभन देकर धर्म परिवर्तन करा लेती है. और यही दलित हिंदुओं सवर्ण लोगों की पैर की जूती की तरह इस्तेमाल किये जाते हैं. हमारे हिन्दू धर्म में यही दोष है जिसके कारन गरीब तबके के दलित लोग अपना धर्म परिवर्तन कर लेते हैं. या तो सबको समान अवसर और सुविधा मुहैया कराया जाय सम्मानपूर्वक मुख्यधारा में लाया जाय नहीं तो पलायन होता रहेगा और हम एक दुसरे पर आरोप लगते रहेंगे. सादर!

shakuntlamishra के द्वारा
August 31, 2016

धर्म परिवर्तन का बड़ा कारण गरीबी है

achyutamkeshvam के द्वारा
September 3, 2016

ईसाई मिशनरी इस काम  में  लगी  हैं ….जिसको रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने  की  जरूरत है …किन्तु इसका कारण जातिवाद ही  नहीं …अंधविश्वास और स्वास्थ्य शिक्षा सुविधाओं का अभाव है …..जिन देशों में मिशनरी पूरी  तरह  सफल हुईं  है उनमें जातिवाद नहीं था ….कई अन्य विपरीत  उदाहरण भी  हैं …..जातिवाद गलत  है ….किन्तु हिन्दू धर्मांतरण का  एकमात्र कारण नहीं ….और जातिवाद का  कारण  सवर्ण समाज …को ठहराना सही नहीं .

sadguruji के द्वारा
September 3, 2016

आदरणीय जितेंद्र माथुर जी ! पोस्ट के प्रति दिए गए आपके समर्थन और सहयोग के लिए ह्रदय से आभारी हूँ ! आपने पोस्ट को सार्थकता प्रदान की है ! आपका उत्साहवर्धन अनमोल है ! ब्लॉग पर समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
September 3, 2016

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! बिलकुल सही बात आपने कही है कि धर्म परिवर्तन का कार्य कई मिशनरियां देशभर में कर रही हैं ! आपने कुछ उदाहरण भी दिए हैं ! डॉक्टर जाकिर नाइक पर भी अन्य गम्भीर आरोपों के साथ ही धर्म परिवर्तन के आरोप भी लगे हैं ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
September 3, 2016

आदरणीय सिंह साहब ! ब्लॉग पर समय देने के लिए धन्यवाद ! आपने कटु सत्य बयान किया है ! नाना और दादा से बचपन में मेरी खूब बहस होती थी ! जातिगत भेदभाव इतना था कि वो लोग अपनी खटिया पर नहीं बैठने देते थे ! उनसे बस अपना मतलब साधते थे ! इसी आक्रोश के मारे चोरी-छुपे मैं सबके घर जाकर कुछ न कुछ खा भी लेता था ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
September 3, 2016

आदरणीया शकुंतला मिश्रा जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने सही कहा है कि धर्म परिवर्तन का एक बड़ा कारण गरीबी है ! दरअसल गरीबों को सरकारी मदद देने के साथ साथ संस्कारित करने की भी बहुत आवश्यकता है ! उन्हें बेहतर भविष्य के लिए नशे और जुए से दूर रहना सिखाना होगा ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
September 3, 2016

आदरणीय अच्युतमकेश्वम जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! ये सही है कि जातिवाद एकमात्र नहीं, किन्तु हिंदुओं में धर्म परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण जरूर है ! सबसे दुखद बात तो या है कि शंकराचार्यों और हिन्दू संगठनों ने इसे ख़त्म करने का आजतक कोई गंभीर प्रयास नहीं किया ! जाहिर सी बात है कि इससे उनके अपने निजी हित जुड़े हैं ! प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद् !

sadguruji के द्वारा
September 3, 2016

हिंदुओं के पास एक सनातन और शाश्वत दर्शन है, जिससे कालान्तर में दुनिया के सभी पैगम्बर और धर्म प्रभावित हुए ! किन्तु फिर भी हम धर्म-प्रचार से दूर क्यों भागते हैं ?

sadguruji के द्वारा
September 3, 2016

हम भगवान् कृष्ण और भगवद्गीता के जरिये बहुत बेहतर ढंग से धर्म प्रचार कर सकते हैं ! मेरे विचार से भगवदगीता और भगवान् कृष्ण हिन्दू धर्म के उद्धारकर्ता बन सकते हैं, बशर्ते उसका ठीक से प्रचार-प्रसार हो !

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
September 4, 2016

ब्राह्मण …नहीं किन्तु ब्राह्मणत्व से ही जन कल्याण हो सकता है | सभी को ब्राह्मण  नहीं बनाया जा सकता है किन्तु सभी शुद्र सुगमता से हो सकते हैं । अतः सभी हिंदु जाति प्रथा समाप्त कर शुद्र बन जायें । और ओम शांति शांति ना हो किंतु कोइ धर्म परिवर्तन नहीं करेगा । सदगुरु जी अबिनंदन ।

sadguruji के द्वारा
September 7, 2016

आदरणीय हरीश चन्द्र शर्मा जी ! सादर अभिनन्दन ! आपका सुझाव भी अच्छा है कि सभी हिन्दू जाति प्रथा समाप्त कर शूद्र बन जायें ! अच्छा व्यंग्य है ! सादर आभार !


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