सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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तीन तलाक पर चर्चा करना ही व्यर्थ है, संसद इसे रोकने हेतु कानून बनाये

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मदद चाहती है ये हव्वा की बेटी,
यशोदा की हम्जिन्स राधा की बेटी
पयम्बर की उम्मत ज़ुलेखा की बेटी,
ज़रा इस मुल्क के रहबरों को बुलाओ,
ये कूचे ये गलियां ये मंज़र दिखाओ,
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर उनको लाओ,
जिन्हे नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं,
कहाँ हैं, कहाँ हैं, कहाँ हैं…
जिन्हे नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं,
कहाँ हैं, कहाँ हैं, कहाँ हैं ?

हमारे मुल्क में ओरतों की दुर्दशा और बेहद दयनीय सामाजिक स्थिति पर आधारित ये क्रांतिकारी गीत मशहूर कवि साहिर लुधियानवी साहब ने 1957 में आई फिल्म ‘प्यासा’ के लिए लिखा था. इस गीत में लिखे एक एक शब्द स्त्रियों से जुडी एक ऐसी सामाजिक सच्चाई बयान करते हैं कि सुनने वालों की आँखों से आंसू झलक पड़ते हैं और लोग महिलाओं की बेहद ख़राब सामाजिक स्थिति में कोई सकारात्मत सुधार न करने के लिए देश के नेताओं को कोसते लगते हैं. फिल्म ‘प्यासा’ को एक बेहतरीन और क्रांतिकारी फिल्म होने के नाते कोई बड़ा पुरस्कार मिलना चाहिए था, किन्तु इस फिल्म को पुरस्कृत करने की बजाय तत्कालीन सरकार ने उल्टे इस फिल्म के कभी न भूलने वाले उपरोक्त गीत से अपनी नाराजगी जाहिर की थी. उनसे इस गीत में वर्णित सच्चाई न पढ़ी जा रही थी और न ही सुनी. बचपन से ही मैं भी ये गीत सुनता चला आ रहा हूँ. मैं ये गीत सुनकर सोचता था कि क्या वास्तव में कभी इस देश में ऐसा कोई नेता सामने आएगा, जो औरतो की दयनीय सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकेगा, जिसकी कल्पना अपने गीत में साहिर साहब ने की थी. लम्बे अरसे बाद पीएम मोदी में उस रहबर की झलक दिखाई देने लगी है. ‘तीन तलाक’ के मुद्दे पर उन्होंने अपनी जो अच्छी राय रखी है, उसका केवल मौलानाओं के भय, अल्पसंख्यक तुष्टिकरण और वोट बैंक की घटिया राजनीति के कारण ही विरोध हो रहा है.
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उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में ‘महापरिवर्तन रैली’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन बार तलाक बोलकर पत्नी से रिश्ता ख़त्म कर लेने के अति संवेदनशील और बेहद विवादित मुद्दे पर पहली बार बोलते हुए कहा, ‘मेरी मुसलमान बहनों का क्या गुनाह है, कोई ऐसे ही फोन पर तीन तलाक दे दे और उसकी जिंदगी तबाह हो जाए.’ इस विषय पर बोलते हुए उन्होंने आगे कहा, ‘क्या मुसलमान बहनों को समानता का अधिकार मिलना चाहिये या नहीं. कुछ मुस्लिम बहनों ने अदालत में अपने हक की लड़ाई लड़ी. उच्चतम न्यायालय ने हमारा रुख पूछा. हमने कहा कि माताओं और बहनों पर अन्याय नहीं होना चाहिये. सम्प्रदायिक आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिये.’ मोदी ने कहा ‘चुनाव और राजनीति अपनी जगह पर होती है लेकिन हिन्दुस्तान की मुसलमान औरतों को उनका हक दिलाना संविधान के तहत हमारी जिम्मेदारी होती है.’ प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से अनुरोध किया कि ‘तीन तलाक को लेकर जारी विवाद को मेहरबानी करके सरकार और विपक्ष का मुद्दा ना बनाएं. बीजेपी और अन्य दलों का मुद्दा ना बनाएं, हिन्दू और मुसलमान का मुद्दा ना बनाएं. जो कुरान को जानते हैं, वे टीवी पर आकर चर्चा करें.’

मोदी सरकार का यह बहुत स्वागत योग्य कदम है कि उसने मुस्लिम ओरतों की बेहतरी के लिए यह शुभ संकल्प लिया है कि तीन तलाक कहकर औरतों की जिंदगी बर्बाद करने वालों को अब यूं ही नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, जैसा कि अपना वोट बैंक बरकरार रखने की खातिर पिछली सरकारें करती रही हैं. सुप्रीम कोर्ट भी इस बात के लिए तारीफ़ का हकदार है कि उसने तीन तलाक के विचाराधीन विवादित मुद्दे से पल्ला नहीं झाड़ा, बल्कि उसे केंद्र सरकार के सामने उठाते हुए उसपर उसकी राय पूछी है. हालांकि भारत जैसे वोट बैंक और विविधिता वाले देश में इसका कोई सर्वमान्य हल जल्दी निकलना मुश्किल है. जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित 22 मुस्लिम देश इसपर पाबन्दी लगा चुके हैं. सरकार ने अपने हलफनामे में ‘तीन तलाक’ का विरोध किया है. ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इसे शरई कानून में दखलअंदाजी मानते हुए इसके खिलाफ पूरे देश में हस्ताक्षर अभियान चला रही है, जबकि उसे मालूम है कि भारत शरई कानून से नहीं, बल्कि अपने संविधान के अनुसार चल रहा है. उसका बेहद हास्यास्पद तर्क है कि किसी औरत की हत्या करने से तो बेहतर है कि उसे तलाक दे दिया जाए. बोर्ड का दूसरा तर्क यह है कि शरिया में मर्दों को तलाक देने का हक इसलिए दिया गया है, क्योंकि उनमें फैसले लेने की बेहतर समझ होती है.
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इसका सीधा सा अर्थ यह है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं कमतर होती हैं और वो तर्कसंगत फैसले नहीं ले सकतीं हैं. मजेदार बात यह है कि इस तरह की घटिया और दकियानूसी सोच रखने वाले बोर्ड को 95.5 फीसदी मुस्लिम महिलाएं जानती ही नहीं, ये बात भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (बीएमएमए) की ओर से किए गए एक सर्वे से ज्ञात हुई. प्रधानमंत्री जी का कहना है कि जो कुरान को जानते हैं, वे टीवी पर आकर चर्चा करें. टीवी की चर्चा का तो प्रधानमंत्री जी ये हाल है कि उसमे औरतों को तो मौलाना लोग बोलने ही नहीं देते हैं और दसरी बात ये कि वो ‘तीन तलाक’ पर चर्चा में जब हार जाते हैं तो खीझकर वर्षों पहले हुए गुजरात दंगे और आपकी पत्नी जशोदाबेन पर पहुँच जाते हैं. गुजरात दंगे के बाद वहां कोई दंगा नहीं हुआ यानि दंगाई हिन्दू मुस्लिम जो भी हों, सब पस्त हुए. दुखद किन्तु, शांतिपूर्ण प्रतिफल. जशोदाबेन को मोदी साहब ने न तो तलाक दिया और न ही दूसरी शादी की. देशप्रेम और देशहित के लिए परिवार छोड़ना सबके बस की बात नहीं. मोदी साहब को सलाम, उनके देशभक्ति और राष्ट्रहित के सर्वोपरि जज्बे को सलाम. अंत में बस यही कहूंगा कि ‘तीन तलाक’ पर चर्चा करना व्यर्थ है. इसका कोई नतीजा नहीं निकलेगा. संसद में इसे रोकने हेतु कानून बने, बस यही एक मार्ग है. साहिर साहब के एक और गीत की कुछ पंकियां प्रस्तुत हैं-

मर्दों ने बनायी जो रस्में,
उनको हक़ का फ़रमान कहा
औरत के ज़िन्दा जलने को,
कुर्बानी और बलिदान कहा
इस्मत के बदले रोटी दी,
और उसको भी एहसान कहा
औरत ने जनम दिया मर्दों को,
मर्दों ने उसे बाज़ार दिया
जब जी चाहा मसला कुचला,
जब जी चाहा दुत्कार दिया

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आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106
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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
October 26, 2016

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरु जी जिस देश के नेता कुर्सी के लिए देश तक बेच दे उस देश में कोइ क्रांतिकारी कदम उठाना कितना खतरनाक है आप समझते है ! इस मुद्दे में भी सेक्युलर नेता इस प्रथा पर निर्णय लेने का अधिकार मुस्लिम सानुदाय पर छोड़ना चाहते और मोदीजी की आलोचना सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा देने के लिए कर रहे. मुस्लिम नेता मान मर्यादा छोड़ हिन्दुओ और धर्म को गली दे रही प्रधानमंत्री को भी नहीं छोड़ रहे. ये धर्म का नहीं खुद का बनाया है और अपनी अहमीयत के लिए सुधार नहीं चाहते.! चूंकि मामला अदालत में है उसी लो निर्णय दे. राज्य सभा में बहुमत नहीं इसलिए संविधान संसोधन नहीं हो सकता. सुन्दर विवेचना के लिए आभार और बधाई. !

Shobha के द्वारा
October 26, 2016

श्री आदरणीय सद्गुरु संसद में कानून बनाने का प्रावधान हैं इसके लिए संसद के दोनों सदनों में बहुमत चाहिए संविधान बदलने के लिए भी आधी से अधिक विधान सभाओं में बहुमत चाहिए मुस्लिम महिलाओं के हक की लड़ाई पर बहस शाहबानो केस में भी चली थी लेकिन राजिव गांधी को विरोध के बाद पीछे हटना पड़ा लेकिन बहस छिड़ी है महिलाओं में जागरूकता बढ़ी है जब वह जगेंगी और देश की महिलाये खड़ी होकर वोट बैंक बनेंगी हक भी मिल जायेंगे

sadguruji के द्वारा
October 27, 2016

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने बिलकुल सही कहा है कि ‘तीन तलाक’ के विवादित मामले में संसद में कानून बनाने का प्रावधान हैं, किन्तु इसके लिए संसद के दोनों सदनों में बहुमत चाहिए ! संविधान बदलने के लिए भी आधी से अधिक विधान सभाओं में बहुमत चाहिए ! ये सब होगा, किन्तु समय लगेगा ! फिलहाल तो इस मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों में जागरूकता लाने की जरुरत है ! अच्छी प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
October 27, 2016

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! जय श्रीराम ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपकी बात से सहमत हूँ कि चूँकि मामला अदालत में है, अतः सबसे पहले तो उसी के फैसले का इन्तजार किया जाए ! भाजपा को राज्य सभा में बहुमत प्राप्त नहीं है, इसलिए फिलहाल अभी तो संविधान में संसोधन भी संभव नहीं है ! इस मुद्दे पर चर्चा का मकसद समाज में जागरूकता लाना है ! ब्लॉग पर समय देने हेतु सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
October 27, 2016

औरतों की अशिक्षा और आर्थिक बदहाली उन्हें ‘तीन तलाक’ रूपी अमानवीय जुल्म के खिलाफ न तो एकजुट होने देती है और न ही उन्हें आवाज उठाने देती है ! हमारे देश में दरिद्र व्यक्ति धर्म की गुलामी करता है और अमीर व्यक्ति धर्म को अपना गुलाम बना लेता है ! भगवान् कृष्ण ने बहुत सही कहा है कि सब धर्मों को छोडो और केवल एक सर्वव्यापी परमात्मा का स्मरण करते हुए सुख से जीवन जियों ! सबसे बेहतर तो यही हैं कि सुप्रीम कोर्ट सरकार को ‘तीन तलाक’ के खिलाफ कानून बनाने का आदेश दे और संसद कानून बनाये ! ये जरुरी है कि तलाक का मख़ौल उड़ाने वालों को समुचित सजा मिले !

sadguruji के द्वारा
October 27, 2016

ऑल इंडिया मुस्‍लिम वीमेंस पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्‍यक्ष शाइस्‍ता अंबर के विचार भी दकियानूसी और मुस्लिम औरतों का कोई भला करने वाले नहीं हैं ! तीन तलाक से पीड़ित मुस्लिम औरतों का दुखदर्द समझने वाले सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के खिलाफ बोलते हुए वे कहती हैं कि तीन तलाक के मामले पर केंद्र सरकार मुसलमानों और देश को गुमराह कर रही है ! हमारी लड़ाई यह है कि लगातार तीन बार बोले गए तलाक को एक माना जाए ! हम तीन तलाक के मामले में बदलाव तो चाहते हैं, लेकिन वो बदलाव शरीयत के दायरे में हों, न कि कोर्ट या किसी सरकार के जरिए !

sadguruji के द्वारा
October 27, 2016

शाइस्ता अंबर साफ कहती हैं कि सरकार बेवजह तीन तलाक के मामले में दखल दे रही है ! मजहब के मामले में हमें किसी की भी दखलंदाजी पसंद नहीं ! शाइस्ता अंबर जी आप अपने स्तर से कभी बदलाव नहीं कर पाएंगी ! ऑल इंडिया मुस्‍लिम वीमेंस पर्सनल लॉ बोर्ड एक एनजीओ भर ही है, जिसे अधिकतर मुस्लिम महिलाएं जानती तक नहीं हैं ! आपकी इस बात से सहमत नहीं कि कोर्ट और सरकार को शरीयत के मामले दखल नहीं देना चाहिए ! उसे हर मामले में दखल देने का पूरा अधिकार है ! सबसे बड़ी बात ये कि भारत में शरई कानून लागू नहीं हैं, अतः उसे तूल देने का कोई तुक नहीं हैं !

sadguruji के द्वारा
October 27, 2016

बीएमएमए की सह-संस्थापक नूरजहां सफिया नियाज़ कहती हैं, ‘तीन बार तलाक कहने से तलाक होने से बहुत सारी महिलाएं परेशान हैं. फोन पर तलाक हो रहे हैं, वॉट्सऐप पर हो रहे हैं और जुबानी तो हो ही रहे हैं. एक पल में महिला की जिंदगी पूरी तरह से बदल जाती है. जुबानी तलाक एक गलत प्रथा है और महिलाओं के सम्मान के लिए इसे खत्म करना जरूरी है. आप औरतों को कोई वस्तु नहीं समझ सकते. सोचिए ये सब 21वीं सदी में हो रहा है. यहां एक विधि सम्मत कानून की जरूरत है. जो कानून हैं, उनमें सुधारों की जरूरत है.’

sadguruji के द्वारा
October 27, 2016

जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्रा लुबना सिद्दीकी का कहना है, ‘हमारे देश में एक साथ तीन तलाक की जो व्यवस्था है और पर्सनल लॉ बोर्ड ने जिसे मान्यता दी है वो पूरी तरह कुरान व इस्लाम के मुताबिक नहीं है. कुरान में तीन महीने में तलाक की व्यवस्था की गई है. पुरुषवादी समाज ने तलाक की पूरी व्यवस्था को अपनी सहूलियत के हिसाब से बना दिया है. इसमें कुरान के मुताबिक संशोधन की सख्त जरूरत है.’

sadguruji के द्वारा
October 27, 2016

अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला का कहना है, ‘इस्लाम में तलाक की इजाजत है पर यह जरूरी नहीं है. ऐसी बहुत सी इजाजते हैं लेकिन जरूरी नहीं कि उनका उपयोग किया ही जाए. तलाक को पैगंबर ने भी अच्छा नहीं माना है. उन्होंने इसे नजरअंदाज करने को कहा है. वैसे भी एक बार में तीन तलाक का जिक्र कुरान में नहीं है. तो यह अपने आप खारिज हो जाता है.’

sadguruji के द्वारा
October 27, 2016

उत्तर प्रदेश की पहली महिला काजी हिना जहीर नकवी ने भी तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है. उन्होंने कहा, ‘मैं तीन तलाक की कड़े शब्दों में निंदा करती हूं. यहां तक कि कुरान में इस तरह का कोई निर्देश नहीं दिया गया, जिससे मौखिक तलाक को बढ़ावा दिया जाए. यह कुरान की आयतों का गलत मतलब निकाला जाना है. इसने मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है.’

sadguruji के द्वारा
October 27, 2016

शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्‍ता मौलाना यासूब अब्‍बास कहते हैं, ‘इस देश में दाल में नमक ज्‍यादा होने, खाना खराब बनाने, शौहर के दोस्‍त से हंसकर बात कर लेने पर भी मर्द तीन तलाक कह के तलाक दे दे रहे हैं। इसमें औरत की कोई सुनवाई नहीं है, इसलिए सरकार ने जिस तरह सती प्रथा को प्रतिबंधित करने के लिए कानून बनाया था, उसी तरह इसे भी कानून बनाकर प्रतिबंधित करे।’

sadguruji के द्वारा
October 27, 2016

कुरान में तीन तलाक नहीं है, फिर यहां क्‍यों लागू है…? कुरान में मर्द-औरत को बराबर कहा गया है और मुस्लिम शादी एक करार है। फिर इसमें दोनों को बराबर अधिकार क्‍यों नहीं..? शिया एक साथ तीन तलाक नहीं मानते। क्‍या वे मुस्लिम नहीं हैं..? कई मुस्लिम देशों में तीन तलाक पर पाबंदी है। फिर यहां इस पर पाबंदी क्यों नहीं लग सकती…? देश के संविधान में मर्द-औरत बराबर हैं। फिर ये संविधान विरोधी चलन कैसे लागू है…? यह एक तरफा और प्राकृतिक न्‍याय के खिलाफ है। फिर कैसे लागू है..?

sadguruji के द्वारा
October 27, 2016

भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सह-संस्थापक जकिया सोमान ने कहा, ‘‘विधि आयोग ने सिर्फ तीन तलाक की बात नहीं कही है। उसने हिंदू महिलाओं के संपत्ति के अधिकार और ईसाई महिलाओं के तलाक से संबंधित मामलों की भी बात की है। इसलिए आयोग पर सवाल खड़े करना अनुचित है।’’ जकिया ने आरोप लगाया, ‘‘पर्सनल लॉ बोर्ड में बैठे लोग मुसलमानों के प्रतिनिधि नहीं हो सकते। यह बोर्ड महज एक एनजीओ है और देश में हजारों एनजीओ हैं। इसलिए इनकी बात को मुस्लिम समुदाय की बात नहीं कहा जा सकता। मुझे लगता है कि इनका रूख धार्मिक नहीं बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक है।

sadguruji के द्वारा
October 27, 2016

सामाजिक कार्यकर्ता और स्तंभकार नाइश हसन ने कहा, ‘‘इन लोगों की सोच कट्टरंपथी है। शाह बानो के समय भी इन लोगों ने सरकार पर दबाव बनाया था और आज भी वैसा ही करने का प्रयास कर रहे हैं। हमारी मांग है कि सरकार इनके दबाव में नहीं आए।’’ नाइश ने कहा, ‘‘अब महिलाएं झुकने वाली नहीं है। वे हक लेकर रहेंगी। हम सरकार और अदालत के स्तर से पूरी मदद की उम्मीद कर रहे हैं। तीन तलाक की प्रथा का खत्म होना जरूरी है।’’ केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से कहा हैं कि वो तीन तलाक के पक्ष में नहीं है क्योंकि ये महिलाओं से समानता का अधिकार छीनता है और ये नाइंसाफी है।

sadguruji के द्वारा
October 27, 2016

कुछ रोज पहले जीन्यूज पर प्रसारित एक चर्चा में सामाजिक कार्यकर्ता नाइश हसन ने निकाह हलाला को रेप करार दिया. उन्होंने कहा कि तलाक देने के बाद एक मर्द अपनी पूर्व पत्नी से कहता है कि जाओ पहले अपना रेप करा के आओ, तब स्वीकार करूँगा. चर्चा में शामिल मौलानाओं ने इस बात का जोरदार विरोध किया. उनका कहना था कि निकाह हलाला मर्द को दी गई एक मानसिक सजा है. जबकि सच्चाई ये है कि निकाह हलाला की सजा सिर्फ और सिर्फ ओरत ही भोगती है. निकाह हलाला वो प्रथा है जिसमें पुरुष एक महिला को तलाक दे देता है ताकि महिला का पूर्व पति उससे फिर शादी कर सके.

Anjii के द्वारा
November 5, 2016

Stay inafmrotive, San Diego, yeah boy!

sadguruji के द्वारा
November 5, 2016

आदरणीय महोदय ! ब्लॉग पर आपका स्वागत है ! पोस्ट की सराहना करने और ब्लॉग पर आकर प्रतिक्रिया देने के लिए सादर धन्यवाद !


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