सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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नरेन्द्र मोदी व डोनाल्ड ट्रम्प के 'ट्रंप कार्ड' कितना सफल रहे? जंक्शन फोरम

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किसी अति महत्वपूर्ण उद्देश्य में सफल होने के लिए इस्तेमाल किया जाना वाला सबसे शक्तिशाली और असरकारक विकल्प ट्रम्प कार्ड या तुरुप का पत्ता कहलाता है. मोदी सरकार द्वारा कालेधन पर लगाम लगाने की कोशिश पिछले कई महीनों से चल रही थी, किन्तु ये कोशिश 500 और 1000 रुपये के नोट अचानक ही बन्द कर इस तरह से अमल में लाई जायेगी, इसकी कल्पना तक राजनीतिक दलों, बैंकों और आम जनता ने नहीं की थी. इस योजना की सबसे बड़ी खासियत ही यही है कि किसी को भी इसकी भनक तक नहीं लग पाई और काला धन रखने वालों को इसे खपाने का बहुत ज्यादा मौका भी नहीं मिला. प्रधानमंत्री मोदी के इस ट्रंप कार्ड से आम जनता, दुकानदारों और व्यवसायियों को कुछ रोज परेशानी जरूर होगी, किन्तु इस कार्यवाही के फायदे बहुत हैं.

सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि आतंकी कामों में लगाए जाने वाले पैसे पर नकेल कसेगी. भारत में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों को देने के लिए और भारतीय अर्थव्यवस्था को चौपट करने के लिए पाकिस्तान में छपने वाली फर्जी भारतीय करेंसी अब रद्दी का टुकड़ा बन जायेगी. पाकिस्तान में छपने वाले फर्जी नोट के सहारे भारत में वर्षों से जारी नकली नोट का धंधा और हवाला कारोबार बंद होगा, जिससे सीमा पर होने वाली आतंकी घुसपैठ और कश्मीर घाटी में बेरोजगार युवाओं को रूपये देकर सुरक्षा बालों पर कराई जाने वाली पत्थरबाजी में कमी आएगी. 500 और 1000 रुपये के नोट देकर सबसे ज्यादा काला धन प्रॉपर्टी में खपाया जा रहा था, जिससे इसकी कीमतें बढ़कर आसमान छू रही थीं. ब्लैक मनी पर लगाम कसने से अब प्रॉपर्टी के रेट काम होंगे. आम आदमी का अपना घर होने का सपना अब ज्यादा आसानी से पूरा होगा.
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भ्रष्टाचार पर अंकुश लगने और सरकार को टैक्स का सीधा लाभ मिलने से सड़क, अस्पताल, पुल-पुलिया, शौक्षणिक संस्थानों एवं विकास कार्यों के निर्माण में तेजी आएगी. देश में कैशलेस सुविधाओं में इजाफा होगा और ऑन लाइन कारोबार अब और अधिक पारदर्शिता व् तेजी के साथ बढ़ेगा. करप्शन पर सीधी रोक एवं निगरानी होने से मंदी से उबरने में भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत मदद मिलेगी और बेरोजगार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना भी बढ़ेगी. मुद्रा बैंक और बैंक कारोबार में वृद्धि होनी भी निश्चित है. पीएम मोदी ने नोट पर लगाम लगाने का फैसला कर बेशक एक बहुत बड़ा ट्रम्प कार्ड खेला या तुरुप का पत्ता चला, किन्तु कुछ नकारात्मक ख़बरें भी मिल रही हैं, जिसपर मोदी सरकार को ध्यान देकर अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह से लगाम कसनी होगी.

8 नवम्बर को मोदी सरकार ने जैसे ही 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा की, काले धन के कुबेरों ने उसी रात को अपनी काली कमाई को बड़े सोने व्यापारियों से सांठगांठ कर सोने में कन्वर्ट कर लिया. काले धन को पीला करने का ये खेल अब भी जारी है. सोने के भाव में अकस्मात ही कई हजार का आया उछाल इस बात का बहुत बड़ा प्रमाण है. मीडिया में छपी एक और नेगेटिव खबर के अनुसार कर्नाटक के कोलार में स्थानीय नेताओं ने पांच सौ और हजार के नोट बंद होने के बाद गांव के गरीब लोगों के लिए एक ‘लोन मेला’ आयोजित किया, जिसमे उन्होंने अपनी नेताओं वाली कुटिल चालाकी दिखाते हुए बहुत से गरीब लोंगो को 500 और 1000 रूपये के बन्द हो चुके अमान्य नोट 3-3 लाख रुपए के लोन के रूप में यह कहकर बांटे हैं कि उन्हें ये रूपये बाद में नए नोट के रूप में वापस करने होंगे.
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केंद्र सरकार के बड़े नोटों पर हुए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद देशभर के राजनीतिक दलों और उनके प्रमुखों के हाथ पांव फूल गए हैं. सब जानते हैं कि भारत में प्रदेश और देश लेबल के चुनाव काले धन से लड़े जाते हैं. पंजाब और उत्तर प्रदेश में, जहाँ अगले साल चुनाव होने हैं, वहां पर बहुत से प्रत्याशियों की शारीरिक, मानसिक और आर्थिक हालत बहुत ज्यादा ख़राब हो गई है. टिकट पाने के लिए और चुनाव लड़ने के लिए जो राशि 500 और 1000 रुपये के नोट के रूप में एकत्रित की थी, अब वो कागज़ के टुकड़ों में बदल गई है. बैंक में ढाई लाख से ज्यादा जमा करने पर टैक्स, जुर्माना और आयकर विभाग द्वारा की जाने वाली पूछताछ का भी सामना करना पड़ सकता है. यही वजह है कि नेता अब टेंशन में हैं. उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा है कि कई करोड़ की राशि को वो अब बैंक में कैसे शो करें?

उधर अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप का अमेरिका को फिर से महान बनाने का राष्ट्रवादी ट्रम्प कार्ड चल गया और अमरीकी राष्ट्रपति के तौर पर उनके चुने जाने के अब व्हाइट हाउस में ‘ट्रंप कार्ड’ के चलने की तैयारियां जोरशोर से शुरू हो चुकी है. वर्तमान राष्‍ट्रपति बराक ओबामा 20 जनवरी 2017 तक इस पद पर बने रहेंगे. ओबामा की विदाई इसके बाद ही होगी. वो अपने नए घर में जायेंगे और ट्रंप सत्ता संभालेंगे. डोनाल्ड ट्रंप को बधाई देते हुए बस यही कहूंगा कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के समय न्यू जर्सी में भारतीय समुदाय के बीच कही गई अपनी इस बात को नहीं भूलें कि ‘अगर मैं राष्ट्रपति बना तो भारत अमेरिका का बेस्ट फ्रेंड बनेगा.’ भारत को अदभुत बताते हुए ट्रंप ने कहा था कि ‘मैं 19 माह पहले भारत गया था और कई बार वहां जाना चाहता हूं.’ उन्होंने यह भी कहा था कि वो राष्ट्रपति बनने के बाद मोदी की तरह से काम करना चाहते हैं. देंखे अब डोनाल्ड ट्रंप क्या करते है और आतंकवाद से निपटने में भारत का कितना साथ देते हैं.

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आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106
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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
November 11, 2016

जय श्री राम एक साथ भारत और अमेरिका में क्रांतिकारी कदम उठाये .देश में मोदीजी ने ५००-१००० रु के नोट बंद करके काले धन की खतम करने की दिशा में एक बहुत सही कदम सवित होगा १-2 लोग लोगो को तकलीफ होगी पर सब टीक हो जाएगा इससे लोगो से ज्यादा नेता और घूसखोर और बेईमान लोग दुखी है वही अमेरिका ने ट्राम को राष्टपति चुन कर आतंकवादियो की नीद उड़ा दी कुछ विरोध हुआ लेकिन जनता का फैसला लागू होगा और उम्मीद है देश के लिए अच्छा होगा.आज पुरे विश्व में ये ही प्रमुख समाचार है सद्गुरुजी आपने बहुत अच्छी व्याख्या विश्लेषण किया.

sadguruji के द्वारा
November 11, 2016

देशहित में नोटबंदी का कठोर और अत्यंत साहसिक निर्णय लेने और उसे क्रियान्वित करने के साथ ही सरकार को आम जनता को परेशानी से बचाने के लिए कुछ बेहद जरुरी उपाय भी करना चाहिए था ! दो दिन के लिये सरकारी और गैर सरकारी सभी अस्पतालों को पुराने नोट लेना अनिवार्य कर देना चाहिये था और देशभर मे दो दिन का अवकाश भी घोषित कर देना चाहिये था ! लोगों को थोड़ी कम परेशानी होती !

sadguruji के द्वारा
November 11, 2016

अर्थशास्त्रियों के अनुसार बड़े नोटों को बंद करना जरुरी था, क्योंकि 1000 रुपये के 109% नोट सर्कुलेशन से अधिक थे अर्थात 1000 रुपये के दुगुने से भी अधिक नोट नकली चल रहे थे, जो पाकिस्तान मे छपे थे ! इसी तरह से 500 रुपए के 76% नोट सरकार द्वारा जारी नोटों से अधिक थे ! अब आप खुद ही सोचिये कि काले धन पर रोक हेतु 500 और 1000 रुपये को बदलना कितना जरूरी था !

sadguruji के द्वारा
November 11, 2016

देशभर में प्रतिदिन करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये का औसतन लेनदेन होता है, लेकिन, इनमें से महज 20 फीसदी लेनदेन ही बैंकिंग सिस्टम के जरिए होता है ! बहुत से अवैध लेनदेन का कहीं कोई हिसाब किताब ही नहीं रखा जाता है ! बहुत सा काला धन और नकली रुपया पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई, आतंकियों, नक्सलवादियों और अपराधियों के पास इकट्ठा हो उनका सबसे खतरनाक हथियार बन चुका था !

sadguruji के द्वारा
November 11, 2016

एक आर्थिक आंकड़े के अनुसार देश की करीब 78 फीसदी आबादी दिन में महज 20 रुपये ही खर्च करती है ! इन लोगों को बड़े नोटों की जरूरत नहीं होती है ! देश की ये 78 फीसदी आबादी ईमानदार और मेहनत मजदूरी करने वाली है ! इस दृष्टि से विचार करें तो सरकार की ओर से 500 और 1000 रुपये के नोटों को बैन करने का सरकार का फैसला बिलकुल उचित लगता है !

sadguruji के द्वारा
November 11, 2016

विचार मंच ‘अर्थक्रांति’ से जुड़े अनिल बोकिल ने इकॉनमी में ब्लैक मनी को खत्म करने के लिए मोदी जी को कुछ सुझाव दिए थे, जिसमे से एक सुझाव बड़े करंसी नोटों को बंद करने का भी था ! मोदी जी से मिलने के लिए 9 मिनट का समय उन्होंने समय माँगा था, लेकिन जब वार्तालाप शुरू हुआ तो दो घंटे तक ये चलती रही !

sadguruji के द्वारा
November 11, 2016

पीएम मोदी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं ! सबसे बड़ी चोट चुनाव के समय टिकट बेचने व खरीदने तथा धन के बल पर चुनाव लड़ने वाले दलों और नेताओं पर की है ! ये चोट बेहद जरुरी थी, क्योंकि सबसे ज्यादा कला धन चुनाव में ही खपाया जाता है ! बहुत से अमीर लोग नेता बनकर अपने काले धन को सफ़ेद कर लेते हैं !

sadguruji के द्वारा
November 11, 2016

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! सादर अभिनन्दन ! आपसे सहमत हूँ कि भारत और अमेरिका दोनों देशों में पिछले कुछ रोज में बेहद क्रांतिकारी कदम उठाये गए हैं ! अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प का राष्ट्रपति चुना जाना और भारत में पीएम मोदी का बड़े नोटों की नोटबंदी का एलान ! भारत में पीएम मोदी अनेक क्षेत्रों में एक नई क्रांति ला रहे हैं. अब देखना है कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प क्या करते हैं ! भारत को ‘बेस्ट फ्रेंड’ बनाने का वादा निभाते हैं या नहीं ! पोस्ट कि सराहना के लिए हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
November 11, 2016

मीडिया में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुरुवार को अपने चार हजार रुपए बदलने दिल्ली के संसद मार्ग स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच पहुंचे. वो आम लोंगों कि दिक्कत समझने गए थे, किन्तु हँसते मुस्कुराते हुए सेल्फी देते रहे और मीडिया में छाने के लिए गंभीर होने की एक्टिंग भी करते रहे. वो बैंक वालों पर आरोप लगाने लगे कि मुझे देख लोंगो को अंदर बुला लिया गया. राहुल गांधी के इस कार्यक्रम पर भाजपा के प्रवक्ता अनिल बलूनी ने कहा, ‘राहुल गांधी कालेधन से परेशान हैं. आज तक गांधी परिवार का कोई सदस्य बैंक नहीं गया है. ये रॉयल परिवार से ताल्लुक रखने वाले राहुल गांधी को बैंक पहुंचने की क्या जरूरत है?’

sadguruji के द्वारा
November 11, 2016

सब जानते हैं कि शिवसेना केंद्र और महाराष्ट्र सरकार में शामिल है. भाजपा का सहयोगी दल होते हुए भी वो विपक्ष की भाषा बोल रही है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि पीएम मोदी का नोट बैन का फैसला आम जनता के खिलाफ है. आम जनता को भड़काने वाली बात उन्होंने कही कि नोट बैन पर मोदी सरकार अपनी तारीफ करते हुए कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक कह रही है लेकिन अगर गुस्साए और परेशान लोगों ने मोदी सरकार पर ही सर्जिकल स्ट्राइक कर दी तो फिर क्या होगा. सच कहा गया है कि जिसके ऐसे सहयोगी या मित्र हों, उन्हें किसी दुश्मन की जरुरत नहीं है.

jlsingh के द्वारा
November 12, 2016

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! आपने पुनः मोदी जी को सर्वगुण संपन्न साबित कर दिया. भारत के इतिहास में या काम से काम ७० साल के इतिहास में कम से कम एक ब्यक्ति तो सबसे अलग है! भगवान राम, कृष्ण, बुद्ध आदि को भी सब लोग उनके समय में कहाँ पहचान पाए थे. मोदी जी को भी लोग बाद में अवश्य भगवान मान लेंगे. उनकी बुद्धिमत्ता और चमत्कारिक निर्णय लेने की क्षमता को बधाई है. हाँ कुछ लोग अवश्य बेवजह टी वी चिल्ला रहे हैं या कहें शोर मैच रहे हैं. बैकों या ATM के सामने लाइन में खड़े रहने वाले भी सभी सामान्य जान मोदी जी के इस कदम की भूरी भूरी प्रशंशा कर रहे हैं. अब वे लोग क्या करें जिनके भाग्य में कष्ट लिखा है. बड़ी मुश्किल से बेटी की शादी ठीक हुई. पैसे निकाल कर घर में रक्खे थे. उन्हें ये पता होना चाहिए था की कभी भी यह पैसा काला हो सकता है. मरनेवाले भी मोदी विरोधी ही होंगे जो इन्ही दिनों मर रहे हैं. अच्छा हो रहा है की उनके लिए कफ़न भी नशीब नहीं हो रहा. कोई तो मदद करता उन्हें… पर मानवता आज मर चुकी है. … अलबत्ता राहुल गाँधी के अलावा किसी छुटभैये नेता को भी बैंकों की लाइन में नहीं देखा गया. कितने संपन्न हैं ये लोग ! भाजपा के किसी नेता के पास काला धन तो है ही नहीं… ये सभी चुनाव रैलियां सफ़ेद धन से ही करते होंगे. मोदी जी की सभाओं में भीड़ भी ऐसे ही चली आती है… आप समझ रहे होंगे मेरी बात! अब बहुत सारे मंदिरों मस्जिदों का क्या होगा? जो भी होगा छह ही होगा. सादर!

jlsingh के द्वारा
November 12, 2016

जो भी होगा अच्छा ही होगा… आभासी खुशी भी खुशी ही होती है… सादर!

sadguruji के द्वारा
November 12, 2016

आदरणीय सिंह साहब ! ब्लॉग पर आपका और आपके विचारों का स्वागत है ! मेरे विचार से नोट बंदी का निर्णय बिल्कुल सही और ऐतिहासिक है ! कालाधन यदि राजनीतिक दलों, धार्मिक स्थलों और बहुत से लोंगो के पास है तो उसे भजाने के लिए आखिर में वो बैंक ही तो जाएंगे ! कालाधन कहीं भी हो, उजागर तो होगा ही ! टैक्स के रूप में सरकार को भारी आय भी होगी ! सीमापार से आ रहे फर्जी नोट और आतंक में कमी आएगी ! देश की साख बढ़ेगी ! रही बात कफ़न और शादी की तो दोनों ही जारी है ! कहीं कुछ रुका नहीं है ! मेरे पास इस माह होने वाली शादियों के कई निमन्त्रण पत्र हैं ! मैंने उनसे पूछ कि नोटबंदी से शादी में दिक्कत हो रही होगी ? उन्होंने कहा थोड़ी दिक्कत तो है, पर चेक सब लोग ले रहे हैं ! शादी के वास्ते जो रूपये घर में रखे थे, वो अपने खाते में जमा कर दिए ! देश की जनता इन दिनों जो थोड़े से लेकर बहुत तक कष्ट झेलकर राष्ट्रहित में जो तपस्या कर रही है, वो अनुपम और अद्वितीय है ! उन्हें कोटि कोटि नमन ! केवल जिसकी सुरक्षा पर लाखों रूपये खर्च होते हों और जिसके दैनिक खर्च का कोई हिसाब न हो वो राहुल गांधी चार हजार रूपये के लिए लाइन में खड़े होकर सेल्फी देते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, मीडिया को एक ब्रैकिंग न्यूज देते हैं और ये सब ड्रामा कर अपमान महल में चले जाते हैं ! कभी किसी लाश पर राजनीति तो कभी सरकार की किसी अच्छी घोषणा पर भी राजनीति ! जनता उनकी इन सब हरकतों से ऊब चुकी है, इसलिए उनकी गतिविधियों को गंभीरता से नहीं लेती है ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
November 12, 2016

आदरणीय सिंह साहब ! सादर हरिस्मरण ! निश्चित रूप से भारत में जो कुछ भी अब हो रहा है या होगा, देश के हित में अच्छा ही होगा ! देश के विपक्षी नेताओं का हाल ये है कि कुछ नोटबंदी का रोना रो रहे है तो दूसरी तरफ दिग्विजय सिंह जैसे बुजुर्ग नेता पीएम मोदी का मख़ौल उड़ाने में बीजी हैं जो जापान से ऐतिहासिक परमाणु समझौता करने में व्यस्त थे ! देश की जनता ही उन्हें सही जबाब देगी ! ब्लॉग पर समय देने के लिए हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
November 12, 2016

आरबीआई के अनुसार 8 नवंबर से लेकर 22 नवंबर तक 4,000 रुपये तक के पुराने 500 और 1000 के नोट बदले जा सकते हैं, उसके बाद इस फैसले की समीक्षा कर नोट बदलवाने की सीमा बढ़ाई जा सकती है ! इसे लेकर भी लोंगो में भ्रम की स्थिति है ! मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आरबीआई की वेबसाइट पर अधिकतर लोग बस इसी सवाल का जबाब जानना चाह रहे हैं कि प्रतिदिन 4,000 रुपये तक के पुराने नोट बदलवाए जा सकते हैं या नहीं ? इस बात को लेकर लोंगो में काफी भ्रम की स्थिति है ! जिनका बैंक में खाता नहीं है, उनके लिए क्या नियम है, यह भी स्पष्ट नहीं है !

sadguruji के द्वारा
November 12, 2016

मीडिया में प्रकाशित समाचारों के अनुसार 8 नवंबर से लेकर अगले 15 दिनों तक यानी 22 नवंबर तक केवल 4000 रुपये तक के ही पुराने नोट बदलवाए जा सकते हैं ! जिनका बैंक में खाता नहीं है वे भी पहचान पत्र दिखाकर 4 हजार रुपये तक की राशि एक बार में बदलवा सकते हैं ! किन्तु हर रोज आप 4000 रुपये तक के पुराने नोट नहीं बदलवा सकते हैं ! 22 नवंबर के बाद इसकी समीक्षा कर नोट बदलने की सीमा बढ़ाई जा सकती है ! एटीएम से 2 हजार रुपये प्रतिदिन प्रति एटीएम कार्ड से निकलवाए जा सकते हैं ! इस महीने की 19 तारीख के बाद 4 हजार रुपये प्रतिदिन प्रति एटीएम कार्ड से निकाले जा सकेंगे !

Shobha के द्वारा
November 13, 2016

श्री सद्गुरु जी मोदी जी का अपना कहने के नाम पर देश वासी हैं लगता है मोदी जी वह कर जाएंगे भारतीय इतिहास में सोने के अक्षरों में उनका नाम लिखा जाएगा कितनी भी परेशानी हो काले धन और नकली नोटों पर ऐसा प्रहार गजब अब कश्मीर में पत्थर बाज भी नजर नहीं आ रहे क्योकि पत्थर बाजी पर ५०० का करार नॉट मिलता था ट्रम्प से अमेरिका का एक वर्ग नाताज है |

sadguruji के द्वारा
November 14, 2016

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आप सही कह रही हैं कि अब रुपया लेकर सुरक्षा बालों पर पत्थर फेंकने वाले पत्थरबाज भी कश्मीर से गायब हो गए हैं ! निश्चित रूप से यह नोटबंदी का ही असर है ! पीएम मोदी ने बड़े नोट बंद कर ऐतिहासिक और युग युग तक अपने असाधारण कार्यों से जीवित रहे वाला कार्य किया है ! सादर आभार !

Jitendra Mathur के द्वारा
November 16, 2016

आपकी टिप्पणी बिलकुल ठीक एवं ज़मीनी सच्चाई को सामने लाने वाली है आदरणीय जवाहर जी । प्रधानमंत्री को तो जनता की पीड़ा का कोई आभास होता दिखाई नहीं दे रहा । उनके अंध-समर्थकों की असंवेदनशील अभिव्यक्तियां भी पीड़ित निर्धन एवं निम्न-मध्यम वर्ग के लिए घाव पर नमक सरीखी ही हैं । आदरणीय सद्गुरु जी ने तो कह ही दिया है - जाके पाँव न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई ?

sadguruji के द्वारा
November 16, 2016

आदरणीय जितेंद्र माथुर जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! शहर में कई दिन घूमकर मैंने भी देख है ! लोग नकदी के लिए परेशान हैं, लेकिन पीएम मोदी के फैसले से खुश भी हैं ! हाथ में स्याही लगने की बात आते ही बैंकों पर लगने वाली लंबी लाइन छोटी हो गई है ! जाहिर सी बात है कि भलेभाले गरीब मजदूरों के सहारे कालाधन सफ़ेद करने वालों पर कुछ तो रोक लग ही गई है ! आज भले पीएम और उनके समर्थक आपको अंधभक्त लगें, लेकिन कुछ समय पश्चात जब महंगाई कम होगी, लोन सस्ते होंगे और भ्रष्टाचार कम होगा तो श्याद आपको भी अच्छा लगे ! सादर आभार !


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