सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

467 Posts

5103 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15204 postid : 1296463

नोटबंदी से मुसलमान भाई भी परेशान हैं, पर हो रही है वोट बैंक की राजनीति

  • SocialTwist Tell-a-Friend

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नोटबंदी के खिलाफ आजकल देश के अलग-अलग हिस्सों में धरना दे रहीं हैं. लखनऊ की तर्ज पर 30 नवम्बर को उन्होंने पटना के गर्दनीबाग इलाके में नोटबंदी के खिलाफ विरोध रैली की. ये जानते हुए भी कि मोदी सरकार अब अपना फैसला वापस नहीं ले सकती है, वो देश के विभिन्न राज्यों की राजधानियों में धरना और रैली कर नोटबंदी के फैसले को रद करने की मांग कर रहीं हैं. हालाँकि उनकी अब तक की दोनों रैलियां फ्लॉप शो ही साबित हुई हैं, फिर भी नोटबन्दी के विरोध के बहाने उनका मोदी विरोध जारी है. पटना की रैली में तो उन्होंने मोदी के साथ साथ नोटबंदी का समर्थन करने वाले नितीश कुमार पर भी अप्रत्यक्ष रूप से करारा वार किया. उन्होंने उनका नाम लिए बिना कहा कि जो नोटबंदी का समर्थन नहीं कर रहे हैं वे गद्दार हैं.

बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार से ममता बनर्जी की नाराजगी की कुछ और वजहें भी थीं. वो नितीश कुमार से पहले से ही खफा थीं, क्योंकि उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव के विपरीत बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसी कैबिनेट मंत्री को उनकी आगवानी के लिए नहीं भेजा था. नीतीश कुमार ने ममता बनर्जी के साथ मंच सांझा न करने का एक संवैधानिक तर्क दिया था कि जिस कानून पर राष्ट्रपति हस्ताक्षर कर चुके हों उसका विरोध करना गलत होगा. इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्‍पष्‍ट कर दिया था कि उनकी पार्टी का कोई भी वरिष्‍ठ नेता ममता बनर्जी के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होगा. लालू यादव पहले नोटबंदी का विरोध किये, फिर नितीश कुमार से मुलाक़ात के बाद नोटबंदी का समर्थन किये और फिर ममता बनर्जी से भेंट होने के बाद एक फिर पाला बदलते हुए पटना में नोटबंदी के खिलाफ ममता बनर्जी द्वारा आयोजित विरोध रैली का समर्थन किये.

phpThumb_generated_thumbnail

तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले से आम जनता को काफी परेशानी हो रही है. ऐसे में वो और उनकी पार्टी केंद्र सरकार के इस फैसले खिलाफ देशभर में धरना देकर अपना विरोध जता रही हैं. नोटबंदी के फैसले से देशभर में आम जनता को निसन्देह कहीं थोड़ी तो कहीं ज्यादा परेशानी हो रही है, विपक्ष लोंगों को नोटबंदी के खिलाफ भड़काने का पूरा प्रयास कर रहा है, लेकिन उसके वावजूद भी नोटबंदी के मुद्दे पर देश की अधिकतर जनता पीएम मोदी के साथ पूरी तरह से डटकर खड़ी है. नोटबंदी के बाद देशभर में हुए उपचुनाव तथा महाराष्ट्र और गुजरात में हुए नगर निकायों के चुनावों में भाजपा को मिली बड़ी जीत इस बात का पुख्ता प्रमाण है.

अब सवाल यह उठता है कि ममता बनर्जी किस जनता की परेशानी की बात कर रही हैं और किसको खुश करने के लिए देशभर में नोटबंदी के विरोध के बहाने धरना प्रदर्शन कर रही हैं. दरअसल ममता बनर्जी की नज़र पश्चिम बंगाल के उन 28 फ़ीसदी मुसलमानों को खुश करने और अपने पक्ष में किये रहने पर है, जिनके समर्थन से वह 2016 के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत हासिल की हैं. कांग्रेस का कहना है कि मुसलमान नोटबंदी से ज्यादा परेशान हैं, क्योंकि सूद को हराम समझने की वजह से ज्यादातर मुसलमान बैंक अकाउंट नहीं रखते हैं. कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति करते हुए जो चाहे कहे, लेकिन बड़ी संख्या में बैंकों की लाइनों में खड़े मुस्लिम मर्द और औरतें उनकी बात को झुठला रहे हैं. हालांकि कैश पर व्यापार करने वाले मुस्लिम व्यापारी नोटबंदी से काफी परेशान हैं.

अभी कुछ रोज पहले लखनऊ में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने नोटबंदी को मुसलमानों से जोड़ते हुए कहा कि नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर मुसलमानों पर पड़ रहा है. कांग्रेस के नेता अब नोटबंदी को धर्म विशेष से जोड़कर मुसलमानों को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं. चाहे मुलायम सिंह हों, मायावती हों, ममता बनर्जी हों, अरविन्द केजरीवाल हों, राहुल गांधी हों या फिर लालू यादव सब के सब नोटबंदी का विरोध इसी बात का विशेष रूप से ध्यान रखते हुए कर रहे हैं कि आजकल नोटबंदी के कारण देश के मुसलमान सबसे ज्यादा परेशान हैं. ये बात किसी से छुपी नहीं है कि ये सब लोग सन 2019 में देश का प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं और लोकतंत्र में ऐसा सपना देखने का सबको अधिकार भी है, किन्तु ऐसा लग रहा है कि ये लोग आगे चलकर नितीश कुमार को विपक्ष का सर्वमान्य पीएम उम्मीदवार नहीं मानेंगे.

ऐसा नहीं है मोदी सरकार या आरबीआई का ध्यान उन मुसलमान भाइयों की ओर नहीं है, जो तहेदिल से शरीयत को मानते हैं. आरबीआई ने बैंकों में ‘इस्लामिक विंडों’ खोलने का प्रस्ताव रखा है. उम्मीद है कि भविष्य में शरीयत के अनुकूल यानि ब्याज मुक्त बैंकिंग व्यवस्था जरूर शरू होगी. देश के मुसलमान भाई महज अफवाह और काल्पनिक भय के कारण तथाकथित सेक्यूलर पार्टियों को वोट देते हैं और गरीबी व अज्ञानता से भरी जिंदगी जीते हैं. सुरक्षा के नाम पर आखिर कब तक देश के मुसलमान भाई तथाकथित सेक्यूलर पार्टियों के हाथों ब्लैकमेल होते रहेंगे? हिन्दू हों या मुस्लिम या कोई अन्य भाई सभी को देश का संविधान पूरी सुरक्षा देता है.

2016_11$largeimg02_Nov_2016_200338383

देश के प्रधानमंत्री चाहे मोदी रहें या फिर कोई और, उन्हें देश का संविधान मानना ही पडेगा. विपक्ष द्वारा मुसलमानों को मोदी का भय दिखाना एक शिगूफा या अफवाह भर है. मुसलामानों के तमाम दूसरे मसलें हैं, जिनकी चर्चा विपक्षी दल तो क्या खुद मुसलमान बहुत कम करते हैं. कई साल पहले बीबीसी संवाददाता सुहैल हलीम का एक लेख पढ़ा था, “मुसलमानों को क्या चाहिए?” उस लेख की कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ. “जब कोई संप्रदाय, धर्म या बिरादरी चुनावों में किसी का साथ देती है, तो उसकी कुछ उम्मीदें और तमन्नाएं होती हैं. तो मुसलमान को क्या चाहिए? वो किस बुनियाद पर ये फ़ैसला करते हैं कि किसका साथ दें?” सालों पहले मेरे एक बुज़ुर्ग कहा करते थे कि, “मैंने भारतीय मुसलमान को कभी कोई युनिवर्सिटी, स्कूल या कॉलेज माँगते हुए नहीं देखा, कभी न ही वो अपने इलाक़े में अस्पताल के लिए आंदोलन चलाते हैं और न ही बिजली पानी के लिए, वो जानवरों तक का अस्पताल नहीं माँगते.”

“उन्हें चाहिए तो बस एक चीज़. लाउडस्पीकर पर मस्जिद से अज़ान देने की इजाज़त, जिसपर पर अक्सर सांप्रदायिक रुप से संवेदनशील शहरों में पाबंदी लगा दी जाती थी.” मेरे ख़्याल में बुनियादी तौर पर यह बात अब भी सच है. चाहे लाउडस्पीकर अब मुद्दा न हो, लेकिन मुसलमान अब भी अतीत में ही उलझे हुए हैं. भारत में तथाकथित सेक्यूलर पार्टियों को वोट देते हैं, सुरक्षा के नाम पर उनके हाथों ब्लैकमेल होते हैं, पाकिस्तान में शरीयत को लागू करने के लिए जान देते हैं, ऐसा क्यों है कि इसके सिवा हमें और कुछ नहीं चाहिए?” मुझे लगता है कि जनाब सुहैल हलीम के लेख की प्रासंगिता और सार्थकता आज भी वही है, जो कई साल पहले थी. मेरी भी यही राय है हिंदुस्तान के मुसलामानों को धार्मिक मसलों से ज्यादा तवज्ज़ो अपने तमाम दूसरे जरुरी मसलों पर देते हुए उसे सियासी नेताओं और केंद्र व राज्य सरकारों के सामने उठाने चाहिए. लेख पर ब्लॉगर मित्रों और कृपालु पाठकों के विचारों की प्रतीक्षा रहेगी.

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~



Tags:     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (11 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

26 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

RAJEEV GUPTA के द्वारा
November 30, 2016

आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, बहुत ही सारगर्भित लेख प्रस्तुत करने के लिए आपका हार्दिक आभार एवं अभिनन्दन. मुसलमानो की एक समस्या यह भी है कि पाकिस्तान से जितना भी नकली धन छप-छप कर भारत में आ रहा था, वह इन्ही लोगों के मार्फ़त पूरे देश में पहुँचाया जा रहा था. जहां हमारे विपक्षी नेता काले धन के सौदागर बने हुए थे, मुसलमान लोग नकली धन के सौदागर बने हुए थे. अब जब नकली धन का भारत में आना ही बंद हो गया तो इनके पेट में तो दर्द होगा ही. इन लोगों की पोल खोलने के लिए एक बार फिर से आपका हार्दिक आभार.

rameshagarwal के द्वारा
November 30, 2016

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरु जी बहुत सार्थक लेख मुसलमानों को मौलवियों ने इस्लामिक शिक्षा के नाम पर अपना गुलाम बना रक्खा है इसलिए वे पिछड़े है पिछले ७० साल से उन्हें हिन्दू. आरएसएस और बीजेपी का दर दिखा कर वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते ये सेक्युलर कहलाने वाले नेता वोटो के लिए देश भी बेच दे, शर्म आती ऐसे नेताओं पर ममता तो कह रही की मोदी को हटाने तक उनका स्दंगार्ष चलता रहेगा उसे भी मालूम ये नहीं हो सकता लेकिन अपने प्रदेश के जेहाडियो को खुश करने के लिए ऐसा कह रही तही लालू की तो उसका कोइ सिद्धांत नहीं कायदे से उसे सक्रिय राजनीती से दूर रखना चाइये. सुन्दर लेख के लिए आभार.

sadguruji के द्वारा
December 1, 2016

ममता बनर्जी पूरे देश को ही पश्चिम बंगाल न समझें, जहाँ पर डर के मारे उनके खिलाफ कोई कुछ बोल नहीं पता है ! पश्चिम बंगाल में ‘भारत बंद’ की असफलता ने ये साबित कर दिया है कि नोटबंदी के मुद्दे पर जनता उनके साथ नहीं है ! नोट बंदी के खिलाफ बोलने से तो यही लग रहा है कि ममता बनर्जी साफ तौर पर कालेधन और भ्रष्टाचार को समर्थन दे रही हैं ! अब उनकी साफ सुथरी इमेज को लेकर जनता कंफ्यूज हो चुकी है और उनका असली चेहरा पहचानने की कोशिश कर रही है !

sadguruji के द्वारा
December 1, 2016

ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जैसे नेता जनता की आँखों में धूल झोंककर अब लम्बे समय तक अपनी ‘डर्टी पॉलिटिक्स’ जारी नहीं रख पाएंगे ! हर बात में आजादी और लोकतंत्र की दुहाई देने वाले इन नेताओं की अपनी स्वयं की ही पार्टी में आजादी और लोकतंत्र का कोई वजूद नहीं है ! पार्टी में इनकी हैसियत एक तानाशाह जैसी ही है ! सही हो या गलत, ये जो कहें बस वही सही है ! इनको सत्ता और राजनीति से बाहर निकालने के लिए जनता को खुद आगे बढ़कर अपना अनमोल योगदान देना चाहिए !

sadguruji के द्वारा
December 1, 2016

पटना के गर्दनीबाग में नोटबंदी के खिलाफ धरना देने पहुंचीं ममता बनर्जी ने नोटबंदी का समर्थन करने वाले बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर अपत्यक्ष रूप से जोरदार हमला करते हुए कहा, ‘जो पार्टियां नोटबंदी के मुद्दे हमारा समर्थन कर रही हैं, मैं उन्हें शुक्रिया अदा करती हूं और जो समर्थन नहीं कर रहे हैं वे गद्दार हैं!’ ममता बनर्जी का ऐसा कहना किसी तानाशाही से कम नहीं है कि ‘नोटबंदी पर जो लोग उनका समर्थन नहीं कर रहे हैं, वे गद्दार हैं’, ! क्या नीतीश कुमार उनके गुलाम हैं, जो उन्हें गद्दार कह रही हैं !

sadguruji के द्वारा
December 1, 2016

कोलकाता में नोटबंदी के खिलाफ आयोजित एक रैली में ममता बनर्जी ने कहा, ‘मैं संकल्प लेती हूं कि चाहे जीवत रहूं या मरूं, लेकिन पीएम मोदी को सत्ता से हटा कर रहूंगी !’ देश की जनता ने भी 2019 में देश की सत्ता फिर से मोदी को सौपने का संकल्प कर लिया है ! ममता बनर्जी ने कहा, ‘मैं तब तक नहीं रुकूंगी, जब तक कि इस निर्णय को वापस नहीं ले लिया जाता है !’ ममता बनर्जी धरना देने का अपना फ्लॉप शो चाहें तो जारी रखें, किन्तु अब मोदी सरकार नोटबन्दी का निर्णय वापस नहीं लेगी !

sadguruji के द्वारा
December 2, 2016

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नोटबंदी के पक्ष में कुछ रोज पहले जबर्दस्त बयान दिया था ! उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं से कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब ऐसे शेर की सवारी कर रहे हैं, जो उनके गठबंधनों को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन उनके इस कदम के पक्ष में ज़ोरदार समर्थन है, और हमें उस समर्थन का सम्मान करना चाहिए ! नीतीश कुमार शायद यह संकेत देने में लगे हैं कि तीन साल पहले सत्रह साल पुराना याराना छोड़ चुके जेडीयू और बीजेपी फिर साथ आने वाले हैं !

sadguruji के द्वारा
December 2, 2016

नीतीश कुमार प्रधानमंत्री से इस बात का आग्रह भी कर रहे हैं कि वो बेनामी जायदाद रखने वालों पर भी कार्रवाई करें, जहां काले धन को बड़ी मात्रा में खपाया जाता है ! नोटबंदी के विरोध के मुद्दे पर मुद्दे पर समूचे विपक्ष से अलग रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार बार यही कह रहे हैं कि विमुद्रीकरण को लेकर उनका ‘पूरा समर्थन’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है ! हो सकता है कि उनपर हावी होने की कोशिश कर रहे लालू यादव को दिया गया ये कोई संकेत हो !

sadguruji के द्वारा
December 2, 2016

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बिहार के मुख्यंत्री नीतीश कुमार के बीच राजनीतिक सम्बन्ध लगातार ख़राब होते जा रहे हैं ! पटना की रैली में ममता बनर्जी ने इशारों-इशारों में ही नीतीश कुमार को ‘गद्दार’ कह डाला ! इसकी प्रतिक्रिया स्वरुप जेडी(यू) के सांसद हरिवंश ने कहा है कि बंगाल घोटालेबाजों का लगातार गढ़ बनता जा रहा है ! उन्होंने कहा कि बंगाल में गरीबों के हजारों करोड़ रुपये लूटने के लिए चिट फंड का जाल बिछाया गया ! तृणमूल पार्टी के नेता भी ठगी की उन वारदातों से जुड़े रहे !

sadguruji के द्वारा
December 2, 2016

मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिम बंगाल के कुछ टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती को लेकर राज्य की सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है ! ममता बनर्जी ने इसकी तुलना ‘आपातकाल’ से करते हुए इसे ‘सैन्य तख्तापलट’ तक करार दे दिया ! जल्द ही ममता बनर्जी के इस नाटक का पटाक्षेप भी हो गया, जब सेना ने इसे रूटीन एक्सर्साइज बताया और उन्होंने स्थानीय प्रशासन व पुलिस को यह अभ्यास करने से पहले ही सूचित कर दिया था !

sadguruji के द्वारा
December 2, 2016

सोचने वाली बात यह है कि यह एक्सर्साइज सेना अकेले नहीं बल्कि स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कर रही है ! बंगाल एरिया के जीओसी मेजर जनरल सुनील यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टीएमसी के सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि यह एक रूटीन एक्सर्साइज है जो सेना के परिचालन संबंधी उद्देश्यों के लिए किया जाता है ! विभिन्न राज्यों के सभी एंट्री पॉइंट्स पर सेना सिर्फ भारी वाहनों के डेटा इक्ट्ठा कर रही है ! इसी तरह का एक्सर्साइज इससे पहले यूपी, बिहार और झारखंड में भी हुआ था !

sadguruji के द्वारा
December 2, 2016

अब लोंगो की समझ में यह बात आ रही है कि पिछले कुछ दिनों से ममता बनर्जी ने मोदी सरकार के खिलाफ नोटबन्दी के विरोध के बहाने इतना आक्रामक रुख क्यों अपना रखा था ? उन्होंने मोदी के खिलाफ ‘करो या मरो’ सरीखा अभियान क्यों छेड़ रखा था ? बीजेपी कह रही है कि नोटबंदी की वजह से ममता को इतना नुकसान पहुंचा है कि उन्होंने अपना दिमागी संतुलन खो दिया है ! किन्तु सच बात तो यह है कि ममता बनर्जी बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ने से राज्य में उसे अपने सीधे कंपटीटर के तौर पर देख रही हैं !

sadguruji के द्वारा
December 3, 2016

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! पोस्ट की सराहना के लिए हार्दिक आभार ! नकली धन पर रोक तो अब जरूर लगी है, लेकिन काला धन बहुत अधिक मात्रा में सफ़ेद हो चुका है ! यह चिता की बात है ! आपका सुझाव सही था कि बिना ख़ाता खोले पुराने 4000 के नोट न बदलें जायें ! हेराफेरी खूब हुई है ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
December 3, 2016

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट को पसंद कर उसे सार्थकता प्रदान करने के लिए धन्यवाद ! आपकी बात सही है कि पीएम मोदी को परेशान करने के लिए ममता बनर्जी किसी से भी हाथ मिलाने को तैयार हैं ! उनकी तानाशाही पूर्ण, अवसरवादी और घटिया राजनीति का कोई नैतिक सिद्धांत नहीं है ! पीएम मोदी के लिए चिंता की कोई बात नहीं ! देश की 90 फीसदी जनता उनके साथ है ! प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद !

Shobha के द्वारा
December 4, 2016

श्री आदरणीय सद्गुरु जी ममता दी का ड्रामा बंगला देश से नकली नोटों की खेप आती है मालदा में क्या हो रहा है दी को खबर नहीं है है लखनऊ भी तमाशा करने पहुंची थी गिने चुने लोग थे पटना में भी गयीं | कितना भी कष्ट क्यों न हो हमें मोदी जी के कदम में सहयोग करना चाहिए |नाके पर सेना को देख कर ऐसे बिफरी कहा सेना तख्ता पलट करने आई है इतना ही उन्हें भारतीय संविधान का ज्ञान है |

sadguruji के द्वारा
December 4, 2016

पश्चिम बंगाल के टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती के मुद्दे पर अन्तोगत्वा मंमता बनर्जी को मुंह की खानी पड़ी और 36 घंटे बाद राज्य सचिवालय ‘नाबन्ना’ में धरना देने का ड्रामा खत्म कर अपने घर चलीं गईं ! ममता बनर्जी बंगाल में सेना के ‘सालाना अभ्यास’ को तख्तापलट की साजिश बता सचिवालय में ही धरने पर बैठ गईं थीं ! वो महज एक राज्य की मुख्यमंत्री भर हैं, किसी देश की प्रधानमंत्री नहीं, जिसका तख्तापलट हो जाएगा ! सेना को अभ्यास करने से रोकना देश और सेना दोनों का ही अपमान है !

sadguruji के द्वारा
December 4, 2016

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नोटबंदी से हो रही लोगों की परेशानी को मुद्दा बनाकर पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और मोदी को परेशान करने के लिए दिल्ली से लेकर पटना तक एक कर किया. यही नहीं, बल्कि उन्होंने मोदी विरोधियों को एकजुट करने की कोशिश भी की ! वो राष्ट्रपति भवन गईं, जंतर-मंतर पर धरना दीं और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के साथ आजादपुर सब्जी मंडी में रैली भी कीं ! इतनी कसरत करने के बाद भी जो साथ नहीं आया उसे गद्दार कह दिया !

sadguruji के द्वारा
December 4, 2016

कोलकाता स्थित एनएससीबीआई हवाईअड्डे पर बुधवार को निजी एयरलाइन कंपनी का एक विमान आधे घंटे से अधिक समय तक शहर के आसमान में चक्कर लगाता रहा, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सवार थीं ! उस प्लेन की हुई इमरजेंसी लैंडिंग को जान से मारने की साजिश बताकर तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने संसद में जमकर हंगामा भी किया ! बाद में सच्चाई पता चली कि पटना से कोलकाता जाने वाली इंडिगो फ्लाइट की सामान्य लैंडिंग हुई थी, एयर ट्रैफिक की वजह से फ्लाइट को होल्ड किया गया था !

sadguruji के द्वारा
December 4, 2016

ममता बनर्जी ने मोदी के खिलाफ गोलबंदी में अपने धुर-विरोधी लेफ्ट तक से हाथ मिला लिया ! ममता बनर्जी की मोदी से नाराजगी की वजह क्या है, इसके राजनीतिक गलियारों में कयास लागायें जा रहे हैं ! तमाम विपक्षी दल अपना अस्तित्व बरकरार रखने के लिए मोदी पर वार कर रहे हैं, किन्तु कोई भी विपक्षी नेता ममता बनर्जी जितनी आक्रामकता से मोदी का विरोध नहीं कर रहा है ! राजनीतिक हलकों में आश्चर्य इस बात का भी जाया जा रहा कि खुद ममता बनर्जी भी मोदी के किलाफ पहले कभी इतनी आक्रामक नहीं दिखीं !

sadguruji के द्वारा
December 4, 2016

मोदी विरोध कि पहली वजह यह बताई जा रही है कि अन्य देशवासियों की तरह बंगाल की जनता ने भी नोटबंदी के ऐलान का जोरदार स्वागत किया था, तब ममता बनर्जी चुप थीं, लेकिन हफ्ते भर बाद कैश की किल्लत से जब बहुत से लोगों को परेशानी होने लगी तो वो अपने गुस्से का इजहार करने लगे ! ममता बनर्जी ऐसे ही लोंगो की प्रतिनिधि बनकर केंद्र सरकार के प्रति अपने सूबे की दस से बीस फीसदी जनता के गुस्से और निराशा को भुनाने की कोशिश में जुट गईं !

sadguruji के द्वारा
December 4, 2016

ऐसा लग रहा है कि ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में आकर 2019 के चुनाव में बतौर पीएम उम्मीदवार अपने को पेश करने की कोशिश में हैं ! विपक्षी दलों को एकजुट कर उनका सर्वमान्य नेता बनने की कोशिश में हैं ! यही वजह है कि उनकी तानाशाही पूर्ण छतरी के तले न वालों को वो गद्दार कह रही हैं ! 2019 का लोकसभा चुनाव आते आते विपक्ष इतने खेमों में बात जाएगा कि उसका कोई एक पीएम उम्मीदवार ढूंढना असम्भव कार्य हो जाएगा ! नितीश कुमार तो अभी से अपनी अलग राह चुन चुके हैं !

sadguruji के द्वारा
December 4, 2016

ममता बनर्जी अपने राज्य में अपना मजबूत जनाधार खो रही हैं, उनके गुस्से की सबसे बड़ी वजह यही है ! कितने आश्चर्य की बात है कि पश्चिम बंगाल में अब ये स्थिति होती जा रही है कि बंगाल में लेफ्ट फ्रंट का जनाधार सिमटता जा रहा है और तृणमूल कांग्रेस को कोई टक्कर दे सकता है तो वो है भारतीय जनता पार्टी ! पश्चिम बंगाल में किसान, मजदूर, कर्मचारी और व्यापारी वर्ग ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बीजेपी को वोट इस बात को सही सिद्ध किया था !

sadguruji के द्वारा
December 4, 2016

ममता बनर्जी नितीश कुमार से भी नाराज चल रही हैं और अपना गुस्सा मोदी पर उतार रही हैं ! पटना कि फ्लॉप रैली में उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से नितीश कुमार की आलोचना करते हुए उन्हें गद्दार तक कह डाला ! राजनीति के पण्डित ऐसा मान रहे हैं कि नितीश कुमार और ममता बनर्जी के वास्तव में प्रतिद्वंदिता आगामी लोकसभा चुनाव से पहले किसी संभावित तीसरे मोर्चे का सर्वमान्य नेता बनने या चुनाव के बाद बनने वाले किसी गठबंधन का मुखिया बनने पर है, ताकि पीएम बना जा सके !

sadguruji के द्वारा
December 4, 2016

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! पोस्ट की सराहना के लिये धन्यवाद ! आपकी बात सही लगती है की ममता दी को अपने वोट बैंक की चिंता है और अब वह नोट बंदी का सहारा ले कर नेशनल लीडर बनने के चक्कर मे हैं ! सादर आभार !

Bhola nath Pal के द्वारा
December 6, 2016

आदरणीय साद गुरु जी ! मोदी ,ममता ,माया ,मुलायम सिंह एक ही राशि के हैं फिर भी कहाँ राजा भोज कहाँ ……अच्छा लेख सदर …

sadguruji के द्वारा
December 7, 2016

आदरणीय भोला नाथ पाल जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने ने भी क्या खूब कहा है कि मोदी ,ममता ,माया ,मुलायम सिंह एक ही राशि के हैं फिर भी कहाँ राजा भोज कहाँ गंगा तेली ! वास्तव में ही मोदी कि तुलना वर्तमान के किसी बी नेता से नहीं कि जा सकती है ! प्रतिक्रया देने हेतु धन्यवाद !


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran