सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

467 Posts

5103 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15204 postid : 1300883

एक दूसरे की मदद से लोग अपना कालाधन सफ़ेद कर लिए- जागरण फोरम

  • SocialTwist Tell-a-Friend

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

“हिंदुस्तानी किसी भी देश में जायँ और कितने भी पढ़े लिखे हों, लेकिन हर जगह भ्रष्टाचार करते हैं. हर जगह बेईमानी करते हैं. लानत है..” अवैध करंसी एक्सचेंज में बैंक शामिल’ शीर्षक से छपे एक समाचार पर एक प्रबुद्ध पाठक कौशल किशोर जी ने ये टिप्पणी की थी. अधिकतर हिंदुस्तानियों के आचार विचार पर इस तरह की टिपण्णी पढ़ने में बुरी तो लगती है, किन्तु सौ फीसदी सच है. इस बात में कोई संदेह नहीं कि मोदी सरकार द्वारा की गई नोटबंदी देश के उज्जवल भविष्य के लिए एक बेहद क्रांतिकारी और सकारात्मक पहल थी, किन्तु ज्यादातर हिंदुस्तानियों के दिलों में घर कर लिया भ्रष्टाचार नोटबंदी के मूल उद्देश्य को ही तहस नहस कर दिया. चाहे कालाधन रखने वाले अमीर लोग हों या फिर थोड़ा बहुत पुराने नोट रखे तेजतर्रार आम लोग, सब अपने रिश्तेदार, परिचितों से लेकर तमाम पब्लिक यूटिलिटी वाली जगहों जैसे, हवाई अड्डे, रेलवे, बिजली विभाग, टोल नाके, पेट्रोल पम्प, बैंक, गैस एजेंसी और एटीएम में पैसा डालने वाली कंपनियों तथा अवैध करंसी के एक्सचेंज में शामिल कमीशन एजेंटों की मदद से अपना कालाधन सफ़ेद कर लिए.

मेरे ख्याल से देश में अब कालेधन का एक बड़ा हिस्सा 500 और 1000 के नकली नॉट के रूप में ही शेष बचा है. देश में कुछ लोग जो पीएम मोदी को दिन रात नोटबंदी के लिए गाली दे रहे हैं, उसकी मूल वजह इस तरह का कालाधन अब न भज पाना है. एक कहावत है कि ‘हमाम (स्नानघर) में सभी नंगे हैं.’ नोटबंदी वाला हमाम कुछ ऐसा ही साबित हुआ. इस हमाम में सबसे ज्यादा नग्न राजनीतिक दल और नेता हुए. नेताओं के दागदार चरित्र का दोहरापन देखिये कि पूरे जोरशोर से नोटबंदी का विरोध करने वाले राजनीतिक दल भी इस काले कारोबार में शामिल थे. कुछ रोज पहले इंडिया टुडे ने कालेधन के दलालों का एक बड़ा स्टिंग आपरेशन किया था, जिसमे बीजेपी को छोड़कर देश की लगभग सभी प्रमुख पार्टियों कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा, जनता दल यूनाइटेड और एनसीपी के नेताओं को खुलेआम 30 से 40 प्रतिशत तक कमीशन पर पुराने नोटों को बदलने की बात करते हुए कैमरों में कैद किया था. आश्चर्य की बात ये थी कि जनता चार हजार रूपये बदलवाने को परेशान थी और ये नेता दस करोड़ का कालाधन कमीशन पर बदलने को तैयार थे.
msid-56056348,width-400,resizemode-4,currency.jpg
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कालेधन की राजनीतिक दलों द्वारा दलाली का स्टिंग आपरेशन टीवी पर देश की जनता को दिखाए जाने के बाद से वो सभी नेता अब मुंह छुपाये फिर रहे हैं और मीडिया से बात करने तथा उनके सवालों के जवाब देने को तैयार नहीं हैं. अब जबाब दें भी तो किस मुंह से. चुनाव आयोग को भी अब इस अहम् सवाल का जबाब ढूंढना होगा कि क्या भ्रष्ट होना ही भारत में नेता बनने के लिए न्यूनतम योग्यता है? राजनीतिक भ्रष्टाचार के बढ़ने का यही आलम रहा तो एक दिन चिराग ले के देशवासियों को ढूंढना पडेगा कि हमारे देश में पीएम मोदी के अलावा और कोई ईमानदार नेता है भी या नहीं? राहुल गांधी और अरविन्द केजरीवाल राजनीतिक कारणों से पीएम मोदी पर निजी भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाते भर रहे हैं, किन्तु वो साबित नहीं कर पाए. राहुल गांधी पीएम मोदी का निजी भ्रष्टाचार उजागर कर भूकम्प लाने वाले थे, किन्तु अगस्ता हेलीकॉप्टर घोटाले की आंच अपने परिवार की ओर आते देख उनकी बोलती बंद हो गई. अरविन्द केजरीवाल मुस्लिमों को खुश करने के लिए मोदी पर बेतुके आरोप लगाते रहते हैं.

ममता बनर्जी भी अरविन्द केजरीवाल की तरह मोदी को मुस्लिम विरोधी साबित करने की कोशिश करते हुए हमेशा मोदी विरोधी सुर अलापती रहती हैं. दरअसल उनकी असल चिता पश्चिम बंगाल के लगभग 30 प्रतिशत मुस्लिम वोटरों को अपने पक्ष में किये रहने की है, किन्तु उनका ये खेल ज्यादा दिन नहीं चलने वाला है. देश के मुसलमान देर सबेर जरूर जागरूक होंगे. वो भी हिंदुओं की तरह ही इस देश के स्वतन्त्र नागरिक हैं, फिर किसी दल विशेष की गुलामी क्यों करें? वो भी जिसे चाहें, उसे वोट देंगे. मुस्लिम औरतें भी अब अपनी स्वतन्त्रता और अधिकारों के लिए जागरूक हो रही हैं. तीन तलाक के मुद्दे पर जिस तरह से मोदी सरकार का वो समर्थन कर रही हैं, उससे कई राजनीतिक दलों की नींद उड़ चुकी है. मोदी विरोधी नेता देशभर में एक अफवाह ये भी उड़ा रहे हैं कि नोटबंदी से व्यापारी नाराज हैं और अब वो भाजपा को वोट नहीं देंगे. मेरी कई व्यापारियों से बात हुई. वो साफ़ कहते हैं कि मोदी से कुछ नाराज जरूर हैं, लेकिन बीजेपी का साथ नहीं छोड़ेंगे. उनकी कुछ मांगे हैं, जिसके पूरा होने पर वो खुश हो जाएंगे और डिजिटल ट्रांजैक्शंस को भी अपना लेंगे.
images
पीएम मोदी से आखिर आप क्या चाहते हैं? ये सवाल पूछने पर व्यापारी अपने मन की बात होंठों पर लाते हैं, “व्यापारी तो यही चाहते हैं कि जो थोड़ा बहुत उनके पास कैश है, उसे रहने दिया जाए और अब आयकर की सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर 4 से 6 लाख के बीच कर दी जाए, हम खुश हो जाएंगे. अपने दूकान और प्रतिष्ठानों पर हम स्वेप मशीनें लगाने को तैयार हैं. अगले साल से हम एक नंबर से और पूरी ईमानदारी से काम करेंगे.” केंद्र सरकार को व्यापारियों से बात करनी चाहिए और उनकी उचित मांगों को मान लेना चाहिए. देश की जनता कैशलेश सिस्टम को स्वीकार करने की कोशिश कर रही है. हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था के कैशलेश होने में अभी कई साल लगेंगे. देशभर में बड़ी संख्या में लोग पेमेंट के लिए ई-वॉलिट यूज करने लगे हैं, लेकिन उसमे कुछ परेशानियां भी सामने आ रही हैं. कई महिलाओं ने ई-वॉलिट पेटीएम से पेमेंट करने के बाद अपने मोबाइल पर अनजान कॉल और अश्लील मेसेज आने की शिकायत पुलिस थाने में की है. लोंगो के ई-वॉलिट से नंबर लेकर कुछ दुकानदार मोदी विरोधी मेसेज भी भेज रहे हैं.

इस देश में हर सुविधा का सदुपयोग कम दुरूपयोग ज्यादा होता है. पुलिस की जांच से पता चला है कि कॉल और इन्टरनेट फ्री होने के कारण कुछ लोग जियो सिम का दुरूपयोग महिलाओं को परेशान करने में कर रहे हैं. वो न सिर्फ अनजान काल कर रहे हैं, बल्कि वॉट्सऐप पर अश्लील मैसेज भी भेज रहे हैं. जियो कंपनी को इस ओर तुरन्त ध्यान देना चाहिए और महिलाओं से छेड़खानी करने के लिए दुरूपयोग किये जा रहे सिमों को शिकायत मिलते ही फ़ौरन ब्लॉक कर देना चाहिए. नोटबंदी के बाद से देश की जनता धीरे धीरे मोदी सरकार के कैशलेस कॉन्सेप्ट को अपना रही है, हालाँकि इसमें हैकर्स के हमले का खतरा भी है. यही वजह है कि रिजर्व बैंक ने कुछ रोज पहले नोटिफिकेशन जारी कर सभी प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट्स कंपनियों को अपने सिक्यॉरिटी सिस्टम का स्पेशल ऑडिट कराने को कहा है. डिजिटल ट्रांजैक्शंस तेजी से अपना रही देश की जनता को मनचलों और हैकर्स से पूर्णतः सुरक्षा मिलनी ही चाहिए, नहीं तो लोग इससे दूर भागेंगे. अंत में कुछ ज्वलन्त सवाल कि जनता तो कैशलेश हो रही, नेता कब होंगे? राजनीतिक दलों के दफ्तरों में स्वेप मशीनें कब लगेंगीं?

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 4.88 out of 5)
Loading ... Loading ...

8 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
December 20, 2016

श्री आदरणीय सद्गुरु जी अबकी बार आप ब्लॉग पर देर से दिखाई दिए भारतीय मानसिकता रही है धन संग्रह करो यही वजह थी विदेशी हमलावर आते लूट कर ले जाते हम फिर अगली लूट के लिए जोड़ने लगते बड़ी हैरानी हुई जब व्यापारियों ने अपने समस्त कामगरों को बैंकों की लाइन में लगा दिया वह जमा भी करते निकालते भी सबसे बड़ी हैरानी तब हुई जब कुछ बैंक वालों ने ही कमिशन खा कर काले को सफेद करने लगे |बहुत अच्छा इंसानी मानसिकता को जताता लेख

sadguruji के द्वारा
December 22, 2016

आश्रम मे आने वाले व्यापारियों से बातचीत मे यह बात पता चली की वी क्या चाहते हैं ! व्यापारी कैशलेष व्यापार करने को तैयार हैं, किन्तु वो चाहते हैं आयकर की सीमा कम से कम चार लाख की जाये ! सरकार को इस मांग को मान लेना चाहिये ! महनगाई के इस युग मे एक परिवार को अच्छे ढंग से जीने के लिये कम से कम 30-35 हजार रुपये हर महीने चाहिये ! इस लिहाज से भी चार लाख तक इनकम टेक्स नही लगाना चाहिये ! ऐसा हो तो देश को 80 फीसदी जनता खुश हो जायेगी ! सरकार को इस ओर जरूर ध्यान देना चाहिये !

sadguruji के द्वारा
December 22, 2016

महनगाई के इस युग मे एक परिवार को अच्छे ढंग से जीने के लिये कम से कम 30-35 हजार रुपये हर महीने चाहिये ! इस लिहाज से भी चार लाख तक इनकम टेक्स नही लगाना चाहिये ! ऐसा हो तो देश को 80 फीसदी जनता खुश हो जायेगी ! सरकार को इस ओर जरूर ध्यान देना चाहिये ! प्रतिक्रिया देने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
December 22, 2016

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार टैक्स छूट की सीमा को ढाई लाख से बढ़ाकर चार लाख रुपए कर सकती है. इसका अर्थ हुआ कि जिन लोगों की सालाना आया 4 लाख रु. तक होगी, वे किसी भी प्रकार के इनकम टैक्स से बच जाएंगे. अभी तक के नियम के मुताबिक, ढाई लाख रु. की आमदनी करमुक्त है.

sadguruji के द्वारा
December 22, 2016

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार से 10 लाख रुपए तक की आमदनी के स्लैब में 10 फीसदी टैक्स लगाया जा सकता है और 10 से 15 लाख तक रुपए तक की आय पर 15 फीसदी टैक्स का प्रावधान किया जा सकता है. 15 से 20 लाख रुपए तक की आमदनी स्लैब में 20 फीसदी टैक्स का प्रावधान किया जा सकता है. जिनकी आय 20 लाख रुपए सालाना को पार कर जाएगी, उन पर 30 फीसदी टैक्स देने का प्रावधान लगाया जा सकता है.

sadguruji के द्वारा
December 22, 2016

वित्त राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने हाल ही में कहा था कि अधिक मूल्य वाले नोटों को चलन से बाहर किए जाने के परिणामस्वरूप आयकर दर के साथ-साथ ब्याज दरों में कमी आने की उम्मीद है. मंत्री ने कहा, ‘मैं हर चीज का खुलासा नहीं कर सकता, जो बजट का हिस्सा होगा, लेकिन ब्याज दरें कम होंगी. यह निश्चित तौर पर कम होगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि आगामी बजट में आयकर की दर में कमी आने की संभावना है. उन्होंने कहा, ‘आयकर में दो मामले हैं. छूट की सीमा और दूसरा स्लैब. दोनों ही मामलों पर गौर किया जाएगा.’

sadguruji के द्वारा
December 22, 2016

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोदी सरकार अगले साल 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इस साल आयकर स्लैब में छूट का तोहफा दे सकती है. हालांकि अभी इस बाबत केवल चर्चा, कयास और अटकलें ही सुनी जा रही हैं और सरकार की ओर से इस बाबत कोई पुष्टि नहीं की गई है.

sadguruji के द्वारा
December 22, 2016

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! लोंगो ने येनकेन प्रकारेण अपने कालेधन सफ़ेद कर लिए ! कड़वा सत्य है ! नोटबंदी से अब भविष्य में देंखेंकि देश को क्या लाभ होता है ! सादर आभार !


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran