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काशी विद्वत परिषद् का शास्त्रार्थ और शंकराचार्य का बयान हास्यास्पद- समीक्षा

Posted On: 12 Jan, 2017 Junction Forum में

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ज्योतिष शारदा पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने मंगलवार को कहा कि नोटबंदी का निर्णय शास्त्र और मनुस्मृति के सिद्धांतों विरुद्ध है, इसलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नोटबंदी का निर्णय वापस ले लेना चाहिए. शंकराचार्य का बयान कितना हास्यास्पद है, देश की समझदार जनता को ये बताने की जरुरत नहीं. सबलोग जानते हैं कि नोटबंदी की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है. ऐसे में प्रधानमंत्री जी को नोटबंदी का निर्णय वापस लेने की सलाह देना एक चुटकुला भर लगता है. दूसरी हास्यास्पद बात ये कि नोटबंदी का निर्णय शास्त्र और मनुस्मृति के सिद्धांतों विरुद्ध है. देश हमारे संविधान के आधार पर चल रहा है, शास्त्र और मनुस्मृति के सिद्धांतों के अनुसार नहीं, इसलिए ऐसी अतार्किक बातें कहना महत्वहीन और हास्यास्पद ही है. शंकराचार्य जी ने यह भी कहा कि काशी विद्वत परिषद् भी नोटबंदी के निर्णय के विरुद्ध है. सब जानते हैं कि काशी विद्वत परिषद् पर शंकराचार्य जी का वर्चस्व है और उन्ही की पहल पर केदार घाट स्थित उनके श्रीविद्यामठ में काशी विद्वत परिषद् से जुड़े विद्वानो ने शास्त्रार्थ का आयोजन किया.
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इस शास्त्रार्थ में काशी विद्वत परिषद् से जुड़े विद्वानो ने कहा कि विमुद्रीकरण देश हित में नहीं है. अवैध तरीके से जो धन अर्जित किया जाता है वही असित या आम बोलचाल की भाषा में काला धन है और इस प्रकार के धन को नोटबंदी से खत्म नहीं किया जा सकता है. काशी विद्वत परिषद् के विद्वानो का कहना है कि मनुस्मृति की व्यवस्था के अनुसार बैंकों में जमा जनता का पूरा धन यदि उन्हें वापस नहीं किया जाएगा तो पीएम मोदी दंड के भागी होंगे. सोचिये कितनी हंसी वाली बात है. नोटबंदी के बाद बैंकों में जो धन जमा हुआ है, वो अवैध तरीके से अर्जित नहीं किया गया है, इसका कोई पुख्ता प्रमाण क्या काशी विद्वत परिषद् के विद्वानो के पास है? बैंकों में जमा धान काला है या सफ़ेद, इस बात का निर्णय कौन करेगा, काशी विद्वत परिषद् या फिर केंद्र सरकार के संगठन, जैसे- आयकर विभाग, बैंक और आरबीआई? जाहिर सी बात है कि इस बात का निर्णय केंद्र सरकार के संगठनों को ही करना है. दूसरी बात ये कि हमारा देश क़ानूनी रूप से मान्यता प्राप्त एक संविधान के अनुसार चल रहा है, ऐसे में मनुस्मृति की मान्यता और महत्व ही क्या है?

शास्त्रार्थ के दौरान नोटबंदी के पक्ष में जिन ​विद्वानो ने अपने विचार रखे, उसे कोई महत्व नहीं दिया गया. उन्होंने नोटबंदी को देश की अर्थव्यवस्था के लिए हितकारी बताते हुए कहा कि 1000 और 500 के नोट के कारण देश में आतंकवाद और माओवाद बढ़ रहा था. कश्मीर में सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी में और देशभर में नक्सली हिंसा में आई भारी कमी इस बात का पुख्ता सबूत है. पाकिस्तान से नकली नोट की बड़ी खेप भारत के बाजारों में आने से देश की अर्थव्यवस्था भी डावाडोल हो रही थी. देशहित वाली इन बातों को कोई महत्व नहीं दिया गया. देशहित से ज्यादा कांग्रेस का हित सर्वोपरि हो गया. देश की जनता इस बात को अच्छी तरह से जानती है कि शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद जी हमेशा से ही कांग्रेस के प्रबल समर्थक रहे हैं और कांग्रेस भी उनका इस्तेमाल अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए कई दशकों से करती चली आ रही है. सच बात तो ये है कि नोटबंदी के खिलाफ कांग्रेस का विरोध और धरना-प्रदर्शन जब टॉय टॉय फिस्स हो गया तो इस तरह की धर्म पर आधारित राजनीतिक चालें चली जाने लगीं. जनता सबकुछ जानती है.
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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कांग्रेस की जनसंवेदना रैली में बोलते हुए कहा, “कुछ दिनों पहले मैं शिवजी की तस्वीर देख रहा था तो मैंने देखा कि शिव जी की पिक्चर में कांग्रेस का चुनाव का चिन्ह दिख रहा था. मैने सोचा बड़ी अजीब से बात है. फिर मैंने गुरू नानक जी की फोटो देखी उसमें कांग्रेस का चिन्ह, बुद्धा जी फोटो देखी उसमें कांग्रेस का चिन्ह, महावीर जैन जी की फोटो में कांग्रेस का चिंन्ह, हजरत अली जी की फोटों में कांग्रेस का चुनाव चिन्ह.” धर्म पर आधारित राजनीति करने वाला यह भाषण राहुल गांधी ने पूरे होशोहवास दिया. क्या चुनाव आयोग इस पर कोई कार्यवाही करेगा या फिर माननीय सुप्रीम कोर्ट इस ओर ध्यान देगी, जो धर्म-जाति पर आधरित राजनीति के खिलाफ हैं. विचित्र बात देखिये कि विभिन्न धर्मों के संतों के आशीर्वाद और कांग्रेस के चुनाव चिन्ह में राहुल गांधी को समानता दिख रही है. सब जानते हैं कि कांग्रेस का हाथ 1984 में गुरु नानक देव जी के अनुयायी हजारों निर्दोष सिखों के कत्लेआम से रंगा है. कांग्रेस यह भी न भूले कि श्री गुरु नानक देव जी ने मलिक भागो की रोटी हाथ में ले पंजे में से खून निकलता भी दिखाया था.

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आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106
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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
January 14, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी अपने अटपटे बयानों के लिए शंकराचार्य अक्सर विवादों में आते रहते हैं मनु स्मृति और नॉट बन्दी कितनी हास्यास्पद बात है और राहुल जी उनको पी के जो लिख कर देतें हैं वह बोल देते हैं अपना भाषण तो और भी उनके ज्ञान का बखान करता

sadguruji के द्वारा
January 16, 2017

राहुल गांधी ने जनवेदना सम्मेलन में कांग्रेस को सौ साल से भी ज्यादा पुरानी पार्टी बताते हुए कहा था कि कांग्रेस इतनी पुरानी पार्टी है कि आप शिवजी की तस्वीर से लेकर बुद्ध और महावीर की तस्वीर में भी कांग्रेस का चिन्ह देख सकते हैं. इसका अर्थ हुआ कि दुनियाभर के सारे संत महात्मा कांग्रेस के चुनाव चिन्ह का प्रचार करते रहे हैं? इसे राहुल गांधी की बाल बुद्धि ही कही जायेगी कि उन्हें आशिर्वाद और कांग्रेस के चुनाव चिन्ह में कोई अंतर नहीं दिखता है. ऐसे बाल बुद्धि वाले अनाड़ी नेता देश के लिए खतरनाक ही समझे जाएंगे. देश की सत्ता ऐसे लोंगों को सौपना खतरे से खाली नहीं है.

sadguruji के द्वारा
January 16, 2017

राहुल गांधी ने कहा था कि ये सारे भगवान अपनी तस्वीरों में कह रहे होते हैं कि डरो मत. वैसे ही कांग्रेस इस हालात में भी कह रही है कि आप सब डरो मत… डटे रहो. राहुल गांधी किसे उपदेश दे रहे हैं, खुद को या जनता को? जनता न कभी डरी है और न डरेगी. कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी को अपने अस्तित्व के मिटने का भय सता रहा है. प्रधानमंत्री मोदी के हार्थों में देश और देश की जनता दोनों सुरक्षित हैं. नोटबंदी के नाम पर जनता को भड़काने की कांग्रेस ने हरसंभव कोशिस की, लेकिन जनता के असहयोग ने उसे चारो खाने चित्त कर दिया.

sadguruji के द्वारा
January 16, 2017

राहुल गांधी के जनवेदना सम्मेलन में दिए बयान पर बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने इलेक्शन कमिशन में शिकायत की है. राहुल गांधी ने अपने बयान में शिवजी से लेकर बुद्ध और महावीर की तस्वीर में कांग्रेस के चिन्ह होने की बात कही थी. राहुल के इस बयान पर बीजेपी के डेलीगेशन का कहना है कि ये एक धार्मिक बयान है. ऐसे बयान देने पर राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. बीजेपी के डेलीगेशन ने कहा है कि राहुल गांधी का बयान रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट के प्रावधानों के खिलाफ है. इस बारे में चुनाव आयोग को शिकायत पत्र सौंपा गया है.

sadguruji के द्वारा
January 16, 2017

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले 30 सालों से कांग्रेस से जुड़े रहे और राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले कांग्रेस के प्रभावशाली नेता ठाकुर धीरेंद्र सिंह बीजेपी में शामिल हो गए हैं. यूपी चुनाव के लिए तैयारी कर रही कांग्रेस के लिए यह बहुत बुरी खबर है. कहा जाता है कि धीरेंद्र सिंह ही वो नेता हैं, जिन्होंने भट्टा पारसौल गांवों में अधिग्रहण को लेकर हुए आन्दोलन के समय राहुल गांधी को बाइक पर बिठाकर मौके पर पहुंचाया था. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ठाकुर धीरेंद्र सिंह यूपी कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता भी थे. ऐसे जमीनी नेताओं का कांग्रेस से दूर भागना अपने आप में ही बहुत कुछ कह रहा है.

sadguruji के द्वारा
January 16, 2017

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने ठीक कहा है कि अपने अटपटे बयानों के लिए शंकराचार्य अक्सर विवादों में आते रहते हैं ! किन्तु इससे लोग भ्रमित होते हैं ! आज देश को एक शाश्वत दर्शन की जरुरत है ! वो सन्मार्ग दिखा पाने में हिन्दू धर्मगुरु असफल रहे हैं !

sadguruji के द्वारा
January 26, 2017

हमारा देश क़ानूनी रूप से मान्यता प्राप्त एक संविधान के अनुसार चल रहा है, ऐसे में मनुस्मृति की मान्यता और महत्व ही क्या है?

sadguruji के द्वारा
January 26, 2017

धर्म पर आधारित राजनीति करने वाला यह भाषण राहुल गांधी ने पूरे होशोहवास दिया. क्या चुनाव आयोग इस पर कोई कार्यवाही करेगा या फिर माननीय सुप्रीम कोर्ट इस ओर ध्यान देगी, जो धर्म-जाति पर आधरित राजनीति के खिलाफ हैं.


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