सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

467 Posts

5103 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15204 postid : 1312180

मीडिया जगत और ब्लॉगर्स: जागरण जंक्शन मंच की समस्याएं, कमियां और सुझाव

Posted On: 5 Feb, 2017 Junction Forum में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

पॉवरफुल मीडिया जगत को ब्लॉगर्स और पाठकों के हितों के लिए चिन्तन करने पर मजबूर करना ही इस ब्लॉग को लिखने का मूल उद्देश्य है. भारत में इस समय मीडिया जगत की धूम मची हुई है. कागजों पर प्रकाशित होने वाली प्रिंट मीडिया बहुत पहले से ही इस देश में प्रभावी रही है. किन्तु अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चाहे वो टीवी चैनलों के रूप में हो या फिर इन्टरनेट से संचालित वेबसाइटों के रूप में हो, बीते एक दशक में अपना एक विशेष स्थान बना ली है. यही वजह है कि जो अखबार पहले प्रिंट मीडिया के रूप में थे, वो धीरे धीरे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के रूप में भी अपने को स्थापित कर लिए हैं. देश में इन्टरनेट की सुविधा बढ़ने और उसकी कीमत कम होते जाने के कारण बीते दस सालों सालों में सोशल मीडिया, जैसे फेसबुक और ट्विटर आदि पर लोंगों का रुझान करोड़ों की तादात में इतना जबरदस्त बढ़ा है कि प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अपने को सोशल मीडिया से गहराई से जोड़ ली हैं.

सोचने वाली बात यह है कि सोशल मीडिया पर बीते दस सालों में करोड़ों की तादात में जो लोग जुड़े हैं, उसकी मुख्य वजह क्या है? इस सवाल के जबाब में हम कह सकते हैं कि अभिव्यक्ति की आजादी ही सोशल मीडिया के फलने फूलने की मुख्य वजह है. प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अभिव्यक्ति के बाबत अपने को जबाबदेह और जिम्मेदार मानती है. यही वजह है कि वो अपने यहाँ तनख्वाह व पारिश्रमिक देकर प्रशिक्षित पत्रकारों और लेखकों की टीम रखती है. ये पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी लोग पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में विशेषज्ञ, जबाबदेह, जिम्मेदार और बेहद अनुभवी माने जाते हैं. जिस भी मीडिया जगत से ये लोग जुड़ते हैं, वो इनपर पूरा भरोसा करती है. मीडिया जगत पर यदि जनता के भरोसे की बात करें तो जनता उस समय तक मीडिया पर पूरा विश्वास और भरोसा करती थी, जबतक कि वो पैसे कमाने से ज्यादा सच बोलने के लिए और समाज व राष्ट्र की सेवा के लिए प्रयत्नशील तथा चर्चित रहा करती थी.

आज भी कुछ मीडिया समूह उसी राह पर चल रहे हैं, लेकिन ये भी ये भी एक कड़वी सच्चाई है कि आज के दौर में बहुत से मीडिया घराने सत्ता के सिपाही और बहुत से पत्रकार राजनीतिक दलों, केंद्र व राज्य सरकारों, मंत्रियों, अधिकारियों, दबंगों और अमीरों के दलाल बन चुके हैं. पत्रकारिता अब समाज के लिये कम और अपने सुख, सम्मान और घराने के लिए ज्यादा समर्पित हो चली है. यही वजह है कि आम आदमी का विश्वास और भरोसा मीडिया जगत पर कम हो गया है और सोशल मीडिया तथा ब्लॉग मंचों पर उसकी अभिव्यक्ति दिनोंदिन बढ़ती चली जा रही है. ऐसा नहीं है कि हमारे देश में ही ऐसा हो रहा है, सच तो यह है कि पूरी दुनिया का इस समय यही हाल है. आम आदमी की दबती आवाज सोशल मीडिया और ब्लॉग लेखन के माध्यम से मुखर हो रही है, जहाँ पर वो न सिर्फ लेखक और पत्रकार है, बल्कि संपादक भी है. किसी कवि ने सच्चे पत्रकार की परिभाषा देते हुए कहा है, ‘‘नाखुद रोता है ना ही किसी को रोने देता है. एक सच्चा पत्रकार एक बहुत अच्छी सरकार की तरह होता है.’’

पत्रकारिता का असली मकसद अपनी लेखनी से भ्रष्ट और गैरजिम्मेदार शासन की आलोचना करते हुए गरीब और आम आदमी के हक़ की लड़ाई लड़ना है तथा धार्मिक कट्टरपंथियो के विस्तार, हिंसक विचारों और उनके अंधविश्वासों के खिलाफ लड़ना है. पत्रकारिता की इन्ही कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए बांग्लादेश में कई ब्लॉगर शहीद हो चुके हैं और पाकिस्तान के सिंध व बलूचिस्तान प्रान्त में अपहरण के शिकार हो शासकों व सैनिकों के द्वारा दी जाने वाली मानसिक व शारीरिक यातना झेल रहे हैं. यूनाइटेड नेशन तथा इंटरनेशनल बार एसोशिएसन से सम्बद्ध अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन को इस ओर तुरन्त ध्यान देना चाहिए. मेरे विचार से ब्लॉगरों और पाठकों को भी सोशल मीडिया व ब्लॉग्गिंग मंचों पर इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता करने के जोश में बिना किसी ठोस सबूत, जबाबदेही और जिम्मेदारी के कुछ भी न लिखें ओर कोई भी गलत अफवाह न फैलाएं.

दुर्भाग्य से सोशल मीडिया ओर ब्लॉग्गिंग मंचों पर कुछ लोग ऐसा कर रहे हैं और कानूनी प्रपंच में फंस भी रहे हैं. यही वजह है कि सोशल मीडिया और ब्लॉग मंचों को क़ानूनी रूप से नियंत्रित करने की बात कही जा रही है, जो कुछ हद तक ठीक भी है, लेकिन इसकी आड़ लेकर बुद्धिजीवियों, ब्लॉगरों और पाठकों के होंठ एकदम सील दो, यह भी न्यायसंगत नहीं है. अब कुछ चर्चा उन ब्लॉग मंचों की करना चाहूँगा जो निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता करने के अच्छे उद्देश्य से बड़े मीडिया घरोनों द्वारा चलाए जा रहे हैं और उनके ब्लॉग्गिंग मंचों की अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान है. बहुत बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, ब्लॉगर ओर पाठक इन मंचों से जुड़े हुए हैं. हालाँकि पिछले कुछ सालों में बहुत से अच्छे लेखक निराश होकर इन मंचों को छोड़ भी चुके हैं, किन्तु मंच छोड़ने वालों से ज्यादा संख्या मंच से जुड़ने वाले नए ब्लॉगरों की है. इन मंचों की संचालन सम्बन्धी अपनी कुछ समस्याएं हैं, जिनकी चर्चा मुझे इस ब्लॉग में करनी चाहिए.

देश के प्रतिष्ठित हिंदी अखबार ‘दैनिक जागरण’ के ‘जागरण जंक्शन मंच’ की चर्चा करें तो यह निश्चित रूप से नए व पुराने लेखकों और पाठकों के लिए एक बहुत बेहतर लेखकीय प्लैटफॉर्म है. मंच पर पाठकों को आकर्षित करने के लिए व्यावसायिक दृष्टिकोण से काफी नए सुधार किये गए हैं. हालाँकि मंच का पुराना स्वरुप ब्लॉगरों को बहुत प्रिय था. इस मंच की सबसे अच्छी बात यह है कि यहाँ पर ब्लॉगर को लेखन के साथ साथ सम्पादन करने की भी पूरी छूट मिली हुई है. मंच की सबसे खराब बात का जिक्र करें तो ‘रीडर ब्लॉग’ के किसी भी लेख को पढ़ने के लिए खोलें तो लेख पढ़ना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि आधी से भी ज्यादा यानी आठ इंच में से चार इंच स्क्रीन नीली पट्टी से ढंकी हुई मिलेगी, जिसपर लेखक के छह पुराने ब्लॉग के लिंक दिए गए हैं. इसे तुरन्त हटा देना चाहिए. दूसरी खराब बात चुने हुए अच्छे लेखों का सम्पादित अंश ‘दैनिक जागरण’ अखबार में छापना बंद कर देना है. इसे पुनः शुरू करना चाहिए. पुराने ब्लॉगरों के ब्लॉगों तक न पहुँच पाना और दैनिक अपडेट की कमी अन्य परेशानियां हैं, जिस ओर मंच को ध्यान देना चाहिए.

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~



Tags:     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 4.83 out of 5)
Loading ... Loading ...

10 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
February 6, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी आपने मीडिया में पत्रकारिता पर प्रकाश डालते हुए “पत्रकारिता का असली मकसद अपनी लेखनी से भ्रष्ट और गैरजिम्मेदार शासन की आलोचना करते हुए गरीब और आम आदमी के हक़ की लड़ाई लड़ना है तथा धार्मिक कट्टरपंथियो के विस्तार, हिंसक विचारों और उनके अंधविश्वासों के खिलाफ लड़ना है. पत्रकारिता की इन्ही कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए बांग्लादेश में कई ब्लॉगर शहीद हो चुके हैं और पाकिस्तान के सिंध व बलूचिस्तान प्रान्त में अपहरण के शिकार हो शासकों व सैनिकों के द्वारा दी जाने वाली मानसिक व शारीरिक यातना झेल रहे हैं” सुंदर टिप्पणी की है साथ ही हम जागरण वालों को जो कहना चाहते थे उस पर भी प्रकाश डाला है .

jlsingh के द्वारा
February 6, 2017

आदरणीय सद्गुरु जी, आपकी बात का पूर्ण समर्थन और जागरण जंक्शन से सुधर की आशा में! मैंने भी FEEDBACK में अपनी और सबकी परेशानी बतलायी है ..पर जागरण सुने तब न! सादर!

sadguruji के द्वारा
February 9, 2017

आध्यात्मिक रुझान वाले लोंगों का कहना है कि समाज में और मीडिया जगत में बुराइयां इसलिए आ रही हैं क्योंकि लोग अब भगवान से दूर हो रहे हैं. मनमर्जी के मुताबिक़ खाने-पीने और अय्यासी की प्रवृति समाज में बढ़ी है. इसके लिए पैसा चाहिए और पैसा गलत मार्ग से ही ज्यादा और शीघ्र मिलता है. समाज में बुरे कर्मों के बढ़ने की यही वजह है. पहले लोग ईश्वर से डरते थे और बुरे कर्मों को करने से बचते थे, लेकिन अब लोग भगवान् से नहीं डरते हैं. पूजापाठ से भी लोग दूर भागने लगे हैं.

sadguruji के द्वारा
February 9, 2017

संतों का कहना है कि प्रत्येक वह कार्य बुरा है जिसके करने में हमें यह डर लगे और जब हम कोई कार्य करते हुए यह सोचते हैं कि कोई हमे देख तो नहीं रहा है, कहीं हम पकडे तो नहीं जाएंगे. तब समझ लें कि आप गलती पर हैं और गलत कार्य करने जा रहे हैं. ऐसे प्रत्येक कार्य से बचना चाहिये. पत्रकार को हमेशा खुश और तनावमुक्त रहना चाहिए. इससे स्वयं का मनोबल भी बढ़ता है.

sadguruji के द्वारा
February 9, 2017

ब्लॉगरों की निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता की प्रशंसा होनी चाहिये. इसमे कोई संदेह नहीं कि बिकाऊ व पीत पत्रकारिता के वर्तमान दौर में गलत को गलत और सही को सही कहने वाले निष्पक्ष ब्लॉगरों और पाठकों ने ब्लॉग मंचों और सोशल मीडिया के जरिये देश का सामाजिक और राजनैतिक परिदृश्य बदल के रख दिया है ! यही वजह है कि भ्रष्ट नेता और भ्रष्ट मीडिया दोनों पर ही कुछ हद तह अंकुश लग गया है !

sadguruji के द्वारा
February 9, 2017

जैसे एक परिवार की समृद्धि और अच्छे संस्कारों के लिये उस परिवार में एक बेटी या बहू का होना आवश्यक है, ठीक उसी प्रकार से देश व समाज की समृद्धि के लिए और उसे संस्कारित करने के लिए पत्रकारों, ब्लॉगरों और पाठकों की भी नितांत आवश्यकता है. जो निष्पक्षता के साथ समाज में घटित हो रही विभिन्न घटनाओं और नाना प्रकार के विचारों के फैलाव में सही को सही और गलत को गलत कह सकें.

sadguruji के द्वारा
February 9, 2017

आदरणीय सिंह साहब ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट का समर्थन करने के लिए धन्यवाद ! कई ब्लॉगरों की शिकायत पर जागरण जंक्शन मंच के संचालक मंडल ने 8 फ़रवरी 2017 को जबाब दिया है ! उनके अनुसार मंच पर किये गए सभी बदलाव समय की मांग के अनुसार सही हैं ! उन्होंने ने ब्लॉगरों की रचनाओं को ज्यादा से ज्यादा लोंगो तक पहुंचाने की पूरी कोशिश करने की बात भी कही है ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
February 9, 2017

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! पोस्ट की सराहना करने के लिए धन्यवाद ! सभी ब्लॉगर मित्र सम्मानीय मंच से जो कुछ कहना चाहते थे, उसका मैंने भी समर्थन किया है ! मंच ने हम सबकी बात सुनी है और जबाब भी दिया है ! फिलहाल अभी शायद ही कोई बदलाव हो ! लेकिन मंच के आदरणीय संपादक महोदय से मेरा अनुरोध है कि आधी स्क्रीन नीली पट्टी से ढकी होने से लेख पढ़ने में जो दिक्कत हो रही है, कृपया उसे तो दूर कर दें ! सादर धन्यवाद !

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
February 11, 2017

आदरणीय सद् गुरु जी बहुत सुन्दर दर्द अभियव्यक्ति ,एक गीत याद आ गया…. दर्दे दिल दर्दे जिगर जगाया अापने ,पाहिले तो मैं शायर था ….आशिक बनाया आपने ….। हमको लेखन का चस्का आपने ही विभिन्न प्रतियोगिताओं से लगाया । अब जब चिंतन मनन एक लाइलाज रोग बन चुका है । तो उसका इलाज ब्लाग मैं परेशानियाॅ हो जाती हैं । अतः हम ब्लोगर की दीर्घायु हेतु ब्लोग लेखन सुगम बन जाये ,इस विषय पर सुझाव पर विचार हितकर ओम शांति शांति कारक ही होगा

sadguruji के द्वारा
February 12, 2017

आदरणीय हरीश चंद्र शर्मा जी ! सादर अभिनन्दन ! अपने आप मे अनूठी और सुन्दर प्रतिक्रिया देने के लिये धन्यवाद ! जिस मंच पर हम लोग लिखते हैं, उसे और अच्छा बनाने के लिये अपना सुझाव देना चाहिये ! ब्लॉगरों के हितों की भी बात होनी चाहिये ! इसी उद्देश्य से यह ब्लॉग प्रस्तुत हुआ ! आपकी रचनाएँ इस मंच की शोभा बढाती हैं ! आपकी व्यन्ग्यमय और अनोखी लेखन शैली को सलाम ! सादर आभार !


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran