सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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हमारे देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: क्या देश तोड़ो.. कुछ भी बोलो.. बस यही है?

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अफजल गुरु और बुरहान वानी जैसे आतंकियों से हमदर्दी रखने वाले और जेएनयू में राष्ट्रविरोधी नारे लगाने के आरोप में जेल जा चुके विवादास्पद वामपंथी नेता उमर खालिद को पिछले महीने एक संगोष्ठी में अतिथि वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में आमन्त्रित किया गया. जब भारतीय विद्यार्थी परिषद् ने इसका कड़ा विरोध किया तो जबाब में रामजस कॉलेज परिसर में बस्तर मांगे आजादी.. कश्मीर मांगे आजादी.. छीन के लेंगे आजादी.. जैसे भड़काऊ नारे लगे. मंगलवार को मीरजापुर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने सारी संवैधानिक और सामाजिक मर्यादाएं तोड़ते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को खुलेआम को मंच से हि$#@ और सा@& जैसी गन्दी गालियां दी. कौन कहता है कि देश में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता नहीं है? कुछ भी बोलने की भारत जैसी खुली छूट तो दुनिया के अन्य किसी भी देश में नहीं है.

आज हिंदुस्तान में एक ओर जहाँ नेता खुलेआम चुनावी मंचों से बदजुबानी पर उतर आए हैं, वहीँ दूसरी तरफ छात्र नेता कॉलेजों में हंगामे ओर नारेबाजी करके वहां का माहौल खराब किये हुए हैं. अफसोसनाक बात तो यह है कि शिक्षक भी अब लेफ्ट ओर राइट धड़ों में बंट न सिर्फ अपने-अपने पसन्दीदा ग्रुप के छात्रों के साथ हो लिए हैं, बल्कि प्रदर्शन और नारेबाजी करते हुए सड़कों तक पर उतर आये हैं. भारत की मीडिया सनसनी फैलाने और हंगामा खड़ा करने में महारत हासिल कर चुकी है और आज के युग में खुली व अमर्यादित बहस का सबसे लोकप्रिय मंच बन चुकी सोशल मीडिया तिल का ताड़ बनाने में पूर्णतः दक्ष हो चुकी हैं. बात सिर्फ इतनी सी थी कि एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने रामजस कॉलेज में उस संगोष्ठी को रद्द करवा दिया था, जिसमें हिस्सा लेने के लिए जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र उमर खालिद को आमंत्रित किया गया था, जिस पर जेएनयू में एक कार्यक्रम के दौरान देश-विरोधी नारे लगाने का न सिर्फ गम्भीर आरोप लगा, बल्कि वो इस सिलसिले जेल भी जा चुके हैं.

भारतीय विद्यार्थी परिषद् के नेताओं ने उमर खालिद को राष्ट्रविरोधी मान उसका विरोध किया और उसका आमन्त्रण रदद् कराया, इसके लिए वो बधाई के पात्र हैं, लेकिन एक गलती उनसे भी हुई और वो ये कि जब उमर खालिद को न बुलाने की बात मान ली गई तो फिर उसे दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज परिसर में 22 फरवरी को उग्र विरोध और हिंसक प्रदर्शन करने की जरुरत ही क्या थी? इसे छात्रों, शिक्षकों तथा पत्रकारों पर हमला बता वामपंथी छात्र संगठनों को एबीवीपी के खिलाफ अभियान चलाने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया. लेफ्ट और राइट विचारधारा वाले स्टूडेंट के बीच हुई झड़प के बाद सारा फ़ोकस लेडी श्रीराम कॉलेज में पढ़ने वाली एक युवती गुरमेहर कौर पर आ गया, जिसने सोशल मीडिया पर एबीवीपी के खिलाफ कई दिनों तक एक जोरदार अभियान चलाया. इस अभियान के दौरान गुरमेहर कौर के पिता कैप्टन अमनदीप सिंह की चर्चा भी हुई जो साल 1999 में पाक घुसपैठियों द्वारा की गई गोलीबारी में शहीद हो गए थे.

शहीद कैप्टन अमनदीप सिंह की चर्चा अप्रासंगिक और बेतुकी थी. सोशल मीडिया पर अपने शहीद पिता का जिक्र करते हुए गुरमेहर कौर ने कहा था, ‘पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, बल्कि जंग ने मारा है.’ इस पर तंज कसते हुए देश के मशहूर बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग ने लिखा, ‘मैंने दो तिहरे शतक नहीं लगाए, बल्कि मेरे बल्ले ने ऐसा किया.’ धीरे धीरे इस बहस में छात्र, शिक्षक, बुद्धिजीवी, लेखक, खिलाड़ी, नेता, अभिनेता से लेकर आम आदमी तक सभी कूदते चले गए. सोशल मीडिया पर सभ्य-असभ्य, संस्कारी-कुसंस्कारी हर तरह के लोंगों का संगम होता है. इसलिए आप कोई बयान दे रहे हैं तो पाठकों की तीखी प्रतिक्रिया और कड़े विरोध के लिए भी तैयार रहना चाहिए. किसी ने गुरमेहर कौर को अपशब्द कहे और जान से मारने की धमकी दी तो मामला और तूल पकड़ लिया. इसको मुद्दा बना न सिर्फ जमकर राजनीति की गई, बल्कि एक दूसरे की तीखी मुखालफत और ओछी छीछालेदर भी की गई. गुरमेहर कौर ने धमकी देने वालों की पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई.

इसमें कोई शक नहीं कि पाकिस्तान भारत का सबसे बड़ा दुश्मन है और वो हमेशा भारत के साथ किसी न किसी रूप में जंग जारी रखना चाहता है. भारत में आतंकी गतिविधियां और नकली नोटों का कारोबार बारहों महीने वो बदस्तूर जारी रखता है. सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा पाकिस्तान को बनाना एक आम बात है. किन्तु उसकी बात करते करते हिंदुस्तानी लोग एक दूसरे को ही देशद्रोही कहने और साबित करने लग जाते हैं, ये बेहद खराब बात है. सोशल मीडिया पर एबीवीपी के खिलाफ कैंपेन चला रही गुरमेहर कौर ने मंगलवार को इससे अपना नाम वापस ले लिया है और उसे अकेला छोड़ देने की विनती की है. सवाल यह है कि उसने एबीवीपी के खिलाफ कैंपेन चलाया क्यों, नेता बनने के लिए या फिर सोशल मीडिया की टाइमपास करने वाली मौजमस्ती के लिए? नेता बनने का सपना देखना या उसके लिए प्रयास करना कोई गुनाह नहीं है, किन्तु अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए अपने शहीद पिता का सहारा लेना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है. सारे वामपंथी और मीडिया वाले एक सुर में चिल्ला रहे हैं कि गुरमेहर कौर को बोलने नहीं दिया जा रहा है, ये अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का हनन है.

मजेदार बात ये है कि गुरमेहर कौर को जो कुछ भी कहना था वो सोशल मीडिया के खुले मंच से कह चुकी है, उसे कहने से किसने उसे रोका? उसके सहारे अब सिर्फ ओछी राजनीति भर हो रही है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मैं पूरा समर्थन करता हूँ, किन्तु जो स्वतंत्रता अमर्यादित हो और देश को तोड़ने का काम करे, उसका मैं विरोधी हूँ. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करने वाले लोग आतंक से पीड़ित कश्मीर सहित देश के कई नक्सल प्रभावित जगह के वासिंदों को पीड़ित बता उनके हित की बात करते हैं, लेकिन वो शहीद होने वाले पुलिस और सुरक्षाबलों की बात नहीं करते हैं. वो आतंकियों से हमदर्दी रखते हैं, लेकिन आतंकी जिन्हें गोली मारते हैं, उनसे कोई सरोकार नहीं रखते हैं. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता उन्हें देना क्या देश में अलगाववाद और हिंसक विचारधारा के विषवमन को बढ़ावा देना नहीं है? जनता के द्वारा चुने हुए और देश के संवैधानिक पद पर आसीन प्रधानमंत्री को खुलेआम गन्दी गालियां देने वाले लालू प्रसाद यादव का इलाज क्या है? क्या यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नहीं है? अनेक घोटालों में सजायाफ्ता और जमानत पर रिहा लोग देश के प्रधानमंत्री की बेइज्जती करें यह देश की जनता और माननीय सुप्रीम कोर्ट दोनों को ही कदापि बर्दास्त नहीं करना चाहिए.

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आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106
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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
March 1, 2017

मीडिया में छपी ख़बरों के अनुसार साल 1999 में पाक घुसपैठियों ने जम्मू में राष्ट्रीय रायफल्स के कैंप पर हमला कर दिया था ! 6 अगस्त 1999 को जब कारगिल में वो आतंकियों का सामना कर रहे थे तो वो 4 राष्ट्रीय रायफल्स की बटालियन को लीड कर रहे थे ! गुरमेहर के पिता अमनदीप सिंह अपने कैंप के बचाने के लिए आतंकियों के सामने दीवार बन के खड़े हो गए। गोलीबारी में आखिर अमनदीप शहीद हो गए ! अमनदीप सिंह के साथ छह जवान भी इस मुठभेड़ में शहीद हो गए थे !

sadguruji के द्वारा
March 1, 2017

मीरजापुर में मंगलवार को एक चुनावी सभा के दौरान आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की बीमारी को षणयंत्र बताया ! लालू यादव ने प्रधानमंत्री मोदी को गन्दी गालियां देने के साथ ही यहां तक गप्प हांकी कि मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की बीमारी में हाथ है ! उन्होंने कहा कि वाजपेयी की बीमारी में इनका षणयंत्र हो सकता है, उनकी बीमारी की जांच होनी चाहिए ! सबसे पहले पूछताछ लालू यादव से ही होनी चाहिए !

sadguruji के द्वारा
March 2, 2017

नीतीश सरकार में शामिल मंत्री और कांग्रेस नेता अब्दुल जलील मस्तान को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने के लिए बिहार विधानसभा में बीजेपी विधायकों ने हंगामा किया और विधानसभा के बाहर बर्खास्त करने की मांग को लेकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया ! मस्तान ने नोटबंदी के विरोध में पीएम मोदी की तस्वीर पर समर्थकों से जूते मरवाया था ! मीडिया में छपी खबरों के अनुसार पीएम मोदी की तस्वीर पर जूता मारने की घटना 22 फरवरी की है, जब पूर्णिया में ये मंत्री नोटबंदी के विरोध में बुलाई गई सभा में पहुंचे थे ! अब्दुल जलील मस्तान ने कहा था, ‘’वो पीएम नहीं है, वो नक्सलाइट है, उग्रवाद है, डकैत है और लोगों को तरह-तरह से सताने वाला है.’’ हंगामा बढ़ता देख मंत्री ने माफी मांग ली है लेकिन बीजेपी विधायक उनके इस्तीफे पर अड़े हैं !

sadguruji के द्वारा
March 2, 2017

दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज में वस्तुतः दो छात्र संगठनों के बीच विवाद था ! ये विवाद एबीवीपी और आईसा के छात्रों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद तूल पकड़ा था ! गुरमेहर कौर ने सोशल मीडिया पर एबीवीपी के खिलाफ रेप की धमकी देने का आरोप लगाते हुए एक अभियान शुरु किया था ! उसके अभियान को एक तरफ जहाँ भारी समर्थन मिला, वहीँ दूसरी तरफ उसके अभियान का जमकर विरोध भी हुआ ! हालांकि अब इस अभियान से अपने को अलग करते हुए कारगिल में शहीद हुए कैप्टन मंदीप सिंह की बेटी गुरमेहर कौर ने अपनी आगे की पढ़ाई पर ध्यान देने की बात कही है !

sadguruji के द्वारा
March 4, 2017

मुझे उन लोंगों की सोच और बुद्धि पर तरस आता है जो पूरे देशभर में चिल्ला रहे हैं कि गुरमेहर कौर को बोलने नहीं दिया जा रहा है ! अरे भाई किसने रोका है उन्हें ! जो कुछ भी उनको कहना था उन्होंने फ़ेसबुक पर कहा ! यहाँ तक कहा कि मैं भारतीय विद्यार्थी परिषद् से नहीं डरती ! कौन आपको कह रहा है कि आप AVBP से डरें? इस देश में बहुत से लोग रोज दावा करते हैं कि वो भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नहीं डरते और कुछ भी उन्हें उल्टा सीधा बोलते हैं ! पीएम मोदी जितने सहनशील तो ज्यादातर चुप रहने वाले भूतपूर्व पीएम मनमोहन सिंह भी नहीं थे ! बोलने की ऐसी आजादी तो कांग्रेज राज में भी कभी नहीं थी ! सोशल मीडिया पर जो भी मन में आया वो सबकुछ कहके गुरमेहर कौर ने ये साबित कर दिया है कि वो किसी से नहीं डरती है ! पूरा प्रकरण मशहूर होने के लिए की गई ड्रामेबाजी के सिवा और कुछ नहीं है !

sadguruji के द्वारा
March 4, 2017

एक न्यूज चैनल पर अभिनेत्री विद्या बालन ने कहा कि जो लोगों की आवाज दबाते हैं उन्हें थप्पड़ मारने का मन करता है ! उन्होंने कहा कि वो महसूस करती हैं कि लोगों को दूसरों की अभिव्यक्ति की आजादी का आदर करना चाहिए ! कोई उनसे पूछे कि कौन किसकी आवाज दबा रहा है ? इस देश में जिसके मन में जो आ रहा है, वो बोल रहा है और लिख रहा है ! रही बात थप्पड़ मारने की तो उन्हें मालूम होना चाहिए कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं कि आप कुछ भी बोलें ! घर में माता-पिता बच्चों को गलत बोलने पर रोकते-टोकते हैं ! स्कूल में टीचर बच्चों को बोलने नहीं देते हैं ! क्या आप उन्हें थप्पड़ मारेंगी ? इस देश का एक कानून है, जो गलत बोलने पर सजा देता है ! क्या आप कानून को थप्पड़ मारेंगी ? बोलने से पहले उन्हें सोचना चाहिए था कि अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ जो मन में आये वो बोलना नहीं है ! इस पर हर जगह पर कुछ न कुछ पाबंदिया लगी हुई हैं ! मुझे आश्चर्य होता है कि अपने बच्चों को कभी खुली छूट नहीं देने वाली नामी गिरामी हस्तियां अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर भाषण दे रही हैं ! पहले वो ये बताएं कि वो अपने बीबी-बच्चों को कितनी स्वतन्त्रता दिए हुए हैं? ये सब बड़े लोंगो का दोहरा व्यक्तित्व और दिखावटी पाखण्ड भर है ! सच ही कहा गया है कि हाथी के दांत खाने के और.. और दिखाने के और !

Alka के द्वारा
March 5, 2017

आदरणीय सद्गुरु जी , आपके विचारों से पूर्णतया सहमत हूँ | अभिव्यक्ति की भी एक सीमा तय होनी चाहिए | यदि अभिव्यक्ति का तात्पर्य राष्ट्र विरोध है तो ऐसी अभिव्यक्ति पर रोक आवश्यक है |

RAJEEV GUPTA के द्वारा
March 6, 2017

आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, आपने बहुत शानदार ढंग से अपने विचारों को पाठकों के समक्ष रखा है. अभिव्यक्ति की आज़ादी के बहाने देशद्रोह की राजनीती आजकल “बदनाम” होकर राजनीती में आने का शार्ट कट बन गयी है. बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा, वाली कहावत पर ही यह लोग चल रहे हैं. आप अपने लेख नीचे लिखी वेबसाइट पर भी पोस्ट कर सकते हैं. मैंने शुरू कर दिए हैं, क्योंकि नभाटा वामपंथी विचारधारा से ग्रस्त है और अच्छे लेखों को छापने से कतराता है. myvoice.opindia.com

sadguruji के द्वारा
March 7, 2017

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट की सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! आप सही कह रहे हैं कि अभिव्यक्ति की आज़ादी के बहाने आजकल देशद्रोह की राजनीती हो रही है और वो “बदनाम” होकर राजनीती में आने का बेहद शार्टकट रास्ता बन गयी है ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
March 7, 2017

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपने सही कहा है कि जो मंच वामपंथी विचारधारा से ग्रस्त हैं वो अच्छे लेखों को भी छापने से इनकार कर देते हैं ! इस मंच कि खासियत ही यही है कि सम्पादन खुद करो ! आपने जो लिंक दिया है, उस बेबसाइट को जरूर देखूंगा ! हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
March 7, 2017

आदरणीया अल्का जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने एकदम सही कहा है कि यदि अभिव्यक्ति का तात्पर्य राष्ट्र विरोध है तो ऐसी अभिव्यक्ति पर रोक आवश्यक है ! अभिव्यक्ति पर रोक क्या घर-परिवार, स्कूल, थाना, मीडिया और कोर्ट-कचहरी में नहीं है ! वहां पर क्या कुछ भी कहने कि आजादी है? अभिव्यक्ति की आजादी के बहाने व्यर्थ का शोर मचा रहे लोग न सिर्फ ड्रामेबाज हैं, बल्कि देश के हितैषी भी नहीं है !

yatindrapandey के द्वारा
March 12, 2017

अत्यंत सूंदर और सत्य को रूपांतरित करती लेखनी

sadguruji के द्वारा
March 12, 2017

आदरणीय यतीन्द्र पांडेय जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! पोस्ट की सराहना के लिए धन्यवाद ! एक कोशिश थी कि सत्य लोंगो तक पहुंचे ! आपके सहयोग एवं समर्थन का ह्रदय से आभारी हूँ ! सादर आभार !


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