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यूपी विधानसभा चुनाव 2017: कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे...! जंक्शन फोरम

Posted On: 12 Mar, 2017 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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यूपी की समझदार जनता ने जाति-धर्म के जंजाल से ऊपर उठकर 37 साल बाद भाजपा को 300 से ऊपर सीट देकर इतिहास रच दिया है. एक ऐसा अमिट इतिहास जिस पर न तो बसपा विश्वास कर पा रही है और न ही सपा. 403 में से मात्र 19 सीट पाने वाली बसपा की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. अप्रत्याशित और अबतक की सबसे बुरी हार बसपा सुप्रीमों मायावती के गले नहीं उतर रही है. उन्होंने हार का ठीकरा ईवीएम मशीनों पर फोड़ते हुए चुनाव में गड़बड़ी की न सिर्फ आशंका जाहिर की, बल्कि चुनाव आयोग से ईवीएम मशीनों की जांच कराने की मांग भी की है. मायावती के आरोप हास्यास्पद हैं. चुनाव के समय यूपी में एक तो सपा का शासन था और दूसरी बात ये कि वोटिंग से पहले चुनाव अधिकारी बकायदे ईवीएम मशीन की जांच करते हैं और सभी दलों के पोलिंग एजेंट वहां पर उपस्थित रहते हैं. अपनी करारी शिकस्त को न पचा पा ईवीएम मशीनों और निष्पक्ष व स्वतन्त्र चुनाव आयोग पर सवाल खड़े करना भारतीय लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है. बसपा की करारी हार का मुख्य कारण पिछले एक वर्ष के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य, आरके चौधरी, बृजेश पाठक और राजेश त्रिपाठी जैसे बसपा के बड़े जनाधार वाले नेताओं का पार्टी छोड़ना है.

स्वप्न झरे फूल से,
मीत चुभे शूल से,
लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से,
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे!
कवि गोपालदास ‘नीरज’ के शब्दों में कहूँ तो भाजपा की प्रचण्ड जीत के बाद यूपी में आज सभी भाजपा विरोधी दलों की यही स्थिति है, लेकिन कवि ‘नीरज’ की उपयुक्त पंक्तियाँ बसपा और मायावती पर ज्यादा फिट बैठती हैं. बसपा के संस्थापक स्वर्गीय कांशीराम के साथी राजबहादुर, जंग बहादुर, डा. मसूद, सोनेलाल पटेल, ओम प्रकाश राजभर, आरके चौधरी, बाबू सिंह कुशवाहा और दद्दू प्रसाद आदि जैसे नेता बसपा को बुलन्दी पर ले जाने वाले और पिछड़ी जातियों के जनाधार वाले नेता थे. इसमें से कुछ बसपा से निकाले गए और कुछ पार्टी छोड़कर चले गए. कांशीराम के खून-पसीने से सींचि बगिया समय के साथ साथ उजड़ती चली गई और मायावती तमाशा भर देखती रह गईं. इस बार मायावती ने 100 मुस्लिम प्रत्‍याशियों को टिकट दिया था लेकिन सोशल इंजीनियरिंग का उनका यह नया फॉर्मूला भी मोदी लहर के आगे बुरी तरह से फेल हो गया.

मुस्लिमों को ‘वोट बैंक’ और अपनी पार्टी का गुलाम समझने वाले नेताओं को इस बार जनता ने ऐसा सबक सिखाया है कि वो जल्दी भूल नहीं सकेंगे. चुनाव से कुछ रोज पहले एक मुस्लिम इलाके से गुजर रहा था. वहां पर एक दूकान पर कुछ सामान लेना था. मुस्लिम टोपी लगाए दुकानदार से सामान खरीदते हुए मैंने यूँ ही पूछ लिया, ‘इस बार किसे वोट दे रहे हैं.’ हँसते हुए उन्होंने कहा, ‘इस बार भाजपा को वोट देंगे.’ हालाँकि उस समय मुझे यह तंज या मजाक ही लगा, लेकिन कल जब भाजपा और उसके सहयोगियों को 325 सीट का पहाड़ सा विशाल और अविश्वनीय बहुमत मिला तो मुझे लगा कि निसन्देह इस बार के चुनाव में मुस्लिम भाई और बहनें भी भाजपा को वोट दी हैं. देश के अधिकतर दल अल्पसंख्यकों को अपने चुनावी फायदे के लिए महज ‘वोट बैंक’ समझकर यूज करते रहे हैं और बीजेपी से डराते हुए उन्हें अपना गुलाम मानते थे. ऐसे ही राजनीतिक दलों से जुड़े मुल्ला और मौलवी न्यूज चैनलों पर आकर खुलेआम देश के पीएम के खिलाफ अपशब्द बोलते हैं. वो मुस्लिम समुदाय को भड़काने और उनके दिलों में नफरत के बीज बोने का काम भर करते हैं. अल्पसंख्यकों के एक वर्ग ने भाजपा का साथ देकर ऐसे मुल्ला मौलवियों को करारा तमांचा मारा है.

2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विरोधी नेताओं द्वारा जितनी ज्यादा गालियां दी गईं, जनता उतनी ही ज्यादा मोदी के करीब होती चली गईं. जनता ने पीएम का अपमान बर्दास्त नहीं किया और बड़बोले नेताओं को चुनाव में बहुत अच्छा सबक सिखाया. प्रधानमंत्री को गाली देने के लिए बिहार से लालू प्रसाद यादव जैसे भ्रष्ट नेता को बुलाया गया, जो जमानत पर रिहा चल रहे हैं. एक नेता ने न्यूज चैनल पर मोदी को काशी में तीन दिन रूककर प्रचार करने पर खूब लताड़ा और कालभैरव का दर्शन करने पर कहा कि कालभैरव विनाश के देवता हैं, मोदी और भाजपा का विनाश करेंगे. चुनाव परिणाम आने के बाद हुआ इसका ठीक उल्टा. बसपा को अपना समर्थन देने वाले एक मौलाना अंसार रजा ने तो न्यूज चैनलों पर पीएम के खिलाफ ऐसी ख़राब बातें कहीं कि उनके खिलाफ तो कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए. अखिलेश यादव भी गरिमा के साथ अपनी हार स्वीकार नहीं कर पाए, उन्होंने हार के कारणों पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने तो अपनी तरफ से अच्छा काम किया, लेकिन जनता को संभवतः इससे भी अच्छा काम चाहिए. अब भाजपा करके दिखाए. राहुल गांधी अभी कोई बयान नहीं दिए हैं. उन पर ट्विट्टर पर किया गया अजय जांगिड़ का ये ट्वीट बेहद चर्चित रहा- “राहुल बाबा की, एक बात तो मानना पड़ेगी कि “बंदे ने, इतनी जगह बीजेपी की सरकार बनवा दी, लेकिन कभी घमंड नहीं किया..!!”

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आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106
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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
March 13, 2017

अधिकतर मोदी विरोधी नेताओं को मोदी से सिर्फ नफरत है ! वो मोदी से कुछ सीखना नही चाहते हैं ! यही उनकी असफलता का मूल कारण भी है ! इन चुनाव नतीजों से राजनीतिक पार्टियाँ कुछ सीख पाएंगी, इसमे संदेह है ! एक स्वर मे मोदी विरोध करने के अलावा उन्हे और कुछ आता भी नही है !

sadguruji के द्वारा
March 13, 2017

मणि शंकर अईयर जैसे कांग्रेस के बुजुर्ग नेता को तो ऐसा लगता है कि वैचारिक रूप से लकवा मार गया है ! देश के सिंहासन को उन्होने कांग्रेस की जागीर समझ रखा है ! वो मोदी के खिलाफ जितना कड़वा बोलते हैं, कांग्रेस उतने ही गर्त मे चलती चली जाती है ! पंजाब मे यदि भाजपा दोसाल पहले अकाली दल से अलग हो सिद्धू को पंजाब की कमान सौप देती तो आज रिजल्ट उसके पक्ष मे होता !

sadguruji के द्वारा
March 13, 2017

रविवार को सत्संग मे जो लोग आते हैं, उनमे कई लोग दलित समुदाय के हैं ! मैने कल उनसे पूछा कि आप लोग किसे वोट दिये हैं ! उन्होने कहा कि हम लोग पूरा टोला का टोला मोदीजी को वोट दिये हैं ! मैने पूछा कि आपलोग बसपा को वोट क्यों नही दिये ? उन्होने कहा कि उन्होने हमारे लिये क्या किया है? सिर्फ पार्क बनाये.. मूर्तियाँ बनाई और टिकट बेच अपना घर भरा ! हमे क्या मिला ? मुझे लगता है कि यही वो सवाल हैं, जिसका समुचित उत्तर देने मे बसपा असफल रही और दलित राजीनीति के महानायक मोदी का हाथ थाम लिये !

sadguruji के द्वारा
March 13, 2017

इस चुनाव मे जातिवाद का मिथक भी टूटा है ! कल कुछ यादव जी लोंगों से भी मेरी बात हुई ! मैने उन्हे यह नही बताया कि मैने किसे वोट दिया था ! मैने उनसे सिर्फ इतना ही पूछा कि आपने किसे वोट दिया ! उन्होने कहा कि कमल के फूल के सिवा कुछ समझ मे नही आया ! मैने उनसे पूछा कि सपा को वोट क्यों नही दिये ? उनमे से एक जो बुजुर्ग थे वी बोले. ‘उन हन के का वोट देबल जा.. पूरा कुनबा त कुर्सी की खातीन अपसे मे लडत बा.. बड छोट क कौनों लिहाज नईखे.. ! सबसे बढिया मोदी हाउअन.. जेकरी न कोई आगे.. न कोई पीछे.. ! जेकर सबकुछ जनता ही बा !’ जनता चुनाव के समय उन नेताओं से बेहतर सोचती है जो जनता को सिर्फ जातिगत चश्मे से निहारते हैं और उसे मूर्ख बनाने के चक्कर मे लगे रहते हैं !

Shobha के द्वारा
March 14, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी ऐसा लग रहा है जैसे जनता जाग गयी यूपी के लोगों को आज तक जाति धर्म के नाम पर मूर्ख बनाया था सब चुप थे लहर भी नजर नहीं आई लेकिन वोट मोदी जी को दिया जी हाँ हर तरफ मोदी – मोदी ही थे में तो बहुत खुश हूँ अबकी मुस्लिम महिलाओं ने भी बिना कहे उन्हें वोट दिया है अब मोदी जी की बारी है

sadguruji के द्वारा
March 15, 2017

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ ! जो नेता जाति-धर्म के नाम पर अपनी राजनीती चमकाए हुए थे ! जनता ने ऐसा सबक सिखया है कि वो सब इस चारों खाने चित्त हो गए हैं ! कई मुल्ला-मौलाना न्यूज चैनलों पर पीएम मोदी के खिलाफ बदजुबानी और गालीगलौज का कैम्पैन चलाये हुए थे ! मुस्लिम महिलाओं ने बीजेपी को वोट देकर उनकी बोलती बंद कर दी है ! देश को इसी क्रांति की जरुरत थी ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

यूपी की समझदार जनता ने जाति-धर्म के जंजाल से ऊपर उठकर 37 साल बाद भाजपा को 300 से ऊपर सीट देकर इतिहास रच दिया है. एक ऐसा अमिट इतिहास जिस पर न तो बसपा विश्वास कर पा रही है और न ही सपा. अपनी करारी हार की खींझ मिटाने के लिए अब ये ईवीएम मशीनों में पर दोष मढ़ रही हैं, जबकि चुनाव आयोग ये साफ़ कर चुका है कि ईवीएम मशीनों में कोई खराबी नहीं है.

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

देश के अधिकतर दल अल्पसंख्यकों को अपने चुनावी फायदे के लिए महज ‘वोट बैंक’ समझकर यूज करते रहे हैं और बीजेपी से डराते हुए उन्हें अपना गुलाम मानते थे. ऐसे ही राजनीतिक दलों से जुड़े मुल्ला और मौलवी न्यूज चैनलों पर आकर खुलेआम देश के पीएम के खिलाफ अपशब्द बोलते हैं. वो मुस्लिम समुदाय को भड़काने और उनके दिलों में नफरत के बीज बोने का काम भर करते हैं. अल्पसंख्यकों के एक वर्ग ने भाजपा का साथ देकर ऐसे मुल्ला मौलवियों को करारा तमांचा मारा है.


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