सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

467 Posts

5103 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15204 postid : 1319926

नेता: 'मतलब निकल गया है तो, पहचानते नहीं यूँ भगा रहे हैं जैसे हमें, जानते नहीं'

Posted On: 20 Mar, 2017 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

जोगी, हम तो लुट गये तेरे प्यार में
जाने तुझको,
हाय रे जाने तुझको खबर कब होगी…

नेट पर कल एक खबर पढ़ रहा था कि योगी आदित्‍यनाथ के यूपी का मुख्यमंत्री बनने पर उत्तर प्रदेश के बलिया में एक युवक इतना खुश हुआ कि उनकी ताजपोशी के बाद उसे खुशी के मारे हार्ट अटैक आ गया और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जब इस बात का ऐलान हुआ कि योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रेदश के 21वें सीएम बनेंगे उसके बाद से ही वह बेहद खुश था. योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद वो अपनी ख़ुशी का इजहार करते हुए पटाखा फोड़ने लगा. तभी अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और वह बेहोश हो गया. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया और मौत की वजह हार्ट अटैक होना बताया. घटना बेहद दुखद है और ऐसी घटना की जानकारी एक संवेदनशील मुख्यमंत्री को जरूर होनी चाहिए. ऐसे कट्टर समर्थकों और वोटरों की बदौलत नेता सत्ता के शिखर पर पहुँचते हैं. अपने प्रिय नेता के लिए अपनी जान तक लुटा देने वाले समर्थकों और कार्यकर्ताओं की क्या चुनाव के बाद कोई खबर ली जाती है? ये एक बहुत बड़ा और बेहद गंभीर सवाल है. शनिवार को बीजेपी की विधायक दल की बैठक के बाद प्रेस से वार्ता करते समय बीजेपी के नेता केशव प्रसाद मौर्य और केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू जिस तरह से वीजेपी के कार्यकर्ताओं को भगा रहे थे, वो देखकर मुझे बहुत खराब लगा. वेंकैया नायडू जिस तरह से बड़े ताव और गुस्से में आकर भाजपा कार्यकर्ताओं को हाल से बाहर भगाने का आदेश देते हुए बार-बार कह रहे थे कि ‘मैं आऊं क्या?’, उस निकृष्ट बर्ताव को देखसुनकर बीजेपी का एक वोटर होने के नाते मैं अपने आपको बेहद अपमानित महसूस कर रहा था. आश्चर्य की बात है कि इतनी बड़ी बात हुई और मीडिया पर उसकी कोई चर्चा नहीं हुई. चर्चा हुई होती तो शर्मिंदगी के साथ ही उन्हें अपनी गलती का एहसास भी हुआ होता.

मैं टीवी पर देख के हतप्रभ था कि चुनाव जितने के बाद नेता किस तरह से गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं. ऐसा लगता है मानों ‘मतलब निकल गया है तो, पहचानते नहीं यूँ भगा रहे हैं जैसे हमें, जानते नहीं’. वेंकैया नायडू और केशव प्रसाद मौर्य को अपने खराब बर्ताव के लिए कार्यताओं से माफ़ी मांगनी चाहिए. नहीं तो मेरे जैसा मोदी के फलसफे ‘सबका साथ सबका विकास’ का समर्थक और एक जागरूक वोटर अगले चुनाव में वीजेपी को वोट देने की बजाय घर बैठना ज्यादा पसंद करेगा. नेता कब ये समझेंगे कि कार्यकर्ता और वोटर उनसे ज्यादा कीमती और सम्मान के पात्र हैं. आज जिस कुर्सी पर नेता बैठे हैं, उन्हें कुर्सी से धकेलने की क्षमता जनता रखती है. हाँ, ये जरूर है कि ऐसा करने के लिए उसे पांच साल इन्तजार करना पडेगा. समर्थक, कार्यकर्ता और वोटर केवल चुनाव के समय ही नेताओं के माई बाप क्यों, चुनाव के बाद क्यों नहीं? कार्यकर्ता और जनता कितनी बार नेताओं को सबक सीखा चुकी है, लेकिन गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली उनकी बुरी आदत ऐसी है कि सुधरती ही नहीं. चुनाव जीतने के बाद वो अहंकार के मारे फूल जाते हैं और जीत रूपी इमारत के नींव के पत्थर कहे जाने वाले अपने कार्यकर्ताओं को ही भुला देते हैं. चुनाव के समय जहाँ उनके मुंह से बातों में शहद टपकती थी, चुनाव होने के बाद उनके मुंह से अहंकार रूपी अंगारे बरसने लगते हैं. सभी दलों के कार्यकर्ता, समर्थक और वोटर अपनी पार्टी को जिताने के प्रति जुनूनी होते हैं, कई बार अपनी जान तक दे देते हैं, किन्तु अंत में उन्हें हासिल क्या होता है? ज्यादातर तो कुछ नहीं.

चन्दा भी देखा तारे भी देखे देखा सूरज बरसों
लेकिन जिस दिन तुझको देखा मन में फूटी सरसों
हाय रे जोगी…

प्रेम धवन का लिखा हुआ ये एक गीत हिंदी फिल्म ‘शहीद’ का है. कई बार इस गीत को सुना है. संत आसाराम बापू के प्रवचन-मंच पर भी उनके लिए ये गीत कई बार गाया गया. असीम आस्था और विश्वास रखने वाली श्रद्धालु जनता इस गीत पर उनके संग झूम-झूम के गाई. ये बात अलग है कि एक दिन ऐसा भी आया जब बहुत से श्रद्धालुओं का दिल टूट गया. एक माध्यम के रूप में इस गीत को देंखे तो ये जनता के प्यार और उसकी भावनाओं को बहुत सुन्दर और बेहतर तरीके से उजागर करता है. यूपी चुनाव के संदर्भ में देंखे तो बड़ा फिट बैठता है. यूपी के लोग विगत दो दशकों में मुलायम, मायावती और अखिलेश सबसे प्यार किये और सबकी राजनीति देखे. सबने थोड़ा या बहुत काम भी किया, लेकिन जनता इन सबसे बहुत ऊब चुकी थी. वो प्रधानमंत्री मोदी के ज़रिए विकास का एक बड़ा सपना देखते हुए इस बार भाजपा को प्रचंड बहुमत दी है. यूपी के लोग हर क्षेत्र में और हर जगह एक बड़ा विकास चाहते हैं और यूपी के बेरोजगार युवा रोजगार के बड़े अवसर चाहते हैं. चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने यूपी की आम जनता और वहां के किसानों से कई बड़े वादे किए हैं, जिन्हें धरातल पर उतारने का वक्त अब आ चुका है. फिलहाल अभी तो जनता का भरपूर प्यार और समर्थन पीएम मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोनों को ही मिल रहा है, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ यदि वादों और इरादों को हकीकत में अमलीजामा नहीं पहनाया गया तो जनता का प्यार गुस्से में बदलते देर नहीं लगेगी. पीएम मोदी को तो दिनोंदिन करीब आते 2019 के लोकसभा चुनाव का भी सामना करना है.

योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाये जाने से केवल मुस्लिम समाज ही चिंतित हो, ऐसा नहीं है. यह चिंता हिंदुओं में भी है. कई लोग जो भाजपा और संघ से जुड़े हैं, जो अपने को कट्टर हिन्दू समझते हैं, उनके मुख से सुना कि योगीजी को मुख्यमंत्री बना के भाजपा और संघ ने अच्छा तो किया है, लेकिन डर यही है कि उनके राज में दंगा-फसाद न हो. योगी आदित्यनाथ को बहुत संभलकर चलना होगा और कट्टर हिन्दू वाली अपनी छवि भी अब बदलना होगा. उनके मुख्यमंत्री बनने पर समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने कहा है कि ‘योगी आदित्यनाथ एक मजहबी रहनुमा हैं.’ एआईएमआईएम के नेता और सांसद असदउद्दीन ओवैसी ने यूपी में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ‘शायद यही प्रधानमंत्री का न्यू इंडिया है. सबका साथ और सबका विकास बस एक नारा है, अब विकास होगा तो सिर्फ़ हिन्दुत्व का विकास होगा.’ ‘सबका साथ सबका विकास’ वाली मोदी की कार्यशैली से कार्य करते हुए और समाज के सभी वर्गों का निष्पक्ष व समान रूप से विकास कर योगी आदित्यनाथ को आजम खान और असदउद्दीन ओवैसी के पूर्वाग्रहों और शंकाओं को दूर करना होगा. सबसे बड़ी बात ये कि बेरोजगारों को रोजगार देना होगा और किसानों की खराब दशा सुधारनी होगी. अच्छी बात ये है कि अपना कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने कहा है कि लोक कल्याण के प्रति समर्पित ये सरकार बिना किसी भेदभाव के समाज के सभी वर्गों के लिए समान रूप से कार्य करेगी.’ जनता की आशा और उसका प्रेम आंसू में न बदले , बस यही गुजारिश है. जनता को किसी दिन पछताते हुए ये न सोचना पड़े-

बुरा हो इन बैरन अँखियों का कर बैठीं नादानी
पहले आग लगा दी मन में अब बरसाएं पानी
हाय रे जोगी ..

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~



Tags:       

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (7 votes, average: 4.86 out of 5)
Loading ... Loading ...

14 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

वेंकैया नायडू और केशव प्रसाद मौर्य को अपने खराब बर्ताव के लिए कार्यताओं से माफ़ी मांगनी चाहिए. नहीं तो मेरे जैसा मोदी के फलसफे ‘सबका साथ सबका विकास’ का समर्थक और एक जागरूक वोटर अगले चुनाव में वीजेपी को वोट देने की बजाय घर बैठना ज्यादा पसंद करेगा.

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

नेता कब ये समझेंगे कि कार्यकर्ता और वोटर उनसे ज्यादा कीमती और सम्मान के पात्र हैं. आज जिस कुर्सी पर नेता बैठे हैं, उन्हें कुर्सी से धकेलने की क्षमता जनता रखती है. हाँ, ये जरूर है कि ऐसा करने के लिए उसे पांच साल इन्तजार करना पडेगा.

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाये जाने से केवल मुस्लिम समाज ही चिंतित हो, ऐसा नहीं है. यह चिंता हिंदुओं में भी है. कई लोग जो भाजपा और संघ से जुड़े हैं, जो अपने को कट्टर हिन्दू समझते हैं, उनके मुख से सुना कि योगीजी को मुख्यमंत्री बना के भाजपा और संघ ने अच्छा तो किया है, लेकिन डर यही है कि उनके राज में दंगा-फसाद न हो.

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

‘सबका साथ सबका विकास’ वाली मोदी की कार्यशैली से कार्य करते हुए और समाज के सभी वर्गों का निष्पक्ष व समान रूप से विकास कर योगी आदित्यनाथ को आजम खान और असदउद्दीन ओवैसी के पूर्वाग्रहों और शंकाओं को दूर करना होगा. सबसे बड़ी बात ये कि बेरोजगारों को रोजगार देना होगा और किसानों की खराब दशा सुधारनी होगी.

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

बसपा सुप्रीमो मायावती ईवीएम मुद्दे को लेकर अगले कुछ दिनों के अंदर कोर्ट जा सकती हैं ! क्योंकि चुनाव आयोग से तो उन्हें निराशा ही हाथ लगी है ! चुनाव आयोग ने साफ शब्दों में कह दिया है कि ईवीएम में किसी प्रकार की कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है ! नेताओं को अपनी हार को गरिमामय ढंग से स्वीकार करना चाहिए और भारतीय लोकतंत्र का आदर करना चाहिए !

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

समाजवादी पार्टी ने ईवीएम मुद्दे को लेकर मायावती के कोर्ट जाने के फैसले का स्वागत किया है. सपा महासचिव और सांसद राम गोपाल यादव ने एक न्यूज चैनल पर कहा कि जनता के मन से संदेह जल्दी निकल जाए, ये जिम्मेदारी सरकार की है. सवाल ये है कि संदेह जनता के मन में कहाँ है? ये तो सिर्फ चुनाव हारे हुए नेताओं के मन में है. दरअसल यह भाजपा की भारी विजय को बर्दास्त नहीं कर पाने की असहिष्णुता भर है और कुछ नहीं.

Shobha के द्वारा
March 21, 2017

श्री सद्गुरु जी आपका लेख दो बार पढ़ा दुःख हुआ यही सत्य है | अभी तो मुस्लिम महिलाएं मोदी जी से आशा कर रहीं हैं वह ट्रिपल तलाक पर संज्ञान लें इतने काम हैं देंखें क्या करते हैं बहुत अधिक विधायक आना भी मती भृष्ट कर देता है सशक्त विपक्ष भी सत्ता पक्ष को दबाब में रखता हैं कार्यकर्ता बहुत भावुक होते हैं अब तो सत्ता में परिवार वाद चल पड़ा है वक्त निकल जाने पर ऐसे ही धक्के कार्यकर्ता को मिलते हैं |

harirawat के द्वारा
March 21, 2017

आदरणीय गुरूजी नमस्कार ! आपका लेख पढ़ा, जानकारी के लिए साधुवाद ! “हम जो कहा यह मानव नहीं होई, मानव रूप में धरे सुर कोई” ! जिसके चेहरे पर हर समय चिर परिचित मुस्कान रहती हो, जो जन कल्याण की के लिए ही इस धराधाम पर आवर्तित हुआ हो वह किसी भी प्रदेश की कुर्सी पर गलत व्यक्ति को नहीं विठा सकता ! फिर लोगों ने तो भगवान् राम – कृष्ण पर भी व्यंग वाणों की वर्ष करने में कोताही नहीं वरती थी ! लेखक अपने विचारों को प्रकट करने के लिए स्वतंत्र है ! आजम खान और ओवेसी जैसी शख्शियत के बारे में भला कौन नहीं जानता भला ये वो लोग हैं जो भारत में जन्मे जरूर हैं पर इनका मन … विस्तृत लेख के लिए धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

आदरणीय हरेन्द्र रावत जी ! सादर अभिनन्दन ! यूपी में भाजपा की सरकार बनी, इस बात की उसके सभी समर्थकों को है ! पीएम मोदी की तरह ही सीएम योगी आदित्यनाथ के आगे-पीछे भी कोई परिवार नहीं, बल्कि सिर्फ समाज और राष्ट्रसेवा की भावना ही है ! ब्लॉग में भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं के खराब व्यवहार की चर्चा की गई है, जो होनी भी चाहिए ! इसी में पार्टी का हित भी है ! ब्लॉग पर समय देने के लिए धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! आप विदुषी लेखिका ही नहीं, बल्कि बेहद समझदार और कृपालु पाठिका भी हैं ! बहुत से ब्लॉग पर आपके कमेंट देखकर ख़ुशी भी होती है और हैरानी भी ! इतना समय व्यस्त जीवन से कैसे निकाल लेती हैं ! आपके लेखन और पठन के सुसंस्कार और आदत को सलाम ! मेरा सौभाग्य है कि आपने लेख को दो बार पढ़ा ! टीवी पर सब देखसुनकर ख़ुशी के क्षणों में भी मैं बहुत उदास और दुखी था ! मीडिया पर इसकी कोई चर्चा न होने से मुझे हैरानी हुई ! मैंने इसपर लिखना जरुरी और उचित समझा ! इस मुद्दे पर आपके सहयोग और समर्थन का ह्रदय से आभारी हूँ ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

आदरणीय राजीव गुप्ता जी का कमें- “आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, कार्यकर्ताओं की वजह से ही नेता लोग सत्ता के शिखर तक पहुंचते हैं और वहां पहुंचने के बाद अगर वे खुद सत्ता के मद मे चूर होकर कार्यकर्ताओं को लताडना शुरु कर देंगे तो यह ना सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, पी एम मोदी की उस हिदायत का भी खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है जिसमे उन्होने जीतने पर भी विनम्रता का भाव बनाये रखने की अपील की है-आपने समस्या की तरफ अपने इस शानदार लेख मे ध्यान आकर्षित किया है और आशा यही की जाती है कि इस तरफ जरूरी कार्यवाही करते हुये आगे से ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाई जायेगी. समसामयिक और पठनीय लेख की प्रस्तुति के लिये आपका हार्दिक आभार एवं अभिनन्दन.”

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी का एक पठनीय कमेंट- “श्री आदरणीय सद्गुरु जी बिलकुल सही लिखा है आपका लेख पढ़ कर उदासी आ गयी कार्यकर्ता कितने भावुक होते हैं भावना का ऐसा बहाव ?कई तो अपना कैरियर ही बर्बाद कर लेते हैं हम जब विदेश से वापिस लौटे बहुत भावुक थे मुझे एक सज्जन ने कहा यहाँ कुछ बदलने वाला नहीं है सत्ता पाने वाले हर बार नये लार्ड आ जाते हैं भारत की जनता सर झुका कर जीवन की गाडी खींचती है चुनाव के दिन आते हैं शोर मचता है मतदाता की कद्र बढ़ती है वोट देने के बाद फिर सिर झुका कर जीवन की गाड़ी खींचते हैं |बहुत अच्छा लेख|”

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! बहुतों ने टीवी पर उस लाईव टेलीकास्ट को देखा होगा ! आपने सही कहा है कि यहाँ कुछ बदलने वाला नहीं है सत्ता पाने वाले हर बार नये लार्ड आ जाते हैं भारत की जनता सर झुका कर जीवन की गाडी खींचती है ! बीजेपी के नेताओं से उम्मीद थी कि वो प्रधानमन्त्री मोदी से कुछ विनम्रता सीखेंगे, लेकिन वो अपने व्यवहार से यही साबित कर रहे हैं कि वो दूसरे दलों के नेताओं से भिन्न नही हैं ! यह न सिर्फ कार्यकर्ताओं बल्कि वोटरों के लिये भी दुखद है ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने पोस्ट का समर्थन कर उसे जो सार्थकता प्रदान की है, उसके लिये हार्दिक आभार ! आपने बिल्कुल सही कहा है कि “कार्यकर्ताओं की वजह से ही नेता लोग सत्ता के शिखर तक पहुंचते हैं और वहां पहुंचने के बाद अगर वे खुद सत्ता के मद मे चूर होकर कार्यकर्ताओं को लताडना शुरु कर देंगे तो यह ना सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, पी एम मोदी की उस हिदायत का भी खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है जिसमे उन्होने जीतने पर भी विनम्रता का भाव बनाये रखने की अपील की है !” ऐसी घटनाएँ न सिर्फ निन्दनीय हैं, बल्कि बीजेपी के लिये चिंता का विषय भी होनी चाहिये ! कार्यकर्ता कोई उनके ग़ुलाम नही हैं ! यदि वो घर बैठ गये तो पार्टी चारो खाने चित्त हो जायेगी ! प्रधानमन्त्री मोदी को ऐसी घटनाओं की न सिर्फ जानकारी लेनी चाहिये बल्कि अपने नेताओं के बुरे व्यवहार पर लगाम भी कसनी चाहिये ! सादर आभार !


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran