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कश्मीर में पानी की तरह पैसा और अपने सैनिकों का कीमती लहू हमने क्यों बहाया?

Posted On: 15 Apr, 2017 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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इस समय पूरे देशभर में कश्मीर से आये एक ऐसे वीडियो की चर्चा हो रही है, जिसमे दिख रहा है कि चुनावी ड्यूटी से लौट रहे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक जवान की कुछ कश्मीरी युवक लात से पिटाई कर रहे हैं, पीछे से मुक्का मार रहे हैं, जवान के हेलमेट को उसके सर से उठा कर नीचे फेंक रहे हैं, सीआरपीएफ़ के जवानों को भद्दी-भद्दी गालियां दे रहे हैं और ‘इंडिया गो बैक’ के नारे लगा रहे हैं, जवानों के हाथों में हथियार है, फिर भी जवान चुपचाप उपद्रवी युवकों की सारी बदतमीजी झेलते हुए और मार खाकर भी बड़ी शांति से उन्हें समझाते हुए उनके बीच से निकलकर आगे बढ़ रहे हैं. ये वीडियो यह बताने के लिए काफी है कि कश्मीर में हालात कितने खराब हो चुके हैं या यों कहिये कि हमारे काबू से बाहर होते जा रहे हैं. अभी चंद रोज पहले जम्मू-कश्मीर राज्य के बडगाम इलाके में उपचुनाव हुआ था. सीआरपीएफ़ के जवानों से हुई बदसलूकी वाला वायरल वीडियो उसी इलाके का माना जा रहा है. उपद्रवियों से मार खा रहे और घोर अपमान झेल रहे सीआरपीएफ़ के जवानों ने कंधे पर बंदूक टंगी होने के वाबजूद भी उन्हें कोई जवाब नहीं दिया? इस बारे में सीआरपीएफ ने एक बयान जारी कर कहा है कि जवान ईवीएम और मतदान कर्मियों की सुरक्षा कर रहे थे. उपद्रवियों को जबाब देने से ज्यादा जरुरी ईवीएम को सुरक्षित रखना था. सीआरपीएफ ने अपने बयान में यह भी कहा है कि कश्मीर में ड्यूटी पर तैनात जवान कहीं से भी कमजोर नहीं है, बल्कि वो अपने संयमपूर्ण और शालीन व्यवहार से लोकतंत्र को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. मीडिया और सोशल मीडिया पर बहस का सबसे बड़ा मुद्दा बन बन चुके सैनिकों के अपमान वाला यह वीडियों देखकर आजकल पूरे देश का खून खोल रहा है.

लोगों को आश्चर्य हो रहा है कि जिनकी गोलियों के सामने बड़े से बड़े आतंकी तक नहीं टिकते हैं, वहीं जवान कश्मीर में शांति बनाए रखने के लिए और वहां के लोकतंत्र को बचाने के लिए पाकिस्तान की शह पर भाड़े पर लाए गए उपद्रवियों के हाथों मार खाते रहे, तमाम तरह के अपमान झेलते रहे, किन्तु फिर भी बन्दुक की भाषा न बोलकर भारतीय जवान सबकुछ झेलते हुए भी आगे बढ़ते रहे. आतंकियों और अलगाववादियों के समर्थक उन कश्मीरी युवकों का दुस्साहस तो देखिये कि उन्होंने एक जवान के हेलमेट को उसके सर से उठा कर दूर फेंक दिया. इस हैरान कर देने वाली दुस्साहसिक घटना को देखकर देशभक्तों का खून तो खोलना ही था. क्रिकेटर गौतम गंभीर ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए ट्विट किया, “भारत विरोधी लोग यह भूल गए हैं कि हमारे झंडे में केसरिया रंग गुस्से का प्रतीक भी है, सफेद रंग जिहादियों के लिए कफन और हरा रंग आंतक के खिलाफ नफरत को दर्शाता है.” गौतम गंभीर ने गुस्से में यहाँ तक लिखा कि भारतीय जवानों को एक चांटा मारने के बदले में 100 जिहादियों का मार देना चाहिए. क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए न सिर्फ दुख जाहिर किया, बल्कि उसे बदतमीजी की इंतहा बताया. नेता से लेकर अभिनेता तक बहुत से लोगों ने सैनिकों के साथ हुई बदतमीजी और बेहद अभद्र व्यवहार पर अपना गुस्सा और दुःख किसी न किसी माध्यम से व्यक्त किया. किन्तु हमारे देश में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो कश्मीरी युवकों से हमदर्दी रखते हैं और गौतम गंभीर की या उनके जैसे राष्ट्रवादियों की कटु आलोचना कर रहे हैं. खासकर गौतम गंभीर की उस बात से कि सेना के जवान पर पड़ने वाला हर तमाचा 100 जिहादियों की जान के बराबर है. जो लोग आजादी चाहते हैं वो हिन्दुस्तान छोड़कर किसी दूसरे मुल्क में चले जाएँ, क्योंकि कश्मीर हमारा है और हमेशा हमारा रहेगा.

जम्‍मू कश्‍मीर में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फॉर्स (सीआरपीएफ) के जवान से मारपीट और बदसलूकी का वीडियो सामने आने के बाद एक नया वीडियों और सामने आया है, जिसमें सेना की जीप की बोनट पर एक व्‍यक्ति को बंधा हुआ दिखाया गया है. हालाँकि अभी यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चला है कि वह कौन है? जीप से बांधे गए शख्‍स को कुछ लोग पत्‍थरबाज बता रहे हैं, जबकि कुछ लोगों के अनुसार पत्थरबाजों से बचने के लिए ऐसा किया गया है. जबकि कुछ लोग कह रहे हैं कि उन्हें सबक सिखाने के लिए गाड़ी से उसे बांधा गया है. यह भी कहा जा रहा है कि 9 अप्रैल को करीब 500 पत्थरबाजों की भीड़ ने एक पोलिंग बूथ पर हमला किया था और यह उन्ही में से एक था. सच चाहे जो भी हो, इस वीडियों पर त्वरित रूप से प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्‍ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट किया, ”क्‍या कोई क्रिकेट/फिल्‍म हीरो इस घटना की उसी तरह से आलोचना करेगा जब एक सेना के जवान से बदसलूकी की जाती है?” जानी-मानी महिला पत्रकार सागरिका घोष ने भी इस नए वीडियों के सामने आने के बाद गौतम गंभीर पर हमला करते हुए लिखा, ”गौतम गंभीर यदि कभी कश्‍मीर जाएं तो वे एक दिन पैलेट गन से आंखों की रोशनी गंवाने वाले किशोर के घर पर जरूर जाएं. वे ऐसा करेंगे तो मुझे हैरानी होगी.” ऐसे किशोर से हमदर्दी ठीक है, लेकिन आश्चर्य की बात है कि उन्होंने यह बताने की जहमत नहीं उठाई कि आंखों की रोशनी गंवाने वाले किशोरों को आखिर पैलेट गन से सेना को गोली क्यों मारनी पड़ी? यही तो सबसे बड़ी बीमारी है इस देश में कि कुछ लोग पत्रकार और बुद्धिजीवी बनकर राष्टवादियों का विरोध कर रहे हैं. कल को तो खुलकर वो ये भी कहेंगे कि कश्मीर को आजादी दे दो या फिर उसे पाकिस्तान को सौप दो.

यदि ऐसा ही करना था तो फिर पिछले 70 सालों से हमने दूसरे राज्यों का हक़ काटकर वहां पर पानी की तरह पैसा और अपने अनगिनत बहादुर सैनिकों का बेशकीमती लहू क्यों बहाया? हम उन्हें हर संकट व बाढ़ से बचाते हैं, शिक्षा, नौकरी, राशन-पानी से लेकर जीने-खाने के तमाम साधन उन्हें मुहैया कराते हैं, फिर उनके लिए हम क्यों बुरे बने हुए हैं? हुक्मरानों से देश की जनता तो यह सवाल पूछेगी ही. आखिर हमें जान-माल के नुकसान के सिवा कश्मीर से मिल क्या रहा है? दूसरे राज्यों के लोगों को वहां पर बसने तक की मनाही है. वहां का झंडा और संविधान तक अलग है. पहले वहां के मुख्यमंत्री अपने को प्रधानमंत्री कहते थे और अब भी वही सपना देखते हैं. कश्मीर समस्या का अब एक ही हल है कि उसे विशेष राज्य का दर्जा देने वाली धारा 370 को ख़त्म करो. सयुंक्त राष्ट्र संघ में इस मुद्दे को ले जा उसे विवादित मामला बनाने की जो बहुत बड़ी गलती हमारे पूर्व नेताओं ने की थी, उस गलती को मामला वापस ले सुधारा जाये. एक उपाय और होना चाहिए कि जम्मू-काश्नीर को जम्मू, कश्मीर और लेह-लद्दाक इन तीन राज्यों में जितनी जल्दी हो सके, बाँट देना चाहिए और दूसरे राज्यों के लोगों को भी वहां बसाया जाना चाहिए. रही बात कश्मीर में हमेशा से ही दखलंदाजी करने वाले पाकिस्तान की तो हमें अब इस सच्चाई को स्वीकार कर लेना चाहिए कि वो कभी सुधरने वाला नहीं है. उससे सैनिक ढंग से निपटने के साथ ही जितनी जल्दी हो सके सिंधु जल नदी संधि को तोड़कर उसकी तरफ बहने वाले पानी को रोक देना चाहिए. आप ढुलमुल रवैया क्यों अपनाते हैं? इसराइल और अमेरिका की तरह जबाब दें, एक स्वाभिमानी देश बनें. तभी दुनिया में हमारी कद्र होगी और वास्तविक धरातल पर भारत की एक ‘सुपर पावर’ या शक्तिशाली मुल्क की छवि बनेगी. जयहिंद.

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आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106.
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
April 16, 2017

आदरणीय महेंद्र जी की जानकारी भरी पठनीय प्रतिक्रिया- धारा 370 से ज्यादा खतरनाक है अनुच्छेद 35ए है जिसे नेहरू ने अंसवेधानिक तरीके से धारा 370 का पार्ट बना दिया इसी अनुच्छेद के कारण जम्मू-कश्मीर विधानसभा को यह अधिकार मिल गया कि वह जिसे चाहे उसे नी जम्मू-कश्मीर का नागरिक मानेगी…..और जिसे ना चाहे उसे नही मानेगी .यह अन्नूच्छेद केवल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से धारा 370 मे जोड़ दिया गया जबकि ऐसा करने के लिये ससंद की मंजूरी की जरूरत थी इसलिये 1954 मे नेहरू ने बड़ी चालाकी से इसे जोड़ दिया और देश की जनता और तो और सासदो तक को पता नही चला……यही नेहरू की दोगली नीति आज नासूर बनकर देश का हजारो-हजारो करोड़ रुपये बर्बाद करवा रही है…..देश के जवान शहीद हो रहे है………जब तक किसी भी पार्टी को संसद मे तीन चोथाई बहुमत नही मिल जाता तबतक धारा 370और अनुच्छेद 35ए खत्म नही हो सकता है……और हम रोज ऐसे ही देखते रहेंगे…….जय हिन्द…जय भारत

sadguruji के द्वारा
April 16, 2017

आदरणीय महेन्द्र जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! बहुत सटीक और जानकारी से भरी प्रतिक्रिया आपने दी है ! इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद ! सही बात है कि भूतपूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की गलत नीति के कारण ही आज कश्मीर समस्या नासूर बनकर देश का हर साल हजारो-हजारो करोड़ रुपये बर्बाद करवा रही है ! आपकी बात से सहमत हूँ कि जब तक किसी भी पार्टी को संसद मे तीन चोथाई बहुमत नही मिल जाता तबतक धारा 370 और अनुच्छेद 35ए खत्म नही हो सकता है. जब तक कश्मीर समंस्या स्थायी रूप से हल नहीं होती, तबतक हम रोज ही कश्मीर में ऐसे ही अपमानजनक प्रसंग और खून खराबे देखते रहेंगे ! ब्लॉग पर समय और प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

Shobha के द्वारा
April 17, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं अलगाव वादी कुछ भी जतन कर लें कश्मीर में कुछ नहीं कर सकेंगे अपनी ही कम्यूनिटी को पाषाण युग में ले जा रहे हैं

sadguruji के द्वारा
April 17, 2017

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! निसंदेह कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं और अलगाववादी उसे जबरदस्ती भारत से अलग नहीं कर सकते हैं, किन्तु नाक में डैम कर सकते हैं, जो उन्होंने कई दशकों से किया हुआ है ! आज जम्मू-काश्मीर को राष्ट्रपति शासन और जगमोहन जी जैसे सख्त राज्यपाल की जरुरत है ! लोकतंत्र का तो अलगाववादी मखौल बना के रख दिए हैं ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
April 19, 2017

कश्मीर समस्या का अब एक ही हल है कि उसे विशेष राज्य का दर्जा देने वाली धारा 370 को ख़त्म करो. सयुंक्त राष्ट्र संघ में इस मुद्दे को ले जा उसे विवादित मामला बनाने की जो बहुत बड़ी गलती हमारे पूर्व नेताओं ने की थी, उस गलती को मामला वापस ले सुधारा जाये. एक उपाय और होना चाहिए कि जम्मू-काश्नीर को जम्मू, कश्मीर और लेह-लद्दाक इन तीन राज्यों में जितनी जल्दी हो सके, बाँट देना चाहिए और दूसरे राज्यों के लोगों को भी वहां बसाया जाना चाहिए.

sadguruji के द्वारा
April 19, 2017

रही बात कश्मीर में हमेशा से ही दखलंदाजी करने वाले पाकिस्तान की तो हमें अब इस सच्चाई को स्वीकार कर लेना चाहिए कि वो कभी सुधरने वाला नहीं है. उससे सैनिक ढंग से निपटने के साथ ही जितनी जल्दी हो सके सिंधु जल नदी संधि को तोड़कर उसकी तरफ बहने वाले पानी को रोक देना चाहिए. आप ढुलमुल रवैया क्यों अपनाते हैं? इसराइल और अमेरिका की तरह जबाब दें, एक स्वाभिमानी देश बनें. तभी दुनिया में हमारी कद्र होगी और वास्तविक धरातल पर भारत की एक ‘सुपर पावर’ या शक्तिशाली मुल्क की छवि बनेगी.

sadguruji के द्वारा
April 24, 2017

कश्मीर घाटी के खराब हालात को लेकर पीएम मोदी से मुलाकात के बाद महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि मौजूदा हालात से बाहर निकलने के लिए हर हालात में बातचीत जरूरी है. अटल बिहारी वाजपेयी ने जहां बातचीत छोड़ी थी वहीं से शुरुआत होनी चाहिए. सवाल यह है कि बातचीत किससे हो और बातचीत किन शर्तों पर हो और बातचीत के लिए कोई तैयार भी होगा या नहीं?

sadguruji के द्वारा
April 24, 2017

फिलहाल अलगाववादियों से बातचीत करने से ज्यादा जरुरी पहले उसके लिए माहौल बनाना है. आज कश्मीर में एक ओर पत्थरबाजी हो रही है और और दूसरी तरफ गोलीबारी. ऐसे खराब माहौल में बातचीत संभव ही नहीं है. महबूबा मुफ़्ती कह रही हैं कि दो तरह के लोग पत्थरबाजी में शामिल हैं, एक वे जो सिस्टम से खफा हैं और दूसरे वो जिन्हें जानबूझकर उकसाया जाता है. इसका कोई समाधान उनके पास नहीं है.


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