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'तीन तलाक' पर सिर्फ बोलने की बजाए मोदी व योगी कुछ करके दिखाएं -राजनीति

Posted On: 18 Apr, 2017 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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रविवार को भुवनेश्वर में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक के मुद्दे पर पहली बार अपनी स्पष्ट राय व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी मुस्लिम बहनों को भी न्याय मिलना चाहिए, लेकिन हम नहीं चाहते हैं कि तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम समाज में टकराव हो. भाजपा कार्यकारिणी की बैठक में पीएम मोदी के दिए गए भाषण की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पत्रकारों को बताया कि सामाजिक न्याय की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने बैठक में कहा कि यदि कोई सामजिक बुराई है तो हमें समाज को जगाना चाहिए और मुस्लिम महिलाओं को न्याय उपलब्ध कराना चाहिए. तीन तलाक की संवैधानिक मान्यता पर सुप्रीम कोर्ट मई में सुनवाई करेगी. ये जरुरी है कि बदलते दौर में जो रिवाज गलत हैं और किसी को अगर तकलीफ दे रहे हैं, उसमे सुधार होना ही चाहिए. मुस्लिम समाज से जुड़े कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि तीन तलाक महिलाओं की लैंगिक समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है, इसलिए तीन तलाक पर पाबंदी लगनी चाहिए. इसी मुद्दे पर बोलते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि इस ज्वलंत समस्या को लेकर जो लोग मुंह बंद किए हुए हैं, वे दोषी हैं. योगीजी चाहे जो कहें, किन्तु सिर्फ बोलने से ही यह समस्या हल होने वाली नहीं है.

सोमवार को प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह की 91वीं जयन्ती पर लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में तीन तलाक के मुद्दे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुझे महाभारत की वह सभा याद आती है, जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था, तब द्रौपदी ने उस भरी सभा से एक प्रश्न पूछा था कि आखिर इस पाप का दोषी कौन है. तब कोई बोल नहीं पाया था, केवल विदुर ने कहा था कि एक तिहाई दोषी वे व्यक्ति हैं, जो यह अपराध कर रहे हैं, एक तिहाई दोषी वे लोग हैं, जो उनके सहयोगी हैं, और तिहाई वे हैं जो इस घटना पर मौन हैं. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि देश का राजनीतिक क्षितिज तीन तलाक को लेकर मौन बना हुआ है.’ इस कार्यक्रम में उन्होंने कॉमन सिविल कोड की चर्चा करते हुए कहा कि चंद्रशेखर सिंह ने भी कहा था कि देश में एक सिविल कोड बनाने की जरूरत है. जब हमारे अन्य मामले समान हैं, तो शादी ब्याह के कानून भी समान क्यों नहीं हो सकते हैं? पीएम मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी के बयानों से तो यही लगता है कि तीन तलाक का दंश झेलने वाली मुस्लिम बहनों की तकलीफ उन्हें अपने दिल की गहराई से महसूस हो रही है और वो ये मान रहे हैं कि अब उनके साथ न्याय होना चाहिए.

मुस्लिम बहनें भी शायद उनके बार में यही सोच रही होंगी, किन्तु पीएम मोदी और मुख्यमंत्री योगी की इस संवेदनशील मुद्दे पर अब तक की गई केवल जबानी कार्यवाही से मुझे तो यही लगता है कि नेता चाहे किसी भी पार्टी के क्यों न हों, तीन तलाक के मुद्दे पर सब के सब दिल से नहीं, बल्कि दिमाग से काम ले रहे हैं और अपना नफा-नुकसान देखकर ही कुछ बोल रहे हैं. कांग्रेस मुख्यमंत्री की निजी बेबसाइट पर योगी आदित्यनाथ द्वारा लिखे गए एक लेख के हवाले से यह आरोप लगा रही है कि वो महिलाओं की स्वतंत्रता के विरोधी हैं. हालाँकि उस लेख में योगीजी ने यही कहा है कि स्त्री को बचपन में पिता का, युवावस्था में पति का और वृद्धावस्था में पुत्र का संरक्षण मिलना चाहिए. पुरुष में स्त्री वाले गुण हों तो अच्छा है, लेकिन स्त्रियों में पुरुषों वाला गुण नहीं होना चाहिए. मैं नहीं समझता कि उन्होंने कुछ गलत लिखा है. कांग्रेस क्या चाहती है कि महिलाएं पुरुषों वाले गुण अपना दारु पियें और जुआ खेलें? महिलाओं की तरफ पुरुष इसलिए आकर्षित होते हैं, क्योंकि उनमे नैसर्गिक रूप से शर्म, लज्जा, नाजुकता, कोमलता और नशे व जुए से दूर रहे की प्रवृति होती है. पुरुषों को स्त्रियोंचित गुण भाते हैं और स्त्रियों को पुरुषोचित.

एक तरफ जहाँ तमाम सेक्युलर सियासी पार्टियां तीन तलाक के मुद्दे पर दुविधा में फंसी हैं कि मर्दों का साथ दें या महिलाओं का, वहीँ दूसरी तरफ केंद्र व कई राज्यों में सत्तासीन राष्ट्रवादी पार्टी बीजेपी मुस्लिम महिलाओं का साथ देने में अपना एक बहुत बड़ा सियासी फायदा देख रही है, जहाँ पर राजनीतिक या वोट बैंक के रूप से उसे खोने का कोई डर नहीं है, लेकिन अनगिनत मुस्लिम महिलाओं का समर्थन या कहिये वोट पाने के रूप में एक बहुत बड़ी आशा है. अब ये भाजपा के हाथ में है कि वो तीन तलाक के खिलाफ आवाज बुलंद की हुई असंख्य मुस्लिम महिलाओं के लिए कुछ कर के दिखाए. तमाम सियासी पार्टियों सहित ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी नहीं चाहता है कि इस मसले पर बीजेपी कुछ करे और उसका सियासी फायदा उठा मुस्लिम समाज में, खासकर महिलाओं में अपनी पैठ मजबूत करे. यही वजह है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बार-बार एक ही बात दुहरा रहा है कि देश में शरिया कानूनों में किसी भी तरह की दखलंदाजी को सहन नहीं कर सकते. हालाँकि भारत में कोई शरिया या इस्लामी कानून लागू नहीं है, केवल शादी और तलाक आदि के मामले में मुस्लिम समाज को कुछ संवैधानिक आजादी भर मिली हुई है.

समय की जरुरत के हिसाब से इसमें भारतीय संसद कानून बना कोई भी संशोधन कर सकती है. इसी डर से उसने बोर्ड की अचानक दो दिनी बैठक आयोजित की और उसके बाद बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने मुस्लिम समाज को चेतावनी दी कि जो भी शरिया (इस्लामी कानून) के खिलाफ जाकर तलाक देगा उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा. बोर्ड के इस फैसले से मुस्लिम महिलाएं संतुष्ट नहीं हैं. वो चाहती हैं कि फेसबुक, व्हाट्सअप, ई-मेल और मैसेज के जरिए आजकल जो तीन तलाक देने का गलत रिवाज चल पड़ा है, उस पर तत्काल रोक लगे. चाहे यह रोक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड लगाए या फिर सरकार, संसद या सुप्रीम कोर्ट. दरअसल मुस्लिम महिलाओं की सबसे बड़ी पीड़ा इस बात की है कि देशभर के उलेमाओं के मुताबिक जिन तरीकों से तलाक हो जाता है उनमें, नशे में दिया गया तलाक, गुस्‍से में दिया गया तलाक, सपने में दिया गया तलाक, नौकर से बीवी को कहलवाया गया तलाक, स्‍काइप, ईमेल, खत, एसएमएस, व्‍हाट्सऐप, ट्विटर, फेसबुक मैसेंजर और फोन पर दिया गया त‍लाक तक शामिल है. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इन गलत रिवाजों का विरोध करने की बजाय उल्टे उलेमाओं का ही साथ दे रहा है.

दूसरी तरफ शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक के खिलाफ आम राय बनाने की एक बड़ी मुहिम छेड़ रखी है. उसने फैसला किया है कि सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के खिलाफ पहले से चल रहे केस में बोर्ड इंटरवेंशन पिटीशन दाखिल कर इस पर पाबंदी लगाने की मांग करेगा. बोर्ड के सदस्‍यों ने यह तर्क दिया है कि कुरान में तीन तलाक नहीं है, फिर यहां क्‍यों लागू है? शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्‍ता मौलाना यासूब अब्‍बास कहते हैं, ‘इस देश में दाल में नमक ज्‍यादा होने, खाना खराब बनाने, शौहर के दोस्‍त से हंसकर बात कर लेने पर भी मर्द तीन तलाक कह के तलाक दे दे रहे हैं. इसमें औरत की कोई सुनवाई नहीं है, इसलिए सरकार ने जिस तरह सती प्रथा को प्रतिबंधित करने के लिए कानून बनाया था, उसी तरह इसे भी कानून बनाकर प्रतिबंधित करे.’ इस्लाम के जानकार बताते हैं कि तीन तलाक बोलना इस्लाम के बिल्कुल खिलाफ अमल है और एक बहुत बड़ा गुनाह है. उनके अनुसार सही तो यही है कि दो जिम्मेदार गवाहों के सामने शौहर बीवी से सिर्फ इतना कहे कि ”मैं तुम्हे तलाक देता हूं”. इसके साथ ही वो तलाक से पहले सुलह की पूरी कोशिश करने, मासिक धर्म के दिनों में तलाक न देने, तलाक के बाद 3 महीने यानि इद्दत की अवधि तक और अगर वो गर्भवती है तो बच्चा होने तक शौहर के ही के घर में रहने की बात भी करते हैं.

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आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106
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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

amarsin के द्वारा
April 18, 2017

एक साथ तीन तलाक वाली प्रथा वाकई ख़तम होनी चाहिए…. बहुत सुन्दर लेख…

jlsingh के द्वारा
April 18, 2017

आदरणीय सद्गुरु जी, आपने सही मुद्दा उठाया है उम्मीद की जानी चाहिए की योगी जी और मोदी जी सही समय पर सही कदम उठाएंगे.

sadguruji के द्वारा
April 19, 2017

आदरणीय सिंह साहब ! सादर अभिनन्दन ! सबको उम्मीद तो यही है कि योगी जी और मोदी जी इस दिशा में कुछ सार्थक और पीड़ित महिलाओं को राहत देने वाला कदम जरूर उठाएंगे ! पोस्ट की सराहना के लिए धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
April 19, 2017

आदरणीय अमर सिंह जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! अधिकतर लोग इस बात पर सहमत हैं कि एक साथ तीन तलाक वाली प्रथा ख़त्म होनी चाहिए, लेकिन पुरुष प्रधान समाज महिलाओं को अपने वश में करके रखने और शोषण करने का आदि हो चुका है, इसलिए वो महिलाओं को लैंगिक समानता से जुडी कोई भी राहत या आजादी नहीं देना चाहता है ! लेख को बहुत सुन्दर महसूस कर उसे सार्थकता प्रदान करने के लिए हार्दिक आभार !

Shobha के द्वारा
April 19, 2017

आदरणीय सद्गुरु जी आपके लेख के पांच पैराग्राफ हैं यु कहिये पांच हेडिंग हर लाइन में आपके विचार भरे पड़े हैं परन्तु लेख बड़ा न हो जाए आपने छोटा करने की कोशिश की है मुझे मेरे गुरु बहुत बड़े लेखक थे उन्होंने समझाया था आज ही सब लिख दोगी आगे क्या लिखोगी वह कहते थे एक हेडिंग उठाओ उसका विस्तार करो जबकि में भी ऐसा नहीं कर पा रही हूँ आपका लेख मेने बोल – बोल कर पढ़ा में अच्छे लेख ऐसे ही पढ़ती हूँ मुझे अपने सर याद आ गये आप मेरी बात को अन्यथा नहीं लीजिएगा मेने जो सीखा है व्ही लिख रही हूँ अप ध्यान दें सम्पादकीय लेख में एक ही पॉइंट को घुमाते हैं आपका लेख अंग्रेजी की लाइन है नेल इन दा हेड यही नहीं सोच को दिशा देता है |

sadguruji के द्वारा
April 20, 2017

आदरणीय डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिन्दन ! आपने इतने ध्यान से लेख पढ़ा, इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! आपने बहुत अच्छी चर्चा की है ! लेकिन आजकल एक ही मुद्दे पर इतने लोंगो के इतने भिन्न भिन्न विचार होते हैं कि किसी एक ब्लॉग में समेटना मुश्किल हो जाता है ! मंचों की भी अव्यवस्थित संचालन स्थिति तो आप देख ही रही हैं ! कभी कभी तो कई रोज तक फीचर स्टेटस बदलता ही नहीं है और अक्सर बहुत अच्छी रचनाएं भी फीचर नहीं हो पाती हैं ! इस और मंच को ध्यान देना चाहिए ! ब्लॉग पर समय देने के लिए धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
April 20, 2017

Syed Muhammad भाई मेरे, और भी गम हैं ज़माने मे मुहब्बत के सिवा! विकास कीजिये किसने रोका है सरकार को. यह टकराओ और स्वार्थ की राजनीति बंद होनी चाहिये.

sadguruji के द्वारा
April 20, 2017

आदरणीय सैइद मुहम्मद जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! काफी समय पहले जब देश मे “सती-प्रथा” थी, तब भी कुछ लोग ऐसा ही कहते थे ! मानस मे कहा गया है कि “जाके पैर न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई !” तीन त्लाक से पीड़ित महिलाएँ ही उस वेदना को भलीभांति समझती हैं, जो वो झेल रही हैं ! मुस्लिम समाज खुद ही इस मुद्दे पर सब महिलाओं को मान्य कोई रास्ता निकाल ले, वो सबसे अच्छा है ! इस बात को लेकर हो रही सारी राजनीति खुदबखुद बंद हो जायेगी ! ब्लॉग पर समय और प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !


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