सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

516 Posts

5634 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15204 postid : 1325870

सुप्रीम कोर्ट: आसमान गिरे तो गिरे, किन्तु न्याय अवश्य होना चाहिए -अयोध्या विवाद

Posted On: 21 Apr, 2017 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मुसलमान औ’ हिन्दू हैं दो
एक मगर उनका प्याला,
एक मगर उनका मदिरालय
एक मगर उनकी हाला,
दोनों रहते एक न जब तक
मस्जिद-मन्दिर में जाते,
बैर बढ़ाते मस्जिद मन्दिर
मेल कराती मधुशाला।

आज ब्लॉग लिखने बैठा तो वर्षों पहले पढ़ी कवि हरिवंश राय बच्चन की यह कविता याद आ गई, जो आज के सामाजिक और राजनीतिक हालात में भी उतनी ही प्रासंगिक और सत्य से परिपूर्ण लगती है, जितनी कि बच्चनजी के समय थी. उन्होंने बिलकुल सही कहा है कि हिन्दुस्तान के हिन्दू और मुसलमान धार्मिक दृष्टि से भले ही दो हैं, लेकिन उनका प्याला, मदिरालय और हाला (मदिरा) एक ही है अर्थात उनका मुल्क ही प्याला, मदिरालय और हाला है, जिसपर उनका सांसारिक जीवन आश्रित है. संसार को बच्चनजी एक ऐसी मधुशाला मानते हैं, जहाँ पर एक ही ईश्वर से निकली अनगिनत आत्माओं का मेल होता है. संसार एक मिलन की जगह है, उस ईश्वर को ढूंढने की जगह है, जिसके हम सबलोग अंश और अमृत पुत्र हैं. आत्मिक और वास्तविक रूप से हम सब का कभी विनाश नहीं होगा, इसलिए हमलोग ईश्वर के अमृत पुत्र हैं. जीवन और संसार का सही और सत्य मार्ग तो यही है, फिर क्यों हमलोग सत्य के मार्ग से भटके हुए है और आपस में कई तरह के मुद्दों को लेकर लड़ झगड़ रहे हैं? हम क्यों अज्ञानता के अन्धकार और मायावी भूलभुलैया के चक्कर में फंसकर घनचक्कर हो रहे हैं और अपने साथ साथ दूसरे और भी बहुत से लोगों का जीवन नरक से भी बदतर बनाये हुए हैं? बच्चनजी के फ़ारसी सूफ़ी दर्शन वाले ‘हालावाद’ का मूल सन्देश भी यही है.

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में 13 लोगों पर आपराधिक साजिश का मुकदाम चलाने का आदेश दिया है. दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद अज्ञात कारसेवकों और आडवाणी, जोशी, उमा भारती जैसे भाजपा के अनेक बड़े नेताओं समेत कई हिन्दू नेताओं व धर्मगुरुओं के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई थी, जिन पर पर बाबरी मस्जिद गिराने के लिए भड़काऊ भाषण देने का आरोप था. सीबीआई ने इन सबके खिलाफ बाबरी मस्जिद गिराने की साजिश रचने के आरोप में चार्जशीट दाखिल की थी. मई 2001 में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने टेक्निकल ग्राउंड का हवाला देते हुए आडवाणी, जोशी, उमा भारती, बाल ठाकरे और अन्य के खिलाफ आरोपों को हटाकर उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन सीबीआई ने साल 2004 में स्पेशल सीबीआई कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने मई 2010 में सीबीआई की अपील को खारिज कर दिया था और सीबीआई की रिवीजन पिटीशन को आधारहीन बताया था. सीबीआई ने फिर भी हिम्मत नहीं हारी और हाईकोर्ट के फैसले को साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2017 में इस बात के संकेत दिए थे कि बाबरी मस्जिद गिराने के मामले में बीजेपी नेताओं के खिलाफ आपराधिक आरोपों की समीक्षा की जा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने स्पष्ट रूप से कहा कि लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 13 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश का मामला जरूर चलना चाहिए. जो लोग सीबीआई को प्रधानमंत्री मोदी के हाथों की कठपुतली बता उस पर भेदभाव करने के आरोप लगाते हैं, उन्हें इस मामले में सीबीआई की निर्भीक और निष्पक्ष कार्यवाही पर गौर फरमाना चाहिए. राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव तो इसमें भी घटिया राजनीती करने से बाज नहीं आते हैं, जब वो कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने सीबीआई का बेजा इस्तेमाल कर आडवाणी को राष्ट्रपति पद की रेस से बाहर कर दिया है. उनके अनुसार यह आडवाणी के खिलाफ एक साजिश है और पहले से ही सोची-समझी गई एक बहुत बड़ी राजनीति है. यदि सुप्रीम कोर्ट बाबरी मस्जिद विध्वंस के मामले में भाजपा के नेताओं पर केस चलाने की सीबीआई की अपील को खारिज कर देती तो यही लालू प्रसाद यादव भारत की न्याय व्यवस्था पर अंगुली उठाते. इस मामले में सीबीआई की निष्पक्षता की जितनी भी तारीफ़ की जाए वो कम है. इससे यह भी साबित होता है कि मोदी सीबीआई के कामों में हस्तक्षेप नहीं करते हैं. अयोध्या में मंदिर-मस्जिद दोनों बनाने के साथ ही जो लोग बाबरी-मस्जिद को गिराने के दोषी हैं, उन्हें भी सजा जरूर मिलनी चाहिए.

माननीय सुप्रीम कोर्ट भी कह रही है कि ‘आसमान गिरे तो गिरे, किन्तु न्याय अवश्य होना चाहिए. 25 साल पहले हुए इस अपराध ने देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को हिलाकर रख दिया था. इलाहाबाद हाई कोर्ट को जो फैसला वर्षो पहले करना चाहिए था, वह अब हो रहा है.’ सुप्रीम कोर्ट की इस मुद्दे पर संजीदगी और साफगोई काबिलेतारीफ है, किन्तु हिन्दुस्तान में जो राजनीतिक हस्तक्षेप और न्यायिक देरी होती है, उससे यह उम्मीद कम ही है कि दो साल में मामले की सुनवाई पूरी हो जायेगी और आरोपियों को सजा मिल पायेगी. यदि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार साल 2019 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के पच्चीस साल पुराने मामले में आरोपियों को सजा मिलती है तो यह बहुत बड़ी बात होगी. किन्तु तबतक तो इस मुद्दे को लेकर पुरजोर राजनीति भी होती रहेगी. विपक्ष के कुछ नेता इसे लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर करने की मोदी की चाल बता रहे हैं तो वहीँ दूसरी तरफ कुछ नेता इसे अपने राजनीतिक फायदे के लिए 2019 के लोकसभा चुनाव तक अयोध्या विवाद को भड़काने की भाजपा की सोची-समझी रणनीति बता रहे हैं.

नेता लोग अपने फायदे के लिए ‘अयोध्या विवाद’ पर चाहे जो कुछ भी कहें, किन्तु देश का माहौल खराब करने वाली और देश के विकास में एक बहुत बड़ी बाधा बनी वर्षों पुरानी मंदिर-मस्जिद वाली घटिया राजनीति का अंत अब होना ही चाहिए. अंत में कवि हरिवंश राय बच्चन की काव्य पुस्तक ‘मधुशाला’ की कुछ पंक्तियों की चर्चा करूंगा, जिसके अनुसार सत्य की खोज के लिए मनुष्य को किसी मंदिर-मस्जिद की जरुरत नहीं है.

मदिरालय जाने को घर से
चलता है पीनेवला,
‘किस पथ से जाऊँ?’
असमंजस में है वह भोलाभाला,
अलग-अलग पथ बतलाते सब
पर मैं यह बतलाता हूँ-
‘राह पकड़ तू एक चला चल,
पा जाएगा मधुशाला।’

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106.
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~



Tags:     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 4.83 out of 5)
Loading ... Loading ...

10 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sinsera के द्वारा
April 22, 2017

आदरणीय सद्गुरुजी प्रणाम, मुझे राजनीतिक उठापटक अपने आप तो बिलकुल समझ नहीं आती है.जब कोई कहता है कि इस समय केस का खुलना फलां फलां लोगों का राष्ट्रपति चुनाव से बाहर करना है तब मुझे लगता है कि ये तो सही बात है. लेकिन एक बात तो है बाबरी मस्जिद अनायास ही नहीं टूट गयी थी बल्कि पहले से प्लान था. उस समय इंडिया टुडे ने कवर किया था. नेताओं ने खुद कबूला था कि गैंती फावड़े और कुदालें रात ही में तैयार कर लिए गए थे. दुःख तो बस यह है कि नेताओं ने सिर्फ भड़काऊ भाषण दिए और जान देने और गोली खाने का काम निरीह अंधभक्त इंसानों के हिस्से में आया.

jlsingh के द्वारा
April 22, 2017

युद्द देश और राजाओं के नाम पर लडे जाते हैं पर शहीद लड़नेवाले सिपाही ही होते हैं यह बात तो अटल सत्य है कभी कभी कोई राजा युद्ध में मारा जाता है पर आज तो राजा कड़ी सुरक्षा के बीच रहता है पर मौत तो आनी है एक दिन …. जो आडवाणी जी ने किया उसकी सजा वे भुगत रहे हैं और जो बाकी लोग कर रहे हैं वे भी अजातशत्रु तो नहीं ही हो सकते … श्री राम और श्री कृष्ण भी एक समय के बाद अपनी गति को प्रपात हुए ही थे. और ज्यादा काया कहूँ… राजनीती ऐसी ही होती है…. सादर आदरणीय सरिता बहन और आदरणीय सद्गुरु जी!

sadguruji के द्वारा
April 22, 2017

आदरणीय सिंह साहब ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आप सही कह रहे हैं कि अमर तो कोई भी नहीं है, सबको एक न एक दिन मरना है ! रही बात आडवाणी, जोशी और अन्य नेताओं के अपराध कि तो तो यदि वे दोषी हैं तो उन्हें सजा जरूर मिलनी चाहिए ! ब्लॉग पर समय देने के लिए सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
April 22, 2017

आदरणीया सरिता सिन्हा जी ! सादर अभिनन्दन ! आपकी बात से सहमत हूँ कि बाबरी मस्जिद अनायास ही नहीं टूट गयी थी, बल्कि पहले से ही इसे तोड़ने का पूरा प्लान तैयार कर लिया गया था ! इसमें बहुत से लोग शामिल थे ! आज सब एक दूसरे को दोष दे रहें हैं ! प्रतिक्रिया देने के लिए सादर आभार !

harirawat के द्वारा
April 22, 2017

सद्गुरुजी नमस्कार, राममंदिर जिसे तोड़ कर बाबर ने बाबरी मस्जिद बना दिया था, १९९२ का केस जब कांग्रेस सत्ता में रही और दिवगंत पीवी नरसिंघा राव जो शास्त्री जी के बाद दूसरे प्रधान मंत्री बने परिवारवाद से अलग ! अब जाकर २५ साल बाद उसका फैसला आया, लालू प्रशाद यादव को मवेशी चारे का स्वाद याद आया, तभी तो उसने झटपट फ़रमाया “ये चाल भाजपा की है, लालकृष्ण आडवाणी को राष्ट्रपति बनने राह में रोड़ा अटकाने” ! लेख के लिए बधाई !

sadguruji के द्वारा
April 22, 2017

आदरणीय हरेंद्र रावत जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! विवादित ढांचा ढहाने के मामले में सीबीआई का पिछले पच्चीस वर्षों का कड़ा संघर्ष उसे सरकारी तोता कहने वालों के मुंह पर पड़ा करारा तमांचा है ! उसने पूरी ईमानदारी और निष्ठा से अपना फर्ज अदा किया है ! पीएम मोदी ने भी साबित कर दिया है कि वो सीबीआई के क़ानूनी कामों में कोई बढ़ा नहीं डाल रहे हैं ! यह राष्ट्र के लिए एक बहुत अच्छा सन्देश है ! ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
April 22, 2017

उन्नाव के बीजेपी सांसद साक्षी महराज कह रहे हैं कि मूर्ति हटवाने, ताला खुलवाने आदि सब काम कांग्रेस सरकार में हुए हैं, तो मुकदमा कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और राजीव गांधी पर बनता है ! वो तो यहाँ तक कहते हैं कि विवादित ढांचा तोड़ने वालों में नरसिम्हा राव के गुरूजी भी शामिल थे ! बेशक अयोध्या विवाद ने हिंदुत्व की लहर को शिखर पर पहुंचाया और भाजपा को उसका राजनीतिक लाभ भी मिला, लेकिन उससे ज्यादा राजनीतिक कमाल तो पीएम मोदी ने विकास के एकसूत्री एजेंडे पर चलकर कर दिखाया ! जाहिर सी बात है कि लोग अयोध्या विवाद से ज्यादा विकास को महत्व देते हैं !

sadguruji के द्वारा
April 22, 2017

राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ नेता डॉ. रामविलास दास वेदांती कह रहे हैं कि बाबरी ढांचा मैंने तुड़वाया था ! मेरे ही कहने पर कारसेवकों ने बाबरी ढांचा गिराया था ! उन्होंने कहा कि आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी कारसेवकों को ढांच न तोड़ने के लिए समझा रहे थे, इसलिए वो लोग जरा भी दोषी नहीं हैं ! वो लोग बेकसूर हैं ! उन्होंने यहाँ तक कहा कि अगर कोर्ट फांसी की सजा मुझे दे तो भी मैं फांसी पर लटकने को तैयार हूं ! ढांचा तोड़ने के दोषियों में उन्होंने अपने अलावा महंत अवैद्यनाथ और अशोक सिंघल का नाम लिया ! भाजपा के पूर्व सांसद और रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. रामविलास वेदांती ने एक और चौंकाने वाला दावा किया कि विवादित ढांचा गिराने के मामले में उस समय के प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की भी सहमति थी ! इसका सीधा सा मतब तो यह है कि सबकी मिलीभगत से बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया ! सच क्या है, इसकी जांच होनी चाहिए !

Shobha के द्वारा
April 27, 2017

श्री आदरणीय समझ नहीं आता कैसे आपके मजेदार लेख को पढने से वंचित रह गयी सही लिखा है एक बार एक रुबाई पढ़ी थी ‘नसीर एक पुराना शराबी ,गर मिली न गुलाबी ‘ऐसा न हो की जन्नत में जाकर मैकदे में फिर लौट आयें ” यहाँ कोइ मजहब का बंधन नहीं है राममन्दिर निर्माण में आने वाली बाधाओं को देख कर हैरानी होती है एक चेनल में जनाब प्रश्न कर रहे थे राम तो कोइ नहीं थे मिथक है अपने मजहब के पक्के दूसरों की आस्था पर सवाल उठाते है

sadguruji के द्वारा
April 28, 2017

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट को पसंद करने और ब्लॉग पर समय देने के लिए धन्यवाद ! मेरे विचार से तो अयोध्या में मंदिर और मस्जिद दोनों का एक साथ निर्माण हो तो सबसे अच्छा है ! इससे हिन्दू मुस्लिम के बीच नफरत काम होगी और उन्हें एक सही सन्देश मिलेगा कि “तुम राम कहो के रहीम कहो, मतलब तो उसी की बात से है ! काबे में रहो या काशी में, निस्बत तो उसी की ज़ात से है ! ये मस्जिद है वो बुतखाना, चाहे ये मानो चाहे वो मानो ! मकसद तो है दिल को समझाना, मानो ये मानो चाहे वो मानो… !!”


topic of the week



latest from jagran