सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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कमी देश के जवानों और कमांडरों में नहीं है, बल्कि देश के लीडरों में है-जंक्शन फोरम

Posted On: 4 May, 2017 Junction Forum में

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इस साल 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में 9 गोली लगने के बाद घायल होने वाले और लगभग एक माह तक कोमा में रहने वाले सीआरपीएफ के अधिकारी चेतन कुमार चीता अब काफी हद तक स्वस्थ हो चुके हैं. बुधवार रात को उन्हें एक न्यूज चैनल पर बातचीत करते देखकर बहुत ख़ुशी हुई. बहुत ही नाजुक स्थिति में उन्हें अस्पताल में ऐडमिट किया गया था. उन्हें 9 गोलियां लगी थीं, जिसमे से एक गोली उनकी दाईं आंख से होती हुई और ब्रेन को डैमेज करती हुई सिर के बाहर निकल गई थी. एक गोली उनकी पीठ में लगी थी, जो उनके पेट से होते हुए और आंत को बुरी तरह से डैमेज कर बाहर निकली थी. एम्स ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में इलाज के दौरान स्टूल पास करने के लिए पैसेज बनाया गया था और ट्यूब से भोजन लिक्विड के रूप में दिया जा रहा था. अब वो थोड़ा सा भोजन मुंह से भी खा रहे हैं. 14 फरवरी को बांदीपुरा में आतंकियों के होने की खबर मिलने के बाद एक सर्च अभियान चलाया जा रहा था, चेतन कुमार चीता सेना के उसी अभियान का नेतृत्व कर रहे थे.

सेना के अभियान के बारे में आतंकियों को पहले से ही भनक लग चुकी थी, इसलिए वे बार-बार अपना ठिकाना बदल रहे थे और सेना से मुठभेड़ करने के लिए पूरी तरह से तैयार थे. चेतन कुमार चीता के नेतृत्व में जैसे ही सैनिक आतंकियों को ढूंढते हुए उनके एक ठिकाने पर पहुंचे, उन्होंने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आतंकियों ने चेतन कुमार चीता पर 30 राउंड फायर किए जिसमें से 9 गोलियां उन्हें लगीं. गोलियों से घायल होने के बावजूद भी जाबांज कमांडर चेतन कुमार चीता ने जोरदार जवाबी फायरिंग करते हुए लश्कर के आतंकी अबू हारिस को मौके पर ही ढेर कर दिया. इस मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 3 जवान शहीद हो गए थे और 15 जवान घायल हुए थे, घायल चेतन चीता को पहले श्रीनगर के आर्मी अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन जख्म की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तुरंत एयर ऐंबुलेंस के जरिए दिल्ली लाकर एम्स में भर्ती कराया गया. घायल चेतन कुमार चीता को देखने आर्मी चीफ बिपिन रावत और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू वहां पर गए थे.

चेतन चीता ने न्यूज चैनल पर दिए इंटरव्यू में बताया क़ि होश में आने पर भी उनके दिमाग में यही था क़ि वो इस समय कहाँ हैं? शरीर में कई गहरे जानलेवा जख्म, फिर भी जेहन कर्तव्यपरायणता में रमा हुआ. मौत को मात देकर दोबारा जीवन पाने वाले चेतन कुमार चीता आज भी अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन शरीर से ज्यादा कश्मीर के हालात लेकर परेशान हैं. वे बार बार यही कहते हैं कि इस समय मुझे यहां अस्पताल में नहीं, बल्कि कश्मीर में होना चाहिए. वो यही चाहते हैं क़ि जल्द से जल्द फिट हो दुश्मनों पर घातक प्रहार करने में माहिर सीआरपीएफ की कोबरा टीम का हिस्सा बनें और देशसेवा में पुनः जुट जाएँ. उन्होंने इसीलिए सिविल सर्विस की जगह सुरक्षा बल की नौकरी चुनी थी. अब मैं नोएडा के सेक्टर-33 स्थित प्रकाश अस्पताल में भर्ती सीआरपीएफ के जवान जितेन्द्र कुमार की चर्चा करूंगा, जो लगभग तीन साल से कोमा में हैं. वो साल 2014 में छतीसगढ़ में हुए एक आतंकवादी हमले में घायल में बुरी तरह से घायल हुए थे. इस हमले में पांच जवान शहीद हो गए थे.

दो रोज पहले एक न्यूज चैनल पर एक मां को हाथ जोड़कर रोते और ये कहते हुए देखा-सूना कि क्या मेरा बेटा देश की रक्षा नहीं कर रहा था? अपने बेटे के इलाज के लिेए दर-दर भटक रही हूँ. मेरा बेटा ठीक हो जाए, वो फिर आतंकवादियों से लड़ने के लिए जहाँ भी भेजा जाएगा, वहां जाएगा. कुछ देर में पता चला कि अपने बेटे के इलाज के लिए हाथ जोड़कर रोती विलखती स्त्री रूपा देवी हैं, जिनका बेटा जितेन्द्र कुमार पिछले तीन साल से कोमा में है. यह सब देखसुनकर ह्रदय को इतनी पीड़ा पहुंची कि आँखे भर आईं. जितेन्द्र कुमार की माता रूपा देवी बस यही चाहती हैं कि उनके बेटे का इलाज एम्स में या फिर किसी अन्य अच्छे अस्पताल में हो. नक्सलियों, पत्थरबाजों,और आतंकियों से दिन-रात लोहा लेने वाले जितेन्द्र कुमार के जैसे वीर जवानों के लिए क्या हमारे देश की सरकार इतना भी नहीं कर सकती है? उनके लिए देश की जनता की सहानुभूति और संवेदनशीलता क्यों नहीं है? चेतन कुमार चीता अपने इंटरव्यू में बिलकुल सही कहते हैं कि कमी देश के जवानों और कमांडरों में नहीं, बल्कि देश के लीडरों में है.

चाहे कमांडर चेतन कुमार चीता हों या फिर सीआरपीएफ के जवान जितेन्द्र कुमार और उनकी माता रूपा देवी हों, देशभक्ति के ऐसे जीते-जागते जूनून को और अपराजेय योद्धाओं को हम सेल्यूट करते हैं. देश के लीडरों के मन में यदि पाकिस्तान से, आंतकियों से और नक्सलियों से लड़ने की हिम्मत शेष न बची हो तो इन अपराजेय योद्धाओं से सीखें कि देशप्रेम क्या होता है और घायल होने पर सरकार यदि उनके ईलाज का समुचित प्रबंध न भी कर पाए तो भी अपने मुल्क के लिए लहू बहाने और जान देने की उनकी दीवानगी जरा भी कम नहीं होती है. वो घायल होते हैं और मौत के मुंह से लौट के वापस आते हैं, फिर भी देश के लिए फिर से लड़ने या जान न्यौछावर करने में वो ज़रा भी हिचकिचाते या डरते नहीं हैं. हिन्दुस्तान का वजूद सत्ता लोभी, डरपोक, दोमुंहे और बेशर्म लीडरों के बल पर नहीं, बल्कि हमारे देश के वीर जवानों के बल पर हमेशा कायम और बुलंद रहेगा, क्योंकि जवान सिर्फ इतना जानता है कि “चमन के वास्ते चमन के बाग़बां शहीद हों.. खिलेंगे फूल उस जगह कि तू जहाँ शहीद हो,.” जयहिंद.

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आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106.
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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
May 4, 2017

सद्गुरुजी नमस्कार, देश प्रेम से ओत प्रोत सैनिकों पर लिखा लेख एक सन्देश है उन नेता राजनेताओं, शासक प्रशासकों के लिए जो अपने करोड़ों से सजे सजाए वातानुकूल कार्यालयों में बैठकर अपने और अपने परिवारवालों को सुरक्षित समझ कर भी भ्रष्टाचार की राह पर चलते हैं, सीमा पर लड़नेवाले सैनिकों की जानों पर कीमत पर ! चक्षु ओपनर लेख, साधुवाद !

Shobha के द्वारा
May 4, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी हमारे देश के नेता केवल राजनीती के नाम पर शतरंज की गोटियाँ चलते रह जाते है सबसे बड़ी बात कुछ देर के लिए ही पकिस्तान के खिलाफ एक होते हैं फिर एक दूसरे की जड़े काटते हैं सेना का होसला कभी नहीं टूटा हमें अपनी सेना पर गर्व हैं |

sadguruji के द्वारा
May 4, 2017

आदरणीय हरेंद्र रावत जी ! लेख पर आपकी विचारणीय प्रतिक्रिया मिली ! आपने मेरे मन की बात कह दी है कि ‘देशप्रेम की भावनासे से ओतप्रोत होकर सैनिकों पर लिखा गया लेख उन नेता राजनेताओं और शासक प्रशासकों के लिए एक सन्देश है, जो अपने करोड़ों के सजेसजाए वातानुकूल कार्यालयों में बैठकर अपने और अपने परिवारवालों को सुरक्षित समझकर भ्रष्टाचार की राह पर चलते रहते हैं, वो भी सीमा पर लड़नेवाले सैनिकों की जानों पर कीमत पर !’ उनके भेदभाव का रवैया, ढुलमुल नीति और जवानों के प्रति संवेदनहीनता निंदनीय है ! घायल जितेंद्र कुमार से मिलने कौन नेता गया? उसे एम्स में भर्ती क्यों नहीं किया गया? मोदी सरकार और उसके आला लीडरों को इस बात का जबाब देना चाहिए ! लेख को आपने आँख खोलने वाला (चक्षु ओपनर) महसूस किया, इससे लेख को सार्थकता मिली ! प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
May 4, 2017

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! जी.. आप सही कह रही हैं कि हमारे देश के नेता पाकिस्तान के खिलाफ बोलने के लिए पहले तो कभी एकजुट होते नहीं हैं और कभी किसी मंच पर एकजुट भी होते हैं तो आपस में ही एक दूसरे की टांग खिंच राजनीतिक शतरंज की गोटिया खेलते रहते हैं ! उनके लिए देशहित से ज्यादा अपना वोटबैंक और कुर्सीहित महत्वपूर्ण है ! नेताओं का आचरण बेहद निंदनीय है ! ये तो हमारे सैनिकों का अगाध देशप्रेम है, जो उनका हौसला कभी टूटने नहीं देता है ! हमें अपनी सेना पर गर्व है और हम उसे सेल्यूट करते हैं ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
May 5, 2017

आदरणीय डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर जी ! सादर अभिनन्दन ! ’देश के दुश्मन-बाहर भी, भीतर भी’ ब्लॉग बुलेटिन में इस पोस्ट को शामिल करने के लिए हार्दिक आभार ! राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति आम जनता के मन में जागरूकता लाने के लिए आपके द्वारा किया जा रहा सद्प्रयास सराहनीय है ! सादर आभार !

rameshagarwal के द्वारा
May 5, 2017

जय श्री राम सद्गुरुजी, बहुत सुन्दर दिल को झाक्जोर देने वाला लेख. ये इंटरव्यू हमने भी जी टीवी में देखा था. हमें फख्र होती है अपनी सेना पर और शर्म आती है उन नेताओं पर, जो इसपर भी राजनीती करते हैं. चाहे वे यशवंत सिन्हा हों या मनमोहन सिंह या वाम नेता, इन्हें देश से ज्यादा कुर्सी प्यारी है पता नहीं जीतेन्द्र कुमार को क्यों नहीं ठीक से इलाज मिल रहा, क्योंकि इलाज में कोइ कमी नहीं की जाती है. लगता है जल्दी युद्ध होगा और इस बार शिमला अग्रीमेंट या ताशकंत वाली गलती नहीं होगी. लेख ब्लॉग बुलेटिन में शामिल होने के लिए बधाई.

sadguruji के द्वारा
May 6, 2017

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! जय श्रीराम और सादर अभिनन्दन ! सबसे पहते तो आपके स्वास्थ्य को लेकर शुभकामनाएं ! आप शीघ्र से शीघ्र पूर्णतः स्वस्थ हों ! टीवी पर चेतन कुमार चीता और जिंतेंद्र कुमार की माता रूपा देवी दोनों का ही इंटरव्यू देखा, मन को बहुत ठेस लगी ! खासकर जितेंद्र कुमार के इलाज को लेकर उनकी माता जी का हाथ जोड़कर रोना और देश से निवेदन करना ! यदि वाकई ऐसा है, तब तो शर्म के मारे हमें चुल्लूभर पानी में डूब मरना चाहिए ! आपकी इस बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाना चाहिए कि वो बार-बार भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देना भूल जाए ! लेख पढ़ने और बधाई देने के लिए हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
May 6, 2017

Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी लगता है कि आपका लेख काम कर गया आज ही संबित पात्रा ने जीतेन्द्र कुमार को एम्स मे भर्ती करा दिया है.

sadguruji के द्वारा
May 6, 2017

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! मीडिया मे यह मामला उछला, तब जाकर सरकार को शर्म आई ! यही तो दुखद है कि इस सरकार का भी कांग्रेसीकरण होना शुरु हो गया है ! कुमार विश्वास कहते हैं कि भाजपा का 80 प्रतिशत कांग्रेसीकरण हो चुका है और आम आदमी पार्टी का होना शुरू हो चुका है ! यदि वाकई मे ऐसा है तो कांग्रेस की तरह ही भाजपा भी पतन के मार्ग पर चल चुकी है ! यदि भाजपा वाले भी वही कार्य और बर्ताव करेंगे, जो कांग्रेस ने किया और पतन के गर्त मे चली गई, तो फिर भविष्य मे भाजपा की दुर्गति होनी भी तय है ! राष् ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों से जुड़े मुद्दे पर सरकार की संवेदनहीनता और इलाज के मामले मे एक अफसर और एक जवान के बीच भेदभाव बेहद निन्दनीय है ! पूरा प्रकरण निन्दनीय और दुखद तो बहुत है, लेकिन सही राह पर बीजेपी के नेता भले ही देर से आये, लेकिन दुरुस्त आये ! आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी, हम लोग और कुछ तो कर नही सकते, लेकिन ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे इस मंच पर उठाकार आम जनता को सोचने विचारने के लिये जागरूक जरूर कर सकते हैं ! हालांकि ब्लॉगिंग मंच भी पूरी तरह से निष्पक्ष, जागरूक और संवेदनशील नही हैं ! सबसे बड़ी समस्या समय पर ब्लॉग अपडेट नहीं होने की है ! तमाम ब्लॉगिंग मंचों की हालत आप देख ही रहे हैं ! याद करने के लिये हार्दिक आभार !

Jitendra Mathur के द्वारा
May 11, 2017

आपका लेख निश्चय ही नेत्र खोल देने वाला तथा किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देने वाला है आदरणीय सद्गुरु जी । आपके विचारों एवं भावनाओं से मैं पूर्ण सहमति व्यक्त करता हूँ । आपके इस लेख के प्रभाव से घायल जवान को अंततः एम्स में भर्ती करा दिया गया, यह जानकर संतोष हुआ । इससे आपका प्रयास केवल भावनाओं के स्तर पर ही नहीं, व्यवहारतः भी सार्थक सिद्ध हुआ । हार्दिक अभिनन्दन आपका । राष्ट्र पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले बलिदानी सैनिकों तथा उनकी वीर माताओं को नमन ।

sadguruji के द्वारा
May 13, 2017

आदरणीय जीतेन्द्र माथुर जी ! सादर अभिनन्दन ! पूरा प्रकरण वाकई बेहद दुखद था ! मैंने देखा कि एक अधिकारी और एक जवान के इलाज में भेदभाव बरता जा रहा है, इसलिए इस मुद्दे ब्लॉग मंचों पर उठाना पड़ा ! ये अच्छी बात है कि ये मुद्दा मीडिया पर आने के बाद केंद्र सरकार को अपनी गलती महसूस हुई और जीतेन्द्र कुमार को एम्स में फर्टी किया गया ! हम सबकी तरफ से राष्ट्र पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले बलिदानी सैनिकों तथा उनकी वीर माताओं को कोटि कोटि नमन ! पोस्ट की सराहना के लिए और ब्लॉग पर समय देने के लिए हार्दिक आभार !


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