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'तीन तलाक' की आड़ में मुस्लिम औरतों पर हो रहा अत्याचार अब रुकने की उम्मीद बढ़ी

Posted On: 20 May, 2017 Social Issues में

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तीन तलाक पर सुनवाई के दौरान बुधवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खेहर ने कहा कि कुरान में कहीं भी तलाक-ऐ-इबादत या तुरंत तीन तलाक के बारे में उल्लेख नहीं है. वरिष्ठ वकील वी गिरी के सवालों का जवाब देते हुए सीजेआई ने यहाँ तक कहा कि वकीलों को यह नहीं सोचना चाहिए कि कोर्ट बेंच इस मामले से पूरी तरह वाकिफ नहीं है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस खेहर ने कुरान हाथ में लेकर सुरा अत-तलाक की आयतें पढ़ीं और सीनियर एडवोकेट वी गिरी को जवाब देते हुए कहा कि कुरान में तलाक-ए-बिदत का कोई उल्लेख नहीं है. इसमें केवल दो अन्य तरीकों- तलाक-ए-एहसन और तलाक-ए-अहसन का उल्लेख है. यह टिपण्णी कोर्ट ने तब की जब एडवोकेट वी गिरी ने बेंच की तरफ कुरान दिखाते हुए कहा, तलाक-ए-बिदत कुरान के सुरा 65 के पैरा 230 में है. इस पर एडवोकेट गिरी ने अपनी गलती मानी और कहा कि मैं अपनी गलती मानता हूं. यह सिर्फ मेरा अनुमान था.

आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जजों ने कितनी तैयारी के साथ अच्छी तरह से और गहराई से कुरान का अध्ययन किया है, उन्हें वकीलों के द्वारा या ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील के द्वारा कुतर्क के सहारे भ्रमित नहीं किया जा सकता है. ध्यान देने वाली विशेष बात यह भी है कि मुसलमानों से जुड़ी ‘तीन तलाक़’ की जो विवादित प्रथा है, उसपर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की जो बेंच सुनवाई कर रही है, उसमे शामिल जज हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पारसी आदि विभिन्न अलग-अलग धर्मों से जुड़े हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट के माननीय जज कुरान के अंग्रेजी अनुवाद वाली पुस्तक को अपने सामने रखकर मुस्लिम धर्मग्रंथ की रौशनी में ही ‘तीन तलाक़’ के विवादित मुद्दे पर सुनवाई पूरी कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट जिस गंभीरता से इस मामले की सुनवाई कर रही है, उससे यही निष्कर्ष निकलता है कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला देगी वो पूरी तरह से सोच समझकर देगी और कुरान की रौशनी में ही देगी.

मुस्लिम समुदाय को न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के ‘पंच परमेश्वर’ पर पूरा भरोसा रखना चाहिए, बल्कि वो जो भी फैसला दें, उसे मानना भी चाहिए. केंद्र सरकार का कहना है कि तीन तलाक़ इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है. सरकार ने माननीय सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट रूप से कहा है कि ये बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक का मुद्दा भी नहीं है, बल्कि यह एक समुदाय के भीतर मुस्लिम पुरुषों और वंचित महिलाओं के बीच की लड़ाई है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में जिरह के दौरान मुस्लिम समुदाय की तुलना उन छोटे पक्षियों से की जिन्हें गिद्ध अपना शिकार बना लेते हैं. गिद्ध कौन है, ये उन्होंने स्पष्ट नहीं किया. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के ‘घोसले’ को सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा मिलनी ही चाहिए. कपिल सिब्बल वकील से ज्यादा कांग्रेस के नेता के रूप में कोर्ट में बोल रहे हैं, जो सदैव मुस्लिम तुष्टिकरण में लगी रहती है. जबकि ये असलियत सारी दुनिया जानती है कि भारत में मुसलमान अन्य देशों की अपेक्षा कहीं ज्यादा स्वतंत्र और सुरक्षित हैं.

मंगलवार को सुनवाई के चौथे दिन मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में तीन तलाक को मुस्लिमों की आस्था का मुद्दा बताते हुए ‘तीन तलाक’ को 1400 साल पुरानी परंपरा कहा था और उसकी तुलना भगवान राम के अयोध्या में जन्म लेने से कर डाली थी, जो हिन्दुओं की दृढ आस्था है. उनके इस बयान के बाद तो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को अब ये सच स्वीकार कर लेना चाहिए कि अयोध्या में भगवान् राम का जन्म हुआ था, जिससे वो इंकार करते रहे हैं. उन्हें अब विवादित भूमि हिन्दुओं को श्रीराम मंदिर के निर्माण हेतु सौप देनी चाहिए. जहाँ तक तीन तलाक के मामले की बात है तो कोर्ट की बेंच का कहना है कि ये क़ुरान का हिस्सा नहीं है और इसे बाद में अपनाया गया था. ‘तीन तलाक’ की आड़ में मुस्लिम औरतों पर हो रहा अत्याचार रुकने की उम्मीद बढ़ी है. सुप्रीम कोर्ट में कल इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है. फैसला अब कोर्ट कभी भी सुना सकती है. फैसला क्या होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा. हालाँकि अंदाजा यही लगाया जा रहा है कि भारत में ‘तीन तलाक’ पर पाबंदी लग सकती है. बहुत से मुस्लिम देशों में ऐसी पाबंदी बहुत पहले ही लग चुकी है.



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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
May 22, 2017

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी आपके लेखो को पढ़ कर बहुत जानकारी मिल जाती है.तीन तलक के मामले में मुस्लिम बोर्ड घिर गया क्योंकि सिद्ध नहीं कर प् रहा की ये कुरान में लिखा है.ये धर्म का या मुस्लिमो का नहीं मामले लेकिन मुस्लिम समाज में औरतो के ऊपर ना इंसाफी का मामला है सरकार ने कह दिया की यदि सर्वोच्च्न्ययालय इसपर कोइ फैसला नहीं देता तब भी वे कानून बनायेगे.लगता है अबकी बार अदालत इसपर जरूर निर्णय लेकर इसे अवैध घोषित कर देगी और सरकार से कानून बनाने को कहेगी.कपिल सिबल कितना नीचे गिर सकता ये साबित हो गया.मुस्लिम बोर्ड कपिल की अयोध्या के मामले की बात नहीं मानेगा.असल में तुष्टीकरण की नीति के कारन मुसलमानों का दिमाग ख़राब हो गया और उन्हें देश के कानून पर विश्वास नहीं रहा.देखिये क्या फैसला आता है लेकिन अब मुस्लिम औरतो को न्याय मिलेगा ऐसी देशवाशियो को उम्मीद है.सुन्दर लेख के लिए बधाई.

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
May 26, 2017

आदरणीय सदगुरु जी बहुत सुन्दर चिंतन ,,किंतु हमारे देश का संविधान ही अपने आप मैं उलझ जाता है । बीजेपी भी एक समान संहिता से भटककर तलाक मैं उलझा रही है । ओम शांति शांति

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
May 26, 2017

आदरणीय सदगुरु जी बहुत सुन्दर चिंतन ,,किंतु हमारे देश का संविधान ही अपने आप मैं उलझ जाता है । बीजेपी भी एक समान संहिता से भटककर तलाक मैं उलझा रही है । ओम शांति शांति

sadguruji के द्वारा
May 27, 2017

आदरणीय हरीश चंद्र शर्मा जी ! सादर अभिनन्दन ! लेख को अति सुन्दर चिंतन महसूस कर उसे सार्थकता प्रदान करने के लिए धन्यवाद ! समान नागरिक संहिता लागू होने में अभी काफी समय लगेगा ! ब्लॉग पर समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
May 27, 2017

आदरणीय हरीश चंद्र शर्मा जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! केवल बीजेपी के चाहने भर से समान नागरिक संहिता इस देश में लागू नहीं हो सकती है ! इस दिशा में सबसे बड़ी पहल माननीय सुप्रीम कोर्ट को करनी होगी ! वही सबको राजी कर सकता है ! प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
May 27, 2017

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! जय श्रीराम और सादर अभिनन्दन ! मेरी कोशिश होती है कि सामयिक विषयों पर पूरी जानकारी हासिल करके ही लिखा जाए ! मेरे इस प्रयास कि सराहना करने के लिए हार्दिक आभार ! आप सही कह रहे हैं कि तुष्टिकरण की दशकों पुरानी गलत नीति के कारण ही आज हालात ये हैं कि हम ‘तीन तलाक’ और ‘समान नागरिक संहिता’ जैसे राष्ट्रीय मसलों पर कोई निर्णय नहीं ले पा रहे हैं ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

Jitendra Agarwal प्रिय ब्लॉगर, तीन तलाक़ के विषय पर प्रकाश डालता एक अच्छा लेख ! तीन तलाक़ पर पाबंदी मुस्लिम महिलाओं की व्यक्तिगत आज़ादी लेकर आएगी जो महिला प्रधान समाज में अत्यंत ज़रूरी है ! लेकिन अपने मन की अगर कहूँ तो सर्वोच्च न्यायालय में पहुँचा यह मुद्दा भयभीत करने वाला है क्योकि राम मंदिर मुद्दे की तरह इस पर भी एक लंबे ग्रहण का साया मंडरा रहा है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय की कार्य करने की शैली व फ़ैसले लेने में देरी अंदर ही अंदर भयभीत करती है ! कही ये मुद्दा भी वर्षो तक नही चले अन्यथा महिलाएँ तीन तलाक़ की भेंट चढ़ती जाएगी और समस्या ओर भी बढ़ती जाएगी !

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

आदरणीया जीतेन्द्र अग्रवाल जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! पोस्ट की सराहना के लिये धन्यवाद ! आपकी आशंका निराधार नही है कि फैसले मे विलंब हो सकता है और इससे मुस्लिम महिलाओं की दिक्कर और बढेगी ! उम्मीद करनी चाहिये कि फैसला जल्द आयेगा ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिये धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी आपने बहुत सुंदर ढंग से यह लेख तथ्यात्मक आधार पर लिखा है इसके लिए आभार प्रकट करता हूँ। अब लगता तो यही है की अदालत इसे राम मंदिर की तरह दशकों तक लटका कर नहीं रखेगी। फैसला मुस्लिम महिलाओं के हक में आने के आसार लग रहे हैं।

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! पोस्ट की सराहना और उत्साहवर्द्धन के लिये हार्दिक आभार ! अब तो सुनवाई पूरी हो चुकी है और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा हुआ है ! देखिये माननीय कोर्ट का क्या निर्णय आता है ! जिस तरह से सुनवाई हुई है, उससे तो यही लग रहा है कि मुस्लिम बहनों को उनका वाजिब हक अब मिलेगा ! छह दिन मे सुनवाई पूरी हो गई ! ऐसा ही अगर माननीय कोर्ट राम मंदिर सहित तमाम बड़े मामलों मे भी करे तो भारत मे शीघ्र न्याय मिलने की एक अच्छी परम्परा कायम होगी ! प्रतिक्रिया देने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

Leela Tewani प्रिय ब्लॉगर सद्गुरु भाई जी, अत्यंत हर्ष की बात है, कि ‘तीन तलाक’ की आड़ में मुस्लिम औरतों पर हो रहा अत्याचार रुकने की उम्मीद बढ़ी है. सचमुच ऐसा हो जाय, तो बहुत ही अच्छा होगा. मन का मंथन करने वाली अत्यंत सटीक व सार्थक रचना के लिए आपका आभार.

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

आदरणीया लीला तिवानी जी ! सादर अभिनन्दन ! मुस्लिम बहनों के हक मे जो भी माननीय सुप्रीम कोर्ट का जो भी निर्णय होगा, वो निश्चित रूप से बहुत अच्छा होगा ! ऐसी हमे उम्मीद करनी चाहिये ! रचना आपको मन का मंथन करने वाली और सार्थक लगी, इसके लिये हार्दिक आभार !


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