सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

493 Posts

5422 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15204 postid : 1331896

उज्मा अहमद की आपबीती और हुसैन हैदरी जी की नज्म 'मैं हिंदुस्तानी मुसलमान हूं भाई'

Posted On: 26 May, 2017 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

पाकिस्तान से भारत लौटी उज्मा अहमद की इन दिनों मीडिया में काफी चर्चा हो रही है. गुरूवार को हिन्दुस्तान की धरती पर कदम रखते ही उसने यहाँ की मिटटी को चूमा और अश्रुपरित नेत्रों से उसके आगे सर नवाया. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उज्मा को ”भारत की बेटी” बताते हुए उसकी देश वापसी का बहुत अच्छे ढंग से स्वागत किया. उज्मा अहमद ने भी सुषमा स्वराज को पूरा सम्मान दिया, उनके पैर छुईं और गले लग रोईं. नई दिल्ली की रहने वाली उज्मा अहमद पहले से ही न सिर्फ एक शादीशुदा भारतीय महिला हैं, बल्कि उनकी थलेसीमिया से पीड़ित एक बेटी भी है. कुछ अर्सा पहले वो ताहिर अली नाम के एक पाकिस्तानी से मलेशिया में मिली थीं, जिससे उनकी बहुत गहरी दोस्ती हो गई थी. ताहिर अली के निमंत्रण पर वो इस महीने के शुरू में पाकिस्तान घूमने गई थीं. उनका 10 या 12 मई तक हिन्दुस्तान वापस लौट आने का प्लान था, लेकिन पाकिस्तान में कदम रखते ही उनकी अच्छीभली जिंदगी पर ग्रहण लगना शुरू हो गया. उज्मा अहमद ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनका मित्र ताहिर अली धोखे से उन्हें स्लीपिंग पिल्स (नींद की गोली) खिलाकर गहरी नींद में सुला दिया और उनका अपहरण (किडनैपिंग) कर उन्हें बुनेर नाम के एक ऐसे गाँव में ले गया, जहाँ पर भाषा से लेकर लोग तक सबकुछ अजीब था. उस जगह पर रोज फायरिंग होती थी. वहाँ के अधिकतर युवा मलेशिया में रहते हैं और वहां से दूसरे मुल्कों की लड़कियों को बहला फुसला कर लाते हैं, फिर उन्हें धोखे से बेचने का काम करते हैं.

बुनेर में कई मुल्कों से औरतें अपहृत कर अय्याशी करने और बेचने के लिए लाई गई थीं, जिनपर बेइंतहा जुल्म होता था. निकाह के लिए या बिकने के लिए राजी न होने पर गोली मार दी जाती थी. उस गाँव में सब मर्दों की कम से कम दो बीबियाँ थीं. उज्मा अहमद ने कहा कि अगर मैं वहां दो-चार दिन और रुकती तो शायद वो लोग मुझे मार देते या फिर किसी सो बेच देते. ताहिर अली ने उस गाँव में अपना असली मक्कारी या कहिये, फ़िल्मी विलेन वाला रूप दिखाया. उसने कई रोज तक उज्मा अहमद को बंधक बनाकर रखा और निकाह के लिए राजी न होने पर तीन मई को बंदूक की नोक के बल पर जबरदस्ती उससे निकाहनामे पर साइन करवा लिए. ताहिर अली ने उज्मा अहमद को शारीरिक, मानसिक, और भावनात्मक तौर पर कई रोज तक न सिर्फ प्रताड़ित किया, बल्कि दिल्ली में रह रही उसकी बेटी को अगवा करवाने की धमकी भी दी. ताहिर अली ने उसके सभी आव्रजन दस्तावेज छीनकर अपने पास रख लिए थे, ताकि वो कभी भारत न लौट सके. उज्मा अहमद ने समझदारी से काम लेते हुए इस्लामाबाद हाईकोर्ट में 12 मई को एक याचिका दायर की, जिसमे ताहिर अली की असलियत का खुलासा करते हुए कोर्ट से आग्रह किया कि उसे तत्काल भारत लौटने दिया जाए क्योंकि वो हिन्दुस्तान में पहले से ही शादीशुदा है और उसकी एक बेटी भी है. सारी हकीकत जानने के बाद कोर्ट ने ताहिर अली से सारे आव्रजन दस्तावेज वापस दिलाये और पाकिस्तान की पुलिस को निर्देश दिया कि वह उजमा अहमद को वाघा सीमा तक सुरक्षित पहुंचाए.

उज्मा अहमद अपनी सकुशल वतन वापसी का पूरा श्रेय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और भारतीय उच्चायोग में डिप्टी उच्चायुक्त जेपी सिंह को देती हैं, जिन्होंने उनकी बात न सिर्फ ध्यान से सुनी, बल्कि उस पर त्वरित रूप से समुचित कार्यवाही भी की. मोदी सरकार की कई सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बड़ी उपलब्धि उनके तीन साल के शासनकाल में हर देश में भारतीय दूतावास का पूरी तरह से सक्रिय होना है. विदेशों में फंसे भारतीयों के लिए भारतीय दूतावास ‘डूबते को तिनके का सहारा’ बन चुका है. विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए आज जितना सहयोगी और मित्रवत व्यवहार करने वाला भारतीय दूतावास शायद ही कभी रहा हो. इसमें विदेशमंत्री सुषमा स्वराज की निरंतर सक्रियता का बहुत बड़ा योगदान है. चाहे वो स्वस्थ हों या अस्वस्थ, हर एक की सहायता को सदैव तत्पर रहती हैं. यदि इस्लामाबाद कोर्ट का निर्णय देर से होता तो भी भारतीय उच्चायोग उज्मा अहमद को दो साल तक अपने पास रखने को तैयार था. इस्लामाबाद हाईकोर्ट में पाकिस्तानी वकीलों ने कहानी के खलनायक ताहिर अली का पक्ष लेते हुए मुकदमे को पाकिस्तान की नाक का सवाल बनाया और कुतर्क दिए कि उज्मा अहमद हिन्दुस्तान लौट गई तो पाकिस्तान की तो नाक ही कट जायेगी. कोर्ट ने उनके तमाम कुतर्क खारिज करते हुए बंदूक के बल पर एक शादीशुदा महिला से किये गए निकाह को अवैध बताया और उज्मा अहमद के हिन्दुस्तान लौटने का रास्ता साफ़ किया. शीघ्र और सही निर्णय के लिए इस्लामाबाद हाईकोर्ट बधाई का पात्र है.

उज्मा अहमद ने पत्रकारों से कहा, “पाकिस्तान मौत का कुआं है, वहां जाना आसान है लेकिन आना मुश्किल है. मैं सभी को सलाह दूंगी कि कभी पाकिस्तान ना जाना. पाकिस्तान को लेकर मेरे मन में खौफ बैठ गया है. हमारा देश भारत बहुत अच्छा है. हमारे पास सुषमा मैम जैसी विदेश मंत्री हैं. मैंने दो-तीन देश देखे हैं लेकिन मुझे गर्व है कि मैं भारतीय हूं.” पूर्णतः सुरक्षित व स्वतंत्र हिन्दुस्तानी मुसलमानों को सदैव यही समझाया जाता है कि भारतीय नागरिक होना अपने आप में एक बहुत गर्व का विषय है. आप दुनिया के किसी भी मुल्क में फंसे हों, आपका मुल्क हिन्दुस्तान और उसकी सरकार आपको मुसीबत से बाहर निकालने के लिए कोई कोरकसर नहीं छोड़ती है. किन्तु फिर भी इस देश में बहुत से लोंगो को ‘बन्दे मातरम्’ गाने और ‘भारत माता की जय’ बोलने में बहुत एतराज होता है. बहुत से लोग हिन्दुस्तान में रहकर और उसका अन्न खाकर भी सऊदी अरब और पाकिस्तान के गुण गाते हैं. ऐसे लोंगो को पाकिस्तान में बहन उज्मा अहमद की हुई भारी फजीहत से इतना तो सबक लेना ही चाहिए कि दूर के ढोल सुहावने होते हैं, पास जाओ तो हकीकत मालूम पड़ती है. अंत में खुद को हिंदुस्तानी कहलाने में गर्व महसूस करने वाले एक हिन्दुस्तानी मुसलमान हुसैन हैदरी की चर्चा करना चाहूँगा. वो गीतकार और पटकथा लेखक हैं. सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो इन दिनों खूब ट्रेंड कर रहा है. उस वायरल वीडियो में एक शख्स अपने आप से पूछ रहा है कि ‘मैं कैसा मुसलमान हूं भाई ?’ हुसैन हैदरी उस वीडियो में इस तरह से उस सवाल का जबाब देते हैं.

‘मैं हिंदुस्तानी मुसलमान हूं भाई,
मुझमें गीता का सार भी है,
मुझमें उर्दू का अखबार भी है,
मेरा एक महीना रमजान भी है
मैंने किया तो गंगा स्नान भी है,
अपने ही तौर से जीता हूं,
दारू सिगरेट भी पीता हूं,
कोई नेता मेरे नस-नस में नहीं,
मैं किसी मुसलमान के बस में नहीं,
मैं हिंदुस्तानी मुसलमान हूं भाई।



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 4.83 out of 5)
Loading ... Loading ...

10 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
May 26, 2017

आदरणीय सद्गुरु जी, वास्तव मैं एक समस्या है… मैं कैसा मुस्लमान हूँ… मैं मुस्लमान हूँ कब हिंदुस्तानी तो हिन्दू यानि काफिर होते हैं | मुस्लमान मानना है, तो चलो पाकिस्तान मैं बस जाएँ क्या… ॐ शांति शांति…

sadguruji के द्वारा
May 27, 2017

आदरणीय हरीश चंद्र शर्मा जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! किसी को पाकिस्तान जाने की जरुरत नहीं है, बस इस मुल्क को दिल से अपना मानने की जरुरत है ! मेरे विचार से देश सर्वोपरि है, इसलिए उसे जाति और धर्म के चश्मे से निहारना चाहिए ! ब्लॉग पर समय देने के लिए सादर आभार !

Shobha के द्वारा
May 29, 2017

श्री आदरनीय सद्गुरु जी आपके लेख द्वारा आज की स्थिति जानी समझ नहीं आता पाकिस्तान को समझने में सदैव भूल कैसे हो जाती है हमारे देश की बेटी अपने घर लौट आयी कविता बड़ी खूबसूरत है

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! पाकिस्तान तो बार-बार यही साबित करता है कि वो एक धोखेबाज मुल्क है, लेकिन हम लोग इतने मानवतावादी और दयालु हैं कि उस पर विश्वास कर लेते हैं कि अब धोखा नहीं देगा ! धोखा देना उसका नेचर है, जो कभी बदल नहीं सकता है ! अब हमारे पास दो ही रास्ते हैं या तो हम नैतिकता, मानवता और दयालुता का दामन थामकर उसका जुल्म सहते रहें, उसके नापाक हाथों से अपने बहादुर सैनिकों की जान गंवाते रहें या फिर साम, दाम, दंड, भेद सब अपना उसे इतनी बुरी तरह से परास्त करें कि हमें परेशान करणा बंद कर दे ! ठीक है कि हिन्दुस्तान कि बेटी घर लौट आई है, लेकिन बात तो वही है कि सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया ? प्रतिक्रया देने के लिए सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

Leela Tewani प्रिय ब्लॉगर सद्गुरु भाई जी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और भारतीय उच्चायोग में डिप्टी उच्चायुक्त जेपी सिंह का काम वाकई तारीफेकाबिल है. अत्यंत सुंदर, सटीक व सार्थक रचना के लिए आपका आभार.

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

आदरणीया लीला तिवानी जी ! सादर अभिनन्दन ! आप बिल्कुल ठीक कह रही हैं कि उज्मा अहमद की मदद के मामले मे विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और जे पी सिंह जी का बहुत योगदान है ! ब्लॉग को सुन्दर, सटीक और सार्थक महसूस कर उसे सार्थकता प्रदान करने के लिये हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

anna india पूरे वाकये में एक निहित संदेश लड़कियों को अपने आपको मॉडर्न दिखाने के लिये स्वच्छन्द जीवन शैली अपनाने पर कैसे दुष्परिणामों को देखना पड़ता है, यह एक उदाहरण है. उजमा ने मुक़बला किया तो वह सफल हो गयी लेकिन ऐसा सौभाग्य कितनों का होता है. अधिकांश मामलों में ऐसे जीवन का परिणाम किसी भयानक त्रासदी में ही होता है.

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

आदरणीय महोदय ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपसे सहमत हूँ कि आज की स्वच्छंद जीवन शैली इस तरह के हादसों के लिये सबसे ज्यादा जिम्मेदार है ! उज्मा अहमद भाग्यशाली थी, जो मौत का कुआँ या नरक कहिये, उससे बचके बाहर निकल आई ! आपने सही कहा कि ऐसे मामलों मे अक्सर अधिकतर लड़कियों का जीवन बर्बाद हो जाता है ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

Rajeev Gupta आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, उजमा की कहानी के जरिये आपने हिन्दुस्तान मे बैठे उन धूर्त सेक्युलर लोगों को भी यह कड़ा संदेश दिया है कि जिन लोगों के तुष्टिकरण मे वे सब पिछले 70 सालों से लगे हुये हैं, उनकी हकीकत आखिर क्या है और वे महिलाओं के साथ किस तरह का बरताब करते हैं. इस अपराध के लिये ना सिर्फ यह लोग बल्कि सभी तथाकथित “सेक्युलर” लोग भी बराबर के जिम्मेदार हैं. बेहतरीन ब्लॉग पेश करने के लिये आपका हार्दिक अभिनन्दन.

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने सही कहा है कि बहुत से अपने को सेक्युलर कहने वाले लोग भी जाने-अनजाने अपने व्क्तव्य और व्यवहार से अलगाववादियों और आतंकियों के मददगार ही साबित हो रहे हैं ! इन पर भी अंकुश लगना चाहिये ! पोस्ट की सराहना के लिये सादर आभार !


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran