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मणिशंकर अय्यर: पाकिस्तान से लेकर कश्मीर तक की यात्रा आखिर किसके लिए हुई?

Posted On: 28 May, 2017 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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कुछ रोज पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर एक प्रतिनिधिमंडल को साथ लेकर कश्मीर गए थे, जहाँ पर वो कई अलगाववादी नेताओं के साथ साथ राज्यपाल एनएन वोहरा और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती से भी मिले. ऐसे में जबकि केंद्र सरकार ने साफ़ कह दिया है कि कश्मीर में हिंसा करने वालों और अलगाववादियों के साथ कोई बातचीत नहीं होगी, तब मणिशंकर अय्यर की कश्मीर यात्रा पर सवाल तो उठने स्वाभाविक ही थे और मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक पर सवाल उठ भी रहे हैं कि वो कश्मीर यात्रा पर किसके लिए गए थे, देश के लिए, अलगाववादियों के लिए या फिर कांग्रेस को मजबूत करने के लिए? कश्मीर यात्रा के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि वो किस हैसियत से सबसे मिलजुल रहे हैं, सबसे बातचीत करने के लिए क्या आपको केंद्र सरकार का समर्थन प्राप्त है? मणिशंकर अय्यर ने कहा कि भारत का नागरिक होने के नाते मैं कश्मीरियों से मिलजुल रहा हूँ. उन्हें मैं अपना भाई-बहन समझता हूँ. उनके जबाब से जाहिर है कि वो अपनी मर्जी से कश्मीर यात्रा पर गए थे. जब उनसे पूछा गया कि कश्मीर घाटी में शांति कैसे आएगी? इसके जबाब में उन्होंने कहा कि बातचीत के ज़रिए ही यह मामला हल होगा. दिल्ली-इस्लामाबाद और दिल्ली-श्रीनगर में बात हो. एक अलगाववादी के सुझाव के अनुसार श्रीनगर-मुज़्ज़फ़राबाद के बीच भी बातचीत होनी चाहिए. उनका कहना था कि केंद्र सरकार उनका सुझाव नहीं मानेगी, क्योंकि वो लोग अपना हिन्दू राष्ट्र बनाने में लगे हुए हैं.

बीबीसी संवाददाता से बातचीत में मणिशंकर अय्यर ने पूछा कि आप मुझे ये बताएं कि गिलानी से बात नहीं करेंगे तो क्या ज़ाकिर मूसा के साथ बात होगी? ज़ाकिर मूसा ने तो कहा है कि ये सियासी नहीं इस्लामी और ग़ैर इस्लामी का मसला है. अगर आज ठोस क़दम नहीं उठाए गए तो क्या पता कुछ ही महीनों के अंदर हालत इस तरह बिगड़ेंगे कि और कोई रास्ता नहीं बचेगा, सिवाय कश्मीरियों पर जंग छेड़ने के. उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूँ कि पत्थर फेंकने वालों को बंदूक़ से जवाब नहीं दिया जाना चाहिए. कल हो सकता है कि वो पत्थर छोड़ कर हाथों में बंदूक़ उठाने लगें. तो ये है साहब, मणिशंकर अय्यर की कश्मीर यात्रा का मकसद और कश्मीर के तमाम अलगाववादी फ़िरकों से हुई उनकी बातचीत सार. बकौल उनके कश्मीर में सभी फ़िरकों ने उनका इस्तक़बाल यानी पूरी गर्मजोशी से स्वागत किया. मणिशंकर अय्यर जानते थे कि केंद्र कि मौजूदा राष्ट्रवादी भाजपा सरकार उनकी कोई बात नहीं सुनेगी, तो फिर सवाल यह पैदा होता है कि वो कश्मीर गए क्यों और गए भी तो घूमफिर के चले आते, अलगाववादी देशद्रोही नेताओं से मिलने की जरुरत क्या थी? इससे तो यही शक पैदा होता है कि वो तमाम अलगाववादियों को यही समझाने गए थे कि भाजपा सरकार आपसे कोई बातचीत नहीं करेगी, इसे पहले हटाने में मदद कीजिये, फिर हम 2019 में सत्ता में आएंगे तो आप लोंगो से बातचीत होगी. ये शक इसलिए भी पैदा होता है, क्योंकि साल 2015 में उन्होंने पाकिस्तानी लोंगो से मोदी को हटाने की अपील की थी.

कश्मीरी अलगाववादियों से गले मिलने को बेचैन लोंगो की उनसे क्या बातचीत हुई, उसके जो वीडियो इंटरनेट पर उपलब्ध हैं, उसका हूबहू नॉट किया हुआ यह संवाद पढ़िए. अलगाववादियों के साथ ‘चाय पर चर्चा’ करने के लिए जब मणिशंकर अय्यर अपने साथियों के साथ पहुँचते हैं तो बंद कमरे में सय्यद अली शाह गिलानी से ये बातचीत होती है.
गिलानी से सवाल: आपके पास तो बहुत फौज है ना?
सय्यद अली शाह गिलानी: हाँ, काफी फौज है. वैसे फौज के सहारे ही आपका कब्जा है.
गिलानी ने हिन्दुस्तान और उसकी सेना का मजाक उड़ाया और मणिशंकर अय्यर ठहाके मारकर हंसने लगे. उनके सब साथी भी हंसने लगते हैं. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के सामने देशद्रोह की बात होती है और गिलानी को फटकार लगाने बजाय वो और उनके साथी बेशर्मी से हँसते हैं. सोचिये कितने शर्म की बात है. ऐसे बुद्धिजीवियों और सेक्युलर नेताओं से देश को भगवान् बचाएं. आगे की बातचीत पढ़िए-
गिलानी से सवाल: कैसी तबियत है आपकी?
सय्यद अली शाह गिलानी: हाँ, ठीक है.

गिलानी से सवाल: आपसे बहुत दिनों के बाद मुलाक़ात हुई है, करीब साल भर हो गया. आज बहुत दिनों के बाद सुनने का मौका मिलेगा.
सय्यद अली शाह गिलानी: फरमाइए क्या पैगाम लेकर आए हैं?
मणिशंकर अय्यर: हम आपके पैगाम सुनने के लिए आए हैं. ताकि उस पैगाम को जहाँ तक पहुंचा सकें, पहुंचाएं और फिर बीच में आपको बताएंगे.
सय्यद अली शाह गिलानी: नहीं, नहीं, पहले आप ही बात करिए.
आगे क्या बातचीत हुई, इसका कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है, लेकिन संवादाताओं से बातचीत में मणिशंकर अय्यर ने बताया कि सैयद अली शाह गिलानी ने आज हमसे कहा कि पहले आप आज़ादी की बात मानिए, तब हम आप से बात करेंगे. मणिशंकर अय्यर का मानना है कि उनकी ऐसी शर्त है, फिर भी उनसे बातचीत होनी चाहिए. वो हुर्रियत कान्फ्रेंस के अन्य अलगाववादी नेताओं मीरवाइज उमर फारूक और शब्बीर शाह से भी मिले, लेकिन उनसे हुई बातचीत का कोई व्यौरा उपलब्ध नहीं है. कहने को तो वो ‘सेंटर फोर पीस एंड प्रोग्रेस’ नाम के एक एनजीओ द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में ‘जे एंड के – द रोड अहेड’ विषय पर चर्चा के लिए वहां गए हुए थे, लेकिन कांग्रेस इस यात्रा से और अपने नेता मणिशंकर अय्यर के विचारों से यह कहकर अपना पल्ला झाड़ चुकी है कि ये उनकी निजी यात्रा और निजी राय है, कांग्रेस इससे इत्तेफाक नहीं रखती है.

मणिशंकर अय्यर की अलगाववादियों से भेंट कांग्रेस का असली चाल और चरित्र देशवासियों के सामने उजागर कर देती है. कांग्रेस जनता को मुर्ख न समझे कि वो कुछ भी चालबाजी करेंगे और जनता को पता नहीं चलेगा. जनता अब बहुत जागरूक हो गई है. वो तमाम तरह के मीडिया और सोशल मीडिया के जरिये हर चीज पर निगाह रखती है. ऐसे में उस पर जनता को शक तो होगा ही कि कांग्रेस का हाथ इस समय किसके साथ है? आपको जानकारी दे दूँ कि ये मणिशंकर अय्यर कांग्रेस के वही वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, जो साल 2015 में जब पाकिस्तान गए थे तो वहां के लोंगो से, मीडिया से और सरकार से मदद मांगे थे कि मोदी को हटाने के लिए हमारी मदद करें. पाकिस्तान के एक न्यूज चैनल ‘दुनिया न्यूज’ को दिए गए इंटरव्यू में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि अगर पाकिस्तान को भारत से बाइलेट्रल टॉक (आपसी हितों से जुडी बातचीत) करनी है तो पहले उसे नरेंद्र मोदी सरकार को हटाना होगा और हमें यानि कांग्रेस को सत्ता में लाना होगा. पढ़िए उस विवादित इंटरव्यू के अंश-
पत्रकार: किसी ने ये सवाल उठाया है कि मोदी साहब जिस लाइन को लेकर चल रहे हैं. वो पॉलिटिक्स में बिकती है. मोदी साहब कोई कमजोर नहीं हो रहे हैं. बल्कि वो स्ट्रॉग हो रहे हैं. अपने बेस को मजबूत कर रहे हैं.
मणिशंकर: 8 तारीख को बिहार के नतीजे आने वाले हैं और आपको दुबारा अपना सवाल करना पडेगा.
पत्रकार: अच्छा जी…

मणिशंकर: स्ट्रांग नहीं होते जा रहे हैं.
मणिशंकर: इसको बंद करना है तो इसका एक ही तरिका है कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते बेहतर हों. और बेहतर करने के लिए हमारे यहाँ ऐसे वजीर-ए-आजम की जरुरत है, जो फिजूल की शर्ते न रखे. और आपसे बातचीत करें, जैसा कि डॉक्टर मनमोहन सिंह ने किया. आपके यहाँ यही चीज हो, जब बातचीत होनी चाहिए. तो आप आगे बढिये, बातचीत करवाइए. जैसा कि परवेज मुसर्रफ साहब कर रहे थे. हमारे सामने एक मिसाल है. मुसर्रफ जो कि फौज के आदमी थे और हमारे डॉक्टर मनमोहन सिंह थे, तब 3 साल बातचीत जारी रही.
पत्रकार: मणिशंकर साहब, अब आप जिस जगह पर आकर खड़े हो गए हैं, इससे निकलने का क्या तरिका होगा?
मणिशंकर: हमें ले आइये, इनको हटाइये. और कोई तरिका नहीं है.
पत्रकार: अच्छा…? इनको तो आप ही हटा सकते हैं…
मणिशंकर: हाँ हम हटाएंगे, लेकिन तब तक आपको इन्तजार करना होगा.

बातचीत का ये वीडियो वायरल होने के बाद बहुत बवाल मचा था. कांग्रेस ने तब भी बड़ी चालाकी से मणिशंकर अय्यर के देशद्रोही बयान से खुद को अलग कर लिया था. उनकी पाकिस्तान यात्रा को निजी यात्रा और वहां पर व्यक्त किये गए उनके देश और लोकतंत्र विरोधी विचारों को उनका निजी विचार बताया था. मणिशंकर अय्यर खुद को लेखक, बुद्धिजीवी और सेक्युलर नेता मानते हैं, लेकिन जनता के भारी बहुमत से चुनी हुई सरकार को और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नहीं मानते हैं. वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कितनी इज्जत देते हैं, ज़रा उनके पिछले कुछ सालों में दिए गए विवादित बयानों पर गौर कीजिये. उन्होंने एक कार्यक्रम में महिला कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर आपलोग साथ दें तो मोदी को समुद्र तक पहुंचा दिया जाएगा. मणिशंकर अय्यर ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भी नरेंद्र मोदी पर विवादित बयान दिया था कि नरेन्द्र मोदी 21 वीं सदी में कभी भी देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते हैं, लेकिन अगर वो चाय बेचना चाहते है तो हम इसका इंतजाम करवा सकते है. महान और चतुर राजनीतिज्ञ मोदी ने उनके इसी चाय वाले बयान को अपना चुनावी हथियार बनाया, जिसका परिणाम यह हुआ कि मोदी को समुद्र में फेंकने की बात करने वाली कांग्रेस पार्टी खुद ही हार के समुद्र में डूब गयी और नरेंद्र मोदी एक महान देश के बेहद लोकप्रिय प्रधानमंत्री बन गए. अंत में फिर वही प्रश्न उठता है कि मणिशंकर अय्यर की पाकिस्तान से लेकर कश्मीर तक की यात्रा आखिर किसके लिए हुई? जयहिंद.



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
May 28, 2017

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर नई दिल्ली वापस आने के बाद भी कश्मीर के अलगाववादी गठबंधन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गुणगान गा रहे हैं. उनका कहना है कि कश्मीर में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का प्रभाव बहुत अधिक है, इसलिए वहां पर शान्ति बहाली के लिए हमें उससे बात करनी चाहिए ! भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत के दायरे में रहकर बातचीत करने का सुझाव दिए थे ! मणिशंकर अय्यर हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गुणगान गाते समय यह भूल गए कि बातचीत शुरू करने की उसकी पहली शर्त आजादी है ! उसकी यह मांग कोई भी केंद्र सरकार स्वीकार नहीं करेगी ! मोदी सरकार तो ऐसा सुनने को भी तैयार नहीं होगी !

sadguruji के द्वारा
May 28, 2017

सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर सबजार भट के मारे जाने के बाद अशांति और प्रदर्शनों के मद्देनज़र कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए रविवार को घाटी के कई हिस्सों में प्रशासन ने कर्फ्यू वाली पाबंदियां लगा दी थी ! कश्मीर में रविवार को अलगाववादियों ने बंद का आह्वान किया था ! कर्फ्यू और अशांति वाले इस माहौल के बीच सेना में जूनियर कमीशन अधिकारी और अन्य पदों पर चयन के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा आयोजित हुई ! यह बहुत हैरानी वाली और बहुत अच्छी बात है कि अपने उज्ज्वल भविष्य की खातिर सेना में जाने के लिए करीब 800 कश्मीरी युवक बंद की प्रतिगामी अपीलों को पूरी तरह से खारिज करते हुए संयुक्त प्रवेश परीक्षा में बैठे !

Shobha के द्वारा
May 29, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी आज काफी दिनों बाद ब्लॉग खोला मेरी बेटी आयी हुयी थी व्यस्तता में पढ़ना लिखना छूट गया लेख पढ़ा अति उत्तम लेख पूरी स्थित जानी कश्मीर में मणि शंकर अय्यर अलगाव वादियों से मिल रहे हैं जाना कश्मीर की समस्या आज की नहीं है इंदिराजी के समय भी हाल बेहाल था कांग्रेस में सभी अपना राग अलाप रहे हैं नेतृत्व का अभाव है कांग्रेस को तो खत्म करके दम लेंगे

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपकी व्यस्तता की वजह पता चली ! मेहमानों की सेवा सबसे जरुरी कर्तव्य है, फिर आपके यहाँ तो मेहमान के रूप में आपकी बेटी आई हुई थीं ! पोस्ट की सराहना के लिए धन्यवाद ! आप सही कह रही हैं कि कांग्रेस में इस समय कुशल नेतृत्व का अभाव है ! अपनी-अपनी अलग राग अलापने वाले कांग्रेसी नेता पार्टी को ख़त्म करके ही दम लेंगे ! मणिशंकर अय्यर ऐसे ही नेताओं में से एक हैं और कांग्रेस की लुटिया डुबोने में फिलहाल वो सबसे आगे हैं ! ब्लॉग पर समय देने के लिए धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी मणि शंकर अय्यर कांग्रेस के असली चरित्र का प्रतिनिधित्व करता है. लेख के लिये धन्यवाद.

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! सादर अभिनन्दन ! जी… आप बिल्कुल सही कह रहे हैं कि मणिशंकर अय्यर जो कुछ भी करते हैं, उसमे उन्हे कांग्रेस की शह जरूर मिली होती है, नही तो वो अब तक कांग्रेस पार्टी से बाहर कर दिये गये होते ! कांग्रेस का असली चाल-चरित्र वो समय समय पर उजागर करते रहते हैं ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

Rajeev Gupta आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, मणि शंकर अय्यर जैसे इस देश मे हज़ार दो हज़ार लोग हैं लेकिन उन सभी के वीडियो वायरल नही हुये हैं. यह सभी देशद्रोही इस धरती पर बोझ बने हुये हैं. देशद्रोहियों को दंड देने के लिये देश मे कोई कानून नही है. सरकार एक अध्यादेश लाकर देशद्रोही दंड अधिनियम जैसा कोई कानून लाये और इन सभी देशद्रोहियों को सारे आम मौत के घाट उतारने की व्यवस्था करे. अगर ऐसा नही हुआ तो कुछ समय बाद मोदी सरकार से भी लोगों का भरोसा उठना शुरु हो जायेगा. इनके देशद्रोह को बेनलब करने वाले ब्लॉग को सभी पाठकों तक पहुंचाने के लिये आपका हार्दिक आभार एवं अभिनन्दन.

sadguruji के द्वारा
May 30, 2017

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट की सराहना के लिये धन्यवाद ! आप सही कह रहे हैं कि यदि मोदी सरकार ने देशद्रोहियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही नही की तो उससे आम जनता का भरोसा उठ जायेगा ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
May 31, 2017

Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी मैने भी वीडिओ देख लिया है और जो रिपोर्टेर है वह केजरीवाल का चेला है और वह यह स्वीकार भी करता है.

sadguruji के द्वारा
May 31, 2017

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! मुझे अंदाजा था कि आपने और आप जैसे बहुत से बुद्धिजीवियों ने इन विडियोज को जरूर देख होगा ! किन्तु फिर भी अधिकतर पाठक इस सच्चाई से वाकिफ नही हैं ! इस ब्लॉग के माध्यम से उन पाठकों तक इस सच को पहुंचाना था ! आपने एक नई जानकारी दी है ! याद करने के लिये सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
May 31, 2017

deepak मणि शंकर चाहते है हुर्रियत पाकिस्तान सेबात करे और पाकिस्तान मस्जिद और मदरसो मेअपने प्रभाव का उपयोग कर मुस्लिम वोट कांग्रेस को दिलाये ताकि कांग्रेस की सत्ता मे वापसी हो सके

sadguruji के द्वारा
May 31, 2017

आदरणीय दीपक जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपने भी खूब कही ! प्रतिक्रिया देने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
May 31, 2017

Nand Jee राजेन्द्र ऋषि जी, मणिशंकर जैसे पाकिस्तानी दलाल (हालांकि मैं कभी ऐसे शब्द इस्तेमाल नही करता हूँ, लेकिन मामला जहा देश की अस्मिता से जुड़ जाय तो सभी शब्दो का इस्तेमाल करना चाहिये) के लिये इतना लम्बा-चौड़ा ब्लॉग. जनाब ऐसे लोग संग्यान लेने के लिये नही, दुत्कारे जाने के काबिल है. सालो पहले सोनिया को पी. एम. बनाए के मुद्दे पर मुलायम सिंह ने वीटो कर दिया था. कुछ दिनो के बाद एच. के. दुवा (संपादक हिन्दुस्तान टाइम्स) के यहा पार्टी थी, अय्यर भी थे और अमर सिंह भी. उस पार्टी मे अय्यर दारू के नशे मे अमर सिंह से झगड़ पड़े और मुलायम के बारे मे अपशब्द बोलने लगे, नतीजा अमर सिंह ने सभी के सामने इस अय्यर की लात- घुस्सो से ठुकाई शुरु कर दी और मजेदार बात यह की इसे छुड़ाने भी कोई नही आया. आखिर एच. के. दुआ ने किसी तरह अमर सिंह को समझा बुझा कर मामला शांत किया. तो भई अय्यर और सलमान खुरसिद जैसे मानसिकता वाले लोगो की कांग्रेस मे बड़ी पुछ होती है. 44 तक ये पार्टी ऐसे ही नही पहुची है.

sadguruji के द्वारा
May 31, 2017

आदरणीय नन्द जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आप बुद्धिजीवी हैं, बहुत सी जानकारी आपको है, लेकिन ब्लॉग लिखने का मेरा उद्देश्य उन पाठकों तक कुछ जानकारियाँ पहुंचाना है, जो समय की कमी के कारण ज्यादा अध्ययन नही कर पाते हैं ! आप ने जो जानकारी दी है और ब्लॉग पर समय दिया है, उसके लिये धन्यवाद !

yamunapathak के द्वारा
May 31, 2017

किसी दुश्मन के लिए क्या बद्दुआ करें जब अपनी तबाहियों में अपना ही हाथ हो आदरणीय सद्गुरू जी बहुत उम्दा और विचारणीय लेख है. सधन्यवाद

sadguruji के द्वारा
June 3, 2017

आदरणीया यमुना पाठक जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपने सही कहा कि जब अपने ही घर के लोग घर उजाड़ने में जुट जाएँ तो फिर दुश्मनों को क्या दोष दिया जाए ! पोस्ट को उम्दा और विचारणीय महसूस करने के लिए और ब्लॉग पर अनमोल समय देने के लिए सादर आभार !


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