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क्रिकेट जुए व धन की बहती हुई नदी: राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पर पाकिस्तान से खेल जारी

Posted On: 30 May, 2017 Junction Forum में

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आईसीसी द्वारा आयोजित की जाने वाली चैंपियंस ट्रॉफी प्रतियोगिता को क्रिकेट का मिनी वर्ल्ड कप भी कहा जाता है. ये एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के प्रारूप के तहत खेली जाने वाली क्रिकेट प्रतियोगिता है. साल 1998 में चैंपियंस ट्रॉफी की शुरुआत हुई थी. अमूमन दो वर्ष के बाद यह प्रतियोगिता आयोजित की जाती है, लेकिन कई बार ये प्रतियोगिता तीन या चार वर्ष के लम्बे अंतराल के बाद आयोजित की गई. पिछली बार चैंपियंस ट्रॉफी इंग्लैंड में साल 2013 को खेली गई थी, जिसके फाइनल मैच में भारत ने श्रीलंका को 5 रन से हराकर ट्रॉफी अपने नाम की थी. अब साल 2017 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी इंग्लैंड और वेल्स में आयोजित की जा रही है, जिसकी शुरुआत एक जून से होगी. यह प्रतियोगिता 18 जून तक चलेगी. इस प्रतियोगिता में भारत का शामिल होना मुश्किल लग रहा था, क्योंकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की खेलने के बदले में मिलने वाली रकम को लेकर आईसीसी के साथ निरंतर असहमति बनी हुई थी. मजेदार बात देखिये की इस टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए 15 सदस्यीय टीम की घोषणा 25 अप्रैल 2017 को या उससे पहले करना आवश्यक था.

लेकिन क्रिकेट जगत में सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई की हनक देखिये कि उसने 27 अप्रैल 2017 को पैसे को लेकर आईसीसी से हुए समझौते के बाद टीम की घोषणा करने की कवायद शुरू की, लेकिन वो अभी भी असमंजस में थी कि खेले या न खेलें. बीसीसीआई ने 7 मई, 2017 को एक विशेष आम बैठक भी की, जिसमे यह विचार किया कि उनके द्वारा चैंपियंस ट्रॉफी न खेलने पर आईसीसी कौन सी कार्रवाई करेगा. अन्तोगत्वा इस बैठक में उसने निर्णय लिया कि भारत टूर्नामेंट में भाग लेगा. टीम के खिलाड़ियों के नाम की घोषणा उसने 8 मई 2017 को की. इस पूरे प्रकरण में बीसीसीआई के व्यवहार पर यदि आप गौर करें तो यही पाएंगे कि वो पैसा कमाने की एक इंडस्ट्री भर बन के रह गई है, जिस पर भारत सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है. क्रिकेट पैसा कमाने और जुआ खेलने का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है. कुछ साल पहले बीसीसीआई के एक सदस्य ने तो यहाँ तक कहा था कि खिलाड़ी बीसीसीआई के अधीन हैं, इंडिया के नहीं. यह ठीक है कि बीसीसीआई एक स्वायत्तशासी संस्था है, लेकिन वो देश से जुडी हुई है, स्वतंत्र नहीं है. केंद्र सरकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट उसमे दखलंदाजी कर सकती हैं.

कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट की दखलंदाजी से ही उसमे बहुत बड़े पैमाने पर व्याप्त भ्रष्टाचार उजागर हुआ. बीसीसीआई पैसे कमाने के लिए उस पाकिस्तान से भी खेलने को तैयार है, जिसकी सीमा पर प्रत्यक्ष रूप से चल रही नापाक हरकतों और कश्मीर में अप्रत्यक्ष रूप से जारी आतंकी गतिविधियों के कारण दोनों देशों के बीच न सिर्फ बहुत ज्यादा तनाव है, बल्कि हर तरह की कूटनीतिक बातचीत भी बंद है. चैंपियंस ट्रॉफी 2017 में भारत का पहला मुकाबला 4 जून को अपने प्रबल शत्रु पाकिस्तान से ही है. अधिकतर भारतीयों की यही राय है कि भारत को पाकिस्तान के खिलाफ क्रिकेट नहीं खेलना चाहिए, क्योंकि वो सीमा पर हमारे सैनिकों को मार रहा है और कश्मीर में आतंकवादियों को हथियार और धन देकर उनका भरपूर सहयोग कर रहा है. जबकि कुछ लोग कह रहे हैं कि भारत को चैंपियंस ट्रॉफी में खेलना चाहिए. बीसीसीआई सहित कुछ और लोग यह तर्क दे रहे हैं कि आईसीसी इवेंट होने के कारण चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान के खिलाफ न खेलने से डिफेंडिंग चैंपियंस भारत के लिए बहुत सी दिक्कतें पैदा हो जाएंगी.

आश्चर्य की बात है कि बीसीसीआई ने पैसे को लेकर कई बैठकें की, लेकिन पाकिस्तान की सीमा पर जारी नापाक हरकतों और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कोई मीटिंग नहीं की. बल्कि इसके ठीक उलट बीसीसीआई के एक सदस्य ने एक टीवी न्यूज चैनल पर कहा कि पहले और दूसरे खेल पाकिस्तान से खेले जाने बंद हों, उससे सभी तरह के संबंध तोड़े जाएँ, फिर हम पाकिस्तान से क्रिकेट खेलना बंद कर देंगे. एक नई खबर यह है कि अपनी आर्थिकतंगी दूर करने के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) और राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत पर अपनी अमीरी बढ़ाने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अधिकारी दुबई में मिलने की योजना बना रहे थे. इस बात की भनक लगते ही केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने कहा कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद बंद नहीं होगा, तब तक पाकिस्तान के साथ क्रिकेट सीरीज संभव नहीं है. इस मामले में देंखे अब आगे क्या होता है. मेरे विचार से तो मोदी सरकार को चैंपियंस ट्रॉफी में 4 जून को पाकिस्तान से खेलने की मनाही करनी चाहिए थी. उस पर वो अभी तक न जाने क्यों चुप है? दरअसल सच्चाई यह है कि आज के समय में क्रिकेट जुए और धन की एक ऐसी बहती हुई नदी है, जिसमे क्या सत्तापक्ष और क्या विपक्ष, सब के इस खेल से जुड़े हुए बड़े-बड़े मालदार और रसूखदार नेता मुल्क की राष्ट्रीय सुरक्षा को दरकिनार करके भी गोते मारने को व्याकुल रहते हैं.



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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
May 31, 2017

Leela Tewani प्रिय ब्लॉगर सद्गुरु भाई जी, आपने बिलकुल दुरुस्त फरमाया है. पाक के साथ खेल का खेल बंद होना चाहिए, पर न जाने क्या सोचकर इसे जारी रखा जा रहा है. अत्यंत सटीक व सार्थक रचना के लिए आपका आभार.

sadguruji के द्वारा
May 31, 2017

आदरणीया लीला तिवानी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! रचना को सटीक ओर सार्थक महसूस करने के लिये धन्यवाद ! अधिकतर देशवासियों की राय यही है कि जब तक पाकिस्तान सुधर नही जाता है, तब तक उससे क्रिकेट ही नही, बल्कि सभी खेल बंद हो जाने चाहिये ! दोनो देशों के बीच भारी तनाव होने के कारण खिलाडी भी तनाव मे होते हैं और स्टेडियम युद्ध का मैदान बन जाता है ! क्रिकेट मे इतना पैसा है और जुएबाजी है कि बोर्ड, खिलाडी और सट्टा लगाने वाले लोग सब देशहित भूल जाते हैं ! इसलिये राष्‍ट्रीय सुरक्षा को खतरे मे डालकर भी ये खेल जारी है ! ब्लॉग पर समय देने के लिये सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
May 31, 2017

Harish Chandra Sharma आदरणीय सदगुरु जी बहुत सुन्दर आकलन दरअसल सच्चाई यह है कि आज के समय में क्रिकेट जुए और धन की एक ऐसी बहती हुई नदी है, जिसमे क्या सत्तापक्ष और क्या विपक्ष, सब के इस खेल से जुड़े हुए बड़े-बड़े मालदार और रसूखदार नेता मुल्क की राष्ट्रीय सुरक्षा को दरकिनार करके भी गोते मारने को व्याकुल रहते हैं…………………….सच ही कहा है ….ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं हम क्या करें |………..ओम शान्ती शान्ती

sadguruji के द्वारा
May 31, 2017

आदरणीय हरीश चंद्र शर्मा जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट की सराहना के लिये धन्यवाद ! क्रिकेट जुए और धन की बहती हुई नदी तो न जाने कबका बन चुका है ! राष्‍ट्रहित को दरकिनार कर इसमे गोता मारने वाले सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के लिये आपने क्या खूब गाना गाया है, ‘ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं, हम क्या करें…’ इसमे आगे एक लाइन और जोड़ दूं, ‘तसव्वुर में राष्‍ट्रहित बसता नहीं, हम क्या करें …’ अपनी सुन्दर और सार्थक प्रतिक्रिया से पोस्ट को सार्थकता प्रदान करने के लिये हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
May 31, 2017

Rajeev Gupta आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, आपने जिस राष् ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को उठाया है, उसके लिये आपका हार्दिक अभिनन्दन. दरसअसल सरकार अपने विकास के राग मे इस कदर मस्त है कि राष् ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर उसका ध्यान ही नही जा रहा है. बी सी सी आई को तुरंत सरकार अपने अधिकार मे लेकर उसे एक सरकारी संस्था का दर्ज़ा दे ताकि जिस तरह की देशद्रोह की वारदात बी सी सी आई अंज़ाम दे रहा है, उसकी फिर पुनरावृति ना हो सके. पाकिस्तान के साथ सभी तरह का खेल और संवाद बंद होना चाहिये और भारतीय संसद को सर्वसम्मति से इसे एक आतंकवादी देश घोषित करना चाहिये.

sadguruji के द्वारा
May 31, 2017

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! आपसे सहमत हूँ कि बीसीसीआई सरकार के अधीन होनी चाहिये ! स्वतन्त्र संस्था होने के कारण ही यह भ्रष्ट और निरन्कुश हो गई है ! पाकिस्तानी संसद भारत की निन्दा कर सकती है, लेकिन भारतीय संसद न उसकी निन्दा कर सकती है और न ही उसे आतंकवादी देश घोषित कर सकती है ! आपसे सहमत हूँ कि राष्‍ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर मोदी सरकार पूरी तरह से गंभीर नही है ! इसका खामियाजा देश भुगत रहा है ! ब्लॉग पर समय देने के लिये और पोस्ट की सराहना करने के लिये हार्दिक आभार !

yamunapathak के द्वारा
May 31, 2017

आदरणीय सद्गुरू जी सादर नमस्कार खेल कला संस्कृति सरहद की बंदिशें नहीं मानतीं पर आज हालात सच में ऐसे हैं की आर या पार के फैसले की मांग उठ रही है. बहुत ही समसामयिक मुद्दे के लिए आभार

sadguruji के द्वारा
June 1, 2017

AMIT आदरणीय सद गुरु जी महाराज, सिर्फ क्रिकेट ही क्यों बंटी सरकार तो पूंजीपति बनईयो का फायदा देखते हुए पाकिस्तान को व्यपार मे मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्ज़ा भी दे कर बेठी है….! इधर गो भक्षण मे लिप्त किरण रिज्जु को अहम केबिनेट मंत्री पड भी दिया गया है…..! वोट बेंक की सस्ती पॉलिटिक्स का शिकार हमारी गो माता बनी हुई है फिर चाहे राष्ट्रवादी हिंदूहितकारी सरकार हो या विपक्ष, सब मिल कर जनमानस की भावनाओ से खिलवाड़ कर रहे है….

sadguruji के द्वारा
June 1, 2017

आदरणीय अमित जी ! सादर अभिनन्दन ! एक प्रतिशत अमीरों के पास देश की 51 प्रतिशत सम्म्पती है ! कोई भी सरकार हो बिना उनकी मदद के निजी क्षेत्र मे कुछ ज्यादा नही कर सकती है ! पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा डब्ल्यूटीओ बनने के साल भर बाद भारत ने 1996 में दिया था ! इसके लिये मोदी सरकार को दोष न दें ! पाकिस्तान से यह दर्जा छीनने के लिये भारत को डब्ल्यूटीओ मे जाना होगा और कारण भी बताना होगा ! बीफ खाने वाले हर पार्टी मे हैं ! आपकी इस बात से पूर्णत: सहमत हूँ कि हमारी गौमाता इस देश की डर्टी पॉलिटिक्स का शिकार हो चुकी हैं ! उनके नाम पर सब पार्टिया जनता को वेवकूफ़ बना रही हैं ! गौमाता से प्रेम होता तो सब मिलकर कब का उसे ‘राष्‍ट्रीय पशु’ घोसित करा दिये होते ! प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

rameshagarwal के द्वारा
June 1, 2017

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी.कुछ लोगो को खास कर खिडाईओ और बीसीआई के कुछ अफसरों को देश से ज्यादा पैसे से प्यार है लेकिन सरकार के कढ़े रुख से द्विपक्षीय सीरीज से मन कर दिया लेकिन उन प्रतियोगिताओ को जो विस्वा स्टार पर होती उससे अलग होने के मतलब विश्व से अलग थलग होना है जो उचित नहीं .खेलमंत्री गोयल जी ने बहुत साफ़ शब्दों में कहा इसलिए दुबई में देश ने मना कर दिया.मेरे ख्याल से यही उचित है.विश्व प्रीतिओजिताओ में भाग लेना चाइये.

sadguruji के द्वारा
June 3, 2017

आदरणीया यमुना पाठक जी ! सादर अभिनन्दन ! खेल तो वाकई सरहद की बंदिशों से परे है, लेकिन कोई मुल्क अगर हमारी सरहद पर आये दिन गोली और बम से हमले करता रहे और हमारे वीर जवान शहीद होते रहें, तो उस रंजो गम वाले माहौल में खूनी खेल खेल रहे दुश्मन मुल्क से कोई भी खेल खेलना मुनासिब नहीं है ! आप सही कह रही हैं कि जनता अब पाकिस्तान से आर पार की लड़ाई चाहती है ! प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
June 3, 2017

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! सादर अभिनन्दन ! आप ठीक कह रहे हैं कि बीसीसीआई के अफसरों को देश से ज्यादा पैसे से प्यार है ! सरकार को इस भ्रष्ट संस्था को अपने नियंत्रण में ले लेना चाहिए ! फिलहाल अभी तो यह माननीय सुप्रीम कोर्ट की कड़ी निगरानी में है ! अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जरूर भाग लेना चाहिए, लेकिन पाकिस्तान से मैच नही खेलना चाहिए ! ब्लॉग पर आने के लिए सादर आभार !

Shobha के द्वारा
June 9, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी बहुत सही भारत वासियों के दर्द को दर्शाता लेख पाकिस्तान सरहद पर निरंतर गोले बरसा रहा है हमारे सैनिकों के सर काट कर सैनिको का अपमान किया हमारी क्रिकेट टीम को उसी पाकिस्तान की टीम से क्रिकेट खिलवा रहे हैं जीत कर भी हमें ख़ुशी नहीं हुई. उदासीनता से टीवी पर अधिकाँश ने खेल देखा.

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आप ठीक कह रही हैं कि जो पाकिस्तान निरंतर सरहर पर गोले बरसाता हो, हमारे सैनिकों के सिर काटकर उनका और देश का अपमान करता हो, उस दुश्मन मुल्क से क्रिकेट खेलकर और उसे क्रिकेट के मैदान में बुरी तरह से हराकर भी अधिकाँश भारतीयों को बहुत ख़ुशी नहीं, बल्कि क्रोध से भरे उनके कलेजे को ठंडक जरूर लग गई ! प्रतिक्रिया देने के लिए सादर आभार !


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