सद्गुरुजी

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क्या गाय कभी "राष्ट्रीय पशु" बनेगी या फिर "राजनीतिक पशु" भर ही बन के रह जायेगी?

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बुधवार को राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश महेशचंद्र शर्मा ने अपने एक आदेश में कहा, ‘संविधान के अनुच्छेद 48 और 51ए (जी) को ध्यान में रखते हुए और गाय को उचित सुरक्षा और संरक्षण प्रदान करन के लिए कानूनी पहचान प्रदान करनी चाहिए, सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की उम्मीद की जाती है.’ हिंगोनिया गौशाला में पिछले साल लगभग 500 गायों की मौत भूख और बीमारी से हुई थी, उसी मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि कानूनों में बदलाव करके गोहत्या के मामले में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी जाए, जबकि अभी तक इस मामले में केवल तीन साल तक की सजा देने का ही प्रावधान है. 23 मई को पर्यावरण मंत्रालय ने पशुओं के खिलाफ क्रूरता रोकने के लिए मवेशी बाजार का नियमन करते हुए ‘पशुओं के खिलाफ क्रूरता रोकथाम नियम, 2017′ अधिसूचित किया, जिसके अनुसार अब पशु बाजार से वध के लिए गाय, बैल, सांड, बधिया बैल, बछड़े, बछिया, भैंस और ऊंट आदि मवेशी नहीं खरीदे जा सकेंगे. सब जानते हैं कि देशभर के पशु बाजारों में दुधारू व स्वस्थ पशुओं की खरीद-फरोख्त वधकर मांस हासिल करने के लिए होती है. केंद्र सरकार इसी क्रूरता और पशु धनहानि पर रोक लगाना चाहती है.

अब पशुओं को पालने के लिए ही मवेशी बाजार से पशु ख़रीदे जा सकेंगे और उसके लिए भी अपना निवास प्रमाण पत्र देना होगा और वध न करने के संकल्प या घोषणा-पत्र पर दस्तखत करना होगा. पशु मालिक को भी अपना पूरा नाम पता देना होगा. अधिसूचना के अनुसार पशु बाजार की कमेटी का सचिव इस बात को सुनिश्चित करेगा कि कोई जानवर मवेशी बाजार में तभी आए जब उसके मालिक का पूरा ब्योरा मंडी में जमा हो जाए. नए कानून के अस्तित्व में आने के बाद वध के लिए अब जानवर पशु बाजार से नहीं, बल्कि फार्म हाउस से खरीदना होगा. केंद्र सरकार के इस निर्णय का केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में काफी विरोध हुआ है. तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और वामपंथियों ने गौवध का समर्थन करते हुए केंद सरकार के नए कानून का पुरजोर विरोध किया है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए कोर्ट तक में जाने की चुनौती दी है, वहीँ दूसरी ओर इस कानून के विरोध में केरल युवक कांग्रेस के अध्यक्ष ने बीच चौराहे पर एक बछड़े को काट कर राहगीरों को फ्री में उसका मांस वितरित किया, हालांकि बाद में राजनितिक बवाल मचने पर राहुल गाँधी के करीबी बताये जाने वाले इस युवक को पार्टी से निकाल दिया गया.

विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा किये जाने वाले विरोध प्रदर्शनों और कुछ राज्यों में छात्रों व नेताओं द्वारा आयोजित बीफ फेस्टिवल कार्यक्रमों के बीच 30 मई को मद्रास हाई कोर्ट ने पशुओं की खरीद-बिक्री को लेकर केंद्र सरकार के फैसले पर चार सप्ताह के लिए रोक लगा दी. मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने अंतरिम फैसला सुनाते हुए कहा है कि खाने को चुनना सबका व्यक्तिगत अधिकार है और किसी को भी उसे तय करने का अधिकार नहीं है. दूसरी तरफ 31 मई को केरल हाई कोर्ट ने उस जनहित याचिका को रद्द कर दिया, जिसमे केंद्र सरकार के मवेशी बाजार को नियंत्रित करने के फैसले को चुनौती दी गई थी और उसे खारिज किए जाने की मांग की गई थी. केरल हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सबसे बड़ी बात यह कही कि प्रदर्शनकारियों ने केंद्र के नए नियम को गलत समझ लिया है, जबकि उस नियम में मवेशियों को मारने या मांस खाने पर कोई पाबंदी नहीं है. केंद्र सरकार ने केवल बड़े पशु बाजारों में कुछ मवेशियों की बिक्री पर रोक भर लगाई है. केंद्र सरकार निर्णय तो अच्छा ली है, लेकिन उसने दो गलती की है, एक तो उसने उन राज्य सरकारों से कोई सलाह नहीं ली, जहाँ पर गोमांस खाया जाता है और दूसरे गाय के साथ-साथ बैल, सांड, बधिया बैल, बछड़े, बछिया, भैंस और ऊंट आदि को भी अपनी मवेशी की परिभाषा में शामिल कर लिया है.

अब कई राज्यों के कड़े विरोध के बाद केंद्र सरकार भैंस को मवेशी की परिभाषा से बाहर करने पर विचार कर रही है. आइये, अब हम लोग राजस्थान उच्च न्यायालय के 31 मई को दिए गए उस आदेश पर विचार करें कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए तो सबसे पहले देशभर में गायों की वर्तमान स्थिति पर विचार करना होगा. देश के अधिकतर राज्यों ने गौहत्या पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, जबकि कुछ राज्यों ने बूढ़ी और बीमार गायों को मारने की अनुमति दे रखी है और कुछ राज्यों में गौहत्या के लिए प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है. गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के लिए संसद में एक प्रस्ताव लाकर संविधान में संशोधन करना होगा, क्योंकि इस समय राष्ट्रीय पशु बंगाल बाघ या कहिये रॉयल बंगाल टाइगर है. भारत में बाघों को बचाने के लिए प्रोजेक्ट टाइगर शुरु किया गया था और सन् 1973 में बंगाल के बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया था. उससे पहले भारत का राष्ट्रीय पशु शेर था. यदि बाघ को बचाने के लिए उसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जा सकता है तो गाय को बचाने के लिए भी उसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जा सकता है, क्योंकि भारत मुख्य रूप से एक कृषि प्रधान देश है, जहां पर गायों को सुरक्षा और संरक्षण दिया जाना बेहद जरुरी है. हालांकि ये कार्य भी कठिन है, क्योंकि राजयसभा में मोदी सरकार के पास बहुमत नहीं है. इसके लिए सदन का सयुंक्त अधिवेशन बुलाना होगा.

यह सवाल भी अहम् है कि सभी मुस्लिम देशों में यदि सूअर के मांस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, तो भारत में गाय के मांस पर क्यों नहीं? गाय जो हिन्दुओं के लिए पवित्र है और जिसे वो गौमाता कहते हैं. जिसमे हिन्दू सभी देवी-देवताओं का निवास मानते हैं और जिसके दूध से लेकर मूत्र और गोबर तक को वो पवित्र मानते हैं, उस एक पशु के वध पर पाबंदी लगने से कोई भी मांसाहारी भूखा नहीं मरेगा. अतः मोदी सरकार को इस बात का पुरजोर प्रयास करना चाहिए कि गाय को जल्द से जल्द राष्ट्रीय पशु घोषित कर दिया जाए. मुस्लिम पशु व्यवसायियों पर गौ रक्षकों के हमलों से परेशान होकर बहुत से मुस्लिम नेता भी अब तो गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दे रहे हैं. सबसे अहम् बात यह है कि राजस्थान हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट रूप से कहा है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए. हालांकि इस ऐसा करने में अड़चने भी बहुत सी हैं. सबसे पहले तो दूध न देने वाली, बीमार और बूढी हो चुकीं गायों की संख्या इतनी अधिक है कि आप उसे रखेगें कहाँ? गौ सेवा करने के लिए स्थापित की गईं देश की अधिकतर गोशालाओं की स्थिति बहुत खराब है और दूसरी बात ये कि वहां पर भ्रष्टाचार भी बहुत ज्यादा व्याप्त है.

अधिकतर गौशाला वाले गौ सेवा की जगह गाय की रक्षा करने के नाम पर चंदे बटोरने और दूध, मूत्र, गोबर आदि गौ उत्पाद बेचकर धन कमाने में ज्यादा रूचि लेते हैं, इसलिए उचित देखभाल के अभाव में गायें गौशालाओं में बड़ी संख्या में भूख और बीमारी से मर रही हैं. यह बहुत चिंता की बात है. जयपुर की हिंगोनिया गौशाला में पिछले साल हुई 500 गायों की मौत इस बात का पुख्ता सबूत है. मोदी सरकार को सबसे पहले तो गौशालाओं की बुरी स्थिति में सुधार करना चाहिए और सख्त कानून बना उसे भ्रष्टाचार से मुक्त भी करना चाहिए. सब जानते हैं कि गौ रक्षा का मुद्दा भाजपा के राजनीतिक एजैंडे का एक मुख्य हिस्सा है, जबकि इस मुद्दे को विपक्ष लोकतंत्र व धर्मनिरपेक्षता के लिए बहुत बड़ा खतरा बताता है. जाहिर सी बात है कि इन राजनीतिक अंतर्विरोधों के बीच गाय बिचारी फंसकर ‘राजनीतिक पशु’ भर बन के रह गई है, इसलिए उसके ‘राष्ट्रीय पशु’ बनने की राह आसान नहीं है. जैसे ही भाजपा ऐसी कोशिश करना शुरू करेगी, वैसे ही सारे विपक्षी दल एकजुट होकर भाजपा के ऐसे कदम को लोकतंत्र व धर्मनिरपेक्षता विरोधी बता एक सुर में हल्ला मचाना शुरू कर देंगे. वो मांस और चमड़ा के व्यवसाय से जुड़े श्रमिकों और व्यवसायियों के बेरोजगार होने के मुद्दे को भी खूब बढ़ाचढ़ाकर पेश करेंगे. ऐसे में गाय बिचारी ‘राष्ट्रीय पशु’ की जगह ‘राजनीतिक पशु’ भर ही बन के रह जायेगी. जयहिंद.



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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
June 1, 2017

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी अंग्रेज़ो के आने के पहले देश बहुत संपन्न था इसीलिये अँगरेज़ खूब लूट कर ले गए और गया का बहुत बड़ा योगदान था.देश की अर्थ व्यवस्था को तोड़ने के लिए अंग्रेज़ो ने जो वध शुरू करवाया और गावो पर टैक्स लगा दिया.आज़ादी के बाद मुस्लिम तुष्टीकरण की वजह से और वाम डालो के प्रभाव से हिन्दुओ को शर्मिंदगी झेलनी पडी .अब मोदीजी के राज्य में उम्मीद है लेकिन समय लगेगा.७० साल की गंदगी दूर करने के लिए समय लगेगा क्योंकि सेक्युलर नेता और मीडिया एक साथ विरोध में है लगता सर्वोच्च न्यायालय भी मुसलमानो से डरता इसीलिये हिन्दू हिट पर सुनवाई नहीं करता.गीता को राष्ट्रीयग्रंथ गाय को राष्ट्रीय पशु और गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित होगी बस समय का इंतज़ार करना पड़ेगा.आपके सुन्दर लेख के लिए साधुवाद .ये दुर्भग्य है हिन्दुओ का की जहाँ उनका बहुमत है वही उनकी कोइ सुनवाई नहीं होती.

sadguruji के द्वारा
June 1, 2017

हिन्दुस्तान मे प्राचीनकाल से ही गाय को पवित्र मान पूजा हो रही है ! प्राचीन काल मे राक्षस सनातनधर्मियों को चिढ़ाने के लिये यह कहकर गाय काटते और खाते थे कि तुम इसे पवित्र मानते हो, इसलिये हम खायंगे ! शरीर से तथा मायावी शक्तियों व सिद्धियों से अति बलवान होते हुए भी राक्षस जाति का पवित्र गायों के वध और भक्षण के कारण ही समूल संहार हो गया ! इस संसार मे जो कुछ भी पवित्र है, ईश्वर की विशेष विभूति होने के कारण उसकी पूजा करनी चाहिए. किन्तु यदि पूजा यदि न भी करना चाहें तो उसका निरादर मत कीजिये और उसे नष्ट मत कीजिये ! ईश्वर द्वारा निर्मित पवित्र चीजों को नष्ट करना विनाश को आमंत्रित करना है ! मैने अपने अब तक के जीवन मे गाय को डंडे से मारने वाले कई लोंगो की बहुत बुरी दुर्दशा होते देखी है ! गौ संरक्षण का विरोध करने वालों को ईश्वर सदबुद्धि दें !

sadguruji के द्वारा
June 1, 2017

केंद्र सरकार ने केवल बड़े पशु बाजारों में कुछ मवेशियों की बिक्री पर रोक लगाई है. केंद्र सरकार निर्णय तो अच्छा ली है, लेकिन उसने दो गलती की है, एक तो उसने उन राज्य सरकारों से कोई सलाह नहीं ली, जहाँ पर गोमांस खाया जाता है या फिर जहाँ का मुख्य भोजन ही मांसाहार है. केंद्र सरकार ने दूसरी गलती यह की है कि गाय के साथ-साथ बैल, सांड, बधिया बैल, बछड़े, बछिया, भैंस और ऊंट आदि को भी अपनी मवेशी की परिभाषा में शामिल कर लिया है और इन सबकी बिक्री पर रोक लगा दी है. अब सवाल यह पैदा होता है कि गाय और उसके परिवार यानि बैल, सांड, बधिया बैल, बछड़े और बछिया को तो गौशाला में किसी तरह से जगह मिल जायेगी, लेकिन भैंस और ऊंट को आप कहाँ रखेंगे. क्या सरकार भैंसशाला और ऊंटशाला भी खुलवाएगी? आखिर उनको संरक्षण किस तरह से दिया जायेगी? लोग यदि इन्हे सड़कों पर खुला छोड़ देंगे तो बहुत भारी समस्या पैदा हो जायेगी. सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार कर इसमें कुछ संशोधन करना चाहिए.

Shobha के द्वारा
June 2, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी सटीक हेडिंग गे बीएस राजनितिक पशु बन कर ही रह जायेगी यही ट्रेंड चल रहा है किसान गाय के दूध से रोजी चलाता है लेकिन बूढ़ी गाय को आगे चारा नही देना चाहता गो शाला के नाम पर जमीने आबंटित होती हैं कुछ समय बाद जमीन पर कब्जा कर लेते हैं दुखद

sadguruji के द्वारा
June 2, 2017

नेपाल में अधिकतर लोग मांसाहारी हैं. किन्तु फिर भी साल 2015 में लागू नेपाल के नए धर्मनिरपेक्ष संविधान में गाय को देश का राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया. नेपाल हिन्दू बहुल देश है. साल 2015 से पहले यह दुनिया का एकमात्र हिन्दू राष्ट्र था. अब नए संविधान के तहत इसे सेक्यूलर यानि धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया है. गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने को लेकर यहाँ भी वर्षों तक विभिन्न दलों के बीच राजनितिक तकरार हुई. कुछ सांसदों ने एक सींग वाले गैंडे को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का प्रस्ताव किया था. गाय को हिंदू धर्म में पवित्र पशु का दर्जा प्राप्त है और हिन्दू बहुल देश होने के नाते अन्तोगत्वा गाय को देश का राष्ट्रीय पशु बनाने का फैसला किया गाया. भारत भी इस मामले में नेपाल का अनुकरण करते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर सकता है.

sadguruji के द्वारा
June 2, 2017

नेपाली कांग्रेस के महासचिव कृष्ण प्रसाद सितौला ने नेपाल की शांति एवं संविधान का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया में एक प्रमुख भूमिका निभाई था. साल 2015 में उन्होंने कहा था कि ‘हिंदू समर्थकों के लिए हमने गाय को अपना राष्ट्रीय पशु बनाया है. अब गाय को संवैधानिक संरक्षण मिल गया है और गोहत्या पर पाबंदी भी लगा दी गई है. पहली संविधान सभा से यह प्रावधान हटा दिया गया था, लेकिन हम इसे वापस लेकर आए हैं.’ भारत में भी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के लिए कृष्ण प्रसाद सितौला जैसा ही भगीरथ प्रयास किसी समर्थ नेता को करना होगा. गाय हिन्दू धर्म में इतनी पवित्र क्यों है? काफी समय पहले एक संत से मैंने पूछा था. उन्होंने कहा था, यह 84 लाख पशु-पक्षी व कीड़े-मकोड़े वाली योनियों में सर्वोच्च योनि है. इसके बाद मनुष्य का जन्म मिलता है.

sadguruji के द्वारा
June 3, 2017

आदरणीय डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर जी ! सादर अभिनन्दन ! इस पोस्ट को ब्लॉग बुलेटिन में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! आपका दिया हुआ लिंक अब ठीक कार्य कर रहा है और ब्लॉग बुलेटिन तक जाने में अब कोई दिक्कत नहीं है ! अभी वहां से घूम के आ रहा हूँ ! आपकी साहित्यिक रूचि और सेवा अनुपम है ! सादर आभार और शुभकामनाओं सहित !

sadguruji के द्वारा
June 3, 2017

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! लेख पर बारीकी से गौर करने के लिए धन्यवाद ! आपके सुझाव पर अब मेरी भी कोशिश होती है कि हेडिंग से ही पूरा लेख संबंधित रहे,दुसरे विषयों पर चर्चा न्यूनतम हो ! गौशाला वाले बीमार और बूढी गायों को अपने यहाँ रखने को ही तैयार नहीं हो रहे हैं ! इसलिए इधर उधर भटकना, पॉलीथिन खाना, दवा और देखभाल के अभाव में तड़फ तड़फ के मर जाना या फिर किसी कसाई के हत्थे चढ़ जाना उनकी नियति बन चुकी है ! गौशाला की जमीन पर कब्जे वाली बात आपकी पूर्णतः सही है ! सरकार को इन सब चीजों को ध्यान में रख कोई ठोस निर्णय लेना चाहिए ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
June 3, 2017

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! सादर अभिनन्दन ! आपसे सहमत हूँ कि इस देश में सत्ता और पॉवर हाथ में ले बैठे बहुत से लोग हिन्दू हित की बात करने में संकोच करते हैं या फिर डरते हैं ! गाय को राष्ट्रीय पशु और गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करने का आपने अच्छा सुझाव दिया है ! गंगा देश की राष्ट्रीय नदी बहुत पहले ही घोषित हो चुकी है ! नवंबर,२००८ में भारत सरकार द्वारा गंगा को भारत की राष्ट्रीय नदी तथा इलाहाबाद और हल्दिया के बीच गंगा नदी जलमार्ग को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया ! देश की जनता को अब गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किये जाने का इन्तजार है ! ब्लॉग पर कीमती समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
June 3, 2017

सद्गुरु जी गंभीर चिंतन ,किन्तु कलियुग है कलियुग मैं भक्ति भी आराध्य को प्रसन्न करने के लिए ही होती है | हिंदुस्तान के आराध्य मोदी जी हैं | जितनी भी गौ भक्ति उपज रही है | अपने आराध्य को बल देने को ही उपज रही है | वर्ना भक्तों ने तो एक एक गाय पालकर उसकी सेवा कर ही पुण्य कमाना चाहिए था | ताकि ॐ शांति शांति बनी रहे |

sadguruji के द्वारा
June 4, 2017

आदरणीय हरीश चंद्र शर्मा जी ! सादर अभिनन्दन ! गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने का अभियान तो आजादी के बाद से ही चल रहा है, इसलिए इसे मोदी को प्रसन्न करने के लिए उठाया गया मुद्दा कहना सही और तर्कसंगत नहीं है ! हाँ, आपकी इस बात से सहमत हूँ कि गाय पालकर पुण्य कमाना सौभाग्य की बात है ! मेरे गाँव पर आज भी गाय पाली जाती है ! शहर में तो यह चाहते हुए भी संभव नहीं है ! ब्लॉग पर समय देने के लिए हार्दिक आभार !

Anil kumar gautam के द्वारा
June 6, 2017

Warso se gaay kuchh logo ke liye rajnitik pashu rahi hai aage bhi rahegi…..Bhakt pahle bhi the, aaj bhi hai, kall bhi rahenge, Ye bhakt apne aap ko bahut hosiyar samajhte hai, pata nahi ye hai bhi ki nahi?

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
June 7, 2017

वर्तमान में तो गाय का महत्त्व केवल राजनैतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है .सार्थक आलेख हेतु आभार .

sadguruji के द्वारा
June 7, 2017

आदरणीय अनिल कुमार गौतम जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! गाय पालने वाले और गौ सेवा करने वाले करोड़ों गोभक्त देश में आज भी हैं, उसमे सभी जाति और धर्म के लोग शामिल हैं ! रही बात गाय को राजनीतिक पशु बनाये रखने की तो इसके लिए सभी राजनीतिक पार्टिया जिम्मेदार हैं ! ब्लॉग पर समय देने के लिए धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
June 7, 2017

आदरणीया डॉक्टर शिखा गौतम जी ! सादर अभिनन्दन ! आपकी बात से सहमत हूँ कि वर्तमान में गाय को केवल एक राजनैतिक हथियार के रूप में प्रयोग किया जा रहा है ! इसके लिए भाजपा और कांग्रेस सहित देश और प्रदेश की सारी राजनीतिक पार्टियां जिम्मेदार हैं ! पोस्ट की सराहना के लिए और ब्लॉग पर समय देने के लिए हार्दिक आभार !


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