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गीता और उपनिषद पढ़ने से न तो हिन्दू प्रभावित होंगे और न ही 'गोहत्या' का पाप धुलेगा

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने 4 जून को चेन्नई में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा, ‘आजकल मैं उपनिषद और गीता पढ़ता हूं, क्योंकि मैं आरएसएस और बीजेपी से लड़ रहा हूं.” उन्होंने कहा, “मैं उनसे (आरएसएस और भाजपा) से पूछता हूं कि दोस्तों, आप लोगों का शोषण कर रहे हैं, लेकिन उपनिषद में लिखा है कि सभी लोग समान हैं तो आप अपने ही धर्म में लिखी बातों के खिलाफ कैसे जा सकते हैं?’ राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी हमला बोलते हुए कहा कि ‘बीजेपी के लोग समझते हैं कि ब्रह्मांड का सारा ज्ञान नरेंद्र मोदी के पास ही है.’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ‘बीजेपी भारत को समझती ही नहीं है, बीजेपी सिर्फ नागपुर ‘आरएसएस के मुख्यालय’को समझती है.’ राहुल गांधी के इस तरह के बचकाने बयान उन्हें जनता की नजरों में एक अच्छा राजनीतिज्ञ नहीं, बल्कि नकलची और बहुरुपिया ही ज्यादा सांबित करते हैं. सोशल मीडिया पर उनकी इन सब बातों का काफी मज़ाक उड़ाया जा रहा है. लोग मजा ले रहे हैं कि कांग्रेस की लुटिया डुबोकर राहुल गांधी अब राजनीति से ‘मोक्ष’ पाने के लिए गीता और उपनिषद पढ़ रहे हैं.

राहुल गांधी गीता और उपनिषद पढ़ रहे हैं, आध्यात्मिक ज्ञानार्जन की दृष्टि से यह अच्छी बात है. लेकिन उनका यह कहना कि वो आरएसएस और बीजेपी से लड़ने के लिए ऐसा कर रहे हैं, यह बेहद मूर्खतापूर्ण बयान है. इससे उन्हें लाभ की बजाय हानि ही होगी. राहुल गांधी जानते हैं कि हमारे देश का शासन किसी धार्मिक ग्रन्थ के आधार पर नहीं चल रहा है, बल्कि संविधान के अनुसार चल रहा है, इसलिए आध्यात्मिक धर्मग्रंथों को राजनीति से जोड़ना किसी भी दृष्टि से न तो तर्कसंगत है और न ही फायदेमंद. राहुल गांधी धर्म को हथियार बना आरएसएस और भाजपा पर निशाना साधते हुए कह रहे हैं कि उपनिषद में लिखा है कि सभी लोग समान हैं तो आप अपने ही धर्म में लिखी बातों के खिलाफ क्यों जा रहे हैं? सबको मालूम है कि भाजपा का नारा ही है, ‘सबका साथ और सबका विकास’ और आरएसएस उसके इस नारे का पुरजोर समर्थन करती है. ऐसे में राहुल गांधी का यह बयान बेतुका लगता है. रही बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास ब्रह्मांड का सारा ज्ञान होने की तो ऐसा संभव ही नहीं है और भाजपा ऐसी हास्यास्पद बात कभी नहीं कहती है.

राहुल गांधी का ऐसा उलजुलूल बयान यह दर्शाता है कि वो मोदी कि सफलता से कितने हतोत्साहित और तनावग्रस्त हैं. राहुल गांधी को मोदी से ऐसी नासमझीभरी ‘सौतिया डाह या जलन’ रखने की बजाय सकारात्मक ढंग से ये सोचना चाहिए कि उनमे और नरेंद्र मोदी में क्या मौलिक अंतर है, क्योंकि नरेंद्र मोदी की मौलिकता ही उन्हें प्रधानमंत्री पद तक लेकर गई है. इसके ठीक उलट राहुल गांधी के नाम तक में मौलिकता नहीं है. यदि वो पारिवारिक विरासत के रूप में मिले ‘गांधी’ टाइटल को अपने नाम के आगे से हटा दें तो फिर वो खुद ही सोचें कि शेष क्या बचता है? यही वजह है कि उनकी अपंनी मौलिकता और सफलता अभी तक सवालों के घेरे में है. मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति और मनमोहन सिंह सरकार के अनेकों घोटाले भ्रष्ट कांग्रेस को बहुसंख्यक हिन्दुओं और केंद्र की सत्ता से बहुत दूर लेजाकर पटक दी है. अब राहुल गांधी यदि सोचते हैं कि गीता और उपनिषद पढ़ने की बात कर हिन्दुओं को प्रभावित कर लेंगे और केरल में कांग्रेस ने सरेआम जो गोहत्या की, उसका प्रायश्चित कर लेंगे. तो यह उनकी भारी भूल है. वो पाप कभी नहीं धुलेगा और न ही हिन्दू समाज कभी उस ‘धर्मविरोधी’ घटना को भूल पायेगा.



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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
June 6, 2017

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी, राहुल गाँधी अपनी हार से इतना हतोत्साहित हैं कि उसे पता नहीं की क्या कहा जाये. ये सब नाटक है इसका उल्टा असर होगा. चाहे जितने विरोधी दल, कितने भी सिद्धांतहीन गठबंधन बना लें, मोदीजी की सरकार को टक्कर नहीं दे सकते. मोदी विरोध के अलावा उनके पास कोइ दूसरे नया या मुद्दा नहीं है. ऐसे बयान देकर अपनी मूरखता प्रदर्शित कर रहे हैं. सुन्दर लेख के लिए बधाई.

sadguruji के द्वारा
June 7, 2017

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! जय श्रीराम और सादर अभिनन्दन ! आपसे सहमत हूँ कि राहुल गांधी के पास राजीनीति करने के लिए कोई नया मुद्दा नहीं है ! इसलिए वो आजकल मोदी विरोध के नाम पर उपनिषद और गीता पढ़ रहे हैं, ताकि धर्मशास्त्रों से उल्ट-सीधे तर्क दे मोदी विरोध कर सकें ! इससे उनकी जगहंसाई ही होगी ! पोस्ट की सराहना के लिए और प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

आदरणीय डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर जी ! सादर अभिनन्दन ! इस पोस्ट को नवीनतम ‘ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! सादर आभार और ‘ब्लॉग बुलेटिन’ की निरंतर उन्नति हेतु हार्दिक शुभकामनाएं !

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

Leela Tewani प्रिय ब्लॉगर सद्गुरु भाई जी, आपने बिलकुल दुरुस्त फरमाया है. गीता पढ़ने से न किसी का उद्धार हुआ है, न कोई प्रभावित होता है. गीता तो एक जीवन -पद्धति है, जिसने उसका अनुसरण किया, उसी का उद्धार होता है. अत्यंत समसामयिक, जागरुक करने वाली, सटीक व सार्थक रचना के लिए आपका आभार.

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

आदरणीया लीला तिवानी जी ! सादर अभिनन्दन ! गीता भगवान का गाया हुआ गीत है, जिसका उसका भावार्थ महसूस करने से जीते जी मोक्ष की सुखानुभूति महसूस होती है ! गीता को पढने या सुनने मात्र से राहुल गाँधी और कांग्रेस का राजनीतिक उद्धार नही होगा ! अपने पापों के प्रायश्चित के लिये और अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिये गीता का अध्ययन-मनन अच्छा है, राजनीति से गीता का कोई सरोकार नही ! राहुल गाँधी को कोई राजनीतिक लाभ नही मिलने वाला, बल्कि उल्टे गलत व्याख्या पर उनका उपहास ही उडेगा ! गीता का मर्म और भगवान के मनोभाव जानने के लिये किसी ग्यानी और तत्वदर्शी की संगति करना आवश्यक है ! गीता मे भी यही लिखा हुआ है ! आपने सही कहा है कि गीता एक जीवन-पद्धति है, जिसका शुद्ध मन से अनुशरण करने पर ही आध्यात्मिक लाभ मिलना संभव है ! पोस्ट को जागरूक करने वाली, सटीक और सार्थक महसूस करने के लिये हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

Rajeev Gupta आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, केजरीवाल जी के नेपथ्य मे जाने के बाद जो हगह खाली हुई थी, राहुल गाँधी जी अपने कार्यकलापों से उसी कमी को पूरा कर रहे हैं. नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज़ को चली वाली कहावत कांग्रेसियों और खासकर राहुल गाँधी पर पूरी तरह फिट होती है. गीता को पढ़ना , समझना और अपने जीवन मे आत्मसात करना राहुल गाँधी जैसे नकली सेक्युलर लोगों के लिये लगभग नामुमकिन ही है. इनकी कारगुजारियों को जनता के सामने लाने के लिये आपका हार्दिक आभार एवम् अभिनन्दन.

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आप सही कह रहे हैं कि राहुल गाँधी जैसे नकलची नेता के लिये गीता के उपदेशों को अपने जीवन मे आत्मसात करना नामुमकिन सा काम है ! वो खुद कह रहे हैं गीता और उपनिषद पढने का उनका एकमात्र उद्देश्य भाजपा और आरएसएस को जबाब देना है यानि राजनीति करना है ! अरविन्द केजरीवाल राहुल गाँधी से कहीं ज्यादा परिपक्व, चतुर और सफल राजनेता हैं ! इसलिये उनकी जगह राहुल गाँधी नही ले पाएंगे ! पोस्ट की सराहना के लिये हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

AMIT परम ग्यानी बाबा सद गुरु जी महाराज आप भी गो माता की पूंछ पकड कर वेतरनी पार करने का निस्चय कर चुके है ओर हम भी तरने के लिये गो मैय्या पूंछ पकड कर पीछे लटक लिये है…. राजनीति मे मेचफ़िक्सिंग पार्टनर भाजपा वा कॉंग्रेस राजनीति के लिये एक समान विचारधारा रखते है… ना पहले गुजरात दंगो पर बंटी जी कभी जेल यात्रा पर गये ओर ना अब राहुल गाँधी या फिर दामाद जी घोटालो पर जेल यात्रा पर जाने वाले है…. क्योंकि जो सत्ता मे बेत्ता है वही मलाई खाता है इसी के चलते देश की जनता को भ्रमित कर के सत्ता हतियाने की खवाइश मे एक दूसरे पर हिन्दुओ द्वारा गाय माता को घर या दुकान के आगे से भागा देने के लिये पानी के छींटे मारने के समान पानी उछालते रहते है….. अभी पूंजीपटियो की मदद से राहुल गाँधी की छवि पप्पू की बना दी गयी है ओर बंटी जी एसए पेश किये जा रहे है जेसे देश की राजनीति मे उनके अलावा देश मे दूसरा कोई विकल्प नही है….. पर देश मे बड़ी तेज़ी से बड़ते किसान आतमहत्या के मामले वा मध्य प्रदेश मे किसानो को गोलियो से भुन दिये जाने पर अंधभक्तो द्वारा चुटकिया लेना भाजपा के लिये जी एस टी की तरहा एक ओर वाटरलू साबित होगा…. बहुत जल्द अंधभक्तो द्वारा देश की जनता को धमकाने के लिये देशद्रोही,आतंवादी,नक्सलवादी की तर्ज़ पर किसानवादी की उपाधि से अलंकृत किया जाना तय है…….

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

आदरणीय अमित जी ! सादर अभिनन्दन ! आप अपनी प्रतिक्रिया मे लिखते हैं कि पूंजीपतियों की मदद से राहुल गाँधी की छवि पप्पू की बना दी गई है और मोदी जी ऐसे पेश किये जा रहे हैं, जैसे देश की राजनीति मे उनके अलावा कोई विकल्प नही है ! आपकी सोच गलत है ! राहुल गाँधी की पप्पू वाली छवि उनकी कमियों के कारण बनी है, पूंजीपतियों के कारण नही ! रही बात मोदी जी को तो उनमे मौलिकता है, जिसकी वजह से वो प्रधानमन्त्री बने हैं ! अरविन्द केजरीवाल भी अपनी मौलिक सोच की वजह से ही राजनीति मे टिके हुए हैं ! राहुल गाँधी ने नकल करने के सिवा अब तक किया ही क्या है ? रही बात किसान आन्दोलन की तो इसके पीछे किसानों की खस्ताहाल स्थिति से ज्यादा कांग्रेस का खुराफाती हाथ काम कर रहा है ! प्रतिक्रिया देने के लिये धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

Harish Chandra Sharma आदरणीय सदगुरु जी अभिनन्दन ,बहुत सुन्दर ..गीता पढ़ने से न हिन्दू प्रभावित होंगे, न गोहत्या का पाप धुलेगा…….किन्तु गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि….जो पुरुष धर्ममय गीता शास्त्र को श्रद्धा युक्त और दोष द्रष्टि रहित होकर पड़ेगा या श्रवण भी करेगा वहसमस्त पापों से मुक्त होकर उत्तम कर्म करने वालों के समान श्रेष्ठ लोकों को पायेगा | …..है अर्जुन तू मुझमे मन वाला हो ,मेरा भक्त बन ,मेरा पूजन कर मुझको प्रणाम कर |ऐसा करने से तू मुझे ही पायेगा | सम्पूर्ण धर्मों को त्यागकर तू केवल मुझ सर्वशक्तिमान सर्वाधार की शरण में आ जा | में तुझे सम्पूर्ण पापों से मुक्त कर दूंगा |तू शोक मत कर | …………….यदि इन बचनों को यदि राहुल गाँधी ने पड लिया तो वे भी मोदी जी और स्वामी राम देव की तरह ही पुण्यवान बन जायेंगे | तभी भाजपाईयों में चिंता जाग्रत हो रही है……….ओम शान्ती शान्ती शान्ती

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

आदरणीय हरीश चंद्र शर्मा जी ! सादर अभिनन्दन ! राहुल गाँधी गीता आत्मकल्याण के लिये पढ़ें, कौन माना करता है, किन्तु जब वी कहते हैं कि राजनीति करने के लिये गीता पढ रहा हूँ, तब गीता का आत्मकल्याण वाला जो पवित्र उद्डेय है, उससे राहुल गाँधी कोसो दूर चले जाते हैं ! आप राजनीति करने के लिये धर्मशास्त्र पढ रहे हैं तो फिर आप सेक्युलर नही बल्कि साम्प्रदायिक हुए ! राहुल गाँधी भाजपा और कांग्रेस के अंतर को खत्म कर कांग्रेस को भाजपा बनाने मे लगे हुए हैं ! सादर आभार !


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