सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

493 Posts

5422 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15204 postid : 1333922

किसान आंदोलन: कर्जमाफी की बजाय सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करे

  • SocialTwist Tell-a-Friend

देश के कई राज्यों में जारी किसान आंदोलन महाराष्ट्र में कर्ज माफी और दूध के दाम बढ़ाने जैसे मुद्दों को लेकर 1 जून को शुरू हुआ था. किसान आंदोलन के दौरान वहां अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है. धीरे धीरे यह आंदोलन कुछ और राज्यों में शुरू हो गया. मध्य प्रदेश के किसानों ने भी दूध खरीदी के दाम बढ़ाने, फसल पर आए खर्च का डेढ़ गुना दाम देने, कर्ज माफ करने, किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और जमीन के बदले मुआवजा लेने के लिए कोर्ट जाने का अधिकार देने जैसी मांगों को लेकर अपना आंदोलन शुरू किया. सरकार किसानों के आंदोलन ओर मांगों की ओर शुरू में जब कोई ध्यान नहीं दी तो यह आंदोलन बीते शनिवार को इंदौर में हिंसक रूप धारण कर लिया. बढ़ती हुई हिंसा तब और भयावह रूप ले ली, जब मंगलवार को मंदसौर और पिपलियामंडी के बीच बही पार्श्वनाथ फोरलेन पर एक हजार से ज्यादा किसान सड़क पर उतर आये. उन्होंने चक्का जाम करने की कोशिश की, पुलिस ने जब इसका विरोध किया तो वे लोग पथराव करना शुरू कर दिए. पत्थरबाजों के बीच घिर जाने पर सीआरपीएफ और पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसमे पांच किसान और एक छात्र सहित कुल 6 लोगों की मौत हो गई. इस घटना के बाद मध्य प्रदेश में जारी किसान आंदोलन और भी ज्यादा हिंसक हो गया. आंदोलनकारियों ने 13 बसों समेत 150 गाड़ियों में आग लगा दी ओर एक थाना भी फूंक दिया. भोपाल से इंदाैर जा रही एक चार्टर्ड बस को उपद्रवियों ने सोनकच्छ में रोक दिया.

सबसे पहले बस पर पत्थरबाजी कर उसके शीशे तोड़ दिए ओर फिर उसमे उसमें आग लगा दी. सबसे दुखद बात यह है कि जब बस में तोड़फोड़ की जा रही थी, तब बस के अंदर बैठे पुरुष, महिलाएं और बच्चे सहायता के लिए तथा अपनी जान बचाने के लिए चिखचिल्ला रहे थे, लेकिन उपद्रवी उनकी चीख पुकार को अनसुना कर बस में तोड़फोड़ करते रहे. पत्थरबाजी के बीच किसी तरह से यात्रियों ने बस से उतरकर आसपास के खेतों व मंदिरों में छिपकर अपनी जान बचाई. मंदसौर जिले के बरखेड़ा पंत में फायरिंग में मारे गए छात्र अभिषेक का शव रोड पर रखकर चक्का जाम कर रहे किसानों को समझाने के लिए जब कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह वहां पहुंचे तो कुछ लोगों ने उनसे बदतमीजी करते हुए उनके कपड़े फाड़ दिए. यही नहीं, बल्कि एक व्यक्ति ने कलेक्टर को पीछे से सिर पर कई बार चांटा भी मारा. ये सब देखकर बहुत दुःख हुआ. कानून तोड़ने वाले सभी अराजक तत्वों के खिलाफ कठोर कार्यवाही होनी चाहिए. आंदोलनकारियों में बहुत से मुंह ढके नकाबपोश भी दिखे. ये लोग कौन थे, इसकी जांच होनी चाहिए. किसानों के हिंसक आंदोलन को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस कैसे भड़का रही थी. इस बात की भी जांच होनी चाहिए. राहुल गांधी हिंसक किसान आंदोलन की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए रोक के वावजूद भी मंदसौर जाने के लिए निकल पड़े हैं. भाजपा और शिवराज सिंह चौहान की सरकार को घेरने की कोशिश में लगा विपक्ष एक साथ मंदसौर जाने की भी योजना बना रहा है.

मध्य प्रदेश की सरकार किसानों के लिए कुछ नहीं कर रही है, ऐसा भी नहीं है. केंद्र सरकार की सारी योजनाएं वो अपने यहाँ चला रही है, जैसे- फसल बीमा योजना, स्वेल कार्ड योजना और नीम कोटेड यूरिया का बिना किसी दिक्कत के वितरण आदि. मध्य प्रदेश की सरकार किसानों के हित के लिए घाटा सहकर भी अब किसानों से आठ रुपए प्रति किलो प्याज खरीद कर उसे खुले बाजार में दो रुपए प्रति किलो बेचने जा रही है. आन्दोलन करने वाले किसानों से वो वार्ता करने को भी तैयार है. जेडीयू नेता शरद यादव कह रहे हैं कि हमने इस तरह का आंदोलन पहले कभी नहीं देखा. मध्य प्रदेश सरकार 6 मौतों का आंकड़ा दे रही है, लेकिन हमें लगता है कि मौतें ज्यादा हुई हैं. हिंसक आंदोलन में घी डालने की कोशिश करने वाले, शिवराज सिंह चौहान का इस्तीफा मांगने वाले और लाशों पर राजनीति करने वाले भ्रष्ट नेता ये भूल रहे हैं कि 1998 में जब मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में किसानों ने हिंसक आंदोलन किया था, तब 12 जनवरी 1998 को किसानों के हिंसक प्रदर्शन के दौरान 18 लोगों की मौत हुई थी. उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी. कांग्रेस को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि उसके शासनकाल में देशभर में लाखों किसान आत्महत्या किये. उसने किसानों के लिए क्या किया. कुछ किया होता तो आज ये स्थिति नहीं होती. किसान क्या चाहते हैं, आइये इस पर ज़रा गौर करें. सबसे पहले तो किसान यह चाहते हैं कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए.

साल 2007 में ‘एम एस स्वामीनाथन किसान आयोग’ ने सिफारिश की थी कि ‘फ़सल उत्पादन मूल्य से पचास प्रतिशत ज़्यादा दाम किसानों को मिले.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अहम सिफ़ारिश को लागू करने का वादा किया था. उन्हें अपने वादे के मुताबिक इसे अब लागू करना चाहिए. केंद्र की सत्ता संभाले मोदी को तीन साल हो गए हैं. इस मामले में वो क्यों देर कर रहे हैं, यह बात किसान तो अब उनसे पूछेंगे ही. किसानों की अन्य प्रमुख मांगों में पूर्ण कर्ज माफ़ी, फसलों का उचित समर्थन मूल्य, मंडी का रेट निर्धारण और किसानों को पेंशन देने की मांग मुख्य रूप से शामिल है. उत्तर प्रदेश में सरकार बनते ही जब योगी आदित्यनाथ ने किसानों का ऋण माफ़ करने की घोषणा की थी, तभी यह तय हो गया था इसका असर अन्य राज्यों पर भी जरूर पडेगा. इसमें सारा दोष नेताओं का है जो चुनाव के समय वोट बटोरने के लिए बिना सोचे समझे यह घोषणा करते हैं वो सत्ता में आते ही किसानों के सारे कर्जे माफ़ कर देंगे. वो ये भी सोचने की जरूरत नहीं समझते हैं कि किसानों का कर्ज माफ़ करने के लिए पैसा आएगा कहाँ से और एक बार कर्ज माफ़ी दे भी दी तो कुछ समय बाद पुन: किसान कर्जमाफी की मांग नहीं करेंगे, इसकी क्या गारंटी है? कर्जमाफी की बजाय ज्यादा अच्छा तो ये है कि सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करे. उनकी फसल उचित मूल्य पर ख़रीदे और उसे उन राज्यों में ले जाकर बेंचे, जहाँ पर उसकी बहुत ज्यादा मांग है. इससे देशभर के लोंगो को उचित मूल्य पर सही सामान मिलेगा और मंहगाई भी नियंत्रित होगी.



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 4.80 out of 5)
Loading ... Loading ...

14 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

मेरे विचार से तो देश के कुछ भाजपा शासित राज्यों में जारी आन्दोलन मे किसानों को बरगलाकर शामिल किया गया है ! आन्दोलन को हिंसक बनाने वाले, पत्थरबाजी और आगजनी करने वाले निश्चित रूप से किसान नही, बल्कि धन के बलपर इकट्ठे किये गये अराजक और उपद्रवी तत्व हैं ! ये किसानों के आन्दोलन से ज्यादा भाजपा और मोदी विरोधी नेताओं का षडयंत्र है ! कायदे से जांच हो तो इस षड्यंत्र में शामिल कांग्रेस और कई अन्य दलों का पर्दापाश हो जाए ! यदि किसान वाकई आन्दोलन करते तो सबसे पहले कर्नाटक मे करते, जहां पर पिछले दो साल मे मध्यप्रदेश से कई गुना ज्यादा लगभग 2300 किसानों ने आत्महत्या की है ! वहा के किसान क्यों खामोश हैं?

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

महाराष्ट्र के किसान नेता किशोर तिवारी ने राज्य में जारी किसान आंदोलन को जायज तो ठहराया है, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया है कि विपक्षी नेता इस आंदोलन का राजनीतिक इस्तेमाल मुख्यमंत्री देवेन्द फडणवीस के ख़िलाफ़ कर रहे हैं ! उनका कहना है कि मुख्यमंत्री देवेन्द फडणवीस की ग्रामीण भागों में लोकप्रियता चरम पर है इसके अलावा उनके नेतृत्व में बीजेपी लगातार ग्रामीण इलाको में जीत हासिल कर रही है ! उनकी इसी लोकप्रियता से सकते में आये पश्चिम महाराष्ट्र के सभी दलों के नेता किसान आंदोलन को आधार बनाकर उन पर राजनीतिक हमला कर रहे है ! उनके अनुसार मुख्यमंत्री ने कई पहल की जिसका नतीजा रहा की किसानो के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन विपणन कि समस्या बढ़ी है ! किसानो को न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम दाम में अपनी फ़सल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है ! किसान नेता किशोर तिवारी ने किसानो द्वारा उठाई गयी माँगो का पूरी तरह समर्थन करते हुए संपूर्ण कर्जमाफी की वकालत की है ! उनका कहना है कि किसानो से वादा कर बीजेपी ने खुद अपने गले में घंटी बाँधी है !

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

Rajeev Gupta आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, आपकी यह बात ठीक है कि किसानों की कर्ज़ माफी ना करके सरकार को उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने का प्रयास करना चाहिये. इस दिशा मे काम चल भी रहा है क्योंकि मोदी जी ने बहुत पहले ही यह घोषणा की थी कि उनकी सरकार किसानों की आमदनी अगले पांच सालों मे दुगना करने के लिये कृत संकल्प है. अगर ऐसा होता है, तो किसानों के लिये बहुत अच्छा होगा. किसान हमारे अन्नदाता है, उनका ख्याल रखा जाना चाहिये लेकिन किसानों के बहाने कोई राजनीतिक पार्टी नकली किसान आन्दोलन खड़ा करने की कोशिश करे तो सभी का फ़र्ज़ है कि उस साज़िश का पर्दाफाश भी करे. आपने इस ज्वलंत समस्या पर शानदार ब्लॉग प्रस्तुत किया, उसके लिये आपका हार्दिक आभार एवं अभिनन्दन.

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! सबसे अच्छा उपाय तो यही है कि बार बार किसानों का कर्जा माफ़ कर उन्हें याचक बनाने की बजाय उन्हें आत्मनिर्भर बना दाता बनाया जाए ! सरकार के पास संसाधनों की कमी नहीं है ! वो किसानों से उसकी उपज खरीदकर उन राज्यों में भेंजे, जहाँ उसकी बेहद मांग है ! केंद्र सरकार के पास रेलगाड़ी से लेकर हवाईजहाज तक का साधन मौजूद है ! केंद्र सरकार राजनीतिक पार्टियों को किसानों के हित के लिए संघर्ष करने के नाम पर हिंसक आंदोलन क्यों चलाने दे रही है ? अराजक तत्वों को पकड़ के जेल के अंदर करे और किसानों से सीधी बात करे ! चुनाव के समय भाजपा ने किसानों से जो वादा किया है, वो पूरा करे ! ब्लॉग पर समय देने के लिए और पोस्ट को शानदार महसूस करने के लिए हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

AMIT परम ग्यानी बाबा सदगुरु जी महाराज… धान्य हो गुरु देव की अब आपने प्रदेश सरकार की तरहा मुंह छिपाते हुए इन्हे किसान तो माना….! इससे पहले तो आप इन गरीबो को 56 इंच का सीना छोड़ा कर के किसान मानने को ही तेयार नही थे…. प्रतीत यह हो रहा था की जेसे आप कह रहे हो की तुम गरीब निरीह जानवर हो ओर इसलिये तुम्हारा हम सन्यासी बाबाओ से क्या काम….! जो अपने को वांशिक रूप से गरीब मानते है उनको यह नही पता की गरीबी मे कुपोषण से बाकी शरीर सूखने के कारण पेट फूला दिखता है ओर इसका वह अपने स्तर पर मुखोल बना किसानो को मोटा ताज़ा बता रहे है…..! व्यापम घोटाले की तर्ज पर मामा सरकार मानने को तेयार नही थी की किसानो को उसने गोली चलवा कर मरवाया…. ओर अब विपक्षी षद्यंत्रकारी बता कर इन्ही अराजक तत्वो को मुआवजा बांटने का ढिंढोरा पिट रही है….! पर इन सबसे परे देश के सबसे बड़े वा रजिस्टर्ड गरीब वा देशकी सबसे कमजोर जाती से आये बंटी जी विदेशो मे ठंडी हवाओ का आनंद ले रहे है……

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

आदरणीय अमित जी ! सादर अभिनन्दन ! आंदोलनकारियों को किसान मानने से कौन इंकार कर रहा है ? हम तो सिर्फ यही कह रहे हैं कि किसान आंदोलन की आड़ में विपक्षी दल भाजपा सरकार के विरुद्ध षड्यंत्र रच रहे हैं और उनकी शह पर अराजक व उपद्रवी तत्व हिंसा फैला रहे हैं, आगजनी और लूटपाट कर रहे हैं ! आज के अधिकतर किसान पहले की तरह गरीब और निरीह नहीं हैं ! आइये कभी मेरे गाँव और किसानों की स्थिति देखिये ! गाँव पर रहने वाले मेरे परिवार के लोग भी किसान ही हैं ! थोड़ी भूमि वाले और भूमिहीन किसानों में गरीबी जरूर है, लेकिन सरकार उनकी मदद भी कर रही है ! रही बात कर्ज की तो थोड़ी भूमि वाले और भूमिहीन किसानों के कर्जे माफ़ होने चाहिए, सबके नहीं ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

आदरणीय अमित जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आप बार-बार यही रट रहे हैं कि मध्यप्रदेश सरकार की भाजपा सरकार ने किसानों पर गोली चलवा दी ! किसानों को शांतिपूर्ण आंदोलन करने से किसने रोका है ? लेकिन यदि वो उपद्रव, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ करेंगे तो कोई भी सरकार हो, कानूनी ढंग से ही निपटेगी ! उपद्रव में या गोलीबारी में किसान हों या पुलिस, किसी भी मृत्यु हो, वो निसंदेह बहुत दुखद है ! आप जानबूझकर इस सत्य से आँख मूंदे हुए हैं कि 1998 में जब मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में किसानों ने हिंसक आंदोलन किया था, तब 12 जनवरी 1998 को किसानों के हिंसक प्रदर्शन के दौरान 18 लोगों की मौत हुई थी. उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी ! उसकी चर्चा क्यों नहीं करते हैं ? प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

आदरणीय अमित जी ! ब्लॉग पर आपका स्वागत करते हुए अंत में प्रधानमंत्री मोदी का जिक्र करूंगा ! देश के प्रधानमंत्री तक के लिए यदि मन में जहर भरा हो तो ऐसे मलिन मन को धिक्कार है ! आप बुद्धिजीवी हैं, क्या आप नहीं जानते हैं कि प्रधानमंत्री के जिम्मे बहुत से काम होते हैं ! देशहित के लिए समय समय पर विदेश भी जाना पड़ता है ! वो विदेश आंनद लेने नहीं, बल्कि जरुरी कार्य से गए हैं ! कभी कभी मुझे आश्चर्य होता है कि आप बुद्धिजीवी हैं, अपने आप को पढ़ालिखा हिन्दू कहते समझते हैं, फिर भी आपकी प्रतिक्रिया अपने ही मन के बुने हुए उन्माद में डूबे उन जाहिल और अनपढ़ लोगों जैसी होती है जो इस देश में रहते हुए भी यहाँ के लोकतंत्र, जनता के दिए हुए बहुमत और जनता के द्वारा भारी बहुमत से चुने हुए प्रधानमंत्री का सम्मान तक नहीं कर सकते हैं ! धिक्कार है ऐसे जीवन को ! आप आलोचना कीजिये ठीक है, लेकिन ये क्या पागलपन है कि हर बात पर देश के प्रधानमंत्री को गाली देते रहो, उन्हें बेवजह कोसते रहो ? ब्लॉग पर समय देने के लिए धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी जब से उत्तर प्रदेश मे योगी सरकार ने किसानो के एक लाख कर्ज़ की माफी की उसके बाद से अन्य जगह पर भी ऐसी मांग होगी यह तो अपेक्षित था. इस आग मे घी डालने के लिये शिवसेना जो महाराष्ट्र की हार नही पचा पा रही है और सत्ता मे रहते हुए भी विपक्ष की ही भूमिका मे है के साथ कांग्रेस और एन सी पी भी तैयार थे. शिवराज को कमजोर करने के लिये मध्य प्रदेश से आन्दोलन शुरु हुआ और क्योंकि राजनीतिक दल साथ थे इसलिये ही हिंसा हुई. स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू की जानी चाहिये. इससे सभी सहमत होंगे पर इस सरकार ने जितना किसानो के हित के लिये किया है उतना कभी नही हुआ. इससे पहले सिर्फ समर्थन मूल्य मे कुछ बढ़ोतरी करके सरकारें अपने कर्तव्या की इति श्री समझ लेती थी.

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! सादर अभिनन्दन ! आप सही कह रहे हैं कि योगी सरकार की कर्जमाफी की प्रतिक्रिया तो अन्य राज्यों मे होनी ही थी ! शिवसेना को तो ऐसा लगता है कि भविष्य मे विपक्ष की भूमिका निभानी है, इसलिये वो अभी से ही अभ्यास कर रही है ! रही बात कांग्रेस की तो वो वोटों के लिये किसी भी निम्न स्तर तक गिर सकती है ! मोदी सरकार ने बेशक किसानों के लिये बहुत कुछ किया है, लेकिन उसे अभी बहुत कुछ करने की भी जरूरत है ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी एक बात और है की आन्दोलन सिर्फ भाजपा शासित राज्यों मे ही क्यों? बाकी राज्यों के किसान क्या डालरों मे खेल रहे हैं?

sadguruji के द्वारा
June 9, 2017

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपने सही सवाल उठाया है कि बाकी राज्यों मे भी किसान परेशान हैं, लेकिन हिंसक आन्दोलन भाजपा शासित राज्यों मे ही क्यों हो रहा है ? जाहिर सी बात है कि इसके पीछे मोदी और भाजपा विरोधी दलों का षड्यन्त्र है 1 मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सरकार इसकी गहराई से जांच कराये ! प्रतिक्रिया देने के लिये धन्यवाद !

rameshagarwal के द्वारा
June 9, 2017

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी हारजीत  लोकतंत्र का हिस्सा है लेकिन लगता की कांग्रेस और विरोधी दल इस्सकी बखिया उखल रहे है जबसे बीजेपी केंद्र और राज्यों में सत्ता पर आई ये लोग इन बीजेपी शासित देशो में दंगे फसाद करके देश का नुक्सान कर रहे पहले आरक्षण के नाम पर और अब किसान आन्दोलन के नाम पर आराजकता फैला रहे..किसानो की समस्या कांग्रेस की ही दें है और क़र्ज़ माफी इसका उपाय नहीं बल्कि फसल बीमा के अलावा सरकारको खरीद करनी चाइये.चौहान जी इतने सालो से समस्या सुलझा रहे है. विडियो में कांग्रेस् नेता भड़काते दिखे एक विधयक कह रही थाने में आग लगा दो राहुल गाँधी लाशो पर राजनीती कर रहे कर्नाटक में किसान आत्महत्या करते राहुल नहीं जाते. लेकिन देश की जनता समझदार है और ऐसे नेताओं को कभी नहीं चुनेगी.सुन्दर विवेचात्मक लेख के लिए बधाई.

sadguruji के द्वारा
June 10, 2017

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! जय श्रीराम और सादर अभिनन्दन ! आप बिलकुल ठीक कह रहे हैं कि किसान आंदोलन को उग्र बनाने में कांग्रेस के कई विधायकों और नेताओं का हाथ है ! सरकार इनके खिलाफ सख्त कार्यवाही करे ! राहुल गांधी कर्नाटक नहीं गए, जहाँ पर मध्यप्रदेश से कई गुना ज्यादा किसान पिछले दो साल में आत्महत्या कर चुके हैं ! राज्य और केंद्र सरकार को किसानों की फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए अब जीजान से जुट जाना चाहिए, क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति इसी तरीके से सुदृढ़ होगी ! पोस्ट की सराहना कर उसे सार्थकता प्रदान करने के लिए और ब्लॉग पर समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran