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जज साहब ने क्यों कहा कि गाय मां और भगवान की जगह पर है, इसका अर्थ क्या है...?

Posted On: 10 Jun, 2017 Social Issues में

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हैदराबाद हाई कोर्ट के एक जज बी शिवा शंकर राव ने कहा है कि गाय मां और भगवान का ‘विकल्प’ है. गाय देश की पवित्र संपदा है, इसलिए गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ का दर्जा मिलना चाहिए. अभी हाल ही में राजस्थान हाई कोर्ट ने भी गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने का सुझाव दिया था. जज बी शिवा शंकर राव ने कहा कि गाय मां और भगवान की जगह पर है या उनका ‘विकल्प’ है, इसका अर्थ क्या है, इस पर भी विचार होना चाहिए. गाय की पवित्रता और उसके सभी उत्पादों की महत्ता के कारण ही उसको गौमाता कहा जाता है. भगवान् कृष्ण को गाय बहुत प्रिय थी. यह उनकी याद दिलाती है. गाय में सभी देवी-देवताओं का निवास माना गया है, इसलिए गाय को भगवान् का ‘विकल्प’ कहा गया है. भगवान् का दर्शन प्राप्त करना और उनकी सेवा करना बहुत कठिन कार्य है. लेकिन गाय के रूप में भगवान् का दर्शन करना और उसमे भगवान् का निवास मान उसकी सेवा करना बहुत सुलभ कार्य है. जस्टिस बी शिवा शंकर राव ने सुप्रीम कोर्ट के एक ऑर्डर का जिक्र करते हुए कहा कि बकरीद के मौके पर मुस्लिम धर्म के लोगों को सेहतमंद गाय को काटने का और उनका मांस खाने का कोई मौलिक (संवैधानिक) अधिकार नहीं है.
जज साहब ने ये सब शुक्रवार को रामावत हनुमा की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा. रामावत हनुमा नाम के एक शख्स की 63 गाय और दो बैल पुलिस ने जब्त किए गए थे, पुलिस के अनुसार उन्हें वो बेचने के लिए ले जा रहा था ताकि बकरीद के पर्व पर उनका वध कर गोमांस बेचा जा सके. जब्त किये गए पशुओं को छुड़ाने हेतु दायर की गई पशु व्यवसायी रामावत हनुमा की याचिका को पूरी तरह से ख़ारिज करते हुए जज साहब ने जब्त किए गए उसके पशुओं को उसे सौंपने से इंकार कर दिया. उन्होंने अपना फैसला सुनाते हुए यह सवाल किया कि जिस शख्स पर गायों को हत्या के लिए लेकर जाने का आरोप हो, क्या उस शख्स के पास उन पशुओं को लेकर जाने का अधिकार है? गाय के राष्ट्रीय महत्व की चर्चा करते हुए जज बी शिवा शंकर राव ने कहा कि गाय जो मां और भगवान का विकल्प हैं, उसे इसका जवाब मिलना चाहिए. पुलिस ने हनुमा रामावत पर आरोप लगाया है कि वो अपने आस पास के किसानों के गायों और बैलों को लेकर अपने साथियों के साथ बाजार में बेचने जा रहा था, ताकि बकरीद पर उनको काटा जा सके. वहीं दूसरी तरफ हनुमा ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि वह उन पशुओं को लेकर चराने के लिए जा रहा था.
एक व्यक्ति के पास इतने पशु हों और वो उन्हें चराने के लिए पशु बाजार की तरफ लेकर जाए, इससे बड़ी हास्यास्पद बात और क्या हो सकती है? यही वजह है कि हाईकोर्ट आने से पहले हनुमा रामावत ट्रायल कोर्ट भी गया था लेकिन वहां भी उसकी याचिका ठुकरा दी गई थी. हैदराबाद हाई कोर्ट के माननीय जस्टिस बी शिवा शंकर राव ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के जानवरों का इलाज करने वाले डॉक्टरों की भी खिंचाई की, जो स्वस्थ गायों को दूध देने में असमर्थ बताकर वधशाला भेज देते हैं. उन्होंने निर्देश दिया कि स्वस्थ गायों को दूध देने में असमर्थ बताने वाले डॉक्टरों पर भी कार्रवाई की जाए. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में केवल उन्ही गायों को काटने के लिए कत्लगाह में ले जाने की अनुमति है, जो कि बूढ़ी हो गई हैं और दूध नहीं देतीं हैं. सरकारी डॉक्टर बकायदे जांच कर इस बात सर्टिफिकेट देते है. इसी कानून की आड़ लेकर भ्रष्ट डॉक्टर सेहतमंद और दूधारू गायों को भी अनफिट करार देकर कत्लगाह ले जाने की अनुमति दे देते हैं. जस्टिस राव ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि आंध्रप्रदेश गौहत्या एक्ट 1977 में संशोधन के बाद अब इस तरह के अपराध को गैरजमानती और गंभीर माना जाएगा.
जज साहब ने जानवरों के साथ होने वाली क्रूरता को रोकने वाले अधिनियम, 1960 के सेक्शन 11 और 26 में बदलाव की बात करते हुए कहा कि उसके तहत दी जाने वाली सजा को बढ़ाकर पांच साल कर देना चाहिए. जस्टिस बी शिवा शंकर राव ने गौहत्या पर पाबंदी का जिक्र करते हुए कहा कि मुग़ल शासक बाबर ने सबसे पहले गौहत्या पर पाबंदी लगाई थी. उसने अपने बेटे हूमायूं को भी ऐसा ही करने को कहा था. जज साहब ने कहा कि अकबर, जहांगीर और अहमद शाह ने भी गौहत्या पर पाबंदी लगा रखी थी. जज साहब ने बिलकुल सही कहा है. मुग़ल शासक ये बात अच्छी तरह से जानते थे कि हिन्दुस्तान पर लम्बे समय तक राज करना है तो इस मुल्क के बहुसंख्यक हिन्दुओं की गाय के प्रति जो गहरी आस्था है, उसका पूरा सम्मान करना होगा. हिन्दुस्तान के सारे मुसलमान हिन्दुओं की तरह ही इस प्यारे मुल्क के वाशिंदे हैं और उनकी सबसे बड़ी पहचान हिन्दुस्तानी होना ही है. देश के सभी मुस्लिम भाइयों को अपने बहुसंख्यक हिन्दू भाइयों की धार्मिक भावनाओं का पूरा ख्याल रखते हुए न सिर्फ गोमांस का सेवन हमेशा के लिए बंद कर देना चाहिए, बल्कि गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित कराने में भी अपना भरपूर सहयोग देना चाहिए. इससे न सिर्फ हमारी राष्ट्रीय एकता बढ़ेगी, बल्कि इस मुल्क की मिलीजुली गंगा-जमुनी तहजीब भी और ज्यादा सुदृढ़ होगी.



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
June 15, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी गाय का दूध अत्यंत पौष्टिक और पाचक होता है शिशु के लिए हितकारी इस लिए गाय को माता कहते हैं पता नही यह किसी के समझ क्यों नहीं आता मदर देरी ने गाय का दूध शुरू किया है इतना बिकता है कई बार मिलता ही नहीं जज साहब का जजमेंट कितना सही थी उन्होंने गाय के महत्व को समझा

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपने सही कहा है कि गाय का दूध अत्यंत पौष्टिक होता है और शिशु के लिए तो विशेष रूप से पाचक और हितकारी होता है ! विरोध ही करना जिनका मकसद है, उन्हें यह बात कभी समझ में नहीं आएगी ! जज साहब ने बेहतरीन और ऐतिहासिक निर्णय दिया है !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

Rajeev Gupta आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, हाई कोर्ट के माननीय जज ने इस तरह का फैसला सुनाकर देश मे मौजूद सभी नकली सेकुलर लोगों को आइना दिखाया है. आज देश को इसी तरह के जजों की जरूरत है. हर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट मे भी इसी तरह के योग्य जजों की नियुक्ति होनी चाहिये. गाय की हत्या करके उसके मांस का भक्षण करने वाले राक्षसों का सामाजइक बहिस् कार होना चाहिये. ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग भी गाय के प्रति हिन्दुओं की आस्था का समर्थन करते हैं लेकिन कुछ नकली सेकुलर राजनेता ( जिनमे हिन्दू ही ज्यादा हैं) अपनी वोटों की राजनीति के लिये गौ माता का लगातार अपमान कर रहे हैं, जनता इन लोगों को पहले भी दंडित कर चुकी है और आगे भी दंडित करती रहेगी. आपने इस विषय पर ब्लॉग पेश करके पाठकों को एक शानदार जानकारी दी है. उसके लिये आपका अभिनन्दन एवं बधाई.

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपकी बात सही है कि बहुत से मुस्लिम लोग और उनके नेता गाय को ‘राष् ट्रीय पशु’ बनाने की बात कर रहे हैं ! वहीं दूसरी तरफ बहुत से अपने को सेकुलर कहने वाले हिन्दू नेता और बुद्धिजीवी गोवध के पक्ष मे बोल रहे हैं ! आपने सही कहा कि देश की आम जनता ही इन्हे चुनाव के समय कायदे से दंडित करती और आयेज भी करेगी ! पोस्ट की सराहना के लिये और अनमोल समय देने के लिये हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी आज की तारीख मे भी मुसलमानो से अधिक हिन्दू नेता ऐसे है जो गो वध का समर्थन करके अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर मे रहते हैं यह सब वह सत्ता के लिये करते हैं. माँ तो देवी स्वरूप होती ही है और गाय को माँ का दर्जा दिया गया है अर्थात देवी या भगवान का. अब माँ का सम्मान तो हर धर्म के लोग करते हैं.

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! सादर अभिनन्दन ! आपकी बात से सहमत हूँ कि बहुत से हिन्दू नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिये गौहत्या और गोमांस सेवन का समर्थन करते हैं ! हिन्दू धर्म मे जिसे भी माता माना गया है, उसे देवी स्वरूप माना गया है,क्योंकि उसमे कुछ विशेष श्क्तियाँ या विभूतियाँ निहित होती हैं ! ब्लॉग पर समय देने के लिये धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

Harish Chandra Sharma आदरणीय सदगुरु जी ,बहुत सुन्दर. अब मुसलमानों ने या तो हिन्दुस्तान छोड़ना पड़ेगा या हिन्दू बन जाना पड़ेगा अन्यथा उनको हिन्दू आचार विचारों को अपनाना होगा तभी ओम शान्ती शान्ती से हिन्दुस्तान में रह सकेंगे.

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय हरीश चंद्र शर्मा जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! हिन्दुस्तान हिन्दू ओर मुसलमान दोनो का ही है ! किसी को अपना धर्म छोड़ने की जरूरत नही ! आपने हिन्दू भाइयों की खुशी के लिये यदि मुस्लिम भाई गोमांस का सेवन बंद कर देने हैं और गाय को ‘राष् ट्रीय पशु’ का दर्जा दिलाने के लिये हिन्दुओ के साथ मिलकर एक स्वर मे आवाज उठाते हैं तो इससे अच्छी बात और क्या होगी ! इससे हमारी हिन्दू-मुस्लिम एकता भी बढेगी, जो भारत जैसे बहुधर्मी देश के लिये बहुत जरूरी है ! सादर आभार !


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