सद्गुरुजी

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देशद्रोहियों के खिलाफ कार्यवाही: मोदी सरकार अब तक इसमें असफल ही साबित हुई

Posted On: 13 Jun, 2017 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता संदीप दीक्षित ने 11 जून को भारत के आर्मी प्रमुख जनरल बिपिन रावत पर बेहद आपत्तिजनक और देशद्रोहपूर्ण बयानबाजी करते हुए भारत की प्रमुख न्यूज विडियो एजेंसी एएनआई यानी एशियन न्यूज इंटरनेशनल से कहा था, ”पाकिस्तान उलजुलूल हरकतें और बयानबाजी करता है. ख़राब तब लगता है कि जब हमारे थल सेनाध्यक्ष सड़क के गुंडे की तरह बयान देते हैं. पाकिस्तान ऐसा करता है तो इसमें कोई हैरान करने वाली बात नहीं है.” संदीप दीक्षित के इस विवादित बयान की जब भाजपा नेताओं ने कड़ी निंदा करनी शुरू कर दी और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किेरेण रिजिजू ने उस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए ट्वीट कर कहा, ”कांग्रेस पार्टी के साथ समस्या क्या है? उसने भारतीय आर्मी चीफ़ को सड़क का गुंडा कहने की हिम्मत कैसे की?” विवाद बढ़ता देख 12 जून को संदीप दीक्षित ने सेना प्रमुख खिलाफ दिए गए अपने विवादित और देशद्रोहपूर्ण बयान के लिए माफ़ी मांगी. इस गंभीर मामले पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी चुप रहीं. संदीप दीक्षित के बयान की जब चौतरफा निंदा होने लगी तब चौबीस घंटे बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की नींद टूटी. कांग्रेसी नेताओं के ऐसे बयान पार्टी को और गहरे रसातल में पहुंचा देंगे, इसका अहसास होते ही उन्होंने संदीप दीक्षित के बयान की निंदा करते हुए उसे गलत बताया.

हालांकि ये वही राहुल गांधी हैं, जिन्होंने पिछले साल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सेना के सफल सर्जिकल स्ट्राइक के बाद कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवानों के खून के पीछे छिप रहे हैं और उनके खून की दलाली कर रहे हैं. देश के चुने हुए प्रधानमंत्री और भारतीय सेना का राहुल गांधी ने जिस तरह से घोर अपमान किया था, उसकी चहुतरफा कड़ी निंदा हुई थी. आम आदमी पार्टी के नेता और कवि कुमार विश्वास ने तो इस बयान को लेकर राहुल गांधी की खिंचाई करते हुए ट्विटर पर यहाँ तक लिख दिया था कि, ‘मैंने 4 साल पहले जो नाम पप्पू दिया था, वो सही साबित हो रहा है.’ भाजपा ने राहुल गांधी के इस देशद्रोही बयान का खूब राजनीतिक फायदा उठाया, लेकिन उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की. पिछले कुछ दिनों में सेना प्रमुख के खिलाफ बयान देने वाले कुछ और लोग भी हैं. जनरल रावत ने 28 मई को एक साक्षात्कार में कहा था कि जम्मू कश्मीर में जो ‘घृणित’ युद्ध चल रहा है उसके लिए सेना को नए तरीके इस्तेमाल करने होंगे. वह सैनिकों को पत्थरबाजों के हाथों मरने के लिए नहीं छोड़ सकते. पत्थरबाज यदि गोलियां चलाते तो उनका जवाब उसी तरीके से दिया जा सकता था.’ जनरल रावत के इस बयान का जब सेक्युलर नेता विरोध करने लगे तब केंद्र सरकार ने जनरल रावत के इस बयान का पुरजोर समर्थन करते हुए विरोधियों से पूछा कि अगर कोई सैनिकों पर पत्थर मारे तो क्या उन्हें चुपचाप खड़ा रहना चाहिए?

माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ‘माकपा’ के नेता मोहम्मद सलीम ने जनरल रावत के इस बयान की निंदा करते हुए एक टीवी चैनल पर कहा था, ‘मैं उनसे यह कहना चाहूंगा कि भारतीय सेना में प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है, फिर ये नए तरीके इजाद करने का क्या मसला है? मुझे जनरल रावत की इस बात से भारतीय समाज की क्षमता को समझने की उनकी सोच पर संदेह होता है.’ इसका अर्थ सरल भाषा में यही है कि जनरल रावत कश्मीरी समाज को ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं और जो कुछ भी कर रहे हैं, वो नैतिक दृष्टि से एकदम गलत है. माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ‘माकपा’ के नेता मोहम्मद सलीम ने जनरल रावत के बयान को सेना में नैतिक मूल्यों का क्षरण माना था. आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने कश्मीर में कई लोंगो की जान बचाने के लिए एक व्यक्ति को मानव ढाल के तौर पर इस्तेमाल करने वाले मेजर नितिन गोगोई को सम्मानित किया, तब अपने को सेक्युलर बताने वाले कई दलों के नेताओं ने उनकी उनकी कड़ी निंदा की थी. आश्चर्य की बात है क़ि पत्थरबाज सैनिकों को पत्थर मारें तो वो नैतिक है और सेना पत्थरबाजों को सबक सिखाये तो वो अनैतिक है? हमारे देश के कुछ नेताओं की इसी देशद्रोही सोच का कश्मीर में फलफूल रहे आतंकवादी और इस विषबेल को खादपानी देकर भरपूर समर्थन देने वाला पाकिस्तान, दोनों खूब फायदा उठा रहे हैं.

कुछ रोज पहले सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि भारत आजकल ढाई मोर्चे पर युद्ध लड़ रहा है. इसका अर्थ यह है कि भारतीय सेना चीन और पाकिस्तान जैसे बाहरी खतरों के साथ आंतरिक खतरों से भी युद्ध लड़ रही है. आंतरिक खतरा केवल आतंकवादियों या नक्सलियों से ही नहीं है, बल्कि देशद्रोही बयान देने वाले नेताओं और बुद्धिजीवियों से भी है. इतिहासकार पार्था चटर्जी ने न्यूज पोर्टल ‘द् वायर’ के लिए 2 जून को लिखे गए अपने एक लेख में कश्मीर में मानव ढाल वाली घटना के संदर्भ में जनरल रावत की तुलना डायर से की थी. उन्होंने लिखा है कि कश्मीर ‘जनरल डायर मोमेंट’ से गुजर रहा है. वर्ष 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड के पीछे ब्रिटिश सेना द्वारा दिए गए तर्क और कश्मीर में मानव ढाल वाली भारतीय सेना की कार्रवाई के बचाव में दिए गए तर्क में समानताएं हैं. मोदी सरकार के मंत्री पार्था चटर्जी की केवल निंदा भर किये, लेकिन उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही नहीं किये. राष्ट्रवादी मोदी सरकार विकास के मुद्दे पर भले ही सफल हो, लेकिन आंतरिक सुरक्षा के मामले में, खासकर देश के भीतर विद्यमान देशद्रोहियों से निपटने में पूरी तरह से नाकाम रही है. भारतीय सेना और सेना प्रमुख का अपमान करने वालों को क़ानूनी कटघरे में खड़ा करने की बजाय वो केवल अपने राजनितिक फायदे के लिए उनकी मुंहजबानी निंदा भर करती रही है. इससे राष्ट्रवादी पार्टी बीजेपी की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुडी नीतियों पर संदेह उत्पन्न होता है.

दुश्मन मुल्क पाकिस्तान से जुडी उसकी विदेश नीति भी अजीबोगरीब और हास्यास्पद है. पाकिस्तान कश्मीर में आये दिन आतंकी भेज रहा है, सीमा पर रोज हमारे सैनिकों पर हमले कर रहा है और भारत सरकार उसकी दानवता का परिचय मानवता से दे रही है. भारतीय जेलों में बंद 11 पाकिस्तानी कैदियों को भारत सरकार ने रिहा कर दिया है, जबकि पाकिस्तानी जेलों में बंद 132 भारतीयों को पाकिस्तान सरकार रिहा करने को तैयार नहीं है. यही नहीं बल्कि वो तो भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को फर्जी तरीके से जासूस साबित कर फांसी की सजा देने पर तुली हुई है. बीजेपी ने राष्ट्रवाद के मुद्दे पर मुंहजबानी खूब ढोल पिटे हैं, लेकिन वास्तविक धरातल पर देशद्रोहियों के खिलाफ कार्यवाही के मामले में मोदी सरकार अपने तीन साल के कार्यकाल में अब तक तो जीरो ही साबित हुई है. उसने देशद्रोहपूर्ण बयान देने वाले नेताओं के खिलाफ कोई नानूनी कार्यवाही न कर यही साबित किया है कि ‘चोर-चोर मौसेरे भाई’ अर्थात सब नेता आपस में मिले हुए हैं. एक दूसरे को वो न सिर्फ कानूनी शिकंजे से बचाते हैं, बल्कि सत्ता किसी भी दल की हो, सब मौज करते हैं. केवल दिखावटी रूप से अपने राजनीतिक फायदे के लिए एक दूसरे की निंदा करते हैं. भारतीय लोकतंत्र की और यहाँ के राजनीतिक दलों की यही सबसे बड़ी कड़वी सच्चाई है.



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20 प्रतिक्रिया

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Shobha के द्वारा
June 15, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी संदीप दीक्षित की अपनी पहचान क्या थी केवल शीला दीक्षित जी के पुत्र सुर्खियाँ बनने के लिए और भी अनेक हथकंडे थे लेकिन कैसा हथकंडा अपनाया है दुखद

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपने सही है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित मीडिया की सर्खियों में बने रहने के लिए नए नए हथकंडे अपनाते रहते है ! सेनाध्यक्ष को सड़क का गुंडा कहना न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि कानून दंडनीय अपराध भी है ! सरकार को कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए थी ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

Khalid Khan आप लोगो ने देशद्रोह की परिभाषा ही बदला दी और आलोचना करने मात्र को भी देशद्रोह मान लिया, तो क्या मोदी जी कोअब आपके कानून के हिसाब से सरकार चलानी है या भारत के कानून के हिसाब से?

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय खालिद ख़ान जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आलोचना कीजिये, उस पर कहन आपत्ति है, लेकिन किन्तु संवैधानिक पदों पर बैठे लोंगो की अवमानना करना भारत ही नही, बल्कि सभी देशों मे कानूनन जुर्म है. दुनिया के सभी मुल्कों मे मुल्क की, राष्ट्रपति की, उपराष्ट्रपति की, प्रधानमन्त्री की, न्यायाधीश की, सेनापति की और सेना की अवमानना करना कानूनन जुर्म है ! सेनापति को सड़क का गुंडा कहना और जनरल डायर से तुलना करना अवमानना है ! सेना और प्रधानमन्त्री के संदर्भ मे ‘खून की दलाली’ शब्द का इस्तेमाल करना भी सेना की अवमानना के अंतर्गत आता है ! यह प्रधानमन्त्री की भी अवमानना है ! भारत के कानून की ही बात हो रही है ! आपको मालूम होगा कि पाकिस्तान सहित बहुत से मुल्कों मे ईश्वर की आलोचना करने यानी ‘ईश निन्दा’ की सजा मौत है ! अपने मुल्क और सेनाध्यक्ष की निन्दा करना ईश्वर की निन्दा करने से भी कहीं ज्यादा बड़ा जुर्म है ! भारत मे बोलने की आजादी है, लेकिन आप कुछ भी बोलिये, ऐसा नही है ! सरकार ऐसे लोंगों पर कानूनी कार्यवाही कर सकती है, जिनके बयानों की चर्चा की गई है ! ब्लॉग पर समय देने के लिये धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

Jitendra Agarwal आदरणीय राजेंद्र जी, आपका लेख सच्चाई से ओतप्रोत है. आपने बिल्कुल सही फरमाया है क़ि मोदी सरकार देशद्रोहियों के खिलाफ असफल रही है! इन सालों में सबसे ज़्यादा देशद्रोही लोग सामने आएँ है जिन्होने देश के खिलाफ शर्मनाक बयान दिए हैं और देश तोड़ने का भरसक प्रयास किया है. फिर भी उनके खिलाफ कोई ऐसी कार्यवाही नही हुई जिससे बाकी लोगो को भी सबक मिले. नतीजा देशद्रोहियों की भरमार हो गई है. अत्यंत ही सार्थक व सफल लेख. धन्यवाद!

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय जीतेन्द्र अग्रवाल जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट को पसंद कर आपने उसे जो महत्ता और सार्थकता प्रदान की है, उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद ! मोदी के शासन मे एक तो देशद्रोही तत्व खुल के अपना राष्ट्रविरोधी कार्य नही कर पा रहे हैं, दूसरे बीजेपी और मोदी से चिढ के कारण भी देशद्रोहियों की भरमार हो गई है ! मोदी विरोधियों का उन्हे भरपूर समर्थन भी मिल रहा है ! आपकी इस बात से पूर्णत: सहमत हूँ कि देश के खिलाफ शर्मनाक बयान देने वालों और देश तोड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ मोदी सरकार ने अब तक ऐसी कोई भी सख्त कार्यवाही नही की है, जिससे बाकियों को सबक मिले ! देखिये अब वो अपने शेष बचे दो साल मे क्या करती है ! नही कुछ करेगी तो 2019 मे उसका परिणाम भी भुगतेगी ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

tarun sharma बहुत ही बढिया लेख! मोदी सरकार अंतरिक बिद्रोहियों के खिलाफ कुछ कठोर कदम नहीं उठा पा रही है यह एक कटु सच है, ऐसे लोग जो देशद्रोही बयानबाजी करते रहते हैं या देश की अखंडता और प्रभुसता के खिलाफ बोलते और लिखते हैं उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही होनी चाहिये!

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय तरुण शर्मा जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! पोस्ट की सराहना के लिये हार्दिक आभार ! मोदी सरकार न तो कश्मीर मे और न ही देश के अन्य भागों मे देशद्रोही तत्वों के खिलाफ कोई सख्त कार्यवाही कर रही है ! पाकिस्तान के खिलाफ भी उसकी नीति कठोरता की बजाय दयालुता वाली ही है ! चाहे आतंकी हों या नक्सली, राष्ट्र के ये मुख्य विद्रोही तो दिन पर दिन बढ ही रहे हैं, इसके साथ ही इनका समर्थन करने वाले और राष्ट्र के खिलाफ, सेना और सेनाध्यक्ष के खिलाफ बोलने वाले भी दिनोदिन बढते ही जा रहे हैं ! मोदी सरकार ऐसे देशद्रोही तत्वों से निपटने मे अब तक तो नाकाम ही रही है ! अब शेष बचे दो साल मे वो क्या करती है, यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा ! पोस्ट से सहमति व्यक्त करने और प्रतिक्रिया देने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

Rajeev Gupta आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, देशद्रोहियों पर जिस तरीके से मोदी सरकार ने नरम रुख अपनाया हुआ है, उसकी भारी कीमत मोदी सरकार को चुकानी पड सकती है. अगले दो सालों मे अगर देशद्रोहियों को चुन चुन कर ठिकाने नही लगाया गया तो देश इस अकर्मण्यता के लिये इस सरकार को कभी माफ नही कर पायेगा. इस विषय पर में खुद भी लिखता रहता हूँ. आपने उसी मुद्दे को और भी अधिक प्रभावशाली ढंग से उठाया है, उसके लिये आपका हार्दिक आभार एवं अभिनन्दन.

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! आप इस विषय हमेशा लिखते रहते हैं ! हमलोग इस उम्मीद से थोड़ा इंतजार कर रहे थे कि मोदी सरकार देशद्रोहियों के खिलाफ देरसबेर कार्यवाही जरूर करेगी ! लेकिन तीन साल बीत जाने पर भी इस मामले मे उसने कुछ नही किया ! अब हमलोग भी जो सच है, उसे लिख रहे हैं और लिखना भी चाहिये ! मेरे लिये देश से ज्यादा प्रिय और सर्वोपरि कोई भी नही है ! आपकी इस बात से पूर्णत: सहमत हूँ कि मोदी सरकार आने वाले दो साल मे भी अगर देशद्रोहियों के खिलाफ कोई सख्त कार्यवाही नही करती है तो देश की जनता 2019 मे उसे माफ नही करेगी ! पोस्ट की सराहना के लिये और ब्लॉग पर अनमोल समय देने के लिये हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय सदगुरु जी, आपको कड़वा सच बताने के लिये बहुत बहुत बधाई. ढील देने का नतीजा सबने देख लिया. नतीजा बताता है सरकार की नीतियाँ गलत हैं. यह सरकार ऐक्शन तो लेती है पर उन पर जो इनके खिलाफ फैसबूक पर लिखते हैं तब पूरी माशीनरी पूरे जोर शोर से कार्यवाही करती है. सेनाध्यक्ष या सेना पर कोई भी उलूल जुलूल बके नेताओं को कोई फर्क नहीं पड़ता. इनके खिलाफ बोलोगे तो cbi या इनकम टॅक्स में फसा दिये जाओगे. पाकिस्तान पर मेहरबानियाँ किये जाओ उनके कैदियों को अपने कैदियों से ज्यादा तवज्जो दो यही कारण है की पाकिस्तान कहता है हमारे कैदी अपनी सजा पूरी कर चुके थे. (आपने कोई एहसान नही किया) खुद पाकिस्तान हिन्दुस्तान के कैदियों की सजा पूरी होने के बाद भी नहीं छोड़ता, उसे भारतीय नेताओं की मानसिकता अच्छी तरह से पता है

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय रविन्द्र सूदन जी ! सादर अभिनन्दन ! आपकी बात से सहमत हूँ कि बीजेपी नेताओं को सिर्फ अपने से मतलब है ! उनके खिलाफ कोई कुछ बोला तो सीबीआई और इनकम टेक्स के सहारे उसे परेशान करते हैं, किन्तु देश के खिलाफ , सेनाध्यक्ष और भारतीय सेना के खिलाफ कोई कुछ भी बोलता रहे, वो चुप्पी साधे रहते हैं ! पाकिस्तानी कैदियों की रिहाई करने मे हमारे मंत्री मीडिया पर अपनी शोहरत बढाने की खातिर ही इतने उतावले रहते हैं ! पोस्ट की सराहना के लिये और ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

Sujit Kumar आपकी बात सही है, कुछ मामलो मे सरकार ढिलाई कर रही है, अफजल गेंगो पे कठोर करवाई कर एक सख्त संदेश देना चाहिये और अदालत से कठोर सजा दिलवानी चाहिये. ए काम अब योगी ही कर सकेगे

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय सुजीत कुमार जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! केन्द्र सरकार कई मामलों मे ढिलाई कर रही है ! राष्ट्र विरोधी कोई भी गैंग हो, त्वरित रूप से कठोर कार्यवाही होनी चाहिये ! योगी जी यूपी मे देशद्रोहियों के खिलाफ कुछ कर पायेंगे, यह तो आने वाला वक्त बतायेगा ! उनसे उम्मीद तो काफी है ! प्रतिक्रिया देने के लिये धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

Anil Bhardwaj yea case of treason should be filed and every govt benefit should be withdrawn.

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय अनिल भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन! आपसे सहमत हूँ देशद्रोहियों के खिलाफ न सिर्फ कानूनी कार्यवाही होनी चाहिये, बल्कि उन्हे दी जाने वाली सभी सरकारी सुविधाएँ तत्काल बंद कर देनी चाहिये ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिये धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी यह बात सही तो लगती है की सरकार इन पर नकेल क्यों नही कस पा रही. पर जरा जे एन यू काण्ड याद करें. देश द्रोह के नारे लगाने वाले को गिरफ्तार करते ही कैसे सारा विपक्ष और मीडिया एक हो गया था. इसलिये शायद सरकार किसी न किसी तरह इन्हे घेरेगी जरूर ऐसा मेरा अनुमान है. जैसे वर्षो से देश के खिलाफ जहर उगलने वाले टी वी चैनल पर शिकंजा कसा जा रहा है. यह देश द्रोहियों का मुख्य भोंपू है. कभी कभी मामला ठंडा होने पर ही चोट करनी पड़ती है ताकि लोहे पर चोट से लोहा टूट जाय गर्म लोहा टूटता नही फाल जाता है.

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपकी बात सही है कि देशद्रोहियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होते ही मीडिया और मोदी सरकार विरोधी नेता एकजुट होकर चिल्लाते हैं, लेकिन कार्यवाही तो होनी ही चाहिये क्योंकि मोदी सरकार राष् ट्रीय सुरक्षा को लेकर आम जनता के प्रति जबाबदेह है न कि गद्दारों और देशद्रोहियों के प्रति ! कोई टीवी चैनल भी यदि कहीं पर गलत है तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिये ! कई लोग कह रहे हैं कि मामूली रकम के लिये एक टीवी चैनल के मालिक के खिलाफ कार्यवाही हुई ! बताइये 48 करोड़ की रकम मामूली है, जबकि दस बीस हजार के लोन पर आम आदमी के खिलाफ कानूनी रूप से सूद व्याज सहित वसूली हेतु आरसी काट दी जा रही है ! मीडिया के नाम पर लूटपाट और मनमानी की हद हो गई ! ऐसे लोंगों के खिलाफ जरूर कार्यवाही होनी चाहिये ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

Leela Tewani प्रिय ब्लॉगर सद्गुरु भाई जी, सबसे पहले तो ऊल-जुलूल बयानबाजी बंद होनी चाहिए, चाहे बोलने वाला पक्ष से हो या विपक्ष से, क्योंकि फिर सारा ध्यान बयानबाजी की तरफ ही केंद्रित हो जाता है, मूल समस्या वहीं-की-वहीं रह जाती है. दूसरे देश-हित को सर्वोपरि रखना चाहिए. अत्यंत सटीक व सार्थक रचना के लिए आपका आभार.

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीया लीला तिवानी जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने बहुत अच्छी बात कही है कि देशहित को सर्वोपरि रखना चाहिये ! उलजुलूल बकने वाले कुछ लोंगो को सजा मिल जाये तो देश हित के खिलाफ होने वाली बयानबाजी भी रुक जायेगी ! रचना को सटीक और सार्थक महसूस कर उसे सार्थकता प्रदान करने के लिये धन्यवाद !


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