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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज: राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए की तरफ से दावेदार हो सकेंगीं?

Posted On: 16 Jun, 2017 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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भारत में राष्ट्रपति चुनाव की तारीख 17 जुलाई नजदीक आती जा रही है. नामांकन-पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 14 जून से शुरू हो चुकी है, आखिरी तारीख 28 जून है, अभी तक देश के किसी बड़े राजनीतिक दल के उम्मीदवार ने नामांकन-पत्र दाखिल नहीं किया है. राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में तेज हलचल तो है, लेकिन वो अभी तक गोलबंदी बनाने तक ही सिमित है. बीजेपी की अगुआई वाली राजग (एनडीए) सरकार के पास अपने उम्‍मीदवार को जिताने के लिए स्‍पष्‍ट बहुमत नहीं है, लेकिन संख्‍याबल के लिहाज से उसका पलड़ा विपक्ष से ज्यादा भारी है. दूसरी तरफ राष्ट्रपति उम्मीदवार तय करने के लिए बनी विपक्ष की दस सदस्यीय उप-कमिटी की बैठक अब तक बेनतीजा रही है. दरअसल विपक्ष की उप-कमिटी अपने सदस्यों के अंदरूनी मतभेदों से जूझ रही है. इसके अधिकतर नेता चाहते हैं कि बीजेपी की और से पहले उम्मीदवार की घोषणा होने दो, फिर हम लोग अपना उम्मीदवार तय करें या फिर बीजेपी द्वारा घोषित उम्मीदवार को समर्थन देने पर विचार करें. मीडिया में ऐसी चर्चा है कि विपक्ष के कुछ नेता बीजेपी द्वारा घोषित उम्मीदवार को समर्थन देने की जगह चुनाव में जाने का मूड बना चुके हैं.

ऐसी खबरें आ रही हैं कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता सीताराम येचुरी पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी को विपक्ष का उम्मीदवार घोषित करने के पक्ष में हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी राय थी कि गोपालकृष्ण गांधी को चुनाव में खड़ा करके राष्ट्रपति चुनाव को गांधी बनाम गोडसे और सेक्युलर (धर्मनिरपेक्ष) बनाम कम्युनल (साम्प्रदायिक) की लड़ाई में बदल दिया जाए, जिससे विपक्ष पूरी तरह से एकजुट हो जाए. यदि यह खबर सही है तो लानत है ऐसे नेताओं पर जो देश के सर्वोच्च पद के चुनाव में भी ‘डर्टी पॉलिटिक्स’ यानी गन्दी राजनीति का खेल खेलने से बाज नहीं आते हैं. दूसरी तरफ बीजेपी राष्ट्रपति उम्मीदवार पर विपक्षी नेताओं से आम सहमति बनाने के लिए तीन सदस्यीय एक कमिटी बनाई है, जिसमे केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, राजनाथ सिंह और वेंकैया नायडू आदि शामिल हैं. ये कमिटी शुक्रवार 16 जून को विपक्षी दलों की सर्वमान्य नेता सोनिया गांधी से मिलकर अपने उम्मीदवार पर एक राय बनाने की कोशिश करेगी. विपक्षी दल सरकार से यही मांग कर रहे हैं कि आप लोग ऐसे व्‍यक्ति को प्रत्‍याशी बनाइये, जिसके नाम पर विपक्षी दलों आम सहमति बन सके.

हालाँकि अंदरूनी मतभेदों से जूझते विपक्ष दलों में सत्तारूढ़ बीजेपी या कहिये एनडीए के उम्मीदवार के लिए 2002 में डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के लिए बनी आम राय जैसी सर्वसम्मति का बनना लगभग नामुमकिन सा ही है. बीजेपी कुछ समय पहले तक तो अपनी पार्टी के भीष्म पितामह लाल कृष्ण आडवाणी को राष्ट्रपति बनाने का पूरा मन बना चुकी थी, लेकिन बाबरी विध्वंश की साजिश रचने का मुकदमा 30 मई से इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच में फिर से शुरू होते ही पार्टी को अपना मन बदलना पड़ा, क्योंकि इस मुकदमे के 12 आरोपियों में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी का नाम भी शामिल हैं. बीजेपी का आत्ममंथन अब इस बात पर जारी है कि उसके दल के पास दूसरा ऐसा कौन सा नेता है जिसके नाम पर एकजुट विपक्ष को तोड़ा जा सके और आवश्यक समर्थन जुटाया जा सके. बीजेपी ने राष्ट्रपति पद के लिए अभी तक खुलकर अपना कोई उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन मीडिया में ऐसी चर्चा है कि बीजेपी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलौत, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू आदि के नाम पर विचार कर रही है.

हालांकि बीजेपी अपने कोर ग्रुप और प्रधानमंत्री की बैठक के बाद ही 23 जून को राष्ट्रपति पद के लिए प्रत्याशी के नाम का ऐलान करने की बात कह रही है, लेकिन मीडिया में कयास यही लगाया जा रहा है कि राष्ट्रपति भवन की दौड़ में सबसे ज्यादा चर्चा सुषमा स्वराज के नाम को लेकर ही हो रही है. अपने काम और व्यवहार को लेकर वो सभी दलों में लोकप्रिय हैं. सोशल मीडिया के जरिये भी वो सबकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं. उनके लिए सबसे सकारात्मक बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस सहित कई और विपक्षी दल शायद ही उनका विरोध करें. ऐसी चर्चा है कि विपक्षी दलों कि बैठक में तृणमूल कांग्रेस ने साफ़ कर दिया है कि अगर बीजेपी सुषमा स्वराज या किसी भी अन्य महिला उम्मीदवार को राष्टपति के चुनाव में उतारती है तो वह विरोध नहीं करेगी. सुषमा स्वराज 1998 में देश की राजधानी दिल्ली की प्रथम महिला मुख्यमंत्री रह चुकी हैं. भाजपा की यह शीर्ष महिला नेत्री 2004 में ‘उत्कृष्ट सांसद सम्मान’ पा चुकी हैं और 2009 से लेकर 2014 तक संसद में विपक्ष कि नेता रह चुकी हैं. एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति पद के लिए वो प्रबल दावेदार हैं और देश की अगली राष्ट्रपति बन सकती हैं.



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
June 17, 2017

बहुत बढियाँ सुझाव सद्गुरु जी, पर आपकी हमारी सुनता कौन है? आखिरी फैसला तो मोदी मोहन अमित ही लेंगे ..अभी हवा का रुख भांप रहे हैं!

sadguruji के द्वारा
June 19, 2017

दलित चेहरा होने की वजह से रामनाथ कोविंद का विरोध अब विपक्षी दल पूरी एकजुटता के साथ नहीं कर पाएंगे. उनमे फूट भी होनी तय है. रामनाथ कोविंद के नाम पर आम सहमति भी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बन सकती है. हालांकि भाजपा पर दलित तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप भी जरूर लगेगा, क्योंकि वो विपक्षी पार्टियों पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाती रही है. राष्ट्रपति चुनाव में जारी सभी दलों के राजनीतिक प्रपंच और दांवपेंच से ऊपर उठकर समस्त भारतवासी यही उम्मीद करते हैं कि जो भी भारत के नए राष्ट्रपति बनें, उनसे हम सब लोगों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए और राष्ट्र की उन्नति में अपना योगदान देने के लिये सदैव आशीर्वाद और प्रेरणा मिलती रहेगी.

sadguruji के द्वारा
June 19, 2017

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का सोमवार को ऐलान कर दिया है. उन्होंने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद हेतु उम्मीदवार बनाया है. दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले रामनाथ कोविंद यूपी से दो बार राज्यसभा सांसद रहे. वो कई संसदीय कमेटियों के चेयरमैन रह चुके हैं. ऑल इंडिया कोली समाज और बीजेपी दलित मोर्चा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. अमित शाह ने कहा हैं कि गरीब समाज से ताल्लुक रखने वाले शख्स को राष्ट्रपति बनाने का फैसला किया है. रामनाथ कोविंद के नाम का ऐलान करके अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक जानकारों को चौंका दिया है, क्योंकि राष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर लग रही राजनीतिक अटकलों में कहीं भी उनका नाम सामने नहीं आया था.

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय सिंह साहब ! सादर अभिनन्दन ! आप सही कह रहे हैं कि जनता कि आवाज या सलाह सुनता कौन है ? राष्ट्रपति के सर्वोच्च पद को लेकर भी अब दलित बनाम दलित कि राजनीती हो रही है ! बीजेपी ने दलित समुदाय से जुड़े रामनाथ कोविंद जी को अपना उम्मीदवार बनाया है ! अब विपक्ष उनके मुकाबले किसी महादलित को अथवा किसान नेता को खड़ा करेगी ! ये हिन्दुस्तान है और यहाँ पर सब जगह पर राजनीति हावी है ! ब्लॉग पर समय देने के लिए सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

Sangam Mishra never .. not possible

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय संगम मिश्रा जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपकी बात सही साबित हुई है ! भारतीय राजनीति मे कुछ भी हो सकता है ! प्रतिक्रिया देने के लिये धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

Harish Chandra Sharma आदरणीय सदगुरु जी ,एक ,किरण जो अचानक चमकेगी ,एक ऐसा नाम जो महिला भी है और कुशल ईमानदार भी है और सर्व सम्मति भी पा सकती है | जिसके राष्ट्रपति बन सकने की भविष्यवाणी में अपने पूर्व ब्लॉग्स में कई बार कर चुका हूँ| बस . शान्ती शान्ती कारक आभास किसी पार्टी में हो जाये …?

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीय हरीश चंद्र शर्मा जी ! सादर अभिनन्दन ! आपकी बात से पूर्णत: सहमत हूँ ! लेकिन अब तो पांच साल बाद ही उनके नाम पर विचार होगा, फिलहाल तो रामनाथ कोविंद जी के रूप में बीजेपी ने उम्मीदवार चुन लिया है ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

Shobhabhardwaja श्री आदरणीय सद्गुरु जी परन्तु लगता नहीं है सुषमा जी एक्टिव पालिटिक्स छोड़ कर राष्ट्रपति भवन में केवल रबर स्टैम्प बन कर बैठेंगी कई नाम आ रहे हैं राष्ट्रपति से तात्पर्य पांच वर्ष बाद राजनीती से सन्यास रहा है

sadguruji के द्वारा
June 22, 2017

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपका अंदाजा सही साबित हुआ है ! राजनितिक और कूटनीतिक अनुभव आपका काफी है, जबकि हम लोग आदर्श और भावनाओं में ज्यादा बहते रहते हैं ! हार्दिक आभार !


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