सद्गुरुजी

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शाही इमाम का नवाज शरीफ को खत लिखना हास्यास्पद

Posted On: 17 Jul, 2017 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बन्धन अन्जाना, मैं ने नहीं जाना, तू ने नहीं जाना, एक डोर खींचे, दूजा दौड़ा चला आए, कच्चे धागे में बंधा चला आए, ऐसे जैसे कोई दीवाना, तेरे मेरे बीच में कैसा है…

syed ahmed bukhari

दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पत्र लिखा है। यह समाचार जब मैं पढ़ा तो फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ में आनंद बख़्शी साहब का लिखा हुआ यह गीत याद आ गया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से कैसा उनका रिश्ता-नाता है, यह आम हिन्दुस्तानियों के समझ से परे की बात है। साल 2014 में अपने बेटे को नायब इमाम बनाने के कार्यक्रम में उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आने का न्योता भेजा था, जबकि भारतीय प्रधानमंत्री को निमंत्रण न देकर ऐसे उपेक्षित किया था, मानो वे हिन्दुस्तान में नहीं, बल्कि पाकिस्तान में रह रहे हों। आम हिन्दुस्तानियों के समझ से परे ये बात भी है कि आज के आजाद और लोकतांत्रिक दौर में जामा मस्जिद का इमाम आखिर शाही इमाम कैसे बन सकता है? आज हमारे मुल्क में न तो शहंशाह हैं और न ही उनकी शहंशाहियत है। जामा मस्जिद भी देश की दूसरी मस्जिदों की तरह एक मस्जिद भर है।

जामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध किया है कि वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में शांति लाने के लिए करें। उनके अनुसार आज दुनिया का स्वर्ग कश्मीर कत्लगाह बन गया है, इसलिए यहां से जल्द से जल्द हिंसा और खौफ का वातावरण खत्म करने की जरूरत है। बुखारी ने पत्र में शरीफ से कहा है कि वे कश्मीर घाटी के हालात सुधारने के लिए हुर्रियत नेताओं से बातचीत करें और उन्हें समझाएं, ताकि कश्मीर घाटी में अमन कायम हो सके। आश्चर्य की बात है कि भारत सरकार ने आतंकियों व पाकिस्तान के समर्थक तथा अलगाववादी विचारधारा रखने वाले हुर्रियत कांफ्रेंस के संग बातचीत करने से पहले ही साफ़ इनकार किया हुआ है, इस समय कश्मीर में हुर्रियत के चाहने से कुछ नहीं होगा, ये जानते हुए भी नवाज शरीफ को हुर्रियत के नेताओं से बातचीत करने के लिए खत लिखना हास्यास्पद है।

दरअसल, कश्मीर में हुर्रियत की नुमाइंदी दिनोंदिन ख़त्म होती जा रही है। इस समय जम्मू-कश्मीर में आंतकवादी गतिविधियों की बागडोर हिजबुल मुजाहिद्दीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन के हाथों में है, जिसे पाकिस्तान की सरकार ने इस्लामाबाद में रहने की एक ख़ास और सुरक्षित जगह दी हुई है। उसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से पैसा मिलता है। सारी दुनिया जानती है कि कश्मीर घाटी में लड़ाई के लिए पाकिस्तान हिजबुल मुजाहिद्दीन का समर्थन करता है। वर्ष 2012 में सैयद सलाहुद्दीन ने इस बात को न सिर्फ स्वीकार किया था, बल्कि यहां तक कह दिया था कि अगर पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों का समर्थन नहीं किया, तो वो खुद पाकिस्तान पर हमला कर देगा। सैयद सलाहुद्दीन को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के अमेरिकी सरकार के फैसले के वावजूद भी उस पर कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ा है। कश्मीर घाटी में आज भी उसकी तूती बोलती है और वो नित नए फतवे जारी करता रहता है।

सैयद अहमद बुखारी का नवाज शरीफ को हुर्रियत कांफ्रेंस से बात करने के लिए खत लिखना कश्मीर में हुर्रियत कांफ्रेंस का प्रभाव बढ़ाने का प्रयास हो सकता है, जो लगभग ख़त्म हो चुका है। हो सकता है कि हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं ने सैयद अहमद बुखारी को यह सलाह दी हो। एक बात और गौर करने वाली है कि कुछ समय पहले जब कश्मीर में आतंकवादी बड़े पैमाने पर हमारे सैनिकों और सुरक्षाबलों को शहीद कर रहे थे, तब इमाम सैयद अहमद बुखारी चुप थे। अब जब बड़े पैमाने पर आतंकवादी मारे जा रहे हैं, तब सुलह समझौते की बात कर रहे हैं। यह बात संदेहास्पद लगती है। पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को हर तरह से समर्थन तो दे ही रहा है, इसके साथ ही वो दोगली चाल चलते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून को बार-बार पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग भी कर रहा है। नवाज शरीफ ने बान की मून को पिछले एक माह में दो बार पत्र लिखकर जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन की जांच करने की मांग की है।

मजेदार बात यह है कि बलूचिस्तान और अपने कब्जे वाले कश्मीर में पाकिस्तान किस तरह से खूनी खेल खेलकर मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है, ये सारी दुनिया देख रही है। हिन्दुस्तान के खिलाफ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से दुश्मनी निभा रहे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को खत लिखना मूर्खता और अपने मुल्क के खिलाफ जाना ही कहा जाएगा। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने कहा है कि शाही इमाम समय-समय पर अपना देशद्रोही चेहरा दिखाते रहते हैं, वोट बैंक के कारण चंद नेता ऐसे गद्दारों की चरणवंदना करते हैं। देश के आंतरिक मसले पर सीधे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखने के विवाद पर मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना सय्यदत अतहर देहल्वी ने भी ट्वीट करके शाही इमाम का विरोध किया है। उन्होंने ट्वीट करके पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से वार्ता या अन्य किसी देश के मध्यस्थता को भारत की संप्रभुता के खिलाफ बताया है। मौलाना सय्यदत अतहर देहल्वी ने बहुत काबिले तारीफ़ बात कही है।



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
July 17, 2017

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी इमाम बुखारी के आचरणों से लगता है की वह देश में रहता लेकिन प्यार पकिस्तान से करता लेकिन उसके व्यवाहार के विरोधी सेकुलर कहलाने वाले दल निंदा नहीं करते ये देश के लिए शर्मनाक है कभी सोनिया गांधी वोटो के लिए बुलाती कभी दुसरे दल जबकि उसकी मुसलमानों पर कोइ पकड़ नहीं है ये उसका पागलपन और हताशा है देश की जनता बहुत समझदार है ऍसुन्दर लेख के लिए साधुवाद.

sadguruji के द्वारा
July 18, 2017

मिडिया में प्रकाशित ख़बरों के अनुसार कुछ रोज पहले कुख्यात आतंकवादी सैयद सलाउद्दीन को एक बार फिर पाकिस्तान में खुलेआम सार्वजनिक मंच पर देखा गया. इस्लामाबाद में आयोजित एक बड़ी रैली में सैयद सलाउद्दीन को आतंकी हाफिज सईद की तरफ से तोहफे भेजी गई बंदूक उसके बेटे तला सईद और साले अब्दुल मक्की ने भेंट की. आतंकी सैयद सलाहुद्दीन ने हाथ में बंदूक लेकर भारत की बर्बादी की कसमें खाईं, भारत विरोधी नारे लगाए और कश्मीर की आजादी के लिए लड़ाई जारी रखने की बात कही.

sadguruji के द्वारा
July 18, 2017

इस रैली में आतंकवादी सैयद सलाउद्दीन ने कश्मीर के साथ साथ गज़वा-ए-हिंद के लिए भी लड़ाई लड़ने की बात कही. ‘गजवा ए हिन्द’ का सरल भाषा में अर्थ है, हिन्दुस्तान पर फतेह हासिल कर इस सेकूलर मुल्क में इस्लाम का परचम लहराना. यह आतंकवादियों का वो ख्वाब है, जो कभी पूरा तो नहीं होगा, अलबत्ता लम्बे समय तक आतंकवादियों से संघर्ष का एक बड़ा कारण जरूर बनेगा. आतंकवादी साफ कहते हैं कि ‘गजवा ए हिन्द’ की जंग को अंजाम तक पहुंचाना पाकिस्तान सरकार का भी काम है. पाकिस्तान के आतंकवादी मुल्क होने पर क्या अब भी किसी को संदेह है?

sadguruji के द्वारा
July 18, 2017

आतंकवादियों की इस रैली की सबसे बड़ी बात यह रही कि नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नेता जफर अली शाह भी वहां पर मौजूद थे. दुनिया को क्या अब भी इस बात का कोई सबूत चाहिए कि पाकिस्तान की सरकार आतंकवादियों से मिली हुई है? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर राजौरी, पुंछ और बारामुला जिले में कल पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी एवं मोर्टार दागने से सेना के एक जवान और नौ साल की एक लड़की की मौत हो गयी थी, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गये थे.

sadguruji के द्वारा
July 18, 2017

पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा पर राजौरी एवं पुंछ सेक्टर के भीमबर गली में बगैर किसी उकसावे के आज भी सुबह करीब पौने सात बजे से छोटे एवं स्वाचालित हथियारों से अधाधुंध गोलीबारी की और मोर्टार के गोले दागने शुरू कर दिये. भारतीय सैनिक पाकिस्तानी गोलीबारी का कड़ा जवाब दे रहे हैं. अब पाकिस्तान को कड़ा जबाब नहीं, बल्कि 1971 के जैसा तोड़ने वाला जबाब देने की जरुरत है. ऐसे युद्ध के जैसे हालात में इमाम सैयद अहमद बुखारी का पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं से बातचीत करने के लिए खत लिखना हास्यास्पद है.

sadguruji के द्वारा
July 19, 2017

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! जय श्री राम और सादर अभिनन्दन ! सार्थक और विचारणीय टिप्पणी करने के लिए धन्यवाद ! आपने ठीक कहा है कि कुछ लोग रहते हिन्दुस्तान में हैं और गुण पाकिस्तान के गाते हैं ! देशद्रोह और किसको कहेंगे? धर्म व उसको मानने वाले हमारे अनुयायी भाई और ईश्वर तीनों से ऊपर मुल्क है ! इस बात को हर हिन्दुस्तानी को याद रखना चाहिए ! ब्लॉग पर समय देने के लिए सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
July 19, 2017

बलूचिस्तान और अपने कब्जे वाले कश्मीर में पाकिस्तान किस तरह से खुनी खेल खेलकर मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है, ये सारी दुनिया देख रही है. हिन्दुस्तान के खिलाफ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से दुश्मनी निभा रहे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को खत लिखना मूर्खता और अपने मुल्क के खिलाफ जाना ही कहा जाएगा.

sadguruji के द्वारा
July 19, 2017

पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को हर तरह से समर्थन तो दे ही रहा है, इसके साथ ही वो दोगली चाल चलते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव को बार बार पत्र लिख कर हस्तक्षेप करने की मांग भी कर रहा है. नवाज शरीफ ने बान की मून को पिछले एक माह में दो बार पत्र लिख कर जम्मू कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन की जांच करने की मांग की है.

Shobha के द्वारा
July 26, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी शाही इमाम की राजनीती में बहुत रूचि है उसका बस चले तो वह चुनाव लड़ता उसका दिया फतवा भी कोई नहीं मानता देश को याद दिलाता रहता है वह भी एक हस्ती है |

sadguruji के द्वारा
July 31, 2017

आदरणीय शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! बहुत सटीक और अनुभवी प्रतिक्रया आपने दी है ! अब तो नवाज शरीफ कुर्सी से हाथ धो चुके हैं ! खत लिखना बेकार गया और बदनाम हुए सो अलग ! सादर आभार !


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