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गरीब का दीपक बुझा, अमीर के कुलदीपक ने की छेड़खानी

Posted On: 8 Aug, 2017 social issues में

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पिछले हफ्ते दो ऐसी घटनाएं घटीं, जो मुझ जैसे आम हिन्दुस्तानियों के दिलों-दिमाग को झकझोर देने वाली हैं. हम सबको जागरूक और सचेत करने वाली हैं. एक घटना में एक गरीब आदमी के घर का इकलौता दीपक बुझ गया और दूसरी घटना में एक अमीर नेता के कुलदीपक ने छेड़खानी की ऐसी आग लगाई है, जो बुझने का नाम ही नहीं ले रही है.


इस ब्लॉग में उन दोनों घटनाओं का जिक्र करूंगा और एक आम हिन्दुस्तानी की हैसियत से उस पर अपनी निष्पक्ष टिप्‍पणी भी करना चाहूँगा. पहली दुखद घटना बुधवार 2 अगस्त की है, जब दिल्ली के पालम इलाके में कार चला रही 25 साल की एक युवती ने ढाई साल के एक मासूम बच्चे को कुचल दिया. बुधवार को दोपहर के समय करीब ढाई बजे मासूम बच्चा दीपक घर के बाहर खेलते हुए सड़क पर चला गया और दौड़ते हुए सड़क पार करने लगा. बच्चे की मां प्रीति उसे आवाज देते हुए उसके पीछे दौड़ी. एक आई-20 कार बेहद तेजी से आती दिखी तो प्रीति उसे रुकने के लिए जोर से चीखी-चिल्लाई, लेकिन आंखों में काला चश्मा और कान में हेडफोन लगाकर कार चला रही युवती अपनी ही धुन में मगन हो अंधी-बहरी हो चुकी थी.


उसने मासूम दीपक के सिर के ऊपर से अपनी कार उतार दी. दीपक की मां तड़पते बच्चे को सीने से लगाकर कार के पीछे भागी, लेकिन कार चलाने वाली युवती की हैवानियत देखिये कि घायल बच्चे को अस्पताल ले जाने की बजाय वो मौके से फरार हो गई.


बच्चे की माँ किसी तरह से दौड़ते-भागते हुए पहले एक निजी अस्पताल पहुंची, जहां पर अस्पताल वालों ने बच्चे की गंभीर हालत और महिला की गरीबी देखकर बच्चे का इलाज करने से ही मना कर दिया. उसके बाद वो महिला अपने बच्चे को लेकर डीडीयू अस्पताल गई, जहां पर डॉक्टरों ने उसके बच्चे को मृत घोषित कर दिया.


एक निहायत गैर जिम्मेदार महिला ड्राइवर के कारण एक माँ ने अपना इकलौता बच्चा खो दिया. अगर उसने सड़क पर दौड़ते बच्चे को देखा होता और समय पर ब्रेक लगा दिया होता तो मासूम दीपक की जान बच सकती थी. पुलिस ने इस मामले में गैर-इरादतन ह्त्या का मामला दर्ज किया और महज चंद घंटों के भीतर ही किसी के घर का दीपक बुझा देने वाली युवती को जमानत भी दे दी.


पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन युवती को गिरफ्तार कर जेल भेजने की बजाय उसे कुछ ही देर में जमानत पर रिहा कर देना फिलहाल तो संदेह और सवाल पैदा कर ही रहा है. इस तरह से कार से कुचलकर ह्त्या करने वाले अमीर लोगों को आनन-फानन में जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा, तो सड़कों पर कोई भी किसी को मारकर चला जाएगा और पकड़े जाने पर बड़े आराम से जमानत पर छूट जाएगा.


न्याय तो यही कहता है कि गाड़ियों से कुचलकर बेगुनाह लोगों को मारने वालों पर ह्त्या का मुकदमा चलना चाहिए और उन्हें दस-बीस साल से लेकर उम्रकैद तक की कड़ी सजा मिलनी चाहिए. गैर-इरादतन ह्त्या का केस दर्ज होने से उन्हें नाममात्र की ही सजा मिल पाती है, जो पीड़ित परिवार के साथ घोर अन्याय है.


कार से कुचलकर मारे गए ढाई साल के मासूम बच्चे दीपक के पिता संदीप कुमार हार्डवेयर की दुकान पर काम करने वाले एक आम हिन्दुस्तानी हैं, जिन्होंने अपना बेटा खोया है. मीडिया पर दीपक के कार से कुचलकर मरने का समाचार दिखाया गया, लेकिन उस पर कोई जोरदार बहस नहीं हुई और न ही कार से कुचलकर मारने वाली अमीर युवती की लापरवाही पर कोई बहस हुई.


न्यूज चैनलों को शुक्रवार आधीरात को सवा बारह बजे यानी 5 अगस्त को चंडीगढ़ में घटी छेड़छाड़ की घटना से ही बहस की फुर्सत नहीं है. कई दिनों से वो बहस महज इसलिए जारी है, क्योंकि पीड़ित और आरोपी दोनों ही वीआईपी परिवारों से जुड़े हुए लोग हैं. पुलिस बार-बार कह रही है कि हम जांच कर रहे हैं, इस केस का मीडिया ट्रायल न करें, लेकिन न्यूज चैनल वाले कहाँ मानने वाले. वो तो अदालत की तरह से बहस जारी रखे हुए हैं, मानों सजा भी उन्हें ही सुनानी हो.


छेड़छाड़ का आरोप लगाने वाली लड़की एक आईएएस अधिकारी की बेटी है और आरोपी हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष सुभाष बराला का बेटा विकास बराला है, जिसे उसके दोस्त समेत एक लड़की से छेड़छाड़ करने के आरोप में शनिवार को चंडीगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार किया था और कुछ देर बाद दोनों को जमानत पर छोड़ दिया था.


इस छेड़छाड़ वाले केस के बहाने जमकर सियासत हो रही है. कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल लगातार सुभाष बराला के हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष पद से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, हालांकि कांग्रेस की यह मांग ठीक वैसी ही है, जैसे कांग्रेस की नैया राहुल गांधी डुबोएं और इस्तीफा उनकी माँ सोनिया गांधी से माँगा जाए.


छेड़छाड़ और अपहरण का संगीन आरोप यदि कोर्ट में सही साबित हो जाता है तो निसंदेह आरोपी विकास बराला को सजा तो मिलेगी ही. हमें पुलिस और कोर्ट पर भरोसा रखना चाहिए. इस केस में मीडिया पर छा जाने वाली लड़की का कहना है कि वो आम हिन्दुस्तानी लड़कियों के लिए लड़ रही है. अच्छी बात है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि कितनी हिन्दुस्तानी लडकियां रात को बारह बजे कार लेकर अकेले निकलती हैं? आधी रात को घूमने पर सवाल नशेड़ी लड़कों और मॉडर्न लड़कियों दोनों से ही पूछा जाना चाहिए. कोई भी वारदात होने पर मीडिया के सहारे आसमान सिर पर उठा लेने वाले माँ-बाप को भी अपने युवा बच्चों से ये सवाल जरूर पूछना चाहिए कि वो आधीरात को जाते कहाँ हैं?




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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
August 13, 2017

Praveen Chauhan- भाई जी मीडिया केवल और केवल उन मुद्दो पर बहस करता है जिनमे उनके खुद के स्वार्थ छुपे होते है यह मीडिया अब केवल भोपू बन गया है जो की बिना पदताल के न्यूज़ को अपने अनुसार पेश करता है क्यो की इनका भी अपना एजेंडा तय होता है इनको भी तो उन नेताओ की चिरौरी करनी है उनके तलवे चाटने है अपने आप को बहुत बड समझते है देश की जनता को गुमराह करते है और खुद नेताओ के आगे पीछे घूमते है यह मीडिया के पाखंडी लोग इन के पास उस आम बच्चे के लिये फुर्सत क्यो होगी क्यो की उससे इनका कोई भी स्वर्ह सीध नही होता है पुराने साम्य मे धोकेबाज , विश्वासघाती , दगाबाज , गद्दार लोग थे जिन्होने इस देश मे अंग्रेजो को मदद दी , मुग़लो को मदद दी वही काम आज के रज नेता करते है एक से बढ़कर एक और फिर उसको जनता से जोड़ देते है

sadguruji के द्वारा
August 13, 2017

आदरणीय प्रवीण चौहान जी ! सादर अभिनन्दन ! सार्थक और सटीक प्रतिक्रिया देने के लिये धन्यवाद ! आपने सही कहा है कि मीडिया को किसी गरीब के बच्चे के कार से कुचल जाने पर बहस करने की फुर्सत कहा है ! वो उधर भागती है, जिधर उसका स्वार्थ सिद्ध होता है ! नेताओं से इनकी साँठगाँठ तो सिद्ध हो चुकी है ! उनसे साठगाँठ कर राज्यसभा तक मे मीडिया घरानों के मालिक पहुंच जा रहे हैं ! ब्लॉग पर आने के लिये सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
August 13, 2017

Leela Tewani• प्रिय ब्लॉगर सद्गुरु भाई जी, एक गरीब आदमी के घर का इकलौता दीपक बुझना बहुत दर्दनाक घटना है. इसने अमीरों के ज़मीर और निजी अस्पताल की असलियत बयां कर दी. दूसरी घटना में लड़की से आपने बहुत माकूल प्रश्न पूछा है, जिसका जवाब हम सब चाहते हैं. अत्यंत मार्मिक, समसामयिक, सटीक व सार्थक ब्लॉग के लिए आपका आभार.

sadguruji के द्वारा
August 13, 2017

आदरणीया लीला तिवानी जी ! सादर अभिनन्दन ! घटना बेहद दर्दनाक थी ! आपने सही कहा कि इसने अमीरों के मारे जमीर और केवल पैसे के पीछे भागने वाले निजी अस्पतालों की कलई खोल के रख दी ! दूसरी घटना मे तो मीडिया के साथ माता-पिता को भी अपने बच्चों से पूछना चाहिये कि आधी रात को वो कहा घूमते हैं ? ब्लॉग आपको समसामयिक, मार्मिक, सार्थक और सटीक लगा, इसके लिये हार्दिक धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
August 13, 2017

आदरणीया लीला तिवानी जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! गरीब आदमी के घर का इकलौता दीपक बूझ गया, इससे बढ़कर दुखद बात और क्या होगी ! न्यूज चैनलों का यह कर्तव्य था कि वो बहस मे बच्चे को कुचलने वाली कार ड्राइवर महिला को बुलाते और उससे सवाल करते ! लेकिन धन के पीछे भागने वाली मीडिया को किसी गरीब के हक के लिये लड़ने की फुर्सत ही कहा हैं ? उनका इंटरेस्ट तो चण् डीगढ़ मे घटे छेड़छाड़ के मामले मे था ! उसमे भी वो लड़की से यह पूछने की हिम्मत नही जुटा पाये कि आधगई रात को वो कहा जा रही थी या फिर कहा से आ रही थी ? ब्लॉग को मार्मिक और सार्थक महसूस कर आपने पोस्ट को सार्थकता प्रदान की है ! इसके लिये हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
August 13, 2017

Rajkumar kandu• आदरणीय सदगुरु जी ! आपने दोनों ही घटना का वर्णन कर उनपर अपनी सटीक प्रतिक्रिया लिखते हुए सही सवाल उठाए हैं । पहली घटना में अपनी रईसी के गुरुर में चूर उस युवती को मासूम बालक तो नजर नहीं आया , उस मां की चीखें भी उस तक नहीं पहुंच पायीं । यह दुर्भाग्य पूर्ण है । उसकी जरा सी सावधानी उस मासूम को जिंदगी दे सकती थी । इंसानियत से पीछा छुड़ाकर घटनास्थल से भागने वाली उसकी गलती के बावजूद उसे तुरंत जमानत मिल जाना यही साबित करता है कि कानून में गरीबों के लिए कोई संवेदना नहीं बची है । यही कानून एक अफसर की बेटी से छेड़छाड़ की शिकायत मात्र से ही पूरी तरह मुस्तैद होकर उसकी जांच में लग जाती है जबकि देश भर में न जाने कितनी बहन बेटियां अत्याचार की शिकार होने पर भी रपट लिखवाने से भी वंचित रह जाती हैं । नेताओं के संवेदनहीनता का भी एक वाकया कल खबरों में चर्चित रहा जब अपने जिद्द के चलते एक विधायक ने बड़ी देर तक रास्ता जाम किये रखा और भीड़ में फंसी एम्बुलेंस में स्थित मरीज की इलाज के अभाव में वहीं मौत हो गयी । इन सभी घटनाओं पर गौर करते हुए यह कहा जा सकता है कि अब वक्त आ गया है जब कुछ कानूनों में संशोधन किया जाना चाहिए और उन्हें और सख्त बनाया जाना चाहिए । बेहद सुंदर लेख के लिए धन्यवाद ।

sadguruji के द्वारा
August 13, 2017

आदरणीय राजकुमार कान्दु जी ! आपने बिल्कुल सही कहा है कि महिला ड्राइवर की यदि सचेत रहती तो एक मासूम बच्चे की जान बच सकती थी ! आपकी यह बात भी एकदम सही है कि कानून मे अब गरीबों के लिये कोई संवेदना नही रह गई है ! कानून अब तो अफ़सरों और नेताओं के लिये ही जल्दी काम करता है ! जिस विधायक ने एम्बुलेन्स रोकी थी, वा भी दोषी है, भले ही 8 मिनट के लिये क्यों न रोकी थी ! ये सब सत्ता के नशे मे रहते हैं ! जो जनता सत्ता देती है, उसे ही भूल जाते हैं ! पोस्ट की सराहना के लिये और ब्लॉग पर समय देने के लिये धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
August 13, 2017

छेड़छाड़ और अपहरण का संगीन आरोप यदि कोर्ट में सही साबित हो जाता है तो निसंदेह आरोपी विकास बराला को सजा तो मिलेगी ही. हमें पुलिस और कोर्ट पर भरोसा रखना चाहिए. इस केस में मीडिया पर छा जाने वाली लड़की का कहना है कि वो आम हिन्दुस्तानी लड़कियों के लिए लड़ रही है. अच्छी बात है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि कितनी हिन्दुस्तानी लडकियां रात को बारह बजे कार ले के अकेले निकलती हैं? कोई भी वारदात होने पर मीडिया के सहारे आसमान सिर पर उठा लेने वाले माँ-बाप को भी अपने युवा बच्चों से ये सवाल जरूर पूछना चाहिए कि वो आधीरात को जाते कहाँ हैं?


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