सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

529 Posts

5725 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15204 postid : 1355941

बीएचयू में बवाल की वजह: संवेदनहीनता, लापरवाही और राजनीति

Posted On: 26 Sep, 2017 social issues में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

काशी ही नहीं बल्कि पूरे देश की जनता को शान्ति देने वाली और तनावमुक्त करने करने वाली अच्छी खबर यह है कि छावनी में तब्दील हो चुके बीएचयू कैंपस की स्थिति अब पूरी तरह से नियंत्रण में है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार छात्र-छात्राओं से हॉस्टल खाली करा लिए गए हैं. सीओ भेलूपुर और लंका एसओ हटा दिए गए हैं. बीएचयू परिसर और लंका में तोड़-फोड़, आगजनी, पथराव, बम फेंकने और माहौल बिगाड़ने के आरोप में 1000 से भी अधिक अज्ञात छात्र-छात्राओं पर मुक़दमा दर्ज किया गया है.


BHU


इसी सिलसिले में 17 छात्रों को हिरासत में लिया गया था, लेकिन बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा लंका थाने का घेराव करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया. सोशल मीडिया में भड़काऊ वीडियो व तस्वीरें शेयर करने के आरोप में भी कई लोगों के ख़िलाफ़ आईटी एक्ट के तहत लंका थाने में मुक़दमा दर्ज किया गया है.


बीएचयू में शनिवार को आधी रात के समय छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज होने के बाद परिसर में भयानक हिंसा का दौर शुरू हो गया था, जिसकी गूंज स्थानीय लोगों से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक देर-सबेर सबको सुनाई दी. काशी प्रधानमंत्री मोदीजी का संसदीय क्षेत्र है, अतः उन्होंने मुख्यमंत्रीजी से इस संदर्भ में जरूर बात की होगी.


छात्रों द्वारा पथराव, तोड़फोड़, आगजनी करने और पेट्रोल बम फेंकने की घटनाओं को अंजाम देने के बाद पुलिस को बिगड़े हालात को काबू में करने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी और आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े, तब जाकर स्थिति भोर में लगभग तीन बजे के करीब नियंत्रण में आई. इस घटना के बाद विश्वविद्यालय को 2 अक्टूबर तक के लिए बंद कर दिया गया और परिसर में धारा 144 लागू कर दी गई.


ज़िला प्रशासन ने सावधानी के तौर पर बनारस के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को 2 अक्टूबर तक के लिए बंद करा दिया है, जबकि बीएचयू सहित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में 28 सितंबर से दशहरा की छुट्टियां शुरू होने वाली थीं. बीएचयू में हुए बवाल की मूल वजह जानने के लिए विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स का गहरा अध्ययन करना जरूरी था, इसलिए दो रोज मैंने बहुत से समाचारों को पढ़ा. आज इस विषय पर निष्पक्ष रूप से कुछ लिखने की स्थिति में खुद को महसूस किया तो ब्लॉग लिखने बैठ गया. सारे घटनाक्रम का अध्ययन करने के बाद मेरी समझ में यही आया है कि संवेदनहीनता, लापरवाही और राजनीति बीएचयू में हुए बवाल की मूल वजह है. पूरे घटनाक्रम पर यदि बारीकी से नजर डालें, तो यह बात पूरी तरह से स्पष्ट हो जाती है.


अखबार में छपी खबर के अनुसार 21 सितंबर को अपने विभाग से हॉस्टल जा रही दृश्य कला संकाय की एक छात्रा के साथ भारत कला भवन के पास कुछ युवकों ने न सिर्फ छेड़खानी कि थी, बल्कि उसके कपड़े खींचने तक की बेहद दुस्साहसिक हरकत भी की. हॉस्टल पहुंचने के बाद पीड़ित लड़की ने जब यह बात अन्य लड़कियों को बताई तो त्रिवेणी हॉस्टल की छात्राएं इस घटना के विरोध में रात में ही सड़क पर उतर आईं, लेकिन बीएचयू प्रशासन ने उन्हें समझा बुझाकर हॉस्टल में वापस भेज दिया.


अगले दिन शुक्रवार 22 सिंतबर को इस घटना के विरोध में सुबह छह बजे से छात्राओं ने सिंहद्वार पर धरना देना शुरू कर दिया. उनकी मांग थी कि कुलपति आकर उनकी बात सुन लें तो वे धरना ख़त्म कर देंगी, जबकि कुलपति अपने कार्यालय में छात्राओं के प्रतिनिधिमंडल से बात करना चाहते थे. पुलिस अधिकारियों ने कुलपति महोदय को समझाने की कोशिश की कि इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के आप अभिभावक हैं, अतः धरना देने वाली छात्राओं से चलकर बात कर लें. कुलपति ने उनकी बात नहीं मानी.


मामला तब आगे बढ़ना और बिगड़ना शुरू हो गया, जब धरना देने वाली छात्राओं के समर्थन में बीएचयू के छात्र भी एकजुट हो गए. छात्राओं की छेड़खानी के खिलाफ विरोध, धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी का यह पूरा मामला तब हिंसात्मक रूप ले लिया, जब शनिवार की रात को कुलपति आवास और महिला महाविद्यालय के सामने प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों और पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया.


बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कुलपति प्रोफ़ेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी कह रहे हैं कि दिल्ली और इलाहाबाद के कुछ अराजक तत्व आकर बीएचयू का माहौल ख्रराब किये. वे पूछते भी हैं कि आखिर असलहे और पेट्रोल बम बीएचयू में कैसे आये? धरना देने वाली छात्राओं का भी यही कहना है कि बाहरी छात्रों ने आकर माहौल ख़राब किया.


इस बात में सच्चाई नजर आती है. जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में चारों सीट पर लेफ्ट के छात्र संगठन और दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर कब्जा जमाने के बाद देशभर के विश्वविद्यालयों में लेफ्ट और कांग्रेस ने छात्रों के जरिये अपनी धूमिल पड़ती राजनीति को फिर से चमकाने की कोशिश शुरू कर दी है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर का अचानक वाराणसी आकर हिंसाग्रस्त माहौल में बीएचयू जाने की कोशिश करना यही दर्शाता है. सपा भी अंत में इसमें कूद पड़ी.


पूरे प्रकरण पर गौर करें तो बीएचयू के कुलपति प्रोफ़ेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी सबसे ज्यादा दोषी नजर आते हैं. उनकी संवेदनहीनता और लापरवाही से बीएचयू का माहौल ख़राब हुआ. बीएचयू में छेड़खानी होती है, यह एक कड़वी सच्चाई है. छेड़खानी के खिलाफ धरना देने वाली छात्राएं कुलपति से आग्रह करना चाहती थीं कि बीएचयू कैंपस में लड़कियों की सुरक्षा का वो पुख्ता इंतजाम करें. कैंपस में सभी जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाएं जाएं और रात्रि के समय जहाँ पर अन्धेरा रहता है, वहां पर लाइट की व्यवस्था की जाए. बीएचयू परिसर में आने-जाने वाले सभी लोंगो का पूरा रिकार्ड रखा जाए. किसी भी समय लड़कियों को कोई दिक्कत हो तो बीएचयू प्रशासन उनकी बात सुने और उन्हें तत्काल सुरक्षा मुहैया कराए, जो कि उसका कर्तव्य है.


छात्राओं की ये मांगें सही थीं. कुलपति और बीएचयू प्रशासन की यह ड्यूटी बनती है कि वो परिसर में रहने वाली छात्राओं को चौबीस घंटे वाली एक पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराएं. पूरे मामले में दोषी होने पर भी अपनी ऊँची राजनीतिक पहुँच के चलते कुलपति शायद ही दण्डित हों. दण्डित तो हमेशा बेचारे पुलिस वाले ही होते हैं, जो खराब माहौल को ठीक करने के लिए बुलाए जाते हैं और माहौल ठीक होने के बाद बलि का बकरा बनाकर पूरे घटनाक्रम के लिए दोषी भी घोषित कर दिए जाते हैं.



Tags:             

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

16 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

Neeraj Singh वीसी ही असली दोषी हैं।

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

आप की बात सही है। कमेनट देने के लिये धन्यवाद।

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

dhirendra chauhan त्रिपाठी महाराज ही दोषी सिद्ध होते हैं इनकी तरफ सरकार को ध्यान देना चाहिये !

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

आदरणीय धीरेन्द्र चौहान जी ! आपकी बात सही है है ! प्रतिक्रिया देने के लिये धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

jp singh बहुत सही लिखा है आपने. वास्तव मे अपने राजनीति के चक्कर मे यह घटना घटाई गयी है. मौका तलाशने वाले सफल हो गये. और बची रह गयी की यह कर लेते तो ऐसा ना होता वैसा ना होता.

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

आदरणीय सिंह साहब, पोस्ट से सहमति जताने के लिये धन्यवाद ! हालात अब सामान्य हो चुके हैं, लेकिन राजनीति अब भी जारी है ! ब्लॉग पर आने के लिये धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

Praveen Chauhan कुलपति महोदय को यह गवारा नही था की वह छात्राओ से बात कर ले क्या उनका कोई दाइतव्य नही है पूर्ण रूप से वह जिम्मेदार है जिन्होने माहोल को बिगड़ने दिये किस से शिकायत करे लड़किया अगर उनके साथ छेडखानी हो रही है पुलिस दबाब मे है आप उनको फ्री हेंड दो और फिर देखो की केसे वो उन छेडखानी करने वालो की खबर् लेती है बेटिया पुलिस वालो की भी है

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

आदरणीय प्रवीण चौहान जी ! आपकी बात से सहमत हूँ ! कुलपति अपने अहनकार मे चूर रहे ! थोड़ी संवेदनशीलता से काम लेते तो इतनी बड़ी घटना नही होती ! एन्टी रोमियो दल को बीएचयू मे घुसने की इजाजत ही नही है ! छात्र ही उसका विरोध करने लगेंगे ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

Ravinder Sudan आदरणीय सदगुरु जी,आपका विश्लेषन बहुत सही है. पुलिस वालों का देश में यह हाल है की रेप के बाद भी fir तक दर्ज नहीं करते. दिल्ली के रेयन स्कूल में भी दिल्ली पुलिस की भूमिका संदेहास्पद है.

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

आदरणीय रविन्द्र सूदन जी ! पोस्ट से सहमति जताने के लिये हार्दिक आभार ! पुलिस पर राजनीतिक दबाब रहता है ! वो निष्पक्ष ढंग से खुलकर काम ही नही कर पाती है ! पुलिस विभाग मे पुराने समय से चले आ रहे भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाब की वजह से पुलिस की भूमिका संदेहास्पद हो जाती है ! ब्लॉग पर समय देने के लिये सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

Amit Agarwal सर, देश बदलना चाहता है लेकिन मोदी एक इन्सान है, भगवान नहीं जोकि हर जगह अपनी नजर रख पाए| जो जिस जगह का मुखिया होता है उस पर वह के हालत की जिम्मेदारी होती है| लगता है कुलपति भांग खाकर या दारू पीकर सो रहे होंगे वर्ना आइसे स्तिथि पर उन्हें छात्राओ के सामने आना चाहिए था पर लगता है ये पड़े लिखे अनपद लोग अच्छे पदों पर बैठ गए है| अकेले मोदी लगता है क्या कर पाएंगे जब यहाँ हर शाख पर उल्लू बैठा है| योगी भी कुछ अलग नहीं है जैसे वो कुलपति वैसे योगी जो मोदी बनने की कोशिश कर रहे हो और गृहनगर में क्या हो रहा है उन्हें कुछ पता भी नहीं|

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

आदरणीय अमित अग्रवाल जी, आपकी बात से सहमत हूँ कि अकेले मोदी क्या कर पाएंगे, जब उनके नीचे वाले चापलूस, अहंकारी और भ्रष्ट जमात बैठी हो ! प्रशासनिक स्तर पर बड़े सुधार की जरूरा है ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

Khalid Khan•Khan समानतर वयवस्था मे यही होता है, किसी भी शासन मे विकेन्द्रीकरण बहुत महत्वपूर्ण होता है क्यूंकि सिर्फ मोदी ही कोई भी पीएम एक अकेला इंसान ही होता है जिसकी अपनी क्षमता होती है, इस लिये विकेन्द्रीकृत शासन मे राज्य,कमिश्नरी,ज़िला,तहसील,गांव / शह्‌र होते है और उनके अपने प्रशासक होते है जो की वयवस्था के लिये ज़िम्मेदार होते है, अब आते है समानान्तर व्यवस्था की तरफ की कुलपति जी को आभास था की उनको संघ का समर्थन प्राप्त है इस लिये ज़िला,राज्य, केन्द्रिय प्रशासन उनका कुछ भी नही बिगाड़ पायेगा, और इस ही विचार से वयवस्था अवयवस्था मे बदल गयी.

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

आदरणीय खालिद ख़ान जी ! आपकी बात बहुत हद तक सही है ! कुलपाई अपनी ईगो प्रोब्लम यानी अहनकार के कारण सिंहद्वार तक नही गये ओर बात बढ़ती चली गई ! प्रोफेसर केटी लहरी, जिन्हे मरीज भगवान मानता हैं, ऐसे व्यक्ति को कुलपति बनाना चाहिये ! सादर आभार !

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

Rajkumar kandu आदरणीय सद्गुरु जी ! हालिया ज्वलंत विषय पर आपका यह बेलाग निष्पक्ष लेखन अभिनंदनीय है । इस दुर्भाग्य पूर्ण घटना के पूरी तरह से जिम्मेदार कुलपति हैं । उनकी संवेदनहीनता , अकार्यक्षमता , व निष्क्रियता के अलावा उनके बचकाने बयानों ने माहौल को और खराब किया और स्थिति बिगड़ती गयी । विरोधियों को तो राजनीति करने के लिए मौके की तलाश रहती है और उन्होंने भी बहती गंगा में हाथ धोए इसमें कोई अचरज नहीं है लेकिन अचरज इस बात पर है कि वहीं मौजूद मोदीजी को सही स्थिति से अवगत नहीं कराया गया । और उनके मार्ग को बदल दिया गया । एक प्रधानमंत्री नहीं अपितु एक सांसद के नाते वहीं मौजूद मोदीजी का छोटा सा हस्तक्षेप स्थिति को बिगाड़ने से बचा सकता था । मोदीजी को इसका संज्ञान लेना चाहिए था । यह खुशी की बात है कि अब वहां हालात सामान्य हो चुके हैं । छात्राओं की जायज मांगों को माना जाना चाहिए । पुनश्च एक बार आपका धन्यवाद ।

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

आदरणीय राजकुमार कान्दु जी ! पोस्ट की सराहना के लिये धन्यवाद ! आपकी बात से सहमत हूँ कि धारणा की जानकारी मोदीजी को देनी चाहिये थी ! दरअसल मोदीजी विपक्षियों के साथ साथ भ्रष्ट और चापलूस जमात से भी लड रहे हैं, जो अपने को उनका सहयोगी कहते हैं, लेकिन उनके कारनामे मोदी की छवि को खराब करने वाले होते हैं ! छात्राओं की माँगों को कम से कम अब तो मान लो और अपनी गलती सुधारो ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !


topic of the week



latest from jagran