सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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सोशल मीडिया: गाली-गलौज करने वालों पर हो कार्रवाई

Posted On: 6 Oct, 2017 social issues में

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जायेंगे कहाँ, सूझता नहीं
चल पड़े मगर रास्ता नहीं
क्या तलाश है, कुछ पता नहीं
बुन रहे हैं दिल ख्वाब दम-ब-दम


सोशल मीडिया पर आज लिखने की इच्छा हुई तो कैफ़ी आज़मी साहब की फिल्म ‘कागज के फूल’ के लिए लिखे एक गीत की उपरोक्त पंक्तियाँ याद आ गईं. सोशल मीडिया की स्थिति इस गीत से बहुत कुछ मिलती जुलती है. लोग वहां जाकर टाइम पास कर रहे हैं या फिर कुछ तलाश रहे हैं, शायद ठीक से किसी को भी कुछ पता नहीं.


पूरी दुनिया भर के अनगिनत लोग सोशल मीडिया पर विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त करते हैं, अपनी व्यक्तिगत, पारिवारिक व अन्य कई तरह की तस्वीरें, संदेश और वीडियो आदि शेयर करते हैं और अपने रिश्तेदारों व परिचितों के साथ-साथ नए लोंगो से भी एक मंच पर जान-पहचान या कहिये दोस्ती करते हैं, जो कि फायदेमंद होने के साथ ही नुकसानदेह भी है.


आज इसी मुद्दे पर चर्चा करना चाहूँगा. सोशल मीडिया आज हमारे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक बहुत मजबूत आधार स्तम्भ बन गया है, इसलिए कोई नहीं चाहेगा कि ये बंद हो. मगर इसका उपयोग सभ्य भाषा में पूरे संयम और संतुलन के साथ हो, इसकी व्यवस्था भी जरूर होनी चाहिए.


हर सोशल मंच को अपने यहाँ पर शिष्टाचार, सद्भाव और अनुशासन कायम रखने के लिए स्वयं ही कुछ नियम बनाने चाहिए, जिसका पालन पूरी सख्ती के साथ होना चाहिए. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ गाली-गलौज और अफवाहें फैलाना नहीं होना चाहिए, जैसा कि सोशल मीडिया पर हो रहा है. सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कमेंट करने के मामले में IT एक्ट की धारा 66 A लगाने का प्रावधान था.


मगर कई बुद्धिजीवियों, वकीलों और NGO ने इस एक्ट को गैरकानूनी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से इसे खत्म करने की मांग की थी. साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कमेंट करने के मामले में लगाई जाने वाली IT एक्ट की धारा 66 A को रद्द कर दिया था और इसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)ए के तहत प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करार दिया था.


मगर इस वर्ष (2017) में 5 अक्टूबर को कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर गाली गलौज करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए. यह अच्छी बात है कि सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों और न्यायिक प्रक्रियाओं समेत सभी मुद्दों पर आक्रामक प्रतिक्रियाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीर है.


सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चिंता जताते हुए कहा है कि इस पर नकेल कसने के लिए नियम बनाना जरूरी हो गया है. सुप्रीम कोर्ट की चिंता और गंभीरता से तो यही साबित होता है कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कमेंट करने के मामले में IT एक्ट की धारा 66 A लगाने का प्रावधान सही था. अब इसे फिर से लागू किया जाना चाहिए.


अंत में सोशल मीडिया से जुड़ी एक बहुत बड़ी सच्चाई का जिक्र करना चाहूँगा कि बहुत से लोग अपने पारिवारिक प्रपंचों से तंग आकर किसी और की सहानुभूति पाने के लिए भावनात्मक रूप से बहुत ज्यादा सोशल मीडिया से जुड़ जाते हैं और प्यार की तलाश में बहुत से लोग धोखे या ठगी के शिकार हो जाते हैं. कैफी आज़मी ने फिल्म ‘अनुपमा’ के इस गीत में अच्छा सुझाव दिया है.


क्या दर्द किसी का लेगा कोई
इतना तो किसी में दर्द नहीं
बहते हुए आँसू और बहें
अब ऐसी तसल्ली रहने दो.



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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

amitshashwat के द्वारा
October 7, 2017

माननीय सद्गुरु जी, सोशल मीडिया पर लिखने में संतुलित रहना ही चाहिए.क्योंकि यह आम मंच है. इसका दुरूपयोग करके अनर्गल भाषा,विचार अथवा शब्द लिखने को प्रतिबंधित किया ही जाए. माननीय उच्चतम न्यायालय का रवैया सर्वथा उचित है. इसके लिए कानूनी तथा तकनिकी को जोड़ने हेतु कार्यपालिका के विभिन्न संगठनों में व्यापक समावेश की जरुरत है.

sadguruji के द्वारा
October 14, 2017

आदरणीय अमित श्रीवास्तव जी ! लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर तरह के मीडिया का सयंमित और संतुलित होना जरुरी है ! ब्लॉग पर समय देने के लिए धन्यवाद !

rameshagarwal के द्वारा
October 14, 2017

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरु जी सुन्दर भावना भरा लेख.सोशल मीडिया में दोस्ती प्यार सामल कर कर्नाचाइये.आये दिन सुनने में आता की लडकिय ज्यादातर मामले में धोखा खा जाती है लेकिन कुछ मामले में लड़के भी बहुतो के घर में पति पत्नी के बीच में सम्बन्ध ख़राब हो जाते क्योंकि दोनों को एकदूसरे पर संदेह हो जाता.प्रतिक्रिया छाए किसी के खिलाफ हो सभ्य भाषा में देनी चाइये.और धर्म के मामले में बहुत सावधानी बरतनी चाइये.

sadguruji के द्वारा
October 17, 2017

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रया देने के लिए धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी में भी आपकी बात से सहमत हूँ की सोशल मीडिया पर गाली गलौज और अफवाहों को फैलाने वालों पर कार्यवाही होनी चाहिये.

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी, पोस्ट के प्रति समर्थन जताने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

Ravinder Sudan आदरणीय सदगुरु जी,आपका कथन बिल्कुल सही है. आदरणीय राजकुमार जी की बात से सहमत हूँ कि राजनीतिक दल ने इसकी शुरुआत करके एक गलत परम्परा की शुरुआत की. बाकी दल क्यों पीछे रहें ? जब शुरुआत ऊपर से हो चाहे भ्रष्टाचार हो या या राजनीतिक हत्या इत्यादि तो पूरे देश में गंदगी फैलती है. किसी भी अच्छी चीज की शुरुआत ऊपर से होनी चाहिये. एक ऊपर वाले की गलत बातों का असर पूरे देश पर पड़ता है.

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

आदरणीय रविन्द्र सूदन जी ! आपसे सहमत हूँ कि अच्छी चीज की शुरुआत उच्च पदों पर आसीन लोंगो से होनी चाहिये, क्योंकि लोग उन्हे फॉलो करते हैं ! बहुत अच्छी प्रतिक्रिया देने के लिये धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

Rajesh Kumar सबका गला घोट दो सिर्फ सो कॉल्ड लुटियन निवसिओं ओर पत्रकार बिरादरी या राजनेताओं को ही कुछ भी बोलने का अधिकार दो यदि भारतीय लोग अपनी बाते इंटरनेट पे शेयर या एक्सप्रेस कर रहे हैं तो इससे कुछ खास किस्म के एलीट लोगो को कुंठा होती हैओर कोई मुझे बताये की क्यों लोगों मे इतना गुस्सा है क्यों अपनी बात दूसरों को पहुचने से कुछ भद्रजानो को ऐतराज़ हैएह वही लोग हैं जो जानवरो पे अत्याचार करे हैं गरीबों से नफरत करते हैं अपने पे गुरूर करते है पैसे का या अपनी शिक्षा का

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

आदरणीय राजेश कुमार जी, अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का समर्थन हम सब लोग करते हैं ! हम तो सोशल मीडिया पर गाली-गलौंज करने, अफवाहें फैलाने और आपत्तिजनक पोस्ट करने पर पाबन्दी लगाने की बात कर रहे हैं ! ब्लॉग पर आने के लिये धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

Rajkumar kandu आदरणीय सद्गुरु जी ! आपने आज बहुत अच्छा विषय चुना है चर्चा के लिए । आज सोशल मीडिया पहले से कहीं अधिक प्रभावी व मुखर हो गया है । मीडिया की प्रासंगिकता व उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए सभी राजनीतिक दलों ने अपने अपने it सेल की स्थापना कर दी है जो रात दिन अपने अपने दलों के हित को साधने की कोशिश में लगे रहते हैं । हालांकि इसकी शुरुआत मोदीजी ने ही की है और अब सभी राजनीतिक दल उनका अनुसरण कर रहे हैं । इन it सेल के सदस्यों का काम ही है विपरीत विचारधारा का प्रदर्शन करने वालों पर गाली गलौज सहित इतना शाब्दिक हमला कर दो कि उसकी अवस्था दयनीय हो जाये । इसके लिए भ्रामक आंकड़ों व फोटोशॉप किये हुए तस्वीरों का भी बेखौफ इस्तेमाल होता है । अश्लीलता से भी कोई परहेज नहीं होता । आपस में विचारों के आदान प्रदान व स्वस्थ बहस के माध्यम को भी कटुता व निर्लज्जता की हद तक इसका दुरुपयोग किया जाता है । इन सभी परिस्थितियों का संज्ञान लेते हुए सक्षम व संबंधित विभागों को इन बुराइयों पर अंकुश लगाने का प्रावधान करना चाहिए । सुंदर लेखन के लिए धन्यवाद ।

sadguruji के द्वारा
October 31, 2017

आदरणीय राजकुमार कान्दुजी 1 पोस्ट की सराहना के लिये धन्यवाद ! आपकी बात सही है कि सोशल मीडिया पर राजनीतिक विचारों के प्रचार-प्रसार की पाल मोदी जी ने की थी ! चर्चा स्वस्थ हो तो किसी को भी कोई परेशानी नही है ! सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने और आपत्तिजंक पोस्ट करने और गाली गलौज करने पर रोक लगनी ही चाहिये ! ब्लॉग पर समय देने के लिये धन्यवाद !


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