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केवल मोदी की कोशिश से भ्रष्टाचार नहीं मिटने वाला

Posted On: 1 Nov, 2017 Politics में

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आज सोचा भ्रष्टाचार पर चर्चा की जाए, जो कि हमेशा से ही हमारे देश का एक अहम् मुद्दा रहा है. इसी मुद्दे को लेकर कितनी सरकारें आईं गईं, लेकिन देश से भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं हुआ. ऐसा लगता भी नहीं है कि देश से भ्रष्टाचार कभी पूर्णतः ख़त्म होगा. एक खबर के अनुसार लोकलसर्कल नाम की एक वेबसाइट ने इंडिया करप्शन सर्वे (ऑनलाइन सर्वे) कराया, जिसमे देशभर के 200 से ज्यादा शहरों से एक लाख लोगों ने भाग लिया. इस सर्वे में भाग लेने वाले 10 में से पांच लोगों ने सरकारी अधिकारियों से अपने काम करवाने के लिए तथा 10 में से आठ लोगों ने स्थानीय स्तर पर जैसे कि पुलिस, नगर निगम, वैट और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन आदि से जुड़े मामलों में घूस देने की बात स्वीकारी है.


modi


सर्वे में पचास फीसदी भुक्तभोगी लोगों ने स्वीकार किया कि पिछले एक साल के अंदर उन्होंने कई बार घूस देकर अपना काम कराया. बहुत से लोगों को पीएफ, इनकम टैक्स, सर्विस टैक्स और रेलवे जैसे मामलों में रिश्वत देनी पड़ी. देश के अधिकतर लोग यही मानते हैं कि सरकारी विभागों में सिर्फ रिश्वत के जरिये ही काम करवाया जा सकता है. रिश्वत न देने वालों के काम किए ही नहीं जाते हैं या फिर सरकारी नियमों का हवाला देकर लम्बे समय तक लटकाए रखा जाता है.


मुझे इस सर्वे में पूरी सच्चाई नजर आती है. अभी हाल ही में अपने आसपास के कई लोगों से ही घूस देकर काम करवाने की बात मैंने सुनी. एक विधवा औरत को नगरनिगम में पीलाकार्ड बनवाने के लिए घूस देनी पड़ी. दो लोंगो के घर में चोरियां हुईं, चोर तो नहीं पकडे़ गए और न ही चोरी का माल बरामद हुआ, लेकिन उनके कई हजार रुपये चोर पकड़ने के लिए घूस देने में चले गए.


पूरे देशभर में निचले स्तर पर भ्रष्टाचार घटने की बजाय उल्टे बढ़ा ही है. आम लोगों की जिंदगी बढ़ते हुए भ्रष्टाचार ने और दूभर कर दी है. कई साल पहले मीडिया में पढ़ा था कि मुलायम सिंह यादव ने अपने बेटे अखिलेश सिंह यादव को कहा था कि आडवाणी जी का कहना है कि यूपी में करप्शन (घूसखोरी) बहुत है. आडवाणी जी बड़े नेता हैं. उनकी बात सही है. यूपी से करप्शन ख़त्म करो. उस समय अखिलेश सिंह यादव को मुख्यमंत्री बने कुछ अर्सा ही हुआ था. अखिलेश सिंह यादव ने जरूर कोशिश की होगी, लेकिन वो सफल नहीं हुए.


इस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ हैं. अब उनका कर्तव्य बनता है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी की पुरानी शिकायत पर ध्यान देते हुए प्रदेश में घूसखोरी बंद करें. मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ हर जनसभा में आजकल यही कह रहे हैं कि हमारी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त सरकार है. रिश्वत मांगने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उनकी संपत्ति भी जब्त कर ली जाएगी.


प्रदेश की जनता से वो खास अपील कर रहे हैं कि अगर कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत मांगता है, तो उसे रिकाॅर्ड कर लें और उन्हें अथवा जनप्रतिनिधियों को सूचना दें. भ्रष्ट कर्मचारिओं को न सिर्फ जेल भेजा जाएगा, बल्कि उनकी सम्पत्ति भी जब्त होगी. सब जानते हैं क़ि अरविन्द केजरीवाल जी का ईजाद किया हुआ भ्रष्टाचार मिटाने का यह फाॅर्मूला कितना फ्लॉप रहा. यूपी में भी इसकी यही गति होगी. देश से भ्रष्टाचार कभी पूर्णतः मिटेगा, ऐसा लगता नहीं है. निचले स्तर पर बहुत खूसखोरी है.


केवल प्रधानमंत्री मोदी के चाहने और कोशिश करने भर से देश से भ्रष्टाचार नहीं मिटने वाला है. इसके लिए प्रदेश सरकारों को भी दृढ संकल्प के साथ भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करनी पड़ेगी. प्रधानमंत्री की अथक कोशिश और दृढ इच्छाशक्ति का ही नतीजा है कि भारत ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैकिंग में साल भर में ही 130वें से उछाल मारते हुए 100वें नंबर पर पहुँच गया है. विश्व बैंक भी यह मानने लगा है कि मोदी सरकार भारत में भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन कर रही है और लंबित आर्थिक सुधारों को लागू करने के मामले में बहुत बेहतर काम कर रही है. देश में घूसखोरी कम होने से विदेशी निवेशक भारत में और अधिक कारोबार व पूंजी निवेश करेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं.



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sadguruji के द्वारा
November 2, 2017

सीएमएस-भारतीय भ्रष्टाचार अध्ययन 2017 के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों के दौरान पुलिस और न्याययिक सेवाओं जैसे कुछ लोक सेवाओं में भ्रष्टाचार में उल्लेखनीय कमी आई है. इस अध्ययन के मुताबिक देश भर में (20 राज्यों में) 2017 में परिवारों ने सार्वजनिक सेवाओं के लिये एक अनुमान के मुताबिक 6,350 करोड़ रुपये की रिश्वत दी, जबकि वर्ष 2005 में यह राशि 20,500 करोड़ रुपये थी. पिछले 12 वर्षों में पूरे देशभर में भ्रष्टाचार में कमी आई है. साल 2005 में 73 प्रतिशत लोग सार्वजनिक सेवाओं में भ्रष्टाचार बढ़ने की बात कहते थे, जबकि वर्ष 2017 में 43 प्रतिशत लोंगो ने ही यह कहा कि पिछले एक साल के दौरान सार्वजनिक सेवाओं में भ्रष्टाचार बढ़ा है.

sadguruji के द्वारा
November 2, 2017

सीएमएस-भारतीय भ्रष्टाचार अध्ययन 2017 के मुताबिक, ज्यादातर राज्यों में विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं को पाने के लिये 100 से 500 रुपये तक की और कई मामलों में दस रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक की रिश्वत दी गई. जिन सार्वजनिक सेवाओं में लोगों ने भ्रष्टाचार की बात मानी है उनमें सबसे ऊपर पुलिस सेवा है, जिसमे 34 प्रतिशत लोगों ने भ्रष्टाचार होने की बात कही है, इसके अलावा भूमि और आवास क्षेत्र में 24 प्रतिशत, न्याययिक सेवाओं में 18 प्रतिशत, कर के मामले में 15 प्रतिशत और सस्ता राशन के मामले में 12 प्रतिशत लोंगो ने भ्रष्टाचार की बात की है. करीब 25 प्रतिशत लोंगो ने पिछले एक साल के दौरन एक से दो बार तक घूस देने की बात स्वीकारी है.

sadguruji के द्वारा
November 2, 2017

Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी भ्रष्टाचार पर एक लेख लिखने का मन कब से था. आपने लिख दिया. मैने तो हमेशा कोशिश की कि घूस न दूं पर कभी कभी व्यवस्था के सामने लाचार भी हुआ हूँ. मैने अपने मकान का नक्शा पास करवाने के लिये घूस नही दी. 6 महीने तक नक्शा पास नही हुआ पर फिर भी मैने घूस नही दी. अंत में बिना घूस दिये नक्शा पास हो गया क्योंकि मेरा नक्शा नियमानुसार था. मकान बनाने के लिये लोन लिया था जब वह निरीक्षण पर आये तो मकान भी नक्शे के अनुसार ही बना था इसलिये वहां भी घूस नही देनी पड़ी. हमें भी नियम के अनुसार चलने की आदत डालनी चाहिये. तभी हम भ्रष्टाचार को कम तो कर ही सकते हैं.

sadguruji के द्वारा
November 2, 2017

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट से सहमति के लिये धन्यवाद ! आपने कई घरेलू मामलोंमे घूस न देने वाली जो बात कही है, वो बहुत प्रेरक और दिल को छुने वाली है ! आपसे सहमत हूँ कि हमे नियम के अनुसार चलने की आदत डालनी चाहिये, ताकि घूसखोरी बंद हो ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !


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