सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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sadguruji


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Rajkumar kandu• आदरणीय सद्गुरु जी ! बेहद दुर्भाग्य पूर्ण घटना गोरखपुर में घटी है जिसने पूरे देश के जनमानस को आंदोलित व हृदय को द्रवित कर दिया है । ऐसे दुख की घड़ी में भी सभी अपनी अपनी सुविधा की राजनीति कर रहे हैं यह देश का दुर्भाग्य ही है । बीस साल से गोरखपुर का ही प्रतिनिधित्व करनेवाले योगीजी भी इसकी जिम्मेदारी लेने से बचते दिखे । सबसे निराश मोदीजी ने किया । नीतीश के भाजपा का समर्थन लेने की घोषणा करने के पांच मिनट के अंदर ही ट्वीट करनेवाले मोदीजी इस घटना में अपनी संवेदना भी जाहिर करने से चुक गए । आपने पूरी घटना का बेहद सुंदर तरीके से विश्लेषण किया है । सुंदर व सटीक लेख के लिए धन्यवाद ।

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Indresh Uniyal• आदरणीय सदगुरु जी देश भर के सरकारी अस्पतालों की हालत किसी से छुपी हुई नही है. न वहां दवाइयाँ मिलती है, न ही डाक्टर और अस्पताल के करमचारी मरीजो से उचित व्यवहार करते हैं. हर काम रिश्वत या सिफारिस से ही होता है. कुछ समय पहले अनेक बार बंगाल में भी अनेक बच्चे मर गये थे. पर तब मीडिया ने इतना शोर नही किया था न ही हमारे ब्लॉगर बन्धु कुछ बोले थे. अब इस दुखद दुर्घटना पर राजनीति भी होने लगी है. सरकार की भी गलती है की जांच होने से पहले ही घोषित कर दिया की मौतें आक्सीजन की कमी से नही हुई. अभी पहले इंसेफ्लाइटिस विभाग के इंचार्ज डा कफील अहमद खुद को हीरो बनाने के चक्कर में कह रहे थे की उन्होने अपने पैसो से आक्सीजन सिलिंडर खरीदे. पर जब योगी आये थे इन्होने नही बताया की आक्सीजन सप्लाई करने वाली कम्पनी का भुगतान नही हो रहा है. तब तक भी कुछ मौतें हो चुकी थी पर यह भी नही बताया. फिर यह स्वयं निजी अस्पतालों में काम करके पैसा कमाते हैं क्योंकि इनकी गलती थी इसीलिये यह सिलिंडर खरीद रहे थे यह एक सच्चाई है.

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Rajkumar kandu• आदरणीय सदगुरु जी ! आपने दोनों ही घटना का वर्णन कर उनपर अपनी सटीक प्रतिक्रिया लिखते हुए सही सवाल उठाए हैं । पहली घटना में अपनी रईसी के गुरुर में चूर उस युवती को मासूम बालक तो नजर नहीं आया , उस मां की चीखें भी उस तक नहीं पहुंच पायीं । यह दुर्भाग्य पूर्ण है । उसकी जरा सी सावधानी उस मासूम को जिंदगी दे सकती थी । इंसानियत से पीछा छुड़ाकर घटनास्थल से भागने वाली उसकी गलती के बावजूद उसे तुरंत जमानत मिल जाना यही साबित करता है कि कानून में गरीबों के लिए कोई संवेदना नहीं बची है । यही कानून एक अफसर की बेटी से छेड़छाड़ की शिकायत मात्र से ही पूरी तरह मुस्तैद होकर उसकी जांच में लग जाती है जबकि देश भर में न जाने कितनी बहन बेटियां अत्याचार की शिकार होने पर भी रपट लिखवाने से भी वंचित रह जाती हैं । नेताओं के संवेदनहीनता का भी एक वाकया कल खबरों में चर्चित रहा जब अपने जिद्द के चलते एक विधायक ने बड़ी देर तक रास्ता जाम किये रखा और भीड़ में फंसी एम्बुलेंस में स्थित मरीज की इलाज के अभाव में वहीं मौत हो गयी । इन सभी घटनाओं पर गौर करते हुए यह कहा जा सकता है कि अब वक्त आ गया है जब कुछ कानूनों में संशोधन किया जाना चाहिए और उन्हें और सख्त बनाया जाना चाहिए । बेहद सुंदर लेख के लिए धन्यवाद ।

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Praveen Chauhan- भाई जी मीडिया केवल और केवल उन मुद्दो पर बहस करता है जिनमे उनके खुद के स्वार्थ छुपे होते है यह मीडिया अब केवल भोपू बन गया है जो की बिना पदताल के न्यूज़ को अपने अनुसार पेश करता है क्यो की इनका भी अपना एजेंडा तय होता है इनको भी तो उन नेताओ की चिरौरी करनी है उनके तलवे चाटने है अपने आप को बहुत बड समझते है देश की जनता को गुमराह करते है और खुद नेताओ के आगे पीछे घूमते है यह मीडिया के पाखंडी लोग इन के पास उस आम बच्चे के लिये फुर्सत क्यो होगी क्यो की उससे इनका कोई भी स्वर्ह सीध नही होता है पुराने साम्य मे धोकेबाज , विश्वासघाती , दगाबाज , गद्दार लोग थे जिन्होने इस देश मे अंग्रेजो को मदद दी , मुग़लो को मदद दी वही काम आज के रज नेता करते है एक से बढ़कर एक और फिर उसको जनता से जोड़ देते है

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आदरणीय रविन्द्र सूदन जी ! आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ने बिल्कुल सही बात कही है कि राज्यसभा की सीट रूठों को मनाने और पार्टी के बुजुर्ग न्र्ताओंको ठिकाने लगाने की शरण स्थली बन के रह गई है ! पैसे के बल पर भी रईस लोग राज्यसभा मे पहुंच रहे हैं ! आपने विजय माल्या का सटीक उदाहरण दिया है, जो भारत के बैंकों को दिवालिया बना कर विदेश भाग गया ! आपकी यह बात भी बिल्कुल सही है कि देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों का वितरण भी राज्यसभा के टिकटों की तरह ही होता है ! आपसे पूर्णत: सहमत हूँ कि कांग्रेस को फिर से मजबूत करने के लिये अब नेहरू इंदिरा परिवार से अलग हटकर एक नये नेतृत्व की जरूरत है ! ब्लॉग पर कीमती समय देने और ब्लॉग की सराहना करने के लिये हार्दिक आभार !

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Ravinder Sudan- आदरणीय सदगुरु जी, आपने बिल्कुल दुरुस्त फरमाया है और इंद्रेश जी की टिप्पणी भी सटीक है की अब राज्य सभा असंतुष्टों को मनाने आपनो को खुश करने का एक औजार हो गया है. सिर्फ राज्य सभा नही अब तो पद्म श्री पदभूषण, विभूषण, सीबीआई सेन्सर बोर्ड जैसे विभाग भी इसी तरह के काम के लिये उपयोग किये जा रहे हैं. एक रास्ता यह भी है मंजिलों को पाने का, सीख लो तुम भी हुनर हाँ में हाँ मिलने का .कई सदस्य लाखों रुपये लेकर एक बार भी राज्य सभा नही गये कई माल्या जैसे देश छोड़कर भाग गये, दूसरी ओर कांग्रेस है की अब भी अपनी जिद पर अड़ी है. कांग्रेस को सत्य का सामना करना चाहिये और सत्ता किसी आदित्य सिंधिया या किसी योग्य व्यक्ति के हवाले कर देनी चाहिये. ताकि बचे खुचे घर में ही रहें. बहुत सुन्दर सटीक व्याख्या ओर निष्पक्ष विवेचना के लिये बधाई.

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Indresh Uniyal- आदरणीय सदगुरु जी आपकी बात से सहमत हूँ. राज्यसभा को ब्रिटेन के संविधान के अनुसार हॉउस ऑफ लार्ड की तर्ज पर बनाया गया है. वैसे तो हमारा संविधान सिर्फ ब्रिटिश संविधान की कापी पेस्ट ही है भले ही संविधान सभा बनी हो या कोई संविधान निर्माता का ताज पहने. राज्यसभा में पहले तो गणमान्य व्यक्ति जाते थे, विभिन्न क्षेत्र के विषेषज्ञ जो चुनावी राजनीति नही लड सकते थे वह जाते थे. पहले पीलू मोदी, राजनारायण, फ़िरोज गाँधी, तारकेश्वरी सिन्हा जैसे अनेक विद्वान राज्यसभा के सदस्य थे. जो दलगत राजनीति से उपर थे. गंभीर चर्चा करते थे. पर आज अपनी पार्टी के जो चुनाव नही जीत पाते, या असन्तुस्टो को मनाने के लिये, बुजुर्गों को ठिकाने लगाने के लिये राज्यसभा का प्रयोग होता है. इसलिये राज्यसभा अपनी प्रासंगिकता खो चुकी है.

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जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी कांग्रेस बज पर आरोप लगा रही लेकिन क्या जब प्रदेश बाढ़ से ग्रस्तता उसके प्रतिनिधिओ का कर्णाटक में जा कर मौज करना कितना उचित था.बीजेपी को गली देने से कुछ नहीं होगा क्योंकि महाभारत में भगवन कृष्णा ने ही कहा रथ की दुस्मानो को हराने के लिए सभी हत्कंडे अपनाए जाने चाइये. वैसे देश की सभी बुराईयों के जिम्मेदार कांग्रेस ही है क्योंकि उसने ही शुरू किया है सता सुख का खेल.ऍअभी मामला सर्वोच्च न्यायालय जाएगा तब देखिये क्या होगा लेकिन पटेल जी कोइ दूध के धुले नहीं सोनिया के सारे दुस्कर्मो के लिए वेही ज़िम्मेदार है यदि आज हमारा देश इतने साधन होते भी बहुतो से पीछे है उसका कारन राजनातिक और निजी जीवन में बेईमानी है. भ्रष्टाचार और कामचोरी हम लोगो की आदत हो गयी.सुन्दर लेख के लिए साधुवाद.

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आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! सादर अभिनन्दन ! बधाई देकर अच्छा लिखने के लिये प्रोत्साहित करने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद ! आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर बहुत भावुक हो गया ! वो दिल को छू गई !आप लोग तीनो भाई और आप लोंगो का पूरा परिवार अपनी बड़ी दीदी का जितना ख्याल रखता है, उसकी जितनी भी तारीफ की जाए वो कम है ! आप लोंगों को सैल्यूट करना चाहिये ! बहन जैसी भी हो, संकट और मुसीबत मे उसका साथ देना भाई का फर्ज है ! इस बात को आप लोंगों ने व्यावहारिक धरातल पर चरितार्थ कर दिया है, जो असम्भव नही तो बहुत कठिन जरूर है ! अनुभवगम्य, सार्थक, विचारणीय और पठनीय प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार ! रक्षाबन्धंन की बधाई और बहुत बहुत शुभकामनाएं !

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Indresh Uniyal• आदरणीय सदगुरु जी रक्षाबन्धन के अवसर पर एक बेहतरीन लेख के लिये बधाई. हमारी भी बचपन की यादें ताज़ा हो गयी. मेरी बड़ी बहन मुझे 9 वर्ष बड़ी है. आज वह 70 वर्ष से कुछ ही कम है. वह मुझे बता रही थी की मुझसे बड़ा भाई तो उसे धमकाता रहता था. पर क्योंकि में बहुत छोटा था इसलिये मेरी दीदी मुझे कभी खड़ा होने फिर बैठने कभी कान पकड़ने के लिये कहती थी और में डरकर उसका कहना मानता था. तो बहन को लगता था चलो कोई तो है जो उससे भी डरता है और वह खुश होती थी. मुझे तो यह सब याद नही है पर यह सुनकर मुझे भी बड़ा मजा आया. आज मेरे माता पिता नही है. घर में सबसे बड़ी वही बहन है. वह जन्म से ही विकलांग भी थी, बुद्धि में भी कमजोर थी पर मेहनती थी. आज हम तीनो भाई उसका बहुत ख्याल रखते है. वह विधवा भी है और कोई औलाद भी नही है. पर उसे बचपन से ही पिता का सबसे अधिक प्यार मिला. आज भी घर में हम उसे माता पिता का ही सम्मान देते है. अब वह ढंग से देख भी नही सकती, सुन भी नही सकती चलने में भी लगभग असमर्थ है. पर उसे सम्मान पूरा मिलता है उसकी हर इच्छा को हम समझते हैं और उसके बोलने की नौबत नही आती की उसे क्या चाहिये हर चीज देने का हस सभी भाई प्रयास करते हैं.

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Ravinder Sudan• आदरणीय सद्गुरु जी, रक्षाबंधन पर पुरानी यादें ताज़ा करने के लिए बहुत धन्यवाद । राजकुमार भाई साहब जी ने टिपण्णी देकर सोने में सुहागा का काम किया है और रेडियो के दिनों की याद ताज़ा करवा दी । पहले जब यह गाने त्योहारों के दिन लाउड स्पीकरों पर बजते थे तो दिल खिल जाता था और त्यौहार से ज्यादा गाने सुनने के कारण मन अति प्रसन्न हो जाता था । भाई साहब का कथन सोलह आने सच है की अब समय बदल गया है न अब ऐसे सदाबहार नगमे लिखे जा रहे हैं और न ही अब वो हर्ष और उल्लास समाज में नजर आता है । मेरी माँ बताती थी की एक बार रक्षाबंधन पर उनके भाई ने कह दिया की बहने तो पैसे के लिए राखी बांधती हैं , उस दिन से मेरी माँ ने राखी बांधना छोड़ दिया था । आजकल तो वैलेन्टिन डे, फादर्स डे, मदर्स डे अधिक महत्वपूर्ण हो गया है । साल में एक दिन माँ बाप को याद करो । विदेशों में फूलों वाली कंपनी को फ़ोन करके माँ या बाप को फूल भेज दिए जाते हैं और कर्तव्य की इतिश्री हो जाती है । यह तरीका अपने देश में भी बहुत पसंद किया जाने लगा है ।

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आदरणीय राजकुमार कान्दु जी ! सादर अभिनन्दन ! जी.. आप ठीक कह रहे हैं ! बचपन की याद आई, खासकर रक्षाबन्धन की तो यह ब्लॉग लिखते चला गया ! आपने बिल्कुल ठीक कहा है कि वो रेडियो का युग था और रक्षाबन्धन के दिन सुबह से ही राखी से जुड़े गीत बजने शुरु हो जाते थे ! खासकर यह गीत तो बहुत मशहूर था- भैया मेरे, राखी के बंधन को निभाना भैया मेरे, छोटी बहन को न भुलाना देखो ये नाता निभाना, निभाना भैया मेरे... विविध भारती अब भी इस परमपत्रा को जीवित रखे हुए है ! हाँ, यह बात सच है कि टीवी और एफ एम का युग आने से रेडियो और आकाशवाणी के परम्परागत स्टेशनों को भारी क्षति पहुंची है ! उन्हे भी अब एफ एम पर जगह दे देनी चाहिये ! आपकी इस बात से भी सहमत हूँ कि रक्षाबन्धन पर्व पर अब पहले जैसा हर्ष और उल्लास नजर नही आता है ! आजकल तो भाई बहन के प्रेम मे भी स्टेटस हावी हो गया है ! कई भाई हैं तो गरीब भाई के घर बहन जाने से बचती है, क्योंकि वहा पर बहुत ज्यादा सुख सुविधा नही है या फिर कुछ खास गिफ्ट या धन मिलने की उम्मीद नही है ! पोस्ट की सराहना कर उसे सार्थकता प्रदान करने के लिये और ब्लॉग पर कीमती समय देने के लिये हार्दिक आभार !

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Rajkumar kandu- आदरणीय सद्गुरुजी ! रक्षाबंधन के पावन प्रसंग पर लिखा आपका यह अप्रतिम लेख बचपन की याद दिला गया । पहले कोई भी त्योहार हो लोग उसके आगमन की राह ताकते थे और उसे मनाने के लिए उत्साहित रहते थे । लोगों का उत्साह बढ़ाने में रेडियो भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाती थी । सुबह से ही भाई बहन के प्रेम से सराबोर फिल्मी नगमे रेडियो पर गूंजने लगते थे और लोग इन सदाबहार नग्मों का लुत्फ उठाते थे । आपने जिन गानों का जिक्र किया है इन नग्मों के दीवानों की संख्या अनगिनत होती थी । अब समय बदल गया है न अब ऐसे सदाबहार नगमे लिखे जा रहे हैं और न ही अब वो हर्ष और उल्लास समाज में नजर आता है । भाई बहन के प्रेम का प्रतीक यह त्योहार भी अब लोगों के लिए धीरे धीरे औपचारिकता मात्र बनते जा रहा है । अपने रीतिरिवाजों से विमुख हो रही युवा पीढ़ी को इनसे जुड़े रहने की प्रेरणा देने के लिए ऐसे सुंदर लेखों की अत्यंत आवश्यकता है । इस नेक कार्य के लिए तथा सुंदर लेखन के लिए आपका धन्यवाद ।

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Indresh Uniyal• आदरणीय सदगुरु जी बहुत ही सुन्दर लेख. वैसे नेताओं की अंतरात्मा होती ही कहाँ है? इस शब्द का दुरुपयोग वह अपनी सुविधानुसार करते है. मेरी जानकारी में राजनीति मे सबसे पहले इंदिरा जी ने अपनी ही पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी को हरवाने और निर्दलीय उम्मीदवार वी वी गिरि को जिताने के लिये किया था. फिर इस अंतरात्मा की आवाज को फिर से जगाने की कोशिश इस राष्ट्रपति चुनाव में मीरा कुमार ने की, अब नीतीश बाबू भी कह रहे हैं की उनकी अंतरात्मा जाग गयी. पर जब वह भ्रष्ट लालू से गठबन्धन किये थे तब अवश्य उनकी अंतरात्मा सोई हुई होगी. नीतीश कुमार जान गये है की अब वह प्रधानमंत्री नही बन सकते, उधर लालू, राबडी और उनकी पार्टी के नेता बार बार बयान दे रहे थे की अब नीतीश कुमार बूढ़े हो गये हैं और युवा तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिये. बिहार विधानसभा चुनाव में जब राजद को जेडीयू से अधिक सीटें मिली थी तब ही मैने लिख दिया था की यह गठबन्धन टूट जायेगा क्योंकि कुछ समय बाद लालू सत्ता अपने हाथ में हो यह चाहेंगे. वही हुआ भी है.

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shirsh Khare बेहद सुन्दर लेख और आपके लेख के मध्यम से याद आया की सभी सदियो के महान गायक मुकेश साहेब की जन्मतिथि निकल गयी और कही कुछ पता तक नही चला मुकेश साहेब के गाने हम सभी छात्रगण अपने कॉलेज के समय मे सुनते और गुनगुनाते रहते थे मुकेश साहेब के गाने मन को शान्ती देते थे/ देते है और देते रहेंगे. आज जब कही पर कोई भी गीत सुनते है मुकेश साहेब के तो 90 के दशक मे अपने महाविध्यालय के दोस्तो के साथ बिताये हर लम्हे जीवित हो जाते है क्योकि हम सभी दोस्तो की पहली पसंद मुकेश साहेब ही थे और हर उत्सव का शुभारम्ब और समाप्ति मुकेश साहेब से ही होता था अब दोस्त देश विदेश मे बस गये और साथ रह गयी है वो सुनहरी यादे मुकेश साहेब और उनके महान गीत धन्यवाद आपका इस लेख के लिये.

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भाजपा ने धारा 370 का हमेशा विरोध किया है. कश्मीर में अलगाववाद के फलने-फूलने की मूल वजह भाजपा इसे ही मानती है, इसलिए इसको निरस्त किए जाने की मांग पर अड़ी रही है. आज केंद्र और राज्य दोनों ही जगह भाजपा सत्ता पर काबिज है, लेकिन अनुच्छेद 370 और 35 ए के मुद्दे पर राज्यसभा में पर्याप्त बहुमत न होने का बहाना कर चुप्पी साधे हुए है. जम्मू-कश्मीर राज्य के विशेष दर्जे को समाप्त करने का भाजपा के पास एक स्वर्णिम अवसर है, जिसका उसे फायदा उठाना चाहिए और नेहरू की उस ऐतिहासिक भूल को सही करना चाहिए, जिसके लिए वे भी आजीवन पछताते रहे. एक ऐसी गलती जिसने कश्मीर में न सिर्फ अलगाववाद को बढ़ावा दिया है, बल्कि जम्मू-कश्मीर राज्य में दोहरी नागरिकता पाकर रहने वाले नागरिकों और भारत के अन्य राज्यों में रहने वाले नागरिकों के बीच नफरत और भेदभाव की खाई भी चौड़ी की है.

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Ravinder Sudan आदरणीय सदगुरु जी , बहुत अच्छे विषय पर साहिर लुधियानवी के बहुत अधिक सच्चे, सुन्दर बोलों को उद्घृत करते हुए एक अनमोल लेख । इसी सन्दर्भ में मैं धूल का फूल फिल्म की पंक्तियाँ साझा करना चाहता हूँ । तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है इंसान बनेगा । अच्छा है अभी तक तेरा कुछ नाम नहीं है तुझको किसी मजहब से कोई काम नहीं है । तू बदले हुए वक़्त की पहचान बनेगा । मालिक ने हर इंसान को इंसान बनाया हमने उसे हिन्दू या मसलमान बनाया । कुदरत ने तो बख्शी थी हमें एक ही धरती हमने कहीं भारत कहीं ईरान बनाया । नफरत जो सिखाये वो धरम तेरा नहीं है इंसां को जो रोंदे वो कदम तेरा नहीं है । कुरआन न हो जिसमें वो मंदिर नहीं तेरा गीता न हो जिसमें वो हराम तेरा नहीं है । आज या हजारों साल से धरम जोड़ता कम और तोडता ज्यादा रहा है. जहाँ से धर्म खत्म होता है वहां से आध्यात्मिकता की शुरुआत होती है. जीसस क्रिस्चियन नहीं थे, बुद्ध बुद्धिस्ट नहीं थे, नानक सीख नहीं थे मुहम्मद मुस्लिम नहीं थे. जब धर्म के ठेकेदारों के हाथ धर्म लग गया तो जैसे बंदर के हाथ उस्तरा आ गया. अब समय है अपने नाम के साथ सरनेम खत्म हो.

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राम कोई व्यक्ति नही ब्लकि हर व्यक्ति के भीतर रमने वाले ब्रह्म हैं, जिन्हे सूफ़ियों ने रहीम भी कहा है ! संत कबीर ने कहा है- वही राम दशरथ का बेटा, वही राम घट घट मे लेटा, उसी राम का जगत पसारा, वही राम है सबसे न्यारा ! वह राम आपके भीतर भी है ! राम के बार मे अधिक जानने के लिये रामचरित मानस पढ लें ! उसमे कहा गया है- राम ब्रह्म परमारथ रूपा। अबिगत अलख अनादि अनूपा॥ सकल बिकार रहित गतभेदा। कहि नित नेति निरूपहिं बेदा॥ भावार्थ श्री रामजी परमार्थस्वरूप (परमवस्तु) परब्रह्म हैं। वे अविगत (जानने में न आने वाले) अलख (स्थूल दृष्टि से देखने में न आने वाले), अनादि (आदिरहित), अनुपम (उपमारहित) सब विकारों से रहति और भेद शून्य हैं, वेद जिनका नित्य 'नेति-नेति' कहकर निरूपण करते हैं॥ राम और रहीम मे कोई फर्क नही है, लेकिन मन गंदा हो जाये तो फर्क दिखने लगेगा ! राम और रहीं का आदर करने वालों को सबसे पहले किसी इंसान का आदर करना चाहिये, क्योंकि इंसान सबसे पहले और सर्वोपरि है ! वो माने तो सबकुछ है और न माने तो कुछ नही !

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दर्द भरे नगमों के बेताज बादशाह मुकेश साहब की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वो अपने गाये हुए संवेदनशील गीतों की तरह ही अपनी निजी ज़िंदगी में भी बेहद संवेदनशील इंसान थे. दूसरों के दुखदर्द को वो अपना समझते थे और उसे दूर करने का भरसक प्रयास भी करते थे. उनकी संवेदनशीलता और महानता के कई किस्से मशहूर हैं. एक बार अस्पताल में एक लड़की बहुत बीमार अवस्था में भर्ती थी. उसकी बिमारी दिनोदिन बढ़ती ही जा रही थी और कोई दवा उस पर काम नहीं कर रही थी. सेवा में दिनरात लगी अपनी मां को बहुत चिंतित देख एक दिन लड़की ने अपनी मां से कहा कि मां मै ठीक हो सकती हूँ. बस आप मुकेश को बुला दीजिए. उनसे अपनी पसंद के गाने सुनूँगी और ठीक हो जाउंगी.

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बीमार लड़की की मां अपनी बेटी की बात सुन उदास और परेशान हो गई. वो अपनी बेटी को समझाने लगी कि मुकेश साहब बहुत बड़े और व्यस्त गायक हैं. वो तुम्हारे लिए भला समय कहाँ से निकाल पाएंगे और यदि समय निकालकर यहाँ आ भी गए तो गाने के लिए काफी पैसे मांगेंगे. हम उन्हें इतना पैसा कहाँ से देंगे? मां की बात सुन उसकी बीमार बेटी खामोश हो गई, लेकिन उस लड़की की इच्छा जब डॉक्टर को पता चली तो उसने मुकेश को फोन करके उस लड़की बीमारी और इच्छा के बारे में बताया. मुकेश अपनी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद भी समय निकालकर आये और बीमार लड़की को उसकी पसंद के गीत सुनाए. उन्होंने कुछ भी पैसा नहीं लिया और लड़की को खुश देख खुश हो उठे.

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अब सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि बलात्कार अब हमारे देश में हवस मिटाने का ही नहीं, बल्कि मनोरंजन का भी एक साधन बनता जा रहा है. बलात्कारियों को इस बात की कोई परवाह नहीं कि कोई मासूम, नाबालिग, बालिग़ अथवा वृद्ध महिला बेहोश और लहूलुहान है या फिर उनकी वहशी हैवानियत से वो दर्द के मारे चीखते-चिल्लाते हुए दम तोड़ चुकी है. परमात्मा के दिए हुए अनमोल जीवन की ऐसी बेकद्री और राक्षसी बर्ताव करते हुए उसका अति क्रूर तरीके से अंत कर देना ऐसा अक्षम्य अपराध है, जिसके लिए बलात्कारियों को चाहे फांसी की सजा दी जाए या फिर उन्हें गोली मारी जाए, वो कम ही है. बलात्कारियों को सार्वजनिक रूप से और शीघ्र से शीघ्र दंड देना चाहिए.

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Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी बलात्कार के खिलाफ कड़े कानून बन चुके हैं निर्भया काण्ड के बाद. अदालतें फांसी की सजा भी देने लगी है. पर फिर भी यह घिनौना कुकृत्य रुक नही रहा. मेरे विचार में इसका कारण यह है की अनेक दुराचारी यह समझते हैं की पीईदित शिकायत ले कर पुलिस के पास नही जायेगा. फिर पुलिस को भी सैट कर सकते हैं यह भी वह समझते हैं और गलत भी नही समझते. अनेक बार ऐसा होता भी है. विशेष कर गरीब महिला के साथ अगर दुराचार हुआ हो और दुराचारी पैसे वाला हो तो. जरूरत है की पुलिस संवेदन शील बने और सही विवेचना करके अपराधी को जल्द से जल्द कानून के कटघरे में लाये. वकील भी केस को लम्बा खींचते हैं जिससे गवाह पर दबाब बनता है. लंबे समय के बाद जब गवाही होती है तो वकील गवाह को भरमाने में सफल हो जाते हैं और अपराधी को बचा ले जाते हैं जिसके बदले में उन्हे मोटी फीस मिलती है.

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Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी आज़म ख़ान तो पहले से ही इस प्रकार के बोल बोलते रहते हैं, कारगिल युद्ध मुसलमान सिपाहियों ने जीता कहकर इसने सेना मे भी धर्म ढूंढ लिया. इससे पहले देश के मुसलमानो के लिये एक और बन्टवारे की बात कई वर्ष पहले कह चुके हैं. इससे पहले जो आरोप सेना पर आज़म ख़ान ने लगाये वह वामपंथी नेता और विशेषकर कविता कृष्णन एन डी टी वी पर हमेशा लगाती रही है. मेरी समझ में आज तक यह नही आया की इन पर देशद्रोह की कार्यवाही क्यों नही हो सकती. कुछ नेता कुछ भी बोल कर सॉफ बच निकलते हैं. केस भी दर्ज नही होता. ऐसे मामले मे तो सरकार और प्रशासन को खुद सन्ज्ञान ले कर मुकदमा दायर कर देना चाहिये. अदालत भी अनेक मामलों पर स्वत: सन्ज्ञान लेती है पर नेताओं के बयानों पर अदालत भी चुप रहती है.

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यह बात सही है कि इनकम टेक्स देने वालों की संख्या सिर्फ 32 लाख ही नहीं, बल्कि बहुत ज्यादा है, लेकिन उसमे टेक्स देने की बजाय आयकर रिटर्न भरने की क़ानूनी ओपचारिकता निभाने वाली बात ही ज्यादा है ! एक नवीनतम आंकड़े के अनुसार भारत में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्‍या अब बढ़कर 7.4 करोड़ हो गई है ! इनमे अधिकतर संख्या उनकी है, जो कोई कर नहीं देते हैं ! एक आंकड़े के अनुसार साल 2012-13 में कुल 2.87 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न दायर किए लेकिन उनमें से 1.62 करोड़ ने कोई कर जमा नहीं कराया ! इस तरह कर भुगतान करने वालों की संख्या करीब 1.25 करोड़ ही थी जो देश के 125 करोड़ जनसंख्या के महज़ एक प्रतिशत के बराबर है ! वार्षिक 100 से 500 करोड़ रुपये की आमदनी वाले वर्ग में महज तीन लोगों ने 437 करोड़ रूपये के कुल कर का भुगतान किया ! इन आंकड़ों से बड़ी सरलता से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में मध्यम वर्ग से लेकर उच्च आय वर्ग तक में इनकम टेक्स की चोरी कितनी ज्यादा है !

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आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपकी बात सही है कि देशद्रोहियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होते ही मीडिया और मोदी सरकार विरोधी नेता एकजुट होकर चिल्लाते हैं, लेकिन कार्यवाही तो होनी ही चाहिये क्योंकि मोदी सरकार राष् ट्रीय सुरक्षा को लेकर आम जनता के प्रति जबाबदेह है न कि गद्दारों और देशद्रोहियों के प्रति ! कोई टीवी चैनल भी यदि कहीं पर गलत है तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिये ! कई लोग कह रहे हैं कि मामूली रकम के लिये एक टीवी चैनल के मालिक के खिलाफ कार्यवाही हुई ! बताइये 48 करोड़ की रकम मामूली है, जबकि दस बीस हजार के लोन पर आम आदमी के खिलाफ कानूनी रूप से सूद व्याज सहित वसूली हेतु आरसी काट दी जा रही है ! मीडिया के नाम पर लूटपाट और मनमानी की हद हो गई ! ऐसे लोंगों के खिलाफ जरूर कार्यवाही होनी चाहिये ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय सदगुरु जी, आपको कड़वा सच बताने के लिये बहुत बहुत बधाई. ढील देने का नतीजा सबने देख लिया. नतीजा बताता है सरकार की नीतियाँ गलत हैं. यह सरकार ऐक्शन तो लेती है पर उन पर जो इनके खिलाफ फैसबूक पर लिखते हैं तब पूरी माशीनरी पूरे जोर शोर से कार्यवाही करती है. सेनाध्यक्ष या सेना पर कोई भी उलूल जुलूल बके नेताओं को कोई फर्क नहीं पड़ता. इनके खिलाफ बोलोगे तो cbi या इनकम टॅक्स में फसा दिये जाओगे. पाकिस्तान पर मेहरबानियाँ किये जाओ उनके कैदियों को अपने कैदियों से ज्यादा तवज्जो दो यही कारण है की पाकिस्तान कहता है हमारे कैदी अपनी सजा पूरी कर चुके थे. (आपने कोई एहसान नही किया) खुद पाकिस्तान हिन्दुस्तान के कैदियों की सजा पूरी होने के बाद भी नहीं छोड़ता, उसे भारतीय नेताओं की मानसिकता अच्छी तरह से पता है

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आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! आप इस विषय हमेशा लिखते रहते हैं ! हमलोग इस उम्मीद से थोड़ा इंतजार कर रहे थे कि मोदी सरकार देशद्रोहियों के खिलाफ देरसबेर कार्यवाही जरूर करेगी ! लेकिन तीन साल बीत जाने पर भी इस मामले मे उसने कुछ नही किया ! अब हमलोग भी जो सच है, उसे लिख रहे हैं और लिखना भी चाहिये ! मेरे लिये देश से ज्यादा प्रिय और सर्वोपरि कोई भी नही है ! आपकी इस बात से पूर्णत: सहमत हूँ कि मोदी सरकार आने वाले दो साल मे भी अगर देशद्रोहियों के खिलाफ कोई सख्त कार्यवाही नही करती है तो देश की जनता 2019 मे उसे माफ नही करेगी ! पोस्ट की सराहना के लिये और ब्लॉग पर अनमोल समय देने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय तरुण शर्मा जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! पोस्ट की सराहना के लिये हार्दिक आभार ! मोदी सरकार न तो कश्मीर मे और न ही देश के अन्य भागों मे देशद्रोही तत्वों के खिलाफ कोई सख्त कार्यवाही कर रही है ! पाकिस्तान के खिलाफ भी उसकी नीति कठोरता की बजाय दयालुता वाली ही है ! चाहे आतंकी हों या नक्सली, राष्ट्र के ये मुख्य विद्रोही तो दिन पर दिन बढ ही रहे हैं, इसके साथ ही इनका समर्थन करने वाले और राष्ट्र के खिलाफ, सेना और सेनाध्यक्ष के खिलाफ बोलने वाले भी दिनोदिन बढते ही जा रहे हैं ! मोदी सरकार ऐसे देशद्रोही तत्वों से निपटने मे अब तक तो नाकाम ही रही है ! अब शेष बचे दो साल मे वो क्या करती है, यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा ! पोस्ट से सहमति व्यक्त करने और प्रतिक्रिया देने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद !

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आदरणीय जीतेन्द्र अग्रवाल जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट को पसंद कर आपने उसे जो महत्ता और सार्थकता प्रदान की है, उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद ! मोदी के शासन मे एक तो देशद्रोही तत्व खुल के अपना राष्ट्रविरोधी कार्य नही कर पा रहे हैं, दूसरे बीजेपी और मोदी से चिढ के कारण भी देशद्रोहियों की भरमार हो गई है ! मोदी विरोधियों का उन्हे भरपूर समर्थन भी मिल रहा है ! आपकी इस बात से पूर्णत: सहमत हूँ कि देश के खिलाफ शर्मनाक बयान देने वालों और देश तोड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ मोदी सरकार ने अब तक ऐसी कोई भी सख्त कार्यवाही नही की है, जिससे बाकियों को सबक मिले ! देखिये अब वो अपने शेष बचे दो साल मे क्या करती है ! नही कुछ करेगी तो 2019 मे उसका परिणाम भी भुगतेगी ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय खालिद ख़ान जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आलोचना कीजिये, उस पर कहन आपत्ति है, लेकिन किन्तु संवैधानिक पदों पर बैठे लोंगो की अवमानना करना भारत ही नही, बल्कि सभी देशों मे कानूनन जुर्म है. दुनिया के सभी मुल्कों मे मुल्क की, राष्ट्रपति की, उपराष्ट्रपति की, प्रधानमन्त्री की, न्यायाधीश की, सेनापति की और सेना की अवमानना करना कानूनन जुर्म है ! सेनापति को सड़क का गुंडा कहना और जनरल डायर से तुलना करना अवमानना है ! सेना और प्रधानमन्त्री के संदर्भ मे 'खून की दलाली' शब्द का इस्तेमाल करना भी सेना की अवमानना के अंतर्गत आता है ! यह प्रधानमन्त्री की भी अवमानना है ! भारत के कानून की ही बात हो रही है ! आपको मालूम होगा कि पाकिस्तान सहित बहुत से मुल्कों मे ईश्वर की आलोचना करने यानी 'ईश निन्दा' की सजा मौत है ! अपने मुल्क और सेनाध्यक्ष की निन्दा करना ईश्वर की निन्दा करने से भी कहीं ज्यादा बड़ा जुर्म है ! भारत मे बोलने की आजादी है, लेकिन आप कुछ भी बोलिये, ऐसा नही है ! सरकार ऐसे लोंगों पर कानूनी कार्यवाही कर सकती है, जिनके बयानों की चर्चा की गई है ! ब्लॉग पर समय देने के लिये धन्यवाद !

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Rajeev Gupta आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, हाई कोर्ट के माननीय जज ने इस तरह का फैसला सुनाकर देश मे मौजूद सभी नकली सेकुलर लोगों को आइना दिखाया है. आज देश को इसी तरह के जजों की जरूरत है. हर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट मे भी इसी तरह के योग्य जजों की नियुक्ति होनी चाहिये. गाय की हत्या करके उसके मांस का भक्षण करने वाले राक्षसों का सामाजइक बहिस् कार होना चाहिये. ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग भी गाय के प्रति हिन्दुओं की आस्था का समर्थन करते हैं लेकिन कुछ नकली सेकुलर राजनेता ( जिनमे हिन्दू ही ज्यादा हैं) अपनी वोटों की राजनीति के लिये गौ माता का लगातार अपमान कर रहे हैं, जनता इन लोगों को पहले भी दंडित कर चुकी है और आगे भी दंडित करती रहेगी. आपने इस विषय पर ब्लॉग पेश करके पाठकों को एक शानदार जानकारी दी है. उसके लिये आपका अभिनन्दन एवं बधाई.

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भारतीय पुरुष हॉकी टीम रविवार को वल्र्ड लीग सेमीफाइनल्स 2017 के अपने तीसरे पूल मैच में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 7-1 से करारी मात दी. 'हॉकी इंडिया' के खिलाड़ियों ने पाकिस्तान से शानदार ढंग से मैच जीतकर 125 करोड़ हिन्दुस्तानियों का दिल तो जीता ही, इसके साथ ही उन्होंने हमारे सैनिकों के प्रति गहरी संवेदना और प्रशंसनीय सम्मान दिखाकर हिन्दुस्तानियों का माथा गर्व से ऊंचा कर दिया. सीमा पर पाकिस्तानी हमलों में शहीद हुए सैनिकों के लिए शोक संवेदना और पाकिस्तान के प्रति अपना गुस्सा जाहिर करते हुए सभी खिलाड़ियों ने अपनी बांह पर काली पट्टी बांधकर पाकिस्तान से मैच खेला. यही नहीं बल्कि भारतीय टीम के समर्थन में पूरे स्टाफ ने भी काली पट्टी बांधी. हॉकी हमारा राष्ट्रीय खेल है और 'हॉकी इंडिया' के सारे खिलाड़ी पूरी तरह से राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत हैं. 'हॉकी इंडिया' के सभी खिलाड़ियों और उसके स्टाफ को हम सेल्यूट करते हैं.

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दूसरी तरफ क्रिकेट के खेल में उसी दिन लन्दन में ही चैंपियन ट्राफी 2017 का फ़ाइनल मैच भारत-पाकिस्तान के बीच खेला गया. 'टीम इंडिया' द्वारा पहले तो गेंदबाजी करने का गलत फैसला लिया गया और उसके बाद घटिया गेंदबाजी व घटिया बल्लेबाजी करके पाकिस्तान के हाथों 180 रनों से बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा. बहुत से सवालों को अनुत्तरित छोड़कर पाकिस्तानी टीम को मैच जीतने के लिए बधाई देते हुए हम मान लेते हैं कि खेल में हारजीत तो होती ही रहती है, लेकिन अफ़सोस इस बात का है कि 'टीम इंडिया' के खिलाड़ी देश और सेना के सम्मान को भी तरजीह नहीं दिए. आतंकी मुल्क पाकिस्तान से हमारे देश की रक्षा करते हुए आये दिन सीमा पर शहीद हो रहे सैनिकों के प्रति सम्मान और पाकिस्तान के प्रति अपनी नाराजगी दिखाने के लिए 'टीम इंडिया' के खिलाड़ी भी तो अपनी बांह पर काली पट्टी बाँध के खेल सकते थे, किन्तु उन्होंने ऐसी संवेदना और देशभक्ति नहीं दिखाई. देशवासियों को अब ये सोचना चाहिए कि पैसे कमाने और बारहों महीने मौज-मस्ती में ही व्यस्त रहने वाले हमारे देश के क्रिकेट खिलाड़ी क्या किसी सम्मान के पात्र हैं? ऐसे संवेदनहीन खिलाडियों का बॉयकाट करना चाहिए.

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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का सोमवार को ऐलान कर दिया है. उन्होंने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद हेतु उम्मीदवार बनाया है. दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले रामनाथ कोविंद यूपी से दो बार राज्यसभा सांसद रहे. वो कई संसदीय कमेटियों के चेयरमैन रह चुके हैं. ऑल इंडिया कोली समाज और बीजेपी दलित मोर्चा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. अमित शाह ने कहा हैं कि गरीब समाज से ताल्लुक रखने वाले शख्स को राष्ट्रपति बनाने का फैसला किया है. रामनाथ कोविंद के नाम का ऐलान करके अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक जानकारों को चौंका दिया है, क्योंकि राष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर लग रही राजनीतिक अटकलों में कहीं भी उनका नाम सामने नहीं आया था.

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दलित चेहरा होने की वजह से रामनाथ कोविंद का विरोध अब विपक्षी दल पूरी एकजुटता के साथ नहीं कर पाएंगे. उनमे फूट भी होनी तय है. रामनाथ कोविंद के नाम पर आम सहमति भी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बन सकती है. हालांकि भाजपा पर दलित तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप भी जरूर लगेगा, क्योंकि वो विपक्षी पार्टियों पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाती रही है. राष्ट्रपति चुनाव में जारी सभी दलों के राजनीतिक प्रपंच और दांवपेंच से ऊपर उठकर समस्त भारतवासी यही उम्मीद करते हैं कि जो भी भारत के नए राष्ट्रपति बनें, उनसे हम सब लोगों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए और राष्ट्र की उन्नति में अपना योगदान देने के लिये सदैव आशीर्वाद और प्रेरणा मिलती रहेगी.

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जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी हारजीत  लोकतंत्र का हिस्सा है लेकिन लगता की कांग्रेस और विरोधी दल इस्सकी बखिया उखल रहे है जबसे बीजेपी केंद्र और राज्यों में सत्ता पर आई ये लोग इन बीजेपी शासित देशो में दंगे फसाद करके देश का नुक्सान कर रहे पहले आरक्षण के नाम पर और अब किसान आन्दोलन के नाम पर आराजकता फैला रहे..किसानो की समस्या कांग्रेस की ही दें है और क़र्ज़ माफी इसका उपाय नहीं बल्कि फसल बीमा के अलावा सरकारको खरीद करनी चाइये.चौहान जी इतने सालो से समस्या सुलझा रहे है. विडियो में कांग्रेस् नेता भड़काते दिखे एक विधयक कह रही थाने में आग लगा दो राहुल गाँधी लाशो पर राजनीती कर रहे कर्नाटक में किसान आत्महत्या करते राहुल नहीं जाते. लेकिन देश की जनता समझदार है और ऐसे नेताओं को कभी नहीं चुनेगी.सुन्दर विवेचात्मक लेख के लिए बधाई.

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Harish Chandra Sharma आदरणीय सदगुरु जी अभिनन्दन ,बहुत सुन्दर ..गीता पढ़ने से न हिन्दू प्रभावित होंगे, न गोहत्या का पाप धुलेगा.......किन्तु गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि....जो पुरुष धर्ममय गीता शास्त्र को श्रद्धा युक्त और दोष द्रष्टि रहित होकर पड़ेगा या श्रवण भी करेगा वहसमस्त पापों से मुक्त होकर उत्तम कर्म करने वालों के समान श्रेष्ठ लोकों को पायेगा | .....है अर्जुन तू मुझमे मन वाला हो ,मेरा भक्त बन ,मेरा पूजन कर मुझको प्रणाम कर |ऐसा करने से तू मुझे ही पायेगा | सम्पूर्ण धर्मों को त्यागकर तू केवल मुझ सर्वशक्तिमान सर्वाधार की शरण में आ जा | में तुझे सम्पूर्ण पापों से मुक्त कर दूंगा |तू शोक मत कर | ................यदि इन बचनों को यदि राहुल गाँधी ने पड लिया तो वे भी मोदी जी और स्वामी राम देव की तरह ही पुण्यवान बन जायेंगे | तभी भाजपाईयों में चिंता जाग्रत हो रही है..........ओम शान्ती शान्ती शान्ती

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आदरणीय अमित जी ! सादर अभिनन्दन ! आप अपनी प्रतिक्रिया मे लिखते हैं कि पूंजीपतियों की मदद से राहुल गाँधी की छवि पप्पू की बना दी गई है और मोदी जी ऐसे पेश किये जा रहे हैं, जैसे देश की राजनीति मे उनके अलावा कोई विकल्प नही है ! आपकी सोच गलत है ! राहुल गाँधी की पप्पू वाली छवि उनकी कमियों के कारण बनी है, पूंजीपतियों के कारण नही ! रही बात मोदी जी को तो उनमे मौलिकता है, जिसकी वजह से वो प्रधानमन्त्री बने हैं ! अरविन्द केजरीवाल भी अपनी मौलिक सोच की वजह से ही राजनीति मे टिके हुए हैं ! राहुल गाँधी ने नकल करने के सिवा अब तक किया ही क्या है ? रही बात किसान आन्दोलन की तो इसके पीछे किसानों की खस्ताहाल स्थिति से ज्यादा कांग्रेस का खुराफाती हाथ काम कर रहा है ! प्रतिक्रिया देने के लिये धन्यवाद !

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AMIT परम ग्यानी बाबा सद गुरु जी महाराज आप भी गो माता की पूंछ पकड कर वेतरनी पार करने का निस्चय कर चुके है ओर हम भी तरने के लिये गो मैय्या पूंछ पकड कर पीछे लटक लिये है.... राजनीति मे मेचफ़िक्सिंग पार्टनर भाजपा वा कॉंग्रेस राजनीति के लिये एक समान विचारधारा रखते है... ना पहले गुजरात दंगो पर बंटी जी कभी जेल यात्रा पर गये ओर ना अब राहुल गाँधी या फिर दामाद जी घोटालो पर जेल यात्रा पर जाने वाले है.... क्योंकि जो सत्ता मे बेत्ता है वही मलाई खाता है इसी के चलते देश की जनता को भ्रमित कर के सत्ता हतियाने की खवाइश मे एक दूसरे पर हिन्दुओ द्वारा गाय माता को घर या दुकान के आगे से भागा देने के लिये पानी के छींटे मारने के समान पानी उछालते रहते है..... अभी पूंजीपटियो की मदद से राहुल गाँधी की छवि पप्पू की बना दी गयी है ओर बंटी जी एसए पेश किये जा रहे है जेसे देश की राजनीति मे उनके अलावा देश मे दूसरा कोई विकल्प नही है..... पर देश मे बड़ी तेज़ी से बड़ते किसान आतमहत्या के मामले वा मध्य प्रदेश मे किसानो को गोलियो से भुन दिये जाने पर अंधभक्तो द्वारा चुटकिया लेना भाजपा के लिये जी एस टी की तरहा एक ओर वाटरलू साबित होगा.... बहुत जल्द अंधभक्तो द्वारा देश की जनता को धमकाने के लिये देशद्रोही,आतंवादी,नक्सलवादी की तर्ज़ पर किसानवादी की उपाधि से अलंकृत किया जाना तय है.......

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आदरणीया लीला तिवानी जी ! सादर अभिनन्दन ! गीता भगवान का गाया हुआ गीत है, जिसका उसका भावार्थ महसूस करने से जीते जी मोक्ष की सुखानुभूति महसूस होती है ! गीता को पढने या सुनने मात्र से राहुल गाँधी और कांग्रेस का राजनीतिक उद्धार नही होगा ! अपने पापों के प्रायश्चित के लिये और अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिये गीता का अध्ययन-मनन अच्छा है, राजनीति से गीता का कोई सरोकार नही ! राहुल गाँधी को कोई राजनीतिक लाभ नही मिलने वाला, बल्कि उल्टे गलत व्याख्या पर उनका उपहास ही उडेगा ! गीता का मर्म और भगवान के मनोभाव जानने के लिये किसी ग्यानी और तत्वदर्शी की संगति करना आवश्यक है ! गीता मे भी यही लिखा हुआ है ! आपने सही कहा है कि गीता एक जीवन-पद्धति है, जिसका शुद्ध मन से अनुशरण करने पर ही आध्यात्मिक लाभ मिलना संभव है ! पोस्ट को जागरूक करने वाली, सटीक और सार्थक महसूस करने के लिये हार्दिक आभार !

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Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी जब से उत्तर प्रदेश मे योगी सरकार ने किसानो के एक लाख कर्ज़ की माफी की उसके बाद से अन्य जगह पर भी ऐसी मांग होगी यह तो अपेक्षित था. इस आग मे घी डालने के लिये शिवसेना जो महाराष्ट्र की हार नही पचा पा रही है और सत्ता मे रहते हुए भी विपक्ष की ही भूमिका मे है के साथ कांग्रेस और एन सी पी भी तैयार थे. शिवराज को कमजोर करने के लिये मध्य प्रदेश से आन्दोलन शुरु हुआ और क्योंकि राजनीतिक दल साथ थे इसलिये ही हिंसा हुई. स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू की जानी चाहिये. इससे सभी सहमत होंगे पर इस सरकार ने जितना किसानो के हित के लिये किया है उतना कभी नही हुआ. इससे पहले सिर्फ समर्थन मूल्य मे कुछ बढ़ोतरी करके सरकारें अपने कर्तव्या की इति श्री समझ लेती थी.

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आदरणीय अमित जी ! ब्लॉग पर आपका स्वागत करते हुए अंत में प्रधानमंत्री मोदी का जिक्र करूंगा ! देश के प्रधानमंत्री तक के लिए यदि मन में जहर भरा हो तो ऐसे मलिन मन को धिक्कार है ! आप बुद्धिजीवी हैं, क्या आप नहीं जानते हैं कि प्रधानमंत्री के जिम्मे बहुत से काम होते हैं ! देशहित के लिए समय समय पर विदेश भी जाना पड़ता है ! वो विदेश आंनद लेने नहीं, बल्कि जरुरी कार्य से गए हैं ! कभी कभी मुझे आश्चर्य होता है कि आप बुद्धिजीवी हैं, अपने आप को पढ़ालिखा हिन्दू कहते समझते हैं, फिर भी आपकी प्रतिक्रिया अपने ही मन के बुने हुए उन्माद में डूबे उन जाहिल और अनपढ़ लोगों जैसी होती है जो इस देश में रहते हुए भी यहाँ के लोकतंत्र, जनता के दिए हुए बहुमत और जनता के द्वारा भारी बहुमत से चुने हुए प्रधानमंत्री का सम्मान तक नहीं कर सकते हैं ! धिक्कार है ऐसे जीवन को ! आप आलोचना कीजिये ठीक है, लेकिन ये क्या पागलपन है कि हर बात पर देश के प्रधानमंत्री को गाली देते रहो, उन्हें बेवजह कोसते रहो ? ब्लॉग पर समय देने के लिए धन्यवाद !

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आदरणीय अमित जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आप बार-बार यही रट रहे हैं कि मध्यप्रदेश सरकार की भाजपा सरकार ने किसानों पर गोली चलवा दी ! किसानों को शांतिपूर्ण आंदोलन करने से किसने रोका है ? लेकिन यदि वो उपद्रव, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ करेंगे तो कोई भी सरकार हो, कानूनी ढंग से ही निपटेगी ! उपद्रव में या गोलीबारी में किसान हों या पुलिस, किसी भी मृत्यु हो, वो निसंदेह बहुत दुखद है ! आप जानबूझकर इस सत्य से आँख मूंदे हुए हैं कि 1998 में जब मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में किसानों ने हिंसक आंदोलन किया था, तब 12 जनवरी 1998 को किसानों के हिंसक प्रदर्शन के दौरान 18 लोगों की मौत हुई थी. उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी ! उसकी चर्चा क्यों नहीं करते हैं ? प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद !

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आदरणीय अमित जी ! सादर अभिनन्दन ! आंदोलनकारियों को किसान मानने से कौन इंकार कर रहा है ? हम तो सिर्फ यही कह रहे हैं कि किसान आंदोलन की आड़ में विपक्षी दल भाजपा सरकार के विरुद्ध षड्यंत्र रच रहे हैं और उनकी शह पर अराजक व उपद्रवी तत्व हिंसा फैला रहे हैं, आगजनी और लूटपाट कर रहे हैं ! आज के अधिकतर किसान पहले की तरह गरीब और निरीह नहीं हैं ! आइये कभी मेरे गाँव और किसानों की स्थिति देखिये ! गाँव पर रहने वाले मेरे परिवार के लोग भी किसान ही हैं ! थोड़ी भूमि वाले और भूमिहीन किसानों में गरीबी जरूर है, लेकिन सरकार उनकी मदद भी कर रही है ! रही बात कर्ज की तो थोड़ी भूमि वाले और भूमिहीन किसानों के कर्जे माफ़ होने चाहिए, सबके नहीं ! सादर आभार !

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AMIT परम ग्यानी बाबा सदगुरु जी महाराज... धान्य हो गुरु देव की अब आपने प्रदेश सरकार की तरहा मुंह छिपाते हुए इन्हे किसान तो माना....! इससे पहले तो आप इन गरीबो को 56 इंच का सीना छोड़ा कर के किसान मानने को ही तेयार नही थे.... प्रतीत यह हो रहा था की जेसे आप कह रहे हो की तुम गरीब निरीह जानवर हो ओर इसलिये तुम्हारा हम सन्यासी बाबाओ से क्या काम....! जो अपने को वांशिक रूप से गरीब मानते है उनको यह नही पता की गरीबी मे कुपोषण से बाकी शरीर सूखने के कारण पेट फूला दिखता है ओर इसका वह अपने स्तर पर मुखोल बना किसानो को मोटा ताज़ा बता रहे है.....! व्यापम घोटाले की तर्ज पर मामा सरकार मानने को तेयार नही थी की किसानो को उसने गोली चलवा कर मरवाया.... ओर अब विपक्षी षद्यंत्रकारी बता कर इन्ही अराजक तत्वो को मुआवजा बांटने का ढिंढोरा पिट रही है....! पर इन सबसे परे देश के सबसे बड़े वा रजिस्टर्ड गरीब वा देशकी सबसे कमजोर जाती से आये बंटी जी विदेशो मे ठंडी हवाओ का आनंद ले रहे है......

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आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! सबसे अच्छा उपाय तो यही है कि बार बार किसानों का कर्जा माफ़ कर उन्हें याचक बनाने की बजाय उन्हें आत्मनिर्भर बना दाता बनाया जाए ! सरकार के पास संसाधनों की कमी नहीं है ! वो किसानों से उसकी उपज खरीदकर उन राज्यों में भेंजे, जहाँ उसकी बेहद मांग है ! केंद्र सरकार के पास रेलगाड़ी से लेकर हवाईजहाज तक का साधन मौजूद है ! केंद्र सरकार राजनीतिक पार्टियों को किसानों के हित के लिए संघर्ष करने के नाम पर हिंसक आंदोलन क्यों चलाने दे रही है ? अराजक तत्वों को पकड़ के जेल के अंदर करे और किसानों से सीधी बात करे ! चुनाव के समय भाजपा ने किसानों से जो वादा किया है, वो पूरा करे ! ब्लॉग पर समय देने के लिए और पोस्ट को शानदार महसूस करने के लिए हार्दिक आभार !

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Rajeev Gupta आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, आपकी यह बात ठीक है कि किसानों की कर्ज़ माफी ना करके सरकार को उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने का प्रयास करना चाहिये. इस दिशा मे काम चल भी रहा है क्योंकि मोदी जी ने बहुत पहले ही यह घोषणा की थी कि उनकी सरकार किसानों की आमदनी अगले पांच सालों मे दुगना करने के लिये कृत संकल्प है. अगर ऐसा होता है, तो किसानों के लिये बहुत अच्छा होगा. किसान हमारे अन्नदाता है, उनका ख्याल रखा जाना चाहिये लेकिन किसानों के बहाने कोई राजनीतिक पार्टी नकली किसान आन्दोलन खड़ा करने की कोशिश करे तो सभी का फ़र्ज़ है कि उस साज़िश का पर्दाफाश भी करे. आपने इस ज्वलंत समस्या पर शानदार ब्लॉग प्रस्तुत किया, उसके लिये आपका हार्दिक आभार एवं अभिनन्दन.

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महाराष्ट्र के किसान नेता किशोर तिवारी ने राज्य में जारी किसान आंदोलन को जायज तो ठहराया है, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया है कि विपक्षी नेता इस आंदोलन का राजनीतिक इस्तेमाल मुख्यमंत्री देवेन्द फडणवीस के ख़िलाफ़ कर रहे हैं ! उनका कहना है कि मुख्यमंत्री देवेन्द फडणवीस की ग्रामीण भागों में लोकप्रियता चरम पर है इसके अलावा उनके नेतृत्व में बीजेपी लगातार ग्रामीण इलाको में जीत हासिल कर रही है ! उनकी इसी लोकप्रियता से सकते में आये पश्चिम महाराष्ट्र के सभी दलों के नेता किसान आंदोलन को आधार बनाकर उन पर राजनीतिक हमला कर रहे है ! उनके अनुसार मुख्यमंत्री ने कई पहल की जिसका नतीजा रहा की किसानो के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन विपणन कि समस्या बढ़ी है ! किसानो को न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम दाम में अपनी फ़सल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है ! किसान नेता किशोर तिवारी ने किसानो द्वारा उठाई गयी माँगो का पूरी तरह समर्थन करते हुए संपूर्ण कर्जमाफी की वकालत की है ! उनका कहना है कि किसानो से वादा कर बीजेपी ने खुद अपने गले में घंटी बाँधी है !

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मेरे विचार से तो देश के कुछ भाजपा शासित राज्यों में जारी आन्दोलन मे किसानों को बरगलाकर शामिल किया गया है ! आन्दोलन को हिंसक बनाने वाले, पत्थरबाजी और आगजनी करने वाले निश्चित रूप से किसान नही, बल्कि धन के बलपर इकट्ठे किये गये अराजक और उपद्रवी तत्व हैं ! ये किसानों के आन्दोलन से ज्यादा भाजपा और मोदी विरोधी नेताओं का षडयंत्र है ! कायदे से जांच हो तो इस षड्यंत्र में शामिल कांग्रेस और कई अन्य दलों का पर्दापाश हो जाए ! यदि किसान वाकई आन्दोलन करते तो सबसे पहले कर्नाटक मे करते, जहां पर पिछले दो साल मे मध्यप्रदेश से कई गुना ज्यादा लगभग 2300 किसानों ने आत्महत्या की है ! वहा के किसान क्यों खामोश हैं?

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नेपाली कांग्रेस के महासचिव कृष्ण प्रसाद सितौला ने नेपाल की शांति एवं संविधान का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया में एक प्रमुख भूमिका निभाई था. साल 2015 में उन्होंने कहा था कि 'हिंदू समर्थकों के लिए हमने गाय को अपना राष्ट्रीय पशु बनाया है. अब गाय को संवैधानिक संरक्षण मिल गया है और गोहत्या पर पाबंदी भी लगा दी गई है. पहली संविधान सभा से यह प्रावधान हटा दिया गया था, लेकिन हम इसे वापस लेकर आए हैं.' भारत में भी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के लिए कृष्ण प्रसाद सितौला जैसा ही भगीरथ प्रयास किसी समर्थ नेता को करना होगा. गाय हिन्दू धर्म में इतनी पवित्र क्यों है? काफी समय पहले एक संत से मैंने पूछा था. उन्होंने कहा था, यह 84 लाख पशु-पक्षी व कीड़े-मकोड़े वाली योनियों में सर्वोच्च योनि है. इसके बाद मनुष्य का जन्म मिलता है.

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नेपाल में अधिकतर लोग मांसाहारी हैं. किन्तु फिर भी साल 2015 में लागू नेपाल के नए धर्मनिरपेक्ष संविधान में गाय को देश का राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया. नेपाल हिन्दू बहुल देश है. साल 2015 से पहले यह दुनिया का एकमात्र हिन्दू राष्ट्र था. अब नए संविधान के तहत इसे सेक्यूलर यानि धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया है. गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने को लेकर यहाँ भी वर्षों तक विभिन्न दलों के बीच राजनितिक तकरार हुई. कुछ सांसदों ने एक सींग वाले गैंडे को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का प्रस्ताव किया था. गाय को हिंदू धर्म में पवित्र पशु का दर्जा प्राप्त है और हिन्दू बहुल देश होने के नाते अन्तोगत्वा गाय को देश का राष्ट्रीय पशु बनाने का फैसला किया गाया. भारत भी इस मामले में नेपाल का अनुकरण करते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर सकता है.

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केंद्र सरकार ने केवल बड़े पशु बाजारों में कुछ मवेशियों की बिक्री पर रोक लगाई है. केंद्र सरकार निर्णय तो अच्छा ली है, लेकिन उसने दो गलती की है, एक तो उसने उन राज्य सरकारों से कोई सलाह नहीं ली, जहाँ पर गोमांस खाया जाता है या फिर जहाँ का मुख्य भोजन ही मांसाहार है. केंद्र सरकार ने दूसरी गलती यह की है कि गाय के साथ-साथ बैल, सांड, बधिया बैल, बछड़े, बछिया, भैंस और ऊंट आदि को भी अपनी मवेशी की परिभाषा में शामिल कर लिया है और इन सबकी बिक्री पर रोक लगा दी है. अब सवाल यह पैदा होता है कि गाय और उसके परिवार यानि बैल, सांड, बधिया बैल, बछड़े और बछिया को तो गौशाला में किसी तरह से जगह मिल जायेगी, लेकिन भैंस और ऊंट को आप कहाँ रखेंगे. क्या सरकार भैंसशाला और ऊंटशाला भी खुलवाएगी? आखिर उनको संरक्षण किस तरह से दिया जायेगी? लोग यदि इन्हे सड़कों पर खुला छोड़ देंगे तो बहुत भारी समस्या पैदा हो जायेगी. सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार कर इसमें कुछ संशोधन करना चाहिए.

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हिन्दुस्तान मे प्राचीनकाल से ही गाय को पवित्र मान पूजा हो रही है ! प्राचीन काल मे राक्षस सनातनधर्मियों को चिढ़ाने के लिये यह कहकर गाय काटते और खाते थे कि तुम इसे पवित्र मानते हो, इसलिये हम खायंगे ! शरीर से तथा मायावी शक्तियों व सिद्धियों से अति बलवान होते हुए भी राक्षस जाति का पवित्र गायों के वध और भक्षण के कारण ही समूल संहार हो गया ! इस संसार मे जो कुछ भी पवित्र है, ईश्वर की विशेष विभूति होने के कारण उसकी पूजा करनी चाहिए. किन्तु यदि पूजा यदि न भी करना चाहें तो उसका निरादर मत कीजिये और उसे नष्ट मत कीजिये ! ईश्वर द्वारा निर्मित पवित्र चीजों को नष्ट करना विनाश को आमंत्रित करना है ! मैने अपने अब तक के जीवन मे गाय को डंडे से मारने वाले कई लोंगो की बहुत बुरी दुर्दशा होते देखी है ! गौ संरक्षण का विरोध करने वालों को ईश्वर सदबुद्धि दें !

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जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी अंग्रेज़ो के आने के पहले देश बहुत संपन्न था इसीलिये अँगरेज़ खूब लूट कर ले गए और गया का बहुत बड़ा योगदान था.देश की अर्थ व्यवस्था को तोड़ने के लिए अंग्रेज़ो ने जो वध शुरू करवाया और गावो पर टैक्स लगा दिया.आज़ादी के बाद मुस्लिम तुष्टीकरण की वजह से और वाम डालो के प्रभाव से हिन्दुओ को शर्मिंदगी झेलनी पडी .अब मोदीजी के राज्य में उम्मीद है लेकिन समय लगेगा.७० साल की गंदगी दूर करने के लिए समय लगेगा क्योंकि सेक्युलर नेता और मीडिया एक साथ विरोध में है लगता सर्वोच्च न्यायालय भी मुसलमानो से डरता इसीलिये हिन्दू हिट पर सुनवाई नहीं करता.गीता को राष्ट्रीयग्रंथ गाय को राष्ट्रीय पशु और गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित होगी बस समय का इंतज़ार करना पड़ेगा.आपके सुन्दर लेख के लिए साधुवाद .ये दुर्भग्य है हिन्दुओ का की जहाँ उनका बहुमत है वही उनकी कोइ सुनवाई नहीं होती.

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आदरणीय अमित जी ! सादर अभिनन्दन ! एक प्रतिशत अमीरों के पास देश की 51 प्रतिशत सम्म्पती है ! कोई भी सरकार हो बिना उनकी मदद के निजी क्षेत्र मे कुछ ज्यादा नही कर सकती है ! पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा डब्ल्यूटीओ बनने के साल भर बाद भारत ने 1996 में दिया था ! इसके लिये मोदी सरकार को दोष न दें ! पाकिस्तान से यह दर्जा छीनने के लिये भारत को डब्ल्यूटीओ मे जाना होगा और कारण भी बताना होगा ! बीफ खाने वाले हर पार्टी मे हैं ! आपकी इस बात से पूर्णत: सहमत हूँ कि हमारी गौमाता इस देश की डर्टी पॉलिटिक्स का शिकार हो चुकी हैं ! उनके नाम पर सब पार्टिया जनता को वेवकूफ़ बना रही हैं ! गौमाता से प्रेम होता तो सब मिलकर कब का उसे 'राष्‍ट्रीय पशु' घोसित करा दिये होते ! प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

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Nand Jee राजेन्द्र ऋषि जी, मणिशंकर जैसे पाकिस्तानी दलाल (हालांकि मैं कभी ऐसे शब्द इस्तेमाल नही करता हूँ, लेकिन मामला जहा देश की अस्मिता से जुड़ जाय तो सभी शब्दो का इस्तेमाल करना चाहिये) के लिये इतना लम्बा-चौड़ा ब्लॉग. जनाब ऐसे लोग संग्यान लेने के लिये नही, दुत्कारे जाने के काबिल है. सालो पहले सोनिया को पी. एम. बनाए के मुद्दे पर मुलायम सिंह ने वीटो कर दिया था. कुछ दिनो के बाद एच. के. दुवा (संपादक हिन्दुस्तान टाइम्स) के यहा पार्टी थी, अय्यर भी थे और अमर सिंह भी. उस पार्टी मे अय्यर दारू के नशे मे अमर सिंह से झगड़ पड़े और मुलायम के बारे मे अपशब्द बोलने लगे, नतीजा अमर सिंह ने सभी के सामने इस अय्यर की लात- घुस्सो से ठुकाई शुरु कर दी और मजेदार बात यह की इसे छुड़ाने भी कोई नही आया. आखिर एच. के. दुआ ने किसी तरह अमर सिंह को समझा बुझा कर मामला शांत किया. तो भई अय्यर और सलमान खुरसिद जैसे मानसिकता वाले लोगो की कांग्रेस मे बड़ी पुछ होती है. 44 तक ये पार्टी ऐसे ही नही पहुची है.

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AMIT परम आदरणीय बाबा सदगुरु जी महाराज, सादर नमस्कार, क्या हरीश साल्वे जी ने आर एस एस की सदस्यता ले ली है....? अचानक यह बंटी बबली अंध भक्तगणो की नज़रो मे राष्ट्रवादी केसे बन गये...? ....! मे याद दिलाना चाहूंगे की.......यह वही हरीश साल्वे है जिन्होने याकूब मेनन की सज़ा का विरोध किया था... गुजरात दंगे मे बंटी के खिलाफ मुसलमानो की तरफ से केस लड़े थे...! एन डी टी वी पर बेन लगाने के मुद्दे मे यह उस देशद्रोही चेनल के वकील थे....! दिल्ली के रामलीला मेदान मे क़ाडिये बाबा आमदेव को पड़ी मार के समय यह दिल्ली पुलिस के वकील रहे थे...! हिट एंड रण केस मे सलमान ख़ान के वकील थे....! ओर भोपाल गेस काण्ड मे विदेशी कम्पनी के वकील रह चुके है....! लगता है की भक्तगणो का पूर्ण कॉंग्रेसी कर्ण हो चुका है.....!

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आदरणीय अमित जी ! सादर अभिनन्दन ! आप एक अच्छे बुद्धिजीवी हैं, ब्लॉग को ध्यान से पढ़ते हैं, इस बात के लिये आपकी तारीफ करूंगा ! लेकिन एक कमी भी है कि अपनी सुविधानुसार बात को किसी भी दिशा मे मोड देते हैं ! बीफ (गाय को छोड़कर अन्य जानवरों के मांस) के निर्यात मे भारत पहले से ही आगे रहा है ! रही बात पशु हिंसा की तो बेशक पशु हिंसा बंद होनी चाहिये ! भारत मे पशु हिंसा बलि और कुर्बानी के रूप मे भी है, वो भी बंद होनी चाहिये ! साधु जगत कहिये, हर जीव से प्रेम या अहिंसा कहिये, उससे जुड़े होने के कारण इस मुद्दे पर कई ब्लॉग लिखे, पर कौन सुनता है ? रही बात नोटबंदी से पत्थरबाजी रुकने की तो आप भी जानते हैं कि वो सत्य था ! बार बार नोटबंदी संभव नही, ये बात सब जानते हैं ! आतंकियों को फंडिग जो रही है, उसे रोकना होगा ! आतंकी तभी कमजोर होंगे, जब उन्हे सपोर्ट करने वाला पाकिस्तान कमजोर होगा ! रही बात बेरोजगारी की तो सरकारी या आईटी सेक्टर की स्थिति सबको मालूम है ! सरकार भी जानती है, इसलिये कौशल विकास के कार्यक्रम को बढ़ावा दे स्वरोजगार को बढ़ावा और पूरी मदद दे रही है ! जो मेहनती हैं और काम करना चाहते हैं, वो कहीं न कहीं रोजगार का रास्ता भी ढूंढ ले रहे हैं और सरकार अपनी तरफ से उन्हे पूरी मदद भी दे रही है ! देश की दिनोंदिन बड़ी तेजी से बढ़ती आबादी को देखते हुए बेरोजगारी की समस्या पूर्णत: हल होने मे समय जरूर लगेगा ! ब्लॉग पर समय और प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

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AMIT परम आदरणीय बाबा सदगुरु जी महाराज सादर नमस्कार, लालू ओर कचालू की कथा वांचते वक्त आप ने लिखा की नोतबंदी से आतंकवादी गतिविधिया रुकै थी पर टीन महीने मे ही दूबारा धन आने से फिर चालू हो गयी.... क्यों ना एक बार फिर नोतबंदी कर दी जाये....! बल्कि क्यों ना बंटी बबली सरकार द्वारा नियम ही बना दिया जाये की हर तीन महीने मे नोतबंदी लागू होगी...? बंटी बबली के कहने से नही बल्किआपके कहने पर एक बार हम मान जाते है की देश की अर्थव्यवस्था दुनिया मे सबसे तेज़ी से बड रही है....! पर एसे जोब्लेस आर्थिक विकास का किसको फायदा मिल रहा है....? लाखो पढ़े लिखे नोजवान देश मे खाली बेठे है ओर आंकडो के हिसाब से हर साल केवल आई टी सेक्टर मे है 2 लाख लोग बेरोजगार होने के कगार पर है.... तब डिजिटल इंडिया से क्या लाभ होगा...? हमारा मानना था की साधु जगत से होने के कारण आप को पशु हिंसा करने पर ही एतराज होना चाहिये था पर इधर, आप हमारी मोसी भेंस को काटने का लाभ गिनवा रहे है....! इधर एक बार फिर देश की दूसरी सबसे बड़ी दूधारु माता रेलवे मे सेफ्टी सेस लगा कर आम जनता पर बोझ डालने मे माहिर प्रभु लीला अपरम पार उनको कामधेनु माता की श्रेणी मे स्थान दिलाने मे लगे है... जय हो

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लालूजी और उनके परिजन 1000 करोड़ की बेनामी सम्पत्ति बटोरने के मामले मे बुरे फंसे हैं ! लालूजी के बेटा, बेटी और दामाद सभी आरोपों के घेरे मे हैं ! कुछ नेता जनता को मूर्ख बना चुनाव जीतते हैं और सत्ता हथियाने के बाद अपनी आने वाली सात पीढ़ियों तक के लिये लूटपाट कर लेते हैं ! भ्रष्ट नेताओं द्वारा लूटी गई सरकारी सम्पत्ति वस्तुतः जनता की खून पसीने की गाढ़ी कमाई होती है, जो सरकार को टेक्स के रूप में प्राप्त होती हैं ! नेता सरकारी सम्पत्ति के रूप में जनता का ही धन लूटते हैं ! कांग्रेस के एक बड़े नेता और उनके बेटे भी कल विदेशी निवेश के जरिये धोखाधडी करके बेशुमार धन इकट्ठा करने के मामले मे सीबीआई के लपेटे मे आ चुके हैं ! जबतक ऐसे सभी नेताओं पर, चाहे वो किसी भी दल के क्यों न हों, सख्त कानूनी कार्यवाही नही होगी, तबतक न तो भ्रष्ट नेताओं के मन मे कानून का खौफ पैदा होगा और न ही देश से भ्रष्टाचार मिटेगा !

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आदरणीया लीला तिवानी जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! चर्चा मे शामिल होने के लिये हार्दिक धन्यवाद ! लालूजी 1000 करोड़ की बेनामी सम्पती बटोरने के मामले मे कल बुरे फंसे हैं ! बेटा बेटी दामाद सभी आरोपों के घेरे मे हैं ! कुछ नेता जनता को मूर्ख बना चुनाव जीतते हैं और सत्ता हथियाने के बाद अपनी आने वाली सात पीढ़ियों तक के लिये लूटपाट कर लेते हैं ! कांग्रेस के नेता चिदम्बरम और उनके बेटे भी धोखाधडी करके बेशुमार धन इकट्ठा करने के मामले मे कल सीबीआई के लपेटे मे आ चुके हैं ! जबतक ऐसे सभी नेताओं पर, चाहे वो किसी भी दल के क्यों न हों, सख्त कानूनी कार्यवाही नही होगी, तबतक न तो भ्रष्ट नेताओं के मन मे कानून का खौफ पैदा होगा और न ही देश से भ्रष्टाचार मिटेगा! पोस्ट को सटीक और सार्थक महसूस करने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! पोस्ट की सराहना के लिये धन्यवाद ! राष्ट्रपति के उम्मीदवार के रूप मे आडवाणी जी का नाम आपने लिया, पहली पसंद मेरी भी वही हैं, निसन्देह उन्होने भाजपा की बहुत सेवा की है, लेकिन उनकी उम्मीदवारी की राह मे शायद अयोध्या विवाद को लेकर चलने वाला मुकदमा आड़े आये ! इसलिये सुषमा स्वराज जी को मैने चूना ! उनके स्वास्थ्य सम्बन्धी कारणों से भी शायद ऐसा हो ! डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत तो हुआ ही है ! विदेशी रुपया जो भारत आ रहा है, उसमे तो फायदा है ही ! निर्यात मे डॉलर खरीदते समय ज्यादा रुपया देना होगा, ये बात सही है ! किन्तु रुपये का मजबूत होना हमारी अर्थव्यवस्था और आर्थिक सुधार सही दिशा मे जारी रहने का सूचक है ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

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Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी चारा से फिल्मो के नाम और बाबा तथा लालू के संवाद बहुत ही बेहतरीन लगे. पर सुषमा स्वराज को अभी में केन्द्रिय मंत्रिमण्डल में ही देखना चाहूंगा क्योंकि वह बहुत अच्छा काम कर रही हैं. राष्ट्रपति के लिये में लालकृष्ण आडवानी को सही समझता हूँ. एक निष्ठावान भाजपा कार्यकर्ता के रूप में उन्होने ही भाजपा को बहुत आगे तक बढाया है. यह इनके परिश्रम का फल होगा. दूसरी बात है डालर के बदले 60 से बढ़कर 65 रुपये मिलना मतलब डालर के मुकाबले रुपये की कमजोरी दर्शाता है. जहां मुद्रा के अवमूल्य होने से निर्यात को बढ़ावा मिलता है, रोजगार उत्पन्न होते हैं वही आयात पर बोझ बढ़ता है. यह बड़ा ही मुश्किल का अर्थशास्त्र है. इसलिये रिजर्व बैंक समयानुसार बाजार में डालर डाल कर या कमी करके इसे नियंत्रित करने की कोशिश करता है. मेरे विचार से डालर का भाव 62 रुपये से कम नही होना चाहिये और 65 से अधिक नही. क्योंकि में शेयर मार्केट में दखल रखता हूँ इसलिये यह बात कह पा रहा हूँ.

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आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! लालूजी की प्रेस कान्फ़्रेंस के बाद सोचा इसी मुद्दे पर कुछ लिखा जाये ! मोदी सरकार भले ही कश्मीर समस्या, नक्सली समस्या और बेरोजगारी जैसी कुछ पुरानी समस्याओं का समुचित हल अभी तक नही ढूंढ पाई हो, लेकिन उसका तीन साल का कार्यकाल भ्रष्टाचार से मुक्त और आर्थिक सुधारों के मामले मे किसी स्वर्णिम युग से कम नही रहा है ! जिन पर तमाम तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, वो नेता भला किस मुंह से मोदी की तारीफ करेंगे ! ब्लॉग लिखने लगा तो फ़ेसबुक पर लालूजी से जुड़े कुछ चुटकुले भी मिल गये ! उन्हे भी इस ब्लॉग मे जगह दे दी ! आपने ब्लॉग को समसामयिक, रोचक और मनोरंजक महसूस किया, इससे ब्लॉग को सार्थकता मिली ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! पाकिस्तान तो बार-बार यही साबित करता है कि वो एक धोखेबाज मुल्क है, लेकिन हम लोग इतने मानवतावादी और दयालु हैं कि उस पर विश्वास कर लेते हैं कि अब धोखा नहीं देगा ! धोखा देना उसका नेचर है, जो कभी बदल नहीं सकता है ! अब हमारे पास दो ही रास्ते हैं या तो हम नैतिकता, मानवता और दयालुता का दामन थामकर उसका जुल्म सहते रहें, उसके नापाक हाथों से अपने बहादुर सैनिकों की जान गंवाते रहें या फिर साम, दाम, दंड, भेद सब अपना उसे इतनी बुरी तरह से परास्त करें कि हमें परेशान करणा बंद कर दे ! ठीक है कि हिन्दुस्तान कि बेटी घर लौट आई है, लेकिन बात तो वही है कि सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया ? प्रतिक्रया देने के लिए सादर आभार !

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सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर सबजार भट के मारे जाने के बाद अशांति और प्रदर्शनों के मद्देनज़र कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए रविवार को घाटी के कई हिस्सों में प्रशासन ने कर्फ्यू वाली पाबंदियां लगा दी थी ! कश्मीर में रविवार को अलगाववादियों ने बंद का आह्वान किया था ! कर्फ्यू और अशांति वाले इस माहौल के बीच सेना में जूनियर कमीशन अधिकारी और अन्य पदों पर चयन के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा आयोजित हुई ! यह बहुत हैरानी वाली और बहुत अच्छी बात है कि अपने उज्ज्वल भविष्य की खातिर सेना में जाने के लिए करीब 800 कश्मीरी युवक बंद की प्रतिगामी अपीलों को पूरी तरह से खारिज करते हुए संयुक्त प्रवेश परीक्षा में बैठे !

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वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर नई दिल्ली वापस आने के बाद भी कश्मीर के अलगाववादी गठबंधन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गुणगान गा रहे हैं. उनका कहना है कि कश्मीर में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का प्रभाव बहुत अधिक है, इसलिए वहां पर शान्ति बहाली के लिए हमें उससे बात करनी चाहिए ! भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत के दायरे में रहकर बातचीत करने का सुझाव दिए थे ! मणिशंकर अय्यर हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गुणगान गाते समय यह भूल गए कि बातचीत शुरू करने की उसकी पहली शर्त आजादी है ! उसकी यह मांग कोई भी केंद्र सरकार स्वीकार नहीं करेगी ! मोदी सरकार तो ऐसा सुनने को भी तैयार नहीं होगी !

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जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी आपके लेखो को पढ़ कर बहुत जानकारी मिल जाती है.तीन तलक के मामले में मुस्लिम बोर्ड घिर गया क्योंकि सिद्ध नहीं कर प् रहा की ये कुरान में लिखा है.ये धर्म का या मुस्लिमो का नहीं मामले लेकिन मुस्लिम समाज में औरतो के ऊपर ना इंसाफी का मामला है सरकार ने कह दिया की यदि सर्वोच्च्न्ययालय इसपर कोइ फैसला नहीं देता तब भी वे कानून बनायेगे.लगता है अबकी बार अदालत इसपर जरूर निर्णय लेकर इसे अवैध घोषित कर देगी और सरकार से कानून बनाने को कहेगी.कपिल सिबल कितना नीचे गिर सकता ये साबित हो गया.मुस्लिम बोर्ड कपिल की अयोध्या के मामले की बात नहीं मानेगा.असल में तुष्टीकरण की नीति के कारन मुसलमानों का दिमाग ख़राब हो गया और उन्हें देश के कानून पर विश्वास नहीं रहा.देखिये क्या फैसला आता है लेकिन अब मुस्लिम औरतो को न्याय मिलेगा ऐसी देशवाशियो को उम्मीद है.सुन्दर लेख के लिए बधाई.

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आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! लेख का समर्थन करने के लिये बहुत बहुत अभिनन्दन और आभार ! ऐसे अपराधी मानसिक रोगी के साथ साथ भयंकर गुप्त रोगों के शिकार भी होते हैं ! मासूम बच्चियाँ इनके हमले से अक्सर असहनीय और अमानवीय पीड़ा झेलते हुए मर जा रही हैं या फिर उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जा रही है ! अब ऐसे अपराधियों को कानून यदि सख्त और शीघ्र सजा नही देगा तो पीड़ित पक्ष के लोग ऐसे अपराधियों को सबक सिखाने के लिये खुद ही कानून हाथ मे लेने लगेंगे, जो बहुत अराजक और चिंतनीय स्थिति होगी ! शीघ्र न्याय हो और फांसी यदि सार्वजनिक रूप से हो तो लोग कानून से खौफ खाएँगे और ऐसे अपराध भी कम होंगे ! ब्लॉग पर समय देने के लिये सादर आभार !

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आदरणीय पंकज सिंह जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपकी इस बात से सहमत हूँ कि समाज में दिनोदिन अश्लीलता बढ़ रही है और बच्चे, युवा व बूढ़े सबके जेहन को प्रदूषित कर रही है, लेकिन यहाँ पर एक बात ध्यान देने वाली है कि सभ्य समाज में पढ़ेलिखे लोग भले ही अश्लील फोटो और वीडियों देखते हों, किन्तु मासूम बच्चों संग क्रूर बलात्कार जैसा जघन्य अपराध नहीं करते हैं ! ब्लॉग में जितने भी केसों की चर्चा की गई है, उन सबमे आरोपी नशेड़ी और कम पढ़ेलिखे हैं ! हो सकता है कि वो गुप्त रोगों के भी शिकार हों, क्योंकि कई बार ऐसे अपराधी इस अन्धविश्वास के कारण मासूम बच्चों से दुराचार करते हैं कि उनका गुप्त रोग चला जाएगा. हालांकि यह पूर्णतः असत्य है और मासूम पीड़ित बच्चों में गुप्त रोग बांटने वाला घृणित कार्य है ! जहाँ तक बलात्कारी प्रवृति वाले लोगों के कानून से नहीं डरने की बात है तो वो सौ फीसदी सच है ! समाज में कानून का खौफ पैदा करने के लिए सार्वजनिक रूप से फांसी या गोली मारने की सजा जरूर होनी चाहिए ! प्रतिक्रिया देने के लिए सादर आभार !

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आदरणीय सूर्यभान जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! मासूम बच्चों का यौन-शोषण बढ़ने के पीछे निश्चित रूप से बढ़ती हुई अश्लीलता भी जिम्मेदार है ! लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि बच्चों के संग क्रूरतम दुराचार की जिन घटनाओं का जिक्र ब्लॉग में हुआ है, उसमे सारे आरोपी एक तो नशेड़ी हैं, दूसरे मजदूरी करने वाले या फिर ड्राईवरी का कार्य करने वाले हैं ! इस तरह के लोग भी अश्लील गाने सुनते हैं और अश्लील वीडियों देखते हैं, लेकिन उनके बलात्कारी बनने का मूल कारण नशा और स्त्री जाति के प्रति घृणित सोच है ! मासूम बच्चे विरोध नहीं कर पाते हैं, उनमे प्रतिरोध करने की उतनी शक्ति होती ही नहीं है, इसलिए वो आसानी से बलात्कारियों की हवश का शिकार बन जाते हैं ! इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एक तो सार्वजनिक रूप से बलात्कारियों को निर्मम दंड देने की न्याय व्यवस्था होनी चाहिए और दूसरी बात ये कि समाज में सतत जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए, खासकर मासूम छोटे बच्चों को ये शिक्षा देनी चाहिए कि वो लालच में आकर किसी भी अजनबी व्यक्ति से कोई चीज न लें और दूसरे बुरी नियत से कोई भी रिश्तेदार, स्कूल टीचर, ट्यूशन मास्टर, नौकर, बस ड्राईवर या फिर कोई भी अन्य व्यक्ति छुए तो माता पिता को तुरंत इसके बारे में बताएं ! बच्चों का यौन शोषण करने वाले पहले बच्चे को कई रोज तक थोड़ा बहुत छेड़कर देखते हैं कि वो कितना विरोध कर रहा है, फिर सुनियोजित प्लान बनाकर एक दिन हमला कर देते हैं ! ब्लॉग पर समय देने के लिए हार्दिक आभार !

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Surya Bhan Bhan मासूम बच्चियाँ का यौन शोषण एवं दिनों-दिन बढ़ती बलात्कार की घटनाएँ समाज में आ रहे मानवीय मूल्यों के अवमूल्यन का दुष्परिणाम हैं । इसमें कुछ अंस तक पश्चिमी अंधानुकरण एवं मीडिया द्वारा अपने लाभ के लिए निरंतर परोसी जा र ही नग्नता को भी जाता है , जो विशेष कर युवाओं का ब्रेनवास करके अश्लीलता भरती जा रही है । इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए सख्त एवं त्वरित न्याय जहां आपेक्षित है वहीं सामाजिक स्तर पर भी बलात्कार के विरुद्व चेतना जाग्रत करने एवं नैतिक मूल्योंं के पुनर्स्थापन के लिए भी सार्थक प्रयास किया जाना आवश्य्क है । समसामयिक विषय पर एक विचारणीय पोस्ट के लिए बधाई स्वीकार करें ।

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आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! हार्दिक अभिनन्दन और बधाई देने के लिये धन्यवाद ! इस पोस्ट को मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत करना चाहता था ! अधिक से अधिक पाठक पढ़ें, तभी लेखन को भी सार्थकता मिलती है ! आप सही कह रहे हैं कि ये लोग ईवीएम का विरोध कर रहे हैं या फिर अपना टाईमपास या कहिये मनोरंजन ? इनकी फालतू बातों मे जनता की भी कोई रुचि नही है ! दरअसल ईवीएम मे खराबी की बहानेबाजी सिर्फ कपिल मिश्रा के बेहद गंभीर आरोपों से बचने की एक घटिया चाल भर है ! चुनाव आयोग तो खुद ही न्यौता दे रहा है ! इनके इंजीनियर साहब जा के वहा पर ईवीएम मे गड़बड़ी साबित करें या फिर आम आदमी पार्टी और उसके समर्थक दल हत जोड़कर पूरे देश से माँफी मांगे ! सटीक और सार्थक प्रतिक्रिया देने के लिये तथा ब्लॉग पर आने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीया लीला तिवानी जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! ब्लॉग लेखन के शेत्र मे आप सबसे बहुत कुछ सीखने को मिला है ! अब कुछ न कुछ नये ढंग से ब्लॉग प्रस्तुत करना जरूरी भी है, क्योंकि बड़ी तादात मे पाठक सोशल मीडिया की तरफ भाग रहे हैं ! संक्षिप्त और रोचक ब्लॉग अब ज्यादा पढ़े जाते हैं ! पोस्ट की सराहना के लिये धन्यवाद ! आने वाले समय मे निश्चित रूप से मोदी विरोधी अधिकतर दल एकजुट होकर 'महागठबंधन' बनाएँगे, लेकिन मोदी को चुनौती देने मे वे सफल नही होंगे, क्योंकि देश की 80 फीसदी से भी ज्यादा जनता पीएम मोदी के साथ खड़ी है ! कविता सटीक और सार्थक आपको लगी तथा आपने कीमती समय ब्लॉग पर दिया, इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद !

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आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! बहुत पहले ये लोग अक्सर गाते थे, 'इंसान का इंसान से हो भाईचारा, यही पैगाम हमारा..!' कवि प्रदीप जी ने समाज को इस गीत के माध्यम से भाईचारा और समानता का बहुत सुन्दर संदेश दिया है ! आम आदमी पार्टी भी शुरु मे इसी महान संदेश का गुणगान गाती थी और इस पर चलने का संकल्प लेती थी, लेकिन सत्ता के मद ने उसे पथभ्रष्ट कर दिया ! इस पार्टी का आज जो कुछ भी पतन हम होते देख रहे हैं, उन्ही सब चीजों का वर्णन इस कविता मे 'ना काहू से दोस्ती और ना काहू से वैर' वाले तटस्थ भाव से है ! कविता को शानदार महसूस कर जो सम्मान और सार्थकता आप ने उसे प्रदान की है, उसके लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय नन्द जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! लेख को फिर से आप ध्यान से पढिये ! इसमे कहीं नही लिखा है कि एफएमसीजी का कारोबार करने भारत की कम्पनियाँ 50,000 करोड़ का एक्सपोर्ट करती हैं ! उसमे लिखा है कि भारत मे एफएमसीजी यानि रोजमर्रा के उपभोग की वस्तुओं का कारोबार पचास लाख करोड़ रुपये वार्षिक का है ! रही बात दवाइयाँ बेचने की तो आप बेचिये, मना कौन कर रहा है, लेकिन ये भी मानिये कि आप व्यवसाय कर रहे हैं ! रही बात पतंजलि के उत्पादों मे शिकाय्त की तो आप नेट पर 2015-16 मे आई शिकायतें सर्च कर लीजिये ! ये बताने का उद्देश्य भी केवल इतना ही है कि अपनी क्वालिटी और बेहतर कीजिये ! आपने लिखा है कि मोदी रामदेव के मोहताज नही हैं, आपकी बात सही है, लेकिन यह भी उतना ही सही है कि भाजपा और बाबा रामदेव दोनो ही एक दूसरे का भरपूर फायदा उठा रहे हैं ! मैने भाजपा कहा है, मोदी नही ! ब्लॉग पर आकर प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

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Nand Jee जनाब, आप यह कहा से डाटा उठा लाये है की एफ.एम. सी. जी. का एक्सपोर्ट 50000 करोड़ का है? इस ग्रूप की सबसे बड़ी कंपनी हिन्दुस्तान यूनीलेवेर है इसके बाद नेसले है. दोनो ही एम. एन. सी. है और दोनो कम्पनिया अपना 90 प्रतिशत माल भारत मे ही बेचती है. और जो यहा से मोटा मुनाफा कमाती है उसको अपने हेड ऑफीस जो यूरोप मे है वहा भेजती है. यदि बाबा राम देव इन्ही कॉमनियो से प्रतिस्पर्धा कर , इनको पछाड़ कर इनका मोटा मुनाफा मे कमी लाने की कोशिस कर रहे है तो क्या ए गुनाह हो गया है , क्योकि वो एक सन्यासी है. आज कल जितने भी स्थापित सन्यासी है चाहे वो श्री श्री हो यन अन्य क्या आउर्वैदिक दवाइया नही बेचते है? यदि राम देव कानून के दायरे मे रह कर एम. एन. सी. से प्रस्पर्धा कर मुनाफा बिदेशो मे भेजने की जगह अपने ट्रस्ट मे रख कर अस्पताल, गौशाला, आरुवैदिक रेसेर्च सेंटर इत्यादि मे खर्च करते है तो इससे आप लोगो को तकलीफ क्यो हो रही है. रही बात क्वालिटी की तो ब्लॉग लिखने से पहले क्वालिटी के लिये एफ. एस. एस. आई. की निमावली पढिये. क्वालिटी कंप्लेन मे माल की गुणवत्ता से लेकर लेबेल , उसपर लिखे गये इंड़्गररिएेंट, शब्दो का फऔंड, बजन इत्यादि तीस से ज्यादा मानक है यदि किसी भी एक मानक मे फेल हुये तो वो मामला कोर्ट मे जाता है. एम. एम सी. जी की भारत ही छोड़िये विश्व की कोई भी कंपनी नही है जिसका प्रॉडक्ट फेल नही हुआ है. लेकिन भारत मे जहा बात रामदेव की आती है तो सभी को क्वालिटी की चिंता होने लगती है. भारत के यदि सभी होटलो का क्वालिटी चेकिंग हो तो 95 प्रतिशत इसमे फेल हो जायेंगे. ढाबो की तो बात ही छोड़ दीजिये. रही बात मोदी और रामदेव की तो बाबा रामदेव को बेशक मोदी की जरूरत हो, लेकिन मोदी किसी रामदेव के मोहताज नही है. मोदी अपने कामो से जनता मे लोकप्रिय है न की रामदेव की दोस्ती से.

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आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! जो बात आपने कही है कि बाबा रामदेव अब कारोबारी बाबा बन गये हैं, वही बात मैने भी कही है ! इस सच को स्वीकारने मे हर्ज ही क्या है ! साधु आत्मनिर्भर हो और अपनी कमाई से कुछ लोककल्याण करे, इसमे कोई हर्ज नही है ! पतंजलि के कुछ उत्पाद मेरे घर मे भी यूज होते हैं ! आयुर्वेद पर आप रिसर्च कीजिये, किसानों को फायदा पहुँचाइए, सब अच्छा है, लेकिन अपने सभी उत्पादों की क्वालिटी का भी ध्यान रखिये ! देशभक्ति के नाम पर आम जनता को कुछ भी मत परोसिये ! मिलेट्री की कैन्टीन मे अभी कुछ रोज पहले पतंजलि के आंवले के जूस पर रोक लगी है ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय अमित जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपके इस तर्क से सहमत हूँ कि बाबा रामदेव देशी गाय का शुद्ध घी बेचने की बात कहते हैं, लेकिन पूरे देशभर मे इसकी बहुत बड़ी मांग को देखते हुए यह सवाल उठता है कि भारतीय गायों का इतना देशी घी पतंजलि वालों को कहा से प्राप्त होता है ? आपने इसका जबाब भी दिया है, जिसकी जांच होनी चाहिये, लेकिन सवाल फिर ये उठता है कि उनकी राजनीतिक पहुंच इतनी उंची है कि जांच करेगा कौन ? दूसरे देशभक्ति और गौभक्ति के नाम पर उनका कारोबार जारी है ! जनता भी इसलिये चुप है ! एक परिचित सज्जन बता रहे थे कि प्रचार से प्रभावित हो वो एक बार पतंजलि का देशी घी लाये, लेकिन परिवार मे कोई नही खाया, उन्हे ही किसी तरह से खाकर खत्म करना पड़ा ! ब्लॉग पर आने के लिये और पोस्ट की सराहना करने के लिये हार्दिक आभार !

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AMIT परम आदरणीय बाबा सदगुरु जी महाराज, सादर नमस्कार, एक सटीक, सच्चाई से भरे ओर सोये हुए लोगो को जागरूक करने वाले लेख पर साधुवाद.... लोगो को अंधभक्ति से बच्चाने के लिये ही मे ब्लॉग पर प्रयासरत हु वा गालिया खाता हु.... खेर जाने दीजिये... अब सवाल यह उठता है की पूरे हिन्दुस्तान को शुध भारतीय गाय का घी..! जी हा गाय ही लिख रहा हु वह भी भारतीय.. वह कांदिए बाबा को कहा से प्राप्त होता है...? जाहिर सी बात है की बाबा के आश्रम की गायो से तो इतनी मात्रा मे दुघ्ध प्राप्त होने से रहा...? जितनी कम मात्रा मे हमारे देश की शुध देसि भारतीय गायो से दुघ्ध की प्राप्ति होती है उससे भी सारी कम्पनिया मिल कर भी बाज़ार की डिमांड पूरी नही कर सकती है...! तब सवाल का जवाब मिलता है की पतंजलि द्वारा यह सब चाइना वा यूरोप से इम्पोर्ट किया जा रहा है... कांदिए बाबा ने देश का माहोल देख कर बड़ी चालाकी से योग वा देशभक्ति का बाज़ारी कर्ण कर के लोगो को ठगा है बस.... वेसे आये दिन बाबा के गुंडे भाई द्वारा हरिद्वार मे मारपीट किये जाने की खबरे छपती रहती है... !

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आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! मीडिया मे यह मामला उछला, तब जाकर सरकार को शर्म आई ! यही तो दुखद है कि इस सरकार का भी कांग्रेसीकरण होना शुरु हो गया है ! कुमार विश्वास कहते हैं कि भाजपा का 80 प्रतिशत कांग्रेसीकरण हो चुका है और आम आदमी पार्टी का होना शुरू हो चुका है ! यदि वाकई मे ऐसा है तो कांग्रेस की तरह ही भाजपा भी पतन के मार्ग पर चल चुकी है ! यदि भाजपा वाले भी वही कार्य और बर्ताव करेंगे, जो कांग्रेस ने किया और पतन के गर्त मे चली गई, तो फिर भविष्य मे भाजपा की दुर्गति होनी भी तय है ! राष् ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों से जुड़े मुद्दे पर सरकार की संवेदनहीनता और इलाज के मामले मे एक अफसर और एक जवान के बीच भेदभाव बेहद निन्दनीय है ! पूरा प्रकरण निन्दनीय और दुखद तो बहुत है, लेकिन सही राह पर बीजेपी के नेता भले ही देर से आये, लेकिन दुरुस्त आये ! आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी, हम लोग और कुछ तो कर नही सकते, लेकिन ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे इस मंच पर उठाकार आम जनता को सोचने विचारने के लिये जागरूक जरूर कर सकते हैं ! हालांकि ब्लॉगिंग मंच भी पूरी तरह से निष्पक्ष, जागरूक और संवेदनशील नही हैं ! सबसे बड़ी समस्या समय पर ब्लॉग अपडेट नहीं होने की है ! तमाम ब्लॉगिंग मंचों की हालत आप देख ही रहे हैं ! याद करने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! जय श्रीराम और सादर अभिनन्दन ! सबसे पहते तो आपके स्वास्थ्य को लेकर शुभकामनाएं ! आप शीघ्र से शीघ्र पूर्णतः स्वस्थ हों ! टीवी पर चेतन कुमार चीता और जिंतेंद्र कुमार की माता रूपा देवी दोनों का ही इंटरव्यू देखा, मन को बहुत ठेस लगी ! खासकर जितेंद्र कुमार के इलाज को लेकर उनकी माता जी का हाथ जोड़कर रोना और देश से निवेदन करना ! यदि वाकई ऐसा है, तब तो शर्म के मारे हमें चुल्लूभर पानी में डूब मरना चाहिए ! आपकी इस बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाना चाहिए कि वो बार-बार भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देना भूल जाए ! लेख पढ़ने और बधाई देने के लिए हार्दिक आभार !

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आदरणीय अमित जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपकी प्रतिक्रिया से पूर्णत: सहमत हूँ ! विश्व की तीसरी बड़ी सेना, आधुनिक हथियारों से सुसज्जित और हर महीने मिसाइल परीक्षण, ये सब किस काम का, जब आप दुश्मन को समुचित ढंग से जबाब भी न दे सकें ? केवल मुँहजबानी पाकिस्तान को धमकाने से अब जनता उब चुकी है ! देश का विकास सरकार चाहे जितना भी कर ले, किन्तु पाकिस्तान को करारा जबाब देने और राष् ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर यह सरकार अब तक तो सफल नही हो पाई है ! जब पाकिस्तान भारत के 'सर्जिकल स्ट्राइक' का जबाब नही दे पाया तो भारत के हमले का क्या जबाब देगा ! सरकार बेवजह डर रही है ! ब्लॉग पर आकर सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिये सादर आभार !

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आदरणीय हरेंद्र रावत जी ! लेख पर आपकी विचारणीय प्रतिक्रिया मिली ! आपने मेरे मन की बात कह दी है कि 'देशप्रेम की भावनासे से ओतप्रोत होकर सैनिकों पर लिखा गया लेख उन नेता राजनेताओं और शासक प्रशासकों के लिए एक सन्देश है, जो अपने करोड़ों के सजेसजाए वातानुकूल कार्यालयों में बैठकर अपने और अपने परिवारवालों को सुरक्षित समझकर भ्रष्टाचार की राह पर चलते रहते हैं, वो भी सीमा पर लड़नेवाले सैनिकों की जानों पर कीमत पर !' उनके भेदभाव का रवैया, ढुलमुल नीति और जवानों के प्रति संवेदनहीनता निंदनीय है ! घायल जितेंद्र कुमार से मिलने कौन नेता गया? उसे एम्स में भर्ती क्यों नहीं किया गया? मोदी सरकार और उसके आला लीडरों को इस बात का जबाब देना चाहिए ! लेख को आपने आँख खोलने वाला (चक्षु ओपनर) महसूस किया, इससे लेख को सार्थकता मिली ! प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

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कश्मीर के हालात कितने खराब चल रहे हैं, इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि वहां पर सुरक्षाबलों पर पथराव की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी होने के साथ ही लूटपाट और हिंसा की वारदातों में भी इजाफा हुआ है. आज कुलगाम में जम्मू-कश्मीर बैंक की कैश वैन पर आतंकियों ने हमला किया, जिसमे पांच पुलिसवाले और दो बैंककर्मी शहीद हो गए. इस हमले में घायल एक गार्ड बहुत गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है. मीडिया में प्रकाशित समाचार के अनुसार आतंकवादियों ने कैश वैन से 50 लाख रुपये लूटने के साथ ही पुलिसवालों के हथियार भी लूटकर अपने साथ ले गए. इस तरह की घटनाएं इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि कश्मीर में अब कड़ी कार्यवाही की जरुरत है और वो भी जल्द से जल्द.

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इससे पहले कल रविवार को श्रीनगर के खानयार पुलिस स्टेशन पर कुछ हमलावरों ने ग्रेनेड से हमला किया था. इस हमले में 4 पुलिसवाले जख्मी हो गए थे, जबकि एक नागरिक की मौत हो गई थी. आतंकवादी पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड फेंकने के बाद फरार हो गए थे. हालाँकि हर वारदात के बाद पुलिस और सुरक्षा बल एक साथ मिलकर हमलावरों को ढूंढने का अभियान चलाते हैं, लेकिन इसमें उन्हें स्थानीय लोगों का सहयोग नहीं मिलने के कारण बहुत दिक्कत हो रही है. यही नहीं, बल्कि कई बार तो हमलावरों को ढूंढ़ने के लिए सर्च ऑपरेशन चला रहे पुलिस व सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी भी शुरू हो जाती है. इस बात में कोई शक नहीं कि कश्मीर के हालात काबू से बाहर हो अब वहां पर राष्ट्रपति शासन की जरुरत बता रहे हैं.

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आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपने सही कहा है कि इस सामयिक मुद्दे पर इस ब्लॉग को पेश कर मैने चर्चा को आगे बढाने की कोशिश की है ! मैने बीजेपी और आप दोनों ही पार्टियों का ही पक्ष रखा है ! तीनों एमसीडी मे भाजपा की विजय को यदि विधानसभा के लिहाज से आज चुनाव होने के एक अनुमानित संदर्भ मे देंखे तो देंखे तो आज की तारीख मे बीजेपी 57 विधानसभा सीटें जीत रही है ! बीजेपी को जनता तीसरी बार झाड़ू जरूर थमाई है, किन्तु इस बार उन्हे झाड़ू लगाना ही पड़ेगा और मोदी व अमित शाह जी को ये देखना भी पड़ेगा कि एमसीडी दिल्ली को सुन्दर और सॉफ सुथरा बना रही है कि नही ? 2019 मे वोटर इसी बात से प्रभावित होंगे ! हार्दिक आभार !

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