सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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अब सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि बलात्कार अब हमारे देश में हवस मिटाने का ही नहीं, बल्कि मनोरंजन का भी एक साधन बनता जा रहा है. बलात्कारियों को इस बात की कोई परवाह नहीं कि कोई मासूम, नाबालिग, बालिग़ अथवा वृद्ध महिला बेहोश और लहूलुहान है या फिर उनकी वहशी हैवानियत से वो दर्द के मारे चीखते-चिल्लाते हुए दम तोड़ चुकी है. परमात्मा के दिए हुए अनमोल जीवन की ऐसी बेकद्री और राक्षसी बर्ताव करते हुए उसका अति क्रूर तरीके से अंत कर देना ऐसा अक्षम्य अपराध है, जिसके लिए बलात्कारियों को चाहे फांसी की सजा दी जाए या फिर उन्हें गोली मारी जाए, वो कम ही है. बलात्कारियों को सार्वजनिक रूप से और शीघ्र से शीघ्र दंड देना चाहिए.

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Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी बलात्कार के खिलाफ कड़े कानून बन चुके हैं निर्भया काण्ड के बाद. अदालतें फांसी की सजा भी देने लगी है. पर फिर भी यह घिनौना कुकृत्य रुक नही रहा. मेरे विचार में इसका कारण यह है की अनेक दुराचारी यह समझते हैं की पीईदित शिकायत ले कर पुलिस के पास नही जायेगा. फिर पुलिस को भी सैट कर सकते हैं यह भी वह समझते हैं और गलत भी नही समझते. अनेक बार ऐसा होता भी है. विशेष कर गरीब महिला के साथ अगर दुराचार हुआ हो और दुराचारी पैसे वाला हो तो. जरूरत है की पुलिस संवेदन शील बने और सही विवेचना करके अपराधी को जल्द से जल्द कानून के कटघरे में लाये. वकील भी केस को लम्बा खींचते हैं जिससे गवाह पर दबाब बनता है. लंबे समय के बाद जब गवाही होती है तो वकील गवाह को भरमाने में सफल हो जाते हैं और अपराधी को बचा ले जाते हैं जिसके बदले में उन्हे मोटी फीस मिलती है.

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Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी आज़म ख़ान तो पहले से ही इस प्रकार के बोल बोलते रहते हैं, कारगिल युद्ध मुसलमान सिपाहियों ने जीता कहकर इसने सेना मे भी धर्म ढूंढ लिया. इससे पहले देश के मुसलमानो के लिये एक और बन्टवारे की बात कई वर्ष पहले कह चुके हैं. इससे पहले जो आरोप सेना पर आज़म ख़ान ने लगाये वह वामपंथी नेता और विशेषकर कविता कृष्णन एन डी टी वी पर हमेशा लगाती रही है. मेरी समझ में आज तक यह नही आया की इन पर देशद्रोह की कार्यवाही क्यों नही हो सकती. कुछ नेता कुछ भी बोल कर सॉफ बच निकलते हैं. केस भी दर्ज नही होता. ऐसे मामले मे तो सरकार और प्रशासन को खुद सन्ज्ञान ले कर मुकदमा दायर कर देना चाहिये. अदालत भी अनेक मामलों पर स्वत: सन्ज्ञान लेती है पर नेताओं के बयानों पर अदालत भी चुप रहती है.

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यह बात सही है कि इनकम टेक्स देने वालों की संख्या सिर्फ 32 लाख ही नहीं, बल्कि बहुत ज्यादा है, लेकिन उसमे टेक्स देने की बजाय आयकर रिटर्न भरने की क़ानूनी ओपचारिकता निभाने वाली बात ही ज्यादा है ! एक नवीनतम आंकड़े के अनुसार भारत में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्‍या अब बढ़कर 7.4 करोड़ हो गई है ! इनमे अधिकतर संख्या उनकी है, जो कोई कर नहीं देते हैं ! एक आंकड़े के अनुसार साल 2012-13 में कुल 2.87 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न दायर किए लेकिन उनमें से 1.62 करोड़ ने कोई कर जमा नहीं कराया ! इस तरह कर भुगतान करने वालों की संख्या करीब 1.25 करोड़ ही थी जो देश के 125 करोड़ जनसंख्या के महज़ एक प्रतिशत के बराबर है ! वार्षिक 100 से 500 करोड़ रुपये की आमदनी वाले वर्ग में महज तीन लोगों ने 437 करोड़ रूपये के कुल कर का भुगतान किया ! इन आंकड़ों से बड़ी सरलता से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में मध्यम वर्ग से लेकर उच्च आय वर्ग तक में इनकम टेक्स की चोरी कितनी ज्यादा है !

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आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपकी बात सही है कि देशद्रोहियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होते ही मीडिया और मोदी सरकार विरोधी नेता एकजुट होकर चिल्लाते हैं, लेकिन कार्यवाही तो होनी ही चाहिये क्योंकि मोदी सरकार राष् ट्रीय सुरक्षा को लेकर आम जनता के प्रति जबाबदेह है न कि गद्दारों और देशद्रोहियों के प्रति ! कोई टीवी चैनल भी यदि कहीं पर गलत है तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिये ! कई लोग कह रहे हैं कि मामूली रकम के लिये एक टीवी चैनल के मालिक के खिलाफ कार्यवाही हुई ! बताइये 48 करोड़ की रकम मामूली है, जबकि दस बीस हजार के लोन पर आम आदमी के खिलाफ कानूनी रूप से सूद व्याज सहित वसूली हेतु आरसी काट दी जा रही है ! मीडिया के नाम पर लूटपाट और मनमानी की हद हो गई ! ऐसे लोंगों के खिलाफ जरूर कार्यवाही होनी चाहिये ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय सदगुरु जी, आपको कड़वा सच बताने के लिये बहुत बहुत बधाई. ढील देने का नतीजा सबने देख लिया. नतीजा बताता है सरकार की नीतियाँ गलत हैं. यह सरकार ऐक्शन तो लेती है पर उन पर जो इनके खिलाफ फैसबूक पर लिखते हैं तब पूरी माशीनरी पूरे जोर शोर से कार्यवाही करती है. सेनाध्यक्ष या सेना पर कोई भी उलूल जुलूल बके नेताओं को कोई फर्क नहीं पड़ता. इनके खिलाफ बोलोगे तो cbi या इनकम टॅक्स में फसा दिये जाओगे. पाकिस्तान पर मेहरबानियाँ किये जाओ उनके कैदियों को अपने कैदियों से ज्यादा तवज्जो दो यही कारण है की पाकिस्तान कहता है हमारे कैदी अपनी सजा पूरी कर चुके थे. (आपने कोई एहसान नही किया) खुद पाकिस्तान हिन्दुस्तान के कैदियों की सजा पूरी होने के बाद भी नहीं छोड़ता, उसे भारतीय नेताओं की मानसिकता अच्छी तरह से पता है

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आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! आप इस विषय हमेशा लिखते रहते हैं ! हमलोग इस उम्मीद से थोड़ा इंतजार कर रहे थे कि मोदी सरकार देशद्रोहियों के खिलाफ देरसबेर कार्यवाही जरूर करेगी ! लेकिन तीन साल बीत जाने पर भी इस मामले मे उसने कुछ नही किया ! अब हमलोग भी जो सच है, उसे लिख रहे हैं और लिखना भी चाहिये ! मेरे लिये देश से ज्यादा प्रिय और सर्वोपरि कोई भी नही है ! आपकी इस बात से पूर्णत: सहमत हूँ कि मोदी सरकार आने वाले दो साल मे भी अगर देशद्रोहियों के खिलाफ कोई सख्त कार्यवाही नही करती है तो देश की जनता 2019 मे उसे माफ नही करेगी ! पोस्ट की सराहना के लिये और ब्लॉग पर अनमोल समय देने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय तरुण शर्मा जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! पोस्ट की सराहना के लिये हार्दिक आभार ! मोदी सरकार न तो कश्मीर मे और न ही देश के अन्य भागों मे देशद्रोही तत्वों के खिलाफ कोई सख्त कार्यवाही कर रही है ! पाकिस्तान के खिलाफ भी उसकी नीति कठोरता की बजाय दयालुता वाली ही है ! चाहे आतंकी हों या नक्सली, राष्ट्र के ये मुख्य विद्रोही तो दिन पर दिन बढ ही रहे हैं, इसके साथ ही इनका समर्थन करने वाले और राष्ट्र के खिलाफ, सेना और सेनाध्यक्ष के खिलाफ बोलने वाले भी दिनोदिन बढते ही जा रहे हैं ! मोदी सरकार ऐसे देशद्रोही तत्वों से निपटने मे अब तक तो नाकाम ही रही है ! अब शेष बचे दो साल मे वो क्या करती है, यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा ! पोस्ट से सहमति व्यक्त करने और प्रतिक्रिया देने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद !

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आदरणीय जीतेन्द्र अग्रवाल जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट को पसंद कर आपने उसे जो महत्ता और सार्थकता प्रदान की है, उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद ! मोदी के शासन मे एक तो देशद्रोही तत्व खुल के अपना राष्ट्रविरोधी कार्य नही कर पा रहे हैं, दूसरे बीजेपी और मोदी से चिढ के कारण भी देशद्रोहियों की भरमार हो गई है ! मोदी विरोधियों का उन्हे भरपूर समर्थन भी मिल रहा है ! आपकी इस बात से पूर्णत: सहमत हूँ कि देश के खिलाफ शर्मनाक बयान देने वालों और देश तोड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ मोदी सरकार ने अब तक ऐसी कोई भी सख्त कार्यवाही नही की है, जिससे बाकियों को सबक मिले ! देखिये अब वो अपने शेष बचे दो साल मे क्या करती है ! नही कुछ करेगी तो 2019 मे उसका परिणाम भी भुगतेगी ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय खालिद ख़ान जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आलोचना कीजिये, उस पर कहन आपत्ति है, लेकिन किन्तु संवैधानिक पदों पर बैठे लोंगो की अवमानना करना भारत ही नही, बल्कि सभी देशों मे कानूनन जुर्म है. दुनिया के सभी मुल्कों मे मुल्क की, राष्ट्रपति की, उपराष्ट्रपति की, प्रधानमन्त्री की, न्यायाधीश की, सेनापति की और सेना की अवमानना करना कानूनन जुर्म है ! सेनापति को सड़क का गुंडा कहना और जनरल डायर से तुलना करना अवमानना है ! सेना और प्रधानमन्त्री के संदर्भ मे 'खून की दलाली' शब्द का इस्तेमाल करना भी सेना की अवमानना के अंतर्गत आता है ! यह प्रधानमन्त्री की भी अवमानना है ! भारत के कानून की ही बात हो रही है ! आपको मालूम होगा कि पाकिस्तान सहित बहुत से मुल्कों मे ईश्वर की आलोचना करने यानी 'ईश निन्दा' की सजा मौत है ! अपने मुल्क और सेनाध्यक्ष की निन्दा करना ईश्वर की निन्दा करने से भी कहीं ज्यादा बड़ा जुर्म है ! भारत मे बोलने की आजादी है, लेकिन आप कुछ भी बोलिये, ऐसा नही है ! सरकार ऐसे लोंगों पर कानूनी कार्यवाही कर सकती है, जिनके बयानों की चर्चा की गई है ! ब्लॉग पर समय देने के लिये धन्यवाद !

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Rajeev Gupta आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, हाई कोर्ट के माननीय जज ने इस तरह का फैसला सुनाकर देश मे मौजूद सभी नकली सेकुलर लोगों को आइना दिखाया है. आज देश को इसी तरह के जजों की जरूरत है. हर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट मे भी इसी तरह के योग्य जजों की नियुक्ति होनी चाहिये. गाय की हत्या करके उसके मांस का भक्षण करने वाले राक्षसों का सामाजइक बहिस् कार होना चाहिये. ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग भी गाय के प्रति हिन्दुओं की आस्था का समर्थन करते हैं लेकिन कुछ नकली सेकुलर राजनेता ( जिनमे हिन्दू ही ज्यादा हैं) अपनी वोटों की राजनीति के लिये गौ माता का लगातार अपमान कर रहे हैं, जनता इन लोगों को पहले भी दंडित कर चुकी है और आगे भी दंडित करती रहेगी. आपने इस विषय पर ब्लॉग पेश करके पाठकों को एक शानदार जानकारी दी है. उसके लिये आपका अभिनन्दन एवं बधाई.

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भारतीय पुरुष हॉकी टीम रविवार को वल्र्ड लीग सेमीफाइनल्स 2017 के अपने तीसरे पूल मैच में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 7-1 से करारी मात दी. 'हॉकी इंडिया' के खिलाड़ियों ने पाकिस्तान से शानदार ढंग से मैच जीतकर 125 करोड़ हिन्दुस्तानियों का दिल तो जीता ही, इसके साथ ही उन्होंने हमारे सैनिकों के प्रति गहरी संवेदना और प्रशंसनीय सम्मान दिखाकर हिन्दुस्तानियों का माथा गर्व से ऊंचा कर दिया. सीमा पर पाकिस्तानी हमलों में शहीद हुए सैनिकों के लिए शोक संवेदना और पाकिस्तान के प्रति अपना गुस्सा जाहिर करते हुए सभी खिलाड़ियों ने अपनी बांह पर काली पट्टी बांधकर पाकिस्तान से मैच खेला. यही नहीं बल्कि भारतीय टीम के समर्थन में पूरे स्टाफ ने भी काली पट्टी बांधी. हॉकी हमारा राष्ट्रीय खेल है और 'हॉकी इंडिया' के सारे खिलाड़ी पूरी तरह से राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत हैं. 'हॉकी इंडिया' के सभी खिलाड़ियों और उसके स्टाफ को हम सेल्यूट करते हैं.

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दूसरी तरफ क्रिकेट के खेल में उसी दिन लन्दन में ही चैंपियन ट्राफी 2017 का फ़ाइनल मैच भारत-पाकिस्तान के बीच खेला गया. 'टीम इंडिया' द्वारा पहले तो गेंदबाजी करने का गलत फैसला लिया गया और उसके बाद घटिया गेंदबाजी व घटिया बल्लेबाजी करके पाकिस्तान के हाथों 180 रनों से बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा. बहुत से सवालों को अनुत्तरित छोड़कर पाकिस्तानी टीम को मैच जीतने के लिए बधाई देते हुए हम मान लेते हैं कि खेल में हारजीत तो होती ही रहती है, लेकिन अफ़सोस इस बात का है कि 'टीम इंडिया' के खिलाड़ी देश और सेना के सम्मान को भी तरजीह नहीं दिए. आतंकी मुल्क पाकिस्तान से हमारे देश की रक्षा करते हुए आये दिन सीमा पर शहीद हो रहे सैनिकों के प्रति सम्मान और पाकिस्तान के प्रति अपनी नाराजगी दिखाने के लिए 'टीम इंडिया' के खिलाड़ी भी तो अपनी बांह पर काली पट्टी बाँध के खेल सकते थे, किन्तु उन्होंने ऐसी संवेदना और देशभक्ति नहीं दिखाई. देशवासियों को अब ये सोचना चाहिए कि पैसे कमाने और बारहों महीने मौज-मस्ती में ही व्यस्त रहने वाले हमारे देश के क्रिकेट खिलाड़ी क्या किसी सम्मान के पात्र हैं? ऐसे संवेदनहीन खिलाडियों का बॉयकाट करना चाहिए.

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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का सोमवार को ऐलान कर दिया है. उन्होंने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद हेतु उम्मीदवार बनाया है. दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले रामनाथ कोविंद यूपी से दो बार राज्यसभा सांसद रहे. वो कई संसदीय कमेटियों के चेयरमैन रह चुके हैं. ऑल इंडिया कोली समाज और बीजेपी दलित मोर्चा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. अमित शाह ने कहा हैं कि गरीब समाज से ताल्लुक रखने वाले शख्स को राष्ट्रपति बनाने का फैसला किया है. रामनाथ कोविंद के नाम का ऐलान करके अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक जानकारों को चौंका दिया है, क्योंकि राष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर लग रही राजनीतिक अटकलों में कहीं भी उनका नाम सामने नहीं आया था.

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दलित चेहरा होने की वजह से रामनाथ कोविंद का विरोध अब विपक्षी दल पूरी एकजुटता के साथ नहीं कर पाएंगे. उनमे फूट भी होनी तय है. रामनाथ कोविंद के नाम पर आम सहमति भी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बन सकती है. हालांकि भाजपा पर दलित तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप भी जरूर लगेगा, क्योंकि वो विपक्षी पार्टियों पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाती रही है. राष्ट्रपति चुनाव में जारी सभी दलों के राजनीतिक प्रपंच और दांवपेंच से ऊपर उठकर समस्त भारतवासी यही उम्मीद करते हैं कि जो भी भारत के नए राष्ट्रपति बनें, उनसे हम सब लोगों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए और राष्ट्र की उन्नति में अपना योगदान देने के लिये सदैव आशीर्वाद और प्रेरणा मिलती रहेगी.

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जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी हारजीत  लोकतंत्र का हिस्सा है लेकिन लगता की कांग्रेस और विरोधी दल इस्सकी बखिया उखल रहे है जबसे बीजेपी केंद्र और राज्यों में सत्ता पर आई ये लोग इन बीजेपी शासित देशो में दंगे फसाद करके देश का नुक्सान कर रहे पहले आरक्षण के नाम पर और अब किसान आन्दोलन के नाम पर आराजकता फैला रहे..किसानो की समस्या कांग्रेस की ही दें है और क़र्ज़ माफी इसका उपाय नहीं बल्कि फसल बीमा के अलावा सरकारको खरीद करनी चाइये.चौहान जी इतने सालो से समस्या सुलझा रहे है. विडियो में कांग्रेस् नेता भड़काते दिखे एक विधयक कह रही थाने में आग लगा दो राहुल गाँधी लाशो पर राजनीती कर रहे कर्नाटक में किसान आत्महत्या करते राहुल नहीं जाते. लेकिन देश की जनता समझदार है और ऐसे नेताओं को कभी नहीं चुनेगी.सुन्दर विवेचात्मक लेख के लिए बधाई.

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Harish Chandra Sharma आदरणीय सदगुरु जी अभिनन्दन ,बहुत सुन्दर ..गीता पढ़ने से न हिन्दू प्रभावित होंगे, न गोहत्या का पाप धुलेगा.......किन्तु गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि....जो पुरुष धर्ममय गीता शास्त्र को श्रद्धा युक्त और दोष द्रष्टि रहित होकर पड़ेगा या श्रवण भी करेगा वहसमस्त पापों से मुक्त होकर उत्तम कर्म करने वालों के समान श्रेष्ठ लोकों को पायेगा | .....है अर्जुन तू मुझमे मन वाला हो ,मेरा भक्त बन ,मेरा पूजन कर मुझको प्रणाम कर |ऐसा करने से तू मुझे ही पायेगा | सम्पूर्ण धर्मों को त्यागकर तू केवल मुझ सर्वशक्तिमान सर्वाधार की शरण में आ जा | में तुझे सम्पूर्ण पापों से मुक्त कर दूंगा |तू शोक मत कर | ................यदि इन बचनों को यदि राहुल गाँधी ने पड लिया तो वे भी मोदी जी और स्वामी राम देव की तरह ही पुण्यवान बन जायेंगे | तभी भाजपाईयों में चिंता जाग्रत हो रही है..........ओम शान्ती शान्ती शान्ती

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आदरणीय अमित जी ! सादर अभिनन्दन ! आप अपनी प्रतिक्रिया मे लिखते हैं कि पूंजीपतियों की मदद से राहुल गाँधी की छवि पप्पू की बना दी गई है और मोदी जी ऐसे पेश किये जा रहे हैं, जैसे देश की राजनीति मे उनके अलावा कोई विकल्प नही है ! आपकी सोच गलत है ! राहुल गाँधी की पप्पू वाली छवि उनकी कमियों के कारण बनी है, पूंजीपतियों के कारण नही ! रही बात मोदी जी को तो उनमे मौलिकता है, जिसकी वजह से वो प्रधानमन्त्री बने हैं ! अरविन्द केजरीवाल भी अपनी मौलिक सोच की वजह से ही राजनीति मे टिके हुए हैं ! राहुल गाँधी ने नकल करने के सिवा अब तक किया ही क्या है ? रही बात किसान आन्दोलन की तो इसके पीछे किसानों की खस्ताहाल स्थिति से ज्यादा कांग्रेस का खुराफाती हाथ काम कर रहा है ! प्रतिक्रिया देने के लिये धन्यवाद !

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AMIT परम ग्यानी बाबा सद गुरु जी महाराज आप भी गो माता की पूंछ पकड कर वेतरनी पार करने का निस्चय कर चुके है ओर हम भी तरने के लिये गो मैय्या पूंछ पकड कर पीछे लटक लिये है.... राजनीति मे मेचफ़िक्सिंग पार्टनर भाजपा वा कॉंग्रेस राजनीति के लिये एक समान विचारधारा रखते है... ना पहले गुजरात दंगो पर बंटी जी कभी जेल यात्रा पर गये ओर ना अब राहुल गाँधी या फिर दामाद जी घोटालो पर जेल यात्रा पर जाने वाले है.... क्योंकि जो सत्ता मे बेत्ता है वही मलाई खाता है इसी के चलते देश की जनता को भ्रमित कर के सत्ता हतियाने की खवाइश मे एक दूसरे पर हिन्दुओ द्वारा गाय माता को घर या दुकान के आगे से भागा देने के लिये पानी के छींटे मारने के समान पानी उछालते रहते है..... अभी पूंजीपटियो की मदद से राहुल गाँधी की छवि पप्पू की बना दी गयी है ओर बंटी जी एसए पेश किये जा रहे है जेसे देश की राजनीति मे उनके अलावा देश मे दूसरा कोई विकल्प नही है..... पर देश मे बड़ी तेज़ी से बड़ते किसान आतमहत्या के मामले वा मध्य प्रदेश मे किसानो को गोलियो से भुन दिये जाने पर अंधभक्तो द्वारा चुटकिया लेना भाजपा के लिये जी एस टी की तरहा एक ओर वाटरलू साबित होगा.... बहुत जल्द अंधभक्तो द्वारा देश की जनता को धमकाने के लिये देशद्रोही,आतंवादी,नक्सलवादी की तर्ज़ पर किसानवादी की उपाधि से अलंकृत किया जाना तय है.......

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आदरणीया लीला तिवानी जी ! सादर अभिनन्दन ! गीता भगवान का गाया हुआ गीत है, जिसका उसका भावार्थ महसूस करने से जीते जी मोक्ष की सुखानुभूति महसूस होती है ! गीता को पढने या सुनने मात्र से राहुल गाँधी और कांग्रेस का राजनीतिक उद्धार नही होगा ! अपने पापों के प्रायश्चित के लिये और अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिये गीता का अध्ययन-मनन अच्छा है, राजनीति से गीता का कोई सरोकार नही ! राहुल गाँधी को कोई राजनीतिक लाभ नही मिलने वाला, बल्कि उल्टे गलत व्याख्या पर उनका उपहास ही उडेगा ! गीता का मर्म और भगवान के मनोभाव जानने के लिये किसी ग्यानी और तत्वदर्शी की संगति करना आवश्यक है ! गीता मे भी यही लिखा हुआ है ! आपने सही कहा है कि गीता एक जीवन-पद्धति है, जिसका शुद्ध मन से अनुशरण करने पर ही आध्यात्मिक लाभ मिलना संभव है ! पोस्ट को जागरूक करने वाली, सटीक और सार्थक महसूस करने के लिये हार्दिक आभार !

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Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी जब से उत्तर प्रदेश मे योगी सरकार ने किसानो के एक लाख कर्ज़ की माफी की उसके बाद से अन्य जगह पर भी ऐसी मांग होगी यह तो अपेक्षित था. इस आग मे घी डालने के लिये शिवसेना जो महाराष्ट्र की हार नही पचा पा रही है और सत्ता मे रहते हुए भी विपक्ष की ही भूमिका मे है के साथ कांग्रेस और एन सी पी भी तैयार थे. शिवराज को कमजोर करने के लिये मध्य प्रदेश से आन्दोलन शुरु हुआ और क्योंकि राजनीतिक दल साथ थे इसलिये ही हिंसा हुई. स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू की जानी चाहिये. इससे सभी सहमत होंगे पर इस सरकार ने जितना किसानो के हित के लिये किया है उतना कभी नही हुआ. इससे पहले सिर्फ समर्थन मूल्य मे कुछ बढ़ोतरी करके सरकारें अपने कर्तव्या की इति श्री समझ लेती थी.

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आदरणीय अमित जी ! ब्लॉग पर आपका स्वागत करते हुए अंत में प्रधानमंत्री मोदी का जिक्र करूंगा ! देश के प्रधानमंत्री तक के लिए यदि मन में जहर भरा हो तो ऐसे मलिन मन को धिक्कार है ! आप बुद्धिजीवी हैं, क्या आप नहीं जानते हैं कि प्रधानमंत्री के जिम्मे बहुत से काम होते हैं ! देशहित के लिए समय समय पर विदेश भी जाना पड़ता है ! वो विदेश आंनद लेने नहीं, बल्कि जरुरी कार्य से गए हैं ! कभी कभी मुझे आश्चर्य होता है कि आप बुद्धिजीवी हैं, अपने आप को पढ़ालिखा हिन्दू कहते समझते हैं, फिर भी आपकी प्रतिक्रिया अपने ही मन के बुने हुए उन्माद में डूबे उन जाहिल और अनपढ़ लोगों जैसी होती है जो इस देश में रहते हुए भी यहाँ के लोकतंत्र, जनता के दिए हुए बहुमत और जनता के द्वारा भारी बहुमत से चुने हुए प्रधानमंत्री का सम्मान तक नहीं कर सकते हैं ! धिक्कार है ऐसे जीवन को ! आप आलोचना कीजिये ठीक है, लेकिन ये क्या पागलपन है कि हर बात पर देश के प्रधानमंत्री को गाली देते रहो, उन्हें बेवजह कोसते रहो ? ब्लॉग पर समय देने के लिए धन्यवाद !

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आदरणीय अमित जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आप बार-बार यही रट रहे हैं कि मध्यप्रदेश सरकार की भाजपा सरकार ने किसानों पर गोली चलवा दी ! किसानों को शांतिपूर्ण आंदोलन करने से किसने रोका है ? लेकिन यदि वो उपद्रव, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ करेंगे तो कोई भी सरकार हो, कानूनी ढंग से ही निपटेगी ! उपद्रव में या गोलीबारी में किसान हों या पुलिस, किसी भी मृत्यु हो, वो निसंदेह बहुत दुखद है ! आप जानबूझकर इस सत्य से आँख मूंदे हुए हैं कि 1998 में जब मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में किसानों ने हिंसक आंदोलन किया था, तब 12 जनवरी 1998 को किसानों के हिंसक प्रदर्शन के दौरान 18 लोगों की मौत हुई थी. उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी ! उसकी चर्चा क्यों नहीं करते हैं ? प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद !

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आदरणीय अमित जी ! सादर अभिनन्दन ! आंदोलनकारियों को किसान मानने से कौन इंकार कर रहा है ? हम तो सिर्फ यही कह रहे हैं कि किसान आंदोलन की आड़ में विपक्षी दल भाजपा सरकार के विरुद्ध षड्यंत्र रच रहे हैं और उनकी शह पर अराजक व उपद्रवी तत्व हिंसा फैला रहे हैं, आगजनी और लूटपाट कर रहे हैं ! आज के अधिकतर किसान पहले की तरह गरीब और निरीह नहीं हैं ! आइये कभी मेरे गाँव और किसानों की स्थिति देखिये ! गाँव पर रहने वाले मेरे परिवार के लोग भी किसान ही हैं ! थोड़ी भूमि वाले और भूमिहीन किसानों में गरीबी जरूर है, लेकिन सरकार उनकी मदद भी कर रही है ! रही बात कर्ज की तो थोड़ी भूमि वाले और भूमिहीन किसानों के कर्जे माफ़ होने चाहिए, सबके नहीं ! सादर आभार !

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AMIT परम ग्यानी बाबा सदगुरु जी महाराज... धान्य हो गुरु देव की अब आपने प्रदेश सरकार की तरहा मुंह छिपाते हुए इन्हे किसान तो माना....! इससे पहले तो आप इन गरीबो को 56 इंच का सीना छोड़ा कर के किसान मानने को ही तेयार नही थे.... प्रतीत यह हो रहा था की जेसे आप कह रहे हो की तुम गरीब निरीह जानवर हो ओर इसलिये तुम्हारा हम सन्यासी बाबाओ से क्या काम....! जो अपने को वांशिक रूप से गरीब मानते है उनको यह नही पता की गरीबी मे कुपोषण से बाकी शरीर सूखने के कारण पेट फूला दिखता है ओर इसका वह अपने स्तर पर मुखोल बना किसानो को मोटा ताज़ा बता रहे है.....! व्यापम घोटाले की तर्ज पर मामा सरकार मानने को तेयार नही थी की किसानो को उसने गोली चलवा कर मरवाया.... ओर अब विपक्षी षद्यंत्रकारी बता कर इन्ही अराजक तत्वो को मुआवजा बांटने का ढिंढोरा पिट रही है....! पर इन सबसे परे देश के सबसे बड़े वा रजिस्टर्ड गरीब वा देशकी सबसे कमजोर जाती से आये बंटी जी विदेशो मे ठंडी हवाओ का आनंद ले रहे है......

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आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! सबसे अच्छा उपाय तो यही है कि बार बार किसानों का कर्जा माफ़ कर उन्हें याचक बनाने की बजाय उन्हें आत्मनिर्भर बना दाता बनाया जाए ! सरकार के पास संसाधनों की कमी नहीं है ! वो किसानों से उसकी उपज खरीदकर उन राज्यों में भेंजे, जहाँ उसकी बेहद मांग है ! केंद्र सरकार के पास रेलगाड़ी से लेकर हवाईजहाज तक का साधन मौजूद है ! केंद्र सरकार राजनीतिक पार्टियों को किसानों के हित के लिए संघर्ष करने के नाम पर हिंसक आंदोलन क्यों चलाने दे रही है ? अराजक तत्वों को पकड़ के जेल के अंदर करे और किसानों से सीधी बात करे ! चुनाव के समय भाजपा ने किसानों से जो वादा किया है, वो पूरा करे ! ब्लॉग पर समय देने के लिए और पोस्ट को शानदार महसूस करने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

Rajeev Gupta आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, आपकी यह बात ठीक है कि किसानों की कर्ज़ माफी ना करके सरकार को उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने का प्रयास करना चाहिये. इस दिशा मे काम चल भी रहा है क्योंकि मोदी जी ने बहुत पहले ही यह घोषणा की थी कि उनकी सरकार किसानों की आमदनी अगले पांच सालों मे दुगना करने के लिये कृत संकल्प है. अगर ऐसा होता है, तो किसानों के लिये बहुत अच्छा होगा. किसान हमारे अन्नदाता है, उनका ख्याल रखा जाना चाहिये लेकिन किसानों के बहाने कोई राजनीतिक पार्टी नकली किसान आन्दोलन खड़ा करने की कोशिश करे तो सभी का फ़र्ज़ है कि उस साज़िश का पर्दाफाश भी करे. आपने इस ज्वलंत समस्या पर शानदार ब्लॉग प्रस्तुत किया, उसके लिये आपका हार्दिक आभार एवं अभिनन्दन.

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महाराष्ट्र के किसान नेता किशोर तिवारी ने राज्य में जारी किसान आंदोलन को जायज तो ठहराया है, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया है कि विपक्षी नेता इस आंदोलन का राजनीतिक इस्तेमाल मुख्यमंत्री देवेन्द फडणवीस के ख़िलाफ़ कर रहे हैं ! उनका कहना है कि मुख्यमंत्री देवेन्द फडणवीस की ग्रामीण भागों में लोकप्रियता चरम पर है इसके अलावा उनके नेतृत्व में बीजेपी लगातार ग्रामीण इलाको में जीत हासिल कर रही है ! उनकी इसी लोकप्रियता से सकते में आये पश्चिम महाराष्ट्र के सभी दलों के नेता किसान आंदोलन को आधार बनाकर उन पर राजनीतिक हमला कर रहे है ! उनके अनुसार मुख्यमंत्री ने कई पहल की जिसका नतीजा रहा की किसानो के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन विपणन कि समस्या बढ़ी है ! किसानो को न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम दाम में अपनी फ़सल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है ! किसान नेता किशोर तिवारी ने किसानो द्वारा उठाई गयी माँगो का पूरी तरह समर्थन करते हुए संपूर्ण कर्जमाफी की वकालत की है ! उनका कहना है कि किसानो से वादा कर बीजेपी ने खुद अपने गले में घंटी बाँधी है !

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मेरे विचार से तो देश के कुछ भाजपा शासित राज्यों में जारी आन्दोलन मे किसानों को बरगलाकर शामिल किया गया है ! आन्दोलन को हिंसक बनाने वाले, पत्थरबाजी और आगजनी करने वाले निश्चित रूप से किसान नही, बल्कि धन के बलपर इकट्ठे किये गये अराजक और उपद्रवी तत्व हैं ! ये किसानों के आन्दोलन से ज्यादा भाजपा और मोदी विरोधी नेताओं का षडयंत्र है ! कायदे से जांच हो तो इस षड्यंत्र में शामिल कांग्रेस और कई अन्य दलों का पर्दापाश हो जाए ! यदि किसान वाकई आन्दोलन करते तो सबसे पहले कर्नाटक मे करते, जहां पर पिछले दो साल मे मध्यप्रदेश से कई गुना ज्यादा लगभग 2300 किसानों ने आत्महत्या की है ! वहा के किसान क्यों खामोश हैं?

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नेपाली कांग्रेस के महासचिव कृष्ण प्रसाद सितौला ने नेपाल की शांति एवं संविधान का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया में एक प्रमुख भूमिका निभाई था. साल 2015 में उन्होंने कहा था कि 'हिंदू समर्थकों के लिए हमने गाय को अपना राष्ट्रीय पशु बनाया है. अब गाय को संवैधानिक संरक्षण मिल गया है और गोहत्या पर पाबंदी भी लगा दी गई है. पहली संविधान सभा से यह प्रावधान हटा दिया गया था, लेकिन हम इसे वापस लेकर आए हैं.' भारत में भी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के लिए कृष्ण प्रसाद सितौला जैसा ही भगीरथ प्रयास किसी समर्थ नेता को करना होगा. गाय हिन्दू धर्म में इतनी पवित्र क्यों है? काफी समय पहले एक संत से मैंने पूछा था. उन्होंने कहा था, यह 84 लाख पशु-पक्षी व कीड़े-मकोड़े वाली योनियों में सर्वोच्च योनि है. इसके बाद मनुष्य का जन्म मिलता है.

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नेपाल में अधिकतर लोग मांसाहारी हैं. किन्तु फिर भी साल 2015 में लागू नेपाल के नए धर्मनिरपेक्ष संविधान में गाय को देश का राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया. नेपाल हिन्दू बहुल देश है. साल 2015 से पहले यह दुनिया का एकमात्र हिन्दू राष्ट्र था. अब नए संविधान के तहत इसे सेक्यूलर यानि धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया है. गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने को लेकर यहाँ भी वर्षों तक विभिन्न दलों के बीच राजनितिक तकरार हुई. कुछ सांसदों ने एक सींग वाले गैंडे को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का प्रस्ताव किया था. गाय को हिंदू धर्म में पवित्र पशु का दर्जा प्राप्त है और हिन्दू बहुल देश होने के नाते अन्तोगत्वा गाय को देश का राष्ट्रीय पशु बनाने का फैसला किया गाया. भारत भी इस मामले में नेपाल का अनुकरण करते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर सकता है.

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केंद्र सरकार ने केवल बड़े पशु बाजारों में कुछ मवेशियों की बिक्री पर रोक लगाई है. केंद्र सरकार निर्णय तो अच्छा ली है, लेकिन उसने दो गलती की है, एक तो उसने उन राज्य सरकारों से कोई सलाह नहीं ली, जहाँ पर गोमांस खाया जाता है या फिर जहाँ का मुख्य भोजन ही मांसाहार है. केंद्र सरकार ने दूसरी गलती यह की है कि गाय के साथ-साथ बैल, सांड, बधिया बैल, बछड़े, बछिया, भैंस और ऊंट आदि को भी अपनी मवेशी की परिभाषा में शामिल कर लिया है और इन सबकी बिक्री पर रोक लगा दी है. अब सवाल यह पैदा होता है कि गाय और उसके परिवार यानि बैल, सांड, बधिया बैल, बछड़े और बछिया को तो गौशाला में किसी तरह से जगह मिल जायेगी, लेकिन भैंस और ऊंट को आप कहाँ रखेंगे. क्या सरकार भैंसशाला और ऊंटशाला भी खुलवाएगी? आखिर उनको संरक्षण किस तरह से दिया जायेगी? लोग यदि इन्हे सड़कों पर खुला छोड़ देंगे तो बहुत भारी समस्या पैदा हो जायेगी. सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार कर इसमें कुछ संशोधन करना चाहिए.

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हिन्दुस्तान मे प्राचीनकाल से ही गाय को पवित्र मान पूजा हो रही है ! प्राचीन काल मे राक्षस सनातनधर्मियों को चिढ़ाने के लिये यह कहकर गाय काटते और खाते थे कि तुम इसे पवित्र मानते हो, इसलिये हम खायंगे ! शरीर से तथा मायावी शक्तियों व सिद्धियों से अति बलवान होते हुए भी राक्षस जाति का पवित्र गायों के वध और भक्षण के कारण ही समूल संहार हो गया ! इस संसार मे जो कुछ भी पवित्र है, ईश्वर की विशेष विभूति होने के कारण उसकी पूजा करनी चाहिए. किन्तु यदि पूजा यदि न भी करना चाहें तो उसका निरादर मत कीजिये और उसे नष्ट मत कीजिये ! ईश्वर द्वारा निर्मित पवित्र चीजों को नष्ट करना विनाश को आमंत्रित करना है ! मैने अपने अब तक के जीवन मे गाय को डंडे से मारने वाले कई लोंगो की बहुत बुरी दुर्दशा होते देखी है ! गौ संरक्षण का विरोध करने वालों को ईश्वर सदबुद्धि दें !

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जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी अंग्रेज़ो के आने के पहले देश बहुत संपन्न था इसीलिये अँगरेज़ खूब लूट कर ले गए और गया का बहुत बड़ा योगदान था.देश की अर्थ व्यवस्था को तोड़ने के लिए अंग्रेज़ो ने जो वध शुरू करवाया और गावो पर टैक्स लगा दिया.आज़ादी के बाद मुस्लिम तुष्टीकरण की वजह से और वाम डालो के प्रभाव से हिन्दुओ को शर्मिंदगी झेलनी पडी .अब मोदीजी के राज्य में उम्मीद है लेकिन समय लगेगा.७० साल की गंदगी दूर करने के लिए समय लगेगा क्योंकि सेक्युलर नेता और मीडिया एक साथ विरोध में है लगता सर्वोच्च न्यायालय भी मुसलमानो से डरता इसीलिये हिन्दू हिट पर सुनवाई नहीं करता.गीता को राष्ट्रीयग्रंथ गाय को राष्ट्रीय पशु और गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित होगी बस समय का इंतज़ार करना पड़ेगा.आपके सुन्दर लेख के लिए साधुवाद .ये दुर्भग्य है हिन्दुओ का की जहाँ उनका बहुमत है वही उनकी कोइ सुनवाई नहीं होती.

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आदरणीय अमित जी ! सादर अभिनन्दन ! एक प्रतिशत अमीरों के पास देश की 51 प्रतिशत सम्म्पती है ! कोई भी सरकार हो बिना उनकी मदद के निजी क्षेत्र मे कुछ ज्यादा नही कर सकती है ! पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा डब्ल्यूटीओ बनने के साल भर बाद भारत ने 1996 में दिया था ! इसके लिये मोदी सरकार को दोष न दें ! पाकिस्तान से यह दर्जा छीनने के लिये भारत को डब्ल्यूटीओ मे जाना होगा और कारण भी बताना होगा ! बीफ खाने वाले हर पार्टी मे हैं ! आपकी इस बात से पूर्णत: सहमत हूँ कि हमारी गौमाता इस देश की डर्टी पॉलिटिक्स का शिकार हो चुकी हैं ! उनके नाम पर सब पार्टिया जनता को वेवकूफ़ बना रही हैं ! गौमाता से प्रेम होता तो सब मिलकर कब का उसे 'राष्‍ट्रीय पशु' घोसित करा दिये होते ! प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

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Nand Jee राजेन्द्र ऋषि जी, मणिशंकर जैसे पाकिस्तानी दलाल (हालांकि मैं कभी ऐसे शब्द इस्तेमाल नही करता हूँ, लेकिन मामला जहा देश की अस्मिता से जुड़ जाय तो सभी शब्दो का इस्तेमाल करना चाहिये) के लिये इतना लम्बा-चौड़ा ब्लॉग. जनाब ऐसे लोग संग्यान लेने के लिये नही, दुत्कारे जाने के काबिल है. सालो पहले सोनिया को पी. एम. बनाए के मुद्दे पर मुलायम सिंह ने वीटो कर दिया था. कुछ दिनो के बाद एच. के. दुवा (संपादक हिन्दुस्तान टाइम्स) के यहा पार्टी थी, अय्यर भी थे और अमर सिंह भी. उस पार्टी मे अय्यर दारू के नशे मे अमर सिंह से झगड़ पड़े और मुलायम के बारे मे अपशब्द बोलने लगे, नतीजा अमर सिंह ने सभी के सामने इस अय्यर की लात- घुस्सो से ठुकाई शुरु कर दी और मजेदार बात यह की इसे छुड़ाने भी कोई नही आया. आखिर एच. के. दुआ ने किसी तरह अमर सिंह को समझा बुझा कर मामला शांत किया. तो भई अय्यर और सलमान खुरसिद जैसे मानसिकता वाले लोगो की कांग्रेस मे बड़ी पुछ होती है. 44 तक ये पार्टी ऐसे ही नही पहुची है.

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AMIT परम आदरणीय बाबा सदगुरु जी महाराज, सादर नमस्कार, क्या हरीश साल्वे जी ने आर एस एस की सदस्यता ले ली है....? अचानक यह बंटी बबली अंध भक्तगणो की नज़रो मे राष्ट्रवादी केसे बन गये...? ....! मे याद दिलाना चाहूंगे की.......यह वही हरीश साल्वे है जिन्होने याकूब मेनन की सज़ा का विरोध किया था... गुजरात दंगे मे बंटी के खिलाफ मुसलमानो की तरफ से केस लड़े थे...! एन डी टी वी पर बेन लगाने के मुद्दे मे यह उस देशद्रोही चेनल के वकील थे....! दिल्ली के रामलीला मेदान मे क़ाडिये बाबा आमदेव को पड़ी मार के समय यह दिल्ली पुलिस के वकील रहे थे...! हिट एंड रण केस मे सलमान ख़ान के वकील थे....! ओर भोपाल गेस काण्ड मे विदेशी कम्पनी के वकील रह चुके है....! लगता है की भक्तगणो का पूर्ण कॉंग्रेसी कर्ण हो चुका है.....!

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आदरणीय अमित जी ! सादर अभिनन्दन ! आप एक अच्छे बुद्धिजीवी हैं, ब्लॉग को ध्यान से पढ़ते हैं, इस बात के लिये आपकी तारीफ करूंगा ! लेकिन एक कमी भी है कि अपनी सुविधानुसार बात को किसी भी दिशा मे मोड देते हैं ! बीफ (गाय को छोड़कर अन्य जानवरों के मांस) के निर्यात मे भारत पहले से ही आगे रहा है ! रही बात पशु हिंसा की तो बेशक पशु हिंसा बंद होनी चाहिये ! भारत मे पशु हिंसा बलि और कुर्बानी के रूप मे भी है, वो भी बंद होनी चाहिये ! साधु जगत कहिये, हर जीव से प्रेम या अहिंसा कहिये, उससे जुड़े होने के कारण इस मुद्दे पर कई ब्लॉग लिखे, पर कौन सुनता है ? रही बात नोटबंदी से पत्थरबाजी रुकने की तो आप भी जानते हैं कि वो सत्य था ! बार बार नोटबंदी संभव नही, ये बात सब जानते हैं ! आतंकियों को फंडिग जो रही है, उसे रोकना होगा ! आतंकी तभी कमजोर होंगे, जब उन्हे सपोर्ट करने वाला पाकिस्तान कमजोर होगा ! रही बात बेरोजगारी की तो सरकारी या आईटी सेक्टर की स्थिति सबको मालूम है ! सरकार भी जानती है, इसलिये कौशल विकास के कार्यक्रम को बढ़ावा दे स्वरोजगार को बढ़ावा और पूरी मदद दे रही है ! जो मेहनती हैं और काम करना चाहते हैं, वो कहीं न कहीं रोजगार का रास्ता भी ढूंढ ले रहे हैं और सरकार अपनी तरफ से उन्हे पूरी मदद भी दे रही है ! देश की दिनोंदिन बड़ी तेजी से बढ़ती आबादी को देखते हुए बेरोजगारी की समस्या पूर्णत: हल होने मे समय जरूर लगेगा ! ब्लॉग पर समय और प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

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AMIT परम आदरणीय बाबा सदगुरु जी महाराज सादर नमस्कार, लालू ओर कचालू की कथा वांचते वक्त आप ने लिखा की नोतबंदी से आतंकवादी गतिविधिया रुकै थी पर टीन महीने मे ही दूबारा धन आने से फिर चालू हो गयी.... क्यों ना एक बार फिर नोतबंदी कर दी जाये....! बल्कि क्यों ना बंटी बबली सरकार द्वारा नियम ही बना दिया जाये की हर तीन महीने मे नोतबंदी लागू होगी...? बंटी बबली के कहने से नही बल्किआपके कहने पर एक बार हम मान जाते है की देश की अर्थव्यवस्था दुनिया मे सबसे तेज़ी से बड रही है....! पर एसे जोब्लेस आर्थिक विकास का किसको फायदा मिल रहा है....? लाखो पढ़े लिखे नोजवान देश मे खाली बेठे है ओर आंकडो के हिसाब से हर साल केवल आई टी सेक्टर मे है 2 लाख लोग बेरोजगार होने के कगार पर है.... तब डिजिटल इंडिया से क्या लाभ होगा...? हमारा मानना था की साधु जगत से होने के कारण आप को पशु हिंसा करने पर ही एतराज होना चाहिये था पर इधर, आप हमारी मोसी भेंस को काटने का लाभ गिनवा रहे है....! इधर एक बार फिर देश की दूसरी सबसे बड़ी दूधारु माता रेलवे मे सेफ्टी सेस लगा कर आम जनता पर बोझ डालने मे माहिर प्रभु लीला अपरम पार उनको कामधेनु माता की श्रेणी मे स्थान दिलाने मे लगे है... जय हो

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लालूजी और उनके परिजन 1000 करोड़ की बेनामी सम्पत्ति बटोरने के मामले मे बुरे फंसे हैं ! लालूजी के बेटा, बेटी और दामाद सभी आरोपों के घेरे मे हैं ! कुछ नेता जनता को मूर्ख बना चुनाव जीतते हैं और सत्ता हथियाने के बाद अपनी आने वाली सात पीढ़ियों तक के लिये लूटपाट कर लेते हैं ! भ्रष्ट नेताओं द्वारा लूटी गई सरकारी सम्पत्ति वस्तुतः जनता की खून पसीने की गाढ़ी कमाई होती है, जो सरकार को टेक्स के रूप में प्राप्त होती हैं ! नेता सरकारी सम्पत्ति के रूप में जनता का ही धन लूटते हैं ! कांग्रेस के एक बड़े नेता और उनके बेटे भी कल विदेशी निवेश के जरिये धोखाधडी करके बेशुमार धन इकट्ठा करने के मामले मे सीबीआई के लपेटे मे आ चुके हैं ! जबतक ऐसे सभी नेताओं पर, चाहे वो किसी भी दल के क्यों न हों, सख्त कानूनी कार्यवाही नही होगी, तबतक न तो भ्रष्ट नेताओं के मन मे कानून का खौफ पैदा होगा और न ही देश से भ्रष्टाचार मिटेगा !

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आदरणीया लीला तिवानी जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! चर्चा मे शामिल होने के लिये हार्दिक धन्यवाद ! लालूजी 1000 करोड़ की बेनामी सम्पती बटोरने के मामले मे कल बुरे फंसे हैं ! बेटा बेटी दामाद सभी आरोपों के घेरे मे हैं ! कुछ नेता जनता को मूर्ख बना चुनाव जीतते हैं और सत्ता हथियाने के बाद अपनी आने वाली सात पीढ़ियों तक के लिये लूटपाट कर लेते हैं ! कांग्रेस के नेता चिदम्बरम और उनके बेटे भी धोखाधडी करके बेशुमार धन इकट्ठा करने के मामले मे कल सीबीआई के लपेटे मे आ चुके हैं ! जबतक ऐसे सभी नेताओं पर, चाहे वो किसी भी दल के क्यों न हों, सख्त कानूनी कार्यवाही नही होगी, तबतक न तो भ्रष्ट नेताओं के मन मे कानून का खौफ पैदा होगा और न ही देश से भ्रष्टाचार मिटेगा! पोस्ट को सटीक और सार्थक महसूस करने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! पोस्ट की सराहना के लिये धन्यवाद ! राष्ट्रपति के उम्मीदवार के रूप मे आडवाणी जी का नाम आपने लिया, पहली पसंद मेरी भी वही हैं, निसन्देह उन्होने भाजपा की बहुत सेवा की है, लेकिन उनकी उम्मीदवारी की राह मे शायद अयोध्या विवाद को लेकर चलने वाला मुकदमा आड़े आये ! इसलिये सुषमा स्वराज जी को मैने चूना ! उनके स्वास्थ्य सम्बन्धी कारणों से भी शायद ऐसा हो ! डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत तो हुआ ही है ! विदेशी रुपया जो भारत आ रहा है, उसमे तो फायदा है ही ! निर्यात मे डॉलर खरीदते समय ज्यादा रुपया देना होगा, ये बात सही है ! किन्तु रुपये का मजबूत होना हमारी अर्थव्यवस्था और आर्थिक सुधार सही दिशा मे जारी रहने का सूचक है ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

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Indresh Uniyal आदरणीय सदगुरु जी चारा से फिल्मो के नाम और बाबा तथा लालू के संवाद बहुत ही बेहतरीन लगे. पर सुषमा स्वराज को अभी में केन्द्रिय मंत्रिमण्डल में ही देखना चाहूंगा क्योंकि वह बहुत अच्छा काम कर रही हैं. राष्ट्रपति के लिये में लालकृष्ण आडवानी को सही समझता हूँ. एक निष्ठावान भाजपा कार्यकर्ता के रूप में उन्होने ही भाजपा को बहुत आगे तक बढाया है. यह इनके परिश्रम का फल होगा. दूसरी बात है डालर के बदले 60 से बढ़कर 65 रुपये मिलना मतलब डालर के मुकाबले रुपये की कमजोरी दर्शाता है. जहां मुद्रा के अवमूल्य होने से निर्यात को बढ़ावा मिलता है, रोजगार उत्पन्न होते हैं वही आयात पर बोझ बढ़ता है. यह बड़ा ही मुश्किल का अर्थशास्त्र है. इसलिये रिजर्व बैंक समयानुसार बाजार में डालर डाल कर या कमी करके इसे नियंत्रित करने की कोशिश करता है. मेरे विचार से डालर का भाव 62 रुपये से कम नही होना चाहिये और 65 से अधिक नही. क्योंकि में शेयर मार्केट में दखल रखता हूँ इसलिये यह बात कह पा रहा हूँ.

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आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! लालूजी की प्रेस कान्फ़्रेंस के बाद सोचा इसी मुद्दे पर कुछ लिखा जाये ! मोदी सरकार भले ही कश्मीर समस्या, नक्सली समस्या और बेरोजगारी जैसी कुछ पुरानी समस्याओं का समुचित हल अभी तक नही ढूंढ पाई हो, लेकिन उसका तीन साल का कार्यकाल भ्रष्टाचार से मुक्त और आर्थिक सुधारों के मामले मे किसी स्वर्णिम युग से कम नही रहा है ! जिन पर तमाम तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, वो नेता भला किस मुंह से मोदी की तारीफ करेंगे ! ब्लॉग लिखने लगा तो फ़ेसबुक पर लालूजी से जुड़े कुछ चुटकुले भी मिल गये ! उन्हे भी इस ब्लॉग मे जगह दे दी ! आपने ब्लॉग को समसामयिक, रोचक और मनोरंजक महसूस किया, इससे ब्लॉग को सार्थकता मिली ! ब्लॉग पर समय देने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! पाकिस्तान तो बार-बार यही साबित करता है कि वो एक धोखेबाज मुल्क है, लेकिन हम लोग इतने मानवतावादी और दयालु हैं कि उस पर विश्वास कर लेते हैं कि अब धोखा नहीं देगा ! धोखा देना उसका नेचर है, जो कभी बदल नहीं सकता है ! अब हमारे पास दो ही रास्ते हैं या तो हम नैतिकता, मानवता और दयालुता का दामन थामकर उसका जुल्म सहते रहें, उसके नापाक हाथों से अपने बहादुर सैनिकों की जान गंवाते रहें या फिर साम, दाम, दंड, भेद सब अपना उसे इतनी बुरी तरह से परास्त करें कि हमें परेशान करणा बंद कर दे ! ठीक है कि हिन्दुस्तान कि बेटी घर लौट आई है, लेकिन बात तो वही है कि सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया ? प्रतिक्रया देने के लिए सादर आभार !

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सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर सबजार भट के मारे जाने के बाद अशांति और प्रदर्शनों के मद्देनज़र कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए रविवार को घाटी के कई हिस्सों में प्रशासन ने कर्फ्यू वाली पाबंदियां लगा दी थी ! कश्मीर में रविवार को अलगाववादियों ने बंद का आह्वान किया था ! कर्फ्यू और अशांति वाले इस माहौल के बीच सेना में जूनियर कमीशन अधिकारी और अन्य पदों पर चयन के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा आयोजित हुई ! यह बहुत हैरानी वाली और बहुत अच्छी बात है कि अपने उज्ज्वल भविष्य की खातिर सेना में जाने के लिए करीब 800 कश्मीरी युवक बंद की प्रतिगामी अपीलों को पूरी तरह से खारिज करते हुए संयुक्त प्रवेश परीक्षा में बैठे !

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वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर नई दिल्ली वापस आने के बाद भी कश्मीर के अलगाववादी गठबंधन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गुणगान गा रहे हैं. उनका कहना है कि कश्मीर में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का प्रभाव बहुत अधिक है, इसलिए वहां पर शान्ति बहाली के लिए हमें उससे बात करनी चाहिए ! भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत के दायरे में रहकर बातचीत करने का सुझाव दिए थे ! मणिशंकर अय्यर हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गुणगान गाते समय यह भूल गए कि बातचीत शुरू करने की उसकी पहली शर्त आजादी है ! उसकी यह मांग कोई भी केंद्र सरकार स्वीकार नहीं करेगी ! मोदी सरकार तो ऐसा सुनने को भी तैयार नहीं होगी !

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जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी आपके लेखो को पढ़ कर बहुत जानकारी मिल जाती है.तीन तलक के मामले में मुस्लिम बोर्ड घिर गया क्योंकि सिद्ध नहीं कर प् रहा की ये कुरान में लिखा है.ये धर्म का या मुस्लिमो का नहीं मामले लेकिन मुस्लिम समाज में औरतो के ऊपर ना इंसाफी का मामला है सरकार ने कह दिया की यदि सर्वोच्च्न्ययालय इसपर कोइ फैसला नहीं देता तब भी वे कानून बनायेगे.लगता है अबकी बार अदालत इसपर जरूर निर्णय लेकर इसे अवैध घोषित कर देगी और सरकार से कानून बनाने को कहेगी.कपिल सिबल कितना नीचे गिर सकता ये साबित हो गया.मुस्लिम बोर्ड कपिल की अयोध्या के मामले की बात नहीं मानेगा.असल में तुष्टीकरण की नीति के कारन मुसलमानों का दिमाग ख़राब हो गया और उन्हें देश के कानून पर विश्वास नहीं रहा.देखिये क्या फैसला आता है लेकिन अब मुस्लिम औरतो को न्याय मिलेगा ऐसी देशवाशियो को उम्मीद है.सुन्दर लेख के लिए बधाई.

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आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! लेख का समर्थन करने के लिये बहुत बहुत अभिनन्दन और आभार ! ऐसे अपराधी मानसिक रोगी के साथ साथ भयंकर गुप्त रोगों के शिकार भी होते हैं ! मासूम बच्चियाँ इनके हमले से अक्सर असहनीय और अमानवीय पीड़ा झेलते हुए मर जा रही हैं या फिर उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जा रही है ! अब ऐसे अपराधियों को कानून यदि सख्त और शीघ्र सजा नही देगा तो पीड़ित पक्ष के लोग ऐसे अपराधियों को सबक सिखाने के लिये खुद ही कानून हाथ मे लेने लगेंगे, जो बहुत अराजक और चिंतनीय स्थिति होगी ! शीघ्र न्याय हो और फांसी यदि सार्वजनिक रूप से हो तो लोग कानून से खौफ खाएँगे और ऐसे अपराध भी कम होंगे ! ब्लॉग पर समय देने के लिये सादर आभार !

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आदरणीय पंकज सिंह जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपकी इस बात से सहमत हूँ कि समाज में दिनोदिन अश्लीलता बढ़ रही है और बच्चे, युवा व बूढ़े सबके जेहन को प्रदूषित कर रही है, लेकिन यहाँ पर एक बात ध्यान देने वाली है कि सभ्य समाज में पढ़ेलिखे लोग भले ही अश्लील फोटो और वीडियों देखते हों, किन्तु मासूम बच्चों संग क्रूर बलात्कार जैसा जघन्य अपराध नहीं करते हैं ! ब्लॉग में जितने भी केसों की चर्चा की गई है, उन सबमे आरोपी नशेड़ी और कम पढ़ेलिखे हैं ! हो सकता है कि वो गुप्त रोगों के भी शिकार हों, क्योंकि कई बार ऐसे अपराधी इस अन्धविश्वास के कारण मासूम बच्चों से दुराचार करते हैं कि उनका गुप्त रोग चला जाएगा. हालांकि यह पूर्णतः असत्य है और मासूम पीड़ित बच्चों में गुप्त रोग बांटने वाला घृणित कार्य है ! जहाँ तक बलात्कारी प्रवृति वाले लोगों के कानून से नहीं डरने की बात है तो वो सौ फीसदी सच है ! समाज में कानून का खौफ पैदा करने के लिए सार्वजनिक रूप से फांसी या गोली मारने की सजा जरूर होनी चाहिए ! प्रतिक्रिया देने के लिए सादर आभार !

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आदरणीय सूर्यभान जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! मासूम बच्चों का यौन-शोषण बढ़ने के पीछे निश्चित रूप से बढ़ती हुई अश्लीलता भी जिम्मेदार है ! लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि बच्चों के संग क्रूरतम दुराचार की जिन घटनाओं का जिक्र ब्लॉग में हुआ है, उसमे सारे आरोपी एक तो नशेड़ी हैं, दूसरे मजदूरी करने वाले या फिर ड्राईवरी का कार्य करने वाले हैं ! इस तरह के लोग भी अश्लील गाने सुनते हैं और अश्लील वीडियों देखते हैं, लेकिन उनके बलात्कारी बनने का मूल कारण नशा और स्त्री जाति के प्रति घृणित सोच है ! मासूम बच्चे विरोध नहीं कर पाते हैं, उनमे प्रतिरोध करने की उतनी शक्ति होती ही नहीं है, इसलिए वो आसानी से बलात्कारियों की हवश का शिकार बन जाते हैं ! इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एक तो सार्वजनिक रूप से बलात्कारियों को निर्मम दंड देने की न्याय व्यवस्था होनी चाहिए और दूसरी बात ये कि समाज में सतत जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए, खासकर मासूम छोटे बच्चों को ये शिक्षा देनी चाहिए कि वो लालच में आकर किसी भी अजनबी व्यक्ति से कोई चीज न लें और दूसरे बुरी नियत से कोई भी रिश्तेदार, स्कूल टीचर, ट्यूशन मास्टर, नौकर, बस ड्राईवर या फिर कोई भी अन्य व्यक्ति छुए तो माता पिता को तुरंत इसके बारे में बताएं ! बच्चों का यौन शोषण करने वाले पहले बच्चे को कई रोज तक थोड़ा बहुत छेड़कर देखते हैं कि वो कितना विरोध कर रहा है, फिर सुनियोजित प्लान बनाकर एक दिन हमला कर देते हैं ! ब्लॉग पर समय देने के लिए हार्दिक आभार !

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Surya Bhan Bhan मासूम बच्चियाँ का यौन शोषण एवं दिनों-दिन बढ़ती बलात्कार की घटनाएँ समाज में आ रहे मानवीय मूल्यों के अवमूल्यन का दुष्परिणाम हैं । इसमें कुछ अंस तक पश्चिमी अंधानुकरण एवं मीडिया द्वारा अपने लाभ के लिए निरंतर परोसी जा र ही नग्नता को भी जाता है , जो विशेष कर युवाओं का ब्रेनवास करके अश्लीलता भरती जा रही है । इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए सख्त एवं त्वरित न्याय जहां आपेक्षित है वहीं सामाजिक स्तर पर भी बलात्कार के विरुद्व चेतना जाग्रत करने एवं नैतिक मूल्योंं के पुनर्स्थापन के लिए भी सार्थक प्रयास किया जाना आवश्य्क है । समसामयिक विषय पर एक विचारणीय पोस्ट के लिए बधाई स्वीकार करें ।

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आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! हार्दिक अभिनन्दन और बधाई देने के लिये धन्यवाद ! इस पोस्ट को मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत करना चाहता था ! अधिक से अधिक पाठक पढ़ें, तभी लेखन को भी सार्थकता मिलती है ! आप सही कह रहे हैं कि ये लोग ईवीएम का विरोध कर रहे हैं या फिर अपना टाईमपास या कहिये मनोरंजन ? इनकी फालतू बातों मे जनता की भी कोई रुचि नही है ! दरअसल ईवीएम मे खराबी की बहानेबाजी सिर्फ कपिल मिश्रा के बेहद गंभीर आरोपों से बचने की एक घटिया चाल भर है ! चुनाव आयोग तो खुद ही न्यौता दे रहा है ! इनके इंजीनियर साहब जा के वहा पर ईवीएम मे गड़बड़ी साबित करें या फिर आम आदमी पार्टी और उसके समर्थक दल हत जोड़कर पूरे देश से माँफी मांगे ! सटीक और सार्थक प्रतिक्रिया देने के लिये तथा ब्लॉग पर आने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीया लीला तिवानी जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! ब्लॉग लेखन के शेत्र मे आप सबसे बहुत कुछ सीखने को मिला है ! अब कुछ न कुछ नये ढंग से ब्लॉग प्रस्तुत करना जरूरी भी है, क्योंकि बड़ी तादात मे पाठक सोशल मीडिया की तरफ भाग रहे हैं ! संक्षिप्त और रोचक ब्लॉग अब ज्यादा पढ़े जाते हैं ! पोस्ट की सराहना के लिये धन्यवाद ! आने वाले समय मे निश्चित रूप से मोदी विरोधी अधिकतर दल एकजुट होकर 'महागठबंधन' बनाएँगे, लेकिन मोदी को चुनौती देने मे वे सफल नही होंगे, क्योंकि देश की 80 फीसदी से भी ज्यादा जनता पीएम मोदी के साथ खड़ी है ! कविता सटीक और सार्थक आपको लगी तथा आपने कीमती समय ब्लॉग पर दिया, इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद !

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आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! बहुत पहले ये लोग अक्सर गाते थे, 'इंसान का इंसान से हो भाईचारा, यही पैगाम हमारा..!' कवि प्रदीप जी ने समाज को इस गीत के माध्यम से भाईचारा और समानता का बहुत सुन्दर संदेश दिया है ! आम आदमी पार्टी भी शुरु मे इसी महान संदेश का गुणगान गाती थी और इस पर चलने का संकल्प लेती थी, लेकिन सत्ता के मद ने उसे पथभ्रष्ट कर दिया ! इस पार्टी का आज जो कुछ भी पतन हम होते देख रहे हैं, उन्ही सब चीजों का वर्णन इस कविता मे 'ना काहू से दोस्ती और ना काहू से वैर' वाले तटस्थ भाव से है ! कविता को शानदार महसूस कर जो सम्मान और सार्थकता आप ने उसे प्रदान की है, उसके लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय नन्द जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! लेख को फिर से आप ध्यान से पढिये ! इसमे कहीं नही लिखा है कि एफएमसीजी का कारोबार करने भारत की कम्पनियाँ 50,000 करोड़ का एक्सपोर्ट करती हैं ! उसमे लिखा है कि भारत मे एफएमसीजी यानि रोजमर्रा के उपभोग की वस्तुओं का कारोबार पचास लाख करोड़ रुपये वार्षिक का है ! रही बात दवाइयाँ बेचने की तो आप बेचिये, मना कौन कर रहा है, लेकिन ये भी मानिये कि आप व्यवसाय कर रहे हैं ! रही बात पतंजलि के उत्पादों मे शिकाय्त की तो आप नेट पर 2015-16 मे आई शिकायतें सर्च कर लीजिये ! ये बताने का उद्देश्य भी केवल इतना ही है कि अपनी क्वालिटी और बेहतर कीजिये ! आपने लिखा है कि मोदी रामदेव के मोहताज नही हैं, आपकी बात सही है, लेकिन यह भी उतना ही सही है कि भाजपा और बाबा रामदेव दोनो ही एक दूसरे का भरपूर फायदा उठा रहे हैं ! मैने भाजपा कहा है, मोदी नही ! ब्लॉग पर आकर प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

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Nand Jee जनाब, आप यह कहा से डाटा उठा लाये है की एफ.एम. सी. जी. का एक्सपोर्ट 50000 करोड़ का है? इस ग्रूप की सबसे बड़ी कंपनी हिन्दुस्तान यूनीलेवेर है इसके बाद नेसले है. दोनो ही एम. एन. सी. है और दोनो कम्पनिया अपना 90 प्रतिशत माल भारत मे ही बेचती है. और जो यहा से मोटा मुनाफा कमाती है उसको अपने हेड ऑफीस जो यूरोप मे है वहा भेजती है. यदि बाबा राम देव इन्ही कॉमनियो से प्रतिस्पर्धा कर , इनको पछाड़ कर इनका मोटा मुनाफा मे कमी लाने की कोशिस कर रहे है तो क्या ए गुनाह हो गया है , क्योकि वो एक सन्यासी है. आज कल जितने भी स्थापित सन्यासी है चाहे वो श्री श्री हो यन अन्य क्या आउर्वैदिक दवाइया नही बेचते है? यदि राम देव कानून के दायरे मे रह कर एम. एन. सी. से प्रस्पर्धा कर मुनाफा बिदेशो मे भेजने की जगह अपने ट्रस्ट मे रख कर अस्पताल, गौशाला, आरुवैदिक रेसेर्च सेंटर इत्यादि मे खर्च करते है तो इससे आप लोगो को तकलीफ क्यो हो रही है. रही बात क्वालिटी की तो ब्लॉग लिखने से पहले क्वालिटी के लिये एफ. एस. एस. आई. की निमावली पढिये. क्वालिटी कंप्लेन मे माल की गुणवत्ता से लेकर लेबेल , उसपर लिखे गये इंड़्गररिएेंट, शब्दो का फऔंड, बजन इत्यादि तीस से ज्यादा मानक है यदि किसी भी एक मानक मे फेल हुये तो वो मामला कोर्ट मे जाता है. एम. एम सी. जी की भारत ही छोड़िये विश्व की कोई भी कंपनी नही है जिसका प्रॉडक्ट फेल नही हुआ है. लेकिन भारत मे जहा बात रामदेव की आती है तो सभी को क्वालिटी की चिंता होने लगती है. भारत के यदि सभी होटलो का क्वालिटी चेकिंग हो तो 95 प्रतिशत इसमे फेल हो जायेंगे. ढाबो की तो बात ही छोड़ दीजिये. रही बात मोदी और रामदेव की तो बाबा रामदेव को बेशक मोदी की जरूरत हो, लेकिन मोदी किसी रामदेव के मोहताज नही है. मोदी अपने कामो से जनता मे लोकप्रिय है न की रामदेव की दोस्ती से.

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आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! जो बात आपने कही है कि बाबा रामदेव अब कारोबारी बाबा बन गये हैं, वही बात मैने भी कही है ! इस सच को स्वीकारने मे हर्ज ही क्या है ! साधु आत्मनिर्भर हो और अपनी कमाई से कुछ लोककल्याण करे, इसमे कोई हर्ज नही है ! पतंजलि के कुछ उत्पाद मेरे घर मे भी यूज होते हैं ! आयुर्वेद पर आप रिसर्च कीजिये, किसानों को फायदा पहुँचाइए, सब अच्छा है, लेकिन अपने सभी उत्पादों की क्वालिटी का भी ध्यान रखिये ! देशभक्ति के नाम पर आम जनता को कुछ भी मत परोसिये ! मिलेट्री की कैन्टीन मे अभी कुछ रोज पहले पतंजलि के आंवले के जूस पर रोक लगी है ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय अमित जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपके इस तर्क से सहमत हूँ कि बाबा रामदेव देशी गाय का शुद्ध घी बेचने की बात कहते हैं, लेकिन पूरे देशभर मे इसकी बहुत बड़ी मांग को देखते हुए यह सवाल उठता है कि भारतीय गायों का इतना देशी घी पतंजलि वालों को कहा से प्राप्त होता है ? आपने इसका जबाब भी दिया है, जिसकी जांच होनी चाहिये, लेकिन सवाल फिर ये उठता है कि उनकी राजनीतिक पहुंच इतनी उंची है कि जांच करेगा कौन ? दूसरे देशभक्ति और गौभक्ति के नाम पर उनका कारोबार जारी है ! जनता भी इसलिये चुप है ! एक परिचित सज्जन बता रहे थे कि प्रचार से प्रभावित हो वो एक बार पतंजलि का देशी घी लाये, लेकिन परिवार मे कोई नही खाया, उन्हे ही किसी तरह से खाकर खत्म करना पड़ा ! ब्लॉग पर आने के लिये और पोस्ट की सराहना करने के लिये हार्दिक आभार !

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AMIT परम आदरणीय बाबा सदगुरु जी महाराज, सादर नमस्कार, एक सटीक, सच्चाई से भरे ओर सोये हुए लोगो को जागरूक करने वाले लेख पर साधुवाद.... लोगो को अंधभक्ति से बच्चाने के लिये ही मे ब्लॉग पर प्रयासरत हु वा गालिया खाता हु.... खेर जाने दीजिये... अब सवाल यह उठता है की पूरे हिन्दुस्तान को शुध भारतीय गाय का घी..! जी हा गाय ही लिख रहा हु वह भी भारतीय.. वह कांदिए बाबा को कहा से प्राप्त होता है...? जाहिर सी बात है की बाबा के आश्रम की गायो से तो इतनी मात्रा मे दुघ्ध प्राप्त होने से रहा...? जितनी कम मात्रा मे हमारे देश की शुध देसि भारतीय गायो से दुघ्ध की प्राप्ति होती है उससे भी सारी कम्पनिया मिल कर भी बाज़ार की डिमांड पूरी नही कर सकती है...! तब सवाल का जवाब मिलता है की पतंजलि द्वारा यह सब चाइना वा यूरोप से इम्पोर्ट किया जा रहा है... कांदिए बाबा ने देश का माहोल देख कर बड़ी चालाकी से योग वा देशभक्ति का बाज़ारी कर्ण कर के लोगो को ठगा है बस.... वेसे आये दिन बाबा के गुंडे भाई द्वारा हरिद्वार मे मारपीट किये जाने की खबरे छपती रहती है... !

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आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! मीडिया मे यह मामला उछला, तब जाकर सरकार को शर्म आई ! यही तो दुखद है कि इस सरकार का भी कांग्रेसीकरण होना शुरु हो गया है ! कुमार विश्वास कहते हैं कि भाजपा का 80 प्रतिशत कांग्रेसीकरण हो चुका है और आम आदमी पार्टी का होना शुरू हो चुका है ! यदि वाकई मे ऐसा है तो कांग्रेस की तरह ही भाजपा भी पतन के मार्ग पर चल चुकी है ! यदि भाजपा वाले भी वही कार्य और बर्ताव करेंगे, जो कांग्रेस ने किया और पतन के गर्त मे चली गई, तो फिर भविष्य मे भाजपा की दुर्गति होनी भी तय है ! राष् ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों से जुड़े मुद्दे पर सरकार की संवेदनहीनता और इलाज के मामले मे एक अफसर और एक जवान के बीच भेदभाव बेहद निन्दनीय है ! पूरा प्रकरण निन्दनीय और दुखद तो बहुत है, लेकिन सही राह पर बीजेपी के नेता भले ही देर से आये, लेकिन दुरुस्त आये ! आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी, हम लोग और कुछ तो कर नही सकते, लेकिन ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे इस मंच पर उठाकार आम जनता को सोचने विचारने के लिये जागरूक जरूर कर सकते हैं ! हालांकि ब्लॉगिंग मंच भी पूरी तरह से निष्पक्ष, जागरूक और संवेदनशील नही हैं ! सबसे बड़ी समस्या समय पर ब्लॉग अपडेट नहीं होने की है ! तमाम ब्लॉगिंग मंचों की हालत आप देख ही रहे हैं ! याद करने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! जय श्रीराम और सादर अभिनन्दन ! सबसे पहते तो आपके स्वास्थ्य को लेकर शुभकामनाएं ! आप शीघ्र से शीघ्र पूर्णतः स्वस्थ हों ! टीवी पर चेतन कुमार चीता और जिंतेंद्र कुमार की माता रूपा देवी दोनों का ही इंटरव्यू देखा, मन को बहुत ठेस लगी ! खासकर जितेंद्र कुमार के इलाज को लेकर उनकी माता जी का हाथ जोड़कर रोना और देश से निवेदन करना ! यदि वाकई ऐसा है, तब तो शर्म के मारे हमें चुल्लूभर पानी में डूब मरना चाहिए ! आपकी इस बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाना चाहिए कि वो बार-बार भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देना भूल जाए ! लेख पढ़ने और बधाई देने के लिए हार्दिक आभार !

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आदरणीय अमित जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपकी प्रतिक्रिया से पूर्णत: सहमत हूँ ! विश्व की तीसरी बड़ी सेना, आधुनिक हथियारों से सुसज्जित और हर महीने मिसाइल परीक्षण, ये सब किस काम का, जब आप दुश्मन को समुचित ढंग से जबाब भी न दे सकें ? केवल मुँहजबानी पाकिस्तान को धमकाने से अब जनता उब चुकी है ! देश का विकास सरकार चाहे जितना भी कर ले, किन्तु पाकिस्तान को करारा जबाब देने और राष् ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर यह सरकार अब तक तो सफल नही हो पाई है ! जब पाकिस्तान भारत के 'सर्जिकल स्ट्राइक' का जबाब नही दे पाया तो भारत के हमले का क्या जबाब देगा ! सरकार बेवजह डर रही है ! ब्लॉग पर आकर सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिये सादर आभार !

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आदरणीय हरेंद्र रावत जी ! लेख पर आपकी विचारणीय प्रतिक्रिया मिली ! आपने मेरे मन की बात कह दी है कि 'देशप्रेम की भावनासे से ओतप्रोत होकर सैनिकों पर लिखा गया लेख उन नेता राजनेताओं और शासक प्रशासकों के लिए एक सन्देश है, जो अपने करोड़ों के सजेसजाए वातानुकूल कार्यालयों में बैठकर अपने और अपने परिवारवालों को सुरक्षित समझकर भ्रष्टाचार की राह पर चलते रहते हैं, वो भी सीमा पर लड़नेवाले सैनिकों की जानों पर कीमत पर !' उनके भेदभाव का रवैया, ढुलमुल नीति और जवानों के प्रति संवेदनहीनता निंदनीय है ! घायल जितेंद्र कुमार से मिलने कौन नेता गया? उसे एम्स में भर्ती क्यों नहीं किया गया? मोदी सरकार और उसके आला लीडरों को इस बात का जबाब देना चाहिए ! लेख को आपने आँख खोलने वाला (चक्षु ओपनर) महसूस किया, इससे लेख को सार्थकता मिली ! प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

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कश्मीर के हालात कितने खराब चल रहे हैं, इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि वहां पर सुरक्षाबलों पर पथराव की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी होने के साथ ही लूटपाट और हिंसा की वारदातों में भी इजाफा हुआ है. आज कुलगाम में जम्मू-कश्मीर बैंक की कैश वैन पर आतंकियों ने हमला किया, जिसमे पांच पुलिसवाले और दो बैंककर्मी शहीद हो गए. इस हमले में घायल एक गार्ड बहुत गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है. मीडिया में प्रकाशित समाचार के अनुसार आतंकवादियों ने कैश वैन से 50 लाख रुपये लूटने के साथ ही पुलिसवालों के हथियार भी लूटकर अपने साथ ले गए. इस तरह की घटनाएं इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि कश्मीर में अब कड़ी कार्यवाही की जरुरत है और वो भी जल्द से जल्द.

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इससे पहले कल रविवार को श्रीनगर के खानयार पुलिस स्टेशन पर कुछ हमलावरों ने ग्रेनेड से हमला किया था. इस हमले में 4 पुलिसवाले जख्मी हो गए थे, जबकि एक नागरिक की मौत हो गई थी. आतंकवादी पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड फेंकने के बाद फरार हो गए थे. हालाँकि हर वारदात के बाद पुलिस और सुरक्षा बल एक साथ मिलकर हमलावरों को ढूंढने का अभियान चलाते हैं, लेकिन इसमें उन्हें स्थानीय लोगों का सहयोग नहीं मिलने के कारण बहुत दिक्कत हो रही है. यही नहीं, बल्कि कई बार तो हमलावरों को ढूंढ़ने के लिए सर्च ऑपरेशन चला रहे पुलिस व सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी भी शुरू हो जाती है. इस बात में कोई शक नहीं कि कश्मीर के हालात काबू से बाहर हो अब वहां पर राष्ट्रपति शासन की जरुरत बता रहे हैं.

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आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपने सही कहा है कि इस सामयिक मुद्दे पर इस ब्लॉग को पेश कर मैने चर्चा को आगे बढाने की कोशिश की है ! मैने बीजेपी और आप दोनों ही पार्टियों का ही पक्ष रखा है ! तीनों एमसीडी मे भाजपा की विजय को यदि विधानसभा के लिहाज से आज चुनाव होने के एक अनुमानित संदर्भ मे देंखे तो देंखे तो आज की तारीख मे बीजेपी 57 विधानसभा सीटें जीत रही है ! बीजेपी को जनता तीसरी बार झाड़ू जरूर थमाई है, किन्तु इस बार उन्हे झाड़ू लगाना ही पड़ेगा और मोदी व अमित शाह जी को ये देखना भी पड़ेगा कि एमसीडी दिल्ली को सुन्दर और सॉफ सुथरा बना रही है कि नही ? 2019 मे वोटर इसी बात से प्रभावित होंगे ! हार्दिक आभार !

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बचपन में मुझे याद है कि जब लगभग दस साल का था, तब अपने मामा जी के यहाँ रहता था ! मामी को पहला बच्चा हुआ ! वो कूड़े कचरे से भरे एक कमरे में रहती थीं, जिसमे सांप बिच्छू भी थे ! उनके पास जाने की सख्त मनाही थी ! सब कहते थे अभी छुतका यानी सूतक लगा है ! अभी पांच छह रोज इन्तजार करो ! जबतक जज्चा बच्चा नहा नहीं लेंगे, तबतक अंदर जाना मना है ! दूसरे दिन दोपहर के समय जब सभी लोग सो रहे थे, तब मैं धीरे से दरवाजा खोलकर अंदर चला गया ! कमरा उपले के धुंए से भरा था ! मामी आँखे बंद किये खांस रही थीं ! लालटेन की रौशनी तेजकर मैंने नन्हे मुन्हे नवजात शिशु को बड़ी अचरज से देखा, अवर्चनीय ख़ुशी के साथ उसे हाथों से छुआ और मामी को आवाज दिया ! वो आँखे खोलते ही मुझे सामने देख बहुत परेशान होते हुए बोलीं, 'बाबू.. तू हउअ.. जल्दी से भाग जा.. नाही त केहू इहाँ तोहके देख लेइ त मारे लागी..' मैं भागा नही, मामी जाने को कहती रहीं, पर मैं बिना किसी भय के बच्चे के साथ खेलता रहा ! घर के लोग जब कमरे में घुसे तो मुझे वहां देख भड़क उठे ! मुझे अपवित्र हो गया मानते हुए वो लोग जबरदस्ती पकड़कर नहलाने के लिए घर के बाहर स्थित कुँए पर ले गए ! लेकिन मैं वहाँ से भाग चला और नही नहाया ! मेरा मन ये मानने को तैयार नही था कि मैं अपवित्र हो गया हूँ ! मन में ईश्वर के भेजे उसके अंशपुत्र से मिलने की और उसके साथ खेलने की असीम ख़ुशी थी, जिसके आगे सारे सूतक बौने और बेमतलब के हो गए थे !

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यूपी में ‘रामराज्य’ लाने का अर्थ लड़कियों और महिलाओं से छेड़खानी करने वाले मनचलों के दुस्साहस और उनके अड्डों को खत्म करने के लिए सार्वजनिक जगहों व स्कूल कॉलेजों के बाहर एंटी रोमियो दल की तैनाती करना, पीएम मोदी की देखादेखी सफाई अभियान चलाना तथा अयोध्या में राम मन्दिर बनाने का प्रयास करना भर ही नहीं है, बल्कि ‘रामराज्य’ का वास्तविक अर्थ, धर्म-जाति का भेदभाव किये बिना उत्तर प्रदेश की गरीब जनता को जीवन की मूलभूत जरूरतें ‘रोटी, कपडा और मकान’ मुहैया कराना है. बेरोजगारों को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर प्रदान करना है. प्रदेश में कहीं भी दंगा-फसाद न हो, इसका विशेष ध्यान रखना है. प्रदेश की आम जनता को सुरक्षा, शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है और प्रदेश के अन्नदाता किसानों को सूखा, अकाल, भुखमरी, बिमारी और कर्जों से निजात दिलाना है. मूलतः ‘रामराज्य’ की अवधारणा का यही सब आधारबिंदु है.

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आदरणीया प्रतिभा जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! शायद आपने लेख को ध्यान से नही पढ़ा है ! लेख मे कहा गया है कि जहां भी मुस्लिम आबादी 45 से 50 फीसदी के ऊपर है, वहां पर बीजेपी हारी है ! यूपी मे अभी फिलहाल ऐसी 30 सीटें हैं, लेकिन तीन चार दशक बाद ऐसी सीटों की संख्या 200 के पार जा सकती है ! इसलिये भविष्य की राजनीति को ध्यान मे रखते हुए भाजपा को अभी से ही उदारवादी मुस्लिमों को अपने साथ ले के चलना चाहिये ! यह राजनीतिक समझदारी है ! 2019 के लोकसभा चुनाव मे भाजपा को शायद महागठबंधन के रूप मे एकजुट विपक्ष का सामना करना पड़े, उससे निपटने के लिये भी उसे देशभर मे अपने वोटरों का विस्तार करना पड़ेगा ! आपकी राजनीतिक विषयों पर वैचारिक दृष्टि यथार्थवादी और दूरदर्शी नही है, इसलिये मुस्लिमों को भाजपा से जोड़ने की सलाह देने वालों को फ्रजी बुद्धिजीवी कह रही हैं ! इस देश को भविष्य मे आगे बहुत आगे ले जाने वाले न तो कट्टर हिन्दू होंगे और न ही कट्टर मुसलमान, बल्कि वो समावेशी प्रवृति वाले उदारवादी हिन्दू और हिन्दुओं के साथ घुलमिलकर रहने वाले उदारवादी मुसलमान होंगे ! पीएम मोदी इसलिये 125 करोड़ भारतीयों के विकास की उन्हे साथ ले के चलने की बात करते हैं ! ब्लॉग पर समय देने के लिये सादर आभार !

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Pratibha भाजपा हिन्दूवादी पार्टी अवश्य रही है किन्तु भाजपा का हिन्दूवाद वैसा नहीं है जैसा कि सेकुलरों का सेकुलरवाद है. भारतीय सेकुलरवाद सभी सम्प्रदायों को साथ लाने की बात नहीं करता अपितु हिन्दू विरोध और मुस्लिम प्रेम तक ही सीमित रहता है, यही कारण है कि 100 करोड़ हिन्दुओं को 15 मिनट में मारने की बात करने वाला ओवैसि तो सेक्युलर कहलाता है किन्तु सबका साथ सबका विकास की बात करने वाले मोदी को सम्प्रदायिक कहा जाता है. भाजपा को चाहिये कि फर्जी बुद्धिजीवियों के दवाव में आकर मुसलमानों को साधने का मूर्खतापूर्ण प्रयास करने की अपेक्षा समग्र हिन्दुत्व पर ध्यान दे क्यूंकि स्वभाविक रूप से हिन्दू सर्व धर्म समभाव में विश्वास करता है. जब हिन्दुत्व सशक्त होगा तो अन्य सम्प्रदायों को को भी अपने साथ सशक्त करेगा.

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राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ नेता डॉ. रामविलास दास वेदांती कह रहे हैं कि बाबरी ढांचा मैंने तुड़वाया था ! मेरे ही कहने पर कारसेवकों ने बाबरी ढांचा गिराया था ! उन्होंने कहा कि आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी कारसेवकों को ढांच न तोड़ने के लिए समझा रहे थे, इसलिए वो लोग जरा भी दोषी नहीं हैं ! वो लोग बेकसूर हैं ! उन्होंने यहाँ तक कहा कि अगर कोर्ट फांसी की सजा मुझे दे तो भी मैं फांसी पर लटकने को तैयार हूं ! ढांचा तोड़ने के दोषियों में उन्होंने अपने अलावा महंत अवैद्यनाथ और अशोक सिंघल का नाम लिया ! भाजपा के पूर्व सांसद और रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. रामविलास वेदांती ने एक और चौंकाने वाला दावा किया कि विवादित ढांचा गिराने के मामले में उस समय के प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की भी सहमति थी ! इसका सीधा सा मतब तो यह है कि सबकी मिलीभगत से बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया ! सच क्या है, इसकी जांच होनी चाहिए !

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आदरणीय सद्गुरु जी आपके लेख के पांच पैराग्राफ हैं यु कहिये पांच हेडिंग हर लाइन में आपके विचार भरे पड़े हैं परन्तु लेख बड़ा न हो जाए आपने छोटा करने की कोशिश की है मुझे मेरे गुरु बहुत बड़े लेखक थे उन्होंने समझाया था आज ही सब लिख दोगी आगे क्या लिखोगी वह कहते थे एक हेडिंग उठाओ उसका विस्तार करो जबकि में भी ऐसा नहीं कर पा रही हूँ आपका लेख मेने बोल – बोल कर पढ़ा में अच्छे लेख ऐसे ही पढ़ती हूँ मुझे अपने सर याद आ गये आप मेरी बात को अन्यथा नहीं लीजिएगा मेने जो सीखा है व्ही लिख रही हूँ अप ध्यान दें सम्पादकीय लेख में एक ही पॉइंट को घुमाते हैं आपका लेख अंग्रेजी की लाइन है नेल इन दा हेड यही नहीं सोच को दिशा देता है |

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आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! इस्लाम के आने से पहले स्त्रियां ज्यादा स्वतंत्र थीं ! इस्लाम के आने से तो उल्टे पर्दा प्रथा सहित अनेको तरह की तमाम पांबंदियाँ स्त्रियों पर लग गईं ! ये एक ऐतिहासिक सत्य है कि मुस्लिम आक्रमकारियों के भारत पर बार बार हुए अनगिनत हमलों के कारण सबसे ज्यादा नुक्सान स्त्रियों को ही हुआ ! वो स्त्रियों की स्वतंत्रता पर ग्रहण लगाने वाले सबसे बड़े आतंकी थे ! भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के विवाह स्वयम्बर और उनकी पत्नियों की स्वेच्छा से हुए ! यही ऐतिहासिक प्रमाण प्राचीन काल में काल में स्त्री-स्वंतंत्रता को दर्शाने के लिए काफी है ! सादर आभार !

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आदरणीय महेन्द्र जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! बहुत सटीक और जानकारी से भरी प्रतिक्रिया आपने दी है ! इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद ! सही बात है कि भूतपूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की गलत नीति के कारण ही आज कश्मीर समस्या नासूर बनकर देश का हर साल हजारो-हजारो करोड़ रुपये बर्बाद करवा रही है ! आपकी बात से सहमत हूँ कि जब तक किसी भी पार्टी को संसद मे तीन चोथाई बहुमत नही मिल जाता तबतक धारा 370 और अनुच्छेद 35ए खत्म नही हो सकता है. जब तक कश्मीर समंस्या स्थायी रूप से हल नहीं होती, तबतक हम रोज ही कश्मीर में ऐसे ही अपमानजनक प्रसंग और खून खराबे देखते रहेंगे ! ब्लॉग पर समय और प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

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आदरणीय महेंद्र जी की जानकारी भरी पठनीय प्रतिक्रिया- धारा 370 से ज्यादा खतरनाक है अनुच्छेद 35ए है जिसे नेहरू ने अंसवेधानिक तरीके से धारा 370 का पार्ट बना दिया इसी अनुच्छेद के कारण जम्मू-कश्मीर विधानसभा को यह अधिकार मिल गया कि वह जिसे चाहे उसे नी जम्मू-कश्मीर का नागरिक मानेगी.....और जिसे ना चाहे उसे नही मानेगी .यह अन्नूच्छेद केवल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से धारा 370 मे जोड़ दिया गया जबकि ऐसा करने के लिये ससंद की मंजूरी की जरूरत थी इसलिये 1954 मे नेहरू ने बड़ी चालाकी से इसे जोड़ दिया और देश की जनता और तो और सासदो तक को पता नही चला......यही नेहरू की दोगली नीति आज नासूर बनकर देश का हजारो-हजारो करोड़ रुपये बर्बाद करवा रही है.....देश के जवान शहीद हो रहे है.........जब तक किसी भी पार्टी को संसद मे तीन चोथाई बहुमत नही मिल जाता तबतक धारा 370और अनुच्छेद 35ए खत्म नही हो सकता है......और हम रोज ऐसे ही देखते रहेंगे.......जय हिन्द...जय भारत

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जम के दूत, बड़े मजबूत, जम से पडा झमेला उड़ जाएगा हंस अकेला, जग दर्शन का मेला … संसार में आवागमन यानि जीवन-मरण के कष्ट को ही संत यमदूत की यातना या उससे पड़ा झमेला मानते हैं. संत कबीर साहब ने इस भजन में समझाने की कोशिश की है कि संसार में बाहर की ओर भागकर आप आवागमन के कष्ट से छुटकारा नहीं पा सकते हैं. उसके लिए आपको प्रसन्नचित्त भाव से आंतरिक साधना करनी पड़ेगी. संसार से राग यानि लगाव बुरा है तो वैराग्य यानि घृणा भी उतनी ही बुरी है. ये दोनों ही सांसारिक बंधन के मूल कारण हैं, इसलिए इन दोनों ही तरह के रागों यानि राग-वैराग से परे बीतराग भाव में मनुष्य की सदैव स्थित रहना चाहिए, जो साधना की स्थितप्रज्ञ यानि आत्मा में रमे रहने की उच्च अवस्था में जीतेजी ही मोक्ष का अनुभव प्रदान कर देती हैं.

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आदरणीय सिंह साहब ! सादर हरि स्मरण ! शिक्षा जगत में अभिभावकों से हो रही लूटपाट और छात्रों की होने वाली प्रताड़ना एक पुरानी ज्वलंत समस्या है ! इस समय केंद्र और कई राज्यों में भाजपा की सरकार है, इसलिए लोग शिक्षा मंदिरों में होने वाले शोषण के खिलाफ बोल पा रहे हैं और न्यूज चैनलों पर खुलकर चर्चा हो रही है ! दरअसल अधिकांशतः लोग यह मानते हैं कि भाजपा दूसरी भ्रष्ट पार्टियों से कुछ अलग हटकर है, इसलिए उनकी आवाज जरूर सुनी जायेगी ! मुझे भी लग रहा है कि अब इस मसले का कुछ स्थायी समाधान जरूर होगा ! स्कूलों में बच्चों को दी जाने वाली प्रताड़ना गैर-कानूनी होते हुए भी रोजमर्रा की घटित होने वाली एक आम बात है ! सरकार को इस तरफ भी ध्यान देते हुए बच्चों को मारने-पीटने पर पूर्णतः रोक लगा देनी चाहिए ! आपकी इस बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि बच्चों को प्यार से ही समझाया और सिखाया जाना चाहिए ! ब्लॉग पर आने तथा सार्थक व विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

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'बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक' सम्मान से सम्मानित करने के लिए आदरणीय जागरण जंक्शन मंच को धन्यवाद. आपके सहयोग से और ब्लॉगर मित्रों व कृपालु पाठकों के समर्थन से इस सामयिक और बेहद महत्वपूर्ण विषय पर एक विस्तृत चर्चा करना चाहता था. साथ देने के लिए ब्लॉगर मित्रों व कृपालु पाठकों को धन्यवाद. निजी स्कूलों में होने वाली लूटपाट और प्रताड़ना से अभिभावक और छात्र दोनों ही परेशान हैं. केंद्र और राज्य सरकारों को इस समस्या का कोई स्थायी समाधान ढूंढना चाहिए. निजी स्कूलों में फीस सरकार द्वारा तय होनी चाहिए और बच्चों को प्रताड़ना से बचाने के लिए सरकारी और निजी स्कूलों के नोटिस बोर्ड पर धारा-82 के प्रावधान भी लिखे जाने चाहिए. बच्चों और उनके अभिभावकों को इन क़ानूनी अधिकारों का ज्ञान जरूर होना चाहिए. किशोर न्याय अधिनियम-2015 की धारा-82 के कानून को स्कूली पाठ्यक्रम में भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए.

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आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! सादर अभिनन्दन ! स्त्रियों की स्वतन्त्रता पर बहुत से लेख लिखे गये हैं, किन्तु उनकी भाषा थोड़ी क्लिष्ट और साहित्यिक है, इसलिये सामान्य हिन्दी जानने वाले पाठकों को पूरी बात समझने मे दिक्कत होती है ! इस पर सरल हिन्दी मे लिखने की आवश्यकता मुझे महसूस हुई ! हिन्दू शास्त्र यही कहते हैं कि नारी पहले अधिक स्वतन्त्र थी ! आपकी बात एकदम सही है कि विदेशी आक्रमणकारियों, खासकर मुस्लिम आक्रान्ताओ के हमारे देश मे आने के बाद स्त्रियों की आजादी न सिर्फ छीन गई, बल्कि इज्जत आबरू लुटने के डर से उन्हे पैदा होते ही मारा भी जाने लगा ! इतिहास से सबक सीखते हुए भविष्य मे हमे सदा सर्वदा इस बात से सावधान रहना होगसा और हर कीमत पर अपनी आजादी की रक्षा भी करनी होगी ! ब्लॉग पर समय देने के लिये सादर आभार !

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आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! सर्वप्रथम आपको साप्ताहिक सम्मान की बधाई ! वैसे आजकल की ज्वलंत समस्या पर आपने व्यापक दृष्टिकोण से आपने कलम चलायी है. आजकल कई चैनलों पर भी चर्चा हो रही है. अभिभावक और छात्र परेशान हैं, और ये शिक्षा के मंदिर अपने भक्तों/ग्राहकों का भरपूर दोहन कर रहे हैं. उम्मीद है सरकार कुछ करेगी या अभिभावक आपस में मिलकर कोई हल ढूंढने का प्रयास करेंगे. मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं पर मैं भी बच्चों को प्रताड़ित करने के खिलाफ हूँ. मेरे बच्चे को भी जब पीटा गया था मैं भी प्रिंसिपल के पास पहुँच गया था. उन्होंने मुझे समझा बुझाकर शांत किया. मैंने भी उस शिक्षिका को माफ़ कर दिया. वैसे बच्चों को प्यार से ही समझाया सिखाया जाना चाहिए. सादर!

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केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education या CBSE) भारत की स्कूली शिक्षा का एक प्रमुख बोर्ड है। भारत के अन्दर और बाहर के ज्यादातर निजी विद्यालय इससे सम्बद्ध हैं। पहली कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के लिये CBSE का तैयार किया हुआ पाठ्यक्रम ही इससे सम्बद्ध देशभर के सभी निजी स्कूल अपने यहाँ चलाते हैं, किन्तु भारत सरकार द्वारा स्थापित संस्थान राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद (National Council of Educational Research and Training या NCERT) जो सीबीएसई के पाठ्यक्रम के अनुसार बहुत कम मूल्य पर बहुत अच्छी पुस्तकें छापता है, उन पुस्तकों को निजी स्कूल अपने यहाँ नहीं चलाते हैं, क्योंकि उस पर कमीशन कम मिलता है।

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आप विभिन्न विषयों पर कक्षा 1 से 12 तक की “एन सी ई आर टी (NCERT)” की पुस्तकें मुफ्त में भी डाउनलोड कर सकते हैं। प्राइवेट पब्लिशरों की छापी हुई जो महंगी पुस्तकें निजी स्कूल वाले अपने यहाँ चलाते हैं, उसपर 40 प्रतिशत कमीशन खाते हैं। अगर आपने अपने बच्चे के लिए निजी स्कूल से या उसके बताये हुए दुकानदार से 2000 रूपये मूल्य की किताबें खरीदी हैं तो 800 रूपये स्कूल वाले का कमीशन हो गया। इसी तरह से जो कॉपी स्कूल वाले आपको 35 रूपये में आपको देते हैं वो मात्र 25 रूपये में आपको दूकान से मिल जायेगी। ड्रेस में भी निजी स्कूल वाले अभिभावकों को लूट रहे हैं। मजेदार बात देखिये कि केंद्र सरकार टीवी और रेडियो पर प्रचार करती है कि 'जागो उपभोक्ता जागो' और खुद निजी स्कूलों की इस लूटपाट के खिलाफ कोई कार्यवाही न कर एक तरह से सो ही रही है। अब उपभोक्ताओं को कहना चाहिए कि 'जागो सरकार जागो।'

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आदरणीया सरिता सिन्हा जी ! सादर अभिनन्दन ! आपका इस ब्लॉग से संबंधित अच्छे सुझाव से युक्त एक अत्यंत विचारणीय कमेंट ईमेल पर मिला ! इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! वर्षों से एक साथ रहते हुए मैंने भी अपनी माताजी और श्रीमतीजी के स्वभाव पर काफी रिसर्च किया है ! पहली बात तो ये कि कानपुर से आगे, जहाँ मेरी ससुराल है, वहां कि बोली भाषा ही थोड़ी खर टाइप की या लट्ठमार कहिये, उस तरह की है ! दूसरी बात ये कि उनमे बहस अमूमन किसी त्यौहार, व्रत वाले दिन और नवरात्र में ज्यादा होती है ! कई बार मैं मजाक में कह भी देता हूँ कि जिसे भूख लगी वो खाना खा लें, पर एक दूसरे पर अपनी खीझ या गुस्सा न उतारें ! आदरणीया सरिता सिन्हा जी, हमारे घर में एक बात बहुत अच्छी बात है कि सब बहस मुंह से हो जाती है, दिल में ज्यादा देर तक कोई नहीं रखता है ! थोड़ी देर बाद एक दूसरे से बोलने भी लगेंगे ! माताजी हमारी बहुत धार्मिक और पुराने विचारों की हैं ! सोचती हैं कि हर बात उनसे पूछ के करो ! उन्हें खुश रखने के लिए मैं उनकी सलाह लें लेता हूँ ! किन्तु श्रीमतीजी इसकी जरुरत नहीं समझती हैं ! हाँ, मुझसे वो सलाह जरूर लेती हैं ! स्वभाव में उनके जिद और जरुरत से ज्यादा स्वाभिमान जन्मजात है ! मुझे उससे कोई दिक्कत भी नहीं है ! शादी हुए अठारह साल हो गए, अब इन सब चीजों की आदत पड़ चुकी है ! बिटिया अभी छठे साल में है, लेकिन बहुत तेजतर्रार और समझदार है, खासकर अपने अधिकारों के प्रति ! मैं उसे इसी बात के लिए सदैव प्रेरित भी करता हूँ, क्योंकि आज के युग में सुख-शान्ति से जीने के लिए इस तरह का विकास बहुत जरुरी है ! आपकी बात सही है कि घर में होने वाले झगड़ों का बच्चों पर खराब असर पड़ता है ! मैं घर में सबको यही बात अक्सर समझाता भी हूँ ! फिलहाल तो शान्ति है ! ईश्वर करें, यूँ ही बनी रहे ! अनुभव से परिपूर्ण एक बहुत अच्छी प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

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ईमेल पर प्राप्त आदरणीया सरिता सिन्हा जी का कमेंट- आपकी पोस्ट पर कमेन्ट नहीं हो पा रहा है कृपया इसको मेरी तरफ से पोस्ट करने का कष्ट करें. धन्यवाद..... सद्गुरुजी प्रणाम, ये घर घर की कहानी है. लज्जाशील और संकोचशील बहुएं भी एक उम्र ससुराल में गुज़ार लेने के बाद अक्सर मुखर हो जाती हैं और सासें उनको इंसान नहीं बल्कि आदर्शवाद की एक रोबोटिक मशीन की तरह देखना चाहती हैं. जब सास ने बहू को बेटी तो बहुत दूर की बात है, कभी इंसान भी नहीं समझा, फिर वो कभी नहीं समझेगी, उनको समझाना बेकार है. साथ ही बहुत सी ऐसी बातें होती हैं जो अपने साथ होने पर ही समझ में आती हैं जैसे परिवार में सबसे सीनियर होने की मदांधता...हो सकता है हम भी जब सीनियर मोस्ट हो जाएँ तो सत्ता के नशे में अंधे हो जाएँ. क्यूंकि अभी हममें जो रीज़निंग है, कह नहीं सकते कि बुढ़ापे में बचे गी या अल्ज़ाइमर या डेमेंशिया या कमअक्ली (सठियाने ) की भेंट चढ़ जाएगी. ऐसे में जिसका मस्तिष्क अभी सही सलामत है उसे बहस करने के बजाय चुप हो जाना चाहिए. समझना चाहिए कि अगला एक मानसिक मरीज़ है और हमें उस की देख-भाल करने जैसा महान काम करना है...ये मेरा आज़माया हुआ नुस्खा है, आप भाभीजी को मेरा ये सन्देश पहुंचा दें. एक बार बहस के बजाय चुप हो कर देखें. असीम शांति मिलेगी, ये मेरा दावा है...समझदार बिटिया को मेरा स्नेह. हाँ, अगर ये बहसें ऐसे ही चलती रहीं तो बच्ची इनका असर अपने जीवन में ले लेगी, इसका भी तो ध्यान रखना है.

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आदरणीय सद्गुरुजी, नमस्कार, सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर और नर्सें अक्सर संज्ञाशून्य भावशून्य होते हैं. मरीज़ उनके लिए सिर्फ एक सब्जेक्ट भर होता है. मैं ने मरीज़ों को चांटे लगाने वाली नर्सों को भी देखा है. वैसे लखनऊ के PGI में मैं अपने ससुरजी की बीमारी के दिनों में दो महीने रही थी. वहां मरीज़ों की भारी संख्या के चलते एंट्री मिलना मुश्किल है लेकिन डॉक्टर्स और नर्सेज मरीज़ और उसके तीमारदारों से बहुत अच्छा व्यवहार करते हैं. वहां रह कर अस्पताल के प्रति मेरी धारणा बिलकुल बदल गयी. लेकिन और कहीं ऐसा नहीं देखा. वैसे सभी स्वस्थ रहें किसी को अस्पताल का मुंह न देखना पड़े, यही प्रार्थना करती हूँ.

के द्वारा: sinsera sinsera

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! देश के अधिकतर सरकारी अस्पतालों में यही सब होता है, किन्तु सरकार इस तरफ कोई ध्यान नहीं देती है ! डॉक्टरों के अंदर सहानुभूति और संवेदनशीलता ही मर चुकी है ! सबकी रूचि बस पैसा कमाने में है, चाहे वो मरीज से मिले या या फिर दवा की कंपनियों से ! सरकारी अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर तो बस अपनी ओपचारिकता भर पूरी करते हैं ! इस मुद्दे पर आपके सहयोग और समर्थन के लिए आभारी हूँ ! जागरण मंच ने चूँकि भेदभाव के मुद्दे पर हम सबके अनुभव मांगे थे, इसलिए हमलोंगों ने लिख दिया ! व्यक्तिगत दुःख में रूचि लेकर पढ़ने वाले पाठकों की संख्या भी अब कम होती जा रही है, इसलिए बहुत कम लोग ही अपनी लेखनी में अपने दिल का दर्द उजागर करते हैं ! प्रतिक्रिया देने के लिए सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी अस्पताल का व्यवहार देख कर आश्चर्य हुआ यह जूनियर डाक्टर यहीं से सीखते हैं तब इनका यह हाल है दिल्ली में भी यही हाल है कुछ डाक्टर प्रैक्टिस करते हैं वह अस्पताल का इस्तेमाल अपने नर्सिंग होम की तरह करते है उनके मरीजों को सब सुविधाएं मिल जाती है और तुरंत आपरेशन जागरण के हम आभारी हैं हमें अपने भीतर क्या कष्ट लेकर जीते हैं कहने का अवसर मिला |मेरे तो ब्राह्मण होने पर प्रश्न उठाये जाते रहे हैंमुझे पूछते तुम कौन सी बामन हो मैं हंस कर कहती हूँ जी सफाई कर्मचारी बामन हैं लगती तो नहीं हो आपके घर में आ गयी हूँ सुथरी हो गयी हूँ नाक भों सिकोड़ते हैं फिर खुद ही कहेंगे न जी मजाक कर्वे को हमीं मिले

के द्वारा: Shobha Shobha