सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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sadguruji


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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ नेता डॉ. रामविलास दास वेदांती कह रहे हैं कि बाबरी ढांचा मैंने तुड़वाया था ! मेरे ही कहने पर कारसेवकों ने बाबरी ढांचा गिराया था ! उन्होंने कहा कि आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी कारसेवकों को ढांच न तोड़ने के लिए समझा रहे थे, इसलिए वो लोग जरा भी दोषी नहीं हैं ! वो लोग बेकसूर हैं ! उन्होंने यहाँ तक कहा कि अगर कोर्ट फांसी की सजा मुझे दे तो भी मैं फांसी पर लटकने को तैयार हूं ! ढांचा तोड़ने के दोषियों में उन्होंने अपने अलावा महंत अवैद्यनाथ और अशोक सिंघल का नाम लिया ! भाजपा के पूर्व सांसद और रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. रामविलास वेदांती ने एक और चौंकाने वाला दावा किया कि विवादित ढांचा गिराने के मामले में उस समय के प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की भी सहमति थी ! इसका सीधा सा मतब तो यह है कि सबकी मिलीभगत से बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया ! सच क्या है, इसकी जांच होनी चाहिए !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी आपके लेख के पांच पैराग्राफ हैं यु कहिये पांच हेडिंग हर लाइन में आपके विचार भरे पड़े हैं परन्तु लेख बड़ा न हो जाए आपने छोटा करने की कोशिश की है मुझे मेरे गुरु बहुत बड़े लेखक थे उन्होंने समझाया था आज ही सब लिख दोगी आगे क्या लिखोगी वह कहते थे एक हेडिंग उठाओ उसका विस्तार करो जबकि में भी ऐसा नहीं कर पा रही हूँ आपका लेख मेने बोल – बोल कर पढ़ा में अच्छे लेख ऐसे ही पढ़ती हूँ मुझे अपने सर याद आ गये आप मेरी बात को अन्यथा नहीं लीजिएगा मेने जो सीखा है व्ही लिख रही हूँ अप ध्यान दें सम्पादकीय लेख में एक ही पॉइंट को घुमाते हैं आपका लेख अंग्रेजी की लाइन है नेल इन दा हेड यही नहीं सोच को दिशा देता है |

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! इस्लाम के आने से पहले स्त्रियां ज्यादा स्वतंत्र थीं ! इस्लाम के आने से तो उल्टे पर्दा प्रथा सहित अनेको तरह की तमाम पांबंदियाँ स्त्रियों पर लग गईं ! ये एक ऐतिहासिक सत्य है कि मुस्लिम आक्रमकारियों के भारत पर बार बार हुए अनगिनत हमलों के कारण सबसे ज्यादा नुक्सान स्त्रियों को ही हुआ ! वो स्त्रियों की स्वतंत्रता पर ग्रहण लगाने वाले सबसे बड़े आतंकी थे ! भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के विवाह स्वयम्बर और उनकी पत्नियों की स्वेच्छा से हुए ! यही ऐतिहासिक प्रमाण प्राचीन काल में काल में स्त्री-स्वंतंत्रता को दर्शाने के लिए काफी है ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय महेन्द्र जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! बहुत सटीक और जानकारी से भरी प्रतिक्रिया आपने दी है ! इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद ! सही बात है कि भूतपूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की गलत नीति के कारण ही आज कश्मीर समस्या नासूर बनकर देश का हर साल हजारो-हजारो करोड़ रुपये बर्बाद करवा रही है ! आपकी बात से सहमत हूँ कि जब तक किसी भी पार्टी को संसद मे तीन चोथाई बहुमत नही मिल जाता तबतक धारा 370 और अनुच्छेद 35ए खत्म नही हो सकता है. जब तक कश्मीर समंस्या स्थायी रूप से हल नहीं होती, तबतक हम रोज ही कश्मीर में ऐसे ही अपमानजनक प्रसंग और खून खराबे देखते रहेंगे ! ब्लॉग पर समय और प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय महेंद्र जी की जानकारी भरी पठनीय प्रतिक्रिया- धारा 370 से ज्यादा खतरनाक है अनुच्छेद 35ए है जिसे नेहरू ने अंसवेधानिक तरीके से धारा 370 का पार्ट बना दिया इसी अनुच्छेद के कारण जम्मू-कश्मीर विधानसभा को यह अधिकार मिल गया कि वह जिसे चाहे उसे नी जम्मू-कश्मीर का नागरिक मानेगी.....और जिसे ना चाहे उसे नही मानेगी .यह अन्नूच्छेद केवल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से धारा 370 मे जोड़ दिया गया जबकि ऐसा करने के लिये ससंद की मंजूरी की जरूरत थी इसलिये 1954 मे नेहरू ने बड़ी चालाकी से इसे जोड़ दिया और देश की जनता और तो और सासदो तक को पता नही चला......यही नेहरू की दोगली नीति आज नासूर बनकर देश का हजारो-हजारो करोड़ रुपये बर्बाद करवा रही है.....देश के जवान शहीद हो रहे है.........जब तक किसी भी पार्टी को संसद मे तीन चोथाई बहुमत नही मिल जाता तबतक धारा 370और अनुच्छेद 35ए खत्म नही हो सकता है......और हम रोज ऐसे ही देखते रहेंगे.......जय हिन्द...जय भारत

के द्वारा: sadguruji sadguruji

जम के दूत, बड़े मजबूत, जम से पडा झमेला उड़ जाएगा हंस अकेला, जग दर्शन का मेला … संसार में आवागमन यानि जीवन-मरण के कष्ट को ही संत यमदूत की यातना या उससे पड़ा झमेला मानते हैं. संत कबीर साहब ने इस भजन में समझाने की कोशिश की है कि संसार में बाहर की ओर भागकर आप आवागमन के कष्ट से छुटकारा नहीं पा सकते हैं. उसके लिए आपको प्रसन्नचित्त भाव से आंतरिक साधना करनी पड़ेगी. संसार से राग यानि लगाव बुरा है तो वैराग्य यानि घृणा भी उतनी ही बुरी है. ये दोनों ही सांसारिक बंधन के मूल कारण हैं, इसलिए इन दोनों ही तरह के रागों यानि राग-वैराग से परे बीतराग भाव में मनुष्य की सदैव स्थित रहना चाहिए, जो साधना की स्थितप्रज्ञ यानि आत्मा में रमे रहने की उच्च अवस्था में जीतेजी ही मोक्ष का अनुभव प्रदान कर देती हैं.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सिंह साहब ! सादर हरि स्मरण ! शिक्षा जगत में अभिभावकों से हो रही लूटपाट और छात्रों की होने वाली प्रताड़ना एक पुरानी ज्वलंत समस्या है ! इस समय केंद्र और कई राज्यों में भाजपा की सरकार है, इसलिए लोग शिक्षा मंदिरों में होने वाले शोषण के खिलाफ बोल पा रहे हैं और न्यूज चैनलों पर खुलकर चर्चा हो रही है ! दरअसल अधिकांशतः लोग यह मानते हैं कि भाजपा दूसरी भ्रष्ट पार्टियों से कुछ अलग हटकर है, इसलिए उनकी आवाज जरूर सुनी जायेगी ! मुझे भी लग रहा है कि अब इस मसले का कुछ स्थायी समाधान जरूर होगा ! स्कूलों में बच्चों को दी जाने वाली प्रताड़ना गैर-कानूनी होते हुए भी रोजमर्रा की घटित होने वाली एक आम बात है ! सरकार को इस तरफ भी ध्यान देते हुए बच्चों को मारने-पीटने पर पूर्णतः रोक लगा देनी चाहिए ! आपकी इस बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि बच्चों को प्यार से ही समझाया और सिखाया जाना चाहिए ! ब्लॉग पर आने तथा सार्थक व विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

'बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक' सम्मान से सम्मानित करने के लिए आदरणीय जागरण जंक्शन मंच को धन्यवाद. आपके सहयोग से और ब्लॉगर मित्रों व कृपालु पाठकों के समर्थन से इस सामयिक और बेहद महत्वपूर्ण विषय पर एक विस्तृत चर्चा करना चाहता था. साथ देने के लिए ब्लॉगर मित्रों व कृपालु पाठकों को धन्यवाद. निजी स्कूलों में होने वाली लूटपाट और प्रताड़ना से अभिभावक और छात्र दोनों ही परेशान हैं. केंद्र और राज्य सरकारों को इस समस्या का कोई स्थायी समाधान ढूंढना चाहिए. निजी स्कूलों में फीस सरकार द्वारा तय होनी चाहिए और बच्चों को प्रताड़ना से बचाने के लिए सरकारी और निजी स्कूलों के नोटिस बोर्ड पर धारा-82 के प्रावधान भी लिखे जाने चाहिए. बच्चों और उनके अभिभावकों को इन क़ानूनी अधिकारों का ज्ञान जरूर होना चाहिए. किशोर न्याय अधिनियम-2015 की धारा-82 के कानून को स्कूली पाठ्यक्रम में भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी ! सादर अभिनन्दन ! स्त्रियों की स्वतन्त्रता पर बहुत से लेख लिखे गये हैं, किन्तु उनकी भाषा थोड़ी क्लिष्ट और साहित्यिक है, इसलिये सामान्य हिन्दी जानने वाले पाठकों को पूरी बात समझने मे दिक्कत होती है ! इस पर सरल हिन्दी मे लिखने की आवश्यकता मुझे महसूस हुई ! हिन्दू शास्त्र यही कहते हैं कि नारी पहले अधिक स्वतन्त्र थी ! आपकी बात एकदम सही है कि विदेशी आक्रमणकारियों, खासकर मुस्लिम आक्रान्ताओ के हमारे देश मे आने के बाद स्त्रियों की आजादी न सिर्फ छीन गई, बल्कि इज्जत आबरू लुटने के डर से उन्हे पैदा होते ही मारा भी जाने लगा ! इतिहास से सबक सीखते हुए भविष्य मे हमे सदा सर्वदा इस बात से सावधान रहना होगसा और हर कीमत पर अपनी आजादी की रक्षा भी करनी होगी ! ब्लॉग पर समय देने के लिये सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! सर्वप्रथम आपको साप्ताहिक सम्मान की बधाई ! वैसे आजकल की ज्वलंत समस्या पर आपने व्यापक दृष्टिकोण से आपने कलम चलायी है. आजकल कई चैनलों पर भी चर्चा हो रही है. अभिभावक और छात्र परेशान हैं, और ये शिक्षा के मंदिर अपने भक्तों/ग्राहकों का भरपूर दोहन कर रहे हैं. उम्मीद है सरकार कुछ करेगी या अभिभावक आपस में मिलकर कोई हल ढूंढने का प्रयास करेंगे. मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं पर मैं भी बच्चों को प्रताड़ित करने के खिलाफ हूँ. मेरे बच्चे को भी जब पीटा गया था मैं भी प्रिंसिपल के पास पहुँच गया था. उन्होंने मुझे समझा बुझाकर शांत किया. मैंने भी उस शिक्षिका को माफ़ कर दिया. वैसे बच्चों को प्यार से ही समझाया सिखाया जाना चाहिए. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education या CBSE) भारत की स्कूली शिक्षा का एक प्रमुख बोर्ड है। भारत के अन्दर और बाहर के ज्यादातर निजी विद्यालय इससे सम्बद्ध हैं। पहली कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के लिये CBSE का तैयार किया हुआ पाठ्यक्रम ही इससे सम्बद्ध देशभर के सभी निजी स्कूल अपने यहाँ चलाते हैं, किन्तु भारत सरकार द्वारा स्थापित संस्थान राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद (National Council of Educational Research and Training या NCERT) जो सीबीएसई के पाठ्यक्रम के अनुसार बहुत कम मूल्य पर बहुत अच्छी पुस्तकें छापता है, उन पुस्तकों को निजी स्कूल अपने यहाँ नहीं चलाते हैं, क्योंकि उस पर कमीशन कम मिलता है।

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आप विभिन्न विषयों पर कक्षा 1 से 12 तक की “एन सी ई आर टी (NCERT)” की पुस्तकें मुफ्त में भी डाउनलोड कर सकते हैं। प्राइवेट पब्लिशरों की छापी हुई जो महंगी पुस्तकें निजी स्कूल वाले अपने यहाँ चलाते हैं, उसपर 40 प्रतिशत कमीशन खाते हैं। अगर आपने अपने बच्चे के लिए निजी स्कूल से या उसके बताये हुए दुकानदार से 2000 रूपये मूल्य की किताबें खरीदी हैं तो 800 रूपये स्कूल वाले का कमीशन हो गया। इसी तरह से जो कॉपी स्कूल वाले आपको 35 रूपये में आपको देते हैं वो मात्र 25 रूपये में आपको दूकान से मिल जायेगी। ड्रेस में भी निजी स्कूल वाले अभिभावकों को लूट रहे हैं। मजेदार बात देखिये कि केंद्र सरकार टीवी और रेडियो पर प्रचार करती है कि 'जागो उपभोक्ता जागो' और खुद निजी स्कूलों की इस लूटपाट के खिलाफ कोई कार्यवाही न कर एक तरह से सो ही रही है। अब उपभोक्ताओं को कहना चाहिए कि 'जागो सरकार जागो।'

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया सरिता सिन्हा जी ! सादर अभिनन्दन ! आपका इस ब्लॉग से संबंधित अच्छे सुझाव से युक्त एक अत्यंत विचारणीय कमेंट ईमेल पर मिला ! इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! वर्षों से एक साथ रहते हुए मैंने भी अपनी माताजी और श्रीमतीजी के स्वभाव पर काफी रिसर्च किया है ! पहली बात तो ये कि कानपुर से आगे, जहाँ मेरी ससुराल है, वहां कि बोली भाषा ही थोड़ी खर टाइप की या लट्ठमार कहिये, उस तरह की है ! दूसरी बात ये कि उनमे बहस अमूमन किसी त्यौहार, व्रत वाले दिन और नवरात्र में ज्यादा होती है ! कई बार मैं मजाक में कह भी देता हूँ कि जिसे भूख लगी वो खाना खा लें, पर एक दूसरे पर अपनी खीझ या गुस्सा न उतारें ! आदरणीया सरिता सिन्हा जी, हमारे घर में एक बात बहुत अच्छी बात है कि सब बहस मुंह से हो जाती है, दिल में ज्यादा देर तक कोई नहीं रखता है ! थोड़ी देर बाद एक दूसरे से बोलने भी लगेंगे ! माताजी हमारी बहुत धार्मिक और पुराने विचारों की हैं ! सोचती हैं कि हर बात उनसे पूछ के करो ! उन्हें खुश रखने के लिए मैं उनकी सलाह लें लेता हूँ ! किन्तु श्रीमतीजी इसकी जरुरत नहीं समझती हैं ! हाँ, मुझसे वो सलाह जरूर लेती हैं ! स्वभाव में उनके जिद और जरुरत से ज्यादा स्वाभिमान जन्मजात है ! मुझे उससे कोई दिक्कत भी नहीं है ! शादी हुए अठारह साल हो गए, अब इन सब चीजों की आदत पड़ चुकी है ! बिटिया अभी छठे साल में है, लेकिन बहुत तेजतर्रार और समझदार है, खासकर अपने अधिकारों के प्रति ! मैं उसे इसी बात के लिए सदैव प्रेरित भी करता हूँ, क्योंकि आज के युग में सुख-शान्ति से जीने के लिए इस तरह का विकास बहुत जरुरी है ! आपकी बात सही है कि घर में होने वाले झगड़ों का बच्चों पर खराब असर पड़ता है ! मैं घर में सबको यही बात अक्सर समझाता भी हूँ ! फिलहाल तो शान्ति है ! ईश्वर करें, यूँ ही बनी रहे ! अनुभव से परिपूर्ण एक बहुत अच्छी प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

ईमेल पर प्राप्त आदरणीया सरिता सिन्हा जी का कमेंट- आपकी पोस्ट पर कमेन्ट नहीं हो पा रहा है कृपया इसको मेरी तरफ से पोस्ट करने का कष्ट करें. धन्यवाद..... सद्गुरुजी प्रणाम, ये घर घर की कहानी है. लज्जाशील और संकोचशील बहुएं भी एक उम्र ससुराल में गुज़ार लेने के बाद अक्सर मुखर हो जाती हैं और सासें उनको इंसान नहीं बल्कि आदर्शवाद की एक रोबोटिक मशीन की तरह देखना चाहती हैं. जब सास ने बहू को बेटी तो बहुत दूर की बात है, कभी इंसान भी नहीं समझा, फिर वो कभी नहीं समझेगी, उनको समझाना बेकार है. साथ ही बहुत सी ऐसी बातें होती हैं जो अपने साथ होने पर ही समझ में आती हैं जैसे परिवार में सबसे सीनियर होने की मदांधता...हो सकता है हम भी जब सीनियर मोस्ट हो जाएँ तो सत्ता के नशे में अंधे हो जाएँ. क्यूंकि अभी हममें जो रीज़निंग है, कह नहीं सकते कि बुढ़ापे में बचे गी या अल्ज़ाइमर या डेमेंशिया या कमअक्ली (सठियाने ) की भेंट चढ़ जाएगी. ऐसे में जिसका मस्तिष्क अभी सही सलामत है उसे बहस करने के बजाय चुप हो जाना चाहिए. समझना चाहिए कि अगला एक मानसिक मरीज़ है और हमें उस की देख-भाल करने जैसा महान काम करना है...ये मेरा आज़माया हुआ नुस्खा है, आप भाभीजी को मेरा ये सन्देश पहुंचा दें. एक बार बहस के बजाय चुप हो कर देखें. असीम शांति मिलेगी, ये मेरा दावा है...समझदार बिटिया को मेरा स्नेह. हाँ, अगर ये बहसें ऐसे ही चलती रहीं तो बच्ची इनका असर अपने जीवन में ले लेगी, इसका भी तो ध्यान रखना है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरुजी, नमस्कार, सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर और नर्सें अक्सर संज्ञाशून्य भावशून्य होते हैं. मरीज़ उनके लिए सिर्फ एक सब्जेक्ट भर होता है. मैं ने मरीज़ों को चांटे लगाने वाली नर्सों को भी देखा है. वैसे लखनऊ के PGI में मैं अपने ससुरजी की बीमारी के दिनों में दो महीने रही थी. वहां मरीज़ों की भारी संख्या के चलते एंट्री मिलना मुश्किल है लेकिन डॉक्टर्स और नर्सेज मरीज़ और उसके तीमारदारों से बहुत अच्छा व्यवहार करते हैं. वहां रह कर अस्पताल के प्रति मेरी धारणा बिलकुल बदल गयी. लेकिन और कहीं ऐसा नहीं देखा. वैसे सभी स्वस्थ रहें किसी को अस्पताल का मुंह न देखना पड़े, यही प्रार्थना करती हूँ.

के द्वारा: sinsera sinsera

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! देश के अधिकतर सरकारी अस्पतालों में यही सब होता है, किन्तु सरकार इस तरफ कोई ध्यान नहीं देती है ! डॉक्टरों के अंदर सहानुभूति और संवेदनशीलता ही मर चुकी है ! सबकी रूचि बस पैसा कमाने में है, चाहे वो मरीज से मिले या या फिर दवा की कंपनियों से ! सरकारी अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर तो बस अपनी ओपचारिकता भर पूरी करते हैं ! इस मुद्दे पर आपके सहयोग और समर्थन के लिए आभारी हूँ ! जागरण मंच ने चूँकि भेदभाव के मुद्दे पर हम सबके अनुभव मांगे थे, इसलिए हमलोंगों ने लिख दिया ! व्यक्तिगत दुःख में रूचि लेकर पढ़ने वाले पाठकों की संख्या भी अब कम होती जा रही है, इसलिए बहुत कम लोग ही अपनी लेखनी में अपने दिल का दर्द उजागर करते हैं ! प्रतिक्रिया देने के लिए सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी अस्पताल का व्यवहार देख कर आश्चर्य हुआ यह जूनियर डाक्टर यहीं से सीखते हैं तब इनका यह हाल है दिल्ली में भी यही हाल है कुछ डाक्टर प्रैक्टिस करते हैं वह अस्पताल का इस्तेमाल अपने नर्सिंग होम की तरह करते है उनके मरीजों को सब सुविधाएं मिल जाती है और तुरंत आपरेशन जागरण के हम आभारी हैं हमें अपने भीतर क्या कष्ट लेकर जीते हैं कहने का अवसर मिला |मेरे तो ब्राह्मण होने पर प्रश्न उठाये जाते रहे हैंमुझे पूछते तुम कौन सी बामन हो मैं हंस कर कहती हूँ जी सफाई कर्मचारी बामन हैं लगती तो नहीं हो आपके घर में आ गयी हूँ सुथरी हो गयी हूँ नाक भों सिकोड़ते हैं फिर खुद ही कहेंगे न जी मजाक कर्वे को हमीं मिले

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने पोस्ट का समर्थन कर उसे जो सार्थकता प्रदान की है, उसके लिये हार्दिक आभार ! आपने बिल्कुल सही कहा है कि "कार्यकर्ताओं की वजह से ही नेता लोग सत्ता के शिखर तक पहुंचते हैं और वहां पहुंचने के बाद अगर वे खुद सत्ता के मद मे चूर होकर कार्यकर्ताओं को लताडना शुरु कर देंगे तो यह ना सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, पी एम मोदी की उस हिदायत का भी खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है जिसमे उन्होने जीतने पर भी विनम्रता का भाव बनाये रखने की अपील की है !" ऐसी घटनाएँ न सिर्फ निन्दनीय हैं, बल्कि बीजेपी के लिये चिंता का विषय भी होनी चाहिये ! कार्यकर्ता कोई उनके ग़ुलाम नही हैं ! यदि वो घर बैठ गये तो पार्टी चारो खाने चित्त हो जायेगी ! प्रधानमन्त्री मोदी को ऐसी घटनाओं की न सिर्फ जानकारी लेनी चाहिये बल्कि अपने नेताओं के बुरे व्यवहार पर लगाम भी कसनी चाहिये ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय राजीव गुप्ता जी का कमें- "आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, कार्यकर्ताओं की वजह से ही नेता लोग सत्ता के शिखर तक पहुंचते हैं और वहां पहुंचने के बाद अगर वे खुद सत्ता के मद मे चूर होकर कार्यकर्ताओं को लताडना शुरु कर देंगे तो यह ना सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, पी एम मोदी की उस हिदायत का भी खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है जिसमे उन्होने जीतने पर भी विनम्रता का भाव बनाये रखने की अपील की है-आपने समस्या की तरफ अपने इस शानदार लेख मे ध्यान आकर्षित किया है और आशा यही की जाती है कि इस तरफ जरूरी कार्यवाही करते हुये आगे से ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाई जायेगी. समसामयिक और पठनीय लेख की प्रस्तुति के लिये आपका हार्दिक आभार एवं अभिनन्दन."

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: sadguruji sadguruji

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इस चुनाव मे जातिवाद का मिथक भी टूटा है ! कल कुछ यादव जी लोंगों से भी मेरी बात हुई ! मैने उन्हे यह नही बताया कि मैने किसे वोट दिया था ! मैने उनसे सिर्फ इतना ही पूछा कि आपने किसे वोट दिया ! उन्होने कहा कि कमल के फूल के सिवा कुछ समझ मे नही आया ! मैने उनसे पूछा कि सपा को वोट क्यों नही दिये ? उनमे से एक जो बुजुर्ग थे वी बोले. 'उन हन के का वोट देबल जा.. पूरा कुनबा त कुर्सी की खातीन अपसे मे लडत बा.. बड छोट क कौनों लिहाज नईखे.. ! सबसे बढिया मोदी हाउअन.. जेकरी न कोई आगे.. न कोई पीछे.. ! जेकर सबकुछ जनता ही बा !' जनता चुनाव के समय उन नेताओं से बेहतर सोचती है जो जनता को सिर्फ जातिगत चश्मे से निहारते हैं और उसे मूर्ख बनाने के चक्कर मे लगे रहते हैं !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

एक न्यूज चैनल पर अभिनेत्री विद्या बालन ने कहा कि जो लोगों की आवाज दबाते हैं उन्हें थप्पड़ मारने का मन करता है ! उन्होंने कहा कि वो महसूस करती हैं कि लोगों को दूसरों की अभिव्यक्ति की आजादी का आदर करना चाहिए ! कोई उनसे पूछे कि कौन किसकी आवाज दबा रहा है ? इस देश में जिसके मन में जो आ रहा है, वो बोल रहा है और लिख रहा है ! रही बात थप्पड़ मारने की तो उन्हें मालूम होना चाहिए कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं कि आप कुछ भी बोलें ! घर में माता-पिता बच्चों को गलत बोलने पर रोकते-टोकते हैं ! स्कूल में टीचर बच्चों को बोलने नहीं देते हैं ! क्या आप उन्हें थप्पड़ मारेंगी ? इस देश का एक कानून है, जो गलत बोलने पर सजा देता है ! क्या आप कानून को थप्पड़ मारेंगी ? बोलने से पहले उन्हें सोचना चाहिए था कि अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ जो मन में आये वो बोलना नहीं है ! इस पर हर जगह पर कुछ न कुछ पाबंदिया लगी हुई हैं ! मुझे आश्चर्य होता है कि अपने बच्चों को कभी खुली छूट नहीं देने वाली नामी गिरामी हस्तियां अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर भाषण दे रही हैं ! पहले वो ये बताएं कि वो अपने बीबी-बच्चों को कितनी स्वतन्त्रता दिए हुए हैं? ये सब बड़े लोंगो का दोहरा व्यक्तित्व और दिखावटी पाखण्ड भर है ! सच ही कहा गया है कि हाथी के दांत खाने के और.. और दिखाने के और !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मुझे उन लोंगों की सोच और बुद्धि पर तरस आता है जो पूरे देशभर में चिल्ला रहे हैं कि गुरमेहर कौर को बोलने नहीं दिया जा रहा है ! अरे भाई किसने रोका है उन्हें ! जो कुछ भी उनको कहना था उन्होंने फ़ेसबुक पर कहा ! यहाँ तक कहा कि मैं भारतीय विद्यार्थी परिषद् से नहीं डरती ! कौन आपको कह रहा है कि आप AVBP से डरें? इस देश में बहुत से लोग रोज दावा करते हैं कि वो भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नहीं डरते और कुछ भी उन्हें उल्टा सीधा बोलते हैं ! पीएम मोदी जितने सहनशील तो ज्यादातर चुप रहने वाले भूतपूर्व पीएम मनमोहन सिंह भी नहीं थे ! बोलने की ऐसी आजादी तो कांग्रेज राज में भी कभी नहीं थी ! सोशल मीडिया पर जो भी मन में आया वो सबकुछ कहके गुरमेहर कौर ने ये साबित कर दिया है कि वो किसी से नहीं डरती है ! पूरा प्रकरण मशहूर होने के लिए की गई ड्रामेबाजी के सिवा और कुछ नहीं है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

नीतीश सरकार में शामिल मंत्री और कांग्रेस नेता अब्दुल जलील मस्तान को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने के लिए बिहार विधानसभा में बीजेपी विधायकों ने हंगामा किया और विधानसभा के बाहर बर्खास्त करने की मांग को लेकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया ! मस्तान ने नोटबंदी के विरोध में पीएम मोदी की तस्वीर पर समर्थकों से जूते मरवाया था ! मीडिया में छपी खबरों के अनुसार पीएम मोदी की तस्वीर पर जूता मारने की घटना 22 फरवरी की है, जब पूर्णिया में ये मंत्री नोटबंदी के विरोध में बुलाई गई सभा में पहुंचे थे ! अब्दुल जलील मस्तान ने कहा था, ‘’वो पीएम नहीं है, वो नक्सलाइट है, उग्रवाद है, डकैत है और लोगों को तरह-तरह से सताने वाला है.’’ हंगामा बढ़ता देख मंत्री ने माफी मांग ली है लेकिन बीजेपी विधायक उनके इस्तीफे पर अड़े हैं !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

पीएम मोदी ने लगभग एक हफ्ते पहले हरदोई में रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि यूपी ने मुझे गोद लिया है. यूपी मेरा माईबाप है. मैं माईबाप को नहीं छोड़ूगा. यूपी की चिंता है मुझे. यहां की स्थिति बदलना मेरा कर्तव्य है. जब मोदी ने खुद को यूपी का गोद लिया बेटा बताया तो हंगामा खड़ा हो गया था. एक तरफ जहाँ बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मोदी को नोटिस भेजा तो दूसरी तरफ अखिलेश, राहुल, प्रियंका गांधी और डिंपल यादव सबने मोदी को बाहरी कहकर घेर लिया. कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोदी पर हमला करते हुए कहा कि यूपी को किसी बाहरी को गोद लेने की जरूरत नहीं है. राहुल जी के दिल में, उनकी जान में उत्तर प्रदेश है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

रही बात पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सम्मान की तो मुझे लगता है कि मोदी सरकार ने उनका सम्मान करते हुए बहुत से मुसीबतों से उन्हें बचा रखा है, जैसा कि अक्सर बड़े नेता एकदूसरे के लिए करते हैं, भले ही सार्वजनिक रूप से जनता के सामने वो एकदूसरे को लाख भलाबुरा कहें. मनमोहन सिंह का अपमान सबसे ज्यादा तो खुद कांग्रेसी नेताओं ने ही किया है. देश की जनता को अच्छी तरह से याद है कि राहुल गांधी ने दागी नेताओं पर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए एक ऑर्डिनेंस की कॉपी को भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में फाड़कर अपना विरोध जताया था और उसे मानने से इंकार कर दिया था. कांग्रेस से कोई पूछे कि मनमोहन सिंह की अगुआई वाली भारत सरकार द्वारा जारी ऑर्डिनेंस को फाड़ने से क्या तत्कालीन पीएम मनमोहन की प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुंची थी?

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में संवैधानिक मर्यादा की तमाम सीमाओं को लांघते हुए नोटबंदी को संगठित लूट और कानूनी डाका कहा था. क्या यह पीएम मोदी, संविधान, सदन और बहुमत देने वाली जनता का अपमान नहीं है. देश को मंदी से बचाते हुए और तमाम जरुरी आर्थिक सुधार करते हुए जो मोदी भारत के संकटमोचक साबित हुए हैं, उन्ही के बारे में लोकसभा चुनाव से पहले मनमोहन सिंह ने कहा था कि मुझे ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना देश के लिए त्रासदी से कम नहीं होगा. मनमोहन सिंह उस समय भय और पूर्वाग्रह से ग्रस्त थे जो ऐसा बोल गए. ये बड़ी हास्यास्पद बात है कि मनमोहन सिंह खुद देश के लिए एक बड़ी त्रासदी साबित हुए और दूसरों के बारे में वो ऐसा सोचते और कहते हैं.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी आपने मीडिया में पत्रकारिता पर प्रकाश डालते हुए "पत्रकारिता का असली मकसद अपनी लेखनी से भ्रष्ट और गैरजिम्मेदार शासन की आलोचना करते हुए गरीब और आम आदमी के हक़ की लड़ाई लड़ना है तथा धार्मिक कट्टरपंथियो के विस्तार, हिंसक विचारों और उनके अंधविश्वासों के खिलाफ लड़ना है. पत्रकारिता की इन्ही कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए बांग्लादेश में कई ब्लॉगर शहीद हो चुके हैं और पाकिस्तान के सिंध व बलूचिस्तान प्रान्त में अपहरण के शिकार हो शासकों व सैनिकों के द्वारा दी जाने वाली मानसिक व शारीरिक यातना झेल रहे हैं" सुंदर टिप्पणी की है साथ ही हम जागरण वालों को जो कहना चाहते थे उस पर भी प्रकाश डाला है .

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय सिंह साहब ! सादर अभिनन्दन ! ब्लॉग पर आने और पोस्ट को सकारात्मक महसूस करने के लिए धन्यवाद ! व्यंग्यात्मक रूप से आपने प्रतिक्रया दी है ! आपने तालाब की बात की है तो पूरे देश का रिकार्ड तो मेरे पास नहीं है, किन्तु काशी में बड़े पैमाने पर अनगिनत तालाबों का कायाकल्प हुआ है ! एक ऐतिहासिक तालाब तो यहाँ से महज चाँद क़दमों की दूरी पर है, जिसका अच्छे ढंग से जीर्णोंद्धार हुआ है ! जनता भी इस काम में बहुत रूचि ले रही है ! डिजिटल इण्डिया की तरफ धीरे धीरे हम बढ़ रहे हैं ! कैशलेश इकोनॉमी होने में समय तो लगेगा ही ! बुलेट ट्रैन भी देर-सबेर चलेगी ही ! मनरेगा गरीब किसानों को तो रोजगार दे ही रही है ! रही बात सरकारी रोजगार तो उसकी स्थिति आप जानते ही हैं ! ऐसी स्थिति में स्किल डेवलपमेंट और स्वरोजगार का विशेष महत्व तो है ही ! स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत हेतु प्रयास जारी है और होना भी चाहिए, क्योंकि प्रयास न करने की अपेक्षा प्रयास करना ज्यादा अच्छी बात है ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय अच्युतमकेश्वम जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट की सराहना के लिए धन्यवाद ! निसंदेह बजट अच्छा है, किन्तु मध्यम वर्ग को आयकर मे थोड़ी और छूट देनी चाहिये थी ! किसानों के लिये कारगर विपणन की व्यबस्था अब बहुत जरूरी हो गई है ! बजट मे इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिये था ! अभीकुछ दिन पहले देश मे कुछ जगहों पर टमाटर लागत से भी कम एक रुपये किलो बिका है, जबकि उसी समय देश के अन्य हिस्सों मे टमाटर 10 रुपये से लेकर 80 रुपये किलो तक बिक रहा था ! यदि में एक अच्छी विपणन व्यवस्था होती तो किसानों को भारी क्षति नहीं उठानी पड़ती ! सरकारी खरीद एजेंसियाँ किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने मे फेल साबित हुई हैं ! किसानों की सबसे बड़ी समस्या यही है ! ब्लॉग पर समय देने के लिये सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

इस देश में टेक्स चोरी करने वाले लोग कितने चालाक हैं, इसकी एक बानगी देखिये ! एक बार में इनकम टेक्स के एक वकील साहब के यहाँ बैठा हुआ था ! वहाँ पर आने वाले लोग सबसे पहले वकील साहब से इनकम टेक्स में छूट की सीमा पूछते थे, उसके बाद कहते थे कि इतने का ही आईटीआर दाखिल कर दीजिये ! मैंने वकील साहब से पूछा कि इनकी असली इनकम क्या है ? वकील साहब हँसते हुए कहने लगे, 'यहाँ पर आने वाले टेक्स छूट के सिसाब से अपनी इनकम बताते हैं ! सरकार जिस साल इनकम टेक्स में छूट देती है, उस साल लोंगों की इनकम भी बढ़ जाती है !' उस दिन मुझे समझ में आया कि प्राइवेट क्षेत्र में स्वरोजगार और व्यवसायी वर्ग के अधिकतर आईटीआर महज ओपचारिकता निभाने और लोन लेने हेतु दाखिल होते हैं !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

प्रधानमंत्री मोदी को नोटबंदी का सुझाव देने का दावा करने वाली संस्था अर्थक्रांति आयकर खत्म करने की वकालत भी करती है ! अर्थक्रांति के प्रमुख अनिल बोकिल ने एक न्यूज चैनल के साथ खास बातचीत में कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को नोटबंदी का सुझाव दिए था ! अनिल बोकिल ने नोटबंदी का स्वागत करते हुए कहा कि नोटबंदी तो हो गई, लेकिन अभी आधा काम बचा है और वो है सारे टैक्स खत्म करके बीटीटी लागू करना ! अब वो बीटीटी लागू करने की सलाह दे रहे हैं. अनिल बोकिल बीटीटी को गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स यानी जीएसटी से भी बेहतर मानते हैं ! बीटीटी का मतलब है, बैंकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स अर्थात वो टैक्स जो बैंकिंग के जरिये होने वाले हर लेन-देन पर वसूला जाना चाहिये !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

अर्थक्रांति के प्रमुख अनिल बोकिल सुझाव देते हैं कि देश में वर्तमान समय में जारी डायरेक्ट टेक्स (इनकम टैक्स) सहित सभी तरह के इनडायरेक्ट टैक्स भी खत्म कर देना चाहिए और सिर्फ एक टेक्स बीटीटी लागू कर देना चाहिए. बीटीटी यानी बैंकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स की दर दो प्रतिशत रखने का वो सुझाव देते हैं ! अनिल बोकिल का सुझाव निश्चित रूप से बहुत अच्छा और क्रांतिकारी सुझाव है, किन्तु ये तभी देश में लागू हो सकता है, जब हमारे देश के सारी अर्थव्यवस्था नकदीरहित हो जाए ! फिलहाल तो उनके सुझाव पर अमल संभव नहीं है, क्योंकि देश में 90 प्रतिशत लेनदेन नकदी के रूप में हो रहा है और भारत की लगभग 73 फीसदी से भी अधिक आबादी इन्टरनेट व स्मार्टफोन आदि के प्रयोग से दूर है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

प्रधानमंत्री मोदी के नोटबंदी के ऐलान के बाद भारी तादाद में लोगों ने अपने-अपने खातों में पैसे जमा करवाए ! जिन लोंगों के पैसे अपनी कमाई के थे, उनके लिए चिंता की बात नहीं, किन्तु अब सरकार और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर उन खाते पर है जिसमें लोगों ने अवैध धन जमा करवाए हैं ! इस सिलसिले में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट बिग डेटा का इस्तेमाल करने जा रहा है ताकि नोटबंदी के चलते बैंकों में बड़े करेंसी नोट जमा कराने वाले ईमानदार करदाताओं में ब्लैक मनी छिपाने वालों को अलग-अलग छांटा जा सके ! मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ बिग डेटा ऐनालिटिक्स टूल के द्वारा टोटल इनकम टैक्स डेटा को चेक करके अनियमितता के बारे में पता लगाया जा रहा है ! इसके आधार पर टैक्स अधिकारी नोटिस भेज रहे हैं !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

दरअसल आयकर विभाग के रेडार पर वैसे लोग हैं जिनके खाते में नोटबंदी के बाद बहुत अधिक पैसे जमा हुए हैं और उनका लेनदेन संदिग्ध नजर आ रहा है ! आयकर विभाग ऐसे खातों में जमा पैसों के सोर्स की जानकारी जुटाकर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा ! अगर किसी टैक्सपेयर्स का जवाब सही नहीं पाया जाता है तो उन्हें जांच का सामना भी करना पड़ सकता है ! आयकर विभाग नोटबंदी के बाद बैंक खातों में जमा पैसे की जांच नोटबंदी के बाद से ही कर रहा है ! मीडिया में प्रकाशित ख़बरों के अनुसार आयकर विभाग ने ऐसे लोगों से ऑनलाइन इस जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कहा है ! जिनके जबाब संतोषजनक और उनके आयकर रिटर्न से मेल खाते हुए होंगे उनको परेशानी नहीं होगी !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

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के द्वारा: jlsingh jlsingh

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले 30 सालों से कांग्रेस से जुड़े रहे और राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले कांग्रेस के प्रभावशाली नेता ठाकुर धीरेंद्र सिंह बीजेपी में शामिल हो गए हैं. यूपी चुनाव के लिए तैयारी कर रही कांग्रेस के लिए यह बहुत बुरी खबर है. कहा जाता है कि धीरेंद्र सिंह ही वो नेता हैं, जिन्होंने भट्टा पारसौल गांवों में अधिग्रहण को लेकर हुए आन्दोलन के समय राहुल गांधी को बाइक पर बिठाकर मौके पर पहुंचाया था. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ठाकुर धीरेंद्र सिंह यूपी कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता भी थे. ऐसे जमीनी नेताओं का कांग्रेस से दूर भागना अपने आप में ही बहुत कुछ कह रहा है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

उन् ग्रामीण भाईओं की भूरी भूरी प्रंससा करनी चाहिए. वाकई यदि इन् ग्रामीणों की तरह सभी लोग किसी के भरोशे न रहकर खुद मेहनत करने की ठान लें तो हमारे देश की तस्वीर ही दूसरी होंगे. नेता तो वोट के लिए सिर्फ वादे पर वादे ही करते है, कास्ट के नाम पर वोट लूटते हैं पर जब काम की बरी आती है तो मुह फेर लेते हैं या पैसे या किसी प्रॉब्लम का रोना रोते हैं जबकि उन्हें पता होता है की यह काम या उनका वादा पूरा हो पायेगा या नहीं बल्कि सिर्फ जनता को लुभाने के लिए बातों के लच्छे बनाते हैं और अपना काम निकल जाने पर ठेंगा दिखा देते हैं. हमें सबसे पहले तो जाति, धर्म के नाम पर वोट न डालकर सिर्फ विकास के नाम पर ही वोट देना चाहिए और मुफ्त की सरकारी या किसी भी चीज पर देपेंद न हकर खुद की मेह्नत पर भरोषा करना चाहिए.

के द्वारा: Noopur Noopur

राहुल गांधी ने नोटबंदी के मामले को लेकर मोदी सरकार पर 11 सवाल दागे तो बीजेपी ने भी पलटवार किया और राहुल पर जवाबी हमला बोल दिया. उसपर भी गौर कीजिये. राहुल गांधी आरोपों में घिरे हुए हैं और उससे ध्यान हटाने के लिए बीजेपी पर आरोप लगा रहे हैं. राहुल गांधी को बताना चाहिए कि चॉपर स्कैम में मोटा माल किसने खाया. नोटबंदी से हुई मौतों पर दुख लेकिन कांग्रेस शासन में ढाई लाख से ज्यादा किसानों ने खुदकुशी की. 2012 में कांग्रेस ने काले धन पर एसआईटी क्यों नहीं बनाई? हमारी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया, किसानों को स्वाइल हेल्थ कार्ड दिए. बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मौतों पर राजनीति करती है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

कांग्रेस के स्थापना दिवस के मौके पर राहुल गांधी ने नोटबंदी के मामले को लेकर मोदी सरकार पर एक बार फिर अपने 11 सवाल दागे. जरा इन सवालों पर गौर कीजिये. बैंकों से पैसे निकालने की सीमा को खत्म किया जाना चाहिए. यह लोगों की वित्तीय आजादी छीन रही है. प्रधामंत्री ने लोगों को अपना पैसा बैंकों में जमा कराने पर मजबूर किया, अब बैंक से 24 हजार रुपये निकासी की सीमा हटाएं. किसानों का कर्ज माफ किया जाना चाहिए. किसानों को न्यूनतम समर्थन पर 20% बोनस दिया जाना चाहिए. मनरेगा के दिन और दिहाड़ी को दोगुना करें पीएम. बताइये, ये सवाल हैं या सुझाव? सुझाव भी ऐसे हैं जो यदि वो स्वयं सत्ता में रहते तो भी इन सुझावों को लागू नहीं कर पाते.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

यदि सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि राहुल गांधी को मोदी फोबिया हो गया है तो कोई गलत नहीं कह रहे हैं. ऐसा लगता है कि नोटबंदी के बाद राहुल गांधी को सोते-जागते, उठते-बैठते हर तरफ सिर्फ और सिर्फ मोदी ही दिखाई पड़ रहे हैं. लोग सोशल मीडिया के जरिए उनसे ये पूछ रहे रहे हैं कि देश में और भी समस्‍याएं हैं उन्‍हें क्यों नहीं वो उठा रहे हैं? उन्हें सिर्फ नोटबंदी ही पर ही इतनी तकलीफ क्‍यों हो रही है? पूरे देश की जनता चुपचाप अपने काम में लगी हुई है. कहीं पर भी ना कहीं कोई हंगामा हो रहा है और ना ही कहीं कोई जनआंदोलन, फिर भी राहुल गांधी, अरविन्द केजरीवाल और ममता बनर्जी जैसे नेता कुछ ज्यादा ही परेशान हैं. जनता को शक है कि उनकी दाल में जरूर कुछ काला है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार कहा हैं कि वो नोटबंदी को लेकर भ्रष्‍टाचार के खिलाफ एक वृहद् यज्ञ कर रहे हैं. राहुल गांधी का कहना है कि हर यज्ञ में किसी ना किसी की तो बलि चढ़ती ही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस यज्ञ में आम आदमी की बलि चढ़ रही है. उनके इस बयान के बाद अब सोशल मीडिया में उनकी जमकर खिंचाई शुरु हो गई है. राहुल गांधी इतने अल्पज्ञ हैं कि उन्हें यह भी नहीं मालूम कि यज्ञ में बलि नहीं, बल्कि हवन सामग्री की आहुति डाली जाती है. मोदी के नोटबंदी के यज्ञ में कालेधन की आहुति पड़ रही है. ये राहुल गांधी की मंदबुद्धि सोच का ही परिणाम है कि सोशल मीडिया पर लोग उनका मजाक उड़ाते हुए कह रहे हैं कि उन्‍हें मोदी फोबिया हो गया है.

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माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा, वो मोदी पर झूठे आरोप लगाने वालों को शर्मसार करने वाला है. मजेदार बात ये हैं कि नेताओं को बड़ी रकम देने वाली सहारा की तथाकथित लिस्ट में कांग्रेस के कई नेताओं के नाम भी हैं. उनमे से एक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की भावी मुख्यमंत्री उम्मीदवार श्रीमती शिला दीक्षित भी हैं. सहारा ने नेताओं को यदि वाकई करोड़ों रूपये दिए तो क्यों दिए? पब्लिक से पैसा लेकर सहारा ने कहाँ कहाँ खर्च किया और क्यों खर्च किया, यह तो सहारा से पूछा जाना चाहिए. सहारा यदि आज संकट में है और अनेकों समस्याओं से जूझ रही है तो इसके लिए कंपनी के जो सर्वेसर्वा हैं, सबसे ज्यादा वही जिम्मेदार हैं. यदि अपने वर्करों पर धन लुटाये होते तो कंपनी आज बहुत मजबूत होती.

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राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्‍यक्तिगत भ्रष्‍टाचार के वो आरोप लगा रहे हैं, जो न सिर्फ पुराने हो चुके हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट उसे खारिज भी कर चुकी है. कुछ रोज पहले उन्‍होंने भूकम्प लाने की चेतावनी देते हुए मोदी पर सहारा से चालीस करोड़ रुपए लेने के आरोप लगाए. इस पर वो लगातार हर जनसभा में बीजेपी और पीएम से जवाब मांग रहे हैं. जानेमाने वकील प्रशांत भूषण ने ये मामला एक जनहित याचिका के जरिये सुप्रीम कोर्ट में उठाया था. कोर्ट ने प्रशांत भूषण से कहा कि अगर वो इस मामले की जांच कराना चाहते हैं या इस मामले को लेकर वाकई गंभीर हैं तो कोई ठोस सुबूत इस अदालत मे अगली तारीख तक पेश करें. इस मामले में कोई भी ठोस सबूत नहीं है.

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मोदी के सत्ता संभालने से लेकर अबतक राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला कर रहे हैं. खासकर, जबसे मोदी ने नोटबंदी का फैसला लिया है. ये राजनीतिक रूप से अपरिपक्वता और मूर्खता ही कही जायेगी कि राहुल गांधी की कई रैलियों और कार्यक्रमों में लोग मोदी-मोदी के नारे लगाकर उनकी हूटिंग करके उन्‍हें करारा जवाब भी दे चुके हैं, लेकिन, फिर भी राहुल गांधी के उलटे सीधे अनाड़ियों वाले वार जारी हैं. नितीश जैसे जो राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं वो फिलहाल इस समय चुप हैं. कालाधन रखने और खपाने वाले जिन नेताओं को नोटबंदी से भारी नुकसान हुआ है, वही नेता आम जनता की परेशानी की आड़ लेकर ज्यादा चिल्ला रहे हैं.

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के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाब नबी आजाद ने राज्यसभा में नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी के फैसले की वजह से 40 लोग मारे गए हैं. सरकार की गलत नीति से जितने लोग मर गए हैं, उससे आधे तो पाकिस्तानी आतंकियों ने उरी हमले में नहीं मारे थे. गुलाब नबी आजाद जैसे पुराने कांग्रेसी नेता कितना विचित्र और बेतुका बयान देते हैं. उरी हमले से लाइन में खड़े लोंगो की तुलना करना शहीद सैनिकों का अपमान है. क्या लाइन में खड़े सभी लोंगों को दिक्कत हो रही है, नहीं, बल्कि लाइन में खड़े कुछ अति वृद्ध लोग जो शरीर छोड़े हैं, उसकी मूल वजह उनके विभिन्न तरह रोग थे. ये बात जरूर है कि उनके लिए रूपये देने की एक अलग से व्यवस्था करनी चाहिए थी.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट की सराहना के लिए धन्यवाद ! इसमें कोई संदेह नहीं कि बहुत से नेताओं के पास अथाह कालाधन कालाधन रहा होगा ! अचानक हुई नोटबंदी के कारण वो उसे खपा नहीं पाये, असली दुःख शायद उनका यही है ! इसी से आगबबूला हो वो इस समय जो दिशाहीन और विचित्र राजनीति कर रहे हैं ! सब विपक्षी नेता कह रहे हाइंज कि कालेधन का वो सपोर्ट नहीं करते हैं, लेकिन नोटबंदी का विरोध करते हैं ! वो मोदी सरकार पर दबाब बना कुछ दिनों तक पुराने नोट चलवाने की मोहलत चाह रहे हैं ! सरकार की को किसी भी हालत में नोटबंदी का फैसला वापस नहीं लेना चाहिए, नहीं तो आम जनता का विश्वास उसपर से उठ जाएगा ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय विष्ट जी ! सादर अभिनन्दन ! बधाई देने के लिए धन्यवाद ! बेटी की गुल्लक टूटते समय मैं परेशान था कि अब वो रोयेगी, लेकिन वो रोइ नहीं, बस नया गुल्लक ला के देने का आग्रह की ! उसकी यही बात दिल को छू गई और मुझे भावुक कर दी ! टीवी पर कार्टून चैनल सीएन देखना उसे बहुत पसंद है, किन्तु कुछ देर वो मेरे साथ बैठकर न्यूज भी देख सुन लेती है ! उसी का असर है कि नोटबन्दी से होने वाली दिक्कतों का एहसास उसे है ! बच्चे यदि समझ रहे है कि गुल्लक से बड़ा देश है तो बड़ों को भी देशहित में ये समझना चाहिए कि छुपाकर रखे गए कालेधन का मोह छोड़ें और नोटबंदी के कारण हो रही दिक्कतों का सामना देशप्रेम की भावना से करें ! प्रतिक्रिया और बधाई देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

पीएम मोदी के भाषण से बौखलाए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने उन पर पलटवार करते हुए प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर कहा, "प्रधानमंत्री जापान से आए और उन्‍होंने नोटबंदी के कारण लोगों को हो रही दिक्‍कत के मद्देनजर 50 दिन तक सहयोग करने की मांग की तो क्‍या आम आदमी अगले 50 दिनों तक और कष्‍ट उठाता रहेगा? क्‍या लोगों को अगले 50 और दिनों तक लाइन में खड़े होकर गुजारने होंगे? जनता 50 दिन तो क्‍या 50 घंटे तक इंतजार करने के मूड में नहीं है. पूरे देश में इमर्जेंसी जैसे हालात हैं. लोग भूखों मर रहे हैं." उन्‍होंने कहा, "मोदी जी अहंकार छोड़िए और नोटबंदी के फैसले को वापस ले लीजिये. नोटबंदी का फैसला वापस लेने के अलावा और कोई दूसरा उपाय नहीं है. सरकार चाहे तो इंतजाम पुख्ता कर इस नियम को फिर से लागू कर सकती है." आम जनता अभी भी प्रधानमन्त्री जी का साथ दे रही है, अत: केजरीवाल जी की बातें लोंगो को भड़काने के लिये ही कही जा रही हैं. विपक्षी नेता नोट बंदी के मुद्दे पर जनता को भड़कायेंगे, यह बात सरकार को पता होनी चाहिये थी, इसलिये देश मे नक़दी की कमी न हो, इसकी समुचित व्यवस्था करनी चाहिये थी. सरकार को बैंक और एटीम से रुपये बदलवाने, जमा करने और एटीम से नकद लेने की व्यवस्था तुरन्त सही करनी चाहिये और शादी-विवाह वाले मामलों मे कुछ छूट जरूर देनी चाहिये. देश की अधिकतर जनता प्रधानमन्त्री मोदी के साथ है. जनता केवल थोड़ी और राहत व छूट चाह रही है, जो उसे मिलना चाहिये.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

गोवा में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के शिलान्यास के बाद नोटबंदी के फैसले पर अपनी बात रखते हुए प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की आंखों से आंसू बहने लगे और उन्होंने जनता से भावुक अपील करते हुए कहा, "किसी को तकलीफें होती है तो मुझे भी होती है. मैंने बुराइयों को निकट से देखा है. देश के लिए मैंने अपना घर परिवार छोड़ा है, अपना सब कुछ देश के नाम कर दिया है. मैं जानता हूं मैंने कैसी कैसी ताकतों से लड़ाई मोल ले ली है. जानता हूं कैसे लोग मेरे खिलाफ हो जाएंगे. मुझे ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे, मुझे बर्बाद कर देंगे. लेकिन मैं हार नहीं मानूंगा. आप सिर्फ 50 दिन मेरी मदद करें. मेरा साथ दें. मैंने देश से सिर्फ पचास दिन मांगे है, 30 दिसंबर तक का वक्त दीजिए. उसके बाद अगर मेरी कोई गलती निकल जाए, गलत इरादे निकल जाए, कोई कमी रह जाए तो जिस चौराहे पर खड़ा करेंगे खड़ा होकर, देश जो सजा देगा उसे भुगतने के लिए तैयार हूं."

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सिंह साहब ! ब्लॉग पर आपका और आपके विचारों का स्वागत है ! मेरे विचार से नोट बंदी का निर्णय बिल्कुल सही और ऐतिहासिक है ! कालाधन यदि राजनीतिक दलों, धार्मिक स्थलों और बहुत से लोंगो के पास है तो उसे भजाने के लिए आखिर में वो बैंक ही तो जाएंगे ! कालाधन कहीं भी हो, उजागर तो होगा ही ! टैक्स के रूप में सरकार को भारी आय भी होगी ! सीमापार से आ रहे फर्जी नोट और आतंक में कमी आएगी ! देश की साख बढ़ेगी ! रही बात कफ़न और शादी की तो दोनों ही जारी है ! कहीं कुछ रुका नहीं है ! मेरे पास इस माह होने वाली शादियों के कई निमन्त्रण पत्र हैं ! मैंने उनसे पूछ कि नोटबंदी से शादी में दिक्कत हो रही होगी ? उन्होंने कहा थोड़ी दिक्कत तो है, पर चेक सब लोग ले रहे हैं ! शादी के वास्ते जो रूपये घर में रखे थे, वो अपने खाते में जमा कर दिए ! देश की जनता इन दिनों जो थोड़े से लेकर बहुत तक कष्ट झेलकर राष्ट्रहित में जो तपस्या कर रही है, वो अनुपम और अद्वितीय है ! उन्हें कोटि कोटि नमन ! केवल जिसकी सुरक्षा पर लाखों रूपये खर्च होते हों और जिसके दैनिक खर्च का कोई हिसाब न हो वो राहुल गांधी चार हजार रूपये के लिए लाइन में खड़े होकर सेल्फी देते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, मीडिया को एक ब्रैकिंग न्यूज देते हैं और ये सब ड्रामा कर अपमान महल में चले जाते हैं ! कभी किसी लाश पर राजनीति तो कभी सरकार की किसी अच्छी घोषणा पर भी राजनीति ! जनता उनकी इन सब हरकतों से ऊब चुकी है, इसलिए उनकी गतिविधियों को गंभीरता से नहीं लेती है ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! आपने पुनः मोदी जी को सर्वगुण संपन्न साबित कर दिया. भारत के इतिहास में या काम से काम ७० साल के इतिहास में कम से कम एक ब्यक्ति तो सबसे अलग है! भगवान राम, कृष्ण, बुद्ध आदि को भी सब लोग उनके समय में कहाँ पहचान पाए थे. मोदी जी को भी लोग बाद में अवश्य भगवान मान लेंगे. उनकी बुद्धिमत्ता और चमत्कारिक निर्णय लेने की क्षमता को बधाई है. हाँ कुछ लोग अवश्य बेवजह टी वी चिल्ला रहे हैं या कहें शोर मैच रहे हैं. बैकों या ATM के सामने लाइन में खड़े रहने वाले भी सभी सामान्य जान मोदी जी के इस कदम की भूरी भूरी प्रशंशा कर रहे हैं. अब वे लोग क्या करें जिनके भाग्य में कष्ट लिखा है. बड़ी मुश्किल से बेटी की शादी ठीक हुई. पैसे निकाल कर घर में रक्खे थे. उन्हें ये पता होना चाहिए था की कभी भी यह पैसा काला हो सकता है. मरनेवाले भी मोदी विरोधी ही होंगे जो इन्ही दिनों मर रहे हैं. अच्छा हो रहा है की उनके लिए कफ़न भी नशीब नहीं हो रहा. कोई तो मदद करता उन्हें... पर मानवता आज मर चुकी है. ... अलबत्ता राहुल गाँधी के अलावा किसी छुटभैये नेता को भी बैंकों की लाइन में नहीं देखा गया. कितने संपन्न हैं ये लोग ! भाजपा के किसी नेता के पास काला धन तो है ही नहीं... ये सभी चुनाव रैलियां सफ़ेद धन से ही करते होंगे. मोदी जी की सभाओं में भीड़ भी ऐसे ही चली आती है... आप समझ रहे होंगे मेरी बात! अब बहुत सारे मंदिरों मस्जिदों का क्या होगा? जो भी होगा छह ही होगा. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

मीडिया में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुरुवार को अपने चार हजार रुपए बदलने दिल्ली के संसद मार्ग स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच पहुंचे. वो आम लोंगों कि दिक्कत समझने गए थे, किन्तु हँसते मुस्कुराते हुए सेल्फी देते रहे और मीडिया में छाने के लिए गंभीर होने की एक्टिंग भी करते रहे. वो बैंक वालों पर आरोप लगाने लगे कि मुझे देख लोंगो को अंदर बुला लिया गया. राहुल गांधी के इस कार्यक्रम पर भाजपा के प्रवक्ता अनिल बलूनी ने कहा, ‘राहुल गांधी कालेधन से परेशान हैं. आज तक गांधी परिवार का कोई सदस्य बैंक नहीं गया है. ये रॉयल परिवार से ताल्लुक रखने वाले राहुल गांधी को बैंक पहुंचने की क्या जरूरत है?'

के द्वारा: sadguruji sadguruji

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरुजी देश में क्या कारन है की सारे आरोप हिन्दू गुरु और संतो पर लगाये जाते मौलवियों.पादरिओ पर नहीं और मीडिया केवल हिन्दुओ पर आक्रामक रहता.इसाई मिशन के पास बहुत पैसा है वे भारत में धर्मान्तर और दुसरी अवैध गतिविधिया करवाते थे.हमारे धर्म गुरु खास कर बापू आसारामजी उनकी गत्विधियो को पत्रिका प्रवचनों द्वारा लोगो को बताते थे जिससे नाराज़ हो कर उन्होंने सोनिया गाँधी से कह कर बापूजी को झूटे केस में फस्वाया मीडिया तो चर्च के पैसे के दम पर उनका ट्रायल करता रहा और जब मीडिया में उचल जाये अदालते भी प्रभीवित होती हमारे धर्मगुरु देश विदेशो में अपने धर्म के लिए कितना अच्छा कार्य करके मानवता की सेवा में लगे है उसके लिए आदर और धन्यवाद् के पात्र है कुछ गलत माचालिया हो सकती लेकिन उसके लिए सबको गलत नहीं हाहा जा सकता लेकिन लालू,मुलायम,माया कांग्रेस ने देश को लूटा उनका क्या हुआ.जैसे आपको चिंता हम भी चितित है लेकिन हम उनके बारे में पढ़ते इसलिए कुछ मालुम है. आपके विचारो के लिए धन्यवाद्.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

J.L. SINGH (ईमेल पर प्राप्त एक प्रतिक्रिया) आज भारतवर्ष में ऊपर से लेकर नीचे तक सब झूठ, फरेब और भ्रस्टाचार के दल-दल में आकंठ डूबे हुए हैं, तभी तो देश की नैतिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से दिन-प्रतिदिन दुर्दशा बढ़ती ही जा रही है. देश तभी सुधरेगा, जब देश का हर व्यक्ति स्वयम को शिक्षा देकर अपने को सुधारेगा. आज जरुरत इस बात की है कि देश का हर व्यक्ति स्वयम का गुरु बने और स्वयम को ही सबसे पहले शिक्षित करे. शुबह शुबह आपका ज्ञान भरा आलेख पढ़ा तो मन तृप्त हो गया. आज ऐसे ही साक्षत स्वयम सिद्ध भगवन सूर्य का प्रथम अर्घ्य का दिन सूर्य षष्टी व्रत है. आज हम साक्षात् देव् शक्ति द्योतक सूर्य भगवन की आरधना करते हैं. उनके साथ, पृथ्वी, जल, आकाश और अग्नि और पवन की या कहें की प्रकृति की पूजा करते हैं. प्रकृति ही हमारी सृष्टी करती है, वही सब कुछ सिखाती है वही जीवन यापन का सारा सामान मुहैया कराती है. हम सब प्रकृति के उपासक बनें. आत्मज्ञान प्राप्त करें. और "परहित सरिस धर्म नहीं भाई" की अवधारणा में बिश्वास रक्खें यही सर्वोत्तम होगा. सभी जाने मने संत अंत में स्वार्थी ही सिद्ध होते हैं. अपवाद स्वरुप भी हैं. जिनकी अवश्य पूजा और सम्मान सर्वदा होता रहता है. सादर! पोस्ट पर फिर से प्रतिक्रिया नहीं जा रही इसलिए आपको मेल कर रहा हूँ.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा:

जय श्री राम आदरणीय सद्गुरु जी जिस देश के नेता कुर्सी के लिए देश तक बेच दे उस देश में कोइ क्रांतिकारी कदम उठाना कितना खतरनाक है आप समझते है ! इस मुद्दे में भी सेक्युलर नेता इस प्रथा पर निर्णय लेने का अधिकार मुस्लिम सानुदाय पर छोड़ना चाहते और मोदीजी की आलोचना सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा देने के लिए कर रहे. मुस्लिम नेता मान मर्यादा छोड़ हिन्दुओ और धर्म को गली दे रही प्रधानमंत्री को भी नहीं छोड़ रहे. ये धर्म का नहीं खुद का बनाया है और अपनी अहमीयत के लिए सुधार नहीं चाहते.! चूंकि मामला अदालत में है उसी लो निर्णय दे. राज्य सभा में बहुमत नहीं इसलिए संविधान संसोधन नहीं हो सकता. सुन्दर विवेचना के लिए आभार और बधाई. !

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय सद्गुरु जी सादर अभिवादन Iआपकी सारी बातें सही हैं लेकिन सवाल है कि मनसे ने पाकिस्तानी कलाकारों वाली फिल्मों का विरोध करने से पहले सरकार को पाकिस्तानी कलाकारों व खिलाडियों को वीजा देने की पालिसी का विरोध क्यों नहीं किया Iक्या आपको करण जोहर आदि को राष्ट्रवाद के नाम पर ब्लैकमेल करने की गंध नहीं लगती I जो तोड़ फोड़ की धमकी देकर फिल्म रिलीज़ रोकने की बात करते हैं वह धन वसूली करने के बाद शांत हो सकते हैं I रही आर्मी  वेलफेयर में पांच करोड़ रुपये दिलाने की बात तो उसे प्रेम पूर्वक मोटीवेट करके लिया होता तो कितना सुन्दर होता I आपके विचारों से पूरी तौर से सहमत लेकिन केवल कहना चाहूँगा  कि देवेन्द्र फड़नवीस की मध्यस्थता में हुए समझौते से मनसे भले जीत का जश्न मना ले लेकिन फिल्म के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर केवल अपने ऊपर आई आपदा को टाल देने का ही संतोष कर रहे होंगे I क्योंकि उनको भविष्य में भी अपना व्यवसाय करना है I सादर अतुल

के द्वारा: atul61 atul61

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मैं लेख में वर्णित आपके विचारों से अधिकांशतः सहमत हूँ आदरणीय सद्गुरु जी । किसी भी फ़िल्म को देखने या न देखने का निर्णय जनता पर ही छोड़ना चाहिए । कुछ पाकिस्तानी कलाकारों के काम करने को आधार बनाकर भारतीय कार्मिकों एवं उद्यमियों के प्रयासों एवं निवेश को क्षति पहुँचाना अनुचित है । शिवसेना एवं मनसे दोनों ने सदा नकारात्मक गतिविधियों को ही प्रोत्साहित किया है, सकारात्मक गतिविधियों को नहीं । उनकी ऊर्जा सदा ध्वंस में ही लगी है, निर्माण में नहीं l हमें वास्तविक देशभक्ति की आवश्यकता है, छद्म देशभक्ति की नहीं । जहाँ तक पाकिस्तानी कलाकारों के भारत पर हुए आतंकी आक्रमणों की निंदा न करने का प्रश्न है, उनकी इस विवशता को समझा जाना चाहिए कि अंततः उन्हें पाकिस्तान ही वापस जाना है जहाँ भारत-विरोधियों का राज चलता है । ऐसे में यदि वे यहाँ हमारी पसंद का कोई संवेदनशील वक्तव्य दे देंगे तो अपने घर लौटने के उपरांत उनका पाकिस्तान में जीना कठिन हो जाएगा और तब उन्हें अपने लिए यह गीत गाना पड़ेगा : 'ऐ दिल, है मुश्किल जीना यहाँ . . .।'

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

प्रधानमन्त्री मोदी सारी दुनिया को शायद यह संदेश देना चाहते हैं कि अब भारत ने भी अपनी सुरक्षा हेतु इसराइल वाली आक्रामक नीतियाँ अपना ली हैं ! अब भारत पहले की तरह दब्बू और सहनशील देश नही है ! बीजेपी और आरएसएस दोनो ही बहुत पहले से ही इसराइल की न सिर्फ तारीफ करते रहे हैं, बल्कि इसराइल से अच्छे संबंध बनाने की वकालत भी करते रहे हैं ! पिछले दस-पंद्रह साल से इसराइल से जारी लुके-छिपे राजनीतिक सम्बन्धों को जगजाहिर करते हुए भारत अब खुलकर उसके साथ दोस्ती का हाथ बढाना चाहता है ! हमारी विदेश नीति में ये एक बहुत अच्छा और बहुत बड़ा बदलाव है, जिसके लिये मोदी सरकार की जितनी भी तारीफ की जाये, वो कम है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

पाक प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए पाकिस्तान पूरी तरह प्रतिबद्ध है ! भारत ब्रिक्स और बिम्सटेक के सदस्यों को गुमराह कर रहा है ! उन्होने कहा कि पाकिस्तान ब्रिक्स और बिम्सटेक सदस्यों के आतंकवाद को खत्म करने के आह्वान का समर्थन करता है ! उन्होने कहा कि कश्मीर में आजादी के लिए आंदोलन कर रहे लोगों को आतंकवादियों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता ! आतंकवाद को लेकर यही पाकिस्तान की दोमुँही और धोखा देने वाली नीति है ! वो अपने यहाँ डेरा जमाये लाखों आतंकियों को कश्मीर की आजादी के लडाके और हिन्दुस्तानी गोली खा के मरने वाले उन आतंकियों को शहीद कहता है ! हिन्दुस्तानी हुक्मरानों ने मानवता के नाते और इलाकाई शान्ति स्थापित करने के मकसद से जब भी पाकिस्तान से अच्छे सम्बन्ध बनाने की कोशिश की, उसने धोखा दिया ! अब ये तय हो चुका है कि पाकिस्तान बातों से कभी सुधरने वाला नही है ! उसे तो सर्जिकल स्ट्राइक और भारी तबाही वाले युद्ध की भाषा ही समझ मे आती है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji